श्रद्धानंद पांडेय लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
श्रद्धानंद पांडेय लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

आरती हनुमान जी की

आरती हनुमान जी की


आरती हनुमान जी की


मेरे ब्‍लॉग में आप  पं श्रद्धानंद पांडेय जी का हनुमान पचासा और हनुमान कृपाष्‍टक पढ चुके हैं। वैसे तो उनकी बहुत सारी अन्‍य रचनाएं भी प्रकाशित हो चुकी है , यहां तक कि भोजपुरी में रामचरित मानस तक भी , पर मेरे पास उनकी जो पुस्‍तक है , उसमें हनुमान जी की आरती भी लिखी है , जो आज प्रस्‍तुत कर रही हूं .... ......

जय महावीर मारूतनंदन ,
आरती नमन स्‍वीकार करो।
संकटमोचन संकट हर लो ,
बबाधाओं का प्रतीकार करो।।

सागर को पार किया तुमने,
अरिपुर को छार किया तुमने ,
सबका उपकार किया तुमने ,
इस जन का भी उद्धार करो।।

जय कपिवर द्राणाचलधारी ,
ररघुनायक तक हैं आभारी ,
शरणागत के दुख भयकारी ,
सुखमय सबका संसार करो।।

बलवान निरोग रहे काया,
व्‍यापे न कभी कलि की माया,
मन हो प्रभुपद में लपटाया,
ऐसा वरदान उदार करो।।


-----------------------------------------------------
चंद्र-राशि, सूर्य-राशि या लग्न-राशि से नहीं, 
जन्मकालीन सभी ग्रहों और आसमान में अभी चल रहे ग्रहों के तालमेल से 
खास आपके लिए तैयार किये गए दैनिक और वार्षिक भविष्यफल के लिए 
Search Gatyatmak Jyotish in playstore, Download our app, SignUp & Login
------------------------------------------------------
अपने मोबाइल पर गत्यात्मक ज्योतिष को इनस्टॉल करने के लिए आप इस लिंक पर भी जा सकते हैं ---------

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.gatyatmakjyotish


नोट - जल्दी करें, निःशुल्क सदस्यता की अवधि लगभग समाप्त होनेवाली है।
----------------------------------------------------------------------------------------------------

श्री श्रद्धानंद पांडेय जी के द्वारा रचित श्रीहनुमान कृपाष्‍टक



Hanuman Kripashtak


इस वर्ष के शुरूआत में ही श्री श्रद्धानंद पांडेय जी के द्वारा रचित श्रीहनुमान पचासा आपलोगों को पढवा चुकी हूं। उनके द्वारा लिखा गया श्रीहनुमान कृपाष्‍टक का आज आनंद लें .....

बुद्धि शरीर निरोग रहे , प्रभु पूजन में न करें कृपणाई।
पावन भाव बसे उर में , जग दे सियाराम स्‍वरूप दिखाई।।
कान सुने रघुनाथ कथा , हरि का गुणगान सदा सुखदाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में सिय साथ रहे रघुराई।।

जीभ कभी न कहे अपशब्‍द , चखे रसना हीरनाम मिठाई।
हाथ करे प्रभु का पदपूजन , दान परिश्रम दीन भलाई।।
नित्‍य चले पग मंदिर में , शुभ धाम फिरे न करे कठिनाई।
हे हनुमान कृपा करिये , मन में सिय साथ रहे रघुराई।।

काम कदापि न क्‍लेश करे , रमणी गण में झलके निज माई।
क्रोध तजे प्रतिशोध सभी , उर वास करे समता करूणाई।।
लोभ न चाह करे धन या यश , मोह मिटे बिनसे कुटिलाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

जीवन में न रहे त्रयताप , विवेक रहे उर शीतलताई।
हो न अभाव कभी धन का , गृह गोरस अन्‍न रहे बहुलाई।।
दूर रहे सब भूत पिशाच , फले सुख संपत्ति की अमराई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

विश्‍व लगे परिवार , लगे सबलोग सुता जनननी सुत भाई।
भेद घृणा लवलेश न हो , उर में सब जीव करे समताई।।
मानव मानव एक लगें , मिट जाए विभेदक मोह बुराई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

पा नर देह कभी न करूं , मनसा वचसा तन से अघमाई।
राघव के पद पंकज में , मनभृंग रहे तज चंचलताई।।
मानस स्‍वच्‍छ रहे मलहीन , मिटे अभिमान तथा अघकाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

याद रहे चपला सम यौवन , जीवन की क्षणभंगुरताई।
पुत्र-कलत्र-धरा-गृह-संपत्ति , साथ तजे पद-मान-बडाई।।
याद रहे अगले पथ में , बस साधन धर्म अधर्म कमाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

प्राण प्रयाण करें तब , शोक विषाद न हो मन में दुखदाई।
'राम' रटे रसना प्रतिभाषित हो , सियनायक की प्रभुताई।।
पुत्र रखे मुख में तुलसीदल , कान पडे हरिनाम सुनाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

                              *दोहा*
श्रद्धानंद कृपा करें , पवनपुत्र गुणधाम।
अभिलाषाएं पूर्ण हों , रहे हृदय सियाराम।।


-----------------------------------------------------
चंद्र-राशि, सूर्य-राशि या लग्न-राशि से नहीं, 
जन्मकालीन सभी ग्रहों और आसमान में अभी चल रहे ग्रहों के तालमेल से 
खास आपके लिए तैयार किये गए दैनिक और वार्षिक भविष्यफल के लिए 
Search Gatyatmak Jyotish in playstore, Download our app, SignUp & Login
------------------------------------------------------
अपने मोबाइल पर गत्यात्मक ज्योतिष को इनस्टॉल करने के लिए आप इस लिंक पर भी जा सकते हैं ---------

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.gatyatmakjyotish


नोट - जल्दी करें, निःशुल्क सदस्यता की अवधि लगभग समाप्त होनेवाली है।
----------------------------------------------------------------------------------------------------