मेरी पहली प्राथमिकता ज्‍योतिष का विकास करने की थी !!

अभी तक आपने पढा .... दूसरे ही दिन से टी वी पर ज्‍योतिष के उस विज्ञापन की स्‍क्रॉलिंग शुरू हो गयी थी , जो मैने पिछली पोस्‍ट में लिखा है....

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पर नई नई पिक्‍चर देखने में व्‍यस्‍त लोगों का अधिक ध्‍यान इस ओर जाता नहीं है , यदि ध्‍यान जाता भी है तो लोगों को यह भ्रम है कि एक ज्‍योतिषी के पास हमें मुसीबत पडने पर ही जाना चाहिए। मुसीबत के वक्‍त भी बहुत दूर तक लोग स्‍वयं संभालना चाहते हैं , क्‍यूंकि एक ज्‍योतिषी को ठग मानते हुए लोग उससे संपर्क करना नहीं चाहते। यदि एक ज्‍योतिषी के पास जाने से समस्‍याएं सुलझने की बजाए उलझ जाती हों , तो उसके पास जाने का क्‍या औचित्‍य ??  पर फिर भी कुछ लोग तो समस्‍याओं के अति से गुजरते ही होते हैं , जिनके पास समस्‍या के समाधान को कोई रास्‍ता नहीं होता , उनका ध्‍यान बरबस इस ओर आकृष्‍ट हो जाता है। वैसे ही लोगों में से कुछ के फोन मेरे पास आने लगे थे ।

भले ही टोने टोटके , तंत्र मंत्र या झाडफूंक की समाज के निम्‍न स्‍तरीय लोगों और समाज में गहरी पैठ हो , पर ज्‍योतिष से हमेशा उच्‍च वर्ग की ही दिलचस्‍पी रही है। राजा , सेनापति ,मंत्री  , बडे नेता और बडे से छोटे हर स्‍तर तक के व्‍यवसायियों को बिना ज्‍योतिषी के काम शुरू करते नहीं देखा जाता। यह भी अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ऊंची सामाजिक और आर्थिक स्थिति के होते हुए भी ये ग्रहों के प्रभाव को लेकर अंधविश्‍वास में होते हैं। पर मैने उनके मध्‍य विज्ञापन न कर बोकारो स्‍टील सिटी के सेक्‍टरों  में प्रसारित होते चैनल में विज्ञापन किया था , जहां आमतौर पर व्‍यवसायी नहीं , अच्‍छे पढे लिखे नौकरीपेशा निवास करते हैं , जो स्‍थायित्‍व के संकट से नहीं गुजरते होते हैं और जिनमें तर्क करने की पूरी शक्ति होती है।  एप्‍वाइंटमेंट लेने के बाद वे हमारे पास आते , अपना जन्‍म विवरण दे देते और चुपचाप रहते , कोई प्रश्‍न तक न करते। अपने ज्‍योतिष में विश्‍वास दिलाने की पूरी जबाबदेही मुझपर होती।

मैं तबतक एक गृहिणी के तौर पर घर के अंदर रह रही थी , एक प्रोफेशनल के तौर पर बातें करने में बिल्‍कुल अयोग्‍य। लंबे जीवनयात्रा से गुजरनेवाले अधेड उम्र के लोगों को तो उनके अच्‍छी और बुरी जीवनयात्रा के बारे में जानकारी देकर विश्‍वास में लिया जा सकता था , पर अधिकांश लोग खुद की परेशानी को लेकर मेरे पास नहीं आया करते थे। वे अपने बेटे बेटियों की समस्‍याएं , मुख्‍य तौर पर कैरियर या विवाह की समस्‍याएं लेकर आते , उन बच्‍चों की जन्‍मकुंडली के अनुसार छोटी सी जीवनयात्रा में कोई बडा उतार चढाव मुझे नहीं दिखता , जिसको बताकर मैं उन्‍हें विश्‍वास में लेती। दस पंद्रह मिनट तक पूरी शांति का माहौल बनता , पर इसके बाद मुझे कई विंदू मिल ही जाते , जिससे मैं उन्‍हें विश्‍वास में ले पाती । मैं साफ कर देती कि समय के साथ कह रही भूतकाल की बातों से यदि उन्‍हें विश्‍वास न हो , तो वे वापस जा सकते हैं , उन्‍हे फी देने की कोई जरूरत नहीं। पर छह महीने तक स्‍क्रॉलिंग चली , हर दिन एक दो लोग आते रहें , पर भूतकाल की बातें सुनकर कोई भी बिना भविष्‍य की जानकारी के नहीं लौटे। हां, इन छह महीनों में दो बार ऐसा वाकया हुआ , जानबूझकर प्‍लानिंग बनाकर दो युवा भाई बहन आए , सबकुछ पूछ भी लिया और कहा कि वे संतुष्‍ट नहीं हुए , मैने कहा कि आपने मेरा इतना समय क्‍यूं लिया , तो उन्‍होने कहा कि मुझसे अधिक उनका समय बर्वाद हुआ है।

धीरे धीरे चार महीने व्‍यतीत हो चुके थे , इस मध्‍य मैं बहुतों को प्रभावित कर चुकी थी , इसलिए उनके परिचय से भी कुछ लोग आने लगे थे। चूंकि मेरी पहली प्राथमिकता ज्‍योतिष का विकास करने की थी , पैसे कमाने की नहीं , इसलिए मैने विज्ञापन बंद कर दिया था। एक ज्‍योतिषी के पास आनेवाले तो बहुत अपेक्षा से मेरे पास आते , पर मेरे पास आने के बाद उन्‍हें मालूम होता कि ज्‍योतिषी भगवान नहीं होता। एक डॉक्‍टर , एक वकील , एक शिक्षक की तरह ही ज्‍योतिष भी कुछ सीमाओं के मध्‍य स्थित होता है , यहां सबकुछ स्‍पष्‍ट नहीं दिखाई देता और हमलोग ग्रहों की सांकेतिक स्थिति को देखकर भविष्‍यवाणियां करते हैं। इसके अलावे ग्रह के प्रभाव को कम या अधिक कर पाना तो संभव है , पर दूर कर पाना प्रकृति को वश में करना है , जो कदापि संभव नहीं , हमारे विश्‍लेषण से वे पूर्णत: संतुष्‍ट होते। पर बहुत दिनों तक मैं इस ज्ञान को न बांट सकी , क्‍यूंकि मेरे सामने अन्‍य काम भी बिखरे पडे थे , इसे जानने के लिए फिर अगली कडी ....

هناك 21 تعليقًا:

मनोज कुमार يقول...

@ एक डॉक्‍टर , एक वकील , एक शिक्षक की तरह ही ज्‍योतिष भी कुछ सीमाओं के मध्‍य स्थित होता है
बहुत सही कहा आपने। एक ज्ञानवर्धक आलेख।

गीली मिट्टी पर पैरों के निशान!!, “मनोज” पर, ... देखिए ...ना!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (ਦਰ. ਰੂਪ ਚੰਦ੍ਰ ਸ਼ਾਸਤਰੀ “ਮਯੰਕ”) يقول...

इस दिशा में आपके प्रयास स्तुत्य हैं!

डॉ. मोनिका शर्मा يقول...

एक ज्ञानवर्धक आलेख.... सही कहा आपने.........

Vivek Rastogi يقول...

पता नहीं लोग ज्योतिष को ज्यादा बताने से क्यों डरते हैं, हमारा मानना है कि वह भी विशेषज्ञ है, नहीं बतायेंगे तो वह् तो पता कर ही लेगा, परंतु अगर समस्या बता दी जाये तो उन्हें कम समय देना होगा समस्या जानने में, और ज्योतिष को भी व्यक्ति पर विश्वास होगा, तो अच्छी सलाह भी दे पायेंगे।

जैसे जब बीमार होते हैं तो डॉक्टर पूछता है कि क्या समस्या हो रही है, अगर नहीं बतायेंगे तो आधे घंटे में वह बीमारी पता कर लेगा, परंतु वह आप पर विश्वास नहीं कर पायेगा, कि आप सत्य बोल रहे हैं, क्योंकि फ़ालतू में आपने उसका आधा घंटा बर्बाद कर दिया।

साधवी يقول...

इसे पढ़िये:

http://sadhviritu.blogspot.com/2010/09/blog-post_06.html

हास्यफुहार يقول...

पढकर अच्छा लगा।

संगीता स्वरुप ( गीत ) يقول...

आपके संस्मरण अच्छे लग रहे हैं ..अपनी पहचान बनाने में आपने बहुत प्रयास किया है ..

vinay يقول...

सही कहा आपने ग्रहों का प्रभाव कम या अधिक करना तो ज्योतिष में हैं,पर पुर्णतया समाप्त करना प्रकृति के हाथ में है ।

ZEAL يقول...

Very informative post.

शिक्षामित्र يقول...

यह पोस्ट प्रसिद्ध ज्योतिषियों को भी पढ़नी चाहिए जो दुनिया भर की शेखी बघारते नहीं थकते। अपनी सीमाएँ बताना अपना क़द ऊँचा करना है।

कुमार राधारमण يقول...

मुझे लगता है कि फलकथन में भूतकाल की घटनाओँ और शारीरिक विशेषताओं का उल्लेख बंद होना चाहिए। ये बातें हू-ब-हू मेल खा भी जाएं तो क्या,लोगों के लिए महत्व भविष्य की बातों का है। हालांकि,अक्सर,भविष्यकथन ही फ़र्ज़ी ज्योतिषियों का रक्षाकवच भी बनते हैं क्योंकि जो गर्भ में है उस पर तत्काल ज्यादा बहस नहीं की जा सकती।

ललित शर्मा-ললিত শর্মা يقول...

सार्थक लेखन के लिए बधाई
साधुवाद

लोहे की भैंस-नया अविष्कार
आपकी पोस्ट ब्लॉग4वार्ता पर

ललित शर्मा-ললিত শর্মা يقول...

सार्थक लेखन के लिए बधाई
साधुवाद

लोहे की भैंस-नया अविष्कार
आपकी पोस्ट ब्लॉग4वार्ता पर

Parul يقول...

jyotish ko lekar aapka gyaan bahut gehra hai..hum jaise ruchi rakhne wale nishchit hi is sey labhanvit hote hai :)

Mrs. Asha Joglekar يقول...

आपने लंबा सफर तय किया है और अपने लिये एक खास जगह भी बनाई है । आपके संस्मरण बढिया जा रहे हैं ।

Dr.M.N.Gairola يقول...

bahut achha lagaa ..blog mei jyotish ki jankaari rakhne vale bhi hai.. shubhdiwas.

वीना يقول...

सही कहा है अपने कि उच्च वर्गीय लोग ज्योतिष में ज्यादा रुचि रखते हैं। मुझे अच्छा लगा पढ़कर...बधाई

Coral يقول...

बहुत सही कहा है आपने ...

शिक्षामित्र يقول...

अगर ग्रहों के प्रभाव को कम या ज्यादा कर पाना संभव नहीं,तो अनुष्ठान और रत्नों का तामझाम किसलिए?

ZEAL يقول...

एक ज्ञानवर्धक आलेख।

om يقول...

Really very thinkable line. " मुसीबत के वक्‍त भी बहुत दूर तक लोग स्‍वयं संभालना चाहते हैं , क्‍यूंकि एक ज्‍योतिषी को ठग मानते हुए लोग उससे संपर्क करना नहीं चाहते। "