शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2009

गाय को पहली रोटी खिलाने का रहस्‍य पता है आपको ??

मैं रसोई में साफ सफाई का कुछ अधिक ही ध्‍यान रखती हूं। धोए हुए बर्तन का प्रयोग करते वक्‍त भी उसे फिर से धोना मेरी आदत में शुमार है । वास्‍तव में परिवार के सभी जनों के अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मैं ऐसा किया करती हूं। प्रयोग करते वक्‍त कुछ बरतन गीले हों तो कुछ दिक्‍कत आती है , उसे मैं धोकर सूखने छोड दिया करती हूं। रोटी बेलने के लिए चकले और बेलन को थोडी देर पहले धोकर सूखने को रख देती हूं , ताकि रोटी बनाते समय वह सूखा मिले।


कुछ दिन पहले गांव से एक दूर के रिश्‍तेदार अपनी पत्‍नी को डाक्‍टर को दिखाने मेरे यहां पहुंचे। तबियत खराब होने और हमारे मना करने के बावजूद उनकी पत्‍नी रसोई में काम करने को पहुंच जाती। उसके काम करने का तरीका मुझे हायजनिक नहीं लगता , इसलिए उसे मना करती। पर उसको बुरा न लगे , यह सोंचकर एक दो कामों में मैं उसे शामिल कर ले रही थी। पर मेरा पूरा ध्‍यान उसके काम करने के तरीके पर ही रहता था।

एक दिन शाम को मैं थोडी देर के लिए बाहर गयी तो उसने आटा गूंधकर फुल्‍के बनानी शुरू कर दी। मैंने आकर देखा तो परेशान। धोकर और पलटकर रखे हुए बर्तन में आटा गूंधा जाना मुझे उतना परेशान नहीं कर रहा था , जितना उस बिना धोए हुए चकले और बेलन में उसे बेला जाना। अब उन फुल्‍कों को न तो फेका ही जा सकता था और न परोसा । पर शीघ्र ही मेरे दिमाग में एक विचार आया , चकले और बेलन की गंदगी तो एक या दो रोटी में ही बेलकर निकल गए होंगे। उसके बाद की रोटियां तो अवश्‍य कीटाणुओं से सुरक्षित होंगी , फिर क्‍यूं न पहले बनी दो रोटियों को फेक दिया जाए।

मैं सोंच ही रही थी कि किस बहाने से पहली दो रोटियों को मांगकर फेका जाए , तभी उसने नीचे से दो रोटियां निकालकर दी और कहा कि ये पहली रोटियां है और उसने इसे गाय के लिए रखा है। मेरी समस्‍या समाप्‍त हो गयी । मैने उन दोनो रोटियों को लिया और गाय को खिलाने चली गयी। इतने दिनों से गाय को पहली रोटी खिलाने का रहस्‍य मेरे सामने उस दिन उजागर हुआ।


21 टिप्‍पणियां:

Vivek Rastogi ने कहा…

आज हमें भी पता चल गया कि ये एक वैज्ञानिक तथ्य है, कोई रीति रिवाज वाला रहस्य नहीं है। धन्यवाद।

गिरिजेश राव ने कहा…

अग्नि सब दोष भस्म कर देती है। तवा गरम होने तक कुछ रह जाता होगा इसलिए यह व्यवस्था है।
मेरी माँ पहली और अंतिम रोटी किसी को खाने को नहीं देती थी। अब गैस आ जाने के बाद उन्हों ने उसका पालन करना बन्द कर दिया है - सीधे आँच पर जो फुलकी फुलाई जाती है।
..नमो अग्नि:

Einstein ने कहा…

इस बात को ९८ % लोग स्वीकार करेंगे...बहुत ही बेहतरीन तर्क आप ढूंढ निकाली...अब सभी मानेगें...

जी.के. अवधिया ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने। हमारी परम्पराओं के पीछे बहुत सी अच्छी बातें छुपी हुई हैं।

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

एक दिन ॠतुम्‍भरा जी प्रवचन दे रही थी, मैं भी उनके सामने ही बैठी थी। वे बोली कि हमारे यहाँ पहली रोटी गाय को देने का रिवाज था लेकिन अब नहीं है। अब पहली रोटी पति को खिलायी जाती है और बेचारा पति गाय जैसा हो गया है। मुझसे नहीं रहा गया, मैंने कहा कि यह रहस्‍य आप पहले ही बता देती तो हम भी हमारे पति को गाय जैसा बना लेते, हम इतने दिनों तक गाय को ही रोटी देते रहे। खैर यह मजाक की बात है, आपकी जानकारी विज्ञान सम्‍मत है। बधाई।

Mithilesh dubey ने कहा…

अच्छी जानकारी देने के लिए आभार।

mehek ने कहा…

bahut hi achhi jankari rahi.

lalit sharma ने कहा…

सन्गीता जी हमारे यहा आज भी पहली रोटी गाय को ही देते है और आख़री रोटी कुत्ते को,ये परम्परा मैने होश सम्भाला तब से देख रहा हु,शहरो मे गाय और कुत्ता ढुढना मुस्किल है इसलिए जिसके घर मे ये प्राणी नही है,वहा ये परम्परा अवश्य ही लुप्त होते जा रही है, अच्छी जानकारी के लिये धन्यवाद,

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी हमारे बुजुर्गो ने जो भी ्रीति रिवाज बानये है, बहुत सोच समझ कर बनाये है,उन मे की बिग्याणिक तथ्य छुपे है,ओर हम उन्हे समझने की जगह उन्हे अंधविशवास के रुप मे लेते है.
धन्यवाद

Pankaj Mishra ने कहा…

माफ़ करिएगा मेरे यहा गाय को रोटी दिया जाता है पर इस नाते नाहे कि पहली है तो कीटाणु होगे और आपको भी ऐसी मान्यता नहीं रखनी चाहिए आग्नी का स्पर्श होने के बाद कोई कीटाणु बचे नहीं रहते ये तो हमारी श्रद्धा है कि पहला अन्न अपने गाय माता को खिलाते है

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

सही रही यह जानकारी तो .पहली रोटी गाय की रखते हैं पर गाय आज कल दिखायी नहीं देती इस लिए वह पक्षियों को दाल देते हैं ..पुराने रिवाज़ कोई न कोई कारण से बने हैं ...

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

बढ़िया और रोचक जानकारी..
मैं भी आज ही अवगत हुआ हूँ इतनी सुंदर जानकारी से
धन्यवाद

Anil Pusadkar ने कहा…

आज भी आई यानी माताजी पहली रोटी गाय के लिये ही रखती है,अच्छी जानकारी दी आपने।

Rakesh Singh - राकेश सिंह ने कहा…

वाह ... बढिया कानकारी दी है .... हमें तो पता ही नहीं था |

धन्यवाद

kshama ने कहा…

Aaoko kistarah tippanee dun,ye mujhe kabhee samajhme nahee aya...lekin aapki tippaniyon ke liye tahe dilse shukriya!

Bade sahaj bhav se aapne likha hai...waise ek sawal manme aaya...poochun ya nahee is dharam sankat me hun...gar hame apne samne us samay bail ya bhains dikhe to kya unhen dena galat hoga?

Rakesh Singh - राकेश सिंह ने कहा…

वैसे Pankaj Mishra जी की बात ज्यादा तर्कसंगत लगती है |

vinay ने कहा…

बहुत अच्छा लगा आप का यह विचार,आखिर समझ आ गया गाये को पहली रोटी खिलाना ।

प्रवीण शाह ने कहा…

.
.
.
संगीता जी,

पंकज मिश्र जी ने लिखा:-
"माफ़ करिएगा मेरे यहा गाय को रोटी दिया जाता है पर इस नाते नाहे कि पहली है तो कीटाणु होगे और आपको भी ऐसी मान्यता नहीं रखनी चाहिए आग्नी का स्पर्श होने के बाद कोई कीटाणु बचे नहीं रहते ये तो हमारी श्रद्धा है कि पहला अन्न अपने गाय माता को खिलाते है।"

सत्य भी यही है...कारण धार्मिक हैं...

वैज्ञानिक दॄष्टि से देखें तो भारतीय तरीके से रोटी बनाते समय तापमान होता है १३० डिग्री सेन्टी ग्रेड से ज्यादा, मानव में बीमारी करने वाले जीवाणु व विषाणु ६५ डिग्री सेन्टी ग्रेड से अधिक तापमान पर जीवित नहीं रह पाते हैं।

क्षमा जी कहती हैं:-

"waise ek sawal manme aaya...poochun ya nahee is dharam sankat me hun...gar hame apne samne us samay bail ya bhains dikhe to kya unhen dena galat hoga?"

सवाल वाजिब है, गाय ही क्यों ? भैंस, कुत्ता, बकरी, घोड़ा, ऊंट, कौआ आदि क्यों नहीं...

उत्तर फिर वही, कारण धार्मिक हैं...

महफूज़ अली ने कहा…

waise kaha jata hai ki gaay, kutte, kawwon aur parindon ko roti khilana chahiye........ apke bigde kaam ban jaate hain.... aur aapke upar se musibat tal jaati hai.... aur koi kaam apka rukta nahin hai.....

aisa kaha jata hai......... par yeh proved hai......... aur main aisa karta hoon..... main jab bhi ghar se nikalta hoon to bachi hui rotian leke nikalata hoon..... raste mein agar koi gaay dikhai deti hai to khila deta hoon..... aur mere paas 4 kutte hain..... jo mere bete jaise hain..... yaqeen kariye.... unke rehte mera koi kaam nahih rukta hai..... mera ek kaale rang ka kutta hai....JANGO naam hai uska.... ORKUT mein uski foto dekhiyega..... wo mujhe bata deta hai ki aaj ghar se baahar mat nikalna..... aur main agar nikal jaata hoon....to kuch na kuch galat zaroor hota hai.... isliye main uski baat maanta hoon..... yaqeen kariye mera wo mera kaala kutta mujhe sab bata deta hai...... isliye mera atoot vishwaas hai gaay, kutton aur parindon ko roti khilaane mein.....

abhut achcha laga aapka yeh lekh

वाणी गीत ने कहा…

धार्मिक कार्यों के पीछे वैज्ञानिक आधार की पुष्टि करती इस प्रविष्टि के लिए बहुत आभार ...!!

अल्पना वर्मा ने कहा…

यह तो बड़ी अच्छी बात बताई...शायद शुरू से ही यही कारण रहा हो गाय के लिए पहली रोटी निकलने का.