इस वर्ष के शुरूआत में ही श्री श्रद्धानंद पांडेय जी के द्वारा रचित श्रीहनुमान पचासा आपलोगों को पढवा चुकी हूं। उनके द्वारा लिखा गया श्रीहनुमान कृपाष्टक का आज आनंद लें .....
बुद्धि शरीर निरोग रहे , प्रभु पूजन में न करें कृपणाई।
पावन भाव बसे उर में , जग दे सियाराम स्वरूप दिखाई।।
कान सुने रघुनाथ कथा , हरि का गुणगान सदा सुखदाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में सिय साथ रहे रघुराई।।
जीभ कभी न कहे अपशब्द , चखे रसना हीरनाम मिठाई।
हाथ करे प्रभु का पदपूजन , दान परिश्रम दीन भलाई।।
नित्य चले पग मंदिर में , शुभ धाम फिरे न करे कठिनाई।
हे हनुमान कृपा करिये , मन में सिय साथ रहे रघुराई।।
काम कदापि न क्लेश करे , रमणी गण में झलके निज माई।
क्रोध तजे प्रतिशोध सभी , उर वास करे समता करूणाई।।
लोभ न चाह करे धन या यश , मोह मिटे बिनसे कुटिलाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।
जीवन में न रहे त्रयताप , विवेक रहे उर शीतलताई।
हो न अभाव कभी धन का , गृह गोरस अन्न रहे बहुलाई।।
दूर रहे सब भूत पिशाच , फले सुख संपत्ति की अमराई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।
विश्व लगे परिवार , लगे सबलोग सुता जनननी सुत भाई।
भेद घृणा लवलेश न हो , उर में सब जीव करे समताई।।
मानव मानव एक लगें , मिट जाए विभेदक मोह बुराई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।
पा नर देह कभी न करूं , मनसा वचसा तन से अघमाई।
राघव के पद पंकज में , मनभृंग रहे तज चंचलताई।।
मानस स्वच्छ रहे मलहीन , मिटे अभिमान तथा अघकाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।
याद रहे चपला सम यौवन , जीवन की क्षणभंगुरताई।
पुत्र-कलत्र-धरा-गृह-संपत्ति , साथ तजे पद-मान-बडाई।।
याद रहे अगले पथ में , बस साधन धर्म अधर्म कमाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।
प्राण प्रयाण करें तब , शोक विषाद न हो मन में दुखदाई।
'राम' रटे रसना प्रतिभाषित हो , सियनायक की प्रभुताई।।
पुत्र रखे मुख में तुलसीदल , कान पडे हरिनाम सुनाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।
*दोहा*
श्रद्धानंद कृपा करें , पवनपुत्र गुणधाम।अभिलाषाएं पूर्ण हों , रहे हृदय सियाराम।।
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هناك 11 تعليقًا:
हमने तो श्रीहनुमान कृपाष्टक का आनन्द ले लिया । श्री श्रद्धानन्द पांडेय जी का बहुत बहुत धन्यवाद। आपका भी इसे पढवाने के लिये।
बढ़िया जानकारी !
कबी-कबी पूजा में पढ़ लिया करेंगे!
आपको धन्यवाद..
वाह यह तो बडी कृपा हुई आपकी ।
कहीं कहीं मात्रा की गलतियां खटकती हैं । बाकी चकाचक है ।
"श्री श्रद्धानंद पांडेय जी के द्वारा रचित श्रीहनुमान कृपाष्टक" पढवाने के लिए आभार ...
बहुत सुंदर हम इस की कापी कर के बीबी को दे देगे, वह हर रोज सुबह भगवान का नाम जरुर लेती है, ओर थोडी देर रामायाण भी पढती है, आप का धन्यवाद
उपयागी सामग्री प्रदान की आपने। धन्यवाद।
बेहद सुन्दर पोस्ट बधाई .
धन्यवाद..... आपका इसे पढवाने के लिये.........
श्री श्रद्धानंद पांडेय जी के द्वारा रचित श्रीहनुमान कृपाष्टक" पढवाने के लिए आभार ...
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