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वेलेण्‍टाइन डे



रूमानित भरा मौसम होता है वसंत का

वसंत के मौसम में रूमानियत तो होती ही है ,भारतीय संस्‍कृति मे भी इस महीने प्‍यार के अनेक रंग बिखेरता होली का त्‍यौहार मनाए जाने की परंपरा रही है। इसलिए इस महीने प्रेम की महिमा से इंकार नहीं किया जा सकता है , यह अलग बात है कि पहले कम उम्र में विवाह होते थे , तो विवाह के बाद इसका नशा चढता था और आज कैरियर को बनाने के चक्‍कर में लगे विवाह में देर करनेवाले युवाओं युवतियों पर इसका नशा पहले ही छाने लगा है। पर प्रेम संबंध और विवाह दोनों को अलग अलग नहीं रखा जा सकता। जब किसी लड़का और लड़की के बीच प्रेम होता है तो वे साथ साथ जीवन बीताने की ख्वाहिश रखते हैं और विवाह करना चाहते हैं। पश्चिमी सभ्‍यता की देखा देखी भारतवर्ष में भी युवा प्रेमी प्रेमिकाएं द्वारा 14 फरवरी को वेलेण्‍टाइन डे मनाने की परंपरा चल पडी है। वेलेण्‍टाइन डे मनाने के लिए जितनी तैयारी ये करते हैं , उससे कम तैयारी इसका विरोध करनेवाले नहीं करते। भारतीय सभ्‍यता और संसकृति की रक्षा करने के नाम पे युवकों युवतियों द्वारा इस परंपरा को मनाए जाने का का प्रतिवर्ष पुरजोर विरोध किया जाता रहा है। इसके बावजूद पार्कों , पिकनिक स्‍थलों और अन्‍य सार्वजनिक स्‍थलों पर इनकी भीड जुटती है। 

मेष लग्‍नवालों के लिए सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण ..

प्रतिवर्ष वेलेण्‍टाइन डे के दिन ग्रहों की स्थिति भिन्‍न भिन्‍न होती है। इस साल वेलेंटाइन डे पर चंद्रमा की स्थिति बहुत ही मजबूत है , चंद्रमा मन को प्रभावित करता है , इसलिए लोगों का उत्‍साह बना रहेगा। चंद्रमा के साथ शनि की ज्‍योतिष के हिसाब से शुक्र , जो प्रेम का ग्रह है , की स्थिति भी आज बहुत ही मजबूत बनी हुई है। इसलिए इस त्‍योहार को मनाने का पूरा जोश बना रहेगा। चंद्रमा की मजबूती के कारण के कारण मकर लग्‍नवाले , और शुक्र की मजबूती के कारण मेष और वृश्चिक लग्‍नवाले अनुकूल माहौल उपस्थित पाएंगे। चंद्रमा के साथ शनि की स्थिति कर्क और सिंह लग्‍नवालों को भी सुखद कार्यक्रमों से जुडाव बनाएंगी। कुल मिलाकर यह दिन मेष लग्‍नवाले प्रे‍मी प्रेमिकाओं के लिए सर्वाधिक तथा कर्क , सिंह , वृश्चिक और मकर लग्‍न के प्रेमी प्रेमिकाओं के लिए खासे महत्‍व का होगा, अन्‍य लग्‍नवालों के लिए औसत हो सकता है। खासकर 11 बजे से 2 बजे दिन और 10 बजे से 1 बजे रात्रि तक का समय खास मनोनुकूल हो सकता है।

16 वर्ष से 19 वर्ष की उम्र के नौजवान सावधान रहें

पर जहां चंद्रमा और शुक्र की स्थिति माहौल को सुखात्‍मक बनाए रखेगी , वहीं चंद्रमा के साथ वक्री शनि की स्थिति कुछ गडबडी उपस्थित कर सकती है। शनि के कारण बहुत सारे लोगों के साथ ही साथ 16 वर्ष से 19 वर्ष की उम्र तक के टीन एजर किशोरों को खासकर बहुत सावधानी बनाए रखने की आवश्‍यकता है। 7 बजे से 11 बजे दिन और 10 बजे से 1 बजे रात्रि तक का समय उनका विशेष गडबड रह सकता है। इस वक्‍त किसी भी प्रकार की विपत्ति में ये फंस सकते हैं। गोचर में मंगल की स्थिति भी बहुत कमजोर चल रही है , जो युवा वर्ग को बाधा उपस्थित करने के लिए काफी है , खासकर 6 बजे से 9 बजे तक का समय उनके लिए ठीक नहीं। वृष और तुला लग्‍नवाले युवकों युवतियों के समक्ष भी बहुत कठिन माहौल बनेगा। हां , यह वेलेण्‍टाइन दिवस विवाहित लोगों के लिए सुखद होगा , सिर्फ मिथुन और कन्‍या लग्‍न वालों के लिए कुछ परेशानी उपस्थित हो सकती है।



दिल्‍ली के कॉमनवेल्थ गेम्स में बारिश की परेशानी ??

चार छह दिनों के ट्रिप के बाद कल ही बोकारो लौटना हुआ, झारखंड और बिहार में तो इस वर्ष बारिश बहुत ही कम हुई है , पर देश के बाकी हिस्‍सों में बारिश से जनजीवन अस्‍त व्‍यस्‍त सा लगा । हर स्‍थान पर रुक-रुक कर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश होने से कई इलाकों में सड़कों पर पानी जमा हो गया है। अखबारों में चर्चा है कि पहाडी स्‍थानों पर भी मानसून कुछ ज्यादा ही मेहरबान रहा और बारिश ने पिछले 15 साल का रिकॉर्ड तो़ड दिया। यही नहीं , पहाड़ी क्षेत्र की मूसलाधार बरसात ने मैदानी इलाके में खतरा उत्पन्न कर दिया है।  नदी को खतरे के निशान की ओर बढ़ता देख नजदीकी आबादी में डर गहराने लगा है। लगातार हो रही बारिश से सब्जियों की आवक में कमी ने गृहिणियों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।


इस बारिश की वजह से सबसे अधिक चिंता में हमारी सरकार है , दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं और आयोजन समिति यह भी प्रार्थना कर रही है कि बरसात कहीं रंग में भंग में डाल दे. मौसम विभाग का मानना है कि अक्तूबर महीने में बारिश बिलकुल भी नहीं होगी ऐसा तो पक्के तौर पर कहा ही नहीं जा सकता. पिछले 110 सालों में मौसम का अध्ययन कर भारतीय मौसम विभाग ने कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान बारिश होने की संभावना 15 से 20 प्रतिशत जताई है. मौसम विभाग का कहना है कि पिछले 40 सालों का आंकड़ा दिखाता है कि बारिश होने की संभावना उदघाटन समारोह के दिन ज्यादा है.


मौसम के बारे में भविष्‍यवाणी करते हुए 29 मार्च को पोस्‍ट किए गए अपने आलेख में मैने लिखा था कि 24 जून तक लगातार बढते हुए क्रम में नहीं , वरन् कमोबेश होती हुई गर्मी बनी रहनी चाहिए , पर उसके तुरंत बाद शुभ ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , जिसके कारण बादल बनने और बारिश होने की शुरूआत हो सकती है , यदि नहीं तो कम से कम मौसम खुशनुमा बना रह सकता है। इस वर्ष यानि 2010 में मौसम की सबसे अधिक बारिश 4 अगस्‍त के आसपास से शुरू होकर 19 सितम्‍बर के आसपास तक होगी। ठीक अगस्‍त के पहले सप्‍ताह से ही ऐसी बारिश्‍ा शुरू हुई है कि आम जन जीवन अस्‍त व्‍यस्‍त ही बना हुआ है। 

पर अब 19 सितंबर बहुत निकट है और इस हिसाब से तेज बारिश का मौसम यहीं समाप्‍त हो जाना चाहिए। वैसे 16 सितंबर को एक खास ग्रहयोग एक दो दिनों तक यत्र तत्र बहुत तेज बारिश और आंधी तूफान तक का दृश्‍य उपस्थित कर सकती है , लेकिन इसके बाद लगातार होनेवाली बारिश बादलों को समाप्‍त करनेवाली है और अब बारिश खात्‍मे की ओर है। यदि थोडी देर भी हुई तो यह अधिकतम 24 सितंबर तक दिखाई दे सकती है। इसलिए कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐसी मुसीबतभरी बारिश की कोई संभावना नहीं दिखती। पर अक्‍तूबर के पहले सप्‍ताह तक हस्‍त नक्षत्र में सूर्य होने तक बारिश बिल्‍कुल नहीं होगी , ऐसा नहीं माना जा सकता। यत्र तत्र तो बारिश होगी ही , खासकर 3 अक्‍तूबर को खेल के उद्घाटन के दिन ही थोडी बहुत बारिश की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से बारिश से भयानक तबाही वाली कोई बात अब नजर नहीं आएगी।