ज्‍योतिषियों को चुनौती देने से पहले मेरे सुझावों पर भी ध्‍यान दें

परसों से ही ज्योतिषियों के लिए 10,000.00 आस्ट्रेलियन डालर की एक और चुनौती आलेख में ज्‍योतिष पर लंबी चौडी बहस चल रही है। ‘साइंस ब्‍लागर एशोसिएशन’ ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता को चैलेंज करते हुए हम ज्‍योतिषियों के लिए एक प्रतियोगिता रखने की तैयारी में है। इस लेख के नीचे टिप्‍पणी में रजनीश जी ने लिखा है ...

“मैं सभी ज्‍योतिषी भाइयों एवं बहनों से यह जानना चहता हूं कि ज्‍योतिष से क्‍या क्‍या जाना जा सकता है। कृपया यह बताने का कष्‍ट करें। संगीता जी, आप स्‍वयं स्‍पष्‍ट करने की कृपा करें कि आप किस आधार पर और किन किन विषयों पर कितनी प्रामाणिक जानकारी दे सकती हैं।

साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन के पदाधिकारी इस बात पर विचार विमर्श कर रहे हैं कि वे स्‍वयं इस तरह की कोई चुनौती सभी लोगों के सामने रखे, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके।“

इसके जवाब में सबसे पहले तो मै बताना चाहूंगी कि ज्‍योतिष के द्वारा किसी के जीवन के हर संदर्भ के बारे में सांकेतिक रूप से बात की जा सकती है , पर उनका सिर्फ गुणात्‍मक पहलू ही बताया जा सकता है , परिमाणात्‍मक पहलू बताना संभव नहीं । जातक के चारित्रिक विशेषताओं के साथ साथ हर पक्ष के सुख , दुख , महत्‍वाकांक्षा , कार्यक्षमता , आई क्‍यू के बारे मे साल , महीने और दिन तक की चर्चा करते हुए जातक की आगे बढती जीवनयात्रा को साफ साफ बताया जा सकता है। निम्‍न तरीके से ज्‍योतिषियों को सही चुनौती देते हुए ज्‍योतिष को सही साबित किया जा सकता है ...

1. सबसे पहले तो पुरस्‍कार की राशि सोंच समझकर रखी जाए , ताकि पुरस्‍कार न दे पाने की स्थिति में ज्‍योतिषी पर दोषारोपण करते हुए मामले को रफा दफा कर दिया जाए।
2. निर्णायक मंडल में सात सदस्‍य मौजूद रहें । ‘साइंस ब्‍लागर एशोसिएशन’ द्वारा उनका चुनाव किया जा सकता है ।
3. सभी ब्‍लागर हों , ज्‍योतिष पर अबतक उनको विश्‍वास नहीं हो , पर कम से कम प्रतियोगिता के दौरान ज्‍योतिष के प्रति किसी प्रकार के पूर्वाग्रह से वे मुक्‍त रहें। वैसे वे रहेंगे ही , क्‍यूंकि हमारे देश में पंच परमेश्‍वर होते हैं।
4. सभी प्रभावशाली हों , जो सही कहने की हिम्‍मत रखते हों और सभी उनकी बातों पर भरोसा करते हों। वैसे पंचों पर तो भरोसा किया ही जाना चाहिए।
5. सबको अपना अपना जन्‍म विवरण यानि जन्‍म तिथि , जन्‍म समय और जन्‍म स्‍थान मालूम हो , ताकि उनको जो भविष्‍यवाणी दी जाए उसका वे खुद विश्‍लेषण कर सकें। किसी दूसरे का जन्‍म विवरण ज्‍योतिषियों को नहीं दिया जाना चाहिए।
6. सबकी उम्र 50 वर्ष के आसपास या अधिक की हो , ताकि वे जीवन के उतार चढाव को महसूस कर चुके हों। इससे भविष्‍यवाणियों के विश्‍लेषण में उन्‍हें सुविधा रहेगी।
7. सभी सदस्‍य अपना जन्‍म विवरण ज्‍योतिषियों को ईमेल कर दें और स्‍वतंत्र रूप से उन्‍हें उनके स्‍वभाव , व्‍यवहार एवं चरित्र के बारे में तथा उनकी जीवनयात्रा के बारे में लिखने को दें ।
8. सभी सदस्‍य अपना जन्‍म विवरण ज्‍योतिषियों के अलावे उन ब्‍लागरों को भी ईमेल कर दें , जिन्‍हें ज्‍योतिष की जानकारी नहीं , पर मानते हैं कि तुक्‍का लगाने से भी बहुत बातें सही हो जाती हैं । उन्‍हें भी स्‍वतंत्र रूप से उनके स्‍वभाव , व्‍यवहार एवं चरित्र के बारे में तथा उनकी जीवनयात्रा के बारे में लिखने को दें । यह इसलिए कि उन्‍हें समझ में आए कि तुक्‍का लगाना इतना आसान नहीं होता।
9. ज्‍योतिषियों को सातो जन्‍मकुंडली की चर्चा के लिए 15-20 दिनों का समय दिया जाए ।
10. पंद्रह-बीस दिनों के बाद ज्‍योतिषियों द्वारा सभी जन्‍म विवरण की संभावित बातें उससे संबंधित ब्‍लागर को ईमेल के द्वारा ही भेज दी जाए , ताकि वे अपने जीवन की घटनाओं से उसका मेल कर सकें। इससे एक फायदा होगा कि किसी की निजी जिंदगी सार्वजनिक भी नहीं होगी। कभी कभी सार्वजनिक रूप में भी लोग कई बातें स्‍वीकार नहीं कर पाते हैं। इससे भी ज्‍योतिषियों के सामने समस्‍या आती है।
11. फिर सभी सदस्‍य अपने अपने घर में ज्‍योतिषियों के द्वारा की गयी संभावित बातें और तुक्‍का लगानेवालों के द्वारा प्राप्‍त विवरण का तुलनात्‍मक अध्‍ययन करते हुए अपने ब्‍लाग में अपना अनुभव लिखें कि भविष्‍य की जानकारी की इस विधा का यानि ज्‍योतिष विज्ञान का कोई भविष्‍य होना चाहिए या नहीं ?
सातो सदस्‍यों के द्वारा दिए जानेवाले निर्णय के अनुसार ही अंतिम फैसला किया जाए । इस तरह ज्‍योतिष पर चलनेवाले विवाद को हमेशा के लिए मिटाया जा सकता है । बताइए , आपका क्‍या कहना है ?


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मेरे ब्‍लाग में देवनागरी शब्‍द


इस ब्‍लागिंग के कारण भी रोज एक न एक समस्‍या से उलझना ही पडता है । जितने दिनों तक वर्डप्रेस पर बने अपने ब्‍लाग पर पोस्‍ट करती रही , कोई बडी समस्‍या तो नहीं आयी , पर जैसे ही मैने ब्‍लागस्‍पाट पर अपना ब्‍लाग बनाया , उसे न पढ पाने की शिकायत लेकर पाठकों के मेल आने लगे । कुछ पाठको की ज्‍योतिष की रू‍चि के कारण उनके द्वारा मेरे आलेखों को रोमन में पढने की बाध्‍यता को देखते हुए मैने कई बार अपने टेम्‍प्‍लेट भी बदलें , उसके कुछ पाठकों की ओर से सकारात्‍मक जवाब आने से मैं निश्चिंत भी हो गयी । 


पर कल मैने जब वर्डप्रेस पर एक पोस्‍ट किया तो संदीप जी और राजकुमार ग्‍वालानी जी की टिप्‍पणी मिली कि मेरे ब्‍लाग को वे अब पढ पा रहे हें , अभी तक नहीं पढ पाते थे। इसका अर्थ यह है कि मेरे ब्‍लागस्‍पाट वाले ब्‍लाग में अभी तक देवनागरी न दिखने की समस्‍या बनी हुई है । इस समस्‍या का कारण क्‍या है और इसके निदान के लिए मैं क्‍या करूं , यह समझ में नहीं आ रहा है । जिन ब्‍लागर भाइयों को इस बारे में जानकारी हो , बताने की कृपा करें। नहीं तो डेढ वर्षों बाद पुन: वर्डप्रेस पर ही लिखना आरंभ करना होगा।

आखिर बृहस्‍पति के प्रभाव से पंजाब में भडक गयी न आग ???????

13 मई को अपने एक आलेख में मैने 17 मई को बृहस्‍पति और चंद्र की खास स्थिति के फलस्‍वरूप एक महीने तक बृहस्‍पति के अधिक प्रभावी होने की चर्चा करते हुए लेख के आरंभ में लिखा था.....

"16 से 19 मई 2009 को बृहस्पति ग्रह की सूर्य , पथ्वी और चंद्र से एक खास स्थिति बनेगी। 17 और 18 मई को पूर्वी क्षितिज पर 1 बजे रात्रि के आसपास बृहस्‍पति और चंद्र का लगभग साथ साथ उदय होगा , इसे आसमान में भोर होने तक कभी भी देखा जा सकता है। जहां 3 बजे भोर तक इन्‍हें पूर्वी क्षितिज पर 30 डिग्री उपर देखा जा सकता है , वहीं 5 बजे सुबह 60 डिग्री उपर। वैसे तो इस प्रकार का संयोग हर महीने होता है , पर 'गत्यात्मक ज्योतिष' के हिसाब अर्द्धचंद्र के साथ बननेवाली बृहस्‍पति की यह युति खास है। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार इस दिन से 19 जून 2009 तक जहां बृहस्पति ग्रह की गत्यात्मक उर्जा में कमी आएगी , वहीं इसकी स्थैतिक उर्जा में दिन प्रतिदिन वृद्धि होती चली जाएगी। 16 मई से 19 जून 2009 तक बृहस्पति ग्रह की यह स्थिति जनसामान्य के सम्मुख विभिन्न प्रकार के कार्य उपस्थित करेगी। "

पुन: आलेख के अंत को देखें .....

"इसके अलावे गुरू बृहस्‍पति धर्म और ज्ञान से भी जुडा है , इसलिए धार्मिक क्रियाकलाप भी इस एक महीनों में जमकर होते हैं। पर जैसा कि आज के युग में धर्म का रूप भी वीभत्‍स हो गया है , इसलिए युग के अनुरूप ही दो चार वर्षों से बृहस्‍पति चंद्र की इस युति के फलस्‍वरूप यत्र तत्र धार्मिक और सांप्रदायिक माहौल को भडकते हुए भी पाया गया है । आइए ,'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष'के साथ गुरू बृहस्‍पति से प्रार्थना करें कि वे अपने शुभत्‍व को ही बनाए रखें और लोगों के समक्ष कल्‍याणकारी वातावरण ही बनाए रखें। "

और इसी मध्‍य हुए पंजाब का माहौल देखिए , इससे आगे कुछ कहकर मुझे झंझट नहीं बढाना , पर आपकी अवश्‍य सुनना चाहूंगी।

शुक्र चंद्र युति

25 फरवरी 2009 को मैने एक पोस्‍ट ’27 और 28 फरवरी को आसमान में एक अनोखे दृश्‍य का नजारा लें’ किया था , जिसमें शुक्र और चंद्र की युति को एक चित्र के साथ समझाया गया था। जिन्‍होने भी आसमान में उस दृश्‍य को देखा , उन्‍हें अच्‍छा लगा तथा जिन्‍होने नहीं देखा , वे अफसोस करते रह गए थे। उनके लिए एक खुशखबरी है कि वे चाहे तो अब फिर से वैसे ही दृश्‍य को देख सकते हैं। 23 और 24 अप्रैल को पुन: शुक्र और चंद्र की ऐसी ही स्थिति बननेवाली है , हालांकि इसे दोनो ही दिन शाम में नही , सुबह 4 – 5 बजे ही देखा जा सकता है । 

पिछली बार जैसा दृश्‍य पश्चिमी क्षितिज पर दिखाई पडा था , ठीक वैसा ही दृश्‍य इसबार पूर्वी क्षितिज पर दिखाई देगा। बिल्‍कुल वैसा ही चांद और वैसा ही शुक्र। हालांकि दो दिन पहले चंद्र और बृहस्‍पति की युति से उतना सुंदर दृश्‍य नहीं दिखाई पडा। मेरे ख्‍याल से शाम की तुलना में भोर को दिखाई पडनेवाला चंद्र शुक्र युति कुछ हल्‍की चमक ही दिखाएगा , पर लोग फिर भी इसका आनंद ले सकते हैं। 

पिछली बार के शुक्र चंद्र युति के जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव के बारे में मैने लिखा था कि ‘जनसामान्‍य तन मन या धन से किसी न किसी प्रकार के खास सुखदायक या दुखदायक कार्यों में उलझे रहेंगे , पर सबसे अधिक प्रभाव सरकारी कर्मचारियों पर पड सकता है यानि उनके लिए खुशी की कोई खबर आ सकती है। दूसरा अंतरिक्ष से संबंधित कोई विशेष कार्यक्रम की संभावना बनती दिखाई दे सकती है।‘ और इसे संयोग भी माना जा सकता है कि 26 फरवरी के शाम को ही सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्‍ते की घोषणा हो गयी थी। 

इस बार भी इसके ठीक दो दिन पहले भारतीय अंतरिक्ष के एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम को अंजाम दिया गया और अनुसंधान संगठन (इसरो) के रॉकेट पीएसएलवी-सी12 ने देश के पहले जासूसी उपग्रह राडार इमेजिंग सैटेलाइट (रिसैट-2) को धरती की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। अंतरिक्ष से संबंधित इस कार्यक्रम से मेरी भविष्‍यवाणी के सही होने को क्‍या इस बार भी आप संयोग ही मानेंगे ?


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आज 01:00 बजे दोपहर मेरी कहानी ‘पहला विरोध’ साहित्‍य शिल्‍पी में प्रकाशित की गयी है। इसे पढने के लिए यहां क्लिक करें। इसके पहले भी 7 दिसम्‍बर 2008 को साहित्‍य शिल्‍पी मेरी एक कहानी ‘एक झूठ’ को प्रकाशित कर चुका है। उसे पढने के लिए यहां क्लिक करें। आपके सुझावों का स्‍वागत रहेगा।