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Thursday, 21 January 2010

मेरे ज्‍योतिषीय विचारों पर तर्क वितर्क करने के लिए पाठकों को मेरे ब्‍लॉग पर आना चाहिए !!


कल 'नया जमाना' नाम के एक ब्‍लॉग में जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी को एक लेख ज्योतिषी के फलादेश की कला और राजनीति पढने को मिली , जिसमें ज्‍योतिष शास्‍त्र के बारे में इस प्रकार जानकारी थी ... 

फलित ज्योतिष मासकल्चर का अंग है। देखने में अहिंसक किन्तु वैचारिक रूप से हिंसक विषय है। सामाजिक वैषम्य,उत्पीडनलिंगभेद,स्त्री उत्पीडन और वर्णाश्रम व्यवस्था को बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।ग्रह और भाग्य के बहाने सामाजिक ग्रहों  की सृष्टि में अग्रणी है। फलित ज्योतिष स्वभावत:लचीला एवं उदार है। 'जो मांगोगे वही मिलेगाके जनप्रिय नारे के तहत प्रत्येक समस्या का समाधान सुझाने के नाम पर व्यापक पैमाने पर जनप्रियता हासिल करने में इसे सफलता मिली है।

इस आलेख को पढने के बाद मैने निम्‍न प्रतिक्रिया दी थी ..

ज्‍योतिष शास्‍त्र हमारे ऋषि मुनियों द्वारा विकसित किया गया शास्‍त्र है .. जिन्‍हें आज भी वैज्ञानिक माना जाता है .. किसी भी ज्ञान का दोष नहीं दिया जा सकता .. दोष कालांतर में उस ज्ञान के गलत हाथों मं जाने से होता है .. विस्‍तार से पढे आइए जानते हैं .. फलित ज्योतिष आखिर क्‍या है ??.... एक सांकेतिक विज्ञान या मात्र अंधविश्वास !!

ग्रहों के प्रभाव को दिखाते हुए मैने यह आलेख लिखा है .. इसमें कोई गोल मोल बातें नहीं हैं .. स्‍पष्‍ट भविष्‍यकथन है .. पर मात्र तीन पाठकों ने इस बात से सहमति दिखाई .. असहमति किसी ने भी नहीं .. क्‍या हिन्‍दी ब्‍लॉगर , उनके भाई , बहन , मित्र , बेटे और बेटियों में किसी ने 1981 में जन्‍म नहीं लिया होगा .. ज्‍योतिष के प्रति लोगों की यही उपेक्षा दिन ब दिन इसकी गिरती हुई हालत के लिए जिम्‍मेदार है !!

दूसरे ही दिन पुन: इसी ब्‍लॉग पर जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी का एक आलेख ज्योतिषी के तर्क और अविवेकवाद नामक एक पोस्‍ट पढने को मिली, जिसमें मैने ये कमेंट किए ...

असल में ज्योतिष मनोबल बढ़ाने का यह आदिम शास्त्र है।

जनप्रिय मिथ है कि यदि ग्रहों का सही ढ़ंग से फलादेश हो तो सामाजिक जीवन में आनेवाली बाधाओं को सहज ही संभाला जा सकता है।

ज्‍योतिष के बारे में इतना लिखने से पहले आपने इसका कितने दिनों तक अध्‍ययन किया है ??

इसपर जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी ने जानकारी दी कि ...

संगीता जी, मैंने 14 साल ज्योतिषशास्त्र पढ़ा है। सिद्धान्त ज्योतिषाचार्य हूँ।सर्वोच्च अंक थे मेरे। भारत के श्रेष्ठतम ज्योतिष शिक्षकों से बाकायदा अकादमिक शिक्षा ली है।

मुझे यह जानकर बहुत अच्‍छा लगा , सचमुच विषय के जानकारों से तर्क करना सार्थक लगता है , मैने लिखा ....

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी,आपने ज्‍योतिष का इतने दिनों तक अध्‍ययन किया है .. आप ज्‍योतिष शास्‍त्र के इतने अच्‍छे जानकार हैं .. उम्‍मीद रखती हूं आप सकारात्‍मक ढंग से तर्क वितर्क करेंगे .. मैने आपके पिछले आलेख मे एक आलेख का लिंक दिया था .. उसमें ज्‍योतिष के शुरूआत से लेकर अभी तक की स्थिति को स्‍पष्‍टत: समझाया गया है .. उस आलेख के बारे में आपकी क्‍या टिप्‍पणी है .. कृपया अगले पोस्‍ट में उल्‍लेख करें .. ताकि मैं समझ सकूं कि मैं कहां पर गलत हूं .. और हां , अपने लिखे उस आलेख के लिंक को मेरे ईमेल पर प्रेषित करें .. क्‍यूंकि इन दिनों मैं ब्‍लॉग जगत से दूर हूं !

जाकिर अली 'रजनीश' जी और अरविंद मिश्रा जी जैसे ज्‍योतिष विरोधियों को तो उक्‍त दोनो आलेखों को देखकर गदगद होना ही था। जाकिर जी ने 'तस्‍लीम' नामक ब्‍लॉग में भी इस आलेख को स्‍थान दिया, जिसमें उन्‍होने कहा ...


ज्योतिष को लेकर ब्लॉग जगत में अक्सर उठापटक चलती रहती  है। ज्योतिष के बारे में जो भी प्रश्न उठाए जाते हैं, उसपर तथाकथित ज्योतिषी सबसे पहले यही सवाल दागते हैं कि आपने कितना ज्योतिष पढ़ा है। इसके आगे सारे सवाल, सरे तर्क अनदेखे/बेमानी कर दिये जाते हैं और जनता उस भेड़चाल में शामिल हो जाती है।

कल सहसा डा0 जगदीश्वर चतुर्वेदी के ब्लॉग 'नया ज़माना' पर उनके ताजे आलेख 'ज्योतिषी के तर्क और अविवेकवाद' पर नजर पड़ी। डा0 चतुर्वेदी ने सम्‍पूर्णानन्‍द सं.वि‍.वि‍. से सि‍द्धान्‍त ज्‍योति‍षाचार्य की डिग्री प्राप्त की। उनके ताज़े लेख पर बहस चल रही है। ज्योतिष की इस चर्चा को आगे बढ़ाने के ‍लिए उनके एक अन्य आलेख 'ज्योतिषी के फलादेश की कला और राजनीति' लेख को यहाँ पर पुन: साभार प्रस्तुत किया जा रहा है।

ज्‍योतिष के स्‍वस्‍थ तर्क से मुझे क्‍या तकलीफ हो सकती थी , मैने भी टिप्‍पणी की ....

चूंकि चतुर्वेदी जी ज्‍योतिष के जानकार हैं .. उनसे होनेवाली बहस अवश्‍य सार्थक हो सकती है .. ज्‍योतिष की कई कमजोरियो को मैने भी अपने ब्‍लॉग में उजागर किया है .. विभिन्‍न प्रकार के राजयोग, कुंडली मिलान , विंशोत्‍तरी दशा पद्धति , ग्रहों के प्रभाव को परिवर्तित करने का दावा , ग्रहणों का प्रभाव तथा कालसर्प योग आदि को हमलोग निश्चित तौर पर ज्‍योतिष में अंधविश्‍वास के रूप में लेते हैं .. पर इसका अर्थ यह नहीं कि ज्‍योतिष गलत है या ग्रहों का प्रभाव हमपर नहीं पडता है .. जिस प्रकार धर्म का सही स्‍वरूप आज खो गया है .. और धर्म की ऊंचाइयों पर बैठे लोग धर्म को सही ढंग से परिभाषित नहीं कर पा रहे .. उसी प्रकार ज्‍योतिष का सही स्‍वरूप भी खो गया है और ज्‍योतिष को सही ढंग से लोग परिभाषित नहीं कर पा रहे हैं .. इसका अर्थ यह नहीं कि ज्‍योतिष गलत है।

नियमित तौर पर मेरा ब्‍लॉग पढने वाले मेरी इन बातों को समझ सकते हैं , पर जिन्‍होने कभी मेरा बलॉग नहीं पढा , उन्‍हें मेरा स्‍वर तो बदला बदला लगेगा ही , कुन्‍नु जी की टिप्‍पणी को देखें ...

Sangeeta ji swar badle badle se lag rahe hain.

हमारा 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' बिल्‍कुल वैज्ञानिक है और वह पारंपरिक ज्‍योतिष से काफी हटकर और स्‍पष्‍ट है , यह मैं अपने ब्‍लॉग में बारंबार समझा चुकी हूं , इसके बावजूद 'नया जमाना' में एक पाठक की टिप्‍पणी देखें ....

ab inconvenienti ने कहा

अब मिला शेर को सवाशेर.... देखते हैं अब मैडम क्या गत्यात्मक तर्क वितर्क करती हैं? 

इन सब बातों को पढने के बाद इस आलेख को प्रकाशित करने का मेरा उद्देश्‍य पाठको को यह जानकारी देना है कि किसी भी ब्‍लॉग में मैं उस पोस्‍ट से सहमति या असहमति रखते हुए एक टिप्‍पणी देने के अधिकार और कर्तब्‍य दोनो का पालन करती हूं ,उस पोस्‍ट के लेखक को भी मेरी टिप्‍पणी के संबंध में अपनी स्थिति को स्‍पष्‍ट करना चाहिए। मैं अपने विषय पर इतनी गंभीर तो अवश्‍य हूं कि किसी भी प्रकार के तर्क वितर्क कर सकूंपर मेरे अपने विचारों के साथ किसी को तर्क वितर्क करना हो तो उसे मेरे ब्‍लॉग पर आना होगा। मैं प्रवीण जाखड जी के ब्‍लॉग पर तर्क वितर्क के दौरान अपनी ये बातें स्‍पष्‍ट कर चुकी हूं,इसलिए कोई भी यह उम्‍मीद न रखें कि मैं उनके ब्‍लॉग पर जाकर तर्क वितर्क करूंगी !!

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नोट - जल्दी करें, दिसंबर 2020 तक के लिए निःशुल्क सदस्यता की अवधि लगभग समाप्त होनेवाली है।

14 comments:

समयचक्र said...

सहमत हूँ....

तनु श्री said...

----------दीदी ,यह धूर्त विद्या है,कहाँ आप इसके प्रचार में जुटी हैं --
अब तक मैंने जितने भी ज्योतिषी देखा सब पाखंडी निकले------ .
------कर्मण्ये वा------------कदाचन की बात तो स्वयम हमारे कृष्ण भगवान कह गये हैं ----यह केवल धूर्त विद्या है और कुछ नहीं .

तनु श्री said...

----------दीदी ,यह धूर्त विद्या है,कहाँ आप इसके प्रचार में जुटी हैं --
अब तक मैंने जितने भी ज्योतिषी देखा सब पाखंडी निकले------ .
------कर्मण्ये वा------------कदाचन की बात तो स्वयम हमारे कृष्ण भगवान कह गये हैं ----यह केवल धूर्त विद्या है और कुछ नहीं .

प्रवीण said...

.
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आदरणीय संगीता जी,
यहाँ पर आपने भविष्यवाणी की है कि 6 जनवरी से ही थोडी राहत मिलनी शुरू हो जाएगी , जबकि 16 जनवरी के बाद ठंड से काफी राहत मिलेगी।
अभी तो उत्तर भारत भीषण शीत लहर से त्रस्त है...इस काफी राहत को मिलते-मिलते काफी देर नहीं हो गई ?

Udan Tashtari said...

अबसे आया करेंगे तर्क वितर्क करने...:)

संगीता पुरी said...

प्रवीण शाह जी,
कल के पोस्‍ट में आपको जबाब मिल जाएगा !!

राज भाटिय़ा said...

संगीता जी आप मस्त रहे, ओर लिखती रहे....छोडिये इन लोगो को

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

संगीता जी, क्या ज्योतिष पर आपका कॉपीराइट है, जो उसपर बहस करने के लिए लोगों को आपके ब्लॉग पर आना होगा?
--------
ज्योतिष के पाखंड को तार-तार करता एक ज्योतिषाचार्य।
अगर महिलाओं के दाढ़ी-मूछें उग आएं तो?

संजय शर्मा said...

और क्या , घूम घूम के टिप्पणी देने से बढ़िया है
एक हथौड़ा टाइप का पोस्ट अपने ही ब्लॉग
पर प्रकाशित करना /

संगीता पुरी said...

जाकिर जी,
आप मेरी बातों का हमेशा गलत अर्थ लगाते रहते हैं .. मैने 'ज्‍योतिष' के बारे में नहीं लिखा है .. स्‍पष्‍ट लिखा है .. मेरे ज्‍योतिषीय विचारों पर तर्क वितर्क करने के लिए पाठकों को मेरे ब्‍लॉग पर आना चाहिए !!

मैने यह बात इस टिप्‍पणी के जबाब में लिखा है ..
ab inconvenienti ने कहा…
अब मिला शेर को सवाशेर.... देखते हैं अब मैडम क्या गत्यात्मक तर्क वितर्क करती हैं?

Arvind Mishra said...

संगीता जी ,आप को लगता है आप अपनी जगह सही हैं और हमें लगता है हम अपनी जगह .
दोनों यदि ईमानदारी अपने कामो को अंजाम देने में लगे रहें तो बहुसंख्यक जनता एक दिन खुद ही अपना निर्णय ले लेगी
वैसे हम प्रजातंत्र में रह रहे हैं -यहाँ प्रजा जो कहती है वही पलड़ा भरी होता है -अभी तो साफ़ तौर पर आपका पलड़ा भारी लग रहा है
लेकिन दिन ब दिन जैसे लोगों में वैज्ञानिक नजरिया आता जायेगा लोग सही निर्णय खुद कर लेगें
मैं फलित ज्योतिष को एक अविकसित अटकल बाजी के शाश्त्र से अधिक कुछ नहीं मानता
मगर यह हमेशा ध्यान रखें की मुझे आपसे व्यक्तिगत कोई टकराव नहीं है -मेरे ऐसे तमाम नालायक मित्र भाई बंधू हैं जिन्हें फलित ज्योतिष दुनिया का असबसे पवित्र ज्ञान लगता है .आप तो फिर भी एक काबिल पिता जिन्होंने ग्रह नक्षत्रों को जाने समझने की अपने तई एक नयी पहल की थी की पुत्री हैं ...उनके परिश्रम और समर्पण को सही दिशा में ले जाना आपका कर्तव्य है .

संगीता पुरी said...

अरविंद मिश्रा जी,
मैं अपनी जगह इसलिए सही हूं .. क्‍यूंकि मैने भविष्‍य के बारे में आकलण करने वाली पद्धति 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष'को पूर्ण तौर पर जांच लिया है .. पर आप इसलिए अपनी जगह सही नहीं हैं .. क्‍यूंकि ज्‍योतिष के क्षेत्र में आप विज्ञान के नियमों की तरह काम नहीं कर रहे .. किसी पद्धति को जांचे बिना उसे गलत कहने का अधिकार विज्ञान नहीं देता .. वैसे तो पुरूषों के जीवन में भी विज्ञान के अनुसार कार्य और कारण में परस्‍पर संबंध नहीं पाया जाता .. फिर भी वहां कुछ ऐसी बातें तलाश की जा सकती है .. पर बिना कुछ किए एक महिला का पूर्ण तौर पर सुखी और सबकुछ करने के बाद भी एक महिला का पूर्ण तौर पर दुखी होने को विज्ञान किस तरह से कार्य कारण संबंध के रूप में परिभाषित करेगा !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत बढ़िया जी!
कुतर्कियों को ऐसा आमन्त्रण मत दे देना!

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

तर्क - वितर्क करने की ज़रूरत ही क्या है..... अपनों से कोई तर्क-वितर्क नहीं करता.... आपके विचार मुझे तो अच्छे लगते हैं....