ज्योतिष और आध्यात्म

 

Aadhyatm gyan in Hindi by jyotish

किसी खास युग में हर क्षेत्र में किसी प्रकार की सफलता प्राप्‍त करने के लिए चाहे जिन गुणों और ज्ञान का महत्‍व हो , वे किसी एक व्‍यक्ति को शीर्ष तक क्‍यूं न पहुंचा देते हो , उनकी देखा देखी वैसे गुणों को आत्‍मसात कर स्‍वयं भी ऊंचाई पर पहुंचने के लिए चाहे हमारे जैसे कितने भी लोग प्रयत्‍नशील क्‍यूं न हों , सफल होकर हम सांसारिक सफलताओं से लैस ही क्‍यूं न हो जाएं , पर वह चिरंतन और स्‍थायी सुख नहीं दे पाते। स्‍थायी मा‍नसिक सुख प्राप्‍त करने के लिए कुछ ऐसे नियमों की जानकारी आवश्‍यक होती है , जिसे हमारे महापुरूषों द्वारा हर धर्म के सिद्धांतों के रूप में जोड दिया गया। 

ये सिद्धांत किसी भी व्‍यक्ति से 'अहं' को दूर करते हैं और इनके पालन से हमारे क्रियाकलाप सर्वजनहिताय होते हैं। सिर्फ अपने बारे में ही नहीं , सारे प्राणियों के साथ साथ दुनिया के एक एक कण से प्‍यार और उनकी सुरक्षा के लिए चिंतन ही आध्‍यात्‍म की ओर जाने की सीढी है । आज के दौर में गलत हाथों में जाकर धर्म का स्‍वरूप भले ही विकृत हो गया हो , पर दुनिया के प्रत्‍येक धर्म की खासियत यही थी , इससे इंकार नहीं किया जा सकता।

Aadhyatm gyan in Hindi by jyotish

Adhyatma Vigyan

आज का युग पूरे स्‍वार्थ का हो गया है , हर व्‍यक्ति को सिर्फ अपने से मतलब है।  अपना शरीर , अपने परिवार , अपने बच्‍चे , अपना व्‍यवसाय और अपना ही विकास , इसके लिए हम कोई भी तरीका अपनाने को तैयार हैं। गलत धरातल पर खडे होने के बाद भी हम अपनी उपलब्धियों पर गुमान करते हैं , बच्‍चों को भी सांसारिक रूप से ही सफल होने के हर गुर सिखाते हैं। एक व्‍यक्ति नहीं , आज सारे ही आगे बढने के लिए एक दूसरे को धक्‍का दे रहे हैं। आज ताकतवर की ही चल रही है , अपनी अपनी ताकत का हम सब दुरूपयोग कर रहे हैं , ऐसे में समस्‍त चर अचर मुसीबत में हैं। जबतक खुद के साथ विपत्ति नहीं आ जाती , दूसरे की समस्‍या पर हंसना आज हमारा खेल बना होता है। पर जब हमारे ऊपर मुसीबत आती है और हम लाचार होते हैं , तब समझ में आता है कि हमने जीवन में क्‍या क्‍या गल्तियां की हैं और हमारी जीवनशैली क्‍या होनी चाहिए। पर तब पछताने के सिवा कुछ भी नहीं होता।


Jyotish and Aadhyatm

ज्‍योतिष की सहायता से हम ग्रहों के पृथ्‍वी के जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव का अध्‍ययन करते हैं। जिस प्रकार प्रकृति में मौजूद हर जड चेतन की तरह में कुछ न कुछ विशेषताएं होती हैं , इसी प्रकार प्रत्‍येक मनुष्‍य भी भिन्‍न भिन्‍न बनावट के होते हैं , प्रत्‍येक में अलग अलग क्षमता होती है , इसलिए सबके पास सबकुछ नहीं हो सकता। भले ही सभी जड चेतन एक जैसे जीवन चक्र से गुजरते हों , पर चूंकि मनुष्‍य सबसे अधिक विकसित प्राणी है , और इसके जीवन के बहुत सारे आयाम हैं , इस कारण एक जैसे दिखने के बाद भी मनुष्‍य की जीवनशैली एक जैसी नहीं। दुनियाभर में समान उम्र के लोग भी भिन्‍न भिन्‍न परिस्थितियों से गुजरने को बाध्‍य होते हैं , प्रकृति के खास नियम के हिसाब से एक का समय अनुकूल होता है तो दूसरे का प्रतिकूल ।

Aadhyatma sadhana Kendra

ज्‍योतिष विषय की सहायता से हमें ग्रहों की मदद से अनुकूल और प्रतिकूल परिथितियों को जानने में मदद मिलती है। जब अनुकूल समय होता है , तो हमारा आत्‍मविश्‍वास बढाने के लिए हमारे मनोनुकूल वातावरण होता है , जबकि प्रतिकूल समय में हमारे साथ ऐसी ऐसी घटनाएं होती हैं , जिनसे हमारे आत्‍मविश्‍वास पर असर पडता है। जब हम अपने मनोनुकूल समय में अपने अधिकार के साथ साथ कर्तब्‍यों का पालन भी करें , तो प्रतिकूल समय में हमें काफी राहत मिल सकती है। 

पर यदि मनोनुकूल समय में अधिकारों का दुरूपयोग करेंगे , तो उसका बुरा फल प्रतिकूल समय में हमें या हमारे संतान को अवश्‍य झेलने को मजबूर होना होगा। प्रत्‍येक बुरा कार्य करने से पहले हमारी अंतरात्‍मा बारंबार झकझोरती है , पर हम उसे अनसुना करते हैं , पर उस गल्‍ती को करने के बाद एक दिन भी चैन से नहीं रह पाते। जिस सांसारिक सफलता को देखकर हम प्रभावित होते हैं , उसका मनुष्‍य के सुख और चैन से कोई संबंध नहीं होता। प्रकृति से जुडा व्‍यक्ति ही सर्वाधिक सुख और चैन से रह सकता है।

Jeevan me Aadhyatm ka mahatwa

इसके अलावे ज्‍योतिष से हमें इस बात के संकेत मिल जाते हैं कि जातक के आनेवाले समय में किसी खास पक्ष का वातावरण सुखद रहेगा या कष्‍टप्रद ..  इस बात का अहसास होते ही प्रकृति के नियमों के प्रति हमारा विश्‍वास गहराने लगता है। चूंकि सुख और कष्‍ट की सीमा को जान पाना मुश्किल है , इसलिए हमलोग किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते , अंत अंत तक जीतने की कोशिश करते है , पर न जीत का घमंड होता है , न हार का गम । हम यह मान लेते हैं कि जो भी परिणाम हमारे सामने है , वो प्रकृति के किसी नियम के अनुसार हैं। 

हमने किसी समय कोई गल्‍ती की , जिसका फल हमें भुगतना पड रहा है। ऐसी स्थिति में हम दूसरों पर व्‍यर्थ का दोषारोपण नहीं करते , प्रकृति को जिम्‍मेदार मानकर अपने मन को कलुषित होने से बचा लेते हैं। हमें विश्‍वास हो जाता है कि यदि जानबूझकर दूसरा हमें कष्‍ट दे रहा है , तो प्रकृति उसका हिसाब किताब अवश्‍य रखती है और आनेवाले दिनों में उसका फल उसे स्‍वयं मिलेगा। इस प्रकार प्रकृति के नियमों के सहारे आध्‍यात्‍म का ज्ञान हमें ज्‍योतिष के माध्‍यम से मिल जाता है।

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संगीता पुरी

Specialist in Gatyatmak Jyotish, I write blogs on various topics particularly Astrology. My several books published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ organized by the newspaper ‘Prabhat Khabar’. गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723

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