बेनामी भाई फिर से अपनी ऋणात्‍मक सोंच के साथ हाजिर

बेनामी भाई आप फिर से अपनी ऋणात्‍मक सोंच के साथ हाजिर है ...मेरे विरोधी मात्र एक पोस्‍ट के साथ
लिंक ही देना था तो वो सकारात्‍मक पोस्‍टों की भी ता दे सकते थे .. जां संख्‍या में अधिक हैं , जैसे कि
संगीता पुरी जी की भविष्‍यवाणी सच: हैती से लाखों मरे
संगीता पुरी जी ने कहा था
संगीता पुरी जी की भविष्‍यवाणियां सही हुई
पंद्रह अगस्‍त बारिश और संगीता पुरी
संगीता पुरी जी आपकी भविष्‍यवाणी सही हुई आपको बधाई
संगीता पुरी सारा जीवन समर्पित कर दिया ज्‍योतिष को
एक बात और कहनी है आपसे बेनामी जी .. 16 सितंबर को जब चतुर्दिक बारिश का हाहाकार मचा था .. मौसम विभाग तक भी कॉमनवेल्‍थ गेम में बारिश को लेकर चिंता कर रहे थे
उस वक्‍त 
मेरी भविष्‍यवाणी यह थी .. ज्‍योतिष को न मानने वाले मेरी इन बातों पर क्‍यूं कुछ नहीं कहते .. ऋणात्‍मकता छोडे सकारात्‍मकता ओढें .. यदि किसी की मदद नहीं कर सकते तो किसी को काम करने में बाधा भी न डाले .. वैसे आपलोगों के द्वारा डाली गयी बाधाओं से मैं और मजबूत होती हूं !!

هناك 16 تعليقًا:

Alpana Verma يقول...

बारिश के बारे में तो हाल ही में की गयी आप की कई भविष्यवानियाँ सही हुई हैं.
बेनामियों को 'ऋणात्‍मकता छोडे सकारात्‍मकता ओढें' का सही सन्देश दिया है आप ने.

vandana gupta يقول...

पता नही लोग क्यों परेशान करके खुश होते हैं…………अब अगर कोई सही काम कर रहा है तो उसे तो करने दें……………आप लिखती रहें यहाँ तो ये सब चलता ही रहता है।

डॉ टी एस दराल يقول...

यदि किसी की मदद नहीं कर सकते तो किसी को काम करने में बाधा भी न डाले ..

सही लिखा है , संगीता जी ।
इनको छोड़ें और अपना काम करती रहें ।

राज भाटिय़ा يقول...

संगीता जी आप मस्त रहे अपने काम मे, यह लोग शेतान दिमाग के मालिक है, इन्हे कोई काम धाम तो है नही, बेकार मे इधर उधर लोगो से पंगा लेते है, छोडो इन्हे, वेसे यह हे तो कोई भटकते ब्लांगर ही, जिन्हे कोई नही पुछता, इन की हरकतो की वजह से, आप इन बातो को दिल पर मत ले ओर आगे भी युही लिखे, धन्यवाद

मनोज कुमार يقول...

सही लिखा है , आपने ।

विष्णु बैरागी يقول...

अपनी लकीर बडी करती जाइए। आलोचकों के स्‍मारक नहीं होते। समय बहुत ही कम है। या तो अपनी बात कह लीजिए या लोगों की बातों का जवाब देते रहिए।

Satish Saxena يقول...

कुछ लोग अपनी फिक्स मानसिकता के गुलाम होते हैं देश और समाज के प्रति गैर जिम्मेवार यह लोग, अपनी माँ और पुत्री के प्यार के प्रति भी संवेदनशील नहीं होते ऐसे व्यक्तियों को मैं सिर्फ तब तक महत्व देता हूँ जब तक उन्हें पहचान न पाऊँ, ऊपर से देखने में वे कितने ही अभिजात्य क्यों न लगें मगर देर सवेर वे अपनी असलियत अपने आप ही दिखा देते हैं !

जीर्ण मानसिकता के शिकार यह लोग अपनी राजनीतिक विचारधारा के ही दास बन कर रह जाते हैं ! बसों, पान की दूकान और नुक्कड़ों पर यह महा विद्वान् लोग,खुद कुछ नहीं करते मगर विरोधी पार्टी के कार्यों के प्रति बहस करते, एक दूसरे का सर फोड़ते नज़र आ सकते हैं

बेहतरीन कामों पर भी यह लोग तारीफ़ नहीं करेंगे न ही अपनी संकुचित समझ के आगे किसी और की बात को सुनेंगे ! अतः इनकी बात को सम्मान न देने तथा अन्य किसी भी विचारधारा का अपमान अपने माध्यम से न होने देने के लिए,माडरेशन का होना बेहद आवश्यक है !

غير معرف يقول...

इनको छोड़ें और अपना काम करती रहें

विवेक सिंह يقول...

बेनामी को भाई कैसे कहा जा सकता है ?

यह भाइयों के साथ अन्याय है !

निर्मला कपिला يقول...

अप बस अपना काम करती जाईये जिसे नही अच्छा लगता वो न आये। बस। धन्यवाद।

Girish Billore Mukul يقول...

आदरणीया संगीता जी के बारे में ऐसा कथन करने वाला झूठा एवम ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप से अनभिज्ञ व्यक्ति है.
मेरा नेट पर अनुभव रहा है कि पुरी जी की गणना न केवल सही होती हैं बल्कि सर्वथा सटीक भी. मैने उनसे अपने बारे में
जो भी जानकारी हासिल की वो मेरे ज्योतिष मित्र को भी नहीं है. जबकि उस मित्र ने सैकड़ों बार मेरी कुण्डली की जांच
की है. हतप्रभ तो तब हुआ जब दीदी ने मेरे साथ हुई वर्ष 1999-2000,2003-2004,में घटी घटनाओं का ज़िक्र किया.
हालिया तकलीफों के मामले में उनसे परामर्श मिला और मैं एक कठोर कदम उठाने से रुक गया जिसका खुलासा मैं अवश्य
करूंगा वक्त आने पर .
दीदी सफ़र जारी रहे डागी का क्या वे तो .......?

पी.एस .भाकुनी يقول...

"बेनामी भाई फिर से अपनी ऋणात्‍मक सोंच के साथ हाजिर"
inko najarandaz krna hi behtr hoga.
abhaar.........

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद يقول...

बेनामी हुए बदनामी :)

Manoj Kumar يقول...

अच्छे काम की ही आलोचना होती है. सो, टेक इज इजी एंड प्लीज गो अहेड

vijai Rajbali Mathur يقول...

behtar yahi hai ki anargal baton per dhyan hi na den .pongapanth kyon papular hai aap hi ney to Diviyaji key yahan spasht kiya hai.Uski chinta kiye bagair dati rahen.hamari SHUBHKAMNAYEN aapkey saath hain.

ललित शर्मा يقول...

आप ज्योतिष के प्रति जितनी समर्पित हैं शायद ही मैने किसी और का इतना समर्पण देखा होगा।
ज्योतिष हमारे आर्यावर्त की प्राचीन विद्या है।
बेनामी का मुंह होता तो खुल कर बातें करता।
बुरका ओढ कर बातें करने वाले का ध्यान क्या देना।