इतने सारे चिट्ठाकारों से मुलाकात का वह दिन भुलाया जा सकता है ??

मेरे द्वारा रोहतक के तिलयार झील की यात्रा पर एक विस्‍तृत रिपोर्ट का इंतजार न सिर्फ ब्‍लॉगर बंधुओं को , वरन् ज्‍योतिषीय रूचि के कारण मेरे ब्‍लॉग को पढने वाले अन्‍य पाठकों और मित्रों को भी है। जब एक फोन पर इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे अपने पाठक को बताया कि व्‍यस्‍तता के कारण इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने में कुछ देर हो रही है , तो उन्‍होने कहा कि इतनी देर भी मत कीजिए कि आप बहुत कुछ भूल ही जाएं। मैने उन्‍हे कहा कि एक सुखद यात्रा वर्षों भूली नहीं जा सकती , वैसी ही यात्राओं में तिलयार यात्रा भी एक है , भला इतने सारे ब्‍लोगरों से मुलाकात का वह दिन इतनी जल्‍द भुलाया जा सकता है ??

पहली बार सुनने पर रोहतक में होने वाली इस ब्‍लॉगर मीट की तिथि 21 नवंबर मुझे जंची नहीं थी , क्‍यूंकि ज्‍योतिषीय दृष्टि से उससे पहले ग्रहों की स्थिति मनोनुकूल नहीं थी , आसमान में ग्रहों की क्रियाशीलता कुछ इस ढंग की थी कि लोगों को किसी न किसी कार्यक्रम में व्‍यस्‍त रखने का यह एक बहाना बन सकती थी। बहुत प्रकार के कार्यों के उपस्थित हो जाने से इस प्रकार की तिथियों के कार्यक्रमों में इच्‍छा के बावजूद आमंत्रित कम संख्‍या में ही पहुंच पाते हैं। हां , 21 नवंबर को पूर्णिमा होने के कारण कार्यक्रम की सफलता पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता था , इसलिए मुझे वहां पहुंचने की इच्‍छा तो थी ।

जब निर्मला कपिला जी से मैने रोहतक ब्‍लॉगर मीट के बारे में बात की , तो उन्‍होने कहा कि यदि मेरा कार्यक्रम निश्चित हो , तभी वो चलेंगी। इतने ब्‍लॉगरों के साथ साथ उनसे मिलने का बहाना बडी मुश्किल से मिल रहा था , मैं इंकार नहीं कर सकती थी।  पर तिथि को देखते हुए मन में अंदेशा अवश्‍य बना हुआ था कि कोई आवश्‍यक पारिवारिक या अन्‍य कार्य न उपस्थित हो जाए , छोटे मोटे कार्यक्रमों को तो अपने पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम से टाला जा सकता है , यह सोंचकर मैने मित्रों और परिवारवालों के मध्‍य अपनी रोहतक यात्रा की खबर सबसे पहले प्रचारित प्रसारित कर दी। इससे एक फायदा हुआ कि बंगाल में एक दीदी के लडके का विवाह 22 नवंबर को था , दीदी के फोन आने पर मैने उन्‍हें तत्‍काल कह दिया कि मैं विवाह में न पहुंचकर 24 को 'बहू भात' में वहां पहुंचुंगी। मेरे कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर दिल्‍ली से मेरे पास आ रहे पापाजी ने भी 20 नवंबर का रिजर्वेशन रद्द करवाकर मेरे साथ ही दिल्‍ली से आने का कार्यक्रम बनाया।

बोकारो से दिल्‍ली और दिल्‍ली से रोहतक जाने का मेरा कार्यक्रम निश्चित हो चुका था , पर 12 नवंबर को होनेवाले छठ के बाद बिहार झारखंड से लौटने वालों की भीड में मेरे लिए रिजर्वेशन मिलना कठिन था। मैने रेलवे की वेबसाइट पर एक एक कर सभी ट्रेनों की स्थिति देखी , कहीं भी व्‍यवस्‍था नहीं दिखाई पडी। 12 नवंबर को छठ होने के कारण बर्थ अवश्‍य उपलब्‍ध थे , पर छठ के मौके पर ट्रेन में बैठे रहना मुझे जंच नहीं रहा था। दूसरे दिनों में निकलने के लिए धनबाद से किसी प्रकार व्‍यवस्‍था जरूर हो सकती थी , पर उतनी दूर जाकर ट्रेन पकडना मुझे पसंद नहीं था। इसलिए मैने दिल्‍ली के लिए 12 नवंबर का ही रिजर्वेशन करवा लिया। रिजर्वेशन के वक्‍त लोअर बर्थ की उपलब्‍धता नहीं थी , इसलिए मैने मिडिल बर्थ में ही अपना रिजर्वेशन कराया। पर रेलवे की व्‍यवस्‍था की पोल इसी से खुल जाती है कि रातभर मेरे नीचे वाली बर्थ बिल्‍कुल खाली पडी रही।

कुछ दिन पूर्व से ही खराब चल रही मेरी तबियत ऐन दिल्‍ली प्रस्‍थान के वक्‍त ही खराब हो गयी। पर दवा वगैरह लेकर अपनी तबियत को सामान्‍य बनाया और दिल्‍ली के लिए निकल पडी। चलते समय तक यह मालूम हो चुका था कि 13 नवंबर को शाम के वक्‍त कनॉट प्‍लेस में भी एक ब्‍लॉगर मीट का आयोजन है। मेरी गाडी का समय 1 बजे दिन में ही दिल्‍ली में था , पर देर होने की वजह से शाम 4 बजे ही वहां पहुंच सकी। मेट्रो से आते वक्‍त राजीव चौक में उतरकर कनॉट प्‍लेस जाने और सबसे मिलने की इच्‍छा थी , पर पहले से ही गडबड तबियत 22 घंटे के सफर के बाद और खराब हो गयी थी। रही सही कसर दूसरे दिन रेलवे वालों ने एसी ऑफ करके पूरी कर दी थी, कई यात्रियों के शिकायत दर्ज कराने पर भी एसी ऑन नहीं हुआ। स्‍लीपर बॉगी में होती तो कम से कम खिडकी खुले होने से ताजी हवा तो मिलती , बंद बॉगी में एसी बंद होने से चक्‍कर आ रहा था। कुछ दिन पूर्व ऐसी स्थिति में कुछ यात्रियों में डेंगू या स्‍वाइन फ्लू फैलने के समाचार पढने को मिला था , इससे दिमाग तनावग्रस्‍त था , ऐसे में घर पहुंचकर ही राहत मिल सकती थी ।

दिल्‍ली में भी मुझे कई काम निबटाने थे , पर तबियत बिगडी होने की वजह से कुछ भी न हो पाया। ललेकि तीन भतीजे भतीजियों की मासूम शैतानियों के कारण सप्‍ताह भर का समय व्‍यतीत होते देर न लगी।  पर जैसा संदेह था , इन दिनों ब्‍लॉग जगत से कुछ ऐसी घटनाएं सुनने को मिली , जिससे स्‍पष्‍ट हुआ कि कार्यक्रम में सम्मिलित हो रहे लोगों में से कुछ वहां नहीं पहुंच सकेंगे। इससे मन में काफी असंतोष बना रहा , पर दिल्‍ली तक आ चुकी थी , तो रोहतक तो पहुंचना ही था। रोहतक में तिलियार झील में ब्‍लॉगर मीट रखी गयी थी , निर्मला कपिला जी से संपर्क किया तो उन्‍होने बताया कि वे राजीव तनेजा जी के साथ आ रही हैं। मैने भी राजीव तनेजा जी को ही संपर्क किया , माता जी के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर तनेजा दंपत्ति अस्‍पताल के चक्‍कर काट रहे थे। पापाजी तैयार नहीं थे कि मैं अकेली अनजान रास्‍ते पर जाऊं , मैने अपने एक भाई का गुडगांव का कार्यक्रम रद्द करवाकर उसे अपने साथ चलने को तैयार किया , पर 20 की शाम को तनेजा जी ने कहा कि वे चलते वक्‍त मुझे ले लेंगे।

21 नवंबर को सुबह नांगलोई में मेट्रो स्‍टेशन के पास राजीव तनेजा जी , संजू तनेजा जी और निर्मला कपिला जी से मिलने का मौका मिला। तनेजा दंपत्ति से तो मैं पहले भी मिल चुकी थी , पर निर्मला कपिला जी से यह पहली मुलाकात थी। उनकी कहानियों लेखों , कविताओं और खासकर टिप्‍पणियों ने मेरे हृदय पर एक छाप छोड दी थी , इसलिए उनसे मिलने की मेरी दिली तमन्‍ना थी , कार से उतरकर उन्‍होने मुझे गले लगा लिया। इस सुखद अहसास को मैं जीवनभर नहीं भूल सकती। हमलोगों ने ब्‍लॉग जगत से जुडी बाते करते हुए ही एक डेढ घंटे का सफर तय किया और थोडी ही देर में मंजिल आ गयी। क्‍या हुआ तिलियार ब्‍लॉगर मीट में , यह जानिए अगली कडी में , इसके लिए आपलोगों को कितना इंतजार करना पड सकता है , नहीं बता सकती।

हममें से हर कोई प्रकृति के अभिन्‍न अंग हैं ...संगीता पुरी

हममें से हर कोई प्रकृति के अभिन्‍न अंग हैं और संपूर्ण पारिस्थितिक संतुलन की आवश्‍यकताओं के अनुरूप हमारा अपना स्‍वभाव है। इसलिए लाख चाहते हुए भी हम अपने स्‍वभाव को नहीं बदल पाते। प्रकृति हर क्षेत्र में और हर मौसम में हमारी आवश्‍यकताओं के अनुरूप ही खाने पीने की व्‍यवस्‍था करती है। भूख लगने पर हम खाना और प्‍यास लगने पर हम पानी ही नहीं पीते , जब हमारे शरीर को खास वस्‍तु की आवश्‍यकता होती है , तो हम उस ओर भी आकर्षित होता है। मेडिकल साइंस भी मानता है कि हमारी जीवनशैली सहज रहे , तो हम अपने शरीर की आवश्‍यताओं के अनुरूप ही भोजन लेते हैं। 

मनुष्‍य के जीवन में तो कृत्रिमता इतनी अधिक हो गयी है कि वह आज उपयोगी बातों को भी स्‍वीकार करने से परहेज करता है। पर प्रत्‍येक व्‍यक्ति अपनी आवश्‍यकता को अंतर्मन में कहीं न कहीं महसूस करता है। झारखंड प्रदेश ने प्राकृतिक चिकित्‍सा के विकास के लिए जब काम शुरू किया , तो इन्‍होने जंगली जानवरों के व्‍यवहार पर ध्‍यान देना आरंभ किया। जब जानवर ठंड से परेशान होते हैं , तो किन खास औषधीय वनस्‍पतियों का प्रयोग करते हैं और जब उनके पेट में गडबडी होती है , तो किन खास वनस्‍पतियों का प्रयोग , इन सबके नि‍रीक्षण से प्राकृतिक चिकित्‍सा पद्धति को विकसित करने में बडी सफलता मिली।

'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' ग्रहों के प्रभाव को कम या अधिक करने के लिए कलर थेरेपी के महत्‍व को स्‍वीकार करता है। कुछ समय पूर्व ग्रहों के प्रभाव को दूर करने में रंगों की अहम् भूमिका की जानकारी देते हुए मैने एक पोस्‍ट लिखा था जिसमें लिखा गया था कि यदि व्यक्ति का जन्मकालीनचंद्र कमजोर हो, तो उन्हें सफेद , बुध कमजोर हो , तो उसे हरे , मंगल कमजोर हो , तो उसे लाल , शुक्र कमजोर हो , तो उसे हल्के नीले , सूर्य कमजोर हो , तो उसे ईंट के रंग , बृहस्पति कमजोर हो , तो उसे पीले , तथा शनि कमजोर हो , तो काले रंग का अधिक प्रयोग कर उन ग्रहों के प्रभाव को परावर्तित किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे , मजबूत ग्रहों की किरणों का अधिकाधिक प्रभाव आपपर पड़े , इसके लिए उससे संबंधित रंगों का कम से कम प्रयोग होना चाहिए। 

अपने अध्‍ययन में हमने पाया है कि जन्‍मकालीन ग्रहों के कमजोर रहने पर जिस रंग की आवश्‍यकता शरीर को अधिक होती है , वह रंग हमारी पसंद बन जाता है। जिनका जन्‍मकालीन चंद्र कमजोर हो, तो उन्हें सफेद , बुध कमजोर हो , तो उसे हरे , मंगल कमजोर हो , तो उसे लाल , शुक्र कमजोर हो , तो उसे हल्के नीले , सूर्य कमजोर हो , तो उसे ईंट के रंग , बृहस्पति कमजोर हो , तो उसे पीले , तथा शनि कमजोर हो , तो काले रंग अधिक पसंद आते हैं ,जबक‍ि जन्‍मकालीन मजबूत ग्रहों से संबंधित रंग हमारी पसंद में नहीं होते। इस तरह प्रकृति खुद ही हमें ग्रहों के प्रभाव से सुरक्षा दे देती है।

कभी कभी जो ग्रह जन्‍मकाल में मजबूत होते हैं , वे भी गोचर में कमजोर चलते हैं और इस कारण अस्‍थायी तौर पर कभी एकाध वर्ष , कभी एकाध महीने कभी एकाध सप्‍ताह और कभी दो ढाई दिनों तक उससे संबंधित समस्‍याओं को झेलने को जातक मजबूर होता है। ऐसी स्थिति में जातक उन रंगों का प्रयोग नहीं कर पाता , जो उनके लिए बेहतर होते हैं। ग्रहों की किरणों को परावर्तित करने वाले रंगों का प्रयोग कर हम संबंधित ग्रहों के बुरे प्रभाव से बच सकते हैं। इस आधार पर सभी लग्‍नवाले अलग अलग प्रकार की समस्‍याओं से बचने के लिए भिन्‍न रंगों का प्रयोग कर सकते हैं , यह प्रयोग तब तक न करें , जब तक आप इन संदर्भों के अत्‍यधिक तनाव से न गुजर रहे हों।  ...........

मेष लग्‍नवाले माता पक्ष , किसी भी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु बांधव या किसी प्रकार के झंझट से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , धन , परिवार और घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , भाग्‍य , धर्म या खर्च से संबंधित से समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर , हर प्रकार के लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

वृष लग्‍नवाले भाई , बहन और अन्‍य बंधु बांधवों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , घर गृहस्‍थी , खर्च या बाहरी संदर्भों की समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , धन , परिवार , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई के मामले से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , माता पक्ष , किसी प्रकार की छोटी बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , हर प्रकार के लाभ के मामले , रूटीन और जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , भाग्‍य , धर्म , पितापक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

मिथुन लग्‍नवाले धन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , लाभ , प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , माता पक्ष , हर प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , खर्च से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , बांधवो से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , घर गृहस्‍थी , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , भाग्‍य , धर्म , रूटीन , जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

कर्क लग्‍नवाले स्‍वास्‍थ्‍य या आत्‍म विश्‍वास से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई या कैरियर , पिता या सामाजिक पक्ष से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , खर्च या बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , माता पक्ष , किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति या लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , धन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , धर्म , भाग्‍य ,प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , घर गृहस्‍थी  , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

सिंह लग्‍नवाले खर्च या बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , माता पक्ष , किसी प्रकार  की छोटी या बडी अचल संपत्ति या भाग्‍य से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , धन या लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य या आत्‍म से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , घर गृहस्‍थी , प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

कन्‍या लग्‍नवाले लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , भाई , बहन , अन्‍य बंधु , रूटीन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , भाग्‍य , धर्म , धन या कोष से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , खर्च या बाहरी संदर्भ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , माता पक्ष  , छोटी या बडी संपत्ति , घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई या प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

तुला लग्‍नवाले पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , घर गृहस्‍थी , धन कोष से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , भाई बहन या अन्‍य बंधु , खर्च और बाह्य संदर्भ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , रूटीन और जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , खर्च और बाहरी संदर्भ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , माता पक्ष  , छोटी या बडी संपत्ति , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

वृश्चिक लग्‍नवाले भाग्‍य , धर्म से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍म विश्‍वास या प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , लाभ या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , घर गृहस्‍थी , खर्च और बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , पिता पक्ष , सामाजिक  पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , धन , कोष , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , माता पक्ष , छोटी या बडी किसी प्रकार की संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

धनु लग्‍नवाले रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , खर्च या बाहरी संदर्भ  कैरियर , पिता या सामाजिक पक्ष से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , घर गृहस्‍थी  , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , लाभ और प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , भाग्‍य या धर्म से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , माता पक्ष , किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , धन , कोष , भाई बहन या अन्‍य बंधु से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

मकर लग्‍नवाले घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , माता पक्ष , छोटी या बडी संपत्ति के मामले और लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , भाग्‍य , धर्म या प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु खर्च और बाहरी संदर्भ  और बाहरी संदर्भ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , धन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

कुंभ लग्‍नवाले प्रभाव की कमजोरी या झंझट के बढोत्‍तरी से बचने के लिए सफेद रंग का , भाई बहन , या अन्‍य बंधु बांधवों , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष या कैरियर से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का ,  किसी प्रकार की संपत्ति या भाग्‍य से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का ,  धन और लाभ से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , खर्च और बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।

मीन लग्‍नवाले अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , या अन्‍य माहौल से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए सफेद रंग का , भाग्‍य , धर्म , धन से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए लाल रंग का , माता पक्ष , छोटी या बडी संपत्ति , घर गृहस्‍थी से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हरे रंग का , भाई , बहन या अन्‍य बंधु , रूटीन और जीवनशैली से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए हल्‍के नीले रंग का , प्रभाव से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए ईंट के रंग का , स्‍वास्‍थ्‍य , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए पीले रंग का , लाभ , खर्च और बाहरी संदर्भों से संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं।




छठ श्रद्धा और आस्‍था का त्‍यौहार

बिहार और झारखंड का मुख्‍य त्‍यौहार है छठ , अभी चारो ओर इसकी धूम मची है। ब्‍लॉग में भी दो चार पोस्‍ट पढने को मिल ही जा रहे हैं।  लोग छठ की खरीदारी में व्‍यस्‍त है , पडोस में मेहमानों की आवाजाही शुरू हो गयी है।  दूर दूर से इसके खास धुन पर बने गीत सुनने को मिल ही रहे हैं , फिर भी वर्ष में एक बार इसकी सीडी निकालकर दो तीन बार अवश्‍य चला लिया करती हूं। छठ के बाद फिर सालभर  इस गाने को नहीं बजाया जाता है , पडे पडे सीडी खराब भी तो हो जाएगी। गीत सुनते हुए न जाने कब मन बचपन में छठ की पुरानी यादों में खो जाता है।

कहते हैं , हमारे पूर्वज 150 वर्ष पूर्व ही पंजाब से आकर बोकारो जिले के पेटरवार नाम के गांव में बस गए थे।  इनके नाम से गांव में एक 'खत्री महल्‍ला' कहलाने लगा था। आर्सेलर मित्‍तल ने अब अपने स्‍टील प्रोजेक्‍ट के लिए इस स्‍थान को चुनकर अब इसका नाम औद्योगिक शहरों में शुमार कर दिया है! हमलोगों के जन्‍म तक तो कई पीढियां यहां रह चुकी थी , इसलिए यहां की सभ्‍यता और संस्‍कृति में ये पूरे रच बस चुके थे। पर छठ का त्‍यौहार कम घरों में होता था और कुछ क्षेत्रीय लोगों तक ही सीमित था , खासकर उस समय तक हममें से किसी के घर में नहीं मनाया जाता था। सब लोग छठ मैय्या के नाम पर एक सूप या जोडे सूप के मन्‍नत जरूर रखते थे , उसकी खरीदारी या तैयारी भी करते , पर अर्घ्‍य देने या दिलवाने के लिए हमें किसी व्रती पर निर्भर रहना पडता था।

हमारे मुहल्‍ले में दूसरी जाति के एक दो परिवार में यह व्रत होता था , खरना में तो हमलोग निश्चित ही खीर और पूडी या रोटी का प्रसाद खाने वहीं पहुंचते थे। माना जाता है कि खरना का प्रसाद जितना बंटे , उतना शुभ होता है , इसलिए बच्‍चों के लिए रखकर बाकी पूरे मुहल्‍ले का गाय का दूध व्रती के घर चला जाता था । कभी कभार हमारा मन्‍नत वहां से भी पूरा होता। पर अधिकांश वर्ष हमलोग दादी जी के साथ अपनी एक दीदी के दोस्‍त के घर जाया करते थे। एक दिन पहले ही वहां हमलोग चढावे के लिए खरीदे हुए सामान और पैसे दे देते। दूसरे दिन शाम के अर्घ्‍य के दिन नहा धोकर घर के गाय का ताजा दूध लेकर अर्घ्‍य देने जाते थे।

वहां सभी लोग प्रसाद के रख रखाव और पूजा की तैयारी में लगे होते थे। थोडी देर में सब घाट की ओर निकलते। कुछ महिलाएं और बच्‍चे दंडवत करते जाते , तो कुछ मर्द और बच्‍चे माथा पर प्रसाद की टोकरी लिए हुए । प्रसाद के सूप में इस मौसम में होने वाले एक एक फल मौजूद होते हैं , साथ में गेहूं के आटे का ठेकुआ और चावल के आटे का कसार भी।  बाकी सभी लोग पूरी आस्‍था में तथा औरते छठ का विशेष गीत गाती हुई साथ साथ चलती। हमारे गांव में कोई नदी नहीं , इसलिए पोखर पर ही छठ मनाया जाता। घाट पर पहुंचते ही नई सूती साडी में व्रती तालाबों में डुबकी लगाती , फिर हाथ जोडकर खडी रहती। सूर्यास्‍त के ठीक पहले व्रती और अन्‍य लोग भगवान को अर्घ्‍य देते। हमारे यहो सभी मर्द लडके भी उस वक्‍त तालाब में नहाकर अर्घ्‍य देते थे। महीने या सप्‍ताह भर की तैयारी के बाद कार्यक्रम थोडी ही देर में समाप्‍त हो जाता था। पर आधी पूजा तो सुबह के लिए शेष ही रह जाती थी।

पहले ठंड भी बहुत पडती थी , सूर्योदय के दो घंटे पहले घाट में पहुंचना होता है , क्‍यूंकि वहां पूरी तैयारी करने के बाद आधे घंटे या एक घंटे व्रती को जल में खडा रहना पडता है। इसलिए सूर्योदय के ढाई घंटे पहले हमें अपने घर से निकलना होता। वहां जाने का उत्‍साह इतना अधिक होता कि हमलोग अंधेरे में ही उठकर स्‍नान वगैरह करके वहां पहुंच जाते। वहां तैयारी पूरी होती , दो तीन दिन के व्रत और मेहनत के बाद भी व्रती के चेहरे पर एक खास चमक होती थी। शाम की तरह ही सारा कार्यक्रम फिर से दुहराया जाता , उसके बाद प्रसाद का वितरण होता , फिर हमलोग घर वापस आते।

विवाह के दस वर्ष बाद तक संतान न होने की स्थिति में खत्री परिवार की दो महिलाओं ने पडोसी के घरों में जाकर इस व्रत को शुरू किया और सूर्य भगवान की कृपा कहें या छठी मैय्या की या फिर संयोग ... दोनो के ही बच्‍चे हुए , और बाद में हमारे मुहल्‍ले में भी कई परिवारों में धूमधाम से यह व्रत होने लगा। इसलिए अब हमारे मुहल्‍ले के लोगों को इस व्रत के लिए गांव के दूसरे छोर पर नहीं जाना पडता है,  उन्‍हे पूरे मुहल्‍ले की हर संभव मदद मिलती है। बचपन के बाद अभी तक कई जगहों की छठ पूजा देखने को मिली ,  हर स्‍थान पर इस व्रत और पूजा का बिल्‍कुल एक सा परंपरागत स्‍वरूप है , यह सिर्फ श्रद्धा और आस्‍था का त्‍यौहार है .. इसमें दिखावटीपना कुछ भी नहीं।

काली पूजा के कुछ चित्र देखिए ..........

कार्तिक अमावस्या की शाम को घर घर होने वाली लक्ष्‍मी पूजा के साथ ही रात्रि में काली पूजा की भी बहुत महत्ता है। एंसी मान्‍यता है कि देवों में सबसे पराक्रमी और शक्तिशाली मां काली देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं। मां काली की पूजा से वे सभी सभी नकारात्मक प्रवृतियां दूर होती हैं ,  जो धार्मिक प्रगति और यश प्राप्ति में बाधक हैं। बोकारो में हमारी कॉलोनी मे हुए काली पूजा के कुछ चित्र देखिए .....................




सभी पाठकों को दीपावली की असीम शुभकामनाएं !!

Orkut Scraps Sparkling Diwali