टेलीविजन के माध्‍यम

how to stop superstition in hindi


कई दिन पूर्व एक खास कार्यक्रम के लिए दूसरे शहर में जाना हुआ , पर जाने के बाद ही कार्यक्रम के रद्द होने की सूचना मिली। वैसे सामान्‍य तौर पर टी वी देखने की मेरी आदत नहीं, कितने दिन पहले मैं टी वी के सामने बैठी होऊंगी , वो भी मुझे याद नहीं , पर वहां मुझे टी वी देखकर ही दिनभर का समय काटना पडा। टी वी के इतने सारे चैनल , दिन भर बदलती रही , पर शायद ही आधे घंटे कहीं मन लग सका हो । पर दिनभर में ये तो पता चल गया कि आज टी वी चैनल किस कदर अंधविश्‍वास परोस रहे हैं। मेरी समझ में आ गया कि शायद यही वजह है कि आज आम आदमी धर्म और ज्‍योतिष के नाम से चिढ जाता है।

how to stop superstition in hindi

एक से एक जंत्र और मंत्र , आम जन के कल्‍याण के लिए बने हुए हैं , इतना ही नहीं , सारे सब्सिडी मूल्‍य के साथ उपलब्‍ध भी हैं , और इसके प्रचार के लिए एक से बढकर एक स्‍टार तक लगे हुए हैं। इनका उपयोग करने से आपके यहां सरस्‍वती और लक्ष्‍मी दोनो की कृपा शुरू हो जाएगी  , यदि आप प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं , तो निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी , नौकरी कर रहें हो , तो प्रोमोशन निश्चित और व्‍यवसाय कर रहे हों तो इसमें भी बडी सफलता। इन यंत्रों का उपयोग करके एक भी व्‍यक्ति हानि में नहीं रह सकता , जितने पहन लें , सबको लाभ ही लाभ। छोटी छोटी संस्‍था को इतनी मेहनत करनी पड रही है , फिर भी लक्ष्‍य को नहीं प्राप्‍त कर पा रहें हैं। इसकी जिम्‍मेदारी को सरकार ले ले और एक एक व्‍यक्ति तक इस यंत्र को पहुंचा दे , तो भारत को तरक्‍की में देर नहीं हो , पूरे विश्‍व में भारत का राज होगा।


प्रकृति ने अंधकार के साथ प्रकाश बनाया , मीठा के साथ कडवा , फूल के साथ कांटे और दोस्‍ती के साथ दुश्‍मनी। इनमें से एक को भी समाप्‍त कर दिया जाए , तो दूसरे का कोई महत्‍व नहीं रह जाएगा। भले ही हम अपनी सोंच से ऋणात्‍मक पहलुओं को अलग कर दें , पर जबतक दुनिया है , वास्‍तविक तौर पर सारी ऋणात्‍मक बाते हमारे समक्ष मौजूद रहेंगी। हम हारेंगे भी , गिरेंगे भी , मरेंगे भी , असफलता को जीवन से दूर करना चाहें , तो हमें प्रकृति से ही जीतना होगा , जो किसी भी युग में संभव नहीं। पर टेलीवीजन में अपनी सामग्रियों का प्रचार करनेवालों ने तो मानों प्रकृति को ही जीत लिया है , उनका एक यंत्र हर कष्‍ट को दूर कर सकता है , इसका कितने लुभावने ढंग से ये प्रचार कर रहे हैं। आज पैसों के लिए लोग क्‍या न कर बैठें ??


शायद यही कारण है कि आज धर्म और ज्‍योतिष के नाम से ही लोगों को चिढ है। पर आज सिर्फ इन्‍हीं के कारण अंधविश्‍वास नहीं फैल रहा है , आज का व्‍यावसायिक युग इसके लिए जिम्‍मेदार है। ये अंधविश्‍वास फैलाकर भी समाज का कितना बडा नुकसान कर रहे हें , यदि इनके अंधविश्‍वास फैलाने पर दो से पांच हजार खर्च करके कोई इनके यंत्र खरीदता है , तो कुछ नहीं पाकर भी एक पूरा परिवार अपनी श्रद्धा की वजह से मानसिक शांति प्राप्‍त करता है। निरंतर हार के पश्‍चात थकी हुई आपनी शक्ति के बावजूद एक बार रिस्‍क लेने की उसकी हिम्‍मत और बढ जाती है। और कभी कभी इसका फल सकारात्‍मक भी दिख सकता है। यदि उसके मन में विश्‍वास हो , तो इस यंत्र के फल का इंतजार करता हुआ एक सकारात्‍मक शक्ति के सहारे वह आगे बढने लगता है।


पर हमारे स्‍टार कलाकार करोडों अरबों की लालच में पडकर रोग उत्‍पन्‍न करने वाले पेय पदार्थों का , हानिकारक प्रोडक्‍टों का , बिगडी जीवनशैली का जो संदेश देते नजर आते हैं , वो अधिक अंधविश्‍वास फैला रहे हैं। छोटे छोटे बच्‍चे जिन महापुरूषों की नकल करना चाहते हैं , वो ही समाज में गलत संदेश दे रहे हैं । जिन नेताओं से , जिन डॉक्‍टरों से , जिन प्रोफेसरों से , जिन वकीलों से , जिन शिक्षकों से , जिन व्‍यवसायियों से हमारे आनेवाली पीढी को अच्‍छा संदेश मिलना चाहिए था , वो ही आज कडवाहट का बीज बो रहे हैं। आज हमें हर क्षेत्र में बढती व्‍यावसायिकता को समाप्‍त करने की आवश्‍यकता है , हर क्षेत्र में नैतिक मूल्‍यों को पुनरस्‍थापित करने की आवश्‍यकता है , टेलीविजन के माध्‍यम से सिर्फ धर्म और ज्‍योतिष ही अंधविश्‍वास नहीं फैला रहे , सबको जागरूक होने की आवश्‍यकता है।

هناك 20 تعليقًا:

ललित शर्मा يقول...

हर क्षेत्र में नैतिक मूल्‍यों को पुनरस्‍थापित करने की आवश्‍यकता है।

लाख टके की बात-नैतिक मुल्यों की स्थापना से समस्याएं जन्म ही नहीं लेगीं

आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' يقول...

सोचने को विवश करता आलेख!

डॉ. मोनिका शर्मा يقول...

आपकी बात अर्थपूर्ण है इस तरह से भी सोचा जाना चाहिए ।

मनोज कुमार يقول...

सबको जागरूक होने की आवश्‍यकता है।
आपसे सहमत!

राज भाटिय़ा يقول...

अच्छी प्रस्तुति। आभार

सुधीर राघव يقول...

सही कहा आपने, सबको जागरूक करने की आवश्यकता है।

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) يقول...

टेलीविजन के माध्‍यम से सिर्फ धर्म और ज्‍योतिष ही अंधविश्‍वास नहीं फैला रहे , सबको जागरूक होने की आवश्‍यकता है।

शारदा अरोरा يقول...

संगीता जी , बहुत अच्छा आलेख । कल सुबह जब मेरी नींद खुली मैं यही सोच रही थी कि संगीता जी से कहना है कि इन ज्योतिष गुरुओं पर लिखें ...क्यों ये लाल किताब वाले उपायों पर दुनिया को चलाना चाह कर भ्रमित कर रहे हैं । आपने बहुत अच्छा लिखा कि ..कुछ नहीं पाकर भी एक पूरा परिवार अपनी श्रद्धा की वजह से मानसिक शांति प्राप्‍त करता है। इंतजार करता हुआ एक सकारात्‍मक शक्ति के सहारे वह आगे बढने लगता है।...यानि वो सकारात्मक शक्ति तो अपने अन्दर है और हम भटकते हैं बाहरी चीजों में खोजने के लिये ।
क्योंकि मैंने देखा है कि आप भी ज्योतिष के वैज्ञानिक तथ्य ही उजागर करती हैं , इसलिए मन में ये बात उठी ..और देखिये कल ही इसे आपने लिखा भी है । अब एक लेख लिखिए कि अलग अलग ग्रहों के दुष्परिणामों से होने वाली परेशानियों से बचने के लिये , उन ग्रहों को कैसे अच्छा किया जा सकता है , जैसे चन्द्र के लिये माँ के साथ रिश्ते अच्छे होने चाहिए । ऐसे लेख हमें अच्छा इन्सान बना सकते हैं , अन्धविश्वासी के लिये तो मैं ये कहूंगी कि वो अपने ही जमीर को छल रहा होता है ।

honesty project democracy يقول...

ललित भाई ने सही कहा है की नैतिकता ख़त्म हो चुकी है जिसे पुनः स्थापित करने की जरूरत है ,मिडिया में लोभी-लालची लोगों के कब्जे के वजह से स्थिति और भी भयावह हो चुकी है ,आप टेलीविजन कम देखती हैं इसके लिए आपका धन्यवाद अब टेलीविजन देखने की चीज रही ही नहीं इसने झूट को मिडिया में बदल दिया है ...दर्दनाक अवस्था है ..

समय चक्र يقول...

टी.आर.पी. बढ़ाने के उद्देश्य से और व्यवसायिकता के मद्देनजर टी.वी. चैनल किसी भी मुद्दे को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करते हैं . रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं

ललित शर्मा يقول...


आपको श्रावणी पर्व की हार्दिक बधाई

लांस नायक वेदराम!

Urmi يقول...

रक्षाबंधन पर हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!
बहुत खूब लिखा है आपने! बिल्कुल सही बात कहा है और इस विषय पर गंभीर रूप से सोचना पड़ेगा हम सभी को!

vandana gupta يقول...

बिल्कुल सही कह रही हैं आप्…………………कुछ तो संस्कारो मे पहले से अंधविश्वास की जडे थीं ही उन पर टी वी वालो ने कोई कसर नही छोड रखी तो ऐसे मे आम इंसान हालात का मारा जो सामने आता है उसे ही सही मान उसका अनुगमन करने लगता है और एक मकडजाल मे फ़ँस जाता है और सारी पढाई लिखाई धरी की धरी रह जाती है।

Mithilesh dubey يقول...

बहुत गंभीर मुद्दा है ,फिर भी आपने अपनी बात के साथ बखूबी न्याय किया ,बढ़िया लगा लेख ।

वन्दना अवस्थी दुबे يقول...

रक्षाबन्धन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं.

Vinashaay sharma يقول...

अच्छा लेख टेलीविज़न पर बहुत से एसे कार्यक्रम आते
हैं,जो सार्थक नहीं हैं,आपको रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई ।

ajay saxena يقول...

अर्थपूर्ण आलेख!

ajay saxena يقول...

अर्थपूर्ण आलेख!

Rekha Shukla يقول...

सही कहा आपने आज पैसों के लिये लोग क्या न कर बैठें।

ZEAL يقول...

बहुत सही मुद्दा उठाया है आपने। इस यंत्रो के विज्ञापन पर तो पूरी रोक लगा देनी चाहिए। ये .
विज्ञापन अंध-विश्वास तो फैला ही रहा है , साथ ही गरीब और अमीर के फासले को और भी बढ़ा रहा है, क्यूंकि इनके यन्त्र का ट्रायल भी तो अमीर वर्ग ही लेता है , सो लाभ भी उसे ही होता है ।

हिन्दुस्तान की गरीबी क्या यन्त्र में बैठे कुबेर महाराज मिटा सकेंगे?
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