समस्या का समाधान कैसे करें ? - 6

 

Colour astrology in hindi

ज्योतिष में रंगों का महत्व - यह तथ्‍य सर्वविदित ही है कि विभिन्न पदार्थों में रंगों की विभिन्नता का कारण किरणों को अवशोषित और उत्सर्जित करने की शक्ति है। जिन रंगों को वे अवशोषित करती हैं , वे हमें दिखाई नहीं देती , परंतु जिन रंगों को वे परावर्तित करती हैं , वे हमें दिखाई देती हैं। यदि ये नियम सही हैं तो चंद्र के द्वारा दूधिया सफेद , बुध के द्वारा हरे , मंगल के द्वारा लाल , शुक्र के द्वारा चमकीले सफेद , सूर्य के द्वारा तप्‍त लाल , बृहस्पति के द्वारा पीले और शनि के द्वारा काले रंग का परावर्तन भी एक सच्‍चाई होनी चाहिए।

 Jyotish best upay

पृथ्‍वी में हर वस्‍तु का अलग अलग रंग है , यानि ये भी अलग अलग रंगों को परावर्तित करती है । इस आधार पर सफेद रंग की वस्‍तुओं का चंद्र , हरे रंग की वस्‍तुओं का बुध , लाल रंग की वस्‍तुओं का मंगल , चमकीले सफेद रंग की वस्‍तुओं का शुक्र , तप्‍त लाल रंग की वस्‍तुओं का सूर्य , पीले रंग की वस्‍तुओं का बृहस्‍पति और काले रंग की वस्‍तुओं का श‍नि के साथ संबंध होने से इंकार नहीं किया जा सकता। शायद यही कारण है कि नवविवाहिता स्त्रियों को मंगल ग्रह के दुष्‍प्रभावों से बचाने के लिए लाल रंग को परावर्तित करने के लिए प्राय: लाल वस्त्र से सुशोभित करने तथा मॉग में लाल सिंदूर लगे की प्रथा है।

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Jyotish samadhan

इसी कारण चंद्रमा के बुरे प्रभाव से बचने के लिए मोती , बुध के लिए पन्ना , मंगल के लिए मूंगा , शुक्र के लिए हीरा , सूर्य के लिए माणिक , बृहस्पति के लिए पुखराज और शनि के लिए नीलम पहनने की परंपरा समाज में बनायी गयी है। ये रत्न संबंधित ग्रहों की किरणों को उत्सर्जित कर देते हैं , जिसके कारण ये किरणें इन रत्नों के लिए तो प्रभावहीन होती ही हैं , साथ ही साथ इसको धारण करनेवालों के लिए भी प्रभावहीन बन जाती हैं। इसलिए रत्नों का प्रयोग सिर्फ बुरे ग्रहों के लिए ही किया जाना चाहिए , अच्छे ग्रहों के लिए नहीं। कभी-कभी पंडितों की समुचित जानकारी के अभाव के कारण ये रत्न जातक को अच्छे फल से भी वंचित कर देती है।

ज्योतिष में रंगों का महत्व

रंगों में अद्भूत प्रभाव होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि विभिन्न रंगों की बोतलों में रखा पानी सूर्य के प्रकाश में औषधि बन जाता है , जिसका उपयोग विभिन्न रोगों की चिकित्सा में किया जाता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' भी कमजोर ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचने के लिए उससे संबंधित रंगों का अधिकाधिक प्रयोग करने की सलाह देता है। रत्न धारण के साथ साथ आप उसी रंग की प्रधानता के वस्त्र धारण कर सकते हैं । मकान के बाहरी दीवारों की पुताई करवा सकते हैं।

Jyotish upay in hindi

यदि व्यक्ति का जन्मकालीनचंद्र कमजोर हो, तो उन्हें सफेद , बुध कमजोर हो , तो उसे हरे , मंगल कमजोर हो , तो उसे लाल , शुक्र कमजोर हो , तो उसे हल्के नीले , सूर्य कमजोर हो , तो उसे ईंट के रंग , बृहस्पति कमजोर हो , तो उसे पीले , तथा शनि कमजोर हो , तो काले रंग का अधिक प्रयोग कर उन ग्रहों के प्रभाव को परावर्तित किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे , मजबूत ग्रहों की किरणों का अधिकाधिक प्रभाव आपपर पड़े , इसके लिए उससे संबंधित रंगों का कम से कम प्रयोग होना चाहिए। इन रंगों की वस्तुओं का प्रयोग न कर आप दान करें , तो काफी फायदा हो सकता है। अगले लेख में पुन: इसके आगे का भाग पढें !!  

गत्यात्मक ज्योतिष में ग्रहों के प्रभाव को दूर करने से सम्बंधित उपायों के बारे में प्रकाशित पुस्तक को पढ़ने के लिए अमेज़ॉन के किंडल में  इस लिंक पर क्लिक करें !

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    समस्या का समाधान कैसे करें ? - 7

    Jyotish Upay

    ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के उपायों की जो श्रृंखला चल रही है , उसे अंधविश्‍वास न समझा जाए , क्‍यूंकि हमलोग ग्रंथों को सिर्फ पढते ही नहीं , उसके सिद्धांतों की पूर्ण तौर पर परख करके गलत को गलत और सही को सही साबित करने के बाद लिखा करते हैं। अब यह हमारी विवशता ही है कि बंदूक की गोली की तरह न तो ग्रहों के प्रभाव को देखा और दिखाया जा सकता है , फिर उसके प्रभाव को रोकने के लिए किए गए उपायों को प्रमाणित करने के लिए हमारे पास कोई साधन कैसे हो सकता हैं ? पहले के छह भागों को पढने के लिए यहां क्लिक करें , अब उसका आगे का यानि सातवां भाग पढे ...

     Vanaspati Vigyan

    प्राचीनकाल से ही पेड़-पौधें का मानव विकास के साथ गहरा संबंध रहा है। भारतीय ज्योतिष में रत्नधारण की ही तरह विभिन्न वनस्पतियों की जड़ों को भी धारण करने की भी परंपरा है। सूर्य की शांति के लिए बेल की जड़ , चंद्र के लिए खिन्नी की जड़ , मंगल के लिए अनंतमूल की जड़ , बुध के लिए विधारा की जड़ , गुरु के लिए संतरे या केले की जड़ , शुक्र के लिए सरफाकों की जड़ तथा शनि की शांति के लिए बिच्छुए की जड़ धारण करने की बात ज्‍योतिष के प्राचीन ग्रंथों में लिखी है। साथ ही रंगों के अनुसार ही विभिन्न पेड़-पौधें की पूजा या विभिन्न देवी देवताओं पर पुष्‍प अर्पण करने का भी विधान है। इससे साबित होता है कि हमारे ऋषि मुनियों को ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को दूर करने के लिए पेड़-पौधों की भूमिका का भी पता था। अन्‍य बातों की तरह ही जब गंभीरतापूर्वक काफी दिनों तक ग्रहों के प्रभाव को दूर करने में पेड पौधों की भूमिका का भी परीक्षण किया गया तो निम्न बातें दृष्टिगोचर हुई --------------

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     Jyotish upay in hindi

    1. यदि जातक का चंद्रमा कमजोर हो , तो उन्हें तुलसी या अन्‍य छोटे-छोटे औषधीय पौधे अपने अहाते में लगाकर उसमें प्रतिदिन पानी देना चाहिए।

    2. यदि जातक का बुध कमजोर हो तो उसे बिना फल फूलवाले या छोटे छोटे हरे फलवाले पौधे लगाने से लाभ पहुंच सकता है।

    3. इसी प्रकार जातक का मंगल कमजोर हो तो उन्हें लाल फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने  से लाभ होगा।

    4. इसी प्रकार जातक का शुक्र कमजोर हो तो उन्हें सफेद फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

    5. इसी प्रकार जातक का सूर्य कमजोर हो तो उन्हें तप्‍त लाल रंग के फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

    6. इसी प्रकार जातक का बृहस्पति कमजोर हो तो उन्हें पीले फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

    7. इसी प्रकार जातक का शनि कमजोर हो तो उन्हें बिना फल-फूल वाले या काले फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

    ध्यान रहे , ये सभी छोटे-बड़े पेड़-पौधे पूरब की दिशा में लगे हुए हों , इसके अतिरिक्‍त ग्रह के बुरे प्रभाव से बचने के लिए पश्चिमोत्‍तर दिशा में भी कुछ बड़े पेड़ लगाए जा सकते हैं , किन्तु अन्य सभी दिशाओं में आप शौकिया तौर पर कोई भी पेड़ पौधे लगा सकते हैं।

    उपरोक्त समाधानों के द्वारा जहॉ ग्रहों के बुरे प्रभावों को कम किया जा सकता है , वहीं अच्छे प्रभावों को बढा़ पाने में भी सफलता मिल सकती है।

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      समस्या का समाधान कैसे करें ? - 8

        

      Jyotish Upay

      एक सप्‍ताह से मैं अपनी अप्रकाशित पुस्‍तक 'गत्‍यात्‍मक झरोखे से ज्‍योतिष' के एक लेख 'ज्‍योतिष का सहारा लेकर क्या भवितब्यता टाली भी जा सकती है' के हिस्‍से को प्रतिदिन पोस्‍ट करती जा रही थी। आपलोगों के द्वारा समय समय पर किए जानेवाले प्रश्‍न के जबाब में यह लेख लिखा गया था, पर आलोचना के भय से मैं इसे प्रकाशित करना नहीं चाहती थी। पर एक सप्‍ताह से पिताजी की बोकारो में उपस्थिति से मैं उनके साथ ज्‍योतिष से ही जुडे कई प्रकार के विमर्श में व्‍यस्‍त थी , नया कुछ न लिख पाने के कारण मैने इस पुराने आलेख को ही प्रतिदिन ठेलती गयी। 

      आज वे रांची के लिए निकल चुके हैं , तो मैं यह सफाई देना चाहती हूं कि इन आलेखों में लिखे गए सारे तथ्‍य सटीक हैं और ये सारे परीक्षण हमारे द्वारा किए जा चुके हैं, इसलिए किसी के द्वारा कहे जाने पर आपलोगों को गुमराह होने की आवश्‍यकता नहीं। मैं ऐसा एक भी वाक्‍य नहीं लिखती , जिसे उस समय तार्किक ढंग से समझाया नहीं जा सके , जब सभी लोगों को 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की जानकारी हो जाए , जो कि हमारा लक्ष्‍य है। इस आठवीं कडी को मैं आज लिख रही हूं , जिसे अपनी पुस्‍तक में जोडना होगा।

      jyotish ke achuk upay

      आलेखों की इस शृंखला को पढने के बाद एक पाठक का प्रश्‍न है कि पुराने जमाने में तो हमलोगों के लिए ये कोई उपाय नहीं किए गए , फिर हमलोगों पर ग्रहों का बुरा प्रभाव नहीं पडा , आज इसकी जरूरत क्‍यूं पड गयी। अभी हाल फिलहाल में मेरे यहां आए एक डॉक्‍टर ने भी मुझसे यही प्रश्‍न पूछा था। मैने डॉक्‍टर से पूछा कि क्‍या कारण है कि आपलोग गर्भवती स्‍त्री को इतने विटामीन लिखा करते हैं , कल तक गांव में अत्‍यंत निर्धन महिलाओं को छोडकर शायद किसी को भी ऐसी आवश्‍यकता नहीं पडती थी। 

      उन्‍होने कहा कि हमारे रहन सहन में आए फर्क के कारण ऐसा हो रहा है। गांव में औरतें पर्याप्‍त मात्रा में साग सब्जियां खाया करती थी , परंपरागत खाने की थालियों के बाद शरीर में किसी और चीज की जरूरत नहीं रह जाती है। पर आज कुछ व्‍यस्‍तता की वजह से , तो कुछ ताजी सब्जियों की अनुप्‍लब्‍धता के कारण महिलाओं में इसकी कमी हो जाया करती है। अर्थ यही है कि प्रकृति से आप जितनी ही दूरी बनाए रखेंगे , आपको कृत्रिम उपायों की आवश्‍यकता उतनी ही पडेगी।

      samasya ka samadhan kaise kare

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      मैने उन्‍हें समझाया कि ऐसी ही बात हर क्षेत्र में हैं , मेरी पूरी शृंखला को पढनेवाले ने पाया होगा कि सबसे पहले मैने शुभ मुहूर्त्‍त में बननेवाले अंगूठी यानि गहने की चर्चा की है। मुरारी पारीक जी ने पूछा भी कि हम यह कैसे पता करें कि अंगूठी शुभ मुहूर्त्‍त में बनी है। सचमुच हर बात में ज्‍योतिषीयों से राय लेना काफी कठिन है। इसी के लिए परंपरा बनायी गयी थी। जब आपके घर में कोई शुभ कार्य आराम से हो रहा हो , तो समझ जाएं कि आपके लिए ग्रहों की शुभ स्थिति बनी है। 

      संतान का जन्‍म खुशी खुशी हुआ , बच्‍च पूर्ण रूप से स्‍वस्‍थ है यानि ग्रह मनोनुकूल हैं , आप जन्‍मोत्‍सव की तैयारी करते हैं। इस समय सुनार को बुलाया गया , उसे ऑर्डर दिया गया , आपके शुभ समय में सोने या चांदी को पूर्ण तौर पर गलाकर एक वस्‍तु बनायी गयी , जिसे आपके गले , हाथ या पैर में धारण करवा दिया गया।यही नहीं अन्‍य लोगों के द्वारा उपहार में मिले सामान भी इसी समय के बने होते हैं , बाद में ग्रह अच्‍छा हो या बुरा , बच्‍चे की मानसिक स्थिति पर अधिक प्रभाव नहीं पडता है।

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      इसी तरह बेटे या बेटी के विवाह के लिए योग्‍य पार्टनर नहीं मिल रहा है , कितने दिनों से ढूंढ ढूंढकर लोग परेशान हैं , अचानक एक उपयुक्‍त पार्टनर मिल जाता है। वैज्ञानिकों की भाषा में इसे संयोग कहते हैं , पर इसमें भी शुभ ग्रहों का प्रभाव होता है। इस समय फिर से सुनार को बुलाया गया , उसे ऑर्डर दिया गया , आपके शुभ समय में सोने या चांदी को पूर्ण तौर पर गलाकर एक वस्‍तु बनायी गयी , जिसे वर और वधू दोनो के गले , हाथ या पैर में धारण करवा दिया जाता है। 

      अब यदि इनके ग्रह बुरे भी हों तो मानसिक शांति देने के लिए ये जेवर काफी होते थे। सुख और दुख तो जीवन के नियम हैं , लडकी की शादी हो गयी , पति नहीं कमाता है , कोई बात नहीं , पापाजी बेटी जैसा प्‍यार कर रहे हैं , नौकरी नहीं हो रही है , चलो कोई बात नहीं , पापा की दुकान पर ही बैठ जाया जाए , कुछ और काम कर लिया जाए। मतलब संतोष ही संतोष। और फिर समय हमेशा एक जैसा तो हो ही नहीं सकता , कल सबकुछ मन मुताबिक होना ही है।

      jyotish upay in hindi

      पर आजकल आपका शुभ मुहूर्त्‍त चल रहा होता है तो आप गहने नहीं बनवाते , गहने खरीदकर ले आते हैं , वह गहना उस समय का बना हो सकता है , जब आपके ग्रह कमजोर चल रहे थे। उसे पहनकर बच्‍चा या वर वधू शांति से तभी तक रह पाते हैं , जबतक उनके ग्रह मजबूत चल रहे हों , जैसे ही उनका ग्रह कमजोर होता है , उनपर दुगुना बुरा प्रभाव पडता है , वे परेशान हो जाते हैं , दुख से लडने की उनकी शक्ति नहीं होती। 

      छोटी छोटी समस्‍याओं से जूझना नहीं चाहते , असंतोष उनपर हावी हो जाता है। पति कमा रहा है तो सास ससुर के साथ क्‍यूं रहना पड रहा है , ट्रांसफर करवा लो , ट्रांसफर हो गया , तो मुझे नौकरी नहीं करने दे रहा , नौकरी भी करने दी , तो हमारे घूमने फिरने के दिन हैं , ये फ्लैट खरीद रहा है यानि हर बात में परेशानी। कैरियर में युवकों को ऐसी ही परेशानी है , इस तरह पति को वैसा ही असंतोष , किसी को किसी से संतुष्टि नहीं। 

      इसी प्रकार जब आपका बुरा समय चल रहा होता है और आप एक ज्‍योतिषी के कहने पर अंगूठी बनवाकर पहनते हैं , तो आप अपने कष्‍ट को दुगुनी कर लेते हैं, इसलिए कभी भी बुरे वक्‍त में नई अंगूठी बनवाने की कोशिश न करें। कल से दूसरे उपायों यानि संगति , दान , रंगों और पेड पौधों की वैज्ञानिकता पर बात की जाएगी !! 

      अपने अशुभ ग्रहों के प्रभाव को घटाने और शुभ ग्रहों के प्रभाव को बढ़ाने के उपाय के लिए 8292466723 ,  gatyatmakjytishapp@gmail.com पर संपर्क करें !
      ज्योतिषीय उपायों पर तैयार किये गए हमारे सारे लेख पढ़ें !

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        दो-तीन महीने ग्रहीय दृष्टि से खतरनाक !

        Covid 19 astrology in hindi


        जब तक हम विज्ञान की खोजों के हिसाब से हर परिस्थिति को नियंत्रित करने में समर्थ होते हैं, हमारा आत्मविश्वास काम करता रहता है। पर जब भी ऐसी स्थिति आती है, परिस्थितियाँ हमारे हाथ से निकलती महसूस होती है, लोगों को भाग्य, धर्म सब याद आने लगता है। पवन, अग्नि, जल, रोग की शक्ति के सम्मुख नतमस्तकता ही तो भारतीय संस्कृति में इनके साथ ही कण-कण को ईश्वर समझने को मजबूर करती आयी है। दो-चार महीनो में कोरोना ने विश्वभर में डर का माहौल बनाया है और भयभीत होने पर लोगों को ईश्वर और ज्योतिषी याद आते ही हैं, यह कोई नयी बात नहीं। हमने हमेशा कहा है कि सिर्फ विपत्ति आने पर ही भाग्य, धर्म, ज्योतिषी, ईश्वर को याद न करें, विज्ञान के साथ साथ हमेशा परंपरागत ज्ञान को भी समझते रहें, ग्रहों के प्रभाव को समझते रहें, पर लोगों को चकाचौंध ही चाहिए। चलिए, फिर भी जब जागे तब सवेरा ! 

        grahon ka prabhav in hindi

        अभी लगातार हमारे सामने लोगों के दो प्रश्न आ रहे हैं ---- पहला कि क्या आपने भविष्यवाणी की थी कि कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी विश्वभर में आतंक वाली है ? दुसरा यह कि इसका खात्मा कबतक होगा ? गत्यात्मक ज्योतिष को समझ चुके हमारे क्लाइंट्स और पाठक तो अच्छी तरह समझते हैं कि ग्रहों के प्रभाव को घटना से नहीं समझाया जा सकता, ग्रहों के हिसाब से समय किसी मामलों के लिए ऋणात्मक होता है, वह आपके सामने किसी प्रकार की घटना उपस्थित कर सकता है। जैसे किसी का खास काल घर-गृहस्थी के मामलों के लिए ऋणात्मक हो तो पति या पत्नी की मृत्यु भी हो सकती है, तलाक भी हो सकता है, दिन-रात कीच-कीच भी हो सकती है। सभी परिस्थितियाँ ऋणात्मकता को ही सिद्ध करती है, इसलिए कोरोना यानि घटना की चर्चा न करके अच्छे-बुरे समय की चर्चा करना चाहूंगी। अगर आपने हमारे रिसर्च पर, पोस्ट पर ध्यान दिया होता, तो यह सब पूछने की नौबत नहीं आती। 

        navagraha positions

        अपने यूट्यूब चैनल पर हमने 27 अक्टूबर २०१२ को मैंने jyotish ka naya research .. fully scientific ... must watch एक वीडियो पोस्ट की थी,  अधिक नहीं बस 1943 views मिले हैं इस वीडियो को, ज्योतिष को अधिक देखने की लोगों को  जरूरत भी क्या थी ? लेकिन आप इसे एक बार ध्यान से देख लीजिए, खासकर अंतिम भाग २४:४० से अंत तक , जिन्हे वीडियो देखने की फुर्सत नहीं, वे इन चित्रों से भी समझ सकते हैं। लोगों में ग्रहों के प्रभाव के प्रति जागरूकता लाने के लिए इस पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन को हमारे कई कार्यक्रम में प्रोजेक्टर के माध्यम से  दिखाया जा चूका है-----

        covid 19 astrology in hindi


        all grah
        इस चित्र के माध्यम से मैंने समझाया है कि ग्रह हमसे जितने नजदीक रहें, उतना बुरा होता है।

        all grah
        इस चित्र के माध्यम से मैंने समझाया है कि ग्रह हमसे जितने दूर  रहें, उतना अच्छा  होता है। 

        अच्छा या बुरा - पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने का समय 
        falit jyotish in hindi


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        भारत के प्रधान-मंत्री नरेंद्र मोदी जी की महत्वाकांक्षी योजना 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' में भी मैंने संक्षेप में इस वीडियो को पोस्ट किया था।

        Gatyatmak jyotish research institute

        अब मैं आपको गोचर में यानी अभी आसमान में ग्रहों की स्थिति की और लिए चलती हूँ। आपको अभी से २५ दिनों तक की सौरमंडल की फोटो दिखती हूँ, जहाँ तक के चित्र https://www.theplanetstoday.com/index.html# में उपलब्ध है, समय बढ़ने के साथ साथ आगे के चित्र भी आपको इसी वेबसाइट पर मिल जायेंगे ----

        saur mandal ki photo
        सभी चित्र में ऊपर तिथि अंकित है 

        saur mandal ki photo
        १५ मई को इसमें तीन ग्रह गुलाबी घेरे लिए हुए हैं, जो इनके वक्री होने का संकेत दे रहे हैं। 

        saur mandal ki photo
        पृथ्वी और सूर्य के ठीक निचे की और आने को प्रवृत्त हैं ग्रह 
        saur mandal ki photo
        saur mandal ki photo
        पृथ्वी और सूर्य के और निचे की और आने को प्रवृत्त हैं ग्रह

        grah kharab hone ke lakshan

        ऊपर के चित्रों में आपको सौर-तल के ऊपर कोई भी ग्रह  दिखाई नहीं दे रहे होंगे।  सूर्य और पृथ्वी के ठीक सबसे निचे अधिकांश ग्रह जून-जुलाई में रहेगी, इस समय पूरे विश्व में सर्वाधिक चिंतनीय माहौल बनेगा।  यह पोस्ट आपको डराने नहीं, सावधान करने के लिए लिखा जा रहा है। कैसे भी हो घर में रहें, जान बचेगी तो सबकुछ होगा। सरकार ने गरीबों तक तीन महीने का राशन-पैसे-गैस पहुँचाने और सबको उनके घर में रहने की हिदायत दी थी, तो उस समय मुझे ग्रह-स्थिति देखकर सरकार का उपयुक्त कदम लगा था। हमें इसका विरोध न करके जिनको सुविधा नहीं मिल पा रही थी, उसका नाम लिस्ट में जोड़ते जाने की जरूरत थी। पर जिस भी कारण से सरकार ने फैसला बदला हो, सबकुछ खोलने के लिए नए गाइड-लाइन  जारी हो रहे हों, हमें उचित नहीं लग रहा है। इसलिए अपना ध्यान रखे, घर पर रहें ! सुरक्षित रहें !!

        मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----




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          समस्या का समाधान कैसे करें ? - 9

           

          Jyotish Upay

          एक सप्‍ताह बाद अपने रिश्‍तेदारी के एक विवाह से लौटी मेरी बहन ने कल एक प्रसंग सुनाया। उस विवाह में दो बहनें अपनी एक एक बच्‍ची को लेकर आयी थी। हमउम्र लग रही उन बच्चियों में से एक बहुत चंचल और एक बिल्‍कुल शांत थी। उन्‍हें देखकर मेरी बहन ने कहा कि इन दोनो बच्चियों में से एक का जन्‍म छोटे चांद और एक का बडे चांद के आसपास हुआ लगता है। वैसे तो उनकी मांओं को हिन्‍दी पत्रक की जानकारी नहीं थी , इसलिए बताना मुश्किल ही था। 

          पर हिन्‍दी त्‍यौहारों की परंपरा ने इन तिथियों को याद रखने में अच्‍छी भूमिका निभायी है , शांत दिखने वाली बच्‍ची की मां ने बताया कि उसकी बच्‍ची दीपावली के दिन हुई है यानि ठीक अमावस्‍या यानि बिल्‍कुल क्षीण चंद्रमा के दिन ही और इस आधार पर उसने बताया कि दूसरी यानि चंचल बच्‍ची उससे डेढ महीने बडी है। इसका अर्थ यह है कि उस चंचल बच्‍ची के जन्‍म के दौरान चंद्रमा की स्थिति मजबूत रही होगी। 

          ज्‍योतिष की जानकारी न रखने वालों ने तो इतनी छोटी सी बात पर भी आजतक ध्‍यान न दिया होगा। क्‍या यह स्‍पष्‍ट अंतर पुराने जमाने के बच्‍चों में देखा जा सकता था ? कभी नहीं , आंगन के सारे बच्‍चे एक साथ उधम मचाते देखे जाते थे , कमजोर चंद्रमा के कारण बच्‍चे के मन में रहा भय भी दूसरों को खेलते कूदते देखकर समाप्‍त हो जाता था। मन में चल रही किसी बात को उसके क्रियाकलापों से नहीं समझा जा सकता था।

          jyotish ke achuk upay

          ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए शुभ मुहूर्त्‍तों में जेवर बनवाने के बाद हमने संगति की चर्चा की है। हमने कहा कि एक कमजोर ग्रह या कमजोर भाववाले व्यक्ति को मित्रता , संगति , व्यापार या विवाह वैसे लोगों से करनी चाहिए , जिनका वह ग्रह या वह भाव मजबूत हो। आज के युग में जब लोगों का संबंध गिने चुने लोगों से हो गया है , ग्रहों को समझने की अधिक आवश्‍यकता हो गयी है। प्राचीन काल में पूरे समाज से मेलजोल रखकर हम अपने गुणों और अवगुणों को अच्‍छी तरह समझने का प्रयास करते थे , हर प्रकार का समझौता करने को तैयार रहते थे। 

          पर आज अपने विचार को ही प्रमुखता देते हैं और ऐसे ही विचारो वालों से दोसती करना पसंद करते हैं। यहां तक कि विवाह करने से पहले बातचीत करके सामनेवाले के स्‍वभाव को परख लेते हें , जबकि दो विपरीत स्‍वभाव हो और दोनो ओर से समझौता करने की आदत हो , तो व्‍यक्ति में संतुलन अधिक बनता है। पर अब हमें समझौता करना नागवार गुजरता है , अपनों से सही ढंग से तालमेल बना पाने वाले लोगों से ही संबंध बनाना पसंद करते हैं। ऐसी स्थिति में अपने और सामनेवालों के एक जैसे ग्रहों के प्रभाव से उनका संकुचित मानसिकता का बनना स्‍वाभाविक है।

          jyotish upay

           jyotish samadhan in hindi

          इसके अलावे हमने ग्रहों के बुरे प्रभाव के लिए दान की चर्चा की है। हमलोग जब छोटे थे , तो हर त्‍यौहार या खास अवसरों पर नहाने के बाद दान किया करते थे। घर में जितने लोग थे , सबके नाम से सीधा निकला हुआ होता था। स्‍नान के बाद हमलोगों को उसे छूना होता था। दूसरे दिन गरीब ब्राह्मण आकर दान कए गए सारे अनाज को ले जाता था। वे लोग सचमुच गरीब होते थे। उन्‍हें कोई लालच भी नहीं होता था , जितना मिल जाता , उससे संतुष्‍ट हो जाया करते थे। 

          हालांकि गृहस्‍थ के घरों से मिले इस सीधे के बदले उन्‍हें समाज के लिए ग्रंथो का अच्‍छी तरह अध्‍ययन मनन करना ही नहीं , नए नए सत्‍य को सामने लाना था , जिसे उन्‍होने सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के बिगडने के दौरान पीढीयों पूर्व ही छोड दिया था। पर फिर भी किसी गरीब को दान देकर हम अच्‍छी प्रवृत्ति विकसित कर ही लेते थे , साथ ही बुरे वक्‍त में मन का कष्‍ट भी दूर होता ही है।

           jyotish upay in hindi

          आज हमलोग उतने सही जगह दान भी नहीं कर पाते हैं। हमारे यहां एक ब्राह्मण प्रतिदिन शाम को आरती के बाद वह थाल लेकर प्रत्‍येक दुकान में घूमा करता है , कम से कम भी तो उसकी थाली में हजार रूपए प्रतिदिन हो जाते हैं। सडक पर आते जाते मेरे सामने से वह गुजरता है , मुझसे भी चंद सिक्‍के की उम्‍मीद रखता है , पर मैं उसे नहीं देती , मेरे अपने पुरोहित जी बहुत गरीब हैं , उन्‍हे देना मेरी दृष्टि में अधिक उचित है। 

          जिस शहर में प्रतिदिन 12 से 14 घंटे काम करने के बाद एक ग्रेज्‍युएट को भी प्रतिमाह मात्र 2000 रू मिलते हों , वहां इसे शाम के दो घंटे मे 1000 रू मिल जाते हैं , उसको दिया जानेवाला दान दान नहीं हो सकता , पर आज ऐसे ही लोगों को दान मिला करता है। किसी भी क्षेत्र में पात्रता का हिसाब ही समाप्‍त हो गया है , इस कारण तो हर व्‍यक्ति ग्रहों के विशेष दुष्‍प्रभाव में है।

          Jyotish samadhan in hindi

          पर इन सब बातों को समझने के लिए यह आवश्‍यक है कि पहले हमें ग्रहों के प्रभाव को स्‍वीकार करना होगा। जिस तरह ऊपर के उदाहरण से मैने स्‍पष्‍ट किया कि चंद्रमा से बच्‍चे का मन प्रभावित होता हैं , उसी तरह बुध से किशोर का अध्‍ययन , मंगल से युवाओं का कैरियर प्रभावित होता हैं और शुक्र से कन्‍याओं का वैवाहिक जीवन। इसी प्रकार बृहस्‍पति और शनि से वृद्धों का जीवन प्रभावित होता है , इसलिए इन सारे ग्रहों की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए संबंधित जगहों पर दान करना या मदद में खडे हो जाना उचित है। इसमें किसी तरह की शंका नहीं की जा सकती , सीधे स्‍वीकार कर लेना बेहतर है। कल अन्‍य उपाय यानि  रंगों और पेड पौधों की वैज्ञानिकता पर बात की जाएगी !!

          गत्यात्मक ज्योतिष में ग्रहों के प्रभाव को दूर करने से सम्बंधित उपायों के बारे में प्रकाशित पुस्तक को पढ़ने के लिए अमेज़ॉन के किंडल में  इस लिंक पर क्लिक करें !

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