गत्यात्मक ज्योतिष क्या है ?

Gatyatmak Jyotish in Hindi

गत्यात्मक ज्योतिष का परिचय 


भारत के बहुत सारे लोगों को शायद इस बात का ज्ञान भी न हो कि विगत कुछ वर्षों में उनके अपने देश में ज्योतिष की एक नई शाखा का विकास हुआ है,जिसके द्वारा वैज्ञानिक ढंग से की जानेवाली सटीक तिथियुक्त भविष्यवाणी जिज्ञासु बुद्धिजीवियों के मध्य चर्चा का विषय बनी हुई है। सबसे पहले दिल्ली से प्रकाशित होनेवाली पत्रिका ‘बाबाजी’ के 1994-1995-1996 के विभिन्न अंकों में तथा ज्योतिष धाम के कई अंकों में गत्यात्मक ज्योतिष के ज्योतिष के बुद्धिजीवी पाठकवर्ग के सम्मुख मेरे द्वारा ही रखा गया था । इस लेख में आप गत्यात्मक ज्योतिष के विकास की पूरी कहानी देख सकते हैं। 

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गणित ज्योतिष के अद्भुत सूत्र


‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ सिर्फ नाम से ही गत्‍यात्‍मक नहीं है , इसका नामकरण ऐसा किया गया है क्‍योंकि इसके द्वारा भविष्‍यवाणी करने का मुख्‍य आधार ग्रहों की गति ही है। सौरमंडल में भले ही सूर्य स्थिर हो और पृथ्‍वी उसकी परिक्रमा करती हो , पर फलित ज्‍योतिष पृथ्‍वी को स्थिर मानकर उसके सापेक्ष ग्रहों की स्थिति का अध्‍ययन करता है। पृथ्‍वी को स्थिर मान लेने से उसके सापेक्ष ग्रहों की गति में प्रतिदिन भिन्‍नता देखी जाती है, यहीं से हमें फलित ज्योतिष सूत्र मिले।

यूं तो गणित ज्‍योतिष के सूर्य सिद्धांत में ग्रहों की इन गतियों की विभिन्‍नता की चर्चा हुई है , पर इसके अनुसार फलित पर प्रभाव पडने की चर्चा कहीं नहीं हुई। फलित पर ग्रहों की विभिन्‍न ग्रहों की गतियों का भिन्‍न भिन्‍न तरह के प्रभाव को देखते हुए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष द्वारा’ ग्रह गति का निम्‍न प्रकार से वर्गीकरण और फलित ज्योतिष सूत्र दिया गया है ....

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भारतवासियों के चरित्र को धर्म के द्वारा जितना सकारात्मक स्वरुप दिया गया, उतना किसी और तरीके से संभव ही नहीं था। पर अभी इनका उलटा ही स्वरुप दिखाई दे रहा है। अच्छे वक्त में लोग इसे नहीं मानते , पर थोड़ा बुरा वक्त आते ही धर्म और ज्योतिष की खोज आरम्भ करते हैं। धर्म और ज्योतिष आधुनिक विज्ञान की चीज नहीं , इसलिए किसी के द्वारा इन दोनों विषयों में प्राप्त किया गया अनुभव विचारणीय नहीं होता। धर्म और ज्योतिष से सम्बंधित सकारात्मक विचार आपके पास है , तो वह प्रगतिशीलों को नहीं पचता। यदि धर्म और ज्योतिष से सम्बन्धिक ऋणात्मक विचार आपके पास है , तो वह अंधविश्वासियों को नहीं पचता।

इसलिए आप अपने अनुभव समाज में साझा करने की कोशिश ही नहीं करते, ऐसे में फ़ायदा उन्हें मिलता है , जो धर्म और ज्योतिष को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ रहे होते हैं। नुकसान ऐसे लोगों को होता है , जो धर्म और ज्योतिष के क्षेत्र में ईमानदारी से अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। हमारे पिताजी ने अपना पूरा जीवन ज्योतिष की सेवा में लगाया और ज्योतिष की एक नयी शाखा विकसित की, जिससे पुरे जीवन के उतार चढ़ाव का ग्राफ खिंचा जा सकता है।  
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गणित ज्योतिष के अद्भुत सूत्र नामक लेख में सौरमंडल में ग्रहों की विभिन्न गतियों की चर्चा की गयी है और यह भी बताया गया कि ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ किसी प्रकार की भविष्‍यवाणी करने के लिए ग्रहों की गति पर ही आधारित है। पृथ्‍वी को स्थिर मान लेने से उसके सापेक्ष ग्रहों की गति में प्रतिदिन भिन्‍नता देखी जाती है। पृथ्‍वी के जड चेतन या अन्‍य प्रकार की घटनाओं के खास व्‍यवहार का कारण ग्रहगति की ये विभिन्‍नता ही है। 40 वर्षों तक विभिन्‍न ग्रहों की विभिन्‍न गतियों का पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव को देख ते हुए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ निम्‍न निष्‍कर्ष पर पहुंचा है ....

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'गत्यात्मक ज्योतिष' की टीम


एक शोध-पत्र जमा करने में जीवन के कितने वर्ष गुजर जाते हैं, तो आप समझ सकते हैं कि किसी भी विज्ञान के एक नए स्वरुप को जन्म दे पाने में कितना समय लगा होगा। हर क्षेत्र में हज़ारो-लाखो लोग नियमित काम करते हैं, तब जाकर एक-एक पाठ पूरा होता है। ‘गत्यात्मक ज्योतिष’ के जनक श्री विद्या सागर महथा जी की ज्योतिषीय यात्रा आसान नहीं रही। ज्योतिष में निहित कमजोरियों को देखने की शुरुआत इन्होने 24 वर्ष की उम्र से ही शुरू कर दी थी। इसे समझने के लिए 12 वर्षों तक ज्योतिष के ग्रंथों का गंभीर अध्ययन किया। 12 वर्ष के बाद इन्होने ज्योतिष की कमियों और इनके सुधार के उपायों पर लिखना शुरू किया।

पर ज्योतिष में सुधार की संभावनाओं पर इनका दिमाग हमेशा चलता रहा और जून 1981 में ईश्वर की विशेष कृपा से ग्रहों की शक्ति-निर्धारण का जो सूत्र उन्हें प्राप्त हुआ, वह ज्योतिष को एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक आधार देने में सक्षम था। पर सिर्फ आधार से ही रातोरात विज्ञान को विकसित नहीं किया जा सकता, नए नए अनुभव जोड़ते जाने थे इसमें। उन्होंने तो अपना पूरा जीवन इसे समर्पित किया ही किया, हम चार भाई बहनों ने भी इस विधा की हर बात समझनी और नए अनुभवों को जोड़ने में कोई कमी नहीं की।

आज ज्योतिष के क्षेत्र में काम करते हुए विद्या सागर महथा जी को 55 साल हो गए हैं, संगीता पुरी 35 वर्षों से, अमर ज्योति 25 साल से, शालिनी खन्ना 20 साल से और अशेष कुमार 15 वर्षों से गत्यात्मक ज्योतिष’ को नए नए अनुभवों से समृद्ध कर रहे हैं। इस प्रकार हमारी टीम में ये सदस्य हैं। गत्यात्मक ज्योतिष की पूरी टीम को जानने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। 


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'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' पर आधारित पुस्‍तकों की उपलब्‍धता

मेरी पुस्तक के बाद बाजार में गत्यात्मक ज्योतिष के सिद्धांतो पर आधारित एक पुस्तक और आयी, जिसके लेखक 'गत्यात्मक ज्योतिष' के जनक श्री विद्या सागर महथा जी हैं। हर घर में रखने और पढने लायक इस पुस्‍तक ‘फलित ज्‍योतिष कितना सच कितना झूठ’ के लेखक श्री विद्या सागर महथा जी हैं। ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को स्‍थापित करने का पूरा श्रेय अपने माता पिता को देते हुए ये लिखते हैं, ‘‘मेरी माताजी सदैव भाग्य और भगवान पर भरोसा करती थी। मेरे पिताजी निडर और न्यायप्रिय थे। दोनों के व्यक्तित्व का संयुक्त प्रभाव मुझपर पड़ा।’’

 ज्‍योतिष के प्रति पूर्ण विश्‍वास रखते हुए भी इन्‍होने प्रस्‍तावना या भूमिका लिखने के क्रम में उन सैकडों कमजोर मुद्दों को एक साथ उठाया है, जो विवादास्‍पद हैं , जैसे ‘‘ज्योतिष और अन्य विधाएं परंपरागत ढंग से जिन रहस्यों का उद्घाटन करते हैं, उनके कुछ अंश सत्य तो कुछ भ्रमित करनेवाली पहेली जैसे होते हैं।’’ इस पुस्‍तक के लिए परम दार्शनिक गोंडलगच्‍छ शिरोमणी श्री श्री जयंत मुनिजी महाराज के मंगल संदेश ‘‘यह महाग्रंथ व्यापक होकर विश्व को एक सही संदेश दे सके ऐसा ईश्वर के चरणों में प्रार्थना करके हम पुनः आशीर्वाद प्रदान कर रहे है।’’ को प्रकाशित करने के साथ साथ ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के कुछ प्रेमियों के आर्शीवचन, प्रोत्‍साहन और प्रशंसा के पत्रों को भी ससम्‍मान स्‍थान दिया गया है।

दोनों पुस्तकों के बारे में जानने और खरीदने के लिए आप इस लिंक में  जा सकते हैं। 

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जीने के 10 सूत्र 


दुनिया में किसी भी शोध का कोई फ़ायदा नहीं, जबतक वह दुनिया को जीवन जीने के लिए कुछ खास तरीके न सिखाता हो। 'वक्‍त की ताकत' में हुए रिसर्च को समझते हुए गत्यात्मक ज्योतिष ने दिए हैं जीने के १० सूत्र ……
विरले लोग ही ऐसे होते हैं , जिनके अधिकांश ग्रह मजबूत और जीवन भर का समय या जीवन का हर पक्ष सुखात्मक हो ! 
विरले लोग ही ऐसे भी होते हैं , जिनके अधिकांश ग्रह कमजोर और जीवन भर का समय या जीवन का हर पक्ष दुःखात्मक हो !
आपके जन्‍मकालीन ग्रहों की चाल के हिसाब से बने इस ग्राफ के अनुसार आपका अच्‍छा और बुरा वक्‍त चलता रहता है , उसपर ध्‍यान न दें और नियमित तौर पर अपने कर्म करते रहें। 

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ज्योतिषीय उपचार 

गत्यात्मक ज्योतिष’ मानता है कि मनुष्य के समक्ष उपस्थित होनेवाली शारीरिक, मानसिक या अन्य प्रकार की कमजोरी का एक कारण उसके जन्मकाल के कमजोर ग्रह हैं और उस ग्रह के प्रभाव को मानव पर पड़ने से रोककर ही उस समस्या को कम किया जा सकता है। ज्योतिष अचूक उपाय के लिए निम्न रास्ते हैं आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें :-------
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वास्तव में , हर कर्मयोगी आज यह मानते हैं कि कुछ कारकों पर आदमी का वश होता है , कुछ पर होकर भी नहीं होता और कुछ कुछ पर तो होता ही नहीं । व्यक्ति का एक छोटा निर्णय भी गहरे अंधे कुएं में गिरने या उंची छलांग लगाने के लिए काफी होता है। इतनी अनिश्चितता के मध्य भी अगर ज्योतिष भविष्य में झांकने की हिम्मत करता आया है तो वह उसका दुस्साहस नहीं, वरण् समय-समय पर किए गए रिसर्च के मजबूत आधार पर उसका खड़ा होना है।

जिस दिन वैज्ञानिक इस बात को समझ जाएंगे , फलित ज्‍योतिषियो के साथ मिलकर काम करेंगे , फलित ज्योतिष दिन दूनी रात चौगुनी तरक्‍की करेगा । कल को समझने के लिए हमारे पास सत्‍यापित सिद्धांतों के द्वारा निकाला गया संकेत है। हज़ारो क्लाइंट्स हमारे द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। आप भी पीछे न रहें।




गत्यात्मक ज्योतिष क्या है ? गत्यात्मक ज्योतिष क्या है ? Reviewed by संगीता पुरी on September 05, 2020 Rating: 5

1 comment:

डॉ. जेन्नी शबनम said...

यह जानकारी पहली बार मिली कि ज्योतिष में पृथ्वी को स्थिर माना गया है। ज्योतिष विज्ञान से संबद्ध पूरी टीम को बधाई। इतने लम्बे समय से इस विषय पर अध्ययन कर निष्कर्ष निकालना बहुत मेहनत का कार्य है।

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