तय किए गए समय सीमा के अंदर प्रवीण जाखड जी के प्रश्‍नों के जबाब तैयार हैं !!

प्रवीण जाखड जी , मैं तो आपके सभी प्रश्‍नों को आउट आफ सिलेबस कहकर उससे हार मानकर दुर्गापूजा मनाने चली गयी थी , क्‍यूंकि आपके सभी प्रश्‍न परंपरागत ज्‍योतिष पर आधारित थे, जबकि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ग्रहों के सांकेतिक प्रभाव की विवेचना करता है और कभी भी इन प्रकार के प्रश्‍नों के जबाब देने का दावा नहीं करता। ग्रहों का प्रभाव मनुष्‍य पर सुखात्‍मक या दुखात्‍मक पडता है और इसमें संख्‍या का कोई महत्‍व नहीं। मैने हर समय माना है कि ग्रहों का प्रभाव हर क्षेत्र में पडता है और इसमें समय के साथ बदलाव और अनुसंधान किए जाने की जरूरतहै।

 पर सांकेतिक भाषा में मेरे हार स्‍वीकार कर लेने से भी आपको संतुष्टि नहीं मिली , मेरे जाने के बाद भी उत्‍तर के लिए 7 अक्‍तूबर 2009 के रात्रि 11 बजकर 11 मिनट तक की समय सीमा बढाते हुए आपने एक पोस्‍ट लिख डाला। बहुत मेहनत कर आपके समय सीमा के एक घंटे पहले यानि मैं 10 बजकर 11 मिनट तक सवालों के आधे अधूरे जबाब पोस्‍ट कर रही हूं, इस आत्‍मविश्‍वास के साथ कि 100 में से 40 अंक तो मिल ही जाएंगे तो आपकी ओर से जीत का एक सर्टिफिकेट मिल जाएगा।

वैसे तो एक ज्‍योतिषी के सामने लोगों के स्‍वभाव को मैने परिवर्तित होते हुए भी देखा है , पर यदि आप सिर्फ मेरे सामने ही नहीं , हर मामले में इतने जिद्दी हैं , तो मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि आपका जन्‍म तब हुआ होगा , जब आसमान में चंद्रमा पूर्णमासी के आसपास का होगा , होली , शरत पूर्णिमा या गुरू पूर्णिमा या किसी और पूर्णिमा  के आसपास। बडे चांद के साथ ही कुछ ग्रहों की खास स्थिति बनने से बननेवाली कुंडली से ही लोग सामनेवालों की कुछ न सुनते हुए अपनी कहते रहते हैं। आपके प्रश्‍नों के जबाब देने के क्रम में सबसे दुखद पहलू यह है कि 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' से संबंधित जिन तथ्‍यों का जिक्र एक अपरिचित व्‍यक्ति से किया जाना चाहिए , वह मुझे एक ब्‍लागर भाई से करना पड रहा है , फिर मेरे  इसपर आधारित 200 के लगभग प्रविष्टियों को लिखने का क्‍या फायदा ??

एक बात और , अपने पोस्‍टों पर यह न लिखा करें कि "मैं ज्‍योतिष की और संगीता पुरी की बहुत इज्‍जत करता हूं" ,या "अब संगीता जी अनुभवी हैं, हमारा मार्गदर्शन करती हैं। मैंने तो बिलकुल घर का समझ कर, उन्हें पूरी तरह बड़ा होने का सम्मान देते हुए सवाल पूछे हैं। " यदि आप सचमुच इज्‍जत करते तो मुझे पढने के बाद मेरे दृष्टिकोण से अवगत होने के बाद ही सवाल करते, साथ ही आपका सवाल मेरी परीक्षा लेने के अंदाज में न होता। यहां तक कि व्‍यंग्‍यात्‍मक लहजे में आप कहते हैं कि मैं अपने गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष का प्रचार प्रसारकर रही हूं। किसी के जन्‍म विवरण मात्र से किसी व्‍यक्ति के पूरे जीवन के उतार चढाव का ग्राफ खींच पाने के फार्मूले की खोज के 20 वर्ष बादतक भी जब आप जैसे खोजी पत्रकार एक शोधकर्ता को ढूंढ न पाएं , तो उसके बाद की पीढी अपने सिद्धांतों के प्रचार के लिए बाजार में बैठने को मजबूर होगी ही।

आपका यह कहना भी बिल्‍कुल गलत है कि "आपके ज्योतिष की तारीफ नहीं की, तो आप इसे मेरी गुस्ताखी क्यों मान रही हैं? क्या मक्खन लगाकर खुश करने से ही सब खुश रहते हैं। मुझे तो मक्खन लगाने की आदत है नहीं।" शायद आप मेरे स्‍वभाव से परिचित नहीं , स्‍वस्‍थ मानसिकता रखकर कही गयी आलोचना का मैं हमेशा स्‍वागत करती हूं , नीरज रोहिल्‍ला जी के पोस्‍ट पर मैने न सिर्फ उनके तर्कों को स्‍वीकार किया है , उस पोस्‍ट का लिंक भी मैने अपने ब्‍लाग के साइड बार में लगाया है । एक बात और , आप बार बार ललकार रहे थे कि मैं ज्‍योतिष को सिद्ध कर दिखाउं , उसी बात पर मैने कहा कि किसी के ललकारने से मैं कुत्‍ते की तरह शिकार नहीं करूंगी , शेर की तरह मेरी अपनी चाल होगी। मैने कुत्‍ते और शेर का प्रयोग खुद के लिए किया था , इस वाक्‍य को अपने पर लगाने की जरूरत नहीं है। आपने जो काम कर दिखाया , वह वाकई शेर ही कर सकते हैं , इसमे दो मत नहीं , अब मेरे जबाब देखें ......

आपका पहला प्रश्‍न ... राहूल गांधी की शादी किस तारीख को होगी ?

मेरा जबाब ... मेरे एक पुराने आलेख में पढिए मैने लिखा है जहॉ तक हमारा विचार है , ज्योतिष शास्त्र में ऐसा कोई भी सिद्धांत विकसित नहीं किया जा सकता है ,जिससे विवाह उम्र की निश्चित जानकारी प्राप्त हो सके । इसका कारण यह है कि विवाह उम्र के निर्धारण में परिवार ,समाज ,युग ,वातावरण और परिस्थितियों की भूमिका ग्रह-नक्षत्र से अधिक महत्वपूर्ण होती है। प्राचीनकाल में भी वही 12 राशियां होती थीं ,वही नवग्रह हुआ करते थें, दशाकाल का गणित वही था ,उसी के अनुसार जन्मपत्र बनते थे । उस समय विवाह की उम्र 5 वर्ष से भी कम होती थी , फिर क्रमश: बढ़ती हुई 10.15.20.25.से 30 वर्ष तक हो गयी है । अभी भी अनेक जन-जातियों में बाल-विवाह की प्रथा है। क्या उस समाज में विशेष राशियों और नक्षत्रों के आधार पर जन्मपत्र बनते हैं ? यदि नही तो यह अंतर क्यों ? इसलिए हमारी धारणा है कि किसी व्यक्ति के जन्म के समय ही उसके विवाह वर्ष को नहीं बतलाया जा सकता।

पर जन्‍मकुंडली से किसी के दाम्‍पत्‍य जीवन के सुखी या दुखी होने की पुष्टि की जा सकती है , पर यह नितांत व्‍यक्तिगत प्रश्‍न है और मैं इसे सार्वजनिक नहीं कर सकती। इसके अलावे आसमान में ग्रहों की खास स्थिति से विभिन्‍न लोगों के लिए भिन्‍न भिन्‍न समय में विवाह के योग बना करते हैं और परिवार ,समाज ,युग ,वातावरण और परिस्थितियों के अनुसार उनमें से ही कोई योग किसी का विवाह करा सकता है। यदि राहूल गांधी का जन्‍म 19-06-1970 को मिथुन लग्‍न में हुआ हो(जो डाटा मेरे पास उपलब्‍ध है) तो ग्रहस्थिति के हिसाब से उसके लिए विवाह का एक बडा योग मार्च 2010 से मार्च 2011 के मध्‍य, खासकर 22 जून से 24 जुलाई 2010और 14 नवम्‍बर से 18 दिसम्‍बर 2010के मध्‍य , उससे भी अधिक सूक्ष्‍म देखा जाए तो 26-27-28 जून , 3-4-5 जुलाई , 22-23-24 जुलाई,  9-10-11 नवम्‍बर,14-15-16 नवम्‍बर, 6-7-8 दिसम्‍बर, 14-15-16 दिसम्‍बर या इसी के 28-28 दिन पहले या बाद मेंआनेवाला कोई दिन या अधिक मेहनत कर इसमें से भी एक निकाला जा सकता है , पर इतनी मेहनत क्‍यूं करूं , कहीं जन्‍म विवरण ही गलत हो तो मेरी मेहनत तो बर्वाद ही होगी न , और जन्‍मविवरण सही हुई तो उपर्युक्‍त तिथियों में से कोई तिथि अवश्‍य सही होगी !!

आपका दूसरा प्रश्‍न ... गुरुवार 31 दिसंबर, 2009 को सेंसेक्स किस पॉइंट पर बंद होगा (25 पॉइंट की छूट ले सकती हैं)?

मेरा जबाब .. नवम्‍बर 2008 के पहले सप्‍ताह से ही मैं नियमित तौर परशेयर बाजार की साप्‍ताहिक भविष्‍यवाणी कर रही हूं। यदि आपको शेयर बाजार में ग्रहों के प्रभाव को सही और गलत सिद्ध करने का जरा भी शौक है तो सारे लिंक्स उसमें उपलब्‍ध हैं , उसमें रिसर्च करके देख लें , एक एक तिथि की भविष्‍यवाणी मैने की है। पहले सप्‍ताहही ,जबकि शेयर बाजार 24 अक्‍टूबर 2008 को बिल्‍कुल टूट चुका था और लोकसभा चुनाव के पूर्व कोई भी विशेषज्ञ इसके आगे बढने की उम्‍मीद नहीं कर रहे थे , मैने 4 नवम्‍बर 2008 को लिखा था .... ग्रहों के पृथ्‍वी के जड़ चेतन पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने की एकमात्र विधा ज्‍योतिष ही है और इसे सही ढंग से विकसित कर पाने की दिशा में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान संस्‍थान' बोकारो द्वारा 20वीं सदी के अंतिम 40 वर्षों में बहुत बडा़ रिसर्च हुआ। ग्रहों की वास्‍तविक शक्तियों की खोज कर ज्‍योतिष को विज्ञान बना पाने सफलता मिलने से भविष्‍य को देख पाने के लिए एक तरह की रोशनी मिली, जो काफी हद तक स्‍पष्‍ट तो नहीं कही जा सकती, पर हमारे सामने भविष्‍य का एक धुंधला सा चित्र अवश्‍य खींच देती है। इसी के आधार पर 2008 के जनवरी से ही मै शेयर से संबंधित भविष्‍यवाणी करती आ रही हूं। 24 अक्‍टूबर का दिन शेयर बाजार के सर्वाधिक बुरे दिनों में से एक था । आनेवाले दो महीने में शेयर बाजार का जो भी धुंधला सा चित्र हमें दिखाई पड़ रहा है , उसमें कहीं भी बडी़ गिरावट या बहुत बडे़ उछाल की संभावना हमें नहीं दिखाई पड़ रही है। इन दो महीने के शेयर बाजार के ग्राफ को मोटा मोटी तौर पर देखा जाए, तो छोटे उतार और बडे़ चढा़व को दिखाते हुए सेंसेक्‍स और निफटी की स्थिति 20 दिसंबर तक बढ़त का ही क्रम बनाए दिखाई दे रहे हैं। इसलिए निवेशकों को अभी धैर्य बनाए रखने की आवश्‍यकता है।

ठीक 20 दिसम्‍बर 2008 तक बाजार में बढत दिखाई पडी थी और उसके बाद कमजोर होना आरंभ हुआ था। आज फिर उसी भाषा में कह रही हूं कि 9 अक्‍तूबर 2009 तक बाजार के टूटने के बाद आनेवाले दो महीने में शेयर बाजार का जो भी धुंधला सा चित्र हमें दिखाई पड़ रहा है , उसमें कहीं भी बडी़ गिरावट या बहुत बडे़ उछाल की संभावना हमें नहीं दिखाई पड़ रही है। इन दो महीने के शेयर बाजार के ग्राफ को मोटा मोटी तौर पर देखा जाए, तो छोटे उतार और बडे़ चढा़व को दिखाते हुए सेंसेक्‍स और निफटी की स्थिति 10 दिसंबर 2009 तक बढ़त का ही क्रम बनाए दिखाई दे रहे हैं, पर कितने अंकों की , ऐसा न तो कभी दावा किया था और न करूंगी।

एक बात और बताना चाहूंगी , आपके लेखों के तनाव से ही मैं पिछले दो सप्‍ताह से मोल तोल में शेयर बाजार से संबंधित भविष्‍यवाणी नहीं पा रही हूं , जबकि 28-29-30 सितम्‍बर के ग्रहस्थिति के फलस्‍वरूप पिछले सप्‍ताह सेंसेक्‍स और निफ्टी के बढने की पूरी संभावना थी, जबकि 8-9 अक्‍तूबर के कारण इस सप्‍ताह गिरने की और सचमुच ही ऐसा हुआ , यदि शेयर बाजार पर इस ग्रहस्थिति की शक्ति के प्रभाव पर आपको यकीन न हो , तो आगे की भी ऐसी तिथियां नोट करें। इस वर्ष 26-27 अक्‍तूबर और 23–24 नवम्‍बर का शेयर बाजार देख लें , सेंसेक्‍स और निफ्टी में बढत दिखाई पडती है या नहीं , पर कितने अंकों की , एक बार फिर से कहती हूं कि ऐसा कभी न तो दावा किया था और न करूंगी।

आपका तीसरा प्रश्‍न ... विश्व का अगला बड़ा आतंकी हमला किस देश में, किस दिन होगा ?

मेरा जबाब ... इस विषय में कई बार डाटा इकट्ठा किया , पर सोंचती ही रह गयी , कभी रिसर्च करने का मौका ही नहीं मिला , इसमें रूचि रखने वाले कुछ लोग जुटे हुए हैं , रिसर्च करने पर किसी खास तिथि को पूरे विश्‍व में कहीं भीसे शुरू करते हुए हमलोग लांगिच्‍यूड तक यानि एक रेखा तक पहुंच सकते हैं , पर माफ करें , लैटिच्‍यूड के बारे में जान पाने का अभी तक कोई कंसेप्‍शन ही नहीं हुआ और बिना कंसेप्‍शन के रिसर्च हो तो कैसे ? पर ऐसा तो नहीं होता न कि जो मौत का कुआं का करतब न दिखा पाए , उस सरकस का कोई महत्‍व ही नहीं।

आपका चौथा प्रश्‍न ... सिविल सर्विस बैच - 2009 के टॉपर के नाम का प्रथम अक्षर क्या होगा?

मेरा जबाब .. प्रथम अक्षर की चर्चा पारंपरिक ज्‍योतिष इसलिए करते हैं , क्‍यूंकि वे नक्षत्र को महत्‍व देते हैं , नक्षत्र का प्रथमाक्षर से संबंध होता है। हमलोग आसमान के 30 डिग्री से अधिक के बंटवारे की बात ही नहीं करते , यानि हमारे अध्‍ययन में नक्षत्र की कोई चर्चा नहीं , इसलिए प्रथमाक्षर का हमारे लिए कोई महत्‍व नहीं। अभी चुनाव के पूर्व किया गया मेरा विश्‍लेषणदेखें , मैने सभी नेताओं की जन्‍म या चंद्रकुंडलियों से चुनाव परिणाम के बारे में विश्‍लेषण किया है। अपनी भविष्‍यवाणियों में कभी भी किसी पार्टी या किसी प्रथमाक्षर की चर्चा नहीं की है। इसलिए किसका भाग्‍य कितना साथ देगा , वह आई ए एस के परीक्षार्थियों की कुंडली देखकर ही बताया जा सकता है। वैसे 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' यह मानता है कि किसी परीक्षा में पास करने के व्‍यक्ति के मानसिक स्‍तर के बाद ही ग्रहों या भाग्‍य का रोल होता  है।

आपका पांचवा प्रश्‍न ... चीन भारत पर अगला हमला किस दिन (कृपया तारीख बतलाएं) करेगा?

मेरा जबाब ... अकेली मैं क्‍या क्‍या करूं , इस बारे में कोई शोध नहीं , अपने ब्‍लोग पर मैने कभी ऐसा कोई दावा नहीं किया। यदि आपको इस विषय पर रूचि हो , तो विदेशी हमले के डाटा और संबंधित दिनों की ग्रहस्थिति का संग्रह करें , मैं उनका विश्‍लेषण करके भारतवर्ष के अगले हमले की तिथि बतला सकती हूं।

आपका छठा प्रश्‍न ... 31 दिसंबर 2009 को दिल्ली का न्यूनतम और अधिकतम तापमान कितना-कितना रहेगा?

मेरा जबाब ... चूंकि पिताजी एक कृषि प्रधान गांव में ही रह गए थे , जन्‍मविवरण के सहारे किसी व्‍यक्ति के व्‍यक्तिगत भविष्‍यवाणी कर पाने के बाद सबसे अधिक मेहनत हमलोगों ने मौसम से संबंधित अध्‍ययन में ही किया है। इस पोस्‍ट में मैने लिखा ही था कि सरकार का अरबों रूपए खर्च करने के बावजूद मौसम विभाग तीन महीने पहले इस प्रकार की कोई भविष्‍यवाणी नहीं कर सकता , पर जहां भविष्‍यवाणी की एक बडी विधा विकसित की जा चुकी है ,उसे बुद्धिजीवी वर्ग अंधविश्‍वास कहकर देश का कितना बडा नुकसान कर रहे हें ,वे नहीं बता सकते। पर यह पूरे देश के अधिकांश भाग को दृष्टि में रखते हुए कहा गया है , किसी एक शहर के बारे में नही। 15 अगस्‍त के बाद देश के अधिकांश भागों में हो रही बारिश को आपने अगस्‍त के महीने यानि बरसात के महीने से जोड लिया , पर यदि ग्रहयोग का महत्‍वनहीं था , तो जुलाई में बारिश न होकर ठीक 15 अगस्‍त के आसपास ही शुरू होने का कोई कारण आप ही बताएं।

अच्‍छा छोडिए इस बात को , मेरा दुर्भाग्‍य कि उस समय अगस्‍त का महीना था , अभी तो अक्‍तूबर है , मेरी यह भविष्‍यवाणी पढें, जिसमें लिखा है कि बारिश के कारण इस वर्ष दीपावली के रंग रोगन में कठिनाई आएगी। ध्‍यान दें , इसमें 8-9 अक्‍तूबर के ग्रहयोग की ही चर्चा की गयी है , आज और अगले दो दिनों तक टी वी खोलकर पूरे देश के अधिकांश भाग के मौसम का हाल ले लें। इतना ही नहीं , 10 अक्‍तूबर से ही क्रमश: मौसम में सुधार होता ही महसूस करेंगे आप। ध्‍यान दें , इस वर्ष 13 से 20 अगस्‍त के देश के कई हिस्‍सों में बाढ के बाद 2 से 9 अक्‍तूबर के मध्‍य ही पुन: बाढ के हालात बने हैं , दोनो तिथियों में मेरे अनुसार बारिश का बडा योग था। इसके अलावे किसी अन्‍य तिथि को मैने बडे स्‍तर पर बारिश होने का दावा नहीं किया।

इसे भी छोड दें , अक्‍तूबर तक भी कभी कभी बारिश होती है , दिसम्‍बर में तो नहीं होती। इस वर्ष 14-15 दिसंबरके ग्रहयोग के कारण भारत के अधिकांश भाग का मौसम खराब रहेगा। इस तिथि के कई दिन पहले से ही यत्र तत्र बादलों, कुहासों, बारिश और बर्फबारी से लोगों के सामने कई प्रकार की मुश्किलें आएगी, जो इस खास तिथि को सर्वाधिक दिखाई पडेगी। दिसम्‍बर में बादलों , कुहासे और बारिश और बर्फबारी सामान्‍य बात हो सकती है , पर किसी खास तिथि को ही ऐसा संयोग होना मायने रखता है। ग्रहों के आधार पर इतना संकेत दे देना 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को विज्ञान सिद्ध करने के लिए काफी है।

एक एक शहर की एक एक तिथि का एक एक डिग्री में तापमान जानना हो , तो हिम्‍मत जुटाकर एक खोजी पत्रकार को उस विभाग में पूछताछ करनी चाहिए,जहां सरकार जनता के खून पसीने की कमाई के टैक्‍स के रूप में जमा किए गए खरबों खर्च करती है। किसी सरकारी , अर्द्ध सरकारी , गैर सरकारी संगठन या किसी व्‍यक्ति से एक पाई भी न लेनेवाले हम 40 वर्षों से खुद अपना पेट काट काटकर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के विकास पर खर्च करने के कारण काफी कमजोर हो चुके हैं, यहां अधिक पूछ ताछ आप जैसे शेर को शोभा नहीं देता।

आपका सातवां प्रश्‍न ... अफगानिस्तान में 31 दिसंबर तक 'नाटो' के कुल मरने वाले सैनिकों की संख्या क्या होगी?

मेरा जबाब ... हमने कभी इससे संबंधित डाटा ही इकट्ठा नहीं किया , इसलिए इसे भी आउट आफ सिलेबस ही समझें , हमने अपने ब्‍लाग पर कभी ऐसा कोई दावा नहीं किया ।

अब आपके पक्ष के कुछ टिप्‍पणीकारों से निवेदन ....  बेनामी भाई , रजनीश जी और आर्शिया जी , आपलोगों के कहे अनुसार मैं अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के यहां दावा नहीं कर सकती , क्‍यूकि मैने इस आलेख में साफ लिखा है कि उन‍की परीक्षा में कैसी धांधली होती है। यदि उस ढंग से आई आई टी की परीक्षा में बैठनेवालों का भी मूल्‍यांकण किया जाए तो ज्‍योतिष का तो कम से कम हेड एंड टेल सुरक्षित है , गणित , भौतिकी और रसायनका हेड एंड टेल भी नजर नहीं आएगा। यह हमारा दुर्भाग्‍य है कि परंपरागत ज्ञान विज्ञान की जब भी चर्चा की जाती है , उसे सिद्ध करने के लिए उसे उस विज्ञान के समकक्ष खडा कर दिया जाता है , जिसमें सरकार अरबों खर्च कर रही है और जिसमें बडे बडे वैज्ञानिक जुटे हैं।

जहां तक अंधविश्‍वास फैलाने के नाम पर जेल भेजने का सवाल है , आपलोग पहले टीवी कार्यक्रम दिखानेवालों से शुरू करें। वे लाखों की भीड को गुमराह करते हैं , मैं उनमें से सौ दो सौ को बचाती हूं।जब वे कुंडली मिलान की बातें करते हैं , तो मैं उसे अवैज्ञानिक करार देती हूं। जब वे सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण के बुरे प्रभाव की चर्चा करते हैं , मैं उसे नकारती हूं। जब वे 09-09-09 के नाम पर हल्‍ला मचाते हैं , मैं इसके कोई प्रभाव न होने के तर्क दिया करती हूं। इसी प्रकार मैने अपने ब्‍लाग में सप्‍ताह के दिनों के अनुरूप यात्रा , मुहूर्त , शकुन , लौटरी , न्‍यूमरोलोजी , फेंग शुई , हस्‍ताक्षर विज्ञान , झाडफूंक , वास्‍तु शास्‍त्र , हस्‍तरेखा से लेकर नजर लगने तक के सही गलत की वैज्ञानिक व्‍याख्‍या की है। और मेरा पक्ष लेनेवालों को आपका कहना यह उचित नहीं कि मैने उनकी जन्‍मकुंडली मुफ्त में बना दी है। हम सभी जानते हैं कि आजकल साफ्टवेयर की सहायता से जन्‍मकुंडली मुफ्त में ही बनती है।

हेतप्रकाशजी , प्रमोद वैष्‍णव जी , मैं अपनी पुरानी पोस्ट का हवाला बार-बार देकर इस मुद्दे से कन्नी नहीं काट रही थी , आपको अपने दृष्टिकोण से परिचित होने को कह रही थी और अपने अनुरूप प्रश्‍न की मांग कर रही थी। हरीश करमचंदानी जी , दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए मैने खुद एक पोस्‍टलिखा है। धीरेन्‍द्र राहूल जी , आपके मित्र ने ज्‍योतिष के क्षेत्र में अनिश्चितता को देखकर उसका अध्‍ययन ही छोड दिया , पर मैं उसे अनिश्चितता से उबारकर निश्चितता की ओर जाने का अध्‍ययन कर रही हूं , तो इसमें क्‍या बुराई है ? जहां संभावना दिखाई पडे , वहां अध्‍ययन करना गुनाह है क्‍या ?

 लवखुश जी , बहुत ऐसे ग्रहयोग होते हैं , जहां समान राशि के लोग समान तरह के सुख या कष्‍ट में देखे जा सकते हैं , जिसकी राशिफल में चर्चा की जाती है , पर बहुत ऐसे ग्रहयोग भी होते हैं , जहां एक ही राशि के लोगों में से कोई कष्‍ट तो कोई आराम में होता है। दिलनाज जी , याद रखें , इस भाग्यवाद ने हिंदुस्थान को जितना गुलाम बनाया है , उतना ही मानसिक संतोष भी दिया है। एक गरीब या असहाय को संतोष देने के लिए आप कोई उपाय बता सकते हैं । अमित हलदर जी , बेनकाब तो उनको किया जाता है जो नकाब पहने होते हैं, यहां निराशा हाथ लगेगी। अवधबिहारी जी , लाख बार बता चुकी कि मैं ज्‍योतिष से कमाई नहीं करती। हरिदास महतो जी , यहां कोई पोल है ही नहीं , जिसे आपलोग खोल सके , जो मेरे आत्‍मविश्‍वास का एक बडा कारण है।

चंद्रमोहन जी , विचारों से सहमति असहमति अलग बात है , पर किसी को कोई बात कहते समय भाषा का संयम बरतें और अंत में प्रशांत जी , मैं आपसे पूछना चाहती हूं कि आपके किस पोस्‍ट में मैने बिना पढे कमेंट किया है, जैसा कि आपने लिखा है "संगीता जी सहित कई ब्लौगर हैं जो बिना पढ़े कमेंट करते हैं" । इस बात पर मेरी सफाई पढ लें, वैसे अपने ब्‍लाग के पाठक होने की अच्‍छी सजा दी आपने ? व्‍यर्थ का लांछन लगाने के बाद मेरे लेखन और जज्बे की तारीफ भी मुझे कौन सा सुख दे सकती है ?

इसके अलावे मैं अपने सभी शुभचिंतकों को  बहुत बहुत धन्‍यवाद देना चाहूंगी , चाहे उन्‍होने मेरे पक्ष में टिप्‍पणी की या मौन रखकर ही मुझे मेरे साथ होने का अहसास दिलाया। उन्‍हें यह भी बताना चाहूंगी कि वे दुखी न होवें , रतन सिंह शेखावत जी की तरह मौज लेते रहें। राजीव तनेजा जी ने भी सही कहा है , जहां बरतन होंगे , वहां खडखडाहट होगी। मैंने अपने जीवन में समय समय पर बहुतों को झेला है , पर मेरे तर्क उन्‍हें मौन कर देते रहे हैं। मुझे इस बात का संतोष है कि जीवन में जो मेरे जितने बडे विरोधी रहे , कालांतर में वे मेरे उतने ही बडे समर्थक बने। और हां , उपर लिखी किसी भी बात को मेरी आत्‍मप्रशंसा न समझा जाए , जैसा कि अक्‍सर लोगों को भ्रम हो जाता है। मैं सिर्फ ज्‍योतिष के सैद्धांतिक ज्ञान को व्‍यावहारिक तौर पर विकसित करने का कार्य कर रही हूं , मेरा अपना कोई अस्त्तित्‍व नहीं , जिसका मुझे गुमान हो।

प्राचीन ऋषि मुनियों के जड और तने के उपर मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा विकसित किए गए सिद्धांतों की मजबूत शाखा पर मैं तो मात्र फल फूल विकसित कर रही हूं , ताकि फल फूलों के सुगंध और स्‍वाद के बहाने मानव जाति द्वारा इतने दिनों से उपेक्षित इस पेड का अच्‍छी तरह उपयोग किया जा सके। जब ब्रह्मांड में इतने बडे बडे पिंड प्रकृति के नियमों के अनुसार चल रहे हों , एक व्‍यक्ति को अपने इस छोटे से शरीर और अपनी योग्‍यता पर गुमान करने की जरूरत ही नहीं। मैं भले ही पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम करती हूं , पर मैं मानती हूं कि सफलता असफलता हमारे हाथ में नहीं , प्रकृति के हाथ में ही होती है। पाठकों को दीपावली की बधाई और शुभकामनाएं !!


अपडेट 1.  ... मैने प्रवीण जाखड जी के प्रश्‍नों के जबाब में इतना बडा आलेख लिख डाला ..पर इसके एक घंटे बाद के पोस्‍ट किए गए इस लिंक में वे कहते हैं ....... "336 घंटे का इंतजार। परीक्षा के 14 दिन। हिंदी ब्लॉगिंग में ज्योतिष का सबसे बड़ा बवाल। आप इसे जो नाम देना चाहें, दे सकते हैं। ...लेकिन लंबे इंतजार के बाद हमारी ज्योतिषी ब्लॉगर संगीता पुरी जी उन सात यक्ष प्रश्नों का जवाब देने से पीछे हट गई हैं, जिनसे जुड़े दावे उन्होंने कुछ दिन पहले किए थे। वे उन सातों सवालों की गंभीरता से दूर 'भूत-भविष्य' की ऐसी गणित में उलझी हैं, जिनका कोई 'लॉजिक' नहीं है।"



अपडेट .2  .....  और यहां लिस्‍ट में आप पाएंगे कि इस आलेख में चर्चित मेरी कितनी भविष्‍यवाणियां सही हुई हैं ....

1) 9 अक्‍तूबर 2009 तक ....  शेयर बाजार टूटता रहा।
2)10 अक्‍तूबर 2009 से ...  लगभग पूरे भारतवर्ष में आसमान साफ हो गया है।
3)12 अक्‍तूबर 2009 ... शेयर बाजार न सिर्फ बढकर खुला है , वरन अंत तक बढता ही जा रहा है।


-----------------------------------------------------
चंद्र-राशि, सूर्य-राशि या लग्न-राशि से नहीं, 
जन्मकालीन सभी ग्रहों और आसमान में अभी चल रहे ग्रहों के तालमेल से 
खास आपके लिए तैयार किये गए दैनिक और वार्षिक भविष्यफल के लिए 
Search Gatyatmak Jyotish in playstore, Download our app, SignUp & Login
------------------------------------------------------
अपने मोबाइल पर गत्यात्मक ज्योतिष को इनस्टॉल करने के लिए आप इस लिंक पर भी जा सकते हैं ---------
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.gatyatmakjyotish


नोट - जल्दी करें, दिसंबर 2020 तक के लिए निःशुल्क सदस्यता की अवधि लगभग समाप्त होनेवाली है।


तय किए गए समय सीमा के अंदर प्रवीण जाखड जी के प्रश्‍नों के जबाब तैयार हैं !! तय किए गए समय सीमा के अंदर प्रवीण जाखड जी के प्रश्‍नों के जबाब तैयार हैं !! Reviewed by संगीता पुरी on October 03, 2009 Rating: 5

21 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

इसे कहते है हाज़िर जवाबी..संगीता जी आप लोगो के बीच किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा हो परंतु एक बात हम कहना चाहते है की पाठक को ज्योतिष् के बारे में बहुत जानकारी हो जा रही है.और आपके पोस्ट और विचार से ज्योतिष् में बारे में उत्सुकता और बढ़ती जाती है...

Anonymous said...

मेरा नितांत व्यक्तिगत मत है कि किसी चुनौती को निर्भीकता से स्वीकार कर, प्रत्युत्तर देने के प्रयास की इच्छाशक्ति सराहनीय है, फिर भले ही सामने वाला पक्ष संतुष्ट हो, या ना हो।

बी एस पाबला

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

यह आपकी पहली ऐसी पोस्ट है जिसने मुझे पूरी तरह से प्रभावित किया है.
ज्योतिष पर तो मैं अभी भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा हूँ पर आपकी मेहनत और लगन की दाद देता हूँ.

Gyan Darpan said...

पाबला जी का कहा हमारा भी समझिये |

mehek said...

aapka gahan aadhyayan , aur lagan aur mehnat ko hamara salam.

Desk Of Indian Einstein @ Spirtuality said...

सफलता असफलता हमारे हाथ में नहीं , प्रकृति के हाथ में ही होती है।

यही बो बात है जो हमें इंधन देते रहता है सतत अपने कार्य करते रहने के लिए ....अपने सभी को बखूबी बेहतर तरीके से जबाब दी हैं...ये अंदाज़ अच्छा लगा और मै सही मानता हूँ ....

Unknown said...

माफ कीजिएगा लेकिन आपके किसी भी जवाब से संतुष्ट होना मुश्किल है। आपने सारे जवाब काफी घुमा-फिराकर दिए हैं। इस तरह की अगर-मगर वाली भविष्यवाणी तो कोई भी कर सकता है। अगर आपके दावे के मुताबिक आपका ज्योतिष सही है तो आपसे अपेक्षा है कि सभी सवालों के सटीक उत्तर दें। ऐसा होगा तो वैसा होगा में ही ज्यादातर ज्योतिषि लोगों को उलझा देते हैं। तो फिर इस पर भरोसा किया भी जाए तो कैसे। मुझे तो ये ज्योतिष किसी काम का नहीं लगता। अगर इसमें दम है तो किसी ज्योतिषि ने पहले से मुंबई हमले की जानकारी क्यों नहीं दी? ऐसे ही बहुत से सवाल हैं। हो सकता है कि इन जवाबों से आपको आत्मसंतुष्टि मिल गई हो। लेकिन सभी संतुष्ट हों यह नहीं कहा जा सकता।

विवेक रस्तोगी said...

मेरे लिये तो ज्योतिष की परिभाषा मेरे जीवन के डॉक्टर की है, जैसे हम डॉक्टर के पास हर तीन माह में नियमित चेकअप के लिये जाते हैं, वैसे ही हम हर तीन मास में अपने ज्योतिष के पास जाते हैं अपनी जिंदगी की कठिनाईयां समझने के लिये, और उससे फ़ायदा भी उठाते हैं। हाँ रही बात नास्तिकों की जो भगवान को ही नहीं मानता हो उससे भगवान की चर्चा बेकार है वैसे ही उससे ज्योतिष की चर्चा करना बेकार है।

उत्तर देने की आपकी इच्छाशक्ति को मेरा प्रणाम।

Murari Pareek said...

वाकई कबीले तारीफ़ आपने लिखा है , पूरी मेहनत और लगन से !!

संजय शर्मा said...

मेरे विचार से किसी की गलत ललकार पर अड़ जाना उसके ललकार को सही साबित करता है .जो हर ज्योतिषी को केवल सड़कछाप ज्योतिष मान बैठा है .उसको अपने हाल पर छोड़ देना चाहिए .आप अपनी गति से आगे लिखते रहे ,सत्य होगा तो स्थापित होता जायेगा.

संजय बेंगाणी said...

आपके पास जो डेटा उपलब्ध है, उसके बारे में बताएं. विज्ञान कह देने से उसे साबित करने की जिम्मेदारी भी बनती है.

drsatyajitsahu.blogspot.in said...

Madam please write on the topic which is useful for the astrology lover not for the critics. Such practice are there in litrature because critic are also very good in litraturr.plese write more about astrology.
your pridiction about rain before dewali is correct. you are simply superb...........regards to you and astrology..

हिटलर said...

कम से कम आपने सवालों के जवाब पूरी ऊर्जा के साथ देने की कोशिश की है, इसलिये आपका अभिनन्दन… सहमत होना या नहीं होना यह प्रत्येक के अनुभव, विवेक और ज्ञान पर निर्भर है।
लेख के शुरु में ही एक बात आपने कही कि ज्योतिष अलग है और गत्यात्मक ज्योतिष अलग है, इससे तो सारा विवाद ही समाप्त हो गया क्योंकि जब ज्योतिष को आप अपना मूल विषय मान ही नहीं रहीं, तब प्रवीण जाखड़ जी को अपने सवाल किसी अन्य ज्योतिष ब्लाग पर रखने चाहिये… :)

बहरहाल आपके उत्तर पढ़कर अच्छा लगा… कि आप इनसे भागी नहीं, बल्कि पुरजोर कोशिश की। यही खेल भावना होना चाहिये…। सामने वाला सहमत हो या न हो, अपना जवाब मजबूती से रखना चाहिये और वही आपने किया है… बधाई…

Mohammed Umar Kairanvi said...

प्रणाम आज‍ फिर 13 के बाद आया, सांकल हटा दो, हमारी हाजरी लगालो, संगीता जी,

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

क्यों बेकार के लोगों के बेकार से सवालों पर अपनी ऊर्जा ज़ाया कर रही हैं आप। अपना काम कीजिए और लोगों को अपनी ज़बान[कलम] चलाने दीजिए। यह तू-तू, मैं,मैं कभी समाप्त नहीं होने वाली। अब सवालों की दूसरी लड़ी तैयार होगी:)

अनूप शुक्ल said...

चंद्रमौलेश्वरजी से सहमत।

रंजू भाटिया said...

आपकी इस मेहनत को सलाम है संगीता जी ..

परमजीत सिहँ बाली said...

संगीता जी,आप की मेहनत जरूर एक दिन रंग लायेगी।बहुत बढिया पोस्ट लिखी है। शुभकामनाएं।

Mithilesh dubey said...

बहुत खुब। इसे कहते है करारा जवाब।

Abhishek Ranjan Singh said...

Mr. Cmpershad ji ne bilkul sahi kaha hai didi aap kyo bekar baato me apani urja aur samay bekar kar rahe ho kya aapke paas aur koi kam nahi hai kya......didi aap apane mul udehsya par dhayan lagao.HATHI CHALATA HAI TO KUTTE TO BHAUKENGE HE

DIVINEPREACHINGS said...

संगीताजी,

आपका अध्ययन और धैर्य सराहनीय है । ये प्रश्न इस योग्य थे ही नहीं कि इन पर विचार किया जाता । आप अपने सोच के मुताबिक कार्य करती रहें । ऐसी चुनौतियाँ स्वीकार करने के लिए और बहुत सारे लोग हैं ।
15 जनवरी 2011 को प्रात: 10 बज कर 22 मिनट प दिल्ली में पैदा होने वाले बच्चे के सिर पर कितने बाल होंगे ? क्या आप इस प्रश्न का उत्तर देने बैठ जाएँगी ? ऐसे प्रश्न करने वाले सिर्फ अध्येताओं को परेशान करने के लिए ही इस तरह के प्रश्न करते हैं ।
आप स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें और गत्यात्मक ज्योतिष पर अपना शोध कार्य जारी रखें ।

Powered by Blogger.