मान्‍यताएं कब अंधविश्‍वास बन जाती हैं ??

सुपाच्‍य होने के कारण लोग यात्रा में दही खाकर निकला करते थे , माना जाने लगा कि दही की यात्रा अच्‍छी होती है।
देर से पचने के कारण यात्रा में कटहल की सब्‍जी का बहिष्‍कार किया जाता था , माना जाने लगा कि कटहल की यात्रा खराब होती है।
समय के साथ दही को शुभ माना जाने लगा और मान्‍यता बन गयी कि कुछ भी खाकर निकलो , यात्रा के वक्‍त छोटे से चम्‍मच से भी दही अवश्‍य खा लिया जाए तो यात्रा शुभ होगी।
यहां तक तो ठीक था , पर मान्‍यता धीरे धीरे अंधविश्‍वास बन गयी , जब गाडीवान् ने अपनी गाडी में कटहल को रखने से भी मना कर दिया , क्‍यूंकि इसकी यात्रा खराब होती है , कहीं गाडी का एक्‍सीडेंट न हो जाए !!

هناك 17 تعليقًا:

Udan Tashtari يقول...

ऐसे ही मान्यताऐं अन्धविश्वास का रुप ले लेती होंगी.

honesty project democracy يقول...

AISE HI LIKHTE RAHIYE KABHI N KABHI TO LOGON KE SAMAJH MAIN WASTWIKTA AA HI JAYEGI.PRYAS AUR PRSTUTI ACHCHHI HAI.

tulsibhai يقول...

" manyta ..jo aage jaker andhvishwash ban jaati hai "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

दिलीप يقول...

sach kaha sangeeta ji...
aapki post padh ke aur kai manyaten dimaag me aa gayi jo ab andhvishwaas ban chuki hain...
na jaane kab hamara samaaj in sabse baahar aa payega...

http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

महफूज़ अली يقول...

Bilkul sahi kaha aapne.....

वाणी गीत يقول...

बहुत सी मान्यताएं इसी तरह अंधविश्वास बनती गयी ...
सही ...!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक يقول...

रूढ़ियों के उन्मूलन में
यह पोस्ट अवश्य सहायक सिद्ध होगी!

ajit gupta يقول...

ऐसी ही बहुत सी परम्‍पराएं हैं जो हमारे जीवन में रच बस गयी हैं।

Vivek Rastogi يقول...

ओह हमें तो यह पता ही नहीं था हम हमेशा उलट किया करते थे।

rashmi ravija يقول...

बिलकुल सही...ऐसी ही छोटी छोटी बातें , अंधविश्वास का रूप ले लेती हैं...बातों के मूल में लोग नहीं जाते बस...आँखें बंद कर के अनुसरण करने लगते हैं..

रंजना [रंजू भाटिया] يقول...

सही लिखा है यूँ ही अंधविश्वास बनते हैं ..

परमजीत बाली يقول...

सही लिखा आपने\

DR. ANWER JAMAL يقول...

appriciated .

दीपक 'मशाल' يقول...

Sameer ji ne hi kah di meri wali baat.

vinay يقول...

बहुत अच्छा चिन्तन,मान्यता और अन्धविशवास के मध्य बहुत ही,बारीक रेखा है,उचित शोध से ही,मान्यता और अन्धविशवास के बीच में अन्तर किया जा सकता है ।

कुमार संभव يقول...

बहुत दुःख होता है की आज के भारत में भी हम अन्धविश्वास से घिरे हुए हैं

चिट्ठाचर्चा يقول...

आपका ब्लॉग बहुत अच्छा है. आशा है हमारे चर्चा स्तम्भ से आपका हौसला बढेगा.