किसी भी देश को सूर्य की ऊर्जा का 50% ही मिल पाता है। दिनभर उसका उपयोग करके रात्रि में हम चैन की नींद सो जाते हैं , बिजली उत्पादन समर्थ होते हुए भी हमलोग 24 घंटे काम नहीं कर सकते। चन्द्रमा भी सबको अपनी चांदनी का 50% ही लुटाता है। चांदनी की कमी का हमारे जीवन पर उतना तो नहीं , पर अनेकों पशु-पक्षियों पर इसका प्रभाव पड़ता है।
इसी तरह अन्य ग्रह भी सामूहिक तौर पर कहीं भी अपनी शक्ति का 50 प्रतिशत ही आपको प्रदान करते हैं , जो हमें सूर्य-चंद्र की तरह स्पष्ट नहीं दिखाई देता। लगभग सभी देशों में इसी हिसाब से हमने काम और आराम, प्रयास और सफलता का समय निर्धारित किया हुआ है।
पर व्यक्तिगत तौर पर हमपर सभी ग्रह ऐसा स्पष्ट या एक समान प्रभाव नहीं डालते। जन्म के समय ये ग्रह किसी पर 100% मेहरबान हो जाते हैं , किसी को 50% तो किसी को 0% भी मिलता है। ग्रहों की इसी स्थिति के काऱण कोई किसी मामले में सुखी, किसी मामलों में सामान्य और किसी मामलों में दुःख की अनुभूति करता है।
इतना ही नहीं, अपनी जीवनयात्रा में मनुष्य को कोई समय आरामदायक , कोई समय सामान्य अवस्था का और कोई समय कष्टकर दीखता है .समय अच्छा होता है तो रोज धनतेरस और दीपावली होती है , अन्यथा सब गड़बड़।
इन्ही ग्रहों के कारण, जो किसी पर 100% मेहरबान हो जाते हैं , किसी को 50% तो किसी को 0% भी मिलता है। इसी आधार पर गत्यात्मक ज्योतिष में पूरे जीवन के उतार-चढ़ाव का लेखाचित्र और जीवन के सभी मामलों के सुख-दुःख को पाई चार्ट में दिखलाने में सफलता पायी।
हमलोग रिसर्च में और आगे बढे तो मालूम हुआ , सिर्फ जन्म के समय में ही नहीं , गोचर में भी यानि आसमान में चलते हुए भी ये ग्रह किसी दिन आपपर 100% मेहरबान हो जाते हैं , किसी को 50% तो किसी को 0% भी मिलता है।
ग्रहों की इसी स्थिति के काऱण कभी कभी पुरे वर्ष , कभी किसी महीने, किसी दिन या किसी घंटे भी व्यक्ति किसी मामले में सुखी, किसी मामलों में सामान्य और किसी मामलों में दुःख की अनुभूति करता है। इसी को समझते हुए प्रचलित चंद्र राशिफल, सूर्य राशिफल से एक कदम आगे बढ़ते हुए हमने लग्नराशिफ़ल की शुरुआत की थी ।
ग्रहों के इस रहस्य को समझने के बाद काफी दिनों से हमारी इच्छा एक ऐसा एंड्राइड ऐप्प बनाने की थी , जो आसमान में चल रहे ग्रहों के आपपर पड़ने वाले धनात्मक , ऋणात्मक और सामान्य प्रभाव को आपके मोबाइल तक पहुंचा सके। ग्रह के इस प्रभाव के हिसाब से ही आपको अपने कार्यक्रम बनाने में मदद कर सके। क्या करें और क्या न करें, इसका सुझाव भी दे सके।
आपलोगों को यह जानकर ख़ुशी होगी कि यह एप्प आज हमारे सपने को पूरा करने लगा हैं .यह एप्प आपके जन्मकालीन और गोचर के सारे ग्रहों , दोनों के परस्पर तालमेल से के आधार पर खासकर आपके लिए प्रतिदिन और वर्ष के भिन्न भिन्न समयांतराल में भविष्यफल देने में समर्थ हो गया हैं. यह आपके लिए एंड्राइड प्लेस्टोर में उपलब्ध हैं । आप सभी इस निःशुल्क एप्प का फ़ायदा अवश्य उठायें !
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क्या ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास? इस ब्लॉग में आप ज्योतिष के आधुनिक सूत्रों से सम्बद्ध नवीन ज्योतिषीय सिद्धांत के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, जो ज्योतिष की सटीकता पर शोध, ज्योतिष में नए शोध और निष्कर्ष के उपरांत विकसित किया गया है, नए ज्योतिष सूत्रों के माध्यम से कुंडली विश्लेषण, इन ज्योतिष के नए नियमों से भविष्यवाणी कैसे करें, 'ज्योतिष सीखने के लिए नए सूत्र और विधियाँ बताई गयी हैं।
एप्प अपने अंतिम चरण में है
Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723
अफसोस है .. नहीं रहा अब हमारे मुहल्ले का पीपल का पेड !!
peepal ka ped
28 अप्रैल को दिल्ली के लिए निकलने से पहले अखबार में एक खबर पढते हुए मैं चौंक ही गयी। हमारे मुहल्ले का पीपल का विशालकाय पेड हल्की सी आंधी पानी में ही जड से उखड चुका था , खैरियत यही थी कि जानमाल की कोई क्षति नहीं हुई थी , बस एक दो गुमटियां टूट गयी थी। इसकी उम्र के बारे में कुछ कह पाना मुश्किल है , क्यूंकि गांव के सारे बडे बुजुर्ग कहते आ रहे हैं कि उन्होने बचपन से ही इस पीपल के पेड को उसी रूप में देखा है। हमारे घर से दो सौ मीटर की दूरी पर स्थित मुहल्ले के छोटे से चौक पर स्थित इस पीपल के पेड से हमारी कितनी यादें जुडी थी। किसी को पता बताना हो तो यही पीपल का पेड , बच्चों को कोई खेल खेलना हो , तो यही पीपल का पेड , मुहल्ले का कोई कार्यक्रम हो तो यहीं , बडे बुजुर्गों के बैठक से लेकर ताश पतते खेलने की जगह भी यही , मेले लगाने की भी जगह यही। कुछ खाना पीना हो तो बस पीपल के पेड के पास चले जाइए !
चित्र में जिस छोटे से चौक में मेन रोड पेटरवार कसमार लिखा है , वहीं तरह तरह की पंक्षियों का बसेरा वह विशालकाय पीपल का पेड हुआ करता था । चारो ओर के लोगों का यहां जुटना आसान था , दो दो मंदिर भी आसपास थे , उसके सामने की जमीन खाली पडी थी , जगह काफी हो जाती , इसलिए पर्व त्यौहार की भीड भी यहीं जुटती। हमारे गांव की एक नई बहू ने जब इस पीपल के पेड के प्रति पूरे मुहल्लेवालों की दीवानगी देखी तो पूछ ही बैठी , 'इस मुहल्ले वालों के जन्म के बाद उनके गर्भनाल वहीं गाडे जाते हैं क्या ?'
कुछ दिन पहले तक गूगल मैप में इस पेड को साफ तौर पर देखा जा सकता था , मै दिल्ली जाने की हडबडी में इसे सेव भी न कर सकी। काफी दिनों तक यह पेड गिरा पडा रहा , अभी भी गूगल के चित्र में यह गिरा पडा है। मेरे चाचाजी के घर जानेवाला रास्ता बंद हो गया था , 11 मई को मेरी बहन का विवाह होना था , इसलिए सप्ताह भर के अंदर रास्ता साफ करना पडा। हमलोग विवाह के लिए 11 को वहां पहुंचे तो काफी सूनापन का अहसास हुआ। वहां पीपल के पेड की निर्जीव लकडियां पडी थी , हमने उसकी ही फोटो खींच ली।
अफसोस है ... नहीं रहा अब हमारे मुहल्ले का पीपल का पेड !!
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peepal ka ped
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नए वर्ष की अनंत शुभकामनायें .. जल्द ही हमारा एप्प आने वाला है !!
भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। गणना की सुविधा को देखते हुए आज अंतर्राष्ट्रीय मानकों में अंग्रेजी केलेन्डर ने मान्यता पायी है ।पर ग्रंथों की मान्यता है कि सृष्टि की शुरुआत चैत्र शुदी १ को हुई थी, इसलिए इस दिन को नवसंवत्सर यानी साल का पहला दिन माना जाता है। नव वर्ष की प्रणाली ब्रह्माण्ड पर आधारित होती है, यह तब शुरु होता है जब सूर्य या चंद्रमा मेष के पहले बिंदु में प्रवेश करते हैं। पर प्रत्येक वर्ष सूर्य और चंद्रमा दोनों का उस विन्दु पर प्रवेश एक साथ नहीं होता, इसलिए भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस तरह के कई संवत्सरों को मान्यता प्राप्त है। लगभग सभी प्रदेशों में अलग-अलग नामों से मार्च-अप्रैल के महीने में नया वर्ष मनाया जाता है। बंगाल में १४ या १५ अप्रैल को मनाया जाने वाला त्यौहार के साथ ही नए वर्ष मानाने का सिसिला समाप्त हो जाता है। यदि हम अंग्रेजी के केलिन्डर के नामों को देखें तो सितम्बर-अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर अंक ७-८-९-१० का प्रतिनिधित्व करता दिखता है। ऐसा भी तभी संभव है, जब साल की शुरुआत मार्च से हो। भारतवर्ष में मार्च-अप्रैल में वसंत का मौसम होता है, पेड़-पोधों मे फूल-मंजर-कली की शुरुआत होती है, कोयल की कूक वातावरण को खुशनुमा बनाती है। घर फसलों से भरे होते हैं, शायद इसलिए भी यह त्यौहार मानाने का समय माना जाता है।
हमारे क्लाइंट्स को हमारे अनुभव का लाभ अच्छे से पहुँच पाए, इसके लिए पिछले पांच साल से एक एप्प को लांच करने की आवश्यकता थी। पर परिवार में किसी न किसी की अस्वस्थता और पारिवारिक उलझनों की वजह से बात नहीं बन पा रही थी। पिछले साल से ही कठिन श्रम के बाद 'गत्यात्मक ज्योतिष' के एप्प को नए साल में लांच करने की पूरी तैयारी चल रही थी, पर नए साल से पहले ही २३ दिसम्बर २०१८ को मेरी मम्मी हमारा साथ छोड़कर ब्रह्माण्ड में विलीन हो गयी। आज नए वर्ष पर इसे लांच करने के लिए मैं दिल्ली आयी हूँ, पर 'गत्यात्मक ज्योतिष' के जनक हमारे पापाजी जरूरी कार्य से झारखण्ड में हैं। उनका आशीर्वाद के बिना कोई कार्य नहीं किया जा सकता, अतः पापाजी का इंतज़ार कर रही हूँ। अभी पुरे देश में नए वर्ष मानाने का सिलसिला चल ही रहा है, किसी प्रदेश के नए वर्ष पर हमारा एप्प प्लेस्टोर में आ जायेगा। यह भी हो सकता है कि १५ अप्रैल के बाद हम इसे प्लेस्टोर में डाल पाएं। यदि ऐसा हुआ तो 'गत्यात्मक ज्योतिष' के कारण भारतवर्ष में नया वर्ष मनाने का विस्तार १४ अप्रैल से भी आगे आगे बढ़ सकता है। जल्द ही आ रहा है हमारा एप्प , आप सबों को नए वर्ष की अनंत शुभकामनायें !!
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एस्ट्रोलॉजर बनने के लिए क्या करें ?
Q- एस्ट्रोलॉजर बनने के लिए क्या करें ?
Ans- एस्ट्रोलॉजर बनने के लिए एस्ट्रोलॉजी की पढ़ाई करनी होगी , देश के कई विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में इसकी पढ़ाई करवाई जाती है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' भी शीघ्र ज्योतिषियों को ट्रेनिंग देने की व्यवस्था में है।
Q- astrology ke liye kya padhai kare
Ans - ग्रहों के जड़ चेतन पर प्रभाव को समझना ज्योतिष का मुख्या विषय है , जिसे राशिचक्र , लग्न , भाव और सभी ग्रहों के माध्यम से आपको सिखाया जाता है।
Q - astrologer ka contact no.
Ans - गत्यात्मक ज्योतिष से जुड़े एस्ट्रोलॉजर का नंबर 8292466723 है
Q - astrologer ka mobile no.
Ans - गत्यात्मक ज्योतिष से जुड़े एस्ट्रोलॉजर का नंबर 8292466723 है
Q - astrology me kiska adhyayan kiya jata
Ans - ग्रहों के जड़ चेतन पर प्रभाव को समझना ज्योतिष का मुख्य विषय है , जिसे राशिचक्र , लग्न , भाव और सभी ग्रहों के माध्यम से आपको सिखाया जाता है।
Q - computer astrology kya hai
Ans - एस्ट्रोलॉजी के नियमों , सिद्धांतों को जब कंप्यूटर में कोडन के माध्यम से डाला जाता है तो इसे कंप्यूटर एस्ट्रोलॉजी। इसके उपयोग करने से ज्योतिषियों को कम मेहनत करनी होती है।
Q - astrology kiska adhyan h
Ans - एस्ट्रोलॉजी में आसमान , उसमे स्थित गृह नक्षत्र और उसके पृथ्वी पर प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।
Q - astro match kya hai kise kehte h
Ans - विवाह से पहले वर वधू की की कुंडली को मिलाकर देखा जाता है , ताकि विवाह के बाद उनमे मतभेद न उभरे , इसी प्रक्रिया को ास्त्रो मैच कहते हैं।
Q - graho ke upay ka scientific reason or astrology kya kaam karta hai
Ans - 'गत्यात्मक ज्योतिष' के द्वारा ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचने के लिए कई प्रकार के अचूक उपाय किये जाते हैं, जिसमे संगति कलर-थेरेपी , दान-पुण्य , मुहूर्त की अंगूठी , पेड़-पौधों , । वैज्ञानिक ढंग से इसे प्रूफ कर पाना बहुत कठिन है।
मै शीघ्र ही इस चैनल पर निःशुल्क ज्योतिष सिखलाने का कोर्स शुरू करनेवाली हूँ , चैनल को सब्सक्राइब करें , वीडियोज को देखक्रर ज्योतिष का ज्ञान प्राप्त करें , उन्हें लाइक और शेयर करें , ताकि चैनल की रफ़्तार तेज हो और आपको नयी नयी जानकारिया मिलती रहें।
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मेरी पुस्तक का कौन सा संस्करण आपके पास है ?
पाठकों से अनुरोध है कि यदि उनके पास मेरी पुस्तक है तो यह जानकारी दें कि उसमे कौन सा एडिशन लिखा गया है। हमारे पाठकों में प्रकाशक भी हैं, लेखक भी। वकील भी हैं और पाठक भी। मुझे एक और विचार देने का कष्ट करें कि इस परिस्थिति में मुझे क्या कदम उठाना चाहिए ? पूरी कहानी इस प्रकार है ....
20 वीं सदी के अंत में हमारे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष के क्षेत्र में गंभीर शोधकार्य चला। 21 वीं सदी के आरम्भ से पिताजी के साथ हम सभी बच्चे भी इस शोध का आगे ले जाने के लिए नियमित कार्य कर रहे हैं। ज्योतिष के विद्वानों को इस शोध-कार्य से परिचित करवाया जाये , मैंने एक पुस्तक लिखी , जो ज्योतिष की प्रचलित पुस्तकों से बिलकुल भिन्न हमारे खुद के अनुभव पर आधारित थी। वर्ष 1996 में ही एक प्रकाशक ने पुस्तक की 400 प्रति छापने और बेचने के लिए मुझसे सहमति ली । उस वक्त कितने छापे और बेचे, मुझे पता नहीं।
पुनः 1999 में दूसरे संस्करण के 400 पुस्तकें छपने के लिए उन्होंने मुझसे संपर्क किया और मैंने फिर उन्हें अनुमति दे दी। दोनों संस्करण में लगभग 8000 रुपये मुझे मिलने की बात हुई थी, पर काफी तकाजे के बाद उन्होंने मुझे पैसे न देकर उतने मूल्य की पुस्तकें ही भेजीं। दो-चार वर्ष बाद फिर से उनका पत्र मिला कि वे तीसरा संस्करण छापना चाहते हैं, मैंने अनुमति नहीं दी। ज्योतिष के क्षेत्र में मुझ जैसी पहली लेखिका की हिंदी किताब की इतनी अच्छी बिक्री से आप पुस्तक में मौजूद विषय की मजबूती का आकलन कर सकते हैं। तीसरी बार अनुमति न देने से मैं निश्चिन्त हो गयी कि अब मेरी पुस्तक नहीं छप रही है।
आश्चर्य तो तब हुआ, जब कुछ दिनों पूर्व हमारे ब्लॉग के एक-दो पाठकों ने जिक्र किया कि उन्होंने मेरी पुस्तक मंगवाकर पढ़ी। मैंने नेट पर देखा तो कई जगहों पर उपलब्ध थी, आमेजन पर भी। मुझे लगा कि 20 साल पुरानी पुस्तक में से ही बची हुई उपलब्ध होगी। मैं प्रकाशक के कार्यालय में गयी और बची पुस्तकों के बारे में जानकारी मांगी। मैंने कहा कि उनके पास पुस्तक हो तो मुझे दें। उन्होंने कई फटी हुई पुरानी किताबें मुझे दिखाईं और बोलै कि बस इतनी ही बची है।
मैंने अमेजन को ऑर्डर किया तो तीन दिन बाद पुस्तक मेरे घर पर आयी। बिलकुल नई पुस्तक में कॉपीराइट लेखिका के पास और एडिशन 2018 का लिखा गया था। मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि मेरी सहमति के बिना यह पुस्तक छापी और बेची जाती रही है। क्या इसमें 'गत्यात्मक ज्योतिष' को जन्म देनेवाले मेरे गुरु और पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी और मेरा हिस्सा नहीं होना चाहिए ?
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