मकर , कुंभ और मीन लग्‍न वालो के लिए लग्‍न राशिफल ... कैसा रहेगा आपके लिए वर्ष 2020 ??

मकर , कुंभ और मीन लग्‍न वालो के लिए लग्‍न राशिफल ... कैसा रहेगा आपके लिए वर्ष 2020 ?? मकर , कुंभ और मीन लग्‍न वालो के लिए लग्‍न राशिफल  ... कैसा रहेगा आपके लिए वर्ष 2020 ?? Reviewed by संगीता पुरी on January 17, 2012 Rating: 5

6 comments:

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

वाह!
बहुत बढ़िया!
अपनी सुविधा से लिए, चर्चा के दो वार।
चर्चा मंच सजाउँगा, मंगल और बुधवार।।
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

Asha Joglekar said...

अच्छी जानकारी ।

कंचन सिंह चौहान said...

आने वाले वर्ष की जानकारी करने से पहले पिछले का विश्लेषण करती चलूँ:

१‍. अगस्त तक क्या वर्ष भर बंधु बांधव की मदद ही करनी पड़ी, मदद पाने की स्थिति तो बनी नही। हाँ शॉपिंग करने के अवसर ज़रूर बने।
२. २० जनवरी से ८ फरवरी तक नौकरी को ले कर उतने विवाद बने रहे, जितने कभी नही बने होंगे। संपन्न लोगो से संपर्क भले हुआ विचार विमर्श जैसी स्थिति तो नही आई। हाँ ७ फरवरी को एक आयोजन में शामिल होने का अवसर मिला, जहाँ अच्छे लोगों से मिलना भी हुआ और सम्मान भी मिला।
३. २५ जनवरी तक कोई लाभ नही हुआ। छोटी बड़ी किसी भी प्रकार की संपत्ति प्राप्त नही हुई।

४. ८ फरवरी से जून तक स्वास्थ्य गड़बड़ ही रहा। आत्मविश्वास की कमी बनती बिगड़ती रही। आर्थिक स्थिति कमजोर ही रही, मजबूत बनाने का प्रयास तो रहेगा ही ऐसी स्थिति में।
५. मार्च अप्रैल में प्रभावशाली लोगों से संपर्क रहा या नही ये तो नही स्मरण लेकिन कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग किया। भाग्य , भगवान , धर्म . ये सब चिंतन के विषय बने रहे। धार्मिक क्रियाकलाप में व्यस्तता रही! आध्यात्म की ओर भी ध्यान गया।
६. 13 मार्च से 4 अप्रैल तक क्या वर्ष भर झंझट उपस्थित रहा। धार्मिक क्रियाकलापों के बाद भी निराशा भी वर्ष भर बनी रही।
७. 26 मार्च से 16 मई तक बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण रहे।किसी सामाजिक कार्यक्रम में पिता पक्ष का कोई महत्व नही रहा। कर्मक्षेत्र में व्यस्तता रही मगर प्रतिष्‍ठा बढने वाली कोई बात नही हुई।
८. 14 अप्रैल से 9 जून तक कोई महत्वपूर्ण लाभ नही रहा। सिवाय कहीं जाने और कुछ सम्मान पाने के।
९. 16 मई से 27 जून तक पिता पक्ष किसी भी प्रकार से कमजोर नही रहा। बल्कि एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने से सम्मान में वृद्धि ही हुई और आर्थिक लाभ भी।
१०‍. 27 जून से अगस्त के पहले सप्ताह तक बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण रहे, ये माना जा सकता है परंतु किसी सामाजिक कार्यक्रम में पिता पक्ष का महत्व नही दिखाई दिया, कर्मक्षेत्र में भी कोई बडी जबाबदेही नही मिली। जून अंत में प्रतिष्‍ठा बढाने वाली कुछ बात हुई।
११. ९ जून से ही नही पूरे वर्ष, किसी भी प्रकार के लाभ की बात नही हुई। कर्ज़ पर कर्ज़ चढ़ता रहा। किसी प्रकार की संपत्ति नही अर्जित हुई। हाँ माता का सहयोग रहा।
१२. 25 जून से 15 जुलाई तक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत गुणों को मजबूती देने के कार्यक्रम बना। धन की स्थिति मजबूत किसी भी तरह मजबूत नही हुई।
१३. मार्च से ले कर से लेकर नवंबर तक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के मामले तो ठीक रहे लेकिन, मार्च से आज तक धन कोष की स्थिति बहुत बुरी बनी रही।
१४. जुलाई और अगस्त में कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना पड़ा। भाग्य , भगवान , धर्म . ये सब चिंतन के विषय बने रहे। धार्मिक क्रियाकलाप में व्यस्तता रही! आध्यात्म की ओर भी ध्यान गया।
१५. वर्ष पर्यंत झंझट बने ही रहे १६ जुलाई से अगस्त के बीच क्या विशेष हुआ इतना याद नही।
१६. मार्च से आरंभ हुए पारिवारिक कष्ट में अक्तूबर से और अधिक वृद्धि हो गई। जिससे भाई.बहन,बंधु बांधवों से विचार के तालमेल का अधिक सुदृढ़ बना। सहकर्मियों से जो संबंध जनवरी से खराब चल रहा था, वो अक्टूबर से एकदम सही हो गया। शापिंग के कार्यक्रम बने नही। बाहरी व्यक्ति या बाहरी स्थान से कोई तकलीफ नही हुई। अक्टूबर में साहित्यिक सम्मेलनों और हितैषियों से मिलने के कुछ कर्यक्रम अवश्य बने, जो सुखद ही रहे।
१७. फिर कहना होगा कि झंझट साल भर रहे, सितंबर अक्टूबर उससे परे नही।
१८. नवंबर से अब तक स्थितियाँ बद से बदतर हो गई हैं। सुलझाने में प्रभाव की कमजोर स्थिति बनी हुई हैं। हाथ में अब तक असफलता ही दिखाई पड रही है। परेशान न होना संभव ही नही हो पा रहा।धार्मिक क्रियाकलापों के अलावा कोई चारा नज़र भी नही आ रहा और बाद भी निराशा ही बनी हुई है।
१९. पूरे दिसंबर प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनी रही। झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना पड़ा। भाग्य , भगवान , धर्म . ये सब चिंतन के विषय बने हुए हैं। क्रियाकलाप में व्यस्तता के अलावा कोई चारा भी नही।आध्यात्म अब परेशान कर रहा है, प्रश्नव्यूह में फँसी पा रही हूँ खुद को .......














संगीता पुरी said...

कंचन जी , सिर्फ एक लग्‍न को ध्‍यान में रखकर यह राशिफल तैयार किया गया है .. बाकी ग्रहों की स्थिति भी कुछ अच्‍छा बुरा परिणाम लाती हैं .. मैं जानना चाहूंगी कि पिछले वर्ष के वर्षफल में और आपके जीवन में घटित घटनाओं में कितनी सत्‍यता रही ??

कंचन सिंह चौहान said...

बिंदुवार लेखा जोखा तो दे ही दिया संगीता जी!

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