काश मेरी भविष्‍यवाणी सही नहीं हुई होती !!


2012 के दिसंबर में होने वाले प्रलय के भयानक रूप में प्रचार के बाद मेरे पास कुछ पाठकों के मेल आए। उन्‍हीं का जबाब देने के क्रम में और 21 दिसंबर 2012 के ग्रह स्थिति की जांच पडताल करने के क्रम में कुछ प्राकृतिक आपदाओं की तिथियों पर मेरा ध्‍यान आकृष्‍ट हुआ। संयोग था कि पूरे दिसंबर मेरे गुरू और पिताजी मेरे साथ रहे, इससे ग्रहों के स्‍वभाव को जानने में मुझे बहुत मदद मिली। प्राकृतिक आपदाओं के अध्‍ययन के इसी क्रम में मेरा ध्‍यान 13 से 16 जनवरी की भयावह स्थिति पर गया , तो मैने तुरंत एक पोस्‍ट डाल दी। इस पोस्‍ट पर पाठकों द्वारा बहुत विरोध भी दर्ज किया गया , क्‍यूंकि लोगों के दिमाग में पूर्वाग्रह है कि ग्रहों का पृथ्‍वी पर कोई प्रभाव नहीं पडता है और मैं प्रतिदिन आनेवाली भूकम्‍प की घटना को ग्रहों का प्रभाव सिद्ध करने की बेमतलब कोशिश कर रही हूं। पर इस भूकम्‍प ने मेरा साथ देकर ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव को तो साबित कर ही दिया है। 

जब से ज्‍योतिष के क्षेत्र में आयी हूं , मेरा सबसे अधिक शौक तिथि के साथ भविष्‍यवाणी करके ग्रहों के प्रभाव को साबित करना रहा है। प्रारंभ में इसकी सत्‍यता का प्रतिशत कुछ कम अवश्‍य होता था , पर क्रमश: बढते हुए आज सत्‍यता के बहुत करीब पहुंच चुका है। इस पूरी यात्रा में गलत हुई भविष्‍यवाणियों ने मुझे जितना तनाव नहीं दिया , उतनी खुशी मेरी सटीक भविष्‍यवाणियों से हुई है। पर कभी कभार पहले से ही भयावह दिखने वाली मेरी सटीक भविष्‍यवाणियां , चाहे वो व्‍यक्तिगत हो या सामूहिक , मुझे काफी कष्‍ट पहुंचा जाती है, वैसे ही दिनों के लिस्‍ट में आज का दिन भी जुड गया है। सुबह पाबला जी और समीर लाल जी के द्वारा हैती में 7 रिक्‍टर से अधिक की एक भयावह भूकम्‍प की खबर से मेरी भविष्‍यवाणी सही होने की सारी खुशी जाती रही।

200 साल के सबसे भयंकर भूकंप में कैरेबियाई देश हैती में हजारों लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। कल सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर सात मापी गई है। भूकंप में हैती का राष्ट्रपति भवन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।संयुक्त राष्ट्र के पीसकीपर का हेड क्वार्टर, नेशनल पैलेस(राष्ट्रपति भवन ), एक अस्पताल और कुछ महत्वपूर्ण बिल्डिंग इस भूकंप में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। भूकंप के बाद हैती, क्यूबा, बहामास और डोमिनिकन रिपब्लिक में सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई। आनेवाले दो तीन दिनों में पीडितों को किसी प्रकार की राहत भी मिलती नहीं दिखाई दे रही। 

इस प्रकार के तनाव में अक्‍सर मैं सोंचा करती हूं कि ग्रहों के प्रभाव के इतने दिनों के अध्‍ययन के बाद भी जब होनी को दूर नहीं किया जा सकता , तो हमारा अध्‍ययन व्‍यर्थ है । क्‍यूंकि 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' मानता है कि ग्रहों के प्रभाव को समझकर आप अपने कार्यक्रम बना सकते हैं , पर उसे रोक नहीं सकते। पर प्रकृति के रहस्‍य की जानकारी से हमें कोई फायदा नहीं हो सकता , इसे वह स्‍वीकार नहीं करता। हमारे जीवन में ऐसा भी नहीं होता कि हम जिस विधि से किसी समस्‍या को समझते हैं , उसी विधि से उसका निराकरण हो । निराकरण के लिए अन्‍य विधि का भी सहारा लिया जा सकता है। पर इसके लिए दुनिया के अधिक से अधिक लोगों को हमारे रिसर्च को समझने की आवश्‍यकता है। मैं उसी दिन के इंतजार में हूं , जब इस दुनिया के अधिकांश लोगों को प्रकृति के इस अनूठे नियम की जानकारी हो जाएगी , हमारे रिसर्च से लोगों के दुख दूर करने में सहायता मिलेगी। जब हमारा लक्ष्‍य इतना बडा हो , तो मात्र भविष्‍यवाणी सही होने की छोटी मोटी खुशी से मैं खुश कैसे हो सकती हूं। अभी तो अपनी कमजोर स्थिति को देखते हुए बस ईश्‍वर से प्रार्थना ही कर सकती हूं कि वे भूकम्‍प पीडितों की रक्षा करें !!
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51 comments

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1/13/2010 08:20:00 pm ×

संगीता जी, हिन्दी ब्लॉगिंग में किसी की निष्ठा से यदि वाकई प्रभावित हुआ हूँ तो वह आप हैं। लेकिन जाने क्यों आप को झुठलाने को मन करता है।
भविष्य की बातें वर्तमान में पता चल जाँय, इसमें आप को कुछ बहुत प्रकृति विरुद्ध और काल विरुद्ध सा नहीं लगता?
आप की भविष्यवाणी का सही होना तुक्का भी तो हो सकता है।
यहाँ देश हजारों वर्षों तक दुर्गति भोगता रहा और कई मायनों में आज भी ऐसा ही है - क्या ज्योतिष के पास इसका कोई उत्तर/समाधान है? वे कौन से पुण्य कर्म हैं जिनके कारण यूरोप, अमेरिका आदि देश सम्पन्न और कहीं अत्युत्तम जीवन क्वॉलिटी से नवाजे गए हैं?
यूरोप ने शोषण के बल पर अपने को सँवारा। दो दो विश्वयुद्धों को झेला, फिर भी आज कितना आगे है!
भारत या समूचे दक्षिण एशिया की ऐसी दुर्गति क्यों है? इस बारे में गत्यात्मक ज्योतिष क्या कहता है?
बहुत से सवाल मन में आते हैं। आप का यह ज्योतिष और इसके मानने वाले सचमुच बड़ी सोच में डाल देते हैं।
क्या करें?

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1/13/2010 08:27:00 pm ×

संगीता जी, आप की भविष्याबाणी सच हुयी, मै मान गया,अब इसे खुशी की बात तो नही कह सकता, लेकिन आप पर विशवास बढ गया,
धन्यवाद

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1/13/2010 08:34:00 pm ×

आप की भविष्यवाणी का सही होना तुक्का भी तो हो सकता है।
गिरिजेश राव जी .. आप पाठकों की ऐसी बातें सुनने के लिए मैं तैयार रहती हूं .. जो ज्‍योतिष की ए बी सी डी की जानकारी के बिना ही पी एच डी स्‍तर के ज्ञान की तलाश में रहते हें .. तिथि के साथ भूकम्‍प की सूचना के बावजूद इसे तुक्‍का कहने में आपको थोडी भी हिचकिचाहट नहीं हुई .. आप मेरे ब्‍लॉग के नियमित पाठक होते तो शायद ऐसा नहीं कहते .. क्‍यूंकि यह मेरी पहली भविष्‍यवाणी नहीं है .. आप सब ज्‍योतिष विरोधी मिलकर 'भविष्‍यवाणियों का तुक्‍का' नाम का एक ब्‍लॉग चलाएं .. और प्रतिदिन मौसम , राजनीति से लेकर भूकम्‍प तक की तिथियुक्‍त भविष्‍यवाणी करें .. मैं भी तो थोडी सीख लूं .. जब यूं ही काम बन जाए तो इतना अध्‍ययन करने की क्‍या आवश्‍यकता ??

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1/13/2010 08:53:00 pm ×

मेरा तो ज्योतिष में दृढ़ विश्वास है, जो लोग नहीं मानते हैं वे कुछ जानते नहीं।

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1/13/2010 08:53:00 pm ×

मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामना . भगवान सूर्य की पहली किरण आपके जीवन में उमंग और नई उर्जा प्रदान करे

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1/13/2010 09:01:00 pm ×

बाप रे! आप तो एक शब्द पर ही नाराज हो गईं। 'तुक्का' की जगह 'संयोग' लिखना था। शायद आप इतनी नाराज नहीं होतीं। आप को कष्ट पहुँचा इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ।

ज्योतिष की ए.बी.सी.डी. और पी.एच.डी. की तो बात ही नहीं है। आप के लेख पढ़ता अवश्य हूँ लेकिन नियमित नहीं हूँ, इसे स्वीकारता हूँ।
मेरे प्रश्नों को सहज रूप में लें जो कि एक निष्ठावान अध्येता से हैं। अभी भी अनुत्तरित हैं। बहुत बार प्रश्न विधा के क्षेत्र में नहीं आते तब भी पूछने वाले पूछ बैठते हैं। यदि वाकई ये प्रश्न गत्यात्मक ज्योतिष की परिधि से बाहर हैं तो बता दीजिए।
यदि उसकी परिधि में हैं तो बताइए कि क्या कारण हो सकते हैं जो अरबों की जनसंख्या और इतना बड़ा और रिच भूभाग इस दशा में है?

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1/13/2010 09:02:00 pm ×

संगीता जी, मैंने आपकी भविष्यवाणी वाली पोस्ट भी पढ़ी थी , और आज की भी।
सच तो यह है की मैं भी इंतज़ार में था की देखें क्या होता है।
लेकिन इसमें कोई शक नहीं की आपकी भविष्यवाणी सही निकली।
हालाँकि ये बड़ा दुखद समाचार है, और आपको मुबारकवाद भी नहीं दे सकते।
अब तो यही कह सकते हैं की ज्योतिष इससे बचने का उपाय भी खोज निकाले तो सही मायने में सार्थक कहलायेगा।

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1/13/2010 09:09:00 pm ×

संगीता जी,
ये आपदाएं तो आनी हीं थी.... लेकिन आपकी भविष्यवाणी को सुनकर उनके असर से बचा जा सकता है....ठीक वैसे ही जैसे कड़ी धूप में छतरी लगा कर छाया की जा सकती है....
विश्वास तो मुझे हमेशा ही आपकी बातों पर रहा है...आज उस विश्वास में और बढ़ोत्तरी हुई है...ऐसे ही कल्याण किया करें...

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1/13/2010 09:14:00 pm ×

आप जो करती है वह प्रशंसनिय है , अच्छे कामों में अक्सर रुकावटें आती है ।

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1/13/2010 09:18:00 pm ×

गिरिजेश राव जी,
मेरे ब्‍लॉग में मानव मस्तिष्‍क में उठने वाले बहुत सारे प्रश्‍नों के उत्‍तर दिए गए हैं .. सारे को पढने के बाद ही उससे आगे बढा जा सकता है .. आपके अन्‍य प्रश्‍नों के जबाब भी धीरे धीरे मिलते चले जाएंगे .. ज्‍योतिष तो बहुत छोटी चीज है .. आपके प्रश्‍न आध्‍यात्‍म के अंदर आते हैं .. आध्‍यात्‍म के ज्ञान की सीमा नहीं .. इतना आसानी से कैसे समझ पाएंगे आप ??

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1/13/2010 09:23:00 pm ×

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आदरणीय संगीता जी,
आपकी यह पोस्ट अभी अभी देखी, आज के दिन यह बहुत जरूरी है कि आपकी भविष्यवाणी और उसके परिणाम को एक सही नजरिये से देखा जाये, अत: आपकी पिछली पोस्ट पर की गई टिप्पणी को फिर से एक बार यहां पर दोहरा रहा हूँ।


यह रही टिप्पणी
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आदरणीय संगीता जी,

मैं किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर आपके गत्यात्मक ज्योतिष को आंकने का क्षुद्र प्रयास मात्र कर रहा हूँ।

हैती की capital, Port-au-Prince के दक्षिण में 12/1/2010 21:53 UTC (Coordinated Universal Time) (जो कि Greenwich Mean Time (GMT) के बराबर ही होता है) में 7.0 तीव्रता का भूकम्प आया है, भारतीय समय के अनुसार यह भूकम्प 13/1/2010 को सुबह 03.23 IST पर आया।
भुकंप के स्थान का अक्षांश मान 18.45 व देशान्तर मान (-)72.45 (ऋण 72.45 डिग्री) है।

यह रही हैती के इस भुकंप के बारे में उपलब्ध जानकारी।


हैती के भूकंप के बारे में बीबीसी की खबर
भी यहां है।

अब आपने पूछा है...
पर आज 13 जनवरी को हैटी में 7.2 रिक्‍टर वाली एक बडी भूकम्‍प आ गयी .. जान माल की
भारी क्षति हुई है .. इसे क्‍या कहेंगे आप .. मात्र संयोग या ग्रहों का
प्रभाव ??


भूकंप के समय और तारीख के बारे में आप काफी कुछ सही रहीं पर स्थान के बारे में आपका अनुमान (180-72)= 108 डिग्री हटकर रहा।

न तो मैं इसे मात्र संयोग कहूंगा, न ही ग्रहों का
प्रभाव... कुछ भी कहने से पहले मैं आपकी इस तरह की कुछ और भविष्यवाणियों व उनके परिणाम (सही या गलत होने) का इंतजार करना अधिक उचित समझूंगा।

आभार!

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1/13/2010 09:30:00 pm ×

धन्यवाद।
आप के उत्तर से गत्यात्मक ज्योतिष और मेरी - दोनों की सीमाओं का रेखांकन हो गया।
मुझे ज्योतिष से दूर ही रहना चाहिए। आध्यात्म तो वाकई गूढ़ विषय है।
आभार।

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1/13/2010 09:48:00 pm ×

ऐसी गणनाओं और भविष्यवाणियों के बाद आप किस मानसिक अवस्था से गुजरती होंगी, समझा जा सकता है.

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1/13/2010 09:55:00 pm ×

गिरिजेश राव जी,
आपको ज्‍योतिष से दूर रहना चाहिए .. ये मैने कब कहा .. मैने तो अपने गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के लेखों को पढने की सलाह ही दी है .. ताकि आध्‍यात्‍म को समझ सकें .. बिना ज्‍योतिष के ज्ञान के आध्‍यात्‍म के नाम पर भयभीत हुआ जा सकता है .. पर उसकी समझ नहीं पायी जा सकती !!

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1/13/2010 09:55:00 pm ×

ज्योतिष में विशवास है। आपके विश्लेषण और भविष्यवाणी में भी।

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1/13/2010 10:02:00 pm ×

प्रवीण शाह जी ,
यह पहला मौका नहीं है जब आपने मेरी भविष्‍यवाणी को सही होते पाया है .. आपने मेरी क्रिकेट की हर दिन की भविष्‍यवाणी पढी हैं .. और उसपर गौर करके देखा है .. इसके बाद भी और इंतजार करना चाहते हैं .. तो मुझे क्‍या आपत्ति हो सकती है ??

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1/13/2010 10:45:00 pm ×

प्रवीण शाह जी,
आप आराम से मेरी अगली भविष्‍यवाणियों का इंतजार करें .. वास्‍तव में हमारे अध्‍ययन के अनुसार भूकम्‍प के तिथि की सूचना जितनी पक्‍की होगी .. उतनी समय और स्‍थान की नहीं भी हो सकती है .. इसे मैने अपने पिछले आलेख में भी स्‍वीकारा है .. क्‍यूंकि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्‍वी एक विंदू मात्र होती है .. और गणित ज्‍योतिष का काफी सूक्ष्‍म डाटा हमारे पास नहीं होता .. यदि गणित ज्‍योतिष के कोई विद्वान हमारी मदद करें तो भविष्‍यवाणी के स्‍तर में और बढोत्‍तरी लायी जा सकती है !!

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1/13/2010 10:46:00 pm ×

मैं तो ज्योतिष पर बिल्कुल विश्वास नहीं करता, लेकिन किसी सर्वव्यापी ईश्वर पर जरूर कुछ हद तक विश्वास करता हूँ कि उसके चलाये ही यह संसार रच बस रहा है, बन बिगड रहा है....अब वह सर्वोच्च सत्ता मानव जनित कर्म के रूप मैं है या दैवीय या फिर इन दोनों का ही मिश्रण..... नहीं पता।

बस विश्वास है, तभी मंदिर में विभिन्न आकार प्रकार में तराश कर रखे प्रस्तरों में भी ईश्वर को जान नमन कर लेता हूँ.....लेकिन किसी भी ज्योतिष वगैरह पर विश्वास नहीं कर पाता।

शायद अर्ध-कम्यून हूँ मैं।

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1/13/2010 11:23:00 pm ×

हालांकि हम ज्योतिष पर विश्वास नहीं करते पर इस बात को थोडा बहुत स्वीकारते हैं कि प्रथ्वी पर ग्रहों नक्षत्रों का प्रभाव पड़ता है.
बचपने से पाठ्य पुस्तकों में एक बात पड़ने को मिली कि समुद्र में आते ज्वार भाटे चाँद सूरज पृथ्वी की स्थिति से आते हैं..................बस यही बहुत है कहने को.

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1/14/2010 01:33:00 am ×

संगीता जी मैं भूविज्ञान का विद्यार्थी रहा हूं और भूकंप जैसे विषय आज भी जटील ही हैं।इस पर तमाम शोध और अध्ययन के बाद भी बहुत कुछ अंधेरे मे ही है।इसके बावजूद आपकी भविष्यवाणी का खरा उतरना आपके ज्ञान को प्रमाणित करता है और जंहा तक़ मेरा सवाल है मैं आपका पहले से प्रशंसक हूं।मुझे भी लगता है कि अपने जीवन की अनिश्चतता के बारे मे आपसे सलाह लेनी ही पड़ेगी।

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1/14/2010 07:44:00 am ×

यह सचमुच त्रासद विडम्‍बना ही है कि अपनी भविष्‍यवाणी के सच होने पर मन दुखी हो।

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1/14/2010 07:55:00 am ×

ज्योतिष पर विश्वास है मुझे . यह एक सांइस है .लेकिन भारतीय विधा होने के कारण कई पढे लिखे स्वीकार नही करते . अगर विदेशी कोई यह सब कहता तो उसकी प्रंशसा होती . जैसे योग जब से योगा बना तब से स्वीकार्य हो रहा है

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1/14/2010 08:19:00 am ×

आध्यात्म आंतरिक यात्रा के द्वारा स्व के विस्तार और समूची सृष्टि से एकाकार हो अंतत: स्व के विलयन की बात है जो वाकई हम जैसों के लिए गूढ़ है। प्रकाश की अतिशयता और अन्धकार की अतिशयता में अंतर नहीं होता - दोनों स्थितियों में स्व अर्थहीन हो जाता है। ..यही कारण है कि कथित आध्यात्म की बस बातें करते घोर तामसी व्यक्ति जनता को बहलाने और उसका शोषण करने में सफल हो जाते हैं।
..आप ने जब आध्यात्म की बात की तो मुझे यही लगा कि कोई तो बात है जो आप बहुत स्पष्ट से प्रश्नों को टाल रही हैं। आप सीधे भी कह सकती थीं कि इनके उत्तर गत्यात्मक ज्योतिष के पास नहीं हैं या अभी वह बहुत infancy में है।
मेरे लिए आँखों के सामने खड़े प्रश्न और उनके समाधान अधिक महत्त्वपूर्ण हैं न कि भविष्यवाणियाँ और उनका सही/गलत होना। भूत अधिक महत्त्वपूर्ण है ताकि उसका विश्लेषण कर वर्तमान और भविष्य सँवारा जा सके।
सामान्य व्यक्ति के पास इस प्रश्न का उत्तर नहीं है कि भूकम्प को आना ही क्यों चाहिए? इस पर क्या उत्तर आएगा आध्यात्म या ज्योतिष से? फिर कोई घुमाने वाली बात। उससे क्या लाभ?
यह आध्यात्म की या यूँ कहें कि ज्योतिष की सीमा है।
आध्यात्म से भय जैसी कोई बात नहीं है। हाँ, इतना अवश्य है कि ऐसे आध्यात्म ने इस देश का बहुत नुकसान किया है और कर रहा है।
__________________________
लेकिन आप की निष्ठा नमनीय है। इसीलिए मैं ही नहीं ब्लॉग जगत में बहुत लोग आप से प्रेरणा लेते हैं। आप के समर्पण का मैं प्रशंसक हूँ, कोई भी विद्या व्यसनी होगा।
इस तरह के प्रयास भी चलते रहने चाहिए। 'साइड इफेक्ट' के तौर पर बहुत सी नई जानकारियाँ उद्घाटित होती हैं।

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1/14/2010 08:23:00 am ×

आप सही हुई लेकिन यह दुखद धटना न घटी होती तो वाकई ज्यादा खुशी होती.

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1/14/2010 10:07:00 am ×

भविष्‍यवाणी के सच होने पर मैं भी दिल से दुखी हूं। वैसे आप और आप के ज्ञान पर मेरा पूरा विश्‍वास है।

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1/14/2010 10:25:00 am ×

आदरणीय संगीता जी, अब आप मेरे शब्दों को भले ही जिस रूप में लें , लेकिन यह कहूंगा की यदि ज्योतिष शास्त्र किसी आपदा की भविष्य बानी के साथ उसके घटने के स्थान के बारे में जानकारी दे पाने में असमर्थ है तो मैं तो भगवान् से यह प्रार्थना करूंगा कि आइन्दा आपकी इस तरह की कोई भी भविष्य बाणी सही न निकले ! :)

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1/14/2010 10:37:00 am ×

गोदियाल जी .. आपकी बातों का मैं कोई दूसरा अर्थ नहीं लगा रही .. पर मेरी भविष्‍यवाणी के कारण यह भूकम्‍प आया .. ऐसी बात नहीं है .. भूकम्‍प को आना था .. ग्रहों की चाल से मैने उसे पहले समझ लिया .. हो सकता है कि कुछ दिनों के अध्‍ययन के बाद स्‍थान का भी मुझे संकेत मिल जाए .. एक ही दिन में किसी विज्ञान का विकास नहीं हो जाता .. युगों युगों तक सकारात्‍मक रूप से लाखों करोडों लोगों को मदद करनी पडती है इसमें .. पहले इसमें विश्‍वास तो करना होगा .. उसके बाद ही तो दुनिया को आपत्ति से बचाया जा सकता है .. एक व्‍यक्ति से कितनी अपेक्षा कर सकते हैं आपलोग ??

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Unknown
admin
1/14/2010 10:57:00 am ×

संगीता जी

मुझे लगता है इस अर्जित ज्ञान को यदि आप अपने सॉफ्टवेर में समा कर उसे ओपन सौर्स रिलीज़ करें तो आप अपने लक्ष्य को जल्द प्राप्त कर सकेंगी

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vandan gupta
admin
1/14/2010 12:09:00 pm ×

sangeeta ji

aapki bhavishyavani sach hoti ja rahi hain aur aapke dukh ko bhi main sakajh sakti hun kyunki is baat ka to hum sabhi ko bahut dukh hai aur jise pata ho uske dukh ka to kahna hi kya kyunki jo janta hai use lagta hai ki pahle se upay kiye jate to aisa nhi hota ya kam scale par nuksaan hota.

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1/14/2010 12:21:00 pm ×

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामना

जैसे ही भूकंप की जानकारी हुई आपकी याद तजा हो गयी ..आपने सच कहा था अफसोश है जो चले गए

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1/14/2010 01:38:00 pm ×

गिरिजेश जी त्राहिमाम कर गए, बधाई ! बड़े बनते हैं गत्यात्मक ज्योतिष पर प्रश्न चिह्न लगाने वाले .....देख नहीं रहे हैं सारी जनता मंत्रमुग्ध हो जयकारा लगा रही है ....
अब इधर का रुख नहीं करेगें .....बड़े आये थी .....

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1/14/2010 01:43:00 pm ×

दूसरों की बात क्‍या करनी .. आप अपनी कहिए अरविंद मिश्रा जी .. सुमो जी ने भी आपसे प्रश्‍न पूछा है .. इस लिंक पर

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1/14/2010 02:13:00 pm ×

Vसंगीता जी प्रणाम मै तो हमेशा से ही ज्योतिष पर विस्वाश करता हूँ . इस घटना ने तो ये विस्वाश और गाढ़ कर दिया है
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084
Rrgards

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1/14/2010 02:38:00 pm ×

भविष्य देखना भी जी का जंजाल है। यदि सबकुछ पूर्व निर्धारित और अपरिहार्य ही है तो उसके बारे में पहले से जानकर हम अपना मस्तिष्क कुछ पहले से ही दुखी कर ले रहे हैं।

यह ज्ञान हमारे लिए कितना लाभकर है इसपर भी प्रकाश डाला जाय।

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1/14/2010 02:42:00 pm ×

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी .. क्‍या भवितब्‍यता टाली जा सकती है .. इसकी दस कडियां लिख चुकी हूं .. इसमें इस बात पर प्रकाश डाला जा चुका है!!

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बवाल
admin
1/14/2010 03:30:00 pm ×

आदरणीय संगीता जी,
हम भी आपके साथ मिलकर इतना ही कह सकते हैं कि काश आपकी भविष्यवाणी सही नहीं हुई होती।

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Unknown
admin
1/14/2010 05:30:00 pm ×

संगीता जी,

बस एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि आपकी भविष्यवाणी से क्या लाभ हुआ?

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1/14/2010 05:46:00 pm ×

जी के अवधिया जी .. आप इस प्रकार के प्रश्‍न कर मुझे और व्‍यथित करने की कोशिश कर रहे हैं अब कोई मरीज डॉक्‍टर पर विश्‍वास ही न करे .. तो डॉक्‍टर क्‍या कर सकता है .. वैज्ञानिक यदि हमारी मदद लें तो अवश्‍य मेरे अनुुभव का फायदा दुनिया को मिल सकता है !!

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1/14/2010 05:57:00 pm ×

संगीता जी ,
हेती की घटना का समाचार सुनकर अत्यंत दुःख हुआ ।
ज्योतिष शास्त्र भविष्य की गर्त मैं झाकने की एक विधा है । भविष्य आने वाली परेशानियों और प्राकृतिक आपदा को रोका तो नहीं जा सकता है हाँ पर इनसे बचाव हेतु समय पूर्व आवश्यक कदम और सुरक्षात्मक उपाय तो किये जा सकते हैं जिससे जनहानि और धनहानि को कम तो किया जा सकता है ।
ज्योतिष विज्ञानं के माध्यम से सटीक और सही जानकारी प्राप्त कर उसका समाज हित और जनहित मैं प्रयोग हो यही कामना है ।

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Unknown
admin
1/14/2010 06:01:00 pm ×

संगीता जी,

यदि आप समझती हैं कि मैं आपको व्यथित करने की कोशिश कर रहा हूँ तो आप बिल्कुल गलत समझ रही हैं, न तो मेरी कोई ऐसी मंशा थी, न है और न ही रहेगी। आपको व्यथित करके भला मेरा क्या लाभ होगा?

मैं तो सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि ज्ञान है तो उसका लाभ भी मिलना चाहिये। ऐसे ज्ञान का क्या फायदा जिससे लाभ तो मिले ही नहीं उलटे तनाव मिले?

मैं तो सीधे प्रश्न का सीधा सा उत्तर चाहता हूँ। सीधा सा प्रश्न था मेरा जिसका किसी डॉक्टर और मरीज से किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं था।

अभी तक तो विज्ञान ज्योतिष को मानता नहीं है तो वैज्ञानिक आपसे क्यों मदद लेने आयेंगे? हाँ यदि आप ज्योतिष की एक सशक्त पहचान बना दें तो आपसे मदद माँगने वाले स्वयं ही आ जायेंगे।

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1/14/2010 06:07:00 pm ×

आप मेरी भावनाओं को नहीं समझ पा रहे हैं .. सब कुछ जानते हुए कितनी अकेली पड जाती हूं मैं .. यही बात आपको समझाना चाह रही थी .. डेढ वर्ष हो गए ब्‍लॉग जगत में ही .. ज्‍योतिष को पहचान दिलाने के लिए कितनी बार हर तरह की तिथियुक्‍त भविष्‍यवाणियां की हैं .. पर न तो मेरी वाहवाही करने से दुनिया का भला हो सकता है .. और न मेरी शिकायत करने से ही .. भला तो मात्र 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को पहचान दिलाने से हो सकता है .. जो लाख कोशिश के बाद भी नहीं बन पा रहा है !!

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Unknown
admin
1/14/2010 06:35:00 pm ×

संगीताजी, आपकी कहन में दम हे और अगर आपके पास इसका ज्ञान हे तो बहुत अच्छा,आप इसी तरह लेख लिखे ,और समाज को अवगत कराते रहें,जिसको आपकी लेखनी में जरा भी विश्वाश होगा वो आपको जरुर पढेगा ,इसके लिए आप परेशान न हों,क्यूँकी जिनको विरोध करना या आपको गलत बताना हें तो बताना हें इस में कोइ कुछ नहीं कर सकता. आप बस इतना करे अगर ठीक लगे तो के अपनी बात स्पस्ट न लिख केर थोड़ा गुमा केर लिख दे तो शायद समझदार , समझ जाएगा और किसी को कहने को समय लगेगा. में आपके लेख रोर पढता हूँ क्यूँकी मेरी ईमेल पर आ जाते हें.इसी तरह जो भी पढेगा वो देखेगा . अगर कुछ गलत लगा हो तो उस के लिए आप मुझे माफ़ कर दे,. में आपका आभारी हूँ आप अच्छा लिखती हे इसलिए. धन्यवाद .

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1/14/2010 06:41:00 pm ×

काश ऐसी भविष्यवाणियां सही न हों. लेकिन.

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Rajat Yadav
admin
1/14/2010 07:08:00 pm ×

संगीता जी नमस्कार, आपको मकर संक्रांति की शुभकामनाएं.
मेरी ज्योतिष में गहरी आस्था है, हालाँकि मैं आपके ब्लॉग का नियमित पाठक तो नहीं पर बहुधा पढ़ता ही हूँ.
आप यदि किसी को (ज्योतिष-विज्ञान-है) समझाना चाहती हैं तो कृपया ऐसे लोगों के लिए दूसरा ब्लॉग बना लें या उनसे हाथ जोड़ कर जय श्री राम कर लें.
जब भी कोई आपके ज्ञान पर या ज्योतिष पर अंगुली उठाता है तो मन टीस से भर जाता है.
हालाँकि हर चैनल पर बैठे ज्योतिषी भी पूर्ण दृढ़ता से विरोधी बातें कहते पाए जाते हैं. यह भी दुखद है.
मैं आपसे पूर्णतया सहमत हूँ कि कुछ लोग ABCD भी नहीं जानते और....
मैं भी नहीं जानता हूँ पर जितना भी जाना है सत्य ही पाया है.
धन्य है ज्योतिष और इस विज्ञान के दृष्टा.

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Rajat Yadav
admin
1/14/2010 07:18:00 pm ×

[ पर न तो मेरी वाहवाही करने से दुनिया का भला हो सकता है .. और न मेरी शिकायत करने से ही .. भला तो मात्र 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को पहचान दिलाने से हो सकता है .. जो लाख कोशिश के बाद भी नहीं बन पा रहा है !! ]
इस वाक्यों का क्या अर्थ है !!
संगीता जी, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ ?
मेरा मतलब है कि एक हिन्दू या भारतीय या ज्योतिष-प्रेमी या आपका प्रशंसक होने के नाते आपके लिए (ज्योतिष के लिए) हम पाठक-गणों को क्या करनाचाहिए.

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Rajat Yadav
admin
1/14/2010 07:22:00 pm ×

किसी का भी आपको या ज्योतिष को दोष देना अनुचित है.
यह तो ग्रहों की स्थिति के कारण से ऐसा हुआ.
अतः, आपका या किसी का ऐसा सोचना कि काश यह भविष्यवाणी सच नहीं हुई होती, ठीक नहीं है.
प्रत्येक भविष्यवाणी सत्य होनी ही चाहिए इससे ही ज्योतिषी और ज्योतिष का सम्मान बढेगा.
पुनः आपको आपकी भविष्यवाणी के लिए नमन करता हूँ.

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Unknown
admin
1/14/2010 08:42:00 pm ×

धीरू सिहं जी और अविनाश जी ने जो कहा,उन दोनो टिप्पणीयों को मिला दिया जाये,वह में कहना चाहता था ।

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1/14/2010 11:39:00 pm ×

आपकी भविष्यवाणी और मनोव्यथा दोनों ही से मेरा सरोकार है. सटीक भविष्यवाणी हेतु आप साधुवाद की पात्र हैं. कोइ चिकित्सक रोगी के भयानक रोग को पहचान ले तो उसे सफल ही माना जाता है.

भविष्यवाणी सटीक हो तो अनुमान करता के ज्ञान और विशी दोनों पर शंका नहीं की जानी चाहिए. भारतीय दर्शन 'विश्वासम फलदायकम' में विश्वास करता है, 'श्रद्धावान लभते ज्ञानं' भी यही सन्देश देता है. पश्चिन का दर्शन संदेहवाद से प्रारंभ होता है...देकार्त कहता है प्रश्न करो...

आप की विधि पे भरोसा न करनेवाले संदेहवाद के विद्यार्थी हैं. मैं विश्वास को जीता हूँ.

अब दूअसरे पहलू की बात...मेरे गुरु प्रो. विनय कुमार श्रीवास्तव भूगर्भविद हैं... वे गत कई सालों से भूकम्पों के स्थल का अनुमान लगा परे हैं पर तिथि नहीं बता पाते... भूगर्भ शास्त्री और ज्यतिशी एक साथ अध्ययन करें तो शायद अधिक सटीक पूर्वानुमान हो सके.

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1/15/2010 06:46:00 am ×

आपने लिखा कि काश मेरी भविष्‍यवाणी सही नहीं हुई होती...लेकिन जो तय है उसे कौन टाल सकता है। होनी तो होकर ही रहेगी...कुछ ऐसे परिणामों के लिए मनुष्‍य भी जिम्‍मेदार है जिसने पूरी प्रकृति के साथ खिलावड़ किया है और कर रहे हैं। वैसे भी जो बना है उसका विनाश भी तय है। हम इस विनाश पर आंसू भरी श्रंद्धाजलि के अलावा कुछ नहीं दे सकते।

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1/15/2010 11:20:00 am ×

निश्चय ही अप की ज्योतिषीय गड्नाएं सटीक हैं....

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1/15/2010 11:21:00 am ×

निश्चय ही अप की ज्योतिषीय गड्नाएं सटीक हैं....

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