आस्‍था और प्रेम किस हद तक अतिशयोक्ति को जन्‍म देते हैं ??

October 05, 2010
1999 तक पूरे मनोयोग से ज्‍योतिष का अध्‍ययन करने के बाद  बोकारो में रहते हुए मैने लोगों को ज्‍योतिषीय सलाह देने का काम शुरू कर दिया था। मैने पहले भी अपने एक आलेख में लिखा है कि 1998 से 2000 के समय में आसमान में शनि की स्थिति किशोरों को बुरी तरह प्रभावित करने वाली थी और उस दौरान अधिकांशत: टीन एजर बहुत ही परेशानी में अपने मम्‍मी पापा के साथ मेरे पास आते रहें। तब वे इतने परेशान थे कि मेरे समझाने बुझाने का भी उनपर कोई खास असर नहीं होता था। सामान्‍य तौर पर होनेवाले बुरे ग्रहों के प्रभाव को भी मैं सर्दी खांसी की तरह ही लेती हूं , जो जीवन की लडाई के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में मदद करता है।

एक दिन एक अभिभावक मेरे पास आए , उनका टीन एजर बेटा घर छोडकर कहीं चला गया था। मैने उसके जन्‍म विवरण के आधार पर उसकी जन्‍मकुंडली बनायी , और आवश्‍यक गणनाएं की और बताया कि अप्रैल के बाद ही उसके घर लौटने की संभावना है। उस समय दिसंबर ही चल रहा था और अप्रैल आने में काफी समय बचे हुए था , मात्र 16 वर्ष का हर सुख सुविधा में पलने वाला बच्‍चा 4 महीने घर , शहर के बाहर कैसे काट सकता है , माता पिता उसकी आस ही छोड चुके थे। पर मैं जानती थी कि दो ढाई वर्षों तक चलनेवाला शनि भी लोगों को वर्ष पांच महीने अधिक परेशान किया करता है।

मई माह में एक दिन अचानक वो सिन्‍हा दंपत्ति हमसे बाजार में मिले , उनकी पत्‍नी बहुत परेशान थी , मुझसे कहा कि आपका कहा समय भी समाप्‍त हो गया , बेटा तो नहीं आया। मैने कहा कि नहीं , मेरा दिया समय समाप्‍त नहीं हुआ है , मैने अप्रैल के बाद कहा है , जून तक आने की उम्‍मीद है , जून में न लौटे तब कुछ गडबड माना जा सकता है। उसके दो चार दिनों बाद ही उ प्र से सूचना मिली कि उनका बेटा सुरक्षित किसी चीनी के मिल में काम कर रहा है। अभी उसकी तबियत खराब है , मिल के मालिक ने पहले उन्‍हें फोन किया और फिर अपने एक कर्मचारी के साथ उसे बोकारो वापस भेज दिया।

उस समय से उक्‍त दंपत्ति हर समस्‍या में नियमित तौर पर मेरी सलाह लेने लगे। धीरे धीरे मुझपर उनका विश्‍वास जमता चला गया। कभी‍ कभी उनके रेफरेंस से भी मेरे पास किसी और तरह की समस्‍या से जूझते लोग आते रहें। उसमें से कुछ लोग मेरे संपर्क में अभी भी हैं , कुछ नहीं भी , पर सिन्‍हा दंपत्ति का मुझपर अतिशय आस्‍था और प्रेम हैं , जिसका परिणाम अभी दो चार दिन पूर्व उनकी अतिशयोक्ति में देखने को मिला।  मेरे पास एक दंपत्ति आए , उनका बेटा खो गया है। उन्‍होने बताया "सिन्‍हा दंपत्ति ने हमें भेजा है , क्‍यूंकि उनके बेटे के खोने पर आपने उन्‍हें बता दिया था कि उनका बेटा ईख पेर रहा है। अब हमें भी बताइए कि मेरा बेटा कहां क्‍या कर रहा है ??"

मैं तो चौंक पडी , इस तरह की बातें मैं न तो बताती हूं और न ही बताने का दावा करती हूं। किसी प्रकार के तंत्र मंत्र की सिद्धि करने वाले , जो भविष्‍य को नहीं , सिर्फ भूत को स्‍पष्‍ट देखा करते हैं , उनके लिए शायद यहां पर जबाब देना आसान हो , जैसा वे दावा करते हैं , पर ज्‍योतिष जो मूलत: समय की जानकारी देने वाला विषय है , भूत और वर्तमान को भी संकेत में देखा करता है और भविष्‍य को भी , अपनी विद्या के आधार पर इसका स्‍पष्‍ट जबाब मेरे पास न था । प्राचीन ऋषि महर्षियों की तरह दिव्‍य ज्ञान भी मेरे पास नहीं , इसलिए मैं लोगों में ग्रहों के प्रभाव का वैज्ञानिक सोच भरना चाहती हूं ,पर ऐसा नहीं हो पाता है । उस वक्‍त मैं सिर्फ यही सोंच रही थी कि आस्‍था और प्रेम किस हद तक अतिशयोक्ति को जन्‍म देते हैं ??

Share this :

Previous
Next Post »
8 Komentar
avatar

bahut hi umda baat likhi hai aapne

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

Balas
avatar

Jyotish ke mool tattvon mein kisee samay manovigyan kaa mahattvapoorna yogdaan huaa kartaa thaa jiske bina vyakti vishesh ka bhavishya bataa paane kee shaayad kalpana bhee nahin kee ja sakti hai kyonki bhagwaan ne har manushya ka vyaktitva alag banaya hai. kyaa aaj bhavishyavakta apne gyaan kee baatein karne se pahle is baare mein bhee kuchh sochte hain?

Balas
avatar

आप अपनी बात वैज्ञानिक तरीके से कहती हैं ...सिन्हा दम्पति का बेटा आपके बताये समय तक वापस आ गया तो आस्था तो होनी ही थी ...अच्छी पोस्ट

Balas
avatar

उम्दा पोस्ट।
आस्‍था और प्रेम किस हद तक अतिशयोक्ति को जन्‍म देते हैं!
..अतिशयोक्ति ही नहीं अंधविश्वास को भी जन्म देते हैं। आपने सच्ची अभिव्यक्ति के द्वारा भ्रम को दूर करने का प्रयास किया है।

Balas
avatar

अच्छी पोस्ट है
अक्सर होता यही है...लोग अतिशय प्रेम के कारण अपनी तरफ से इतनी बातें..बढ़ा-चढ़ा कर बता देते हैं कि असुविधा होने लगती है.

Balas
avatar

bahut achhi baat kahi hai aap ne,
bahut - bahut subh kamna

Balas
avatar

Aapki post achchi lagee. Par kya aap ne jab ek dampatti ka khoya beta wapas dilaya (we to yahee samaz rahe hain ) to dusare bhee aa gaye aapke pas. Museebat men to log sahra dhoondate hee hain. ye aapko ajeeb lag saktee hai par us dampatti keee bat samazi ja saktee hai.

Balas
avatar

आस्था और फलस्वरूप स्वाभाविक प्यार में अतिशयात्मकता, मानवीय कमजोरी है ! वे लोग आपके आभारी रहेंगे अतः आपके प्रति श्रद्धा, समय के साथ रूप परिवर्तन करते करते, यहाँ तक का पंहुंच गयी !
सीधे साधे लोगों की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है यह जिसे कठोर लोग झूठ बोलना और आपके द्वारा किया गया प्रचार भी बता सकते हैं ! शुभकामनायें !
सादर

Balas