'वक्‍त की ताकत' को देखते हुए गत्यात्मक ज्योतिष ने दिए जीने के १० सूत्र ……।


    'वक्‍त की ताकत' को देखते हुए गत्यात्मक ज्योतिष ने दिए हैं जीने के १० सूत्र ……

  1. विरले लोग ही ऐसे होते हैं , जिनके अधिकांश ग्रह मजबूत और जीवन भर का समय या जीवन का हर पक्ष सुखात्मक  हो ! 
  2. विरले लोग ही ऐसे भी होते हैं , जिनके अधिकांश ग्रह कमजोर  और  जीवन भर का समय या  जीवन का हर पक्ष दुःखात्मक हो  !
  3. आपके जन्‍मकालीन ग्रहों की चाल के हिसाब से बने इस ग्राफ के अनुसार आपका अच्‍छा और बुरा वक्‍त चलता रहता है , उसपर ध्‍यान न दें और नियमित तौर पर अपने कर्म करते रहें। 
  4. जीवनयापन के लिए अपनी रूचि के कर्म ढूंढें , क्‍योंकि जितनी पहचान आपको आपके रूचि के काम में मिल सकती है उतनी कहीं नहीं। 
  5. कर्म करने वालों को बुरे वक्‍त में यथोचित सफलता नहीं मिलती,  पर उनके अनुभव में निरंतर वृद्धि होती है, जिससे भविष्‍य में उसके सफल होने की संभावना बनी रहती है। 
  6. जिन्‍हेंं अच्‍छे वक्‍त में उम्‍मीद से अधिक सफलता मिलने लगती है , वे थोडे लापरवाह हो जाते हैं, जिससे भविष्‍य में उनके असफल होने की संभावना बनती है। 
  7. यदि जीवन में अच्‍छा वक्‍त पहले आए तो अपने अधिकारों का सदुपयोग करें , जनहित के कार्य करें , आनेवाले बुरा वक्‍त भी कोई बडी समस्‍या नहीं लेकर आता।
  8. यदि जीवन में अच्‍छा वक्‍त पहले आए तो कभी भी अपने अधिकारों का दुरूपयोग न करें , बाद में आनेवाला बुरा वक्‍त आपको रूला सकता है। 
  9. यदि जीवन में बुरा वक्‍त पहले आए तो धैर्य बनाए रखें और काम करते रहें, वक्‍त कभी भी पलट जाता है और आपको अपने कर्मों का फल दे जाता है। 
  10. यदि जीवन में बुरा वक्‍त पहले आए तो धैर्य खोकर काम करना न बंद करें, क्‍योंकि आपने जब कुछ किया नहीं तो जब वक्‍त बदलेगा भी तो आपको कुछ नहीं दे पाएगा। 
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2 comments

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8/13/2015 07:58:00 pm ×

बहुमूल्य विचार .

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8/14/2015 06:23:00 pm ×

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (15-08-2015) को "राष्ट्रभक्ति - देशभक्ति का दिन है पन्द्रह अगस्त" (चर्चा अंक-2068) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
स्वतन्त्रतादिवस की पूर्वसंध्या पर
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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