किसी सपने का हकीकत में बदलना

ग्रहों के जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव की जानकारी के लिए ज्‍योतिषियों को पंचांग की आवश्‍यकता पडती है। पंचांग में आसमान के ग्रहों नक्षत्रों और अन्‍य योगों के अलावा और बहुत प्रकार की जानकारी दी होती है, उनमें शरीर के भिन्‍न भिन्‍न अंगों में गिरगिट चढने से लेकर विभिन्‍न प्रकार के स्‍वप्‍न को भी किसी न किसी प्रकार की घटना से जोडने की कोशिश की जाती है। पिताजी के द्वारा ज्‍योतिष के अध्‍ययन किए जाने के कारण बचपन से ही हमारे घर पर पंचांग हुआ करता था , बचपन से ही मुझमें पढने की बुरी आदत भी अधिक ही है , घर पर पंचांग पलटकर देखा करती , स्‍वप्‍न फल को पढने और उसके प्रभाव को गांववालों के समक्ष रोचक ढंग से प्रस्‍तुत करने में आनंद आता।

वैज्ञानिक दृष्टिकोणयुक्‍त पिताजी से गांव में अंधविश्‍वास फैलाने के लिए मुझे हमेशा फटकार लगती थी और वे विभिन्‍न प्रकार के सपनों का अवचेतन मन में बैठी धारणा या परिस्थिति से संबंध बतलाया करते। इस कारण बाद में मैने सपने की सत्‍यता को अंधविश्‍वास से या अवचेतन मन से ही जोड लिया था। पर चूंकि एक ज्‍योतिषी को लोग हर चीज का विशेषज्ञ मान लेते हैं और विज्ञान से परे की किसी भी बात की चर्चा करने से परहेज नहीं करते , इस कारण कभी कभी ऐसी एक दो ऐसी घटनाएं सुनने को अवश्‍य मिली , जिससे सपने के सच होने की पुष्टि मिलती थी। पर जबतक व्‍यक्ति स्‍वयं किसी बात को महसूस नहीं करता , दूसरों पर सहज विश्‍वास मुश्किल होता है और इसकी अपवाद मैं भी नहीं। पर पिछले सप्‍ताह मेरे साथ घटी एक घटना ने अब मुझे विश्‍वास दिला दिया कि सपने भी सच होते हैं।

पिछले शनिवार की रात मैने स्‍वप्‍न में देखा कि मेरे सामने धुलनेवाले कपडों का ढेर रखा है, जिन्‍हें धोती धोती मैं बिल्‍कुल थक गयी हूं। पर धोने को और कपडे बचे ही हैं , इसलिए फ्रेश होने के लिए चाय बनवा रही हूं। इसके बाद मेरी नींद टूट गयी। वैसे मैं हमेशा चिंतित रहती हूं कि वाशिंग मशीन वगैरह के कारण हमारी आदत खराब हो गयी है और कहीं हाथ से कपडे धोने पडे , तो अब दिक्‍कत आ जाएगी , अवचेतन मन में बैठा यही भय स्‍वप्‍न में दिख गया। यही सोंचकर थोडी ही देर में इस बात को मैं भूल गयी। रविवार के दिन ऐसे ही काम अधिक होता है। बेटे का यूनिफार्म धोना था , सफेद कपडे को धोने के लिए उसमें सर्फ बहुत अधिक ही डालनी पडती है । उसे धोने के बाद वाशिंग मशीन के उस सर्फ के पानी का सदुपयोग करने के लिए घरभर से परदे , चादर या अन्‍य गंदे कपडे वगैरह ढूंढ ढूंढकर धोया करती हूं।

इस तरह जब तीन चार ट्रिप यानि 15 किलो से उपर कपडे धोने के बाद वाशटब से पानी को निकालने की कोशिश की तो ड्रेन में कुछ खराबी निकली , पानी ड्रेन ही नहीं हुआ। चूंकि श्रीमान जी घर पर ही थे , उन्‍होने तुरंत पीछे का भाग खोलकर पानी को ड्रेन कर दिया, पर उन्‍हें सिस्‍टम में कुछ गडबडी नजर आयी , जिसे हमेशा की तरह ठीक करने की कोशिश की। अब मशीन में दुबारा पानी भरकर चारो ट्रिप कपडे को खंगालना और सुखाना बाकी था , जिसे मशीन को सुधारे बिना भी किया जा सकता था , पर मशीनरी और इलेक्ट्रिक सामानों को बनाने में खास दिलचस्‍पी रखनेवाले ये भला वाशिंग मशीन के कंट्रोल पैनल को खोलकर ठीक करने की कोशिश कैसे न करते ? वैसे तो हमेशा ही ये इस तरह के कामों में कामयाब ही होते हैं , पर इसमें ये असफल रहें। साथ ही इस चक्‍कर में कौन सा तार इधर उधर हुआ कि मशीन में करेंट पहुंचना ही बंद , तुरंत मिस्‍त्री को बुला पाना भी संभव न था। अब निर्जीव वाशिंग मशीन हमारे सामने पडा था और मैं उतने गीले कपडों को देखकर परेशान थी। कामवाली भी चली गयी थी कि मैं उससे मदद ले सकूं।

इतने गीले कपडों को झुककर हाथ से खंगालना जितना कठिन था , उतना ही निचोडकर फैलाना भी। उनमें से आधे कपडों को अच्‍छी तरह निचोड न सकने के बावजूद मैं काफी थक गयी थी। इतने दिनों से कपडे निचोडने की आदत जो छूट गयी थी ,कपडों के ठीक से न निचोडे जाने के कारण बरामदा कपडों से निकले पानी से भरा पडा था। थकावट को दूर करने के लिए चाय बनाते हुए अचानक मुझे अपने सपने की याद आ गयी, 15 घंटे के अंदर सपने को हकीकत में बदलते देख मैं आश्‍चर्यित थी। इतने सारे देखे गए सपनों में से अचानक कौन से सपने सच हो जाते हैं , यह जानने की जिज्ञासा बन गयी है। 

वैसे तुरंत किसी सपने के हूबहू सच होने का जीवन यह मेरा पहला अनुभव है, पर मुझे यह संयोग नहीं लगता। वैसे तो कोई विशेषज्ञ इस बात की जानकारी दे पाएं तो उनकी मुझपर बडी कृपा होगी , पर इसके बावजूद मैं खुद भी इससे संबंधित अध्‍ययन करना चाहती हूं। यदि आपके पास भी ऐसे कुछ अनुभव हों तो इसी ब्‍लाग पर टिप्‍पणी के रूप में मुझसे अवश्‍य शेयर करें , ताकि मुझे इस बात का रिसर्च करने में मदद मिले।

هناك 15 تعليقًا:

Shardul يقول...

देखिए, शायद नेपच्युन ने आपके जन्मचंद्र की राशीमें डेरा डाला हो....

राज भाटिय़ा يقول...

संगीता जी मेरे सपने ९०% सच होते है, मेरी बीबी क्या मै खुद भी परेशान हुं, ऎसा क्यो, लेकिन जब कभी मुझे कोई ऎसा सपना आता है तो मै सब को पहले से ही चुस्त कर देता हुं, ओर सपना बाद मै समय बीत जाने पर बताता हुं, पहले बता देने से वो सपना बिखर जाता है, शायद यह मेरा वहम ही हो, जिस दिन इंदिरा गांधी मरी, उस दिन मुझे सपना आया, मेने टी वी पर देखा तो हेरान रह गया,
पता नहीकुछ ऎसा है जिसे हम समझ नही सकते

वाणी गीत يقول...

सपने सच होने का तो पता नहीं ..मगर जो घरों में ये होते है ...ऐसे ही होते हैं ...घर में कोई इलेक्ट्रोनिक आयटम बिगड़ा नहीं ...की उसका पूरा पोस्टमार्टम कर दिया जाता है ...अक्सर ठीक हो ही जाता है ...
इनकी देखा देखी अब तो छोटी बेटी भी जब तब हाथ में पेचकस लिए नजर आती है ... !!

Gyan Darpan يقول...

संगीता जी
सपने बहुत बार सच होते है मैंने अपनी पत्नी के कम से कम आठ दस सपने सच हुए देखे है आज से कोई १३ वर्ष पहले हम जोधपुर रहते थे एक दिन सुबह उठते ही पत्नी ने बताया कि आज रात को सपने में मैंने पडौस में रहने वाली सुमन को रोते और उसके घर पर बैठी स्त्रियों की भीड़ देखि है इसका मतलब उसका होने वाला पुत्र मुश्किल ही बचे | मैंने उसे यह कहकर चुप करा दिया कि ऐसी बाते नहीं करा करते और यह अपना सपना किसी और को मत बता देना | सुमन गर्भवती थी और किसी भी वक्त उसकी डिलीवरी हो सकती थी | हमारी सपने की बात पूरी होने के दस मिनट बाद ही हमारे मकान मालिक बताने लगे कि सुमन को रात को दर्द उठा था और अब वह अस्पताल में है हमारी बात खत्म ही नहीं हुई थी कि सुमन के भाई ने अस्पताल से आकर बताया कि सुमन को पुत्र हुआ था लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका |
ऐसे ही एक दिन सुबह उठते ही पत्नी ने बताया कि रात को सपने में मैंने देखा है कि पिताजी शहर से काफी सारे ओढने लाये है हो सकता रिश्तेदारी में किसी की मौत हो गयी है अत: गांव फ़ोन कर पूछिये | जब मैंने तुरंत गांव फोन लगा पिताजी से बात की तो उन्होंने बताया कि तेरी बहन की दादी सास ख़त्म हो गयी है और कल मुझे वहां जाना है | दरअसल लड़कियों की ससुराल में किसी बुजुर्ग की मौत होने पर वहां कपडे आदि लेकर जाना होता है जिनमे ओढने अक्सर ज्यादा होते है अत : सपने में ओढने दिखने पर पत्नी ने सहज ही अनुमान लगा लिया कि रिश्तेदारी में किसी बुजुर्ग की मौत हुई होगी |
मेरी पत्नी जी के ऐसे कई सपने है जो हमेशा सच हुए है कई बार तो जब कभी वह सपने की कोई बात करती है तो मेरे मुंह से अनायास ही निकल जाता है कि कोई गड़बड़ तो नहीं देखि |

अन्तर सोहिल يقول...

अभी नहीं बता सकते जी
ट्रेन का टाईम हो गया है और घर जाना है
फिर कभी

प्रणाम

निर्मला कपिला يقول...

शायद सच हो मुझे तो याद ही भूल जाता है धन्यवाद रोचक जानकारी है बधाई

Mithilesh dubey يقول...

बेहद रोचक लगा पढ़कर । आभार

पी.सी.गोदियाल "परचेत" يقول...

संगीता जी कभी-कभी के लिए यह बात सही है ! लेकिन हमेशा नहीं, इसकी प्रामाणिकता कितनी सही है कह नहीं सकते !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" يقول...

हां यह बात बिलकुल मेरी आजमी हुई है कि कभी कभार किसे होनी अनहोनी का थोड़ा पहले आभास हो जाता है!

dhiru singh { धीरेन्द्र वीर सिंह } يقول...

कल सपने मे देखा था सामने वाली दुकान का लाला मर गया और आज वह मर गया . इसे क्या कहेंगे

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद يقول...

सही है, कभी-कभी सपने भी सच होते हैं ॥

योगेन्द्र मौदगिल يقول...

kamaal hai g....

Anil Pusadkar يقول...

रोचक।आई यानी मेरी माताजी को रोज़ सपने आते हैं और हम सभी भाई उन्हे सपना पूछ पूछ कर तंग करते हैं।वो समझती है सब कभी मूड होता है तो खुद बताती है और जब टोका-टाकी ज्यादा होती है तो जाओ तुम लोगो को मज़ाक लगता है तो मै नही बताती कह कर नाराज़ हो जाती है।थोड़ी देर की मेहनत और मान-मनौव्व्ल के बाद फ़िर वो सपने की लाईव कमेण्ट्री करने लगती है।ये सिलसिला बरसों से चला आ रहा है।बस अपने को ज़रा सपने कम ही आते हैं।

vandana gupta يقول...

kuch sapne kabhi kabhi sach ho jate hain .........har sapna sach nhi hota magar anhoni ki aashanka wale jyadatar sapne sach ho jate hain .....aisa kyun hota hai yahi samajh nhi aata.

ZEAL يقول...

संगीता जी ,
मुझे तो यकीन है। मेरा ९० % स्वप्न सच ही निकलता है।