8 दिसम्बर 2009

14-15 दिसम्‍बर 2009 का मौसम बडा ही मुसीबत भरा होगा !!

13 टिप्पणियाँ
दो दिनों की गडबडी के बाद आखिरकार आज मुझे अपने कंप्‍यूटर को फॉरमैट कराना पडा और इसके साथ ही 2012 के दिसम्‍बर के लेख की अगली कडी भी अपने वर्ड फाइल में गुम ही रह गयी, क्‍यूंकि उसकी रिकवरी न हो सकी। आपलोगों को सस्पेन्स पर लाकर खड़ा करने का मेरा कोई इरादा नहीं था । इस लेख की लंबाई को देखते हुए मैने इसके दो पार्ट कर दिए थे , दूसरे पार्ट को मैं बाद  में पोस्‍ट करनेवाली थी , पर अब अगली कड़ी को फिर से तैयार करने में एक दो दिन और अधिक लग सकते हैं। तो इसके लिए अभी इंतजार करें और इस आलेख को पढकर एक दूसरी जानकारी प्राप्‍त करें।

पिछले वर्ष 16 दिसम्‍बर को एक आलेख मेंमैने  भारत के मौसम के बारे में भविष्‍यवाणी की थी ... 2 और 3 जनवरी 2009 को पुन: विभिन्‍न ग्रहों की जो स्थितियां बन रही हैं , वह मौसम को बहुत ही बडे रूप में प्रभावित करेगी , इस योग का प्रभाव इसके दो चार दिनों से एक सप्‍ताह पूर्व से ही शुरू होते देखा जा सकता है। इस योग के कारण निम्‍न बातें देखने को मिल सकती है.....


1. सारा आसमान बादलों से भरा रहेगा।


2. जगह जगह पर कुहरा बनना आरंभ होगा।


3. समुद्री भागों में तूफान आने की संभावना बनेगी।


4. पहाडी क्षेत्रों में बर्फ गिरने से मुश्किलें बढेंगी।


5. मैदानी भागों में तेज हवाएं चलेंगी।


6. बहुत सारे जगहों पर बेमौसम बरसात होने से ठंड का बढना स्‍वाभाविक होगा।


7. यह ठंड बढती हुई 21 जनवरी तक लोगों का जीना मुश्किल करेगी।


8. संभवत: इसी समय के आसपास पारा अपने न्‍यूनतम स्‍तर को स्‍पर्श करेगा।

सभी पाठकों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इस समय के मौसम पर गौर करें और ज्‍योतिष को विज्ञान समझने की कोशिश करें। आशा है , आप सबों का सहयोग मुझे अवश्‍य मिलेगा और मुझे लोगों के मन से यह भ्रम हटाने में सफलता मिलेगी कि ज्‍योतिष विज्ञान नहीं है।
 
और सचमुच खास दो तीन जनवरी 2009 को ही पूरे भारतवर्ष के मैदानी भागों मे कुहरा इतना बढ गया था कि रेलवे को कई ट्रेने कैंसिल करनी पडी , तो कई ट्रेने दस दस, बारह बारह घंटे लेट चली । उस समय कई उडान तक कैंसिल हो गए थे। बादल, बर्फ और बेमौसम बरसात की स्थिति भी यत्र तत्र थी ही , पारा काफी गिर जाने से ठंड अपनी चरम सीमा पर था। अभी इस बात की चर्चा करने का मुख्‍य उद्देश्‍य यह है कि इस वर्ष 14 , 15 दिसम्‍बर 2009 को ऐसा ही योग बन रहा है , इसलिए पुन: ऐसी स्थिति के उपस्थित होने की संभावना बन रही है। इसलिए इस समय भी मौसम से संबंधित उपरोक्‍त प्राकृतिक वातावरण बन सकता है , जिसके कारण कडाके की ठंड पड सकती है। आप सब अभी से  ही इसके लिए तैयार रहें।

13 Responses so far.

  1. देखते हैं संगीता जी
    शायद आपकी जानकारी से मौसम विभाग को भी कुछ फायदा हो जाये। :)

    वैसे 5-6-7 को तो प्रतिदिन जैसे ही व्यतीत हुये। मंगल-चन्द्र की युति का मुझपर तो कोई प्रभाव दिखायी नही पडा। (आप बुरा मत मानियेगा)

    प्रणाम स्वीकार करें

  2. संगीता जी,
    क्षमा चाहता हूँ, हलके-फुल्के मजाक के मूड में हूँ, और कहना यह चाहता हूँ कि २१ दिसंबर २०१२ अभी बहुत दूर है :) इसलिए आप अपना पूरा समय लीजिये और लेख की दूसरी कड़ी को आराम से पोस्ट कीजिएगा !

  3. चलिए देखते हैं

  4. विश्लेषण और जानकारी के लिए धन्यवाद।

  5. अंतर सोहिल जी,
    इसमें बुरा मानने की क्‍या बात .. आपकी तरह ही इतनी गंभीरता से मुझे लोग अपने अनुभव से हमें अवगत कराएं .. तो 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' बहुत तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ सकता है !!

  6. संगीता जी, ये आठ बातें जो आप ने बताई हैं वे सब इसी अवधि में हमेशा होती आई हैं। यह तो एक साधारण किसान भी जानता है।

  7. दिनेश राय द्विवेदी जी,
    मैने पिछली बार भी खास डेट दिया था .. और इस बार भी डेट दिया है .. इसे टेस्‍ट करने के बाद कहें !!

  8. संगीता जी,क्षमा करें। दिल्ली में 11 कोटा में 13 मुंब्ई में 14 दिसम्बर से बादल होने की संभावना व्यक्त की गई है और बंगलौर में 14 दिसम्बर को बरसात की संभावना व्यक्त किए एक सप्ताह हो चुका है। ठंड तो बढ़ेगी ही। कोहरे से ट्रेनें भी लेट होंगी। इस मौसम में यह सब सामान्य बात है कोई विशिष्ठ बात नहीं है। फिर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यही तिथियाँ आ रही हैं। आप दो माह बाद की स्थितियो की तिथियों सहित घोषणा करें। फिर तो कुछ जाँच भी की जाए।

  9. द्विवेदी जी , इस लिंकको आप देख लें .. प्रवीण जाखड जी को जबाब देने के क्रम में मैने ढाई महीने पहले इस तिथि की मौसम की भविष्‍यवाणी की थी।
    संगीता पुरी

  10. देखते हैं जी !
    5 ही दिन तो शेष बचे हैं।।

  11. अरे वाह , अब तो 14 15 तारीख का इंतजार है .

  12. vinay says:

    संगीता जी आप की भविष्यवाणिया सदा सटीक बैठती है,आपकी ही बात दोहराता हूँ,पुर्बाआग्रह से ग्रसित होने के कारण,ज्योतिष पर कितनी भी रिसर्च हो जाये और वेगानिक प्रमाण मिल जाये,जो लोग इसको विज्ञान नहीं मानते वोह इसको विज्ञान नहीं,मानेगें,में तो वोह विवादित प्रमाण दे कर अपने हाथ जला बैठा हूँ,जो कोई भी देख सकता है ।

 
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