आश्‍चर्यजनक है न .... एक हिन्‍दी पोस्‍ट पर 173 टिप्‍पणियां !!!!!!!!!


क्‍या आप विश्‍वास कर सकते हैं कि एक हिन्‍दी पोस्‍ट पर 173 टिप्‍पणियां आ सकती हैं । वैसे तो विश्‍वास ही नहीं होगा , यदि कर भी लें तो आप सभी यही सोचेंगे कि जरूर वह पोस्‍ट किसी स्‍टार या बहुत विशिष्‍ट ब्‍लागर द्वारा ही लिखी गयी होगी । इधर उधर के कुछ पोस्‍टों को देखते वक्‍त अचानक यह पोस्‍ट मुझे कल शाम देखने को मिली और जब इसकी टिप्‍पणी पर नजर पडी तो आंखे फटी की फटी रह गयी । वैसे ब्‍लागर तो विशिष्‍ट नहीं , पर ब्‍लाग का विषय अवश्‍य विशिष्‍ट है । महत्‍व के ख्‍याल से न भी हो , उत्‍सुकता के ख्‍याल से इस विषय को तो विशिष्‍ट की श्रेणी मिल जाती है। अब आप भी इस पोस्‍ट पर नजर डाल ही लें। 

अचानक कल शाम को इस पोस्‍ट की इतनी टिप्‍पणियों पर मेरा ध्‍यान गया। रातभर गहन चिंतन के बाद भी मैं किसी एक पोस्‍ट पर अन्‍य पोस्‍टों की तुलना में इतने कमेंट्स आने का कोई कारण नहीं समझ सकी थी । पर सुबह होते ही काजल कुमार जी ने अपनी पोस्‍ट के द्वारा मुझे इसका कारण समझा दिया । इस पोस्‍ट और मेरे पोस्‍ट की टिप्‍प्‍णियों के आंकडे की समानता ने मुझे और अधिक अचरज में डाल दिया ,क्‍यूंकि मुझे नहीं लगता कि काजल कुमार जी ने मेरी उस पोस्‍ट को विजिट किया होगा। वैसे आज ही तस्‍लीम की ओर से दो टिप्‍पणियां आ जाने से यह आंकडा बढकर 175 हो गया है । मुझे तो बिल्‍कुल भी याद नहीं कि मैने उस पहलवान को कब भविष्‍यवाणी दी थी , पर शायद चुपके चुपके काजल जी ने न सिर्फ सुन ही लिया था , वरन् पहलवान द्वारा मुझे दौडाए जाते भी देख लिया था । मुझे तो आज मालूम हुआ कि मैं जो भविष्‍यवाणियां दूसरों के लिए करूंगी , वे मुझतक पहुंच जाएंगी। यदि इस बात की पहले से जानकारी होती तो दूसरों के लिए इतनी अच्‍छी अच्‍छी भविष्‍यवाणियां करती कि पूछिए मत। सब भविष्‍यवाणियां मेरे लिए सही होती और आज मै हर सुख सुविधा से लैस होत

उपरोक्‍त पोस्‍ट के बहुत दिन हो गए। मेरा वह पोस्‍ट अंधविश्‍वास को बढावा देनेवाला नहीं , उसमें साफ तौर पर जन्‍मकुंडली से अधिक महत्‍व कर्मकुंडली को दिया गया है। फिर भी प्रतिदिन उस पोस्‍ट पर अपने भविष्‍य को पूछते हुए पाठकों की दो चार टिप्‍पणियां दर्ज हो जाया करती हैं। इतने सारे पाठक अपने भविष्‍य को जानने के उत्‍सुक रहते हैं , पर दुख की बात है कि मैं मुश्किल से कुछ पाठकों को ही जवाब दे पाती हूं । लोगों का मानना है कि ज्‍योतिष जैसे विष्‍ाय पर या ग्रह नक्षत्रों पर विश्‍वास करनेवाले आलसी , निकम्‍मे और निठल्‍ले हुआ करते हैं। पर मैं नहीं मानती , मैं मानती हूं कि एक जिम्‍मेदार व्‍यक्ति को ही भविष्‍य की चिंता होती है। हमारी कामवाली का युवा बेटा अपनी मां से जिद करके मोबाइल खरीदवाता है , अपने पिता के द्वारा खरीदे गए सेकंड हैंड मोटरसाइकिल पर बैठकर घूमता फिरता है। उसे भविष्‍य की कोई चिंता नहीं , क्‍यूंकि न सिर्फ तीन वक्‍त का खाना ही , वरन् भविष्‍य की छोटी मोटी हर जरूरत को वह दस बारह घरों में चौका बरतन करनेवाली अपनी मां या बीबी को दो तमाचे जडकर पूरा कर सकता है।

सफलता के लिहाज से इस दुनिया के लोगों को कई भागों में विभक्‍त किया जा सकता है। कुछ वैसे हैं , जिन्‍हें अपने जीवन में माहौल भी अच्‍छा नहीं मिला , वे काम भी नहीं करते या करना चाहते , इस‍िलए उन्‍हें भविष्‍य की कोई चिंता नहीं होती , वे अपने इर्द गिर्द के माहौल के अनुसार अपने और अपने परिवार के भविष्‍य को एक सीमा के अंदर ही देख पाने से निश्चिंत रहते हैं। दूसरे वैसे , जिन्‍हे अपने जीवन में माहौल भी मिला , काम भी कर पा रहे हैं और उसके अनुसार सफलता के पथ पर अग्रसर भी हैं , जीवन में भाग्‍य की किसी भूमिका को वे भी स्‍वीकार नहीं कर पाते , उन्‍हें अपना और अपने परिवार का भविष्‍य बहुत ही उज्‍जवल नजर आता है। पर तीसरे वैसे लोग हैं , जो महत्‍वाकांक्षी बने होने और अपने साधन और मेहनत का भरपूर उपयोग करने के बावजूद भी कई कई वर्षों से असफल हैं ,चाहे समस्‍या कोई एक ही क्‍यूं न हो उसके समाधान का कोई रास्‍ता उन्‍हें नजर नहीं आता । वैसी स्थिति में किसी अज्ञात शक्ति की ओर उनका रूझान स्‍वाभाविक है और ऐसे लोगों को परामर्श देना हमारा पहला कर्तब्‍य है। पर मेरे पास जितना समय होता है , उससे कहीं अधिक लोग अपने बारे में जानने को उत्‍सुक हैं , इसलिए जवाब दे पाने में दिक्‍कत होती आयी है। प्रकृति के किसी नियम को बदल पाना तो मेरे लिए संभव नहीं , पर उसकी जानकारी से पाठकों को कुछ सलाह तो दी ही जा सकती है। इस मामले पर थोडी भी गंभीर रहूं , तो चाहे कितनी भी व्‍यस्‍तता रहे , पाठकों को जवाब तो दी ही जा सकती है , दो तीन जन्‍मकुंडली का भी अध्‍ययन कर प्रतिदिन उतने पाठकों को भी जवाब दे दिया करूं तो कुछ बात तो बन ही जाएगी । तो फिर आज से शुरू कर ही देती हूं , देर किस बात की ?

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22 comments

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7/31/2009 06:59:00 pm ×

जमी रहिये आप -आप हैं तभी हम भी हैं !

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mehek
admin
7/31/2009 07:11:00 pm ×

badhai ho,achhe kaam ki sarahana hamesha hoti hai.

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7/31/2009 07:41:00 pm ×

जहाँ चाह है वहां राह है .
टिप्पणियों की संख्या के बजाय उनकी विषय वस्तु ज्यादा महत्वपूर्ण है

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Gyan Darpan
admin
7/31/2009 07:44:00 pm ×

अभी तक वहां टिप्पणियाँ बढ़ ही रही है | मुबारक हो |

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7/31/2009 08:05:00 pm ×

मुबारक हो आपको

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7/31/2009 09:38:00 pm ×

aashcharyajanak kintu satya , aapko badhaai.

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7/31/2009 09:45:00 pm ×

बहुत बहुत बधाई।

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7/31/2009 10:19:00 pm ×

यह तो बहुत ख़ास बात है,बधाई.

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7/31/2009 11:12:00 pm ×

संगीता जी यह कदापि मत कीजियेगा इससे आपका अध्ययन बाधित होगा और कार्य क्षेत्र भी सीमित हो जायेगा . पाठको द्वारा यह सब पूछा जाना केवल भरमाने के लिये है . आपका शुभाकान्क्षी शरद

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7/31/2009 11:57:00 pm ×

बहुत बहुत बधाई :)

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8/01/2009 12:25:00 am ×

आपको ढेर सारी शुभकामनायें.

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8/01/2009 06:02:00 am ×

बहुत बहुत बधाई ..!!

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8/01/2009 07:41:00 am ×

बहुत बहुत बधाई !

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8/01/2009 02:09:00 pm ×

bahबुत बहुत बधाई एक बार फिर आपकी कर्मनिष्ठा को सलाम

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सदा
admin
8/01/2009 03:05:00 pm ×

बहुत-बहुत बधाई ।

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8/01/2009 03:24:00 pm ×

इतनी टिप्पणियां तो आपको भी ब्लॉग जगत के Stars की गिनती में ला खडा करती हैं.पाठकों की जिज्ञासा का समाधान करने का आपका निर्णय उचित है ,बस ध्यान रखें की गंभीर सवालों पर ही समय दें ,यूँ ही समय nasht करने वालों पर नहीं.शुभकामनाएं.

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8/01/2009 05:48:00 pm ×

बधाई हो १७३ टिप्पडियो के लिये ।

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Unknown
admin
8/01/2009 05:52:00 pm ×

खुदी को कर बुलन्द इतना की खुदा बन्दे खुद पुछे बता तेरी रजा क्या है ।
मुबारक हो १७५ टिप्पणियाँ ।

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Unknown
admin
8/01/2009 06:19:00 pm ×

acchey kam ke liye meri shubhkamnaey.

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8/02/2009 12:02:00 am ×

कभी कोई कोई कहता है चटका लगा दें...टिप्पणिया दें...और जब पेट भर/ गर्दन तक होता है तो आश्चर्य? बधाई..

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8/02/2009 01:07:00 pm ×

बहुत बहुत बधाई हो आपको...

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hem pandey
admin
8/02/2009 06:20:00 pm ×

टिप्पणियों की संख्यात्मकता से अधिक महत्त्व गुणात्मकता का है. और ब्लोगर्स की टिप्पणियों से अधिक महत्त्व नॉन ब्लोगर्स की टिप्पणियों का है. ब्लॉग के माध्यम से ज्योतिष के प्रचार हेतु मैं आपकी प्रशंसा करता हूँ.

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