आपको जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई मम्‍मी !!

ज्योतिष से जुड़े होने के कारण पापाजी की चर्चा अक्सर कर लेती हूँ , पर मम्मी को आज पहली बार याद कर रही हूँ . बिहार के नवादा जिले के एक गांव खत्रिया माधोपुर के एक समृद्ध परिवार में सत्‍तर वर्ष पूर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानि धनतेरस की संध्या  स्व करतार नारायण कपूर की पुत्री के रुप में साक्षात लक्ष्मी का जन्‍म हुआ। बचपन से विवाह होने तक पांच भाइयों और पांच भतीजों के मध्य अकेली होने के कारण काफी लाड प्यार से पालन पोषण होता रहा . किन्तु जैसा कि हर बेटियों का प्रारब्ध है, उन्‍होने जन्म वहां लिया , परंतु रोशनी फैलाने वह हमारे घर पहुच गयी।

शायद ही किसी दार्शनिक या विचारक का दाम्पत्य जीवन इतना सफल रहता है , जितना कि मेरे पापाजी का रहा । इसका सारा श्रेय मेरी मम्मी की कर्तब्यपरायणता , सहनशीलता , उदारता और त्याग को ही जाता है। पापाजी चालीस वर्षों तक अपनी ज्योतिष की साधना में लीन रहें , उनको कोई व्यवधान न देकर उन्होनें घर-गृहस्थी की सारी जवाबदेही अपने कंधों पर उठायी। सारे जीवन में अधिकारों की कोई चिंता नहीं , केवल कर्तब्य निभाती रही , चाहे सास-ससुर हों या देवर-ननद या देवरानिया-जिठानिया । भतीजे-भतीजीयों और बेटे-बेटियों की जिम्‍मेदारी तो थी ही उनकी। 

सभी बच्चों के उचित लालन-पालन करने , शिक्षा-दीक्षा देने में वे सफल हुईं। मैं जैसा समझती हॅ , इसका सबसे बड़ा कारण माना जा सकता है , उनके गजब के दृष्टिकोण को । सकारात्मक दृष्टिकोण के बारे में लोग कहते हैं - ‘गिलास में आधा पानी हो तो उसे आधा गिलास खाली न कहकर आधा गिलास भरा कहो।’ पर मेरी मम्मी तो दस प्रतिशत भरे गिलास को भी गिलास में पानी है , कहना पसंद करेगी। फूल की प्रशंसा तो हर कोई करता है , काटों की भी प्रशंसा करना कोई मेरी मम्मी से सीखे। किसी के हजारो खामियों को छोड़कर उसके गिने-चुने गुणों की प्रशंसा करते ही मैंने उन्हें देखा और सुना है। 

गाँव में न जाने कितने सास-ससुर इनकी जैसी बहू पाने , कितने ही नौजवान इनकी जैसी पत्नी या भाभी पाने , कितने बच्चे इनकी जैसी माँ और चाची , मामी पाने के लिए आहें भरते रह गए , पर जिन्हें आसानी से सुख मिल जाता है , वो कहाँ कभी उसकी कद्र कर पाता है। आज जब उम्र के उस मोड़ पर मैं खड़ी हूँ , जहाँ वे बीस वर्ष पूर्व वे खड़ी थीं , मैं उनकी महानता को नजरअंदाज नहीं कर पा रही । मेरा आदर्श मेरी माँ है और कोई नहीं , मैं उनके जैसी मेहनती, सहनशील और कर्तब्यपरायण बनना चाहती हूँ । मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि मुझे उतनी शक्ति प्रदान करे। ईश्‍वर आपको लंबी आयु और हर सुख दे मम्‍मी , आपको जन्‍म दिन की बहुत बहुत बधाई !!!!!!!

नवरात्र की शुभकामनाएं !!

navratri Scraps

ABCD पढते जाएं ..... जय माता दी कहते जाएं !!!!!


आपको ABCD आती है क्‍या ??

आती भी होगी तो ऐसी तो नहीं आती होगी ....

क्‍यूंकि ऐसी ABCD आपको अभी तक किसी ने नहीं सिखाई होगी ....

A ..... FOR ..... AMBE

B ..... FOR ..... BHAVANI

C ..... FOR ..... CHAMUNDA

D ..... FOR ..... DURGA

E ..... FOR ..... EKRUPI

F ..... FOR ..... FARSADHARNI

G ..... FOR ..... GAITRI

H ..... FOR ..... HINGLAAJ

I ..... FOR ..... INDRANI

J ..... FOR ..... JAGDAMBA

K ..... FOR ..... KALI

L ..... FOR ..... LAKSHMI

M ..... FOR ..... MAHAMAYA

N ..... FOR ..... NARAYANI

O ..... FOR ..... OMKARINI

P ..... FOR ..... PADMA

Q ..... FOR ..... QATYAYNI

R ..... FOR ..... RATNAPRIYA

T ..... FOR ..... TRIPUR SUNDARI

U ..... FOR ..... UMA

V ..... FOR ..... VAISHNAVI

W ..... FOR ..... WARAHI

Y ..... FOR ..... YATI

Z ..... FOR ..... ZYANA


ABCD पढते जाएं ... जय माता दी कहते जाएं .. पूरे परिवार सहित आपको नवरात्रि की असीम शुभकामनाएं !!!!!

(पिछले वर्ष नवरात्र पर मिला एक एस एम एस)




गत्यात्मक ज्योतिष क्या है ?

'गत्यात्मक ज्योतिष' टीम से मुलाक़ात करें।

अब राहत की सांस


एक समस्‍या से जूझते मुझे पूरे पंद्रह दिन हो गए , आज मैने राहत की सांस ली है। हुआ यूं कि कुछ दिनों से कंप्‍यूटर कुछ स्‍लो चल रहा था , जिसके कारण 6 सितंबर को मैने इसे फोरमेट किया। पर इसके बाद जब अपना सॉफ्टवेयर इंस्‍टॉल कर उसका उपयोग आरंभ किया , जिसे मैने VB6 पर कई वर्ष पहले बनाया था , तो उसमें पुराने डेटा पर तो सारे काम किए जा सकते थे , पर कोई नया डेटा सेव हो ही नहीं रहा था। हालांकि बाद में महसूस हुआ कि पुराने डेटा में कोई परिवर्तन भी वह एक्‍सेप्‍ट नहीं कर रहा है। इतना ही नहीं, सेव बटन पर क्लिक कर देने से ही एक एरर दिखाकर सॉफ्टवेयर को बंद कर देता है , एरर नं बता रहा था ....
2147286781(80030103)

मैने गूगल में इस एरर के बारे में जानकारी ढूंढ ढूंढकर समस्‍या को दूर करने के लिए दो चार दिनों में कई फाइलें इंस्‍टॉल और रन कराए , पर फल वही ढाक के तीन पात। दो तीन दिन बाद यह सोंचकर कि विंडो सही ढंग से इंस्‍टॉल नहीं हो सका है , कंप्‍यूटर को फिर से फोरमैट कर अच्‍छी तरह विंडो इंस्‍टॉल करवाया , पर इससे समस्‍या और बढ गयी। पहले तो मैं पुराने डेटा पर काम कर सकती थी , सिर्फ नया सेव करने की समस्‍या थी , पर इस बार तो सॉफ्टवेयर चल ही नहीं रहा था। एरर भी अब बदल गया था ....
2147319765(8002802b)

मैं न तो किसी की जन्‍मकुंडली का अध्‍ययन कर पा रही थी और न अन्‍य कोई गणना। इतने दिन कंप्‍यूटर की मदद लेने के बाद जोड , घटाव , गुणा , भाग करना आसान नहीं। इसके अभाव में कोई महत्‍वपूर्ण पोसट भी नहीं कर पा रही थी। अगस्‍त के अंत में ही लग्‍न राशिफल की गणना कर उसे शिड्यूल कर दिया था , जिसके कारण ब्‍लॉग जगत में उपस्थिति बनी हुई महसूस होती थी। पहले कभी भी अपने प्रोग्राम को चलाने के लिए विज्‍युअल बेसिक के सॉफ्टवेयर को इंस्‍टॉल करने की आवश्‍यकता नहीं पडी थी , पर इस बार वो भी किया , पर कोई फायदा नहीं। प्रोग्राम चलाने पर आरंभ में ही एरर आता रहा ....
msadodc.ocx could not be loaded

मैने इस फाइल को नंट पर ढूंढा और अलग से इंस्‍टॉल करने की भी कोशिश की , पर पीसी महाराज ने बताया कि यह फाइल उनके पास मौजूद है , रजिस्‍ट्रेशन नहीं होने से यह नहीं चल पा रही। अपने जान पहचान के कई कंप्‍यूटर विशेषज्ञों से इस बारे में बात हुई , जैसा जैसा निर्देश मिला करती गयी। इतने निर्देशों का पालन करते हुए फोरमेट किया गया तेज कंप्‍यूटर फिर से सुस्‍त पड गया। पर मेरे सॉफ्टवेयर को नहीं चलना था , नहीं चला।  उसके बाद एक साइट खोलने में यह समस्‍या भी दिखी , जिससे स्‍पष्‍ट हुआ कि डेटाबेस की कोई समस्‍या हो सकती है , पर यह समस्‍या कुछ सॉफ्टवेयरों के रन कराने के बाद दूर हुई।
Microsoft JET Database Engine error '80040e07'

मुझे याद आया , 2004 में वीबी की कक्षा ज्‍वाइन करने के महीनेभर के अंदर ही दिल्‍ली के विज्ञान भवन के एक सम्‍मेलन में जमा हुए वैज्ञानिकों को अपने शोध से संबंधित प्रजेंटेशन दिखाने के लिए इस सॉफ्टवेयर के छोटे संस्‍करण की शुरूआत की थी , सेटअप तैयार होने के बाद भाडे के कंप्‍यूटर में भी इसे चलाने में कोई समस्‍या नहीं आयी थी। उसके बाद दस से अधिक कंप्‍यूटर में यह सॉफ्टवेयर चल चुका  था। आज इस तरह धोखा खाने की कोई वजह समझ में नहीं आ रही थी। वैसे इस बार होम की जगह प्रोफेशनल को मैने जरूर इंस्‍टॉल किया था , पर दिल्‍ली से मेरे भाई ने खबर पहुंचायी कि वहां के प्रोफेशनल वर्सन में भी मेरा सॉफ्टवेयर आराम से चल रहा है। 

अपने कंप्‍यूटर में हार्डवेयर का दोष समझते हुए  अपना ध्‍यान इधर से हटा दिया , बेकार में प्रयास करने का क्‍या फायदा ?? किसी अच्‍छे डॉक्‍टर से इसका इलाज कराने के लिए तैयारी करने लगी । इस पंद्रह दिन में कुछ पारिवारिक मामलों में भी फंसी रही। घर पर मेहमानों की भी उपस्थिति थी , उनकी विदाई करने के बाद बोकारो जाने के लिए आज का शुभ मुहूर्त्‍त निकाला गया था। कल शाम को बैठे बिठाए अंतिम कोशिश करने का मूड बन आया। फिर से अपने सॉफ्टवेयर को इंस्‍टॉल कर आनेवाले एरर को गूगल में एक बार फिर से देखने की इच्‍छा हुई। सॉफ्टवेयर इंस्‍टॉल करने पर system32/msado20.tlb को रजिस्‍टर करने में समस्‍या दिखाई पडी। मुझे याद आया , ये समस्‍या पहले भी आती थी , मैं इग्‍नोर बटन पर क्लिक कर देती थी , शायद विंडो का वो वर्सन उसे इग्‍नोर कर देता हो। पर ये नया वर्सन इसे इग्‍नोर नहीं कर पा रहा था और डेटाबेस से सॉफ्टवेयर के कनेक्‍शन बनने में समस्‍या आ रही थी।

मैने गूगल सर्च में इसी समस्‍या का समाधान ढूंढने की कोशिश की , तो पहले पृष्‍ठ पर पहले नं पर बडा ही आसान समाधान मिला ....
There are several ways to resolve this problem. Which method you use depends on your circumstances and whether it is convenient for you to repackage the application. In Resolutions 1 and 2, you do not have to repackage the application. Resolutions 3, 4, and 5 require repackaging. Resolutions 4 and 5 are the only long-term fixes and are recommended.
Resolution 1
1.        Locate the Setup.lst file for your package.
2.        In any text editor, open Setup.lst.
3.        In Setup.lst, locate the line that references the ADO type library that is referenced in the error. If you are using Notepad, you can search for the file name.
4.        Change $(DLLSelfRegister) to $(TLBRegister).
5.        Save the file, and try the installation again.

बस मैने इसी इंस्‍ट्रक्‍शन पर काम किया और मुझे सफलता मिल गयी , और पंद्रह दिनों बाद कल शाम मैने अपने प्‍यारे सॉफ्टवेयर को सुचारू ढंग से चलते हुए पाया , इस कारण आज से काम शुरू हो गया है। इस दौरान बहुत पाठकों और अपने क्‍लाएंट्स के काम मैं समय पर न कर सकी। उनके इंतजार में बेवजह पंद्रह दिनों का इजाफा हो गया , अब धीरे धीरे सबका काम हो पाएगा।

ग्रहों का प्रभावी वर्ष ( भाग . 2 ) .....

लगभग 24 वर्ष की उम्र के बाद अक्‍सरहा लोग पूरे उत्‍साह के साथ जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष शुरू कर देते हैं। वे शादी कर पति पत्‍नी भी बन जाते हैं। परंपरागत ज्‍योतिष में मंगल को शक्ति और साहस का प्रतीक ग्रह माना जाता है और यदि मानव जीवन पर ध्‍यान दिया जाए , तो 24 वर्ष की उम्र के बाद शक्ति और साहस की प्रचुरता बनती है। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' ने अपने अध्‍ययन में पाया कि जन्‍मकुंडली में मंगल प्रतिकूल हो , तो जातक का प्रारंभिक दाम्‍पत्‍य जीवन या तो कलहपूर्ण होता है या वे 24 वर्ष की उम्र से 36 वर्ष की उम्र तक बेरोजगार की स्थिति में भटकते रहते हैं। इस अंतराल इनके जीवन में किसी तरह भी स्‍थायित्‍व नहीं आ पाता। जबकि मंगल मजबूत हो तो लोगों को कैरियर में अच्‍छी सफलता मिलती है। इनका दाम्‍पत्‍य जीवन भी सुखद होता है।  परंपरागत ज्‍योतिष शास्‍त्र में भी इस ग्रह को वयस में युवा सेनापति कहा गया है , अत: इस वय में मंगल के काल की पुष्टि हो जाती है।

36 वर्ष की उम्र तक शरीर की सारी ग्रंथियां बनकर तैयार हो जाती है , मनुष्‍य का नैतिक दृष्टिकोण निश्चित हो जाता है। इसलिए भारत के राष्‍ट्रपति बनने के लिए आवश्‍यक शर्त की उम्र 35 वर्ष है। इस उम्र में आते आते व्‍यक्ति को परिवार के प्रति लगाव बढने लगता है , इस वक्‍त जिम्‍मेदारियां भी भरपूर होती हैं। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' ने अपने अध्‍ययन में पाया कि यदि जन्‍मकालीन शुक्र मजबूत हो , तो जातक 36 वर्ष से 48 वर्ष तक का समय बहुत अच्‍छे एंग से गुजारते हैं , बच्‍चों के प्रति अपनी जिम्‍मेदारियों का निर्वाह आसानी से करने में सफलीभूत होते हैं/ रोजगार में रहनेवालों को अधिक मुनाफा होता है और नौकरी करनेवालों को प्रोन्‍नति मिलती है। यदि शुक्र कमजोर होता है तो जातक इस अवधि में पगतिकूल परिस्थितियों से गुजरना पडता है।

जिन कुंडलियों मे सूर्य बलवान होता है , उनके उत्‍कर्ष का समय 48 से 60 वर्ष तक की अवस्‍था होती है। सूर्य बलवान होने के कारण ही इंदिरा गांधी 48 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री बनी और 1977 तक यानि 60 वर्ष की उम्र तक बिना परिवर्तन के डटी रही। इसके विपरीत सूर्य कमजारे हो , तो 48 वर्ष से 60 वर्ष की उम्र तक जातकों को कई प्रकार की मुसीबत से जूझना पडता है। फलित ज्‍योतिष के प्राचीन ग्रंथो में मंगल को राजकुमार और सूर्य को राजा कहा गया है। मंगल के दशाकाल 24 वर्ष से 36 वर्ष की उम्र में पिता बनने की उम्र 24 वर्ष जोड दी जाए , तो वह 48 वर्ष से 60 वर्ष हो जाता है। अत: इसे सूर्य का दशाकाल माना जा सकता है।

प्राचीन ज्‍योतिष में बृहस्‍पति को सृजनशील वृद्ध ब्राह्मण माना जाता है। इसलिए हंस योग के फलीभूत होने की उम्र 60 वर्ष से 72 वर्ष की अवस्‍था  मानी जाती है। सचमुच मानव जीवन में इस उम्र को अत्‍यंत ही बडप्‍पन युक्‍त और प्रभावपूर्ण देखा गया है। जिसकी जन्‍मकुंडली में बृहस्‍पति मजबूत होता है , सेवावनवृत्ति के बाद निश्चिंति से जीवन निर्वाह करते हैं। बृहस्‍पति कमजोर होने पर उनकी जबाबदेहियां सेवानिवृत्ति के पश्‍चात् भी बनी रहती हैं। पं जवाहर लाल नेहरू जी की जन्‍मकुंडली में बृहस्‍पति बहुत मजबूत स्थिति में था नेहरू जी 60 वर्ष की उम्र से 72 वर्ष की उम्र तक लागातार भारत के प्रधानमंत्री बने रहें। इसलिए इस उम्र में बृहस्‍पति के दशाकाल की पुष्टि हो जाती है।

'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' ने 72 वर्ष की उम्र के बाद मानव जीवन पर शनि का प्रभाव महससू किया है , क्‍यूंकि यदि महात्‍मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू की कुंडली पर ध्‍यान दिया जाए , तो यही मिलेगा कि दोनो के ही मारक भाव द्वितीय भाव में शनि स्थित है। इन दोनो महापुरूषों की मृत्‍यु 72 वर्ष की उम्र के बाद हुई। परंपरागत ज्‍योतिष भी शनि को अतिवृद्ध के रूप में स्‍वीकार करता है। शनि बली सभी मनुष्‍य इस उम्र में सुखी होते हैं , जबकि जन्‍मकालीन शनि कमजोर हो तो इस उम्र में वे प्रतिकूल स्थिति में जीने को बाध्‍य होते हैं।

84 वर्ष के बाद 120 वर्ष तक की आयु , जो मनुष्‍य की परमायु बतायी गयी है , का समय तीन ग्रहों यूरेनस , नेप्‍च्‍यून और प्‍लूटों को दिया जा सकता है। इनमें से प्रत्‍येक ग्रह को बारी बारी से 12 - 12 वर्षों का समय दिया जा सकता है। इस प्रकार किसी जातक के उम्र विशेष पर विभिन्‍न ग्रहों का प्रभाव इस प्रकार देखा जा सकता है .........
जन्‍म से 12 वर्षों तक का समय .... बाल्‍यावस्‍था ..... चंद्रमा,
12 से 24 वर्षों तक का समय .... किशोरावस्‍था ...... बुध ,
24 से 36 वर्षों तक का समय ..... युवावस्‍था ...... मंगल,
36 से 48 वर्षों तक का समय .... पूर्व प्रौढावस्‍था ... शुक्र,
48 से 60 वर्षों तक का समय ..... उत्‍तर प्रौढावस्‍था .... सूर्य,
60 से 72 वर्ष तक का समय ..... पूर्व वृद्धावस्‍था .... बृहस्‍पति,
72 से 84 वर्ष तक का समय ..... उत्‍तर वृद्धावस्‍था ..... शनि,

इस प्रकार सभी ग्रह कुंडली में प्राप्‍त बल और स्थिति के अनुसार मानव जीवन में अपनी अवस्‍था विशेष में प्रभाव डालते रहते हैं। लेकिन इन 12 वर्षों में भी प्रथम छह वर्ष और बाद के छह वर्ष में अलग अलग प्रभाव दिखाई देता है। इसके अलावे इन 12 वर्षों में भी बीच बीच में उतार चढाव का आना या छोटे छोटे अंतरालों में खास परिस्थितियों का उपस्थित होने का ज्ञान इस पद्धति से संभव नहीं है। 12 वर्ष के अंतर्गत होनेवाले उलटफेर का निर्णय हम 'लग्‍न सापेक्ष गत्‍यात्‍मक गोचर प्रणाली' से करें , तो दशाकाल से संबंधित सारी कठिनाइयां समाप्‍त हो जाएंगी।