🌌 गत्यात्मक ज्योतिष विद्या क्या है? | Gatyatmak Jyotish Explained in Modern Context 🔭✨

🌌 गत्यात्मक ज्योतिष विद्या क्या है? | Gatyatmak Jyotish Explained in Modern Context 🔭✨

 (Traditional Wisdom × Dynamic Astrology × Scientific Perspective)

भूमिका

ज्योतिष विद्या केवल भविष्य बताने की कला नहीं, बल्कि मानव जीवन, स्वभाव और परिस्थितियों को समझने का एक सांकेतिक विज्ञान है। गत्यात्मक ज्योतिष इसी विज्ञान को समय, वातावरण और युग के अनुसार गतिशील रूप में समझने की आधुनिक दिशा है।

Gatyatmak Jyotish Explained in Modern Context


📚 Table of Contents 

  • ज्योतिष विद्या का ऐतिहासिक परिचय

  • सिद्धांत ज्योतिष और फलित ज्योतिष

  • ज्योतिष पर घटता विश्वास: कारण और सच्चाई

  • गत्यात्मक ज्योतिष क्या है?

  • जीवन-चक्र और ग्रहों का बदलता प्रभाव

  • Traditional Astrology vs Gatyatmak Jyotish

  • व्यावहारिक उपयोग: करियर, स्वास्थ्य, वित्त

  • Myths vs Facts

  • ज्योतिष विद्या कैसे सीखें?

  • भविष्य, रिसर्च और गत्यात्मक ज्योतिष

🕉️ ज्योतिष विद्या का ऐतिहासिक परिचय

भारत ऋषि-मुनियों, गणितज्ञों और वैज्ञानिक चिंतकों की भूमि रही है। जब आधुनिक उपकरणों का अभाव था, तब भी भारतीय मनीषियों ने ब्रह्मांड को 12 राशियों में विभाजित किया, ग्रहणों की सटीक गणना की और सौर-चंद्र वर्ष की अवधारणा विकसित की। ज्योतिष और गणित का यह संगम भारत की बौद्धिक विरासत का प्रमाण है, जिसे पाश्चात्य विद्वान भी स्वीकार करते हैं।

📐 सिद्धांत ज्योतिष और फलित ज्योतिष 

सिद्धांत ज्योतिष गणनाओं और खगोलीय नियमों पर आधारित है, जबकि फलित ज्योतिष इन ग्रह स्थितियों का मानव जीवन पर प्रभाव बताता है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा तक ज्योतिषियों की सलाह से निर्णय लेते थे, जन्मपत्री निर्माण, मुहूर्त निर्धारण और राज्यकार्य सभी में।

⚠️ ज्योतिष पर घटता विश्वास: कारण और सच्चाई 

समस्या ज्योतिष विद्या में नहीं, बल्कि उसके व्यावसायिक दुरुपयोग में है। लंबे-चौड़े, महंगे अनुष्ठान, अतिरंजित वादे और “राजा बनने” जैसी भविष्यवाणियाँ लोगों को भ्रमित करती हैं। परिणामस्वरूप, पढ़ा-लिखा वर्ग ज्योतिष से दूरी बनाने लगा।

🔄 गत्यात्मक ज्योतिष क्या है? 

गत्यात्मक ज्योतिष (Gatyatmak Jyotish) पारंपरिक नियमों को जड़ मानकर नहीं चलता। यह मानता है कि ग्रह एक राशि में स्थिर हैं, पर उनकी गति के हिसाब से उनका प्रभाव व्यक्ति, समय, समाज और वातावरण पर बदलता रहता है। एक ही योग अलग-अलग युग में अलग परिणाम देता है। यही कारण है कि यह आधुनिक जीवन के अधिक समीप और तार्किक है।

🔁 जीवन-चक्र और ग्रहों का बदलता प्रभाव

 विश्व में सेकंड से भी कम समय में एक बच्चा जन्म लेता है। सबकी एक-सी कुंडली होने पर भी सभी एक-सी ऊँचाई नहीं पाते। क्यों? 👉 परिस्थिति, शिक्षा, वातावरण और मेहनत ग्रहों के संकेत को दिशा देती है। उदाहरण:

  • प्राचीन युग में मजबूत वाहन योग = घोड़ा/हाथी

  • आज = कार, बाइक

  • असाध्य रोग योग: पहले टीबी, फिर कैंसर, आज एड्स

यही है गत्यात्मक दृष्टि से ग्रहों का अध्ययन ।

💼 व्यावहारिक उपयोग करियर

  • किसान का विद्या योग = स्नातक

  • अधिकारी का वही योग = IAS

स्वास्थ्य:

  • ग्रह रोग का प्रकार नहीं, प्रवृत्ति दिखाते हैं

वित्त:

  • ऋण योग साधारण व्यक्ति को हजारों में, व्यवसायी को करोड़ों में

❌ Myths vs Facts Myth: 

Myth: एक योग = राज योग

Fact: योग संभावनाएँ बताता है, परिणाम परिस्थितियाँ तय करती हैं। 

Myth: ज्योतिष भाग्य बदल देता है। 

Fact: यह निर्णय-मार्गदर्शन है, गारंटी नहीं। 

📖 ज्योतिष विद्या कैसे सीखें? 

  • गणित और तर्क का अध्ययन

  • सामाजिक-आर्थिक समझ

  • आधुनिक केस-स्टडी

  • गत्यात्मक ज्योतिष जैसे नए रिसर्च मॉडल

🔬 भविष्य और रिसर्च 

ज्योतिष 90% परंपरागत जाल में फंसा है। आवश्यकता है— 

✔ विश्वविद्यालय-स्तरीय रिसर्च 

✔ वैज्ञानिक प्रस्तुति 

✔ Dynamic Models

गत्यात्मक ज्योतिष इस दिशा में एक सशक्त शुरुआत है।

❓ FAQ (People Also Ask Style) 

Q1. क्या ज्योतिष विज्ञान है?

 ➡ यह पूर्ण विज्ञान नहीं, पर एक सांकेतिक विज्ञान है।

Q2. क्या गत्यात्मक ज्योतिष ज्यादा सटीक है? 

➡ हाँ, क्योंकि यह समय और वातावरण को जोड़ता है।

Q3. क्या कुंडली बदली जा सकती है? 

➡ कुंडली नहीं, पर निर्णय बदले जा सकते हैं।

Q4. क्या उपाय जरूरी हैं?

➡ हाँ, पर सही कर्म और समय-प्रबंधन अधिक प्रभावी हैं।

Q5. क्या हर योग फल देता है?

 ➡ नहीं, केवल सक्रिय और समर्थ योग।

Q6. क्या ज्योतिष करियर चुनने में मदद करता है?

 ➡ हाँ, दिशा देता है, निर्णय आपका होता है।

ज्योतिष विद्या कोई जादू नहीं, बल्कि समय, परिस्थिति और मानव स्वभाव का अध्ययन है। जब यह अध्ययन गत्यात्मक दृष्टि से किया जाता है, तब ज्योतिष भविष्य बताने की नहीं, भविष्य समझने की विद्या बन जाती है। यदि आप ज्योतिष को अंधविश्वास नहीं, बल्कि समझ का माध्यम मानते हैं, लेख को Save, Share करें और अपनी राय Comment में लिखें। 👉 यदि आप अपने जीवन की सही टाइमिंग समझना चाहते हैं, तो हमारे YouTube चैनल / परामर्श से जुड़ें।

👤 Author Bio

लेखिका : संगीता पुरी, गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञा, #100womenachiever selected by Indian Govt. in 2016, Ph - 8292466723

40+ वर्षों का गत्यात्मक ज्योतिष का अध्ययन, पारंपरिक और गत्यात्मक ज्योतिष के समन्वय में क्रियाशील । उनका उद्देश्य ज्योतिष को कर्मकांड से निकालकर तार्किक, उपयोगी और आधुनिक दृष्टि देना है। अनुभव आधारित लेखन उनकी विशेषता है।

🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Disclaimer सहित)

'गत्यात्मक ज्योतिष' विज्ञान के रूप में अनुभवजन्य और सांस्कृतिक ज्ञान प्रणाली है, जिसे मार्गदर्शन के रूप में देखना चाहिए। यह चिकित्सा का विकल्प नहीं है। गत्यात्मक ज्योतिष को Guidance Tool के रूप में समझें तो बहुत सुविधा होगी।


🌙 चन्द्रमा कमजोर होने के लक्षण | Facts About Moon in Hindi | Dynamic Astrology Secrets ✨

🌙 चन्द्रमा कमजोर होने के लक्षण | Facts About Moon in Hindi | Dynamic Astrology Secrets ✨

(गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार अमावस्या–पूर्णिमा का गूढ़ प्रभाव)

✨ भूमिका 

चंद्रमा केवल आकाशीय पिंड नहीं, बल्कि मानव मन, भावना और निर्णय क्षमता का प्रतीक माना गया है। गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा की शक्ति में परिवर्तन जीवन की घटनाओं को गहराई से प्रभावित करता है, विशेषकर अमावस्या और पूर्णिमा के आसपास।

“गत्यात्मक ज्योतिष में अमावस्या और चंद्रमा का प्रभाव”

📑 Table of Contents 

  • भूमिका: चंद्रमा और मानव मन का संबंध

  • चंद्रमा क्या दर्शाता है? (Facts About Moon in Hindi)

  • चंद्रमा कमजोर होने के लक्षण

  • अमावस्या–पूर्णिमा और गत्यात्मक ज्योतिष

  • एक वास्तविक घटना: अनुभव से उपजा विश्वास

  • गत्यात्मक ज्योतिष क्या है?

  • ग्रह विज्ञान और चंद्रमा की भूमिका

  • पारंपरिक ज्योतिष बनाम गत्यात्मक ज्योतिष (तालिका)

  • जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में चंद्र प्रभाव

  • मिथक बनाम तथ्य

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Disclaimer सहित)

  • Practical Guidance & Remedies (Non-Superstitious)

  • FAQ (People Also Ask)

  • Image SEO Suggestions

  • Internal / External Linking Ideas

  • Trust Disclaimer

  • Author Bio

🌕 चंद्रमा क्या दर्शाता है? | Facts About Moon in Hindi

ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावना, स्मृति, संवेदनशीलता, मातृत्व और मानसिक स्थिरता का कारक ग्रह माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी चंद्रमा पृथ्वी पर ज्वार-भाटा उत्पन्न करता है, जो इसके गुरुत्वीय प्रभाव को प्रमाणित करता है। यदि समुद्र का जल चंद्रमा से प्रभावित हो सकता है, तो मानव शरीर (जो 70% जल से बना है) क्यों नहीं?

⚠️ चंद्रमा कमजोर होने के लक्षण

गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा कमजोर होता है, तब निम्न लक्षण देखे जाते हैं:

  • अनावश्यक भय और चिंता

  • निर्णय लेने में भ्रम

  • मानसिक थकावट

  • नींद की समस्या

  • भावनात्मक असंतुलन

  • चल रहे रोगों का अचानक बढ़ जाना

  • पुराने तनाव का पुनः उभरना

विशेष रूप से अमावस्या से ठीक पहले और अमावस्या के दिन ये लक्षण तीव्र हो सकते हैं।

🌑 अमावस्या–पूर्णिमा और गत्यात्मक ज्योतिष

गत्यात्मक ज्योतिष कहता है कि:

  • पूर्णिमा के आसपास → चंद्रमा शक्तिशाली

  • अमावस्या के आसपास → चंद्रमा अत्यंत कमजोर

इसी कारण -

  • पूर्णिमा के समय मन अनुकूल रहता है

  • अमावस्या के समय मानसिक दबाव बढ़ता है

📖 एक वास्तविक घटना: अनुभव से उपजा विश्वास

( 2009 की घटना को यथार्थ, मानवीय और बिना अतिशयोक्ति के यहाँ समाहित किया गया है)

2009 में एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति के दौरान, जब सभी मेडिकल प्रयास अनिश्चित लग रहे थे, गत्यात्मक गणना से यह संकेत मिला कि अमावस्या के प्रभाव के कारण स्थिति स्थिर नहीं हो पा रही है। जैसे ही अमावस्या बीती और चंद्रमा की शक्ति बढ़ी, उसी समय रिपोर्ट स्पष्ट हुई, दवा का असर दिखा और स्थिति नियंत्रण में आई। ऐसी बातें हमारे सामने अक्सर आती हैं। 👉 यह आत्म-प्रशंसा नहीं, बल्कि टाइमिंग की समझ का उदाहरण है।

🔄 गत्यात्मक ज्योतिष क्या है?

गत्यात्मक ज्योतिष, पारंपरिक जन्मकुंडली से आगे बढ़कर ग्रहों की चल रही शक्ति (Dynamic Strength) को मापता है। यह पूछता है:

“जन्म के समय ग्रह किस शक्ति में थे ?”
ना कि केवल
“जन्म के समय ग्रह कहाँ थे?”

🧠 ग्रह विज्ञान और चंद्रमा

ग्रह विज्ञान के अनुसार -

  • ग्रह की गति गतिशील ऊर्जा केंद्र हैं
  • चंद्रमा सबसे तेज़ बदलने वाला ग्रह है
  • इसलिए इसका प्रभाव तत्काल और तीव्र होता है

📊 पारंपरिक ज्योतिष बनाम गत्यात्मक ज्योतिष

बिंदु

पारंपरिक

गत्यात्मक

आधार

जन्म कुंडली में स्थित ग्रह 

जन्म कुंडली में स्थित ग्रह की गत्यात्मक शक्ति 

फोकस

कुंडली में बननेवाले योग

कुंडली में बननेवाले योग की शक्ति 

टाइमिंग

सामान्य

सटीक

निर्णय सहायता

सीमित

अत्यंत उपयोगी

🧩 जीवन में चंद्र प्रभाव (Practical Applications)

  • 🩺 स्वास्थ्य - अमावस्या के आसपास रोग उभर सकते हैं, पूर्णिमा के बाद सुधार दिखता है।
  • 💼 करियर - मीटिंग, इंटरव्यू, निर्णय, चंद्र शक्ति देखकर करें।
  • 💰 वित्त - खरीदारी, निवेश,  पूर्णिमा के आसपास बेहतर परिणाम।
  • 🧘 मानसिक शांति - चंद्र मजबूत तो मन स्थिर

❌ मिथक बनाम तथ्य

मिथक: ज्योतिष अंधविश्वास है।
तथ्य: सही ज्योतिष समय-प्रबंधन का विज्ञान है। 
मिथक: अमावस्या अशुभ है।
तथ्य: यह केवल मानसिक संवेदनशीलता का समय है। 

❓ FAQs (People Also Ask)

Q1. चंद्रमा कमजोर होने से क्या होता है?
मानसिक अस्थिरता और निर्णय भ्रम।
Q2. अमावस्या के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
बड़े निर्णय टालें।
Q3. क्या यह वैज्ञानिक है?
आंशिक रूप से, टाइमिंग आधारित।
Q4. क्या सभी पर समान असर होता है?
नहीं, कुंडली अनुसार।
Q5. चंद्र दोष कैसे पहचानें?
गत्यात्मक चार्ट से।
Q6. क्या उपाय जरूरी हैं?
पहले समझ, फिर उपाय।

“चंद्रमा जब आकाश में घटता-बढ़ता है, तब केवल प्रकाश नहीं, मनुष्य का मन भी बदलता है। गत्यात्मक ज्योतिष हमें यह नहीं सिखाता कि क्या होगा, बल्कि यह सिखाता है कि कब क्या करना उचित है।👉 यदि आप अपने जीवन की सही टाइमिंग समझना चाहते हैं, तो हमारे YouTube चैनल / परामर्श से जुड़ें।

👤 Author Bio

लेखिका : संगीता पुरी, गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञा, #100womenachiever selected by Indian Govt. in 2016, Ph - 8292466723

40+ वर्षों का गत्यात्मक ज्योतिष का अध्ययन, पारंपरिक और गत्यात्मक ज्योतिष के समन्वय में क्रियाशील । उनका उद्देश्य ज्योतिष को कर्मकांड से निकालकर तार्किक, उपयोगी और आधुनिक दृष्टि देना है। अनुभव आधारित लेखन उनकी विशेषता है।

🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Disclaimer सहित)

'गत्यात्मक ज्योतिष' विज्ञान के रूप में अनुभवजन्य और सांस्कृतिक ज्ञान प्रणाली है, जिसे मार्गदर्शन के रूप में देखना चाहिए। यह चिकित्सा का विकल्प नहीं है। गत्यात्मक ज्योतिष को Guidance Tool के रूप में समझें तो बहुत सुविधा होगी।


2025 में विवाह मुहूर्त कब है ?

 Marriage dates in 2025

2025 में विवाह मुहूर्त कब है ?

Marriage dates in 2025


भारतवर्ष में हिंदू धर्म में प्रत्येक मांगलिक कार्यों में शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाता है, पर शादी के लिए तो शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है, 2025 के हिंदी पंचांग में विवाह-मुहूर्त के लिए निम्न शुभ तिथियां मिलेंगी। 

जनवरी 

16 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 तृतीया - गुरुवार 

17 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 चतुर्थी - शुक्रवार 

21 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 सप्तमी - मंगलवार 

22 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 अष्टमी  -बुधवार 

आवश्यक में 

18 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 पंचमी  -  शनिवार 

19 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 पंचमी -  रविवार 

20 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 षष्ठी  -  सोमवार 

24 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 दशमी - शुक्रवार  

26 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 द्वादशी  - रविवार

27 जनवरी - मार्गशीर्ष कृ0 त्रयोदशी  -  सोमवार

फरवरी  

13 फरवरी - फाल्गुन कृ0 प्रथमा - गुरुवार 
18 फरवरी - फाल्गुन कृ0 षष्ठी - मंगलवार  
20 फरवरी - फाल्गुन कृ0 सप्तमी - गुरुवार 
21 फरवरी - फाल्गुन कृ0 अष्टमी - शुक्रवार  
25 फरवरी - फाल्गुन कृ0 द्वादशी  -  मंगलवार 

आवश्यक में

1 फरवरी - माघ शु0 तृतीया -  शनिवार 
2 फरवरी - माघ शु0 चतुर्थी - रविवार  
3 फरवरी - माघ शु0 पंचमी  -  सोमवार  
8 फरवरी - माघ शु0 एकादशी -  शनिवार 
12 फरवरी - माघ पूर्णिमा -  बुधवार 
14 फरवरी - माघ कृ0 द्वितीया -  शुक्रवार 
15 फरवरी - माघ कृ0 तृतीया -  शनिवार  
16 फरवरी - माघ कृ0 चतुर्थी  - रविवार 
22 फरवरी - माघ कृ0 नवमी -  शनिवार 
23 फरवरी - माघ कृ0 दशमी - रविवार 
24 फरवरी - माघ कृ0  एकादशी - सोमवार 

मार्च 

आवश्यक में

1 मार्च - फाल्गुन शु0 द्वितीया - शनिवार 
2 मार्च - फाल्गुन शु0  तृतीया - शनिवार
11 मार्च - फाल्गुन शु0 द्वादशी - मंगलवार  
 

अप्रैल 

14 अप्रैल - बैशाख कृ0 प्रथमा - सोमवार 
18 अप्रैल - बैशाख  कृ0 पंचमी - शुक्रवार  
19 अप्रैल - बैशाख कृ0 षष्ठी  -  शनिवार  
21 अप्रैल - बैशाख कृ0 अष्टमी  -सोमवार 
29 अप्रैल - बैशाख शु0 द्वितीया -  मंगलवार  
30 अप्रैल - बैशाख शु0 तृतीया - बुधवार 

आवश्यक में

15 अप्रैल - बैशाख कृ0 द्वितीया - मंगलवार
16 अप्रैल - बैशाख कृ0 तृतीया - बुधवार
20 अप्रैल - बैशाख कृ0 सप्तमी - रविवार
25 अप्रैल - बैशाख कृ0 द्वादशी -  शुक्रवार 
26 अप्रैल - बैशाख कृ0 त्रयोदशी - शनिवार 

मई

5 मई - बैशाख शु0 अष्टमी - सोमवार
मई - बैशाख शु0 नवमी  -  मंगलवार  
10 मई - बैशाख शु0 त्रयोदशी  -  शनिवार 
13 मई - ज्येष्ठ कृ0 प्रथमा - मंगलवार   
17 मई - ज्येष्ठ कृ0 पंचमी- शनिवार
18 मई - ज्येष्ठ कृ0 पंचमी  - रविवार   

आवश्यक में

1 मई - बैशाख शु0  चतुर्थी - गुरुवार
7 मई - बैशाख शु0 दशमी - बुधवार 
8 मई - बैशाख शु0  एकादशी  - गुरुवार
9 मई - बैशाख शु0  द्वादशी  -  शुक्रवार 
11 मई - बैशाख शु0  चतुर्दशी -  रविवार 
15 मई - ज्येष्ठ कृ0  तृतीया -  गुरुवार 
16 मई - ज्येष्ठ कृ0  चतुर्थी -  शुक्रवार 
22 मई - ज्येष्ठ कृ0 दशमी  -  गुरुवार 
23 मई - ज्येष्ठ कृ0  एकादशी  -  शुक्रवार 
24 मई - ज्येष्ठ कृ0  द्वादशी -  शनिवार 
27  मई - ज्येष्ठ अमावस्या  - मंगलवार   
28  मई - ज्येष्ठ  शु द्वितीया  -   बुधवार

जून 

1 जून  - ज्येष्ठ शु0 षष्ठी -  रविवार
2 जून - ज्येष्ठ शु0 सप्तमी - सोमवार
जून  - ज्येष्ठ शु0  द्वादशी - शनिवार 
जून  - ज्येष्ठ शु0  द्वादशी  -  रविवार

आवश्यक में

3 जून  - ज्येष्ठ शु0 अष्टमी  - मंगलवार 
4 जून  - ज्येष्ठ शु0 नवमी  -  बुधवार 
5 जून - ज्येष्ठ शु0 दशमी - गुरुवार 

नवंबर 

22 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 द्वितीया - शनिवार 
23 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 तृतीया  - रविवार 
25 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 पंचमी  - मंगलवार 
29 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 नवमी  - शनिवार 
30 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 दशमी - रविवार 

आवश्यक में

2 नवंबर -कार्तिक शु0 एकादशी -  रविवार  
3 नवंबर -कार्तिक शु0 त्रयोदशी -  सोमवार  
4 नवंबर -कार्तिक शु0 चतुर्दशी  -  मंगलवार 
7 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0 द्वितीय -  शुक्रवार  
8 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0 तृतीया  - शनिवार 
12 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0 अष्टमी  - बुधवार 
13 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0  नवमी  -  गुरुवार 
14 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0 दशमी  -  शुक्रवार 
15 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0  एकादशी  - शनिवार 
16 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0 द्वादशी  -  रविवार 
18 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0  त्रयोदशी  -  मंगलवार 
20 नवंबर - मार्गशीर्ष अमावस्या  -  गुरुवार 
21 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 प्रथमा  - शुक्रवार  
24 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 चतुर्थी   -  सोमवार

दिसंबर 

5 दिसंबर - पौष कृ0 प्रथमा - शुक्रवार 

आवश्यक में

1 दिसंबर - मार्गशीर्ष शु0 एकादशी   -  सोमवार
4 दिसंबर - मार्गशीर्ष शु0 चतुर्दशी  - गुरुवार 

कात्यायनोक्त पद्धति के शुद्ध विवाह मुहूर्त 

30 जनवरी - माघ शु0 प्रथमा - गुरुवार
4 फरवरी - माघ शु0 षष्ठी - मंगलवार
25 फरवरी - फाल्गुन कृ0 एकादशी - मंगलवार
3 मार्च - फाल्गुन शु0 चतुर्थी - सोमवार
21 अप्रैल - बैशाख कृ0 अष्टमी - सोमवार
22 अप्रैल - बैसाख कृ0 नवमी - मंगलवार
18 मई - ज्येष्ठ कृ0 पंचमी - रविवार
25 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 पंचमी - मंगलवार
27 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 सप्तमी - गुरुवार

आवश्यक में

20 जनवरी - माघ कृ0 षष्ठी  - सोमवार 
21 जनवरी - माघ कृ0 सप्तमी  - मंगलवार  
3 फरवरी - माघ शु0 पंचमी - सोमवार 
17 फरवरी - फाल्गुन कृ0 पंचमी - सोमवार 
23 अप्रैल - बैशाख कृ0 दशमी - बुधवार 
27 अप्रैल - बैशाख अमावस्या - रविवार 
9 मई - बैशाख शु0 द्वादशी - शुक्रवार 
19 मई - ज्येष्ठ कृ0 षष्ठी - सोमवार  
20 मई - ज्येष्ठ कृ0 सप्तमी  - मंगलवार   
24  मई - ज्येष्ठ कृ0 द्वादशी - शनिवार   
25  मई - ज्येष्ठ कृ0  त्रयोदशी  -  रविवार 
6  जून - ज्येष्ठ शु0 एकादशी  - शुक्रवार 
4 नवंबर - कार्तिक शु0 चतुर्दशी - मंगलवार 
16 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0 द्वादशी - रविवार 
17 नवंबर - मार्गशीर्ष कृ0 त्रयोदशी - सोमवार 
26 नवंबर - मार्गशीर्ष शु0 षष्ठी - बुधवार 
1 दिसंबर  - मार्गशीर्ष शु0  एकादशी - सोमवार  
2 दिसंबर  - मार्गशीर्ष शु0 द्वादशी  - मंगलवार   


  

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