हममें से हर कोई प्रकृति के अभिन्‍न अंग हैं ...संगीता पुरी

हममें से हर कोई प्रकृति के अभिन्‍न अंग हैं और संपूर्ण पारिस्थितिक संतुलन की आवश्‍यकताओं के अनुरूप हमारा अपना स्‍वभाव है। इसलिए लाख चाहते हुए भी हम अपने स्‍वभाव को नहीं बदल पाते। प्रकृति हर क्षेत्र में और हर मौसम में हमारी आवश्‍यकताओं के अनुरूप ही खाने पीने की व्‍यवस्‍था करती है। भूख लगने पर हम खाना और प्‍यास लगने पर हम पानी ही नहीं पीते , जब हमारे शरीर को खास वस्‍तु की आवश्‍यकता होती है , तो हम उस ओर भी आकर्षित होता है। मेडिकल साइंस भी मानता है कि हमारी जीवनशैली सहज रहे , तो हम अपने शरीर की आवश्‍यताओं के अनुरूप ही भोजन लेते हैं। 

मनुष्‍य के जीवन में तो कृत्रिमता इतनी अधिक हो गयी है कि वह आज उपयोगी बातों को भी स्‍वीकार करने से परहेज करता है। पर प्रत्‍येक व्‍यक्ति अपनी आवश्‍यकता को अंतर्मन में कहीं न कहीं महसूस करता है। झारखंड प्रदेश ने प्राकृतिक चिकित्‍सा के विकास के लिए जब काम शुरू किया , तो इन्‍होने जंगली जानवरों के व्‍यवहार पर ध्‍यान देना आरंभ किया। जब जानवर ठंड से परेशान होते हैं , तो किन खास औषधीय वनस्‍पतियों का प्रयोग करते हैं और जब उनके पेट में गडबडी होती है , तो किन खास वनस्‍पतियों का प्रयोग , इन सबके नि‍रीक्षण से प्राकृतिक चिकित्‍सा पद्धति को विकसित करने में बडी सफलता मिली।

'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' ग्रहों के प्रभाव को कम या अधिक करने के लिए कलर थेरेपी के महत्‍व को स्‍वीकार करता है। कुछ समय पूर्व ग्रहों के प्रभाव को दूर करने में रंगों की अहम् भूमिका की जानकारी देते हुए मैने एक पोस्‍ट लिखा था जिसमें लिखा गया था कि यदि व्यक्ति का जन्मकालीनचंद्र कमजोर हो, तो उन्हें सफेद , बुध कमजोर हो , तो उसे हरे , मंगल कमजोर हो , तो उसे लाल , शुक्र कमजोर हो , तो उसे हल्के नीले , सूर्य कमजोर हो , तो उसे ईंट के रंग , बृहस्पति कमजोर हो , तो उसे पीले , तथा शनि कमजोर हो , तो काले रंग का अधिक प्रयोग कर उन ग्रहों के प्रभाव को परावर्तित किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे , मजबूत ग्रहों की किरणों का अधिकाधिक प्रभाव आपपर पड़े , इसके लिए उससे संबंधित रंगों का कम से कम प्रयोग होना चाहिए। 

अपने अध्‍ययन में हमने पाया है कि जन्‍मकालीन ग्रहों के कमजोर रहने पर जिस रंग की आवश्‍यकता शरीर को अधिक होती है , वह रंग हमारी पसंद बन जाता है। जिनका जन्‍मकालीन चंद्र कमजोर हो, तो उन्हें सफेद , बुध कमजोर हो , तो उसे हरे , मंगल कमजोर हो , तो उसे लाल , शुक्र कमजोर हो , तो उसे हल्के नीले , सूर्य कमजोर हो , तो उसे ईंट के रंग , बृहस्पति कमजोर हो , तो उसे पीले , तथा शनि कमजोर हो , तो काले रंग अधिक पसंद आते हैं ,जबक‍ि जन्‍मकालीन मजबूत ग्रहों से संबंधित रंग हमारी पसंद में नहीं होते। इस तरह प्रकृति खुद ही हमें ग्रहों के प्रभाव से सुरक्षा दे देती है।

कभी कभी जो ग्रह जन्‍मकाल में मजबूत होते हैं , वे भी गोचर में कमजोर चलते हैं और इस कारण अस्‍थायी तौर पर कभी एकाध वर्ष , कभी एकाध महीने कभी एकाध सप्‍ताह और कभी दो ढाई दिनों तक उससे संबंधित समस्‍याओं को झेलने को जातक मजबूर होता है। ऐसी स्थिति में जातक उन रंगों का प्रयोग नहीं कर पाता , जो उनके लिए बेहतर होते हैं। ग्रहों की किरणों को परावर्तित करने वाले रंगों का प्रयोग कर हम संबंधित ग्रहों के बुरे प्रभाव से बच सकते हैं। इस आधार पर सभी लग्‍नवाले अलग अलग प्रकार की समस्‍याओं से बचने के लिए भिन्‍न रंगों का प्रयोग कर सकते हैं , यह प्रयोग तब तक न करें , जब तक आप इन संदर्भों के अत्‍यधिक तनाव से न गुजर रहे हों।  ...........

मेष लग्‍नवाले माता पक्ष , किसी भी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु बांधव या किसी प्रकार के झंझट से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , धन , परिवार और घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , भाग्‍य , धर्म या खर्च से संबंधित से समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर , हर प्रकार के लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

वृष लग्‍नवाले भाई , बहन और अन्‍य बंधु बांधवों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , घर गृहस्‍थी , खर्च या बाहरी संदर्भों की समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , धन , परिवार , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई के मामले से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , माता पक्ष , किसी प्रकार की छोटी बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , हर प्रकार के लाभ के मामले , रूटीन और जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , भाग्‍य , धर्म , पितापक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

मिथुन लग्‍नवाले धन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , लाभ , प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , माता पक्ष , हर प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , खर्च से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , बांधवो से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , घर गृहस्‍थी , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , भाग्‍य , धर्म , रूटीन , जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

कर्क लग्‍नवाले स्‍वास्‍थ्‍य या आत्‍म विश्‍वास से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई या कैरियर , पिता या सामाजिक पक्ष से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , खर्च या बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , माता पक्ष , किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति या लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , धन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , धर्म , भाग्‍य ,प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , घर गृहस्‍थी  , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

सिंह लग्‍नवाले खर्च या बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , माता पक्ष , किसी प्रकार  की छोटी या बडी अचल संपत्ति या भाग्‍य से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , धन या लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य या आत्‍म से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , घर गृहस्‍थी , प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

कन्‍या लग्‍नवाले लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , भाई , बहन , अन्‍य बंधु , रूटीन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , भाग्‍य , धर्म , धन या कोष से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , खर्च या बाहरी संदर्भ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , माता पक्ष  , छोटी या बडी संपत्ति , घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई या प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

तुला लग्‍नवाले पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , घर गृहस्‍थी , धन कोष से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , भाई बहन या अन्‍य बंधु , खर्च और बाह्य संदर्भ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , रूटीन और जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , खर्च और बाहरी संदर्भ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , माता पक्ष  , छोटी या बडी संपत्ति , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

वृश्चिक लग्‍नवाले भाग्‍य , धर्म से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍म विश्‍वास या प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , लाभ या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , घर गृहस्‍थी , खर्च और बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , पिता पक्ष , सामाजिक  पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , धन , कोष , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , माता पक्ष , छोटी या बडी किसी प्रकार की संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

धनु लग्‍नवाले रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , खर्च या बाहरी संदर्भ  कैरियर , पिता या सामाजिक पक्ष से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , घर गृहस्‍थी  , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , लाभ और प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , भाग्‍य या धर्म से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , माता पक्ष , किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , धन , कोष , भाई बहन या अन्‍य बंधु से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

मकर लग्‍नवाले घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , माता पक्ष , छोटी या बडी संपत्ति के मामले और लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , भाग्‍य , धर्म या प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु खर्च और बाहरी संदर्भ  और बाहरी संदर्भ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , धन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

कुंभ लग्‍नवाले प्रभाव की कमजोरी या झंझट के बढोत्‍तरी से बचने के लिए सफेद रंग का , भाई बहन , या अन्‍य बंधु बांधवों , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का ,  किसी प्रकार की संपत्ति या भाग्‍य से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का ,  धन और लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , खर्च और बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

मीन लग्‍नवाले अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , या अन्‍य माहौल से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , भाग्‍य , धर्म , धन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , माता पक्ष , छोटी या बडी संपत्ति , घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , रूटीन और जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , लाभ , खर्च और बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।




छठ श्रद्धा और आस्‍था का त्‍यौहार

बिहार और झारखंड का मुख्‍य त्‍यौहार है छठ , अभी चारो ओर इसकी धूम मची है। ब्‍लॉग में भी दो चार पोस्‍ट पढने को मिल ही जा रहे हैं।  लोग छठ की खरीदारी में व्‍यस्‍त है , पडोस में मेहमानों की आवाजाही शुरू हो गयी है।  दूर दूर से इसके खास धुन पर बने गीत सुनने को मिल ही रहे हैं , फिर भी वर्ष में एक बार इसकी सीडी निकालकर दो तीन बार अवश्‍य चला लिया करती हूं। छठ के बाद फिर सालभर  इस गाने को नहीं बजाया जाता है , पडे पडे सीडी खराब भी तो हो जाएगी। गीत सुनते हुए न जाने कब मन बचपन में छठ की पुरानी यादों में खो जाता है।

कहते हैं , हमारे पूर्वज 150 वर्ष पूर्व ही पंजाब से आकर बोकारो जिले के पेटरवार नाम के गांव में बस गए थे।  इनके नाम से गांव में एक 'खत्री महल्‍ला' कहलाने लगा था। आर्सेलर मित्‍तल ने अब अपने स्‍टील प्रोजेक्‍ट के लिए इस स्‍थान को चुनकर अब इसका नाम औद्योगिक शहरों में शुमार कर दिया है! हमलोगों के जन्‍म तक तो कई पीढियां यहां रह चुकी थी , इसलिए यहां की सभ्‍यता और संस्‍कृति में ये पूरे रच बस चुके थे। पर छठ का त्‍यौहार कम घरों में होता था और कुछ क्षेत्रीय लोगों तक ही सीमित था , खासकर उस समय तक हममें से किसी के घर में नहीं मनाया जाता था। सब लोग छठ मैय्या के नाम पर एक सूप या जोडे सूप के मन्‍नत जरूर रखते थे , उसकी खरीदारी या तैयारी भी करते , पर अर्घ्‍य देने या दिलवाने के लिए हमें किसी व्रती पर निर्भर रहना पडता था।

हमारे मुहल्‍ले में दूसरी जाति के एक दो परिवार में यह व्रत होता था , खरना में तो हमलोग निश्चित ही खीर और पूडी या रोटी का प्रसाद खाने वहीं पहुंचते थे। माना जाता है कि खरना का प्रसाद जितना बंटे , उतना शुभ होता है , इसलिए बच्‍चों के लिए रखकर बाकी पूरे मुहल्‍ले का गाय का दूध व्रती के घर चला जाता था । कभी कभार हमारा मन्‍नत वहां से भी पूरा होता। पर अधिकांश वर्ष हमलोग दादी जी के साथ अपनी एक दीदी के दोस्‍त के घर जाया करते थे। एक दिन पहले ही वहां हमलोग चढावे के लिए खरीदे हुए सामान और पैसे दे देते। दूसरे दिन शाम के अर्घ्‍य के दिन नहा धोकर घर के गाय का ताजा दूध लेकर अर्घ्‍य देने जाते थे।

वहां सभी लोग प्रसाद के रख रखाव और पूजा की तैयारी में लगे होते थे। थोडी देर में सब घाट की ओर निकलते। कुछ महिलाएं और बच्‍चे दंडवत करते जाते , तो कुछ मर्द और बच्‍चे माथा पर प्रसाद की टोकरी लिए हुए । प्रसाद के सूप में इस मौसम में होने वाले एक एक फल मौजूद होते हैं , साथ में गेहूं के आटे का ठेकुआ और चावल के आटे का कसार भी।  बाकी सभी लोग पूरी आस्‍था में तथा औरते छठ का विशेष गीत गाती हुई साथ साथ चलती। हमारे गांव में कोई नदी नहीं , इसलिए पोखर पर ही छठ मनाया जाता। घाट पर पहुंचते ही नई सूती साडी में व्रती तालाबों में डुबकी लगाती , फिर हाथ जोडकर खडी रहती। सूर्यास्‍त के ठीक पहले व्रती और अन्‍य लोग भगवान को अर्घ्‍य देते। हमारे यहो सभी मर्द लडके भी उस वक्‍त तालाब में नहाकर अर्घ्‍य देते थे। महीने या सप्‍ताह भर की तैयारी के बाद कार्यक्रम थोडी ही देर में समाप्‍त हो जाता था। पर आधी पूजा तो सुबह के लिए शेष ही रह जाती थी।

पहले ठंड भी बहुत पडती थी , सूर्योदय के दो घंटे पहले घाट में पहुंचना होता है , क्‍यूंकि वहां पूरी तैयारी करने के बाद आधे घंटे या एक घंटे व्रती को जल में खडा रहना पडता है। इसलिए सूर्योदय के ढाई घंटे पहले हमें अपने घर से निकलना होता। वहां जाने का उत्‍साह इतना अधिक होता कि हमलोग अंधेरे में ही उठकर स्‍नान वगैरह करके वहां पहुंच जाते। वहां तैयारी पूरी होती , दो तीन दिन के व्रत और मेहनत के बाद भी व्रती के चेहरे पर एक खास चमक होती थी। शाम की तरह ही सारा कार्यक्रम फिर से दुहराया जाता , उसके बाद प्रसाद का वितरण होता , फिर हमलोग घर वापस आते।

विवाह के दस वर्ष बाद तक संतान न होने की स्थिति में खत्री परिवार की दो महिलाओं ने पडोसी के घरों में जाकर इस व्रत को शुरू किया और सूर्य भगवान की कृपा कहें या छठी मैय्या की या फिर संयोग ... दोनो के ही बच्‍चे हुए , और बाद में हमारे मुहल्‍ले में भी कई परिवारों में धूमधाम से यह व्रत होने लगा। इसलिए अब हमारे मुहल्‍ले के लोगों को इस व्रत के लिए गांव के दूसरे छोर पर नहीं जाना पडता है,  उन्‍हे पूरे मुहल्‍ले की हर संभव मदद मिलती है। बचपन के बाद अभी तक कई जगहों की छठ पूजा देखने को मिली ,  हर स्‍थान पर इस व्रत और पूजा का बिल्‍कुल एक सा परंपरागत स्‍वरूप है , यह सिर्फ श्रद्धा और आस्‍था का त्‍यौहार है .. इसमें दिखावटीपना कुछ भी नहीं।

काली पूजा के कुछ चित्र देखिए ..........

कार्तिक अमावस्या की शाम को घर घर होने वाली लक्ष्‍मी पूजा के साथ ही रात्रि में काली पूजा की भी बहुत महत्ता है। एंसी मान्‍यता है कि देवों में सबसे पराक्रमी और शक्तिशाली मां काली देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं। मां काली की पूजा से वे सभी सभी नकारात्मक प्रवृतियां दूर होती हैं ,  जो धार्मिक प्रगति और यश प्राप्ति में बाधक हैं। बोकारो में हमारी कॉलोनी मे हुए काली पूजा के कुछ चित्र देखिए .....................




सभी पाठकों को दीपावली की असीम शुभकामनाएं !!

Orkut Scraps Sparkling Diwali

पहले जन्‍म या फिर भाग्‍य

पहले अंडा या मुर्गी , ये फैसला तो आज तक न हो सका है और न हो पाएगा , पर इसी तर्ज पर कुछ दिनों से एक महत्‍वपूर्ण विषय पर मैं चिंतन कर रही थी , जन्‍म के आधार पर भाग्‍य निश्चित होता है या भाग्‍य के निश्चित होने पर जन्‍म की तिथि निश्चित होती है। संयोग से उसी आसपास पापाजी भी बोकारो पहुंच गए , हमेशा की तरह ही इस बार भी मेरे प्रश्‍नों की झडी तैयार थी। पर जहां पहले मैं मेरे प्रश्‍नों की झडी से वे ऊब से जाया करते , हाल के वर्षों में वे किसी निष्‍कर्ष पर पहुंचने से पहले मेरे अनुभव का भी ख्‍याल रखते हैं। वर्षों के अनुभव और चार दिनों तक हुई गंभीर बहस के बाद हमलोग इस निष्‍कर्ष पर पहुंचे कि बच्‍चे का स्‍वभाव और उसकी जीवन यात्रा पहले से तय होती है , उसी के अनुसार उसके जन्‍म लेने का समय तय होता है। दरअसल गर्भावस्‍था के दौरान ही बच्‍चे की मां और बच्‍चे की परिस्थितियों और जन्‍म के पश्‍चात बनने वाली बच्‍चे की जन्‍मकुंडलियों में समानता को देखते हुए हमने ऐसा समझा।

अभी तक ज्‍योतिष शास्‍त्र ये मानता आया है कि भूण के बनने के हिसाब से बच्‍चों का भाग्‍य निश्चित नहीं होता , जन्‍म के बाद बच्‍चे जो प्रथम श्‍वास ग्रहण करते हैं, उसी वक्‍त ब्रह्मांड में मौजूद ग्रहों का प्रभाव किसी बच्‍चे पर  पडता है , जिससे उसका स्‍वभाव और उसकी जीवनयात्रा निश्चित होती है , जिसे जन्‍मकुंडली में देखा जा सकता है। इस आधार पर बालारिष्‍ट रोगों का कारक ग्रह चंद्रमा यदि जन्‍म के वक्‍त कमजोर हो , तो जन्‍म के बाद बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य में गडबडी आती है। पर अध्‍ययन के क्रम में कई कुंडलियों में हमने पाया कि जन्‍म के वक्‍त रहनेवाले कमजोर चंद्रमा के कारण या तो घर की आर्थिक स्थिति गडबड थी या माता पिता के द्वारा किसी प्रकार की लापरवाही हुई , जिसके कारण गर्भावस्‍था के दौरान ही कई बच्‍चों  के शा‍रीरिक विकास में बाधा उपस्थित हुई थी ।

 ऐसा महसूस करने पर हमलोगों ने खास विशेषतावाले 100 बच्‍चों की माताओं से बात चीत की। जन्‍मकुंडली के हिसाब से बच्‍चों के जिन जिन पक्षों को मजबूत होना चाहिए था , वे उनकी गर्भावस्‍था के दौरान उनकी माताओं के द्वारा महसूस किए गए। गर्भावस्‍था के दौरान लगभग सभी महिलाओं ने अपने व्‍यवहार में ये विशेषताएं पायी थी , जो उनके बच्‍चों में बाद में देखने को मिली। हमारे ग्रंथों में माता के व्‍यवहार का बच्‍चों पर प्रभाव के बारे में चर्चा है , पर हमने महसूस किया कि अलग अलग बच्‍चें के स्‍वभाव के हिसाब से माता के व्‍यवहार या स्‍वास्‍थ्‍य या मानसिक क्रियाकलापों में अंतर देखने को मिला। पर हमलोग इस प्रकार के रिसर्च के बिल्‍कुल प्रारंभिक दौर में थे , इसलिए इस निष्‍कर्ष को लेकर दावा नहीं कर सकते थे , चिंतन अवश्‍य बना हुआ था , पर यह भ्रम था या हकीकत , समझ में नहीं आ रहा था।

पर यह भ्रम पिछले शनिवार यानि 23 अक्‍तूबर को हकीकत में बदल गया। घटना यह हुई कि कुछ दिन पहले ही बोकारो से मेरी एक महिला मित्र अपनी गर्भवती पुत्री के पास दिन पूरे होने के लगभग दिल्‍ली पहुंच गई थी। उसकी पुत्री एक दिन पहले से ही अस्‍पताल में भर्ती थी , इसकी खबर लगते ही मैने दो बजे आसपास उनसे बात की। वो काफी घबडायी हुई थी , बिटिया को पांच घंटे पूर्व ही लेबर रूम ले जाया गया था , पूरे परिवार के लोग जमा थे और अंदर से कोई खबर भी नहीं आ रही थी। जब भी भविष्‍य अनिश्चित सा लगता है , मुझसे लोग भविष्‍य के बारे में जानना चाहते हैं। माता पिता जानना चाह रहे थे कि इसमें कितनी देर हो सकती है।

फोन रखने के बाद मैने पंचांग निकाला , पूर्णमासी का दिन था और साढे पांच बजे से साढे सात बजे के मध्‍य चांद पूर्वी दिशा में उदय होने वाला था। उस वक्‍त बच्‍चे का जन्‍म हो , तो जन्‍मकुंडली में लग्‍नचंदा योग बनेगा , इस योग के बारे में कहा जाता है कि इसमें जन्‍म लेने वाला बच्‍चा पूरे परिवार का लाडला और प्‍यारा होता है। लग्‍नचंदा योग यदि पूर्णिमा के दिन बनें , तो इसकी बात ही अलग होती है। वैसे तो अपने माता पिता के लिए हर बच्‍चा प्‍यारा ही होता है , पर जिस बच्‍चे का जन्‍म होनेवाला था , वह दादाजी और नानाजी दोनो के घर का पहला बच्‍चा था , उसके अतिरिक्‍त लाड प्‍यार में कोई संशय नहीं था। मेरे मन से सारा भ्रम हट गया , इस बच्‍चे का जन्‍म साढे पांच से साढे सात के मध्‍य लग्‍नचंदा योग में ही हो सकता है , यही वजह है कि लेबर रूम में इतनी देर हो रही है।

मेरा ध्‍यान दिल्‍ली की ओर ही लगा रहा , सात बजे सूचना मिली कि पंद्रह मिनट पहले बच्‍चे का जन्‍म हो चुका है , जच्‍चा और बच्‍चा दोनो ही स्‍वस्‍थ हैं , बच्‍चे का वजन 4 किलो है। मतलब एक निश्चित समय पर बच्‍चे का जन्‍म लेना तय था , और उसी ग्रहस्थिति के हिसाब से उसका पूरा विकास हो चुका था। इस घटना के बाद मेरा भ्रम तो बिल्‍कुल मिट चुका है , पर इसे और निश्चित करने के लिए मैं एक सर्वे करना चाहती हूं। इसके लिए कम से कम देशभर के 100 अस्‍पतालों से पूरे दिसंबर 2010 के दौरान जन्‍म लेने वाले सारे बच्‍चों का जन्‍म विवरण , उनका वजन , उनके जन्‍म से पहले और बाद का स्‍वास्‍थ्‍य , उनके माता पिता , दादा दादी या नाना नानी के बेटे बेटियों , नाती नातिनियों और पो‍ते पोतियों में उनका कौन सा स्‍‍थान है ,  इसके बारे पूरी जानकारी चाहती हूं , मैने इस दिशा में अपने नजदीकी डॉक्‍टरों और अस्‍पतालों से बात शुरू कर दी है , क्‍या आप पाठकों में से भी कोई मेरी मदद कर सकते हैं ??