हमारे एप्प से ऐसे समझें, पूरे 2020 में कैसे रहेंगे कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति ??

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जब आप हमारे एप्प के वार्षिक पूर्वानुमान लिंक पर क्लिक करेंगे तो आपको DROPDOWN में दसवें नंबर पर कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति आदि से सम्बंधित भविष्यवाणियाँ दिखाई देंगी। निःशुल्क सब्सक्रिप्शन लेने के बाद आप यहाँ आपके कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति आदि मामलों में  कई तरह की बातें पूरे दो साल तक के लिए कई समय-अंतराल देकर लिखी हुई होंगी।


  1. पिता से सुख और सहयोग मिलना चाहिए। अपनी इच्छा और स्तर के अनुरूप नौकरी होनी चाहिए। कर्मक्षेत्र का माहौल भी सुखद होना चाहिए। प्रतिष्ठा बढ़ती रहनी चाहिए। समाज में अपनी पहचान बनी होनी चाहिए। सामाजिक कार्यों को करने में सुखद अहसास होना चाहिए। सामाजिक राजनीतिक अभिरुचि चाहिए।
  2. पिता के सुख में कमी आ सकती है। उनसे विचारों का तालमेल नहीं बन सकता है। कर्मक्षेत्र में भी परेशानी बन सकती है । प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है। सामाजिक, राजनीतिक कार्यों में असफलता मिल सकती है।
ऊपर लिखे गए दोनों तरह  पूर्वानुमान सामान्य से कुछ अच्छी और सामान्य से कुछ बुरी स्थिति की जानकारी देता है , इसमें बहुत बड़ी बात नहीं होती, जबतक कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति का प्रतिनिधित्व करनेवाले आपके जन्मकालीन ग्रह कमजोर न हों और आपके ये मामले सेंसिटिव न चल रहे हों। लेकिन जब ऐसे पूर्वानुमान लिखे गए हों ---------


  1. कुछ शुभ-ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से सम्बंधित सफलता, ख़ुशी या आनंददायक वातावरण मिलना चाहिए। इसे प्राप्त करने के लिए इन मामलों में पूरा ध्यान बना रहना चाहिए। इस दिशा में किया जानेवाला मेहनत भी फलदायी होना चाहिए। पिता महत्वपूर्ण बने होने चाहिए। कैरियर में जिम्मेदारी भरी सफलता मिलनी चाहिए। प्रतिष्ठा की बढ़ोत्तरी होनी चाहिए। सामाजिक और राजनीतिक लाभ भी मिलना चाहिए।
  2. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से सम्बंधित असफलता , कष्ट या दवाबभरा वातावरण उपस्थित हो सकता है , जिसको सुधारने के लिए इन मामलों पर पूरा ध्यान बना रह सकता है। यह किनके लिए कितना प्रभावी होगा , इसे स्पष्टतः समझने और सटीक निर्णय लेने के लिए कभी-कभी हमारा कंसल्टेशन लेना जरूरी महसूस हो सकता है। कैरियर के मामलों में बड़ा झंझट उपस्थित हो सकता है। पिता पक्ष से भी कुछ कठिंनाइयाँ उपस्थित हो सकती हैं। अपनी प्रतिष्ठा भी थोड़ी कमजोर पड़ सकती है। इसे मजबूत बनाने के लिए माथापच्ची बन सकती है।

ऐसे दोनों पूर्वानुमान बहुत ही अच्छी और बहुत ही बुरी स्थिति के संकेतक हैं। हम सामान्य बोलचाल में भी इसे किसी का फॉर्म में होना और किसी का फॉर्म में न होना कहते हैं। इसलिए ऐसी भविष्यवाणियों के पहले अतिरिक्त तैयारी की जरूरत है।

कभी कभी सामान्य पूर्वानुमान में ऐसी बातें लिखी मिलेंगी -----


  1. कुछ क्रियाशील ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से संबंधित जिम्मेदारी बढ़नी चाहिए। इन मामलों में या तो स्वयं बदलाव होना चाहिए या परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बननी चाहिए कि इनमे मजबूती या बदलाव लाए जाएँ।
देखने में यह पूर्वानुमान बिलकुल सामान्य लग रहा, पर यह समय-अंतराल भी बड़े परिवर्तन देता है। पर यह पॉजिटिव होगा या नेगेटिव, इसे बतलाना अभी के समय में एप्प के लिए मुश्किल होता है, इसलिए इसे यूँ ही छोड़ दिया गया है।

कहीं-कहीं कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति के ऋणात्मक के साथ भी 1 वाक्य जोड़ा गया है , जो ऋणात्मकता के तीव्रता को बढ़ाता है ------


  1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों में मनोनुकूल माहौल के नहीं बनने से या असफलता प्राप्त होने से कुछ निराशा सी बन सकती हैं। इन मामलों के माहौल को बदलने की कोशिशें भी बेकार हो सकती हैं।
लेकिन  इस तरह के  वाक्यों के रहने से बाधाएं बहुत मामूली रहेंगी -----


  1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों में सम्बन्ध की गड़बड़ी या इससे सम्बंधित किसी कार्य के आगे न बढ़ने जैसी थोड़ी बाधा आ सकती हैं। पर उसके बाद माहौल अनुकूल होना चाहिए।
किसी समय में ऐसे वाक्य हों तो -----


  1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों की कुछ कमजोरी बनी रह सकती हैं । ऐसे समय में कोई बड़ा कदम उठाने से झंझट बढ़ सकते हैं।
इन मामलों में जबतक जरूरी न हो, कोई काम न शुरू करें।

किसी समय में ऐसे वाक्य हो सकते हैं  -----

  1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से ये सारे मामले कठिनाई या असफलता उपस्थित कर किसी मामले से सम्बंधित वातावरण को ऋणात्मक बना सकते हैं , जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव बुरा पड सकता है।

इसके अतिरिक्त भविष्यवाणियों में किसी समय में ऐसे वाक्य हो सकते हैं  -----


  1. कुछ शुभ-ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों के द्वारा सुख या सफलता मिलने से किसी मामले से सम्बंधित वातावरण सकारात्मक दिखाई देना चाहिए , जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव अच्छा पड़ना चाहिए।

कल के लाभ, लक्ष्य, मंजिल  मामलों में ऐसी ही चर्चा  होगी।


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