बोलने और लिखने में सरल सार्थक नाम अधिक उचित है !!

किसी खास तरह की ग्रहस्थिति का प्राचीन ऋषि महर्षियों ने पृथ्‍वी पर कुछ खास प्रभाव देखा , तो उसे सही ढंग से समझने के लिए पूरी ताकत लगा दी और उसका ही परिणाम है कि एक सुव्‍यवस्थित ज्ञान के रूप में ज्‍योतिष शास्‍त्र विकसित हो सका। चंद्रमा के किसी खास नक्षत्र और उनके विभिन्‍न चरणों में जन्‍म लेने वाले जातकों के स्‍वभाव पर पूरा रिसर्च करने के लिए उन्‍होने जातको के नाम खास अक्षर से रखने की परंपरा शुरू की , ताकि जन्‍म विवरण या जन्‍मकुंडली नहीं होने पर भी उनके चरित्र के बारे में कुछ समझा जा सके। प्राचीन काल में हर गांव के पंडितों को इतनी जानकारी होती ही थी कि वे पंचांग से बच्‍चों की जन्‍मकुंडली बना सके और नक्षत्र के आधार पर उनका नामकरण कर सकें। उस नाम से ही जातक के चारित्रिक विशेषताओं को समझने में मदद मिलती थी, इसलिए नाम का महत्‍व माना गया।

भारतीय संस्कृति में 16 संस्कारों में नामकरण संस्कार का कम महत्‍व नहीं होता था। विधि विधान से नामकरण करने की परंपरा का ज्‍योतिषीय आधार हुआ करता था। किसी शुभ मुहूर्त्‍त में नामकरण जन्म के 11 से 27 दिन के अंदर किया जाता था। शिशु के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में संचरण करता है, वह राशि जन्म राशि कहलाती है और इस राशि में आने वाले नामाक्षर पर उसका नाम रखा जाता है। अक्षर विशेष में नाम रखने के लिए कुल 27 नक्षत्रों के चार चार चरण किए गए हैं। इनमें जिस चरण में जन्म होता है, उसी अक्षर विशेष पर नाम रखा जाता है। उदाहरण के लिए बालक का जन्म अश्विनी नक्षत्र के पहले चरण में हुआ है तो बालक का नामाक्षर चू होगा। अश्विनी नक्षत्र में चार अक्षर चू, चे, चो और ला अक्षर होते हैं। नाम कम अक्षरों वालों होना अधिक उचित होता है। पुत्र का नाम सम व पुत्री का नाम विषम संख्या में रखा जाता है।

जब पंडितो के द्वारा नाम रखे जाने की परंपरा समाप्‍त हुई या जन्‍मकुंडली तक ही सीमित रह गयी , तब भी बहुत दिनों तक नाम दिन, महीने , तिथि , पक्ष, प्रहर या कभी कभी उनकी शारिरीक या पारिवारिक स्थिति के हिसाब से रखा जाता रहा , पर फिर भी लोगों के दिलोदिमाग में नाम का महत्‍व बना रहा और बच्‍चों में चारित्रिक विशेषताओं को बनाए रखने के लिए सुंदर और सार्थक नाम रखने की परंपरा शुरू हुई। आज तो बच्‍चे का सटीक नाम रखने के लिए अभिभावक काफी माथापच्‍ची करते हैं।पुराने बहुत से नामों को तो लोगों ने ओल्ड फैशन बनाकर साइड लाइन कर दिया है, आज हर कोई अपने बच्चे को नाम से एक अलग पहचान देना चाह रहा है। कुछ समय से लडकियों के नाम में अनन्या, नेहा, शगुन, भव्या, आस्था, अदिति, रिया, खुशी, अणिता, अन्या, अनुष्का, परी, दिया, नव्या, काव्या आदि बहुतायत में रखे जा रहे हैं , तो लडकों में प्रतीक, पीयूष, हर्षित, यश, शुभम, आर्यन, कृष्णा, अर्णव, सांई, आरुष, इशान, नील, ओम, विहान, आयुष, अभिनव, वैदांत, विवान, शौर्य आदि अधिक प्रसिद्ध हैं। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से नाम रखने में जातक की जन्‍मकुंडली को ध्‍यान में रखने की आवश्‍यकता नहीं, बच्‍चे का पुकारने का या वास्‍तविक नाम कुछ भी हो सकता है , पर बोलने और लिखने में सरल सार्थक नाम अधिक उचित है।

बच्‍चों के नाम चुनकर रखने की समस्‍या बहुत ही बडी है , इसका हल कई वेबसाइटों में मिल सकता है ....
www.indif.com
www.bachpan.com
www.pitarau.com
www. hinduchildnames.com
www.babynamenetwork.com
www.whereincity.com
www.hindubabynames.net
www.indianhindunames.com
www.hindunames.net
www.babynamesindia.com
बोलने और लिखने में सरल सार्थक नाम अधिक उचित है !! बोलने और लिखने में सरल सार्थक नाम अधिक उचित है !! Reviewed by संगीता पुरी on May 09, 2012 Rating: 5

8 comments:

संध्या शर्मा said...

जी हाँ संगीता जी आपने सही कहा है. बोलने और लिखने में सरल सार्थक नाम अधिक उचित है, वर्ना नाम अपना मूल अर्थ भी खो देते हैं, और जाने क्या से क्या बन जाते हैं...

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

स्वामी दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है कि नाम का सार्थक अर्थ निकलना चाहिए, नाम का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नदी, नालों, पहाड़ों, पशु-पक्षियों, जानवरों एवं स्थान वाचाक नाम नहीं होने चाहिए।

vijay kumar sappatti said...

बहुत अच्छी पोस्ट दीदी . ललित जी ने भी अच्छी बात कही है .बधाई .

Vinashaay sharma said...

सही है,बोलने और लिखने मे सरल और सार्थक नाम ही उप्युक्त है ।

Vinashaay sharma said...

बिलकुल सही लिखने और बोलने में सरल और सार्थक नाम ही उपयुक्त है ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत उपयोगी पोस्ट लगाई है आपने!

मुकेश पाण्डेय चन्दन said...

बहुत बहुत सुंदर........

विष्णु बैरागी said...

अनूठा नाम रखने का फैशन चल पडा है इन दिनों। ऐसे में, आपकी यह पोस्‍ट एक नई और अच्‍छी शुरुआत करा सकती है।

Powered by Blogger.