क्‍या अपने चिट्ठे का नाम planet’s effect on microbiological, pathological, pharmacologica या पैथोलोजिकल बायो रिदम में एडवांस स्‍टडीज रख लूं ??


मेरे प्रोफाइल को विजिट करनेवाले अक्‍सर मुझे ईमेल भेजा करते हैं ... 

“ आपका प्रोफाइल देखा , पर आप तो ज्‍योतिष जैसे विषय पर लिखती हैं , जिसमें मेरी रूचि नहीं और उसके बारे में मुझे कोई जानकारी भी नहीं , इसलिए आपका ब्‍लाग नहीं पढ पाता हूं। “ 

जो भी मुझे इस प्रकार के ईमेल भेजा करते हैं , उनसे मेरा अनुरोध रहता है कि वे मेरा ब्‍लाग अवश्‍य पढें , मेरे ब्‍लाग पर ज्‍योतिष की तो कोई चर्चा ही नहीं होती , आसमान में मौजूद ग्रहों की वर्तमान स्थिति के आधार पर सामयिक प्रश्‍नों के तिथियुक्‍त जबाब भी होते हैं , इसके माध्‍यम से समाज से धार्मिक और ज्‍योतिषीय भ्रांतियों का दूर करने की दिशा में भी प्रयास जारी है , इसके साथ ही मेरी अपनी और ब्‍लाग जगत से जुडी बातें भी मैं इसी चिट्ठे में करती हूं। 

इसलिए कुल मिलाकर मेरे ब्‍लाग में ऐसा कुछ भी नहीं , जो आपकी समझ में इसलिए नहीं आए कि आप ज्‍योतिष के बारे में कुछ नहीं जानते। इतना कहने के बाद भी बहुत लोग चिट्ठे का 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' नाम देखकर ही मेरे चिट्ठे को ज्‍योतिषीय चिट्ठा समझकर नहीं पढते हैं , तो अनजान पाठकों की बात करने की आवश्‍यकता ही नहीं । इसलिए कुछ दिनों से मेरे दिमाग में अपने चिट्ठा का नाम बदले देने की बात चल रही थी । 

 मैने चंद्रमा के घटने बढने यानि पूर्णिमा और अमावस्‍या के जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव की चर्चा करते हुए एक आलेख लिखा था। उसमें निशांत मिश्रा की निम्‍न टिप्‍पणी आयी थी ...... “क्या आप इसे microbiological, pathological, और pharmacological सन्दर्भों में नहीं देखतीं? इन विषयों के परिप्रेक्ष्य में देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि तबीयत खराब होने, निदान न हो पाने, बाद में निदान हो जाने, और फिर तबीयत ठीक हो जाने को जैवरासायनिकी द्वारा बेहतर समझाया जा सकता है.”

इसके कुछ दिनों बाद ही 4 सितम्‍बर को मैने भावना पांडेय जी का एक आलेख पढकर उसे बृहस्‍पति के 12–12 वर्षों में एक जैसी स्थिति को जोडने का प्रयास किया , तो डा अरविंद मिश्रा की निम्‍न टिप्‍पणी मिली ... ” मनुष्य में एक जैवीय घड़ी होती है -यह कुदरत से संतुलन बना के चलती है -अब जैसे ज्वार भाटा चंद्रमा की गतियों से प्रभावित है -मनुष्य की लय ताल /बारंबारता की घटनाओं में मासिक चक्र आदि हैं -कुछ असामान्य स्थतियों में जब जैवीय घडी बिगड़ती है तो कुछ रोग बारंबारता लिए हो जाते हैं -आप पैथोलोजिकल बायो रिदम से गूगलिंग करें -परिणाम सभी को बताएं -कृपा कर अध्यन का दायरा बढायें -आप इन्टरनेट युग में जी रही हैं !”

इन दोनो टिप्‍पणियों से अर्थ यह निकलता है कि ब्रह्मांड में घटनेवाली हर घटना का संबंध एक दूसरे से होता है , जो बायो रिदम का कारण है। आकाशीय पिंडों की गति के अनुसार धरती पर घटनाओं का संबंध होता है , इसे विज्ञान भी मानता है। पर ज्‍योतिष को मानने में वैज्ञानिकों को मुश्किल हो जाती है और जिसे वैज्ञानिक न माने , उसे आम जनों को मानने में तो दिक्‍कत होगी ही। अब जहां ज्‍योतिष के प्रति ये मानसिकता हो , वहां मेरे चिट्ठे को पढनेवालों की संख्‍या कम होनी ही है। 

इसलिए मेरे मन में अपने चिट्ठे के नाम को परिवर्तित कर देने के विचार बार बार आ रहे हैं। आप पाठको से मेरा प्रश्‍न है कि क्‍या इस चिट्ठे का नामकरण planet’s effect on microbiological, pathological, pharmacologica या पैथोलोजिकल बायो रिदम में एडवांस स्‍टडीज कर दिया जाए ?


संगीता पुरी

Specialist in Gatyatmak Jyotish, I write blogs on various topics particularly Astrology. My several books published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ organized by the newspaper ‘Prabhat Khabar’. गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723

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