क्‍या अपने चिट्ठे का नाम planet’s effect on microbiological, pathological, pharmacologica या पैथोलोजिकल बायो रिदम में एडवांस स्‍टडीज रख लूं ??


मेरे प्रोफाइल को विजिट करनेवाले अक्‍सर मुझे ईमेल भेजा करते हैं ... 

“ आपका प्रोफाइल देखा , पर आप तो ज्‍योतिष जैसे विषय पर लिखती हैं , जिसमें मेरी रूचि नहीं और उसके बारे में मुझे कोई जानकारी भी नहीं , इसलिए आपका ब्‍लाग नहीं पढ पाता हूं। “ 


जो भी मुझे इस प्रकार के ईमेल भेजा करते हैं , उनसे मेरा अनुरोध रहता है कि वे मेरा ब्‍लाग अवश्‍य पढें , मेरे ब्‍लाग पर ज्‍योतिष की तो कोई चर्चा ही नहीं होती , आसमान में मौजूद ग्रहों की वर्तमान स्थिति के आधार पर सामयिक प्रश्‍नों के तिथियुक्‍त जबाब भी होते हैं , इसके माध्‍यम से समाज से धार्मिक और ज्‍योतिषीय भ्रांतियों का दूर करने की दिशा में भी प्रयास जारी है , इसके साथ ही मेरी अपनी और ब्‍लाग जगत से जुडी बातें भी मैं इसी चिट्ठे में करती हूं। इसलिए कुल मिलाकर मेरे ब्‍लाग में ऐसा कुछ भी नहीं , जो आपकी समझ में इसलिए नहीं आए कि आप ज्‍योतिष के बारे में कुछ नहीं जानते। इतना कहने के बाद भी बहुत लोग चिट्ठे का 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' नाम देखकर ही मेरे चिट्ठे को ज्‍योतिषीय चिट्ठा समझकर नहीं पढते हैं , तो अनजान पाठकों की बात करने की आवश्‍यकता ही नहीं । इसलिए कुछ दिनों से मेरे दिमाग में अपने चिट्ठा का नाम बदले देने की बात चल रही थी । 


25 जुलाई को अपने एक आलेख में मैने चंद्रमा के घटने बढने यानि पूर्णिमा और अमावस्‍या के जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव की चर्चा करते हुए एक आलेख लिखा था। उसमें निशांत मिश्रा की निम्‍न टिप्‍पणी आयी थी ...... “क्या आप इसे microbiological, pathological, और pharmacological सन्दर्भों में नहीं देखतीं? इन विषयों के परिप्रेक्ष्य में देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि तबीयत खराब होने, निदान न हो पाने, बाद में निदान हो जाने, और फिर तबीयत ठीक हो जाने को जैवरासायनिकी द्वारा बेहतर समझाया जा सकता है.”

इसके कुछ दिनों बाद ही 4 सितम्‍बर को मैने भावना पांडेय जी का एक आलेख पढकर उसे बृहस्‍पति के 12–12 वर्षों में एक जैसी स्थिति को जोडने का प्रयास किया , तो डा अरविंद मिश्रा की निम्‍न टिप्‍पणी मिली ... ” मनुष्य में एक जैवीय घड़ी होती है -यह कुदरत से संतुलन बना के चलती है -अब जैसे ज्वार भाटा चंद्रमा की गतियों से प्रभावित है -मनुष्य की लय ताल /बारंबारता की घटनाओं में मासिक चक्र आदि हैं -कुछ असामान्य स्थतियों में जब जैवीय घडी बिगड़ती है तो कुछ रोग बारंबारता लिए हो जाते हैं -आप पैथोलोजिकल बायो रिदम से गूगलिंग करें -परिणाम सभी को बताएं -कृपा कर अध्यन का दायरा बढायें -आप इन्टरनेट युग में जी रही हैं !”

इन दोनो टिप्‍पणियों से अर्थ यह निकलता है कि ब्रह्मांड में घटनेवाली हर घटना का संबंध एक दूसरे से होता है , जो बायो रिदम का कारण है। आकाशीय पिंडों की गति के अनुसार धरती पर घटनाओं का संबंध होता है , इसे विज्ञान भी मानता है। पर ज्‍योतिष को मानने में वैज्ञानिकों को मुश्किल हो जाती है और जिसे वैज्ञानिक न माने , उसे आम जनों को मानने में तो दिक्‍कत होगी ही। अब जहां ज्‍योतिष के प्रति ये मानसिकता हो , वहां मेरे चिट्ठे को पढनेवालों की संख्‍या कम होनी ही है। इसलिए मेरे मन में अपने चिट्ठे के नाम को परिवर्तित कर देने के विचार बार बार आ रहे हैं। आप पाठको से मेरा प्रश्‍न है कि क्‍या इस चिट्ठे का नामकरण planet’s effect on microbiological, pathological, pharmacologica या पैथोलोजिकल बायो रिदम में एडवांस स्‍टडीज कर दिया जाए ?

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20 comments

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9/20/2009 06:14:00 am ×

१. संगीता जी, क्या इस बार मौज लेने की बारी आपकी तो नहीं?

२. इतना सीरियसली ले लिया! मैं तो आपका बच्चा जैसा हूँ! कोई शास्त्री होता तो क्या बात थी!

३. कट्टर आलोचकों और संशयधारियों को घुटने टेकते देर नहीं लगती! क्या पता कल मैं ही नतमस्तक मिलूं!

ब्लॉगिंग करते रहें! यहाँ सब अच्छा ही हो रहा है. आप हिंदी ब्लॉगिंग की शान हो. मुझे ख़ुशी है आपने इस बात को उठाया है.

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9/20/2009 06:14:00 am ×

१. संगीता जी, क्या इस बार मौज लेने की बारी आपकी तो नहीं?

२. इतना सीरियसली ले लिया! मैं तो आपका बच्चा जैसा हूँ! कोई शास्त्री होता तो क्या बात थी!

३. कट्टर आलोचकों और संशयधारियों को घुटने टेकते देर नहीं लगती! क्या पता कल मैं ही नतमस्तक मिलूं!

ब्लॉगिंग करते रहें! यहाँ सब अच्छा ही हो रहा है. आप हिंदी ब्लॉगिंग की शान हो. मुझे ख़ुशी है आपने इस बात को उठाया है.

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9/20/2009 06:22:00 am ×

निशांत मिश्र जी ,
इस आलेख में कुछ भी गलत नहीं कहा गया .. आपको बुरा लगा तो डा अरविंद मिश्रा जी को भी बुरा लग सकता है .. आपलोगों ने मेरे ब्‍लाग को पढा .. उसपर टिप्‍पणी की यह मेरे लिए बहुत है .. जिन्‍हें ज्‍योतिष के नाम से ही चिढ है .. उन्‍हें समझाने का प्रयास है मेरा .. सिर्फ विज्ञान ही विज्ञान नहीं होता .. हर जगह विज्ञान होता है .. बस मानो तो देव नहीं तो पत्‍थर .. मेरे ब्‍लाग को पढकर देखें तो वे !!

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9/20/2009 06:27:00 am ×

संगीताजी, कुछ दिनों पहले मैंने आपको एक ईमेल किया था जिसमें जानना चाहा था की मेरा तीन साल का बेटा आयेदिन क्यों बीमार हो जाता है और अब तक तीन बार अस्पताल में भर्ती भी हो चुका है. इस बात का कोई ज्योतिषीय कनेक्शन ढूँढने के लिए मैं आपसे जानना चाहता था. देखिये न, परेशानी में इन्सान सब कुछ करता है. 'दीवार' का अमिताभ याद है न?
मुझे बताइए न कुछ इस बारे में. बेटे की सलामती के लिए सब करूंगा! आपके जवाब का दो-तीन हफ्ते से इंतज़ार है!

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9/20/2009 06:33:00 am ×

बहिन संगीता पुरी जी!
आपकी यह पोस्ट बहुत उपयोगी है।
ज्योतिष वास्तव में एक विज्ञान है। क्योंकि
इसका आधार ग्रह-नक्षत्रों की गणना पर आधारित है। आपके इन शब्दों में सत्यता है-
" .. हर जगह विज्ञान होता है .. बस मानो तो देव नहीं तो पत्‍थर .."

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9/20/2009 06:35:00 am ×

निशांत मिश्रा जी ,
मुझे आपका ईमेल नहीं मिला था .. आपके यहां से ठीक से सेण्‍ड ही नहीं हुआ होगा .. चेक कर लें .. अपना और बच्‍चे का जन्‍म विवरण भेजे .. समस्‍या को समझने की कोशिश अवश्‍य करूंगी .. आपको इंडीब्‍लागर में रैंक 1 पाने की बहुत बहुत बधाई !!

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mehek
admin
9/20/2009 06:49:00 am ×

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष hame yahi naam pasand hai aapke blog ka.

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9/20/2009 07:10:00 am ×

सगीता जी ,
ब्लॉग जगत में आपका ब्लॉग अच्छा खासा लोकप्रिय है ! नाम बदलने की भूल न करियेगा नहीं तो टिप्पणियों की संख्या तेजी से घट जायेगी ! मेरी बात छोडिये, मुझे फलित ज्योतिष से पूर्वाग्रह के हद तक वितृष्णा है -और मेरा यह दुराग्रह वैज्ञानिक मनोवृत्ति के विरुद्ध भी है ! आप जिस मनोयोग,दृढ़ता और तन्मयता से आपने काम में लगी हैं उसकी मुक्त कंठ से सराहना की जानी चाहिए ! मेरी इस विषय पर गाहे बगाहे की गयी तिक्त टिप्पणियों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है !
अगर आप नहीं रहेगी तो हमारा वजूद भी मिट जाएगा ! हा हा हा !
नवरात्र और दुर्गापूजा की शुभकामनाएं !

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9/20/2009 07:29:00 am ×

भूलकर भी नाम न बदलिए!

मामले का निपटारा जल्दी होते दीख रहा है.

चलता हूँ. अभी कई ब्लौगों पर घमासान मचा हुआ है.:)

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Unknown
admin
9/20/2009 10:24:00 am ×

कुछ भी कीजिये
लेकिन ये सिलसिला जारी रखिये............
आनन्द आ रहा है.........

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9/20/2009 12:01:00 pm ×

ज्योतिष वास्तव में एक विज्ञान है।galat bat hai.

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9/20/2009 12:51:00 pm ×

उचित अनुचित आपसे बेहतर कोई समझ सकता है भला । आभार ।

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9/20/2009 01:32:00 pm ×

संगीता जी, अजी आप हिम्मत क्यो हार रही है, यह अलोचक ही तो हमे हिम्मत देते है, फ़िर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष कोई पोंगा पंडितो का ज्योतिष नही यह तो एक विज्ञान है। आप नी तो नाम बदले, ओर ना ही हिम्मत हारे, हमे हमेशा चाहने वाले ओर आलोचक मिलते है तो आलोचको से घबराना नही चाहिये, बल्कि उन का मुकाबला करना चाहिये, ओर उन्हे अपनी विद्धया से हराना चाहिये, यह आलोचक तो वो आग है जिस मै सोना तप कर ओर निखरता है, ओर आप के लेख आगे से ज्यादा अच्छे बनते है, लेकिन अलोचको को यह भी ध्यान रखना चाहिये कि उन की टिपण्णी से किसी के मन को ठेस ना पहुचे, किसी के दिल को दुख ना पहुये.संगीता जी आप अपने काम मै लगी रहे, बेफ़िक्र हो कर, हम मै से किसी को भी कोई हक नही आप को गलत कहने का, हमे हक है अगर आप का लेख नही पसंद तो हम इसे ना पढे,लेकिन आप को दुख पहुचाने का हक नही.
धन्यवाद

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9/20/2009 02:34:00 pm ×

समर्थन और विरोध तो होता ही रहता है, हमें तो आपके ब्लाग का यही नाम पसंद है । पूजा की शुभकामनायें । आभार ।

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9/20/2009 07:04:00 pm ×

apka blog or eska naam dono hi achhe hai...

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9/20/2009 08:47:00 pm ×

जानती हैं संगीता जी..आज दस हजार से भी ज्यादा चिट्ठे हैं ब्लोग जगत में..मगर अभी भी ..आप जैसे किसी विषय विशेष पर इतना संधान करना सबके बस की बात नहीं...नाम यही रहे...नये वाला तो बिल्कुल सिंपल सा है..कितना सुना सुना सा लगता है..

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Unknown
admin
9/20/2009 10:17:00 pm ×

राज भाटिय़ा जी से अक्षरशः सहमत....

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Ishwar
admin
9/20/2009 10:53:00 pm ×

naam mat badaliyega yahi naam bahut achchha hai meri samajh se to
baki aapki marji.

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9/21/2009 12:15:00 am ×

निशांत भाई, आपकी पहली टिप्पणी वाली बात संगीता जी एक बार में ही समझ जातीं...ये डर वाले शाहरूख खान की तरह बात को दो बार दोहराने की ज़रुरत क्या थी...(वैसे बेटे राजा का स्वास्थ्य अब कैसा है, हम सब चाहते हैं कि वो ज़िंदगी की हर दौड़ में आगे रहे और आपके साथ देश का भी नाम रौशन करे)

और संगीता जी जहां तक नाम बदलने की बात है तो जस्टिस पाबला जी ने ऑर्डर दे दिया है...नहीं तो नहीं...

अब चाहे झा जी को नाम वेरी सिम्पल ही क्यों न लगे..
(निर्मल हास्य)

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