क्या ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास? इस ब्लॉग में आप ज्योतिष के आधुनिक सूत्रों से सम्बद्ध नवीन ज्योतिषीय सिद्धांत के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, जो ज्योतिष की सटीकता पर शोध, ज्योतिष में नए शोध और निष्कर्ष के उपरांत विकसित किया गया है, नए ज्योतिष सूत्रों के माध्यम से कुंडली विश्लेषण, इन ज्योतिष के नए नियमों से भविष्यवाणी कैसे करें, 'ज्योतिष सीखने के लिए नए सूत्र और विधियाँ बताई गयी हैं।
कोई भी धर्म देश , समाज या मानवता से ऊपर नहीं होता !!
Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723
धर्म और ज्योतिष को बदनाम न करो बाबा
धर्म और ज्योतिष को बदनाम न करो बाबा
अपने रिसर्च के क्रम में गत्यात्मक ज्योतिष ने पाया कि दुनियाभर में आज धर्म के नाम पर चल रहा है , वह धर्म है ही नहीं। धर्म , आध्यात्म और अन्धविश्वास में एक बारीक अंतर होता है। धर्म और आध्यात्म को बिलकुल अलग ढंग से परिभाषित किया जा सकता है। इस तरह गत्यात्मक ज्योतिष ही आपका आध्यात्मिक गुरु बन सकता है। समाज के लोगों से विनती है कि वे धर्म के नाम पर उलूल जूलूल स्वीकार न करें। गत्यात्मक ज्योतिष के द्वारा बनाये गए नियमों से चलें। इसलिए समाज में धर्म के नाम पर अन्धविश्वास को परोसनेवाले से भी हमारी विनती रही कि कृपया वे ऐसा न करें , समाज में धर्म को सही ढंग से परिभाषित करें।
दुनिया भर के खासकर भारत में गली गली , मुहल्ले मुहल्ले विचरण करने वाले बाबाओं , तुम अपने शहर में न जाने कितने अपराध करते हो , पर काफी दिनों तक पुलिस की लापरवाही या उनसे मिलीभगत से तुम पकडे नहीं जाते , इस उत्साह से बडी बडी गलतियां करने लगते हो , फिर जब तुमपर शिकंजे कसे जाने लगते हैं , तो शहर से भागना और पुलिस से बचना ही तुम्हारा एक लक्ष्य हो जाता है , बचने का सबसे बडा रास्ता तुम्हें बाबाजी बनने में दिखाई देता है , बडी मूंछ और दाढी के कारण लोगों के लिए तुम्हारे चेहरे को पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है , बाबा का रूप धारण कर लेने से जनता की आस्था का भी तुम नाजायज फायदा उठा लेते हो , यदि किसी की आस्था तुमपर नहीं बन रही होती , तो डराना और धमकाना तो तुम्हारा स्वभाव है, इसलिए इस राह में चलकर आराम से अपनी महत्वाकांक्षा के अनुरूप पैसे का इंतजाम तो तुम कर लेते हो !
बाबा बनने के बाद तो तुम्हारा जीवन और रंगीन बन जाता है , श्मशान सिद्ध कर चुके हो तुम , यह कहकर भक्तों के सम्मुख भी शराब पीने से तुम कोई परहेज नहीं करते , कमाख्या मंदिर में सिद्धि प्राप्त कर चुके हो , इसलिए मांस से भी कोई परहेज की आवश्यकता नहीं , महिलाओं को मां मानते हो , इसलिए उनसे घिरे होने में भी तुम्हें दिक्कत नहीं , कन्याओं से सेवा करवाकर तुम उनकी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद दे देते हो , हत्या और लूटपाट के पाप के साथ तुम लोगों के कल्याण का दावा कर लेते हो , महात्मा होने के बावजूद भविष्यवाणी करने का रिस्क नहीं लेते , उपाय की पूरी व्यवस्था कर देते हो , एक शहर में तुम्हें रहना नहीं , इसलिए साख बनाए रखने की कोई चिंता नहीं , लोगों से पैसों की बरसात करवा लेते हो तुम , इस तरह अपराधी के नाम से भी जो सुख सुविधा नहीं मिलती , वो बाबा बनकर तुम्हें मिल जाती है !
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तुमसे नाम पूछा जाता है तो अपने को हिंदुस्तानी बताते हो , गांव , जिला या प्रदेश पूछा जाता है तो हिंदुस्तान कहते हो , मानो हम सब देशद्रोही हैं और तुम सच्चे देशभक्त , महान आत्माओं के जन्म से लेकर मृत्यु तक की हर घटना इतिहास में दर्ज होती है , अपना नाम , अपना गांव , अपना प्रदेश क्यूं छिपाते हो , वहीं से तो स्पष्ट हो जाता है कि तुम अपने जीवन का कोई भाग छुपा रहे हो , तुम इतिहास की किताबों में अपना नाम क्यूं नहीं दर्ज करवाना चाहते , अपने भयानक सच को सामने न लाकर अपने बाबा के स्वरूप को सामने रखकर तुम जनता के आस्था के साथ खिलवाड करते हो , उनके मनोवैज्ञानिक कमजोरी का नाजायज फायदा उठाते हो , अपने स्वार्थ में अंधे होकर कुछ भी करो तुम , पर धर्म और ज्योतिष को यूं बदनाम न करो बाबा , मेरी प्रार्थना है तुमसे
गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में
- गत्यात्मक ज्योतिष क्या है ?
- संक्षिप्त परिचय
- गत्यात्मक जीवन ग्राफ
- जीवन के 10 सूत्र
- ज्योतिष और आध्यात्म
- ज्योतिष से आध्यात्मिक ज्ञान
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सावन का पहला सोमवार
सावन का सोमवार का व्रत
आज भी सावन का सोमवार का व्रत करने की हिम्मत नहीं हुई। कुछ वर्षों से ऐसा ही हो रहा है , कभी काम की भीड और कभी तबियत के कारण सोमवारी व्रत नहीं कर पा रही हूं। हमारे धर्म में सावन महीने के सोमवार का बहुत महत्व है। सावन के सोमवार को भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। भारत के सभी द्वादश शिवलिंगों पर इस दिन खास पूजा-अर्चना की जाती है. कहा जाता है सावन के सोमवार का व्रत करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और दूध की धार के साथ भगवान शिव से जो मांगो वह वर मिल जाता है. यही कारण है कि इस व्रत को कुंवारी कन्याएं काफी उत्साहित होकर करती हैं।
व्रत में अधिक नियम की जरूरत नहीं
प्राचीन शास्त्रों के अनुसार सोमवार के व्रत तीन तरह के होते हैं। सोमवार, सोलह सोमवार और सौम्य प्रदोष। सोमवार के व्रत की चाहे जितनी भी सामग्रियां इकट्ठी कर ली जाएं , व्रत में अधिक नियम की जरूरत नहीं। भोले भाले शिव जी की पूजा का यह सोमवार व्रत भी बिल्कुल अपने मन मुताबिक किया जा सकता है। यही कारण है कि सावन का सोमवारी व्रत छोटी छोटी बच्चियां भी कर लेती हैं। हमारे गांव में सावन का सोमवारी व्रत लडकियों के लिए काफी उत्साह का त्यौहार होता था। गांव के पंडितों की मानने के कारण हमें काफी तैयारी करनी होती थी।
शनिवार का गांव में हाट
शनिवार का गांव में हाट लगता था , इसलिए इस दिन से ही तैयारी शुरू हो जाती थी। पूजा के लिए कम से कम पांच प्रकार के फल तो होने ही चाहिए , सात हो जाए तो और बढिया । एक दो घर में मिल जाते , बाकी तो हमें खरीदने ही होते थे। अपने घर में दूध का इंतजाम न हो , तो ग्वाले के घर जाकर गाय के कच्चे दूध का इंतजाम करना होता। बाजार से भांग , कपूर आदि खरीदकर लाने होते। रविवार को सुबह सुबह अच्छी तरह नहाकर एक लोटे में जल , दूध और पुष्प लेकर मंदिर जाकर भगवान शिव और पार्वती जी पर चढाना होता था। उसके बाद दिनभर बिना प्याज लहसुन का शुद्ध खाना खाना होता था।
गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में
पूजा की तैयारी
हमारे गांव में भले ही सोमवार को शिवमंदिर का कपाट दो बजे के बाद ही खुलता था , सुबह से ही हमलोग पूजा की तैयारी में लग जाते थे। पूजा में कोई कमी न रह जाए , सुबह से ही बेलपत्र , धतुरे और धतूरे के फूल और अन्य फूल , जो हमारे बगीचे में नहीं होती , के लिए हमलोग भूखे प्यासे भटकते रहते। दो बजे के बाद स्नान कर हम पूजा का थाल सजाते। उसके बाद नए कपडे पहनकर शिवालय जाते।
शिव परिवार को जलधारा , दूध, दही, शहद, शक्कर, घी से स्नान कराकर, गंध, चंदन, फूल, रोली, सिंदूर के साथ साथ धूप अगरबत्ती दिखाते हुए फलों का भोग लगाते। मंदिर में एक बूढी ब्राह्मणी होती , जो अस्पष्ट मंत्रों का उच्चारण करती जाती। शिव जी को अर्पित करने से पहले वे थोडा दूध अपने घर से लाई बाल्टी में जमा करती जातीं। प्रसाद तो हम उनके लिए अलग से ले जाते थे। मंदिर से बाहर निकलते ही प्रसाद के आस में बहुत महिलाएं और बच्चे खडे मिलते। उन्हें प्रसाद देकर हम वापस लौटते।
तीन दिन का नियम
दिनभर के भूखे प्यासे हम बच्चियों की सेवा के लिए सबकी मम्मी पूरी तैयारी में होती। हमारे गांव में सोमवारी व्रत में दिनभर में एक बार ही बिना नमक का शुद्ध खाना खाने का विधान है , यहां तक की चाय पानी भी एक ही बैठकी में ले लेना होता। छोटी छोटी बच्चियां भी पूजा से पहले तो नहीं, पूजा के बाद भी दुबारा पानी नहीं पीती। दूसरे दिन भी हमें सुबह सुबह खाने की आजादी नहीं थी , स्नानकर पहले शिव पार्वती जी की पूजा कर उनसे इजाजत लेकर ही खाने की छूट होती। इस तरह हमलोगों का तीन दिन का नियम चलता। पर तीसरे दिन हमारे लिए खाने पहने की विशेष व्यवस्था कि जाती।
एक बार सावन के महीने में मामाजी के यहां थी , तो वहां महिलाओं को इतने नियम से सोमवारी का व्रत करते नहीं पाया। वहां सालोभर बिना प्याज लहसून के खाना बनता था , इसलिए रविवार को नियम से खाने की कोई जरूरत नहीं होती। सोमवार को दिनभर सबका फलाहार ही चलता , बस दोनो भाइयों के लिए खाना बनाने की जरूरत होती। वहां सुबह से ही शिवमंदिरों में भीड लगती थी , इसलिए सुबह ही सब पूजा कर लेते , पूजा के बाद प्रसाद और चाय ले लेते , फिर फलाहार तैयार करते।
कुट्टू के आटे और सेंधा नमक
भाइयों का खाना निबटाकर हमलोग तीन बजे के लगभग फलाहार करते। दिनभर पानी चाय की कोई मनाही नहीं थी। सबसे छोटी बहन तो फलाहार कर टिफिन में फलाहार लेकर स्कूल जाती आकर फिर दो तीन बार फलाहार ही करती। यानि जिसको जैसे इच्छा हो , वैसे खाओ पीओ। एक बार रांची में भी एक रिश्तेदार के यहां रूकने का मौका मिला , वहां भी ऐसे ही व्रत होते देखा। बहुत परिवारों में तो कुट्टू के आटे और सेंधा नमक का प्रयोग करते हुए पूरा फलाहार खाना बना लिया जाता है।
हॉस्टल में चावल दाल
ससुराल में एक बार सावन के सोमवारी व्रत को करने को पूरा घर तैयार हो गया। वहां सुबह पूजा करने के बाद चाय और पानी पीने के सहारे रहने की छूट है। दोपहर में मेरे पूछने पर कि लोग क्या क्या खाएंगे , दोनो भाइयों ने बिना प्याज लहसून के चावल दाल सब्जी बनाने को कहा। सोमवारी व्रत में चावल दाल ?? मैं तो चौंक गयी। इनलोगों ने बताया कि दिनभर के भूखे प्यासे इनलोगों की भूख फलाहार से शांत नहीं होती थी , इसलिए ये हॉस्टल में चावल दाल ही खाते आए हैं। इस रूप में सोमवारी का व्रत होते मैने पहली बार सुना। महिलाओं ने तो नहीं , पर सभी पुरूषों ने व्रत में दाल चावल खाए। भोले भाले शंकर बाबा की पूजा और व्रत हर जगह अलग अलग यानि मनमाने ढंग से ही होते आ रहे है , भोले बाबा को इससे कोई अंतर नहीं पडता। तभी तो कहा गया है , भगवान केवल भक्त भाव के भूखे होते हैं !!
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धर्म और परंपरागत ज्ञान-विज्ञान
धर्म क्या है ?
चूँकि उन विद्वानों, नेताओं, योद्धाओं के अनुयायी बड़ी संख्या में होते हैं, बिना किसी प्रकार का तर्क किये हुए उनकी बातों को मानती रहती है। ये नियम उनके लिए धर्म हो जाते हैं, जिसका पालन उनकी संतानों के लिए भी अनिवार्य कर दिया जाता है। उन विद्वानों, नेताओं और योद्धाओं को धर्मगुरु भी मान लिया जाता है। धर्मगुरु की कमी से समाज को आगे नियम-पालन में कठिनाई नहीं आये, इसलिए समाज के वंश की वृद्धि के साथ धर्मगुरुओं के भी दुगुने-चौगुने शिष्य बनते रहते हैं।
यह सब आज के संविधान की तरह का ही माना जा सकता है, पर जहाँ संविधान को सजा के भय से माना जाता है, वहीं धर्म आस्था से जुड़े होने के कारन माना जाता रहा है। संविधान में परिवर्तन की जगह धर्म में भी देश काल परिस्थिति के हिसाब से परिवर्तन की बात की गयी है। छोटे-छोटे परिवार या क्षेत्र के छोटे नियम को छोड़ दिया जाये तो हर बड़े क्षेत्र के बड़े धर्म को आप वहां की तात्कालीन परिस्थिति के हिसाब से सही पा सकते हैं। जरूर ये नियम प्रकृति के नियमो से तालमेल के बाद ही बनाये गए होंगे।
विज्ञान क्या है ??
वैज्ञानिकों के दिए गए सलाह में खर्च भी अधिक हैं, इसलिए जनसामान्य को यह आकर्षित नहीं कर पाता। विज्ञान ने हर रोग का उपाय ढूंढा, पर दैनंदिन कठिनाईयों से निबटने के लिए सार्वभौमिक नियम नहीं बनाये। विज्ञान की खोज को कहीं कहीं पैसे कमाने का भी बड़ा स्रोत समझकर सबकी जिंदगी से खिलवाड़ किया गया। वैज्ञानिकों ने कुछ सलाह भी दी तो सरकार ने उन नियमों को मानने के लिए कभी लोगों को प्रेरित किया कभी नहीं। कुल मिलाकर हर क्षेत्र के वैज्ञानिकों और सरकार के मध्य तालमेल का ऐसा अभाव रहा कि विज्ञान वरदान से अधिक अभिशाप बन गया है।
गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में
धर्म की उपेक्षा
निष्कर्ष
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आध्यात्मिक गुरु के रूप में गत्यात्मक ज्योतिष
Spiritual guru in india
लगभग सभी ग्रंथों में जीवन को क्षणभंगुर माना गया है, पर यही जीवन मनुष्य को जीवन के कितने उतार-चढ़ाव दिखा देता है। नाना सुख, नाना व्याधियाँ, जब हम सुखी जीवन जी रहे होते हैं तो ऐसा महसूस होता है कि अब हमारे जीवन में दुःख आएंगे ही नहीं। जब हम हमारे जीवन में दुःख आता है तो ऐसा महसूस होता है कि हमें सारा जीवन अंधकार में ही काटना होगा। पर हमारा जीवन ही नहीं, सुख और दुःख दोनों क्षणभंगुर हैं। सुख में हम अहंकारी न हो जाएँ और दुःख में हम निराश न हो जाएँ, इसलिए तो हमें सच्चे गुरु की आवश्यकता पड़ती है। पर आज हम गुरु किसे बनाते हैं ?
Top guru in India
जिनके पास अट्टालिकाएं हों, १०-२० गाड़ियां हों, यानि सांसारिक तौर पर सफल लोगों को ही हम गुरु बनाते हैं, क्योंकि पैसों के बिना ज्ञान की कोई कीमत नहीं ! और मैंने कई बार उल्लेख किया है, शिक्षक हो, डॉक्टर हों या धर्मगुरु, उनके पैसे पर न जाएँ, शिक्षा, चिकित्सा और चमत्कार से कभी भी प्रभावित न हों, ज्ञान अर्जित करें। सुख में हमें किसी की जरूरत नहीं होती, आप पिकनिक मानते हुए, क्लब जाते हुए, मौज-मस्ती करते हुए समय को आसानी से काट सकते हैं।
पर चाहे आप कितने पैसे वाले, कितने रसूख वाले हों, दुःख के समय की शुरुआत होते ही आपके मनोबल, आपके धैर्य की परीक्षा शुरू हो जाती है, वह बल हमारे धर्म-ग्रंथों में बिखरा पड़ा है, महापुरुषों की सूक्तियों में भरा पड़ा है, प्रतिदिन ईमानदार लोगों की एक-एक पोस्ट में लिखा गया है। इनको इग्नोर करनेवालो को मुसीबत का दिन काटना बहुत कठिन हो जाता है। हमारे पोस्ट पढ़नेवालों में से कोई ऋणात्मकता से जूझ रहे हों तो अपने आसपास ध्यान दें, क्या आपसे दुखी कोई नहीं ? आपको अपना स्तर दिखाई दे जायेगा।
Best guru in India
भारतवर्ष में जितने भी संसाधन हैं, लोगों को संतोषजनक जीवन देने में समर्थ हैं ! उपजाऊ भूमि, पालतू पशु, पोखर, नदिया सब मिलकर मेहनती व्यक्ति की जरूरतें तो पूरी कर देती हैं ! जब पूरी नहीं हो पाती तो प्रकृति के नियम के तहत दूसरे देशों की तरह ही महामारी आबादी को काम कर देती है ! पेड पौधों को मालूम है कि उनके बीज में क्षमता है। इसलिए वे अपना फल दुनिया को दे देते हैं। एक मनुष्य है जिसे विश्वास ही नहीं कि उनके बच्चों में भी अपरिमित क्षमता मौजूद है। इसलिए वे उनके भविष्य की व्यवस्था में धन के संचय का क्रम बनाए रखते हैं। पर हमारे पूर्वजों ने प्रकृति से लेना नहीं, जरूरतभर उपभोग करके सिर्फ देना सीखा था। ईश्वर से प्रार्थना है, अनंत काल तक भारतवासियों का यही चरित्र बनाये रखे ! उन्हें लालच से दूर रखे !
गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में
Adhyatmik guru in India
इतिहास गवाह है कि भारतवासी कभी भी दूसरे देशों के संसाधनों पर कब्जा करने नहीं गए, जहाँ भी गए उस देश के नियमों के हिसाब से रहे, उस देश से प्रेम किया ! प्रेम से बहुत कुछ जीता भी है ! अपने महत्वाकांक्षा के लिए आजतक किसी से लड़ने की आवश्यकता नहीं पडी ! जरूरत में कभी हम लड़े भी तो लंका जीतकर भी विभीषण को सौंपा, बँगला देश बंगाली मुसलमानो को ! यही ज्ञान हमारे साथ रहे तो हम अंदर से चैन से रहेंगे !
भारत में विक्सित किया गया 'गत्यात्मक ज्योतिष' का ज्ञान आपको आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है, यही बताता है कि जो हमारे भाग्य में है, वह हमारे ही प्रयास से हमें ही मिलेगा ! जो मुझे नहीं मिल रहा, उसके लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है, प्रकृति हमारी परीक्षा ले रही है। समय आएगा, मुझे मेरा लक्ष्य मिलेगा, प्राकृतिक नियम के इस दृष्टिकोण के आते ही हमारा ध्यान इधर-उधर नहीं भटकता !
'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर सटीक भविष्यवाणी, उचित परामर्श और समुचित उपचार के लिए संपर्क करें - 8292466723 , gatyatmakjyotishapp@gmail.com
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ज्योतिष और आध्यात्म
Aadhyatm gyan in Hindi by jyotish
किसी खास युग में हर क्षेत्र में किसी प्रकार की सफलता प्राप्त करने के लिए चाहे जिन गुणों और ज्ञान का महत्व हो , वे किसी एक व्यक्ति को शीर्ष तक क्यूं न पहुंचा देते हो , उनकी देखा देखी वैसे गुणों को आत्मसात कर स्वयं भी ऊंचाई पर पहुंचने के लिए चाहे हमारे जैसे कितने भी लोग प्रयत्नशील क्यूं न हों , सफल होकर हम सांसारिक सफलताओं से लैस ही क्यूं न हो जाएं , पर वह चिरंतन और स्थायी सुख नहीं दे पाते। स्थायी मानसिक सुख प्राप्त करने के लिए कुछ ऐसे नियमों की जानकारी आवश्यक होती है , जिसे हमारे महापुरूषों द्वारा हर धर्म के सिद्धांतों के रूप में जोड दिया गया।
ये सिद्धांत किसी भी व्यक्ति से 'अहं' को दूर करते हैं और इनके पालन से हमारे क्रियाकलाप सर्वजनहिताय होते हैं। सिर्फ अपने बारे में ही नहीं , सारे प्राणियों के साथ साथ दुनिया के एक एक कण से प्यार और उनकी सुरक्षा के लिए चिंतन ही आध्यात्म की ओर जाने की सीढी है । आज के दौर में गलत हाथों में जाकर धर्म का स्वरूप भले ही विकृत हो गया हो , पर दुनिया के प्रत्येक धर्म की खासियत यही थी , इससे इंकार नहीं किया जा सकता।
Adhyatma Vigyan
आज का युग पूरे स्वार्थ का हो गया है , हर व्यक्ति को सिर्फ अपने से मतलब है। अपना शरीर , अपने परिवार , अपने बच्चे , अपना व्यवसाय और अपना ही विकास , इसके लिए हम कोई भी तरीका अपनाने को तैयार हैं। गलत धरातल पर खडे होने के बाद भी हम अपनी उपलब्धियों पर गुमान करते हैं , बच्चों को भी सांसारिक रूप से ही सफल होने के हर गुर सिखाते हैं। एक व्यक्ति नहीं , आज सारे ही आगे बढने के लिए एक दूसरे को धक्का दे रहे हैं। आज ताकतवर की ही चल रही है , अपनी अपनी ताकत का हम सब दुरूपयोग कर रहे हैं , ऐसे में समस्त चर अचर मुसीबत में हैं। जबतक खुद के साथ विपत्ति नहीं आ जाती , दूसरे की समस्या पर हंसना आज हमारा खेल बना होता है। पर जब हमारे ऊपर मुसीबत आती है और हम लाचार होते हैं , तब समझ में आता है कि हमने जीवन में क्या क्या गल्तियां की हैं और हमारी जीवनशैली क्या होनी चाहिए। पर तब पछताने के सिवा कुछ भी नहीं होता।
Jyotish and Aadhyatm
ज्योतिष की सहायता से हम ग्रहों के पृथ्वी के जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव का अध्ययन करते हैं। जिस प्रकार प्रकृति में मौजूद हर जड चेतन की तरह में कुछ न कुछ विशेषताएं होती हैं , इसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य भी भिन्न भिन्न बनावट के होते हैं , प्रत्येक में अलग अलग क्षमता होती है , इसलिए सबके पास सबकुछ नहीं हो सकता। भले ही सभी जड चेतन एक जैसे जीवन चक्र से गुजरते हों , पर चूंकि मनुष्य सबसे अधिक विकसित प्राणी है , और इसके जीवन के बहुत सारे आयाम हैं , इस कारण एक जैसे दिखने के बाद भी मनुष्य की जीवनशैली एक जैसी नहीं। दुनियाभर में समान उम्र के लोग भी भिन्न भिन्न परिस्थितियों से गुजरने को बाध्य होते हैं , प्रकृति के खास नियम के हिसाब से एक का समय अनुकूल होता है तो दूसरे का प्रतिकूल ।
गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में
Aadhyatma sadhana Kendra
ज्योतिष विषय की सहायता से हमें ग्रहों की मदद से अनुकूल और प्रतिकूल परिथितियों को जानने में मदद मिलती है। जब अनुकूल समय होता है , तो हमारा आत्मविश्वास बढाने के लिए हमारे मनोनुकूल वातावरण होता है , जबकि प्रतिकूल समय में हमारे साथ ऐसी ऐसी घटनाएं होती हैं , जिनसे हमारे आत्मविश्वास पर असर पडता है। जब हम अपने मनोनुकूल समय में अपने अधिकार के साथ साथ कर्तब्यों का पालन भी करें , तो प्रतिकूल समय में हमें काफी राहत मिल सकती है।
पर यदि मनोनुकूल समय में अधिकारों का दुरूपयोग करेंगे , तो उसका बुरा फल प्रतिकूल समय में हमें या हमारे संतान को अवश्य झेलने को मजबूर होना होगा। प्रत्येक बुरा कार्य करने से पहले हमारी अंतरात्मा बारंबार झकझोरती है , पर हम उसे अनसुना करते हैं , पर उस गल्ती को करने के बाद एक दिन भी चैन से नहीं रह पाते। जिस सांसारिक सफलता को देखकर हम प्रभावित होते हैं , उसका मनुष्य के सुख और चैन से कोई संबंध नहीं होता। प्रकृति से जुडा व्यक्ति ही सर्वाधिक सुख और चैन से रह सकता है।
Jeevan me Aadhyatm ka mahatwa
इसके अलावे ज्योतिष से हमें इस बात के संकेत मिल जाते हैं कि जातक के आनेवाले समय में किसी खास पक्ष का वातावरण सुखद रहेगा या कष्टप्रद .. इस बात का अहसास होते ही प्रकृति के नियमों के प्रति हमारा विश्वास गहराने लगता है। चूंकि सुख और कष्ट की सीमा को जान पाना मुश्किल है , इसलिए हमलोग किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते , अंत अंत तक जीतने की कोशिश करते है , पर न जीत का घमंड होता है , न हार का गम । हम यह मान लेते हैं कि जो भी परिणाम हमारे सामने है , वो प्रकृति के किसी नियम के अनुसार हैं।
हमने किसी समय कोई गल्ती की , जिसका फल हमें भुगतना पड रहा है। ऐसी स्थिति में हम दूसरों पर व्यर्थ का दोषारोपण नहीं करते , प्रकृति को जिम्मेदार मानकर अपने मन को कलुषित होने से बचा लेते हैं। हमें विश्वास हो जाता है कि यदि जानबूझकर दूसरा हमें कष्ट दे रहा है , तो प्रकृति उसका हिसाब किताब अवश्य रखती है और आनेवाले दिनों में उसका फल उसे स्वयं मिलेगा। इस प्रकार प्रकृति के नियमों के सहारे आध्यात्म का ज्ञान हमें ज्योतिष के माध्यम से मिल जाता है।
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Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723
धर्म, आध्यात्म और अंधविश्वास
Adhyatmik Vichar
हर प्रकार के ज्ञान में एक बारीक अंतर होता है। सबसे पहले मैं आध्यात्म को परिभाषित करना चाहूंगी। अपने शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति कर हर व्यक्ति सुख का अनुभव करते हैं , इस कारण इसे प्राप्त करने के लिए लगभग सारे व्यक्ति मेहनत करना चाहते हैं। इसके बाद मनुष्य के लिए उसके परिवार का स्थान आता है , जिन्हे सुख सुविधा देने में अपने सुख का कुछ त्याग करने में भी संतोष का अनुभव होता है। इस कारण उसके लिए भी मेहनत करने को कुछ को छोडकर सब तैयार रहते हैं।
इसके आगे बढते हुए थोडे लोग अपने मुहल्ले , अपने समाज , अपने गांव से बढते हुए अपने राष्ट्र के लिए भी जीवन उत्सर्ग करने में पीछे नहीं हटते। उससे आगे भी कुछ लोग विश्व बंधुत्व की भावना से ओत प्रोत होते हैं , तो कुछ विश्व के समस्त चर अचर के कल्याण से भी आगे पूरे ब्रह्मांड के लिए अपने कार्यक्रम बनाया करते हैं। अपने स्वार्थ का त्याग करके अपने मन और मस्तिष्क के सोंच को व्यापक बनाना ही ‘आध्यात्म’ है । जब कोई व्यक्ति अपनी आत्मा के साथ विश्वात्मा, समस्त जड चेतन और ब्रह्मांडीय शक्ति को जोडने में समर्थ होता है, तो वस्तुत: वह आध्यात्मिकता की चरम सीमा को प्राप्त करता है।
what is gyan in hindi
अपने मस्तिष्क की बनावट के कारण सामान्यतया मनुष्य स्वार्थी होता है , अपने सुखों का परित्याग नहीं कर पाता , इसलिए ‘आध्यात्म’ के स्तर तक पहुंचे व्यक्ति को स्वयं महात्मा का दर्जा मिल जाता है , वैसे उनकी संख्या बहुत कम होती है। अपने विश्व कल्याण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उनलोगों के द्वारा मनुष्य के समक्ष नियमों की संहिता बनाकर पेश की जाती हैं। इसमें जन्म से मृत्यु तक मनुष्य के जीवन यापन के ऐसे तरीके की चर्चा होती हैं , जिससे उसका शारीरिक , मानसिक और नैतिक विकास सही हो सके।
प्रकृति की एक एक वस्तु एक एक व्यक्ति में किसी न किसी प्रकार की विशेषता छुपी हुई है , जिनके समुचित उपयोग के लिए खास नियम बनाए जाते हैं। विभिन्न कर्मकांडों के माध्यम से उनका पालन कर व्यक्ति अपने स्वार्थों को त्याग कर विश्व के समस्त चर अचर के कल्याण से भी आगे पूरे ब्रह्मांड की सुरक्षा करने में समर्थ हो पाता है। इन्हीं नियमों की संहिता को ‘धर्म’ का नाम दिया जाता है, ताकि इन नियमों के पालन में मनुष्यों के द्वारा कोई लापरवाही न बरती जाए। इसके अनुसार विभिन्न काल और देश में भिन्न भिन्न प्रकार के ‘धर्म’ का विकास हुआ।
मानव का धर्म मानवीय गुण है , खुद पर संयम रखने के लिए हमें व्रत रखना चाहिए। इसके अलावे प्रकृति के जिन वस्तुओं से हमें सुख की प्राप्ति होती है , उनके प्रति श्रद्धावनत होना चाहिए। विवाह के सुअवसर पर गवाही के लिए बडी संख्या में लोगों की उपस्थिति होनी चाहिए , पति पत्नी अपने रिश्तों को आसानी से तोड न सके , इसके लिए बंधन बनाए गए। लेकिन जब धर्म के मूल उद्देश्य मानवता और सच्ची भक्ति को भूलकर लोग कर्मकांडों को ही सत्य समझ बैठते हैं , तो वहीं से भ्रम या अंधविश्वास की उत्पत्ति होती है।
यहीं से विभिन्न धर्म के मध्य टकराव का भी आरंभ होता है , मेरा धर्म अच्छा और मेरा धर्म बुरा कहने की शुरूआत होती है। सिर्फ वेशभूषा के आधार पर नकली गुरूओं को असली मानकर उनकी बातों पर विश्वास करना ‘अंधविश्वास’ है। वे गुरू नहीं ठग होते हैं , जो आजतक धर्म को गलत ढंग से परिभाषित कर लोगों को गुमराह करने का काम करते आए हैं। मूर्तियों का दूध पीना इसी तरह ठग गुरूओं द्वारा गुमराह किए जाने वाले कार्यों में से एक है। उनसे लोगों को सावधान कराना हमारा धर्म है , पर इसके कारण हम अपने सच्चे ‘धर्मगुरूओं’ या धर्म पर इल्जाम लगाना जायज नहीं।
what is vigyan
‘जादू टोना’ तो मनुष्यों के मनोरंजन के लिए विकसित की गयी मात्र एक कला है , जिसकी जानकारी समाज के किसी एक वर्ग को दी गयी। इसके भेद को खोल देने से उस खेल की रोचकता समाप्त हो जाती , इसलिए इसे गुप्त रखा गया। पर ठग इसका भी फायदा उठाने से नहीं चूकते और भोलेभाले जनता को जादू टोने के कारनामें दिखाकर अपने को गुरू बनाकर उन्हें बेवकूफ बनाते है। अंत में मैं यही कहना चाहती हूं कि कोई भी क्षेत्र बुरा नहीं होता , आज युग ही बुरा हो गया है।
इस कारण हर क्षेत्र में लोग अंधविश्वास का नाजायज फायदा उठा रहे हैं और भोले भाले लोग इसका शिकार बन रहे हैं। आज के नेता , आज के डॉक्टर , आज के वकील , आज के शिक्षक ... किसपर हम विश्वास करें वो हमारी समझ में नहीं आता , अंधविश्वास से हम कहीं भी हम फंस सकते हैं। जरूरत है भ्रष्टाचार को समाप्त करने की , दिखावे को समाप्त करने की , सुविधाभोगी वातावरण को समाप्त करने की। तभी विश्व का कल्याण किया जा सकता है।
अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें !
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Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723
धर्म के नाम पर उलूल-जुलूल को न स्वीकारें------
Dharm ke prakar
गेट पर ठक-ठक की आवाज से मेरी तन्मयता दूर हुई। जिस लेख को लिख रही थी, उसे छोड़कर यह लेख प्रस्तुत है। नजदीकी लोग तो गेट से अंदर आकर दवाजे पर घंटी बजाते हैं, कूरियर वाले तक भी। जरूर कोई बिना जान पहचानवाला है, कुर्सी से उठकर मैंने गेट की और झाँका। अच्छे कपडे और श्रृंगार में बनी-ठनी एक महिला संतोषी माता की पूजा के लिए पैसे मांग रही थी। संतोषी माता गरीबों की देवी है, ऐसा मैं मानती हूँ, क्योंकि उन्हें सिर्फ चने-गुड़ का चढ़ावा चाहिए। माता लक्ष्मी ठाट-बात की पूजा चाहती हैं, इसलिए धनाढ्य के मध्य अधिक लोकप्रिय हैं। माध्यम वर्ग भी अब उनकी देखा-देखी करके अपने सालभर का बजट बिगाड़ लेते हैं। निम्न वर्ग वाले अभी तक दीपावली को साफ़-सफाई और दिए जलाने का ही त्यौहार मानते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है माता लक्ष्मी को खुश करना हमारे वश में ही नहीं।
Hamara dharm kya hai
तो आती हूँ, मुख्य मुद्दे पर। मैंने उस महिला को बोला, संतोषी माता की पूजा इतनी महंगी तो नहीं होती, तुम या तुम्हारे पति कोई काम करते ही होंगे। पूजा के लिए भीख मांग रही हो ? उसपर उसने जवाब दिया कि क्या आप नहीं जानती कि हिन्दू धर्म में मन्नत भी मानी जाती है, भिक्षा मांगकर पूजा करूंगी। मैंने बोला, मुझे मालूम है कि ऐसा होता है, हमारे घर में खुद छठ में भिक्षा मांगी जाती है। इसका कारन कुछ भी हो सकता है, धर्म में अमीरों का अंधानुकरण गरीब करते हैं तो शायद गरीबों का अंधानुकरण अमीर भी करने लगे हों या फिर अहम् को त्यागकर पूजा करने की भावना ने इस मन्नत को जन्म दिया हो। लेकिन जब पूजा के लिए साधन की कमी न हो, तो पूजा से पहले मात्र ऐसी प्रक्रिया से गुजरना होता है। आप अपने अड़ोस पड़ोस में मांगकर उसमें अपने पैसे मिलाकर भी पूजा कर सकती हैं।
sanatan dharma in hindi
उस महिला ने बोला कि 5 -10 रुपये दे देने से आपका क्या नुक्सान हो जायेगा ? मैंने बोला, यह सच है कि 5-10 रुपये से मेरा भी कुछ नहीं जायेगा और आपका भी कुछ नहीं बनेगा, पर आप दिनभर मांगती रहीं, महीने भर मांगती रहीं तो या ५०००-१०००० भी हो सकता है। उस पैसे का दुरूपयोग तो हो ही सकता है। मैं आपको जानती ही नहीं, इस पैसे का दुरूपयोग हुआ तो आप ही नहीं, मैं भी पाप की भागी बनूंगी। उस महिला के सब्र का बाँध टूट गया, उसने कहा, पैसे देने हो तो दीजिए, इतना भाषण मत दीजिए। मैंने बोला, भाषण कैसे नहीं दूँगी, धर्म की आपकी गलत परिभाषा को मैं नहीं स्वीकार कर सकती। और पैसे तो मैं आपको किसी हालत में दूँगी ही नहीं। महिला जल्दी- जल्दी भागी। वैज्ञानिक दृष्टि वाले लोगों को तो कुछ कहना ही नहीं, धार्मिक दृष्टिकोण वाले लोगों से विनती है, धर्म भयभीत होने के लिए नहीं, हिम्मत बनाये रखने के लिए बनाया गया है। इसलिए धर्म के नाम पर उलूल-जुलूल को न स्वीकारें।
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गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी विशेष
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एक ब्लॉगर्स मीट में मेरा विचार
- हमारे देश में सदैव 'विविधता में एकता' की भावना विकसित होती रही है , इसलिए मेरे विचार से देश के लोगों की जाति , धर्म या रहन सहन जो भी हो कोई अंतर नहीं पडता , बस लोगों के अंदर देश भक्ति की भावना में कहीं कोई कमी नहीं आनी चाहिए , हम अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा दें कि किसी के बहकावे में आकर वे देश का नुकसान न करें। सरकार को बस इतना करना है कि वे सभी नागरिकों को समान सुविधाएं दें। नौकरी में आरक्षण देकर समाज के कमजोर पक्ष को आर्थिक सुरक्षा भले ही आवश्यक हो , पर देश के हित के लिए जिम्मेदारी से भरे सरकारी उच्च पदों में या पदोन्नति में प्रतिभा को महत्व दिया जाना चाहिए।
- देश की आनेवाली पीढी को यानि युवाओं को प्रतिभाशाली बनाने के लिए रटंत प्रणाली की शिक्षा को समाप्त कर इसे व्यावहारिक और उपयोगी बनाने पर बल दिया जाना चाहिए , अपनी अपनी रूचि और प्रतिभा के हिसाब से सभी युवाओं को सरकार की ओर से एक समान अवसर मिलना चाहिए। दबाबपूर्ण पाठ्यक्रम युवाओं के प्रतिभा को नुकसान पहुंचाती है।
- आज प्राइवेट संस्थानों ने संचार क्रांति का पूरा फायदा उठाया है , एक एक कर्मचारी की गतिविधियों पर उनकी पूरी निगाह रहती है , सरकार के लिए तो यह और आसान है। संचार क्रांति के इस युग में सरकारी तंत्र की जनता के मध्य पारदर्शिता बहुत बडी बात नहीं , बस इच्छा शक्ति होनी चाहिए।
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अपनी मातृभाषा में विचारों की अभिव्यक्त
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