गूगल से एकांगी और असंतुलित विकास

August 08, 2020 1 Comment
गूगल से एकांगी और असंतुलित विकास

 google with your name

आज का युग बहुत प्रगतिशील हैं, किसी विषय पर कुछ भी आपको देखना हो,  समझना हो,  आप गूगल पर सर्च कर लेते  हैं और उससे जुडी ढेर सारी खबरें आपको मिल जाती हैं ! ( google with your name ) उसके बाद आप एक लिंक से दूसरे लिंक पर और दूसरे से तीसरे लिंक पर जाते हैं और इंटरनेट आपकी जिज्ञासा के साथ रूचि को भी समझ लेता हैं ! उसके बाद गूगल तो क्या फेसबुक भी आपको वैसी ही न्यूज़ दिखाने लगता हैं !

आप समझ भी नहीं पाते और गूगल आपका एकांगी विकास आरम्भ कर देता हैं ! धीरे धीरे वह आपलोगो को वैसे ग्रुप्स,  वैसे पेज से परिचय करवाता रहता हैं,  जिसे आप न चाहते हुए भी लाइक करने लगते हैं ! उसके बाद आपके दिमाग को एक दिशा में ले जानेवाली सामग्री मिलती रहती हैं ! फुर्सत में रहने वाले लोग न चाहते हुए भी उसे देखने को मजबूर होते हैं और खास विचारधारा में फँसते चले जाते हैं !

चाहे राजनीतिक विचारधारा हो,  धार्मिक या फिर बौद्धिक - इंटरनेट अपने बिछाए जाल में आपको फांसने की कोशिश करता हैं और लगभग कामयाब होता हैं ! न्यूज़ चैनल्स तो आप बदल भी लेते हैं,  पर इंटरनेट घुमा फिराकर आपको वही दिखायेगा,  जिसकी ओर आपका थोड़ा भी रुझान गया हो ! लगातार follow up  करता हुआ आपके रुझान को कट्टर बना डालता हैं ! 

बच्चों की लिए तो ख़ासकर इंटरनेट इसलिए घातक हैं ! बच्चे ने एक दिन गेम खेल लिया या एक दिन कोई वीडियो देख ली तो इंटरनेट में उसके लिए गेम और वीडियो ही आते रहेंगे,  क्विज नहीं आ सकता ! इसलिए बच्चों पर खास ध्यान रखने की आवश्यकता हैं ! इंटरनेट ज्ञान का खजाना हैं,  सही ढंग से उपयोग किया जाये तो आपके बच्चों के व्यक्तित्व का अच्छा विकास कर सकता हैं ! बस ध्यान दें कि वे क्या सर्च कर रहे हैं?  

बड़े भी  इंटरनेट में एक तरह की बातें सर्च न करें,  यदि अपने व्यक्तित्व को संतुलित बना हो तो हर प्रकार की जानकारी सर्च करे,  फिर आपकी स्पष्ट पता चलेगा कि क्या उचित हो रहा हैं और क्या अनुचित ! कट्टरता उचित नहीं,  अपने को संतुलित बनाये ! गूगल में यह शक्ति आ चुकी है,  कि यदि पुरी दुनिया में एक तरह की विचारधारा बनाना चाहे तो बना सकता हैं ! इस बात को समझते समझते अधिकांश लोग उसकी चाल में फंस चुके होंगे !

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भगवान राम के बारे में

August 07, 2020 5 Comments
भगवान राम के बारे में

 

जब होश भी नहीं संभाली थी,  उस वक्त की यानि रट्टूमल वाले जमाने की बात हैं ! तब ऊँची कक्षाओं तक भी किसी भी प्रश्न का जवाब देने के  लिखने के लिए अगर पूरा नहीं तो पॉइंट्स तो रटने ही पड़ते थे ! आज की तरह ऑब्जेक्टिव का जमाना तो था नहीं, 8 से लेकर 20 नंबर तक के प्रश्नों के बड़े बड़े जवाब लिखने पड़ते थे ! एक भी पॉइंट छूटा कि नंबर पर कैंची चली ! वैसे में रटनेवाला ही अच्छे नंबर ला सकता था ! 

हिंदी में निबंध लिखने के लिए बड़ा कॉमन सा टॉपिक था,  आपके प्रिय कवि कौन? आपकी प्रिय पुस्तक कौन? साल की दो परीक्षाओं में से हर वर्ष एक में तो जरूर आता ! जाहिर हैं,  उस टॉपिक की तैयारी अच्छी तरह रखनी थी ! वैसे भी ब्रेन के तेज बच्चे आलसी होते हैं, अपनी रूचि की बातों को पढ़ने में जितनी दिलचस्पी रखते हैं, बाकी विषय के नंबर लाने में वैसा ही शार्टकट तलाशते हैं !

मैं 'आपके प्रिय कवि कौन? आपकी प्रिय पुस्तक कौन?' के लिए निबंध की कई पुस्तकों को पढ़ने और समझने की कोशिश की ! पर सफलता मुझे एक जगह आकर मिली,  जहाँ लेखक ने 'आपके प्रिय कवि कौन?' में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी का और 'आपकी प्रिय पुस्तक कौन?' में महाकाव्य रामचरित मानस की चर्चा की थी ! उनकी भाषा में दम था या भक्ति में,  मैं नहीं बता सकती,  पर दोनों निबंध दो चार बार पढ़ते ही कंठाग्र हो गए थे ! मैंने नंबर लाने में ही पूरे विद्यार्थी जीवन उनका भरपूर उपयोग किया ही,  अपने चरित्र में भी,  अपनी भाषा में भी उन खूबियों का जीवनभर उपयोग करने की कोशिश की,  जिसकी चर्चा लेखक ने इन दोनों निबंध को लिखने में की थी ! 

उस निबंध में लेखक ने लिखा था,  रामचरितमानस लेखक को इसलिए प्रिय थी कि एक दूसरे की इच्छा का सम्मान करने के लिए किसी ने खुद की चिंता नहीं की ! सबसे प्रेम करने वाले परोपकारी लोगों को अच्छा  तथा अहंकारी और स्वार्थी को बुरा कहा गया था ! रामायण के सभी अच्छे पात्र अपने अपने कर्तव्यों का पालन में लगे थे ! गोस्वामी तुलसी दास लेखक को इसलिए प्रिय थे,  क्योंकि उन्होंने बड़े ही सहज़  ढंग से सभी घटनाओं का वर्णन कर दिया था ! इतने सरल ढंग से कवि ने रामायण लिखी कि उनके दोहे,  उनकी चौपाइयां जन जन के कंठ में विराजमान हो गयी ! 

हमारे समय में कक्षा 11 में बोर्ड की परीक्षाएं होती थी ! मुझे तीन महीने फुर्सत में देखकर मेरी दादी ने घोषणा की,  इस साल की गर्मियों के दोपहर में मैं रामायण पाठ करूंगी और सभी महिलायें आकर सुनेंगी यानि बोर्ड की परीक्षा के बाद मेरे जिम्मे एक और परीक्षा आयी ! रामायण पाठ कैसे की जाती हैं,  पापाजी ने कुछ सिखाया,  समझाया,  वे कई बार पाठ कर चुके थे ! अल्हड़पन के उम्र में ही दो - तीन महीने रामायण पाठ को दिए,  बहुत अच्छा लगा था ! पर रामायण सपूर्ण नहीं हो पाया और मेरा रिजल्ट और एडमिशन का समय नजदीक आ गया,  बाकी कांड किसी और ने पूरे किये !

 पर राम के चरित्र को समझने में वह समय महत्वपूर्ण रहा ! समझ में आया कि राम को क्यों मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता हैं ? पर मैं मानती हूँ कि हमारे भक्ति से अधिक हमारे आचरण में राम होने चाहिए ! राम के प्रति भक्ति से भारत में उतना सुधार  नहीं हो सकता जितना राम को आचरण में रखने से हो सकता हैं !

मेरी कोरोना डायरी : कोरोना से कितना डरें कितना बचें

August 06, 2020 4 Comments
मेरी कोरोना डायरी : कोरोना से कितना डरें कितना बचें

Corona diary

जनवरी और फरवरी में विदेशो में खौफ भरा माहौल पैदा करने के बाद कोरोना वायरस ने अचानक भारतवर्ष में भी दस्तक दे दी ! मार्च में महानगरों में कोरोना के केसेज आने लगे,  उस समय सबके संपर्क विदेशो या विदेशियों से किसी न किसी प्रकार सिद्ध हो गए ! कोरोना की मारक क्षमता तो खास नहीं मानी जा रही, पर इसकी संक्रामक क्षमता इसे महामारी का नाम दे रही !

 अप्रैल में हमारे बच्चों का यूरोप यात्रा का कार्यक्रम था, पर यूरोप के माहौल को देखते हुए टिकटें रद्द कर दी गयी थी,  वीजा कैंसिल कर दिया था ! मार्च में विदेशों से आनेवाले लोगों में से कुछ सावधानी जरूर बरत रहे थे,  पर काफी लोग लापरवाही भी कर रहे थे ! कुछ लोग तो खुलेआम घोषणा कर रहे थे कि कोरोना वायरस साधारण सर्दी-खांसी हैं, लोगों का भयभीत करने की चाल हैं !

Corona virus in India

इनकी लापरवाही का नतीजा ऐसा हुआ केस गुणात्मक गति से बढ़ने लगे ! इसी दौरान सरकार ने लॉक डाउन की घोषणा की, सब घर बैठ गए ! अचानक आये इस समस्या से पूरा देश अव्यवस्थित हो गया।  फिर देश में अनलॉक की घोषणा हुई, फिर शुरू हुई लोगों की लापरवाही और उससे  बढ़ने लगा कोरोना संक्रमितों और उससे होने वाली मौत का आंकड़ा !

इसी समय तैयार हुई मेरी कोरोना डायरी,  जिसके सभी भाग सोशल मीडिया और ब्लॉग पर प्रकाशित होते रहें ! इस पुस्तक में मैंने अपनी डायरी के सभी लेखों को संग्रहित किया हैं ! इसको पूरा पढ़कर भरतीय समाज की मानसिकता, भारतीयों में कोरोना के प्रभाव और कोरोना से सम्बंधि बहुत सारी चर्चा होगी ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 50/- रुपये में उपलब्ध हैं !



हर्ड इम्युनिटी और कोरोना

July 29, 2020 1 Comment

Herd immunity meaning in Hindi and Corona

मार्च से ही दिल्ली-मुम्बई जैसे महानगरों में कोरोना का बड़ा फैलाव हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए प्रत्येक गाँव तक पहुँच गया ! हमने कोरोना के बिल्कुल शुरुआती दौर में जिस प्रकार की सावधानी रखने की सलाह दी थी, सभी पालन करते तो ऐसा बिल्कुल नहीं होता ! लॉक डाउन में ही हम कोरोना की चेन तोड़ने में कामयाब हो जाते ! लेकिन लोगों की जागरूकता की कमी ने ऐसा नहीं होने दिया !

अभी भी देश के विभिन्न भागों में कोरोना की चेन तोडना मुश्किल नहीं हैं, सोशल डिस्टैन्सिंग और मास्क का पालन करके हम आसानी से कोरोना की चेन तोड़ सकते हैं ! पर लोगों को कौन समझाए ? Herd immunity meaning in Hindi धीरे धीरे कोरोना के फैलाव ने देश को हर्ड इम्युनिटी प्राप्त करनेवाले लक्ष्य की दिशा में धकेल दिया हैं ! यह आसान तो नहीं हैं, पर इसे स्वीकार करना अब हमारी मजबूरी बन गयी हैं ! अब अधिकतम यही कर सकते हैं कि संक्रमण की गति धीमी कर दें !

Is herd immunity effective

herd immunity meaning in hindi

दिल्ली, मुम्बई और अन्य महानगरों या देश के अन्य भागों में किये गए टेस्ट की रिपोर्ट बता रही हैं कि विभिन्न जगहों पर कुल आबादी का 12% से लेकर 60% तक के लोगों में कोरोना के विरुद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गयी हैं ! Herd immunity meaning in Hindi )  इसका अर्थ यह हैं कि ये न तो अब कोरोना के कारण बीमाऱ पड़ सकते हैं, और न ही कोरोना के वाहक बन सकते हैं ! इस कारण अब ये संक्रमण की दर को कम करेंगे, कई जगहों पर एक कोरोना पॉजिटिव और एक कोरोना नेगेटिव के मध्य ढाल बनकर उपस्थित हो जाया करेंगे ! तीन महीने में 25% जनसंख्या को प्रभावित करनेवाला कोरोना को 50% तक पहुँचने में छह-सात महीने लग सकते हैं !

कोरोना जैसी बीमारी के विरुद्ध देश के सभी भागों में हर्ड इम्युनिटी बन जाने के पीछे जहाँ एक ओर स्वास्थ्य से मजबूत लोगों की इम्युनिटी काम करती हैं, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य से कमजोर लोगों की मौत भी होती हैं ! जहाँ जागरूकता हो वहाँ संक्रमण की दर को कम किया जा सकता हैं ! जहाँ बेहतर व्यवस्था हो, वहाँ मौत की दर को कम किया जा सकता हैं !

Why herd immunity is important

हम दिल्ली का उदाहरण लेकर चलते हैं ! जहाँ तहाँ किये जा रहे रैंडम टेस्ट के नतीजे बताते हैं कि दिल्ली की दो करोड़ आबादी में से 25% यानि 50 लाख लोग कोरोना के विरुद्ध एंटीबाडी बना चुके हैं ! यह आंकड़ा कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए आंकड़े से बहुत अधिक हैं ! यानि लोग कोरोना से पॉजिटिव भी हुए और नेगेटिव भी, न उन्हें न ही प्रशासन को इसकी जानकारी मिली ! कोरोना को सामान्य सर्दी खांसी समझते हुए दवा लेते रहें, लोगों को संक्रमित करते रहे और ठीक भी हो गए !

अब यदि दिल्ली के पचास लाख लोगो के पॉजिटिव होने और 13000 मौतों का अनुपात निकाला जाये, तो यह बहुत कम हैं , इसलिए कोरोना से घबराने की बड़ी वजह नहीं दिखती ! लेकिन इतने लोगों का ठीक होना 'हर्ड इम्युनिटी' नहीं उनकी 'अपनी इम्युनिटी' थी !  Herd immunity meaning in Hindi चूँकि समाज को हर्ड इम्युनिटी हासिल करने के लिए 70-75  प्रतिशत जनता का बीमारी से संक्रमित होना आवश्यक होता है, इसके लिए दिल्ली के और एक करोड़ लोगों को कोरोना से इन्फेक्टेड होना पडेगा और मौत का आंकड़ा लगभग 40, 000 पहुंचेगा ! उसके बाद ही दिल्ली में कोरोना से मरनेवालों की मौत रूक सकती हैं !

इसी प्रकार देशभर में लगभग सौ करोड़ लोगों के संक्रमण और कई करोड़ की मौत के बाद ही देश में हर्ड इम्युनिटी आ सकती हैं ! उसके लिए कोरोना को बहुत समय चाहिए होगा ! मेडिकल को अपनी व्यवस्था अच्छी रखनी होगी ! तबतक हमें सावधानी से जीना सीखना होगा, छोटे छोटे शहरों में और गाँव में अभी भी समय हैं, हम चाहे तो कोरोना के चेन को तोड़ सकते हैं, पर महानगरों को तो हर्ड इम्युनिटी का ही इंतज़ार करना होगा !

मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 50/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----


एस्ट्रोलॉजी इन हिंदी फॉर टुडे : हमारा गत्यात्मक ज्योतिष एप्प

July 29, 2020 2 Comments

Astrology in Hindi for today

कैसा अंतर्विरोध है कि जिस ज्योतिष को लोग अंधविश्वास मानते हैं , उसी ज्योतिष की एक मामूली राशिफल पढने ( Astrology in Hindi for today ) के लिए आधी आबादी बेचैन भी रहती है , दुनिया भर के पत्र पत्रिकाओं में राशिफल का प्रकाशन और मेरे चिट्ठे पर सर्च इंजिन से ‘राशिफल’ ढूंढते हुए इतने सारे पाठकों का आना इसकी पुष्टि तो अवश्य करता है।  परंतु बात यहीं पर ही समाप्त नहीं होती , राशिफल पढने के बाद अधिकांश लोग फिर इसकी बातों को हंसी मजाक में ही लेते हैं। ( Astrology in Hindi of today ) के इतने सर्च के बावजूद दुनिया भर के लोगों की इस मानसिकता का कोई अर्थ लगा पाना तो सचमुच बडा मुश्किल है। राशिफल के  रूप में दुनिया भर के लोगों को 12 भाग में विभाजित कर करोडो लोगों के लिए एक विशेष समयांतराल में एक जैसा भविष्यफल का लिखा जाना तो संदेह उत्पन्न करने के लिए काफी है ही , दूसरी ओर विभिन्न पत्रिकाओं में विभिन्न ( Astrology in Hindi of today ) पंडितों द्वारा एक ही राशिफल के लोगों के लिए अलग अलग गणना से ही लोगों का राशिफल से विश्वास उठ जाता है।

astrology in hindi for todayToday's astrology in Hindi 

चंद्र या सूर्य राशिफल पर अधारित भविष्यवाणियों पर मेरा खुद भी विश्वास नहीं , इसलिए मैने ( Today's astrology in Hindi ) जानने के लिए अपने पाठकों के लिए हिंदी में  ‘लग्न  राशिफल’ की शुरूआत की थी , इसे शुरू करने से पहले मैने इसकी वैज्ञानिकता के पक्ष में कुछ तर्क भी इस आलेख दिए थे। लग्न राशिफल द्वारा लिखे इस भविष्यफल पर बिल्कुल संदेह नहीं किया जा सकता , सिर्फ अलग अलग लोगों के लिए इसके पॉजिटिव और नेगेटिव में नहीं, सिर्फ इसके स्त‍र में अंतर होता है। इस लग्न राशिफल ( Today's astrology in Hindi ) की चर्चा विभिन्न ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति के आधार पर की जाती है , वे ग्रह सभी लोगों पर प्रभाव डालते हैं , पर विभिन्न लग्नवालों के लिए संदर्भों में भिन्न्ता होती है। 

Today's astrology in Hindi


अब इससे भी आगे बढ़कर हमारा एप्प किसी व्यक्ति के लग्न,  सूर्य और चंद्र को देखकर नहीं,  बल्कि  जन्मकालीन सभी ग्रहों और गोचर यानि अभी चल रहे ग्रहों में आपस के तालमेल को देखते हुए आपपर उनके पड़ने वाले ऋणात्मक,  धनात्मक या सामान्य प्रभाव की चर्चा करेगा,  उन्हें हर कदम पर गाइड भी करेगा. साल के 365 दिनों में से अधिकांश आपके लिए सामान्य होता है,  पर कभी कभी अधिक धनात्मक या ऋणात्मक होता है,  उनकी सुचना आपको पहले से मिल जाये,  उसके उपाय के बारे में आपको पहले से जानकारी मिल जाये, आपको ( Today's astrology in Hindi ) मिल पाए, इसका हमने इस एप्प को विकसित करने में पूरा प्रयास किया है।
Astrology in Hindi for today
आप अपने  फ़ोन के प्लेस्टोर में जाएँ, सर्च बॉक्स में gatyatmak jyotish टाइप करें।  आपको ऊपर जैसे आइकॉन का एक एप्प मिलेगा।  आप इसे इनस्टॉल करें, SignUp करें, पुरे वर्ष के आपके जीवन के विभिन्न मामलों का और प्रतिदिन का सटीक भविष्यफल आपको मिलेगा। दिसंबर तक के लिए यह सुविधा बिलकुल फ्री है।  जनवरी 2021  में  ही आपको पेमेंट करने की आवश्यकता होगी। 'गत्यात्मक ज्योतिष' ज्योतिष की नवीनतम विधा है, जो आपको सटीक सांकेतिक जानकारी प्रदान करती है।  आप अवश्य डाउनलोड करें और प्रतिदिन का भविष्यफल को देखकर उसका अपने जीवन से मैच करें।  आप इसकी सटीकता पर आश्चर्यित हो जाएंगे।  इस पोस्ट को अपने मित्रो , जाननेवालों को शेयर करें। नीचे के बटन आपकी मदद करेंगे। 


कोरोनावायरस और रोग-प्रतिरोधक क्षमता

July 27, 2020 2 Comments

Virus coronavirus in India


virus coronavirus in india
देश-विदेश में फैले कोरोनावायरस के छह-आठ महीने के दौर को देखने के बाद अब लोगों को इतना समझ में आ गया है कि मास्क और सोशल डिस्टैन्सिंग के बाद इससे बचने के लिए सबसे बड़ी बात लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता है ! लॉक डाउन के समय ही सरकार के आयुष मंत्रालय ने यह घोषणा कर दी थी, काढ़ा बनाने का प्रोसेस शेयर किया था ! लगभग सभी भारतीय घरों में लोगों ने कोरोना को भयानक बीमारी मानते हुए उससे लड़ने के लिए काढ़े का उपयोग शुरू कर दिया था !

सिर्फ मंत्रालय द्वारा सुझाया काढ़ा ही नहीं, काढ़े के अलावा प्रायः घरों में सुबह शाम निम्बू पानी, योगा, कुछ विटामिन्स की गोलिया, ऐलोवेरा, गिलोय के साथ रात्रि में हल्दी-दूध पीने के साथ ही सोते वक्त गरम पानी और नमक का गार्गल भी शुरू किया गया ! डेढ़ महीने के लॉक डाउन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले इतने उपचार ने वास्तव में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया, इसलिए तो अनलॉक के बाद जितने कोरोना रोगी बढ़ते गए, मृत्यु-दर नहीं बढ़ी ! बहुत सारे लोगों को कब कोरोना हुआ और कब ख़त्म भी हुआ पता भी नहीं चला, क्योंकि हर घर में उपचार तो चल ही रहा था ! हालांकि मुझे लगता है कि मास्क और सोशल डिस्टैन्सिंग का पालन किया जाता तो केसेज भी नहीं बढ़ते, नुकसान की संभावना और कम होती !



वैसे भी भारतवर्ष में अभी भी आधे से अधिक लोगों को रोजी-रोटी के लिए शारीरिक तौर पर मेहनत करने की आवश्यकता पड़ती है ! मेहनत करने वाले लोगो की खुराक भी अच्छी होती है और प्राकृतिक तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी ! अधिकांश समय कुर्सी में बैठकर काम करने वाले लोगो में से अधिकांश पिछले एक दो दशक में थाइरोइड, बीपी, मधुमेह और ह्रदय-रोग जैसी बीमारियों से ग्रस्त हुए ! उनमे से स्वास्थ्य पर ध्यान देनेवाले लोगों ने योग करना और दौड़ना-भागना जारी रखा था ! पर कुछ आलस की वजह से सिर्फ एलोपैथी दवा लेकर निश्चिंत बने रहें ! उनके सामने सबसे बड़ा ख़तरा आया, कोरोना से हुई अधिकाँश मौत में ये ही शामिल हैं ! बहुत सारी मौतें अफरा तफरी भरे माहौल के चलते भी हुई हैं !

किसी भी विपत्ति को दो तरह से झेला जाता है ! जबतक विपत्ति की प्रकृति नहीं मालूम हो, तबतक सावधान रहते हुए उसे समझने की जरूरत होती है ! जैसे ही हम विपत्ति की प्रकृति को समझने लगते हैं, उससे लड़ने का प्रयास करते हैं ! यदि विपत्ति बड़ी हो तो उसका सर्वनाश उचित समझते हैं ! कोरोना नयी बीमारी है, उस हिसाब से इसे हम समझ जरूर चुके हैं ! ऐलोपैथी की तुलना में कम समय में राजस्थान में आयुर्वेद तथा मुम्बई के धारावी में होम्योपैथी से कोरोना को मात दी जा चुकी है ! इस तरह हम कोरोना का खात्मा भले नहीं कर सकें, पर कुछ सुरक्षात्मक उपायों के साथ आयुर्वेद और होमियोपैथी की सहायता से नुकसान को कम जरूर कर सकते हैं !

एलोपैथी के डॉक्टर भी अब लोगों को यही सलाह देने लगे हैं ! दरअसल एलोपैथी में लोगों को विभिन्न रोगों से लड़ने के लिए जो एंटीबायोटिक दिए जाते हैं, वे शारीरिक क्षमता को कम करते हैं, जबकि आयुर्वेद प्राकृतिक शास्त्र है ! कोरोना के बहाने पिछले दो दशकों से दिमाग में चल रहा लोगों का भ्रम कि मानसिक विकास ही दुनिया को आगे बढ़ाएगा, अब समाप्त हो जाना चाहिए और हमें शारीरिक मजबूती के प्रयास भी बनाये रखने चाहिए ! बच्चों को खेल-कूद का भरपूर मौका दिया जाना चाहिए, बैठकर जीविका चलानेवालों को योगा और व्यायाम करना चाहिए ! सामान्य तौर पर दादी-नानी के घरेलु नुस्खे, आयुर्वेद पर अधिक और एलोपैथी पर निर्भरता कम होनी चाहिए ! एलोपैथी को इमरजेंसी हेल्थ सर्विस के तौर पर ही लेने की जरूरत है ! एक स्वस्थ तन और मन ही स्वस्थ दिमाग दे सकता है, इस बात को हमें नहीं भूलना चाहिए !

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कोरोना पॉजिटिव न बनें, यदि बने तो 90% स्वस्थ लोगों में ही, टॉप 10% तक न पहुंचें !

July 15, 2020 2 Comments

कोरोना पॉजिटिव न बनें, यदि बने तो 90% स्वस्थ लोगों में ही,  टॉप 10% तक न पहुंचें !

idea to fight against corona
कोरोना देश के कोने कोने में फ़ैल गया है, और लम्बे समय तक आप जरूरी आवश्यकताओं के बिना नहीं रहा सकते, इसलिए इससे बचने के तरीके ढूंढने ही होंगे ! ऐसा क्या करें कि आप कोरोना पॉजिटिव न बनें, यदि बने तो 90% स्वस्थ लोगों में ही बने रहें ! टॉप 10% तक न पहुंचें? यदि वहाँ तक पहुँच भी जाएँ तो सुरक्षा से बिल्कुल सामान्य हो जाएँ !


हर व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव हो सकता है


सबसे पहले तो आप पौस्टिक खाना, भरपूर नींद के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानेवाली दवाओं, निम्बू-पानी, दूध-हल्दी या काढ़े का भी उपयोग करें ! मेरी आयुर्वेद पर तो अधिक जानकारी नहीं, पर काढ़े बनाने में जिन मसालों का उपयोग किया जाता है, वो थोड़े कम-अधिक मात्रा होने पर स्वास्थ्य में कोई गड़बड़ी नहीं करते ! उसी तरह तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, अश्वगंधा की थोड़ी थोड़ी मात्रा नुकसान नहीं करती ! यदि काढ़े के किसी आइटम से परहेज हो तो उसे हटा दें !

उसके बाद आप गंभीरता से मान ले कि सामने वाला हर व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव हो सकता है, कोई पड़ोसी, कोई मित्र, कोई रिश्तेदार या कितना ही सुरक्षित जगह क्यों न हो, हर व्यक्ति की साँसों, हाथों और हर वस्तु पर कोरोना वायरस हो सकता है ! इसलिए खुद को हर व्यक्ति और वस्तु से बचाना आवश्यक है !

idea to fight against corona

भीड़-भाड़ से दूर रहने की कोशिश करें


इसके लिए अधिकांश समय घर के अंदर रहें, कुछ जरूरत से बाहर निकले तो अच्छा मास्क लगाएं, भीड़-भाड़ से दूर रहने की कोशिश करें, भीड़भाड़ में तेजी से रास्ते पार कर आगे बढ़ें, घर से बाहर कोई परिचित मास्क लगाए दिखे तो दो मिनट बात कर सकते हैं, कोई वाल्व वाला मास्क लगाए हो तो जरूर टोकें, वह अपनी सुरक्षा तो कर रहा है पर सामनेवाले असुरक्षित हो रहे हैं ! उनसे या कोई परिचित बिना मास्क के दिखे तो बात करने की भी जरूरत नहीं, उसे डांटते हुए निकल जाएँ ! किसी के नाराज होने की चिंता अभी नहीं करनी है !

बाहर से घर आने पर व्यवस्था रखें कि दरवाजे पर ही बाल्टी में डिटर्जेंट घुला पानी रखा हो ! आप अपने हाथ-पैर धोयें, चप्पल-जूत्ते धोयें, कपडे उतारकर डिटर्जेंट में डालें, सामान को उसी घर के कोने में जगह बनाकर रख दें ! घर में बच्चे हों तो उनकी पहुँच से दूर जगह पर सामान एक दो दिन छोड़ दें ! फल सब्जी हो तो एक घंटे पानी में डाल दें ! अब तो सब्जियों को धोने के लिए डिटर्जेंट भी बाजार में मौजूद है ! बाल्टी के कपडे वाशिंग मशीन में ड़ालकर स्नान कर लें या कपडे बदल लें !

idea to fight against corona

घर के बच्चों, वृद्ध और बीमाऱ से कुछ अलग ही रहना चाहिए !


इतने के बाद भी आपको कोरोना संक्रमण हो ही सकता है, पर यदि संक्रमण हुआ भी तो हल्का होगा, जिसको आप झेल सकते हैं, पर आपके घर कोई बच्चे, वृद्ध या बीमाऱ रह रहे हों तो उनको संक्रमण बढ़ सकता है ! इसलिए बाहर जानेवाले लोगों को घर के बच्चों, वृद्ध और बीमाऱ से कुछ अलग ही रहना चाहिए ! घर में कुछ छूने से परहेज करें, किसी भी कार्य से पहले और कार्य के बाद अच्छे से हाथ धोयें !

कोरोना का कोई भी लक्षण - सर्दी, खांसी, बुखार या शारीरिक कमजोरी जैसा कुछ भी महसूस हो तो घर पर आराम करें, खुद को क्वैरेन्टाइन रखें, खांसते-छींकते वक्त टिश्यू पेपर का उपयोग करें ! ऑक्सीमीटर से अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें ! 90 तक ऑक्सीजन रहने पर आपको घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं, जो लक्षण हों, उसकी दवाईयां लेते रहे ! पौष्टिक लिक्विड खाना पीना, विटामिन्स, काढ़ा, योगा करते हुए संतुलित जीवन बनाये रखें ! ईश्वर से स्वस्थ होने की प्रार्थना करते रहें ! 10 दिनों में आप स्वस्थ हो जाएंगे !

idea to fight against corona

अस्पताल में जल्द एडमिट करने की आवश्यकता है !


यदि ऑक्सीजन का स्तर 90 से नीचे हो रहा है, तब भी घबराने की नहीं, थोड़ा गंभीर होने की जरूरत है ! डॉक्टर से परामर्श करें, कुछ विशेष एंटीबायोटिक दवाएं लेनी पड सकती है ! ऑक्सीजन का स्तर 85 से 80 जाने लगे तो आपको अस्पताल में एडमिट होने की जरूरत है ! यदि अस्पताल में जगह न हो तो कम से कम ऑक्सीजन देने की जरूरत तो ऐसे मरीजों को पड़ ही जाती है ! डॉक्टर से परामर्श लेते रहें, यदि शरीर के सभी अंग स्वस्थ हों तो चार छह दिनों में घर में भी ऐसे पेशेंट ठीक हो जाते हैं ! लेकिन यदि पहले से उनके शरीर के कई अंग कमजोर हों तो अस्पताल में जल्द एडमिट करने की आवश्यकता है !

नोट - बाकी तो हरि इच्छा ! यह लेख कई डॉक्टरों के लेख और उनसे बातचीत के आधार पर लिखी गयी है ! अधिकांश मरीज अधिक इन्फेक्टेड होने या देर होने की वजह से नहीं बचाये जा पाते ! सरल भाषा में मैंने लिखी है, इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें !

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मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 50/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----


ईश्वर सबकी रक्षा करें, प्रतिदिन ईश्वर से यही प्रार्थना है !

July 13, 2020 1 Comment

Amitabh bachchan health condition

अमिताभ बच्चन जी का एक वीडियो


तीन महीने पहले की यह बात सबको याद ही होगी कि कोरोना की भयावहता को लेकर जनता को जागरूक करने और लॉक डाउन को सफल बनाने के लिए सरकार ने कुछ प्रभावशाली लोगों की मदद ली थी ! कई क्रिकेटर, फ़िल्मी नायक के वीडियो अक्सर टेलीविज़न पर दिख जाते थे, दो-चार वीडियो काफ़ी अच्छी लगी थी, उसमे अमिताभ बच्चन जी का एक वीडियो था, जिसमे उन्होंने अपने खोये काले चश्मे को लेकर हंगामा खड़ा किया था, अंत में सबने मिलकर इसे ढूंढा था !

amitabh bachchan health condition


पर अंत में अमिताभ बच्चन चश्मे को न पहनकर चश्मे को संभालकर रखते हैं, ताकि लॉक डाउन के बाद पहन निकल सकें ! इस बात पर सारे कलाकार अपना सर पीट लेते हैं कि जब चश्मे का काम ही नहीं था, तो इन्होने इतनी मेहनत करवाई क्यों? इस वीडियो में सिर्फ यही सन्देश नहीं था कि लॉक डाउन में बाहर नहीं निकलना है, सन्देश यह भी था कि अपने अपने घर में रहकर भी आप कोई काम कर सकते हो ! इस वीडियो को बनाने के लिए कोई कलाकार घर से बाहर नहीं निकले थे ! सभी कलाकारों के अपने अपने घर में रहने के बावजूद यह वीडियो बना लिया गया था ! इसका स्क्रिप्ट किसने लिखा था, यह मुझे बिलकुल याद नही !

फिल्मस्टार अमिताभ बच्चन covid + रिपोर्ट

कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले समझदार अभिनेता भी आज कोरोना से नहीं बच पाए ! कल शाम देशभर में यह खबर फ़ैल गयी कि फिल्मस्टार अमिताभ बच्चन covid + रिपोर्ट आने के बाद नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं ! उन्होंने खुद शनिवार रात को ट्विटर के माध्यम से अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी फैंस को दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'मैं Covid-19 पॉजिटिव पाया गया हूं। ---- जितने भी लोग पिछले 10 दिनों में मुझसे मिले हैं, वे अपना टेस्ट करवा लें !" अमिताभ बच्चन जी का कोरोना से संक्रमित होने का मतलब है कि इससे कोई नहीं बच सकता ! यदि उनसे कुछ लापरवाही हुई हो तो बात अलग है ! कोरोना क्यों बढ़ रहा है, इसपर कल एक चित्र इंटरनेट पर मिला, इस पोस्ट के साथ संलग्न कर रही हूँ !

amitabh bachchan health condition


अभी महाराष्ट्र और ख़ासकर मुम्बई में पूरे देश में सबसे भयावह स्थिति है ! उनके घर में काफ़ी कर्मचारी होंगे, सबका बाहर आना जाना तो स्वाभाविक है ! हो सकता है, सभी कोरोना से बचने के लिए बने गाइड लाइन्स का पालन नहीं करते हों ! उनके सन्देश से यह भी स्पष्ट है कि वे लोगों से मिलते जुलते रहे ! ऐसी भी काम की क्या हड़बड़ी थी, जो उन्हें सबसे मिलना जुलना जरूरी लगा ! कुछ दिन तो इंतज़ार कर ही सकते थे !

दूसरी रिपोर्ट में उनकी बहू और पोती भी कोरोना पॉजिटिव

बाद में मालुम हुआ कि उनके बेटे अभिषेक बच्चन की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आयी है, उनकी पत्नी, बहू और पोती तक कोरोना में कोरोना नेगेटिव ! कुछ स्टॉफ अवश्य संक्रमित हुए होंगे, जिनकी वजह से अमिताभ बच्चन तक यह वायरस पहुँच पाया ! आज सुबह समाचार मिला कि अमिताभ बच्चन की हालत स्थिर है और उनमें Covid-19 पॉजिटिव संक्रमण के मामूली लक्षण पाए गए हैं। उन्हें हॉस्पिटल के आइसोलेशन वॉर्ड और अभिषेक बच्चन को जनरल वार्ड में रखा गया है ! बाद में दूसरी रिपोर्ट में उनकी बहू और पोती तक कोरोना पॉजिटिव आया !



मामूली लक्षण वाले मरीज शुरुआत से ही डॉक्टर की देख रेख में रहें तो सुनकर थोड़ी राहत हो जाती है, अभिषेक बच्चन की ओर से तो निश्चिंती है, पर अमिताभ बच्चन की उम्र और उनके स्वास्थ्य के अक्सर कमजोर रहने से थोड़ी चिंता तो हो ही जाती है ! ईश्वर सबकी रक्षा करें, प्रतिदिन ईश्वर से यही प्रार्थना है ! अमिताभ बच्चन सहित सभी कोरोना मरीजों के लिए  देशभर में जगह जगह पूजा पाठ शुरू हो गयी है !

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क्या हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं ?

July 11, 2020 2 Comments

क्या हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं ?


कोरोना पर लिखें गए कल के लेख पर एक पाठक के कमेंट से आज के लेख की शुरुआत करती हूँ, जिन्होंने लिखा कि शहरों में भयावहता फैलाने वाले कोरोना का गाँव में कोई प्रभाव नहीं है ! गावों में कुछ केसेज आये भी तो ख़त्म हो गए, प्रसार नहीं हो पाया ! अपने अनुभव से इस बात को अभी मैं भी स्वीकार कर यही हूँ ! वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का भी मानना है कि विकसित देशों, जैसे अमेरिका, कनाडा यूरोपीय देशों की तुलना में भारत के महानगरों में ही कोरोना से लड़ने की क्षमता अधिक दिख रही है, तो गावों में रहे वालों लोगों पर निश्चित तौर पर यह क्षमता उससे अधिक होगी !

झारखण्ड में भी कोरोना के बिलकुल शुरुआती तीन केस में हिंदपीढ़ी, राँची के बाद के दो तो हमारे 10-12 किमी के रेंज में थे ! बेरमो में बांग्ला देश से आयी महिला के माध्यम से और गोमिया में लॉक डाउन के दौरान वाराणसी से ट्रक में छुपकर आये मजदूर के माध्यम से कोरोना फैला था ! दोनों छोटे गाँव थे, चार छह लोगों में संक्रमण हुआ था ! बेरमो का केस तो सरकार की निगाह में था ही, पर गोमिया वाले केस में तो वृद्ध के मौत के कितने दिन बाद ही मजदूर की चोरी पकड़ी गयी थी ! लेकिन दोनों ही जगह दिल्ली और मुम्बई वाली हालत नहीं हुई !


अनलॉक किये जाने के बाद हमारा भ्रम टूटा


इसका पहला कारण यह हो सकता है कि गाँव में शहरों की तरह जीवन तंग नहीं है ! सबके घर खुले खुले होते हैं, सबका खाना प्राकृतिक होता है ! सभी मेहनती होते हैं, पैदल ही लम्बी यात्रा पर निकल पड़ते हैं ! या सब उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ! कोरोना काल में गावों में लोग इसकी चेन तोड़ने को प्रतिबद्ध भी दिखे ! वैसे देखा जाये तो लॉक डाउन के दौरान दिल्ली, मुम्बई में भी केस अधिक नहीं बढ़ रहे थे ! लोग घर पर और प्रशासन रोड पर रहकर कोरोना की चेन तोड़ने को प्रतिबद्ध थे ! और हम इसी भ्रम में थे कि यूरोप अमेरिका की तुलना में हमारे देश में संक्रमण की गति बहुत धीमी है !

पर अनलॉक किये जाने के बाद हमारा भ्रम टूटा ! समस्याएं बढ़ी हैं, सरकार ने भले ही जरूरी कार्यों के लिए ही अनलॉक किया हो, पर अधिकांश लोग अपने पुराने रूटीन में लौट आये हैं ! कुछ लोग कोरोना की भयावहता को कम आँक रहे हैं ! इसी में अनलॉक -1 में महानगरों का हाल बेहाल करने वाले देश को विश्व के तीसरे पायदान पर खड़े कर देने वाले कोरोना ने अनलॉक - 2 में छोटे शहरों की ओर रूख किया है ! छोटे शहरों में लगातार केसेज बढ़ने से प्रशासन जैसे ही लाचार होगा, छोटे शहर भी महानगरों की हालात में आएंगे ! उसके बाद ही गाँव की बारी आएगी ! इसलिए यह कह देना कि हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं, अभी जल्दबाजी होगी !

हमें सावधान तो रहना ही चाहिए !


हम प्रतिदिन ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि कोरोना का प्रसार रुके, इससे हो रही मौत रुके, पर हमें चौकन्ना तो रहना ही होगा ! कोरोना काल बनकर निरंतर अपने मुंह को सुरसा की भांति बढ़ाता जा रहा है ! कोरोना गावों तक नहीं पहुंचा तो यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी ! पर लोगों के रवैये, गंभीरता की कमी को देखते हुए यह मान लेना कठिन है ! हर महामारी का अपना एक समय होता है, महानगरों और शहरों तक ही इसका समय समाप्त हो जाये, हम ऐसी आशा रख सकते है ! इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना कर सकते हैं, पर निश्चिंत तो नहीं रहा सकते ! आगे कोरोना के साथ ही जीवन जीना है, इसलिए हमें सावधान तो रहना ही चाहिए !

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ऐसा जीवन लेकर मैं क्या करूँ?

July 10, 2020 1 Comment

गाँव का जीवन


दो साल पहले की बात है, मेरी मम्मी कुछ दिनों से बीमाऱ चल रही थी और हर प्रकार के टेस्ट के बाद स्पष्ट हो गया था कि उनके फेफड़े कमजोर हो चुके हैं ! इस बीमारी के लिए दिल्ली के पर्यावरण को दोष दिया जा सकता था, जहाँ वे 20 वर्षों से जीवन जी रही थी या फिर उनके कमजोर शरीर को या आस्तिक होने के नाते हम मान सकते हैं कि होनी को यही मंजूर था ! पर डॉक्टर ने अपनी ओर से सभी दवाओं के साथ उनको गाँव में कुछ समय व्यतीत करने का एक विकल्प भी दिया ! मम्मी का जीवन कुछ महीने बढ़ सकता था !


संस्कारी परिवारों में माँ-पापा तो बच्चों के लिए ईश्वर से कम नहीं, इसलिए सभी बच्चों ने उनके लिए हमारे अपने गाँव में सारी व्यवस्था करनी चाही ! गाँव में भी हमारे परिवार में लक्ष्मी और सरस्वती दोनों की विशेष कृपा रही है, जरूरत पड़ने पर गाँव हमें सहारा देने के लिए हर वक्त तैयार है ! पर मम्मी ने वहाँ अकेले या पापाजी के साथ रहने से मना कर दिया, उन्होंने स्पष्ट बोला कि जीवन एन्जॉय करने के लिए होता है ! बच्चे अपनी अपनी जिम्मेदारियों के कारण गाँव जा नहीं सकते, यदि सभी बच्चों से दूर अपना जीवन बढ़ाने के लिए मुझे गाँव में रहना पड़े तो ऐसा जीवन लेकर मैं क्या करूँ?

जीवन जीने के लिए होता है


korona kaal ka jivan


सच भी यही है, जीवन जीने के लिए होता है, चुनौतियों से लड़ने के लिए भी होता है, एन्जॉय करने के लिए भी होता है ! इस तरह घर में बंद रहकर जीवन जीना पड़े तो ऐसे जीवन से क्या लाभ? हमें पहले जैसा जीवन चाहिए ही ! पर वह हमें कुछ महीने के लॉक डाउन के पालन के बाद ही मिल सकता था, पर पहले दिन से ही जो जहाँ थे वहीँ से घर आने के लिए बेचैन हो गए ! जिनकी व्यवस्था उनके शहरों में हो सकती थी, वहाँ से देश के हर भाग में भेज दिया गया !

प्राकृतिक आपदा और 'महामारी' 


इस तरह की गैर जिम्मेदाराना हरकत की वजह भी साफ है ! हर तरह की प्राकृतिक आपदा और 'महामारी' आदि की चर्चा हमारे पाठ्यपुस्तकों, दैनिक बोलचाल और किस्सों-कहानियों से गायब हैं ! यदि कभी कभी आनेवाली इन समस्याओं को इन माध्यम से समझाया गया होता तो लोगो का इससे लड़ने का व्यवहार ही अलग होता ! बड़े-छोटे, अमीर-गरीब, विभिन्न धर्म, विभिन्न जाति, विभिन्न पार्टियां, सब एकजुट होकर इससे लड़ते !

लोग इस बात की शुक्र माने कि कोरोना से मौत की दर दो-तीन प्रतिशत ही है, हो सकता है यह .3% ही हो, क्योंकि टेस्टिंग कम हो रही हैं ! यदि अधिक होता तो आज संकट कितना बड़ा होता? खैर संकट छोटा है और थोड़ी सावधानी से रहा जाये तो कोरोना की चेन तोड़ी जा सकती है ! लम्बे समय तो ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल है ! यदि कोरोना लम्बे समय तक रहा तो दुनिया में कोरोना के विरुद्ध एंटीबाडी बना चुके लोग ही बचेंगे ! कमजोर लोग दुनिया से कूच कर जायेंगे ! अभी के माहौल का देखकर यही सत्य लग रहा है !

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