आज आपलोग मेरी कहानी 'थम गया तूफान' पढिए !!

hamari kahani

आज साहित्‍य शिल्‍पी में मेरी एक कहानी  'थम गया तूफान' प्रकाशित की गयी है , कृपया उसे पढकर अपनी प्रतिक्रिया देने का कष्‍ट करें !



هناك 9 تعليقات:

मनोज कुमार يقول...

जी ... बधाई।

Vinashaay sharma يقول...

संगीता जी बहुत प्रयत्न किया आपकी कहानी तो खुल नहीं पा रही,पर बधाई ।

पी.सी.गोदियाल "परचेत" يقول...

संगीता जी ,कहानी सुबह ही पढ़ ली थी, बहुत अच्छे ढंग से उतार कर एक पोजेटिव अंत आपने कहानी को दिया ,

परन्तु उसे ब्लॉग पर ,मेरा मतलब साहित्य शिल्पी पर फौंट इतने छोटे है कि आँखे दर्द करने लगी !

L.Goswami يقول...

अच्छा लगा सुखद अंत...बधाई आपको.

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) يقول...

kahani padhi bahut achchi lagi....

badhai...

Vinashaay sharma يقول...

कहानी पड़ ली संगीता जी,बहुत ही मार्मिक और सत्य के निकट वाली कहानी,आपका यह आयाम तो बहुत अच्छा लगा,आप निशचित ही कला की धनी हैं।

Murari Pareek يقول...

bahut gahri chhap chhodati aap ki kahaani kyunki isme sachchaai chhupi hai ! west bengaal me mahila sudhar grahon ki yahi dasha hai!!!

राज भाटिय़ा يقول...

आप की यह कहानी बहुत सुंदर लगी. धन्यवाद

Khushdeep Sehgal يقول...

संगीता जी,
बेहतरीन कहानी के लिए साधु साधु...नारी अगर चंडी का रूप धर ले तो मिसेज माथुर जैसियों की क्या मजाल...नारी ही नारी की दुश्मन कैसे बन जाती है...वैसे अपनी संतान को बचाने के लिए कोई भी किसी भी हद तक जा सकता है...

जय हिंद...