मेरी भविष्‍यवाणी में जगह का अंतर , थोडी देर , तीव्रता में कमी क्‍या हुई .. विरोधियों के तो बल्‍ले बल्‍ले ही हो गए !!

मेरे ब्‍लॉग को नियमित तौर पर पढनेवाले पाठक इस बात से अवश्‍य परिचित हो गए होंगे कि मैं ज्‍योतिष के सैद्धांतिक आलेख नहीं लिखा करती। जहां एक ओर ज्‍योतिष में समाहित अवैज्ञानिक तथ्‍यों का भी मैं रहस्‍योद्घाटन करती हूं , वहीं ज्‍योतिष के वैज्ञानिक स्‍वरूप के व्‍यवहारिक प्रयोग की भी चर्चा करती हूं। ज्‍योतिष पर लोगों का विश्‍वास बनाने के लिए मैं हमेशा तिथियुक्‍त भविष्‍यवाणियां किया करती हूं , जिसमें तुक्‍का का कोई सवाल ही नहीं उठता। सटीक हुई भविष्‍यवाणियां मेरे सिद्धांत की प्रामाणिकता को स्‍पष्‍ट करते हुए मेरे आत्‍म विश्‍वास में जितनी बढोत्‍तरी करती है , गलत होने वाली भविष्‍यवाणियां भी उस सिद्धांत में अपवाद को ढूंढकर मेरे 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को और सटीक बनाती है। इसलिए भविष्‍यवाणियों के सही और गलत होने से मेरे आत्‍म विश्‍वास पर कोई अंतर नहीं पडता , किसी भी विज्ञान में अपवाद न हो , तो फिर उसका विकास ही रूक जाएगा। 








3 और 4 फरवरी की ग्रहस्थिति के कारण भारत में उपस्थित होनेवाली परिस्थितियों , चाहे वो मौसम का हो , राजनीति का हो या फिर शेयर बाजार का , मैने जो भी आकलन किया था , परिस्थितियां वैसी नहीं बन सकी । यह जहां ज्‍योतिष प्रेमियों के लिए आहत वाली खबर होगी , विरोधियों के तो बल्‍ले बल्‍ले ही हो गए। वैसे जहां तक मेरा मानना है , मेरी भविष्‍यवाणियों के सटीक होने पर कई बार ज्‍योतिष प्रेमी खुश होते हैं , तो कभी कभार विरोधियों को भी खुश होने की थोडी जगह तो मिलनी ही चाहिए। शेयर बाजार और राजनीतिक उथल पुथल के बारे में मेरी भविष्‍यवाणियां यदा कदा गलत हुई हैं , इसलिए सिद्धांतों की सटीकता पर कुछ संदेह बना हुआ है। 

पर मौसम के मामलों में ऐसा पहली बार हुआ है , इससे यही समझा जा सका है कि शायद अपवाद का जो कारक हो , वह बहुत वर्षों बाद इस वर्ष आया हो। अपवाद का कारण अभी तक भी समझ में नहीं आया , इसकी खोज जारी है। हालांकि छत्‍तीसगढ से कल रात से ही मौसम बिगडने की सूंचना ब्‍लॉग पर प्रकाशित की गयी है , पर यदि उसका प्रभाव एक दो दिन में उत्‍तरी भारत के अधिकांश हिस्‍सों पर पड जाता है , तब ही मैं अपनी भविष्‍यवाणी को सटीक समझूंगी , अन्‍यथा मैं उसे सटीक बनाने के प्रयास में ही लगी रहूंगी। अभी भी मुझे ग्रहों के प्रभाव पर विश्‍वास है , मौसम को प्रभावित करने वाले ग्रह स्थिति के आधार पर 2010 के पूरे वर्षभर के मौसम का खाका खींचते हुए एक आलेख का वादा मैने पाठकों से किया था , जिसे कुछ ही दिनों में अवश्‍य प्रेषित करूंगी। एक भविष्‍यवाणी के गलत होने से मैं कैसे मान लूं कि ग्रहों का प्रभाव मौसम पर नहीं पडता !


मुझे तो मालूम था ही कि मेरी गलती के कारण ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता पर सवाल उठाए जाएंगे। ज्‍योतिष की यही तो विडंबना है, सटीकता पर कोई पीठ थपथपाए या नहीं, गल्‍ती पर ध्‍यानाकर्षण स्‍वाभाविक है और यही ज्‍योतिष जैसे दैवी ज्ञान के पतन का कारण भी, अब ढाई वर्षो में तीन बार विरोधियों को ऐसा मौका मिला है। सब समय समय की बात होती है , 16 जनवरी को मेरे द्वारा दी गयी तिथि को भूकम्‍प के आ जाने से वे लोग उलूल जुलूल तर्क दे रहे थे और मैं आत्‍मविश्‍वास से भरी हुई थी। आज उनका आत्‍म विश्‍वास बढा हुआ है और मैं जो भी जबाब दूंगी, वह उलूल जुलूल तर्क होगा, बेहतर होगा कि चुप ही रहा जाए।

वैसे कोई भी क्षेत्र अपवाद से अछूता नहीं, अंतरिक्ष विज्ञान भी कल्‍पना चावला जी की मौत का जिम्‍मेदार है। प्रतिदिन डॉक्‍टर के द्वारा हजारों मरीजों के जान बचाए जा रहे हैं तो उन्‍हीं के द्वारा लापरवाही या अज्ञानता के कारण कुछ मौत के मुंह में भी ढकेले जा रहे हैं। विज्ञान के विकास से जितना सुख सुविधा मनुष्‍यों को मिली है , उससे कम ह्रास भी नहीं हुआ है। यहां तक कि ग्रहों के खराब रहने से बडे से बडे क्रिकेटर फॉर्म में नहीं होते, इतिहास की पुस्‍तकों में बडे से बडे राजाओं पर भी ग्रहों का प्रभाव देखा गया है ,  'महाभारत' भी गवाह है‍ कि अर्जुन जैसे पराक्रमी धनुर्धारी को एक आदिवासी भील से पराजित होना पडा था, जो प्रमाणित करता है कि समय बडा बलवान होता है। 

वैसे इस पोस्‍ट के लिखने और प्रकाशित होने तक बहुत जगहों पर आंधी और बारिश की खबर आ चुकी है , हां मेरे हिसाब से इस योग की तीव्रता जितनी होनी चाहिए थी , अभी तक नहीं दिखाई पडी है , वैसे अभी भी 4 फरवरी को पूरा होने में 6 घंटे बाकी है और इतने कम साधनों के मध्‍य एक दो दिन के एरर की छूट मुझे मिलनी चाहिए, विभिन्‍न हिस्‍सों में आंधी पानी के ये रहे सबूत ...
http://www.bhaskar.com/2010/01/13/100113145501_188297.html
http://www.bhaskar.com/2010/01/24/100124034555_coldwave.html
http://www.bhaskar.com/2010/02/04/100204120602_249694.html
http://www.bhaskar.com/2010/02/04/100204015734_252326.html


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25 comments

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2/04/2010 06:23:00 pm ×

Yahaan ham apko badhaai de sakte hai sangeeta ji!

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Anonymous
admin
2/04/2010 06:26:00 pm ×

kamal hai.science ke jamane bhi aapki baat sarthk hai...

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2/04/2010 06:37:00 pm ×

क्या ज्योतिष यह भी बताता है कि ग्रहों का मौसम पर या व्यक्ति पर कैसे प्रभाव पड़ता है? विज्ञान तो कैसे का जवाब देता है, ज्योतिष के पास इस का जवाब हो तो बताएँ।

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2/04/2010 06:47:00 pm ×

आज की आपकी भविष्यवाणी
मौसम खराब होने की थी,
वह हमने देख ली।
अब थोड़ा बहुत क्षेत्र मे बदलाव चलेगा।
अन्यथा ज्योतिषी तो भगवान हो जाएंगे।
यह इंसान द्वारा की गई भविष्य वाणी है।
हम आपको साधुवाद देते है।

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2/04/2010 07:15:00 pm ×

दिनेशराय द्विवेदी जी,
विज्ञान 'कैसे' का जबाब कहां से दे पाएगा ?
वह कहता है कि पृथ्‍वी में गुरूत्‍वाकर्षण शक्ति है .. इसलिए वह सभी वस्‍तुओं को अपनी ओर खींचती है .. ज्‍योतिष भी ग्रहों की शक्ति को दिखलाने के लिए कोई नाम दे देगा .. पर गुरूत्‍वाकर्षण शक्ति पृथ्‍वी के पास क्‍यूं और कैसे है .. इसका तो जबाब विज्ञान के पास भी नहीं है !!

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2/04/2010 07:20:00 pm ×

मौसम की ठीक भविष्यवाणी तो मौसम विभाग भी ठीक से नहीं कर पाता.

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2/04/2010 07:28:00 pm ×

मैं बस सूचना देने आया हूँ कि 26 जनवरी से आज 4 फरवरी तक सूर्य अपने समयानुसार लखनऊ में चमकते रहे हैं। वर्षा नहीं हुई है। कुहरा नहीं पड़ा है। आँधी नहीं आई है।
ठंड लगातार कम होती गई है। मेरे जैसा जड़हा भी घर में खादी के कुर्ते पायजामें में रह रहा है और रजाई की जगह पतला कम्बल निकल गया है।

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2/04/2010 07:39:00 pm ×

गिरिजेश राव जी,
मैं देशभर के मौसम पर नजर बनाए हुई हूं ..
मैने लिखा भी है कि छत्‍तीसगढ से कल रात से ही मौसम बिगडने की सूंचना ब्‍लॉग पर प्रकाशित की गयी है , पर यदि उसका प्रभाव एक दो दिन में उत्‍तरी भारत के अधिकांश हिस्‍सों पर पड जाता है , तब ही मैं अपनी भविष्‍यवाणी को सटीक समझूंगी , अन्‍यथा मैं उसे सटीक बनाने के प्रयास में ही लगी रहूंगी
वैसे आपने भी अपनी ओर से सूंचित कर दिया .. इसके लिए धन्‍यवाद !!

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2/04/2010 07:46:00 pm ×

विज्ञान पद्धति में गलतियां सहज ही स्वीकार कर ली जाती हैं ..मगर क्या फलित मैं ऐसी कोई परम्परा नहीं है ?

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2/04/2010 07:48:00 pm ×

हमारे यहां ३ और ४ फ़रवरी की दरम्यानी रात में सुबह चार बादलों की गड्गडाहट इतनी तेज तक थी कि च्मक कर नींद खुल गई. उसके बाद अप्रत्याशित रुप से बूंदा बांदी वाली बारिश हुई सुबह सात बजे तक. और दिनों धूप और गर्मी होती थी आज दिन भर बादल रहे..और ठंड का प्रभाव दिखा...यानि मौसम बदला माना जायेगा.

आपका शेयर बाजार से संबंधित ...कल यानी तीन जनवरी को एक दम उल्टा हुआ...यानि निफ़्टी करीब १०१ अंक की बढत के साथ बंद हुआ...आज तकरीबन ९० अंक की घटत के साथ बंद हुआ..

यह दोनों सूचनाएं आपके अध्ययन के लिये दे रहा हूं..

वैसे शेयर बाजार के बारे मे दीर्घकालीन अनुमान तो कुछ माने रखते हैं पर इस तरह घंटा मिनट वाले अनुमान अभी तक मेरे अनुभव से सही सिद्ध कम ही हुये हैं.

रामराम.

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2/04/2010 07:48:00 pm ×

आपके विचारों से सहमत हूं। कोई भी क्षेत्र अपवाद से अछूता नहीं।

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2/04/2010 09:32:00 pm ×

हर चीज़ को देखने के दो नज़रिए होते है..बाकी सब पीछे छोड़ते हुए हम तो बस यही कहेंगे आपके द्वारा दी हुई जानकारी हमें अच्छी लगती है....

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2/04/2010 09:52:00 pm ×

आप अपनी साधना में संलग्न रहें!
विरोधियों मे उलझकर अपनी ऊर्जा न कम होने दें!

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2/04/2010 10:10:00 pm ×

मैं आपके लेख लगातार पढ़ता रहता हूं, बहुत रोचक होते हैं. इसी तरह से अच्छे प्रयास करती रहें.

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2/04/2010 10:16:00 pm ×

शेयर वाले मामले में गणना में कोई भूल हुई होगी .

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2/05/2010 12:04:00 am ×

.
.
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Major features of weather forecast (upto 1730 hours IST of 7th February, 2010)

increase in minimum and maximum temperatures by 2-4oC over northwest India during next 3 days.
Light to moderate rain/snow will occur at a few places over Jammu & Kashmir and Himachal Pradesh from tomorrow and over Uttrakhand from 6th onwards.
Isolated rain/thundershowers would occur over Madhya Pradesh, Vidarbha and Chhattisgarh during next 24 hours.
Dry weather conditions over remaining parts of the country.

Warning: Nil


Weather Outlook (upto 1730 hours IST of 9th February, 2010)

Widespread rain/snow with heavy to very heavy falls at a few places will occur over Jammu & Kashmir and isolated heavy falls will occur over Himachal Pradesh.
Light to moderate rainfall will occur plains of northwest India.
Dry weather conditions will prevail over remaining parts of the country.

आदरणीय संगीता जी,

कुछ उल्लेखनीय बिगड़ाव नहीं होगा मौसम में,

आभार!

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2/05/2010 12:09:00 am ×

अविश्वास की आंधियों में यह दिया जलता रहना चाहिये।
सफल गणना के लिये बधाई स्वीकारें।

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2/05/2010 12:20:00 am ×

गुरुत्वाकर्षण नाम में ही इस का जवाब छिपा है। विज्ञान को कहने की आवश्यकता नहीं है। गुरुत्वाकर्षण को भौतिक प्रयोगों से सिद्ध किया जा चुका है। जब कि ज्योतिष में कुछ भी सिद्ध नहीं है।

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2/05/2010 07:52:00 am ×

हमारा तो ज्योतिष पर अटूट विश्वास है....

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2/05/2010 08:26:00 am ×

शेयर बाजार को आज देखिये आज शायद बाजार का बेन्ड बजने वाला है। आपके कहे अनुसार हम इस सप्ताह पहले ही माल बेच दिये थे, फ़ायदे में रहे।

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2/05/2010 11:51:00 am ×

विज्ञान अभी तक इतना आगे नहीं बढ़ पाया है की ज्योतिष की बातों को सिद्ध कर सके .
यह विज्ञान की कमजोरी है .
आपको बधाई

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2/05/2010 11:53:00 am ×

सही कहा है जी आपने

ऊल-जलूल तर्क देने के बजाय चुप रहना ही बेहतर है।
आप अपने पथ पर चलते रहो जी

प्रणाम

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sandeepsaab
admin
2/05/2010 11:55:00 am ×

as per your prediction weather in rajasthan was not good during your predicted dates.

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2/05/2010 01:21:00 pm ×

अरविंद मिश्रा जी
इस पूरे आलेख में मैने गलतियों को स्‍वीकारा नहीं .. तो और क्‍या किया है ??
पर आपलोग तो ज्‍योतिष में एक भी गल्‍ती को स्‍वीकारना ही नहीं चाहते हैं .. ज्‍योतिष में गल्‍ती मतलब तुक्‍काशास्‍त्र !!

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2/05/2010 01:27:00 pm ×

दिनेशराय द्विवेदी जी,
विज्ञान को आप सिद्ध मानेंगे .. तभी तो सिद्ध हो पाएगी .. गूगल सर्च में 'आंधी बारिश' लिखकर न्‍यूज में सर्च करें .. 12 जनवरी के आसपास के 13 खबर मिलेंगे .. और 4 फरवरी के 13 खबर मिलेंगे .. दोनो ही दिनों की तिथियों के बारे में मैने मौसम के लिए खास ग्रह स्थिति बतायी थी .. मौसम पर ग्रहों का प्रभाव पडता है .. इसके लिए इससे बडा प्रमाण और क्‍या हो सकता है ??

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