कोई भी धर्म देश , समाज या मानवता से ऊपर नहीं होता !!

September 21, 2010

indian religion facts

विश्‍वभर में सभी धर्म की स्‍थापना लोगों में उदारता विकसित करने के लिए ही हुई है। दुनिया के सभी धर्मों का उदय पशु को मनुष्‍य बनाने के लिए हुआ है , इसलिए उसमें जीवन जीने से संबंधित एक एक बात की चर्चा है , पर वही धर्म आज मनुष्‍य को पशु बनाने के लिए उद्दत है। धर्म को लचीला होना चाहिए , ताकि युग के साथ साथ नियमों में परिवर्तन किया जा सके। हमारे कुछ महापुरूषों ने कई पंथ चलाकर इस दिशा में प्रयास भी शुरू किया , पर हर वर्ग का सहयोग न मिल पाने से उनका प्रयास अधूरा ही रह गया।

indian religion facts



जहां परंपरागत ज्‍योतिष ग्रहों की किसी भाव में उपस्थिति और दृष्टि के हिसाब से ग्रहों की शक्ति का आकलन करता है , वहीं 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' में ग्रहों के शक्ति के निर्धारण के लिए सूर्य से उनकी को‍णात्‍मक दूरी और ग्रहों की गति का ध्‍यान रखा जाता है। वर्तमान में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' दृष्टि से धार्मिक क्रियाकलापों के लिए जिम्‍मेदार ग्रह बृहस्‍पति बहुत ही कमजोर स्थिति में है , क्‍यूंकि वह सूर्य के आमने सामने और अपेक्षाकृत कम शक्ति में है। धर्म और भाग्‍य का स्‍वामी ग्रह बृहस्‍पति जब भी आसमान में मजबूत होता है , वह धर्म का सकारात्‍मक पक्षों को दर्शाता है , जबकि आसमान में उसकी स्थिति कमजोर होती है तो उसकी कमजोरियों को झेलने को हमें बाध्‍य होना पडता है। 

बृहस्‍पति तो अभी कमजोर है ही , उसके साथ चंद्रमा की युति को भी 23 और 24 सितंबर को लगभग 5 बजे से 7 बजे तक पूर्वी क्षितिज पर आसमान में उदित होते देखा जा सकता है। 25 सितंबर के बाद बृहस्‍पति से चंद्र की दूरी के बढते जाने के साथ ही साथ बृहस्‍पति के प्रभाव का खात्‍मा होना चाहिए। आसमान में बृहस्‍पति की यही स्थिति इतनी बारिश के लिए भी जिम्‍मेदार है , जिसने कई प्रदेशों में लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इसलिए मैने तीन चार दिन पूर्व के आलेख में ही लिखा था कि कॉमनवेल्‍थ गेम को भीषण बारिश का सामना नहीं करना पडेगा।  पर इस योग के ठीक पहले आनेवाला बाबरी मस्जिद और रामजन्‍मभूमि के मामले का निर्णय धर्म के मामलों में कट्टर तौर पर जुडे लोगों को तनाव देनेवाला ही होगा

ईश्‍वर एक है , चाहे उसे राम कहा जाए रहीम , अल्‍लाह या गॉड ... ये तो कहनेवाले पर निर्भर है। आस्‍था आस्‍था की बात है , आज के युग में भी बडे रूप में मौजूद समस्‍याओं को समाप्‍त करनेवाले को हम भगवान या महात्‍मा ही मानते हैं , मानते ही रहेंगे। पर उनके नाम से अधिक महत्‍व उनके विचारों को दिया जाना चाहिए , तभी हम उनके सच्‍चे पुजारी माने जा सकते हैं। इस ख्‍याल से चाहे हम किसी भी धर्म के हों , बाबरी मस्जिद और राम जन्‍मभूमि के मामले का न्‍यायालय का विवेकपूर्ण निर्णय  को स्‍वीकारने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि कोई भी धर्म देश , समाज या मानवता से ऊपर नहीं होता , हम भारत के नागरिक हैं और भारत की रक्षा के लिए हमें एकजुट रहना चाहिए। आइए अपने धर्म को भूलकर हम शपथ लें कि हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे , जिससे देश को थोडा भी नुकसान पहुंचे !!

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24 Komentar
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देश हित से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं... ऐसी विचारधारा होना चाहिए ....स्वागत योग्य विचार प्रस्तुत करने के लिए आभार.

Balas
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अब एकता और अंतर्मन से एकता हो, तभी मानवता का संरक्षण और विकास संभव है अन्यथा परिणाम बहुत ही विकराल होंगे......

आपकी पोस्ट पढ़ कर अच्छा लगा

धन्यवाद !

Balas
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धर्म पर यही विचार अपने भी हैं. ये देश समाज और मानवता से ऊपर नहीं है.

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देखते है क्या होता है , सब अच्छा ही हो तो अच्छा रहेगा ....

इसे भी पढ़े और कुछ कहे :-
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/86.html

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धर्म वही है जो धारण करने योग्य हो और देश,समाज तथा मानवता संबंधी विचार उसके केंद्र में हैं।

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देश समाज और मानवता हित से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं...
पोस्ट पढ़ कर अच्छा लगा

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देश हित और मानव हित से बढ़कर कुछ नहीं होता ...
अच्छी पोस्ट !

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dharyati iti dharmah......

sundar chintan ke liye aabhar

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सलीम खान, कैरानवी और डा साहब इसका सही उत्तर दे पायेंगे...

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सुन्दर और सार्थक सन्देश....साधुवाद.

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लोग पता नहीं धर्म के साथ अहम् क्यों जोड़ देते है
ये तो दूध के साथ मूली या नीबू खाने जैसा होता है
परिणाम बेहद खराब ही सामने आता है

या तो आजकल गुरुओ की कमीं है या फिर मीडिया की दया से कमीं नजर आती है

कट्टर होना ही है तो मानवता के लिए होना चाहिए

मेरे अनुसार ये क्रम भी उचित होगा

१. मानवता
२. देश
३. धर्म

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लोग पता नहीं धर्म के साथ अहम् क्यों जोड़ देते है
ये तो दूध के साथ मूली या नीबू खाने जैसा होता है
परिणाम बेहद खराब ही सामने आता है

या तो आजकल गुरुओ की कमीं है या फिर मीडिया की दया से कमीं नजर आती है

कट्टर होना ही है तो मानवता के लिए होना चाहिए

मेरे अनुसार ये क्रम भी उचित होगा

१. मानवता
२. देश
३. धर्म

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Bilkul sahi aapka kahna hai.. Hame sab hit ka dhyan rakhana chahiye.

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सही कह रही हैं आप । कोई जाए ज़रा उनको समझाए ये बात ।

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सही सन्देश,इस विवादित मामले में,हिंसा ना फेले तो अच्छा है ।

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सही सन्देश,इस विवादित मामले में,हिंसा ना फेले तो अच्छा है ।

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मानवता धर्म का अभिन्न अंग है और मानवता का संबंध समाज से ही होता है। धर्म की अवधारणा देश और समाज से कहीं अधिक व्यापक है।

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Mahodya,
Vichar bilkul sahi hai.Bhumi ka Bh,Gagan ka Ga,Vayu ka Va,Agni ka aa ki matra,Neer(Jal) ka Na mil kar BHAGWAN hota hai chunki Ye tatwa khud hi baney hai isliye KHUDA hai,inka kam Generate,Oprate,Destroy karna hai jsliye yahi GOD hai.Jhagra to vyapar ka hai-janta ka nahi.

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भगवान ने हमें इंसान बनाया
पर जाति और धर्म की लड़ाई हमने खुद है पाला
हिन्दू हों या मुस्लिम हों
हम सभी हैं मानव
मानव मेरी जाति
सत्य व मानवता मेरा धर्म
क्यों लड़ें हम धर्म व जाति के नाम पर
रमजान (RAMJAN) के प्रारंभ में है राम (RAM)
दिवाली (DIWALI) अंत में है अली (ALI)
तो फिर हम कैसे दो हुए?
हम दो नहीं हम एक हैं
हम हिन्दू-मुस्लिम नहीं
हम मानव हैं
हम इंसान हैं
सत्य व मानवता मेरा धर्म
इंसानियत मेरा फर्ज
हम दो नहीं हम एक हैं
हम मानव हैं
हम मानव हैं

--

महेश कुमार वर्मा
Webpage : http://popularindia.blogspot.com
E-mail ID : vermamahesh7@gmail.com
Contact No. : +919955239846
-----------------------------------

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United we stand , divided we fall.

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कोई भी धर्म देश , समाज या मानवता से ऊपर नहीं होता , हम भारत के नागरिक हैं और भारत की रक्षा के लिए हमें एकजुट रहना चाहिए। आइए अपने धर्म को भूलकर हम शपथ लें कि हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे , जिससे देश को थोडा भी नुकसान पहुंचे !
सही और सच्चा वक्तव्य ।
आशा करते हैं कि सभी लोग संयम से काम लेंगे और बुरा समय निकल जायेगा ।

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आदरणीय संगीता जी , एक मत - मतान्तर जागरण के 'अयोध्या इतिहास के आईने में ' ब्लॉग पर चल रहा है |उसमें मेरी टिप्पणी पर अनेक विद्वानों ने अपने विचार रखे हैं | उनका एक जबाब मैंने दिया है | उसे आपके अवलोकन के लिये प्रेषित कर रहा हूँ | अगर आवश्यकता पडी तो आपका लेख भी वहाँ उद्धृत करूँगा, आशा है आपकी सहमति रहेगी |
"अंग्रेज और यूरोपीय इतिहासकारों व अन्य अनेक विदेशी यात्रियों के विचारों के बारे में मुझे ज्ञात है | उसके बावजूद , आप लोगों की सलाह के अनुसार मैंने उस साईट को पुनः खोलकर देखा | मेरा सरोकार राम मंदिर वहां रहे होने पर प्रश्न चिन्ह खड़े करना या बाबरी मस्जिद गिराए जाने के ओचित्य या अनोचित्य का विश्लेशण करना नहीं है | मेरा मन्तव्य मात्र इतना है कि किसी भी देश या कौम (समाज) का गौरव, मात्र अतीत के गौरव को पुर्स्थापित करके नहीं बनाया जा सकता | इस प्रयास में जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है , उनका ह्रदय ही जानता है |
एक बात जो मेरे मन को मथती है , तिरुपति , शिरडी का साईं मंदिर एवं अन्य अनेको जगह जो आम भक्तों के लिये श्रद्धा और पूजा के स्थल हैं , किस तरह कमाई का जरिया बने हुए हैं | यदि आपके पास पर्याप्त पैसा है तो आपको दर्शन जल्दी हो जायंगे , नहीं तो कभी कभी दो दिन भी लाइन में लगना पड़ सकता है | एक तरफ अरबों की सम्पति वाले मंदिर हैं , करोड़ों रुपये की लागत वाले रिहाईशी (मुकेश अम्बानी ) घर हैं और दूसरी तरफ हर ठंड में फुटपाथ पर सोते हुए मरने वाले लोग हैं | यह सच है कि करोड़ों हिंदुओं की राम में आस्था है , पर , उन्हीं करोड़ों में से करोड़ों नहीं तो लाखों भगवान के नाम पर इन्हीं धर्म संस्थानों के सामने भिक्षा (भीख ) माँगते जिंदगी गुजारते हैं | मेरे अनुसार देश या समाज का गौरव प्रजा का खुशहाल होना ही होना चाहिये | हो सकता है मेरी अभिव्यक्ति में त्रुटि हो , पर आप मेरे मंतव्य को अवश्य समझने की चेष्टा करें |"
माफी के साथ कि आपका काफी वक्त जाया हो सकता है |
अरुण कान्त शुक्ला 'आदित्य '-

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बहुत अच्छे विचार हैं आपके देश भक्तिऔर देश सेवा ही हर नागरिक का पहला कर्त्तव्य है।

http://sbhamboo.blogspot.com/2010/09/blog-post_26.html
हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

मालीगांव
साया
लक्ष्य

Balas