श्री कृष्ण बाल लीला का राज

 श्री कृष्ण बाल लीला

(About Krishna in Hindi)

भले ही महाभारत की कहानी के कुछ अंश को लेखक की एक कपोल कल्‍पना मान लें , पर यह मेरी व्‍यक्तिगत राय है कि पूरे महाभारत की कहानी पर प्रश्‍न चिन्‍ह नहीं लगाया जा सकता है। लोग भगवान कृष्ण को एक कथा या एक कहानी मान सकते हैं , पर ग्रंथो में उल्लिखित उनकी जन्‍मकुंडली एक ऐसा सत्‍य है , जो उनके साक्षात पृथ्‍वी पर जन्‍म लेने की कहानी कहता है। सिर्फ जन्‍म ही नहीं , उन्‍‍होने पूर्ण तौर पर मानव जीवन जीया है। इनके अनेक रूप हैं और हर रूप की लीला अद्भुत है। भले ही लोग उन्‍हें ईश्वर का अवतार कहते हों , पर बाल्‍यावस्‍था में उन्‍होने सामान्‍य बालक सा जीवन जीया है । कभी मां से बचने के लिए मैया मैंने माखन नहीं खाया , तो कभी मां से पूछते हैं , राधा इतनी गोरी क्यों है, मैं क्यों काला हूं? , कभी शिकायत करते हैं कि दाऊ क्यों कहते हैं कि तू मेरी मां नहीं है।

About Krishna in Hindi

कृष्ण भक्ति में डूबे उनकी बाल लीलाओं का वर्णन करने वाले कवियों में सूरदास का नाम सर्वोपरि है। पर भले ही सूरदास ने कृष्ण के बाल्य-रूप का सजीव और मनोवैज्ञानिक वर्णन करने में अपनी कल्पना और प्रतिभा का कुछ सहारा लिया हो , पर कृष्‍ण जी की जन्‍मकुंडली से स्‍पष्‍ट है कि वास्‍तव में उनका बालपन बहुत ही संतुलित रहा होगा । इसमें शक नहीं की जा सकती कि बालपन में ही एक एक घटनाओं पर उनकी दृष्टि बहुत ही गंभीर रही होगी। और बाल-कृष्ण की एक-एक चेष्टाएं पीढी दर पीढी चलती हुई सूरदास की पीढी तक पहुंच गयी होगी। भले ही उसके चित्रण में सूरदास ने अपनी कला का परिचय दे दिया हो।


ये रही कृष्‍ण जी की जन्‍मकुंडली ........


'लग्‍नचंदायोग' की चर्चा करते हुए लेख में मैने लिखा था कि ज्‍योतिष में आसमान के बारहों राशियों में से जिसका उदय बालक के जन्‍म के समय पूर्वी क्षितिज पर होता रहता है , उसे बालक का लग्‍न कहते हैं। अब इसी लग्‍न में यानि उदित होती राशि में चंद्रमा की स्थिति हो , तो बालक की 'जन्‍मकुंडली' में लग्‍नचंदायोग बन जाता है , जिसे ही क्षेत्रीय भाषा में 'लगनचंदा योग' कहते हैं। कृष्‍ण जी की कुंडली में 'लग्‍नचंदा योग स्‍पष्‍ट दिख रहा है , जो कृष्‍ण जी के बचपन को महत्‍वपूर्ण बनाने के लिए काफी है।

 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की जानकारी देते हुए लिखे गए अपने एक लेख में चंद्रमा की कमजोरी और मजबूती की चर्चा करने के क्रम में मैने लिखा है यदि चंद्रमा की स्थिति सूर्य से 0 डिग्री की दूरी पर हो, तो चंद्रमा की गत्यात्मक शक्ति 0 प्रतिशत, यदि 90 डिग्री, या 270 डिग्री दूरी पर हो, तो चंद्रमा की गत्यात्मक शक्ति 50 प्रतिशत और यदि 180 डिग्री की दूरी पर हो, तो चंद्रमा की गत्यात्मक शक्ति 100 प्रतिशत होती है। चूंकि कृष्‍ण जी ने अष्‍टमी के दिन जन्‍म लिया , जब सूर्य और चंद्रमा के मध्‍य कोणिक दूरी 90 डिग्री की होती है , इसलिए उनके जन्‍मकालीन चंद्रमा को 50 प्रतिशत अंक प्राप्‍त होते हैं। 

इसी लेख में मैने आगे लिखा है कि चंद्रमा की गत्यात्मक शक्ति के अनुसार ही जातक अपनी परिस्थितियां प्राप्त करते हैं। यदि चंद्रमा की गत्यात्मक शक्ति 50 प्रतिशत हो, तो उन भावों की अत्यिधक स्तरीय एवं मजबूत स्थिति, जिनका चंद्रमा स्वामी है तथा जहां उसकी स्थिति है, के कारण बचपन में जातक का मनोवैज्ञानिक विकास संतुलित ढंग से होता है। इस नियम से कृष्‍ण जी का मनोवैज्ञानिक विकास बहुत ही संतुलित ढंग से होना चाहिए। 

अब यदि भाव यानि संदर्भ की की बात की जाए , तो वृष लग्‍न लग्‍न में मजबूत चांद में बच्‍चे का जन्‍म हो , तो बच्‍चों का भाई बहन , बंधु बांधव के साथ अच्‍छा संबंध होता है। बाल सखाओं के साथ्‍ा मीठी मीठी हरकतों के कारण कृष्‍ण जी का बचपन यादगार बना रहा। यहां तक कि बाल सखा सुदामा को जीवनपर्यंत नहीं भूल सके। 

इसके अतिरिक्‍त 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की दृष्टि से एक और ग्रहीय स्थिति बनती है , जिसका उल्‍लेख भी मैने 'लग्‍नचंदा योग' वाले लेख में कर चुकी हूं। 'लग्‍नचंदा योग' के साथ यदि षष्‍ठ भाव में अधिकांश ग्रहों की स्थिति हो तो इस योग का प्रभाव और अधिक पडता है। कृष्‍ण जी के षष्‍ठ भाव में शुक्र और शनि दोनो ही ग्रहों की मजबूत स्थिति से कृष्‍ण जी के बचपन को महत्‍वपूर्ण बनाती है। इसके अलावे जिस ग्रह की पहली राशि में चंद्रमा स्थित है , उसी ग्रह की दूसरी राशि में शुक्र और शनि की स्थिति होने के कारण जीवन में झंझट भी आए और उन्‍होने उनका समाधान भी किया। शुक्र और शनि क्रमश: शरीर , व्‍यक्तित्‍व , प्रभाव , भाग्‍य और प्रतिष्‍ठा के मामले थे और ये सब बचपन में मजबूत बने रहें।  यही था कृष्‍ण की संतुलित बाल लीलाओं का राज !

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    मिथ्‍या भ्रम

     

    Kahani in Hindi me

    kahani in hindi me

    मुझे परंपरागत मान्‍यताएं बहुत पसंद है , क्‍यूंकि उससे सामान्‍य तौर पर कुछ नुकसान नहीं दिखाई पडता तथा ध्‍यान देने पर उसमें अनेक अच्‍छी बातें छुपी महसूस होती हैं। पर कभी कभी समाज में प्रचलित कुछ ऐसे अंधविश्‍वासों को भी शामिल देखती हूं , जिससे किसी का नुकसान हो रहा हो , तो वह मुझे बुरा लगता है। इसी सोंच में मैने एक कहानी ‘मिथ्‍याभ्रम’ लिखी थी , यह एक सत्‍य घटना पर आधारित है , जो आपको पढवा रही हूं। इसके अलावे मेरी दो कहानियां ‘एक झूठ’ और ‘पहला विरोध साहित्‍य शिल्‍पी में पहले प्रकाशित हो चुकी हैं , जिसे कभी समय निकालकर अवश्‍य पढें। तो लीजिए ‘मिथ्‍याभ्रम’ को पढना शुरू कीजिए ...... 

    ‘क्‍या हुआ, ट्रेन क्‍यूं रूक गयी ?’ रानी ने उनींदी आंखों को खोलते हुए पूछा। ’अरे, तुम सो गयी क्‍या ? देखती नहीं , बोकारो आ गया।‘ बोकारो का नाम सुनते ही वह चौंककर उठी। तीन दिनों तक बैठे बैठे कमर में दर्द सा हो रहा था। कब से इंतजार कर रही थी वह , अपने गांव पहुंचने का , इंतजार करते करते तुरंत ही आंख लग गयी थी। अब मंजिल काफी नजदीक आ गयी थी। उसने अपने कपडे समेटे , मोनू को संभाला और सीट पर एक नजर डालती हुई ट्रेन से उतरने के लिए क्‍यू में खडी हो गयी। 

    दस वर्षों बाद वह मद्रास से वापस आ रही थी। गांव आने का कोई बहाना इतने दिनों तक नहीं मिल रहा था। गांव का मकान भी इतने दिनों से सूना पडा था। अपने अपने रोजगार के सिलसिले में सब बाहर ही जम गए थे। पर इस बार चाचाजी की जिद ने उन सबके लिए गांव का रास्‍ता खोल ही दिया था। वे अपने लडके की शादी गांव से ही करेंगे। सबके पीछे वह सामानों को लेकर ट्रेन से उतर पडी। एक टैक्‍सी ली और गांव के रास्‍ते पर बढ चली। 

    टैक्‍सी जितनी ही तेजी से अपने मंजिल की ओर जा रही थी , उतनी ही तेजी से वह अतीत की ओर। मद्रास के महानगरीय जीवन को जीती हुई वह अबतक जिस गांव को लगभग भूल ही चली थी , वह अचानक उसकी आंखों के सामने सजीव हो उठा था। घटनाएं चलचित्र के समान चलती जा रही थी। उछलते कूदते , उधम मचाते उनके कदम .. कभी बाग बगीचे में तो कभी खेल के मैदानों में। अपना लम्‍बा चौडा आंगन भी उन्‍हें धमाचौकडी में मदद ही कर देता था। 

    खेलने का कोई साधन नहीं , फिर भी खेल में इतनी विविधता। जो मन में आया , वही खेल लिया। खेल के लिए कार्यक्रम बनाने में उसकी बडी भूमिका रहती। वास्‍तविक जीवन में जो भी होते देखती , खेल के स्‍थान पर उतार लेती थी। घर के कुर्सी , बेंच , खाट और चौकी को गाडी बनाकर यात्रा का आनंद लेने का खेल बच्‍चों को खूब भाता था। कोई टिकट बेचता , कोई ड्राइवर बनता , तो कोई यात्री। रूट की तो कोई चिंता ही नहीं थी , उनकी मनमौजी गाडी कहीं से कहीं पहुंच सकती थी।

    तब सरकार की ओर से परिवार नियोजन का कार्यक्रम जोरों पर था। भला उनके खेल में यह कैसे शामिल न होता। कुर्सी पर डाक्‍टर , बेंच पर उसके सहायक और खाट चौकी पर लेटे हुए मरीज । चाकू की जगह चम्‍मच , पेट काटा , आपरेशन किया , फटाफट घाव ठीक , एक के बाद एक मरीज का आपरेशन। भले ही अस्‍पताल के डाक्‍टर साहब का लक्ष्‍य पूरा न हुआ हो , पर उन्‍होने तो लक्ष्‍य से अधिक काम कर डाला था।

    इसी तरह गांव में एक महायज्ञ का आयोजन हुआ। यज्ञ के कार्यक्रम को एक दिन ही देख लेना उनके लिए काफी था। अपने आंगन में यज्ञ का मंडप तैयार बीच में हवन कुंड और चारो ओर परिक्रमा के लिए जगह । मुहल्‍ले के सारे बच्‍चे हाथ जोडे हवनकुंड की परिक्रमा कर रहे थे और ‘श्रीराम , जयराम , जय जय राम , जय जय विघ्‍न हरण हनुमान’ के जयघोष से आंगन गूंज रहा था। कितना स्‍वस्‍थ माहौल था , बच्‍चे भी खुश रहते थे और अभिभावक भी। 

    लेकिन इसी क्रम में उसे एक बच्‍चे दीपू की याद अचानक आ गयी। जब सारे बच्‍चे खेल रहे होते , वह एक किनारे खडा उनका मुंह तक रहा होता। ‘दीपू , तुम भी आ जाओ’ उसे बुलाती , तो धीरे धीरे चलकर उनके खेल में शामिल होता। पर दीपू को शामिल करके खेलना शुरू करते ही तुरंत रानी को कुछ याद आ जाता और वह दौडकर घर के एक खास कमरे में जाती। उसका अनुमान बिल्‍कुल सही होता। दीपू की मम्‍मी उस कमरे में फरही बना रही होती। अपनी कला में पारंगत वह छोटे छोटे चावल को मिट्टी के बरतन में रखे गरम रेत में तल तलकर निकाल रही होती। 

    उसकी दिलचस्‍पी चावल के फरही में कम होती , इसलिए वह अंदर जाकर चने निकाल लाती। ’काकी, इन चनों को तल दो ना’ वह उनसे आग्रह करती। ’इतनी जल्‍दी तलने से ये कठोर हो जाएंगे और इन्‍हे खाने में तुम्‍हारे दांत टूट जाएंगे, थोडी देर सब्र करो।‘ वह चने में थोडे नमक , हल्‍दी और पानी डालकर उसे भीगने को रख देती। अब भला उसका खेल में मन लग सकता था। हर एक दो मिनट में अंदर आती और फिर निराश होकर बाहर आती , लेकिन कुछ ही देर में उसे सब्र का सोंधा नमकीन फल मिल जाता और चने के भुंजे को सारे बच्‍चे मिलकर खाते। इस तरह शायद ही कभी दीपू को उनके साथ खेलने का मौका मिल पाया हो। 

    टैक्‍सी अब उसके गांव के काफी करीब आ चुकी थी। रबी के फसल खेतों में लहलहा रहे थे। बहुत कुछ पहले जैसा ही दिखाई पड रहा था। शीघ्र ही गांव का ब्‍लाक , मिड्ल स्‍कूल , बस स्‍टैंड , गांव का बाजार , सब क्रम से आते और देखते ही देखते आंखो से ओझल भी होते जा रहे थे। थोडी ही देर में उसका मुहल्‍ला भी शुरू हो गया था। बडे पापा का मकान , रमेश की दुकान , हरिमंदिर , शिवमंदिर , सबको देखकर खुशी का ठिकाना न था। 

    पर एक स्‍थान पर अचानक तीनमंजिला इमारत को देखकर उसके तो होश उड गए। यह मकान पहले तो नहीं था। फिर उसे दीपू की याद आ गयी। इसी जगह तो दीपू का छोटा सा दो कमरों का खपरैल घर था , जिसके बाहरवाले छोटे से कमरे को ड्राइंग , डाइनिंग या किचन कुछ भी कहा जा सकता था तथा उसी प्रकार अंदरवाले को बेडरूम , ड्रेसिंग रूम या स्‍टोर। यहां पर इस मकान के बनने का अर्थ यही था कि दीपू के पापा ने अपनी जमीन किसी और को बेच दी , क्‍यूंकि इतनी जल्‍दी उनकी सामर्थ्‍य तीनमंजिला मकान बनाने की नहीं हो सकती थी। 

    घर पहुंचने से ठीक पहले उसका मन बहुत चिंतित हो गया था। पता नहीं वे लोग अब किस हालत में होंगे । दीपू के पापा तो बेरोजगार थे , उसकी मम्‍मी ही दिनभर भूखी , प्‍यासी , अपने भूख को तीन चार कप चाय पीकर शांत करती हुई लोगों के घरों में फरही बनाती अपने परिवार की गाडी को खींच रही थी। बृहस्‍पतिवार को वे भी बैठ जाती थी , क्‍यूंकि गांव में इस दिन चूल्‍हे पर मिट्टी के बरतन चढाना अशुभ माना जाता है। कहते हैं , ऐसा करने से लक्ष्‍मी घर से दूर हो जाती है , धन संपत्ति की हानि होती है।

    एक दिन बैठ जाना दीपू की मम्‍मी के लिए बडी हानि थी। कुछ दिनों तक उन्‍होने इसे झेला , पर बाद में एक रास्‍ता निकाल लिया। अब वे बृहस्‍पतिवार को अपने घर में फरही बनाती मिलती , जो उनके घर से सप्‍ताहभर की बिक्री के लिए काफी होता। ’काकी , तुम अपने घर में बृहस्‍पतिवार को मिट्टी के बर्तन क्‍यू चढाती हो ? ‘ वह अक्‍सर उनसे पूछती। उनके पास जबाब होता ‘ बेटे , मुझे घरवालों के पेट भरने की चिंता है , मेरे पास कौन सी धन संपत्ति है , जिसे बचाने के लिए मुझे नियम का पालन करना पडे’ तब उसका बाल मस्तिष्‍क उनकी इन बातों को समझने में असमर्थ था। 

    पर अभी उसका वयस्‍क वैज्ञानिक मस्तिष्‍क दुविधा में पड गया था। ’क्‍या जरूरत थी , दीपू के मम्‍मी को बृहस्‍पतिवार को अपने घर में फरही बनाने की , लक्ष्‍मी सदा के लिए रूठ गयी , जमीन भी बेचना पड गया , अपनी जमीन बेचने के बाद न जाने वे किस हाल में होंगी , दीपू भी न जाने कहां भटक रहा होगा’ सोंचसोंचकर उसका मन परेशान हो गया था। टैक्‍सी के रूकते ही वे लोग घर के अंदर गए , परसों ही शादी थी , लगभग सारे रिश्‍तेदार आ चुके थे , इसलिए काफी चहल पहल थी। मिलने जुलने और बातचीत के सिलसिले में तीन चार घंटे कैसे व्‍यतीत हो गए , पता भी न चला। 

    अब थोडी ही देर में रस्‍मों की शुरूआत होने वाली थी। चूंकि घर में रानी ही सबसे बडी लडकी थी , उसे ही गांव के सभी घरों में औरतों को रस्‍म में सम्मिलित होने के लिए न्‍योता दे आने की जबाबदेही मिली। वह दाई के साथ इस काम को करने के लिए निकली। सबों के घर तो जाने पहचाने थे , पर सारे लोगों में से कुछ आसानी से पहचान में आ रहे थे , तो कुछ को पहचानने के लिए उसके दिमाग को खासी मशक्‍कत करनी पड रही थी।

    एक मकान से दूसरे मकान में घूमती हुई वह आखिर उस मकान में पहुच ही गयी , जिसने चार छह घंटे से उसे भ्रम में डाल रखा था। इस मकान के बारे में उसने दाई से पूछा तो वह भाव विभोर होकर कहने लगी ‘अरे , दीपू जैसा होनहार बेटा भगवान सबको दे। उसने व्‍यापार में काफी तरक्‍की की और शोहरत भी कमाया । उसने ही यह मकान बनवाया है। इस बीच पिताजी तो चल बसे , पर अपनी मां का यह काफी ख्‍याल रखता है। अभी तीन चार महीने पूर्व इसका ब्‍याह हुआ है। पत्‍नी भी बहुत अच्‍छे घर से है‘ दाई उसकी प्रशंसा में अपनी धुन में कुछ कुछ बोले जा रही थी और वह आश्‍चर्यचकित उसकी बातों को सुन रही थी। 

    हां , उसके वैज्ञानिक मस्तिष्‍क को चुनौती देनेवाला एक मिथ्‍याभ्रम टूटकर जरूर चकनाचूर हो चुका था.

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      Success quotes in hindi

       

      Success Quotes in Hindi


      Success Quotes in Hindi

      • धन के पीछे भागने की बजाए अपने जुनून के पीछे चलें।
      • मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दें
      • बुद्धिमान व्यक्ति कभी चिंता नहीं करते, वो हमेशा चिंतन करते हैं |
      • सफलता का मुख्य आधार सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास है
      • कोई भी लक्ष्य इंसान के संघर्ष से बड़ा नहीं हारा वही जो लड़ा नही
      • हम अपनी योग्यता के दम पर आगे बढ़ते हैं किसी की दया से नहीं |
      • मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची हो.रास्ते तो हमारे पैरो के निचे ही होते है.
      • अपनापन छलके जिसकी आँखों में ऐसा कोई एक ही मिलता है लाखो मे
      • ये जिंदगी है उलझेगे नहीं तो सुलझेगे कैसे, बिखरेगे नहीं तो निखरेगे कैसे|
      • मनुष्य और पतंग जब ज्यादा उड़ने लगे तो समझ ले कि अब ये कटने वाला है.
      • यही जगत की रित है यही जगत की नित., मन के हारे हार है मन के जीते जीत.
      • वे पागल लोग जो दुनिया बदलने की सोच पाते हैं, सचमुच वे ही दुनिया बदलते हैं
      • आदमी बड़ा हो या छोटा कोई फर्क नहीं पड़ता उसकी कहानी बड़ी होनी चाहिए  
      • जितने वाले कुछ अलग चीज़े नहीं करते बस वो चीज़ो को अलग तरीके से करते हैं
      • यदि मंज़िल न मिले तो रास्ते बदलो क्योंकि वृक्ष अपनी पत्तियाँ बदलते हैं जड़े नहीं
      • कोशिश हमेशा आखरी सांस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
      • अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे हमसे मिलाने में लग जाती है |
      • जीवन में कोई शॉर्टकट रास्ता नहीं होता, मंजिल हमेशा मेहनत करके हासिल की जाती है |
      • जीवन में कुछ फैसले बहुत सख्त होते है.यही फैसला जीवन में आप का रुख बदल देता है.
      • जीतने के लिये खुद मे हौसला होना चाहिये क्योकि हारने के लिये बस एक डर ही काफी है 
      • सफल आदमी वह होता है जो अपने ऊपर फेंके गए पत्थरों से मजबूत नींव खड़ी कर सकता है।
      • सफल होने के लिए ज़रूरी है कि आप में सफलता की आस असफलता के डर से कहीं अधिक हो.
      • जीतना और हारना आपके उपर निर्भर है मान लिये तो हार गये और ठान लिये तो समझो जीत गये
      • सफलता हमारा परिचय दुनिया को करवाती है और असफलता हमें दुनिया का परिचय करवाती है
      • जिंदगी में इतनी तेजी से आगे बढ़ो कि लोगों के बुराई के धागे आपके पैरों में उलझने से पहले ही टूट जाएं |
      • अच्छाई करते रहिये एक बहते पानी की तरह क्योकि बुराई एक कचरे होते है जो अपने आप किनारे आ जाती है ।
      • दूर से हमें आगे के सभी रास्ते बंद नजर आते हैं क्योंकि सफलता के रास्ते हमारे लिए तभी खुलते जब हम उसके बिल्कुल करीब पहुँच जाते है |
      • अगर आप उन बातों एंव परिस्थितियों की वजह से चिंतित हो जाते है, जो आपके नियंत्रण में नहीं तो इसका परिणाम समय की बर्बादी एवं भविष्य पछतावा है |
      • आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (24 घंटे) मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है |

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        29 अप्रैल को क्या होने वाला है ?

         

        29 अप्रैल को क्या होने वाला है ?

        जहां एक ओर भारत समेत दुनिया भर के तमाम देश इस वक्त चीन से फैले कोरोना वायरस (Coronavirus) से जूझ रहे हैं, कोविड-19 से संक्रमण और मौत का आंकड़ा लगाता बढ़ता जा रहा है, वहीँ दूसरी और  एक और खगोलीय घटना से लोग डरे हुए हैं।  सोशल मीडिया पर कई खबरें चल रही हैं, जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि दुनिया ख़त्म होने वाली है।  लोग काफी भयभीत हैं कि 29 अप्रैल को क्या होने वाला है, क्या सच में 29 अप्रैल तक दुनिया खत्म हो जाएगी ?

        29 अप्रैल को क्या होने वाला है ?


        दरअसल 29 अप्रैल को एक एस्‍टेरॉयड यानि एक विशाल उल्का पिंड सौरमंडल , खासकर पृथ्वी से होकर गुजरने वाला है। नासा के मुताबिक करीब 2 हजार फुट क्षेत्रफल वाले 1998 OR2 नाम का उल्का पिंड भूमि से 1.8 मिलियन किलो मीटर दूर होगा।  यह भी सच है कि पिछले 400 वर्षों में या आने वाले 500 वर्षों में भूमि के इतनी करीब आने वाले उल्का पिंड और कोई नहीं है।  पर  झूठे मैसेज में दावा है कि 29 अप्रैल को दुनिया खत्म हो जाएगी।  समर्थन में कुछ फोटो और वीडियो भी फैलाए जा रहे हैं। 

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        ऐसे खबरों को शेयर न करना उचित है !

        लेकिन इससे पृथ्वी के असुरक्षित होने का खतरा या डरने वाली कोई बात नहीं है। यदि ऐसा होता तो नासा के Sentry Impact Risk Page पर यह खबर अवश्य प्रकाशित की जाती , क्योंकि नासा का ये पेज पृथ्वी पर प्रभाव डालने वाली संभावित घटनाओं पर ध्यान रखता है। सोशल मीडिया पर चल रहे इस प्रकार की अफवाहों के फैलने का कोई आधार नहीं होता, इसलिए आपको भी सावधान रहने की जरूरत है। यदि आपके पास ऐसी कोई स्टोरी आती है, तो उसे आगे फॉरवर्ड न करें और खुद भी भर्मित न हों , जबतक इस तरह की खबर का कोई आधार नहीं होता। 

        गत्यात्मक ज्योतिष की दृष्टि से भी २९ अप्रैल २०२१ को गोचर में मौजूद ग्रहों की स्थिति और गत्यात्मक शक्ति भी अच्छी दिखाई दे रही है, इसलिए किसी प्रकार की आशंका भी व्यर्थ है। हालाँकि उस दिन मंगल ग्रह की स्थिति कुछ कमजोर है, मंगल जिन भावों का स्वामी है, उससे सम्बंधित तकलीफ उपस्थित हो सकती है , पर अधिक चिंता की वजह नहीं दिखती .


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          हमारे एप्प से समझें, पूरे 2021 में स्वास्थ्य ??

           

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          जब आप हमारे एप्प के वार्षिक पूर्वानुमान लिंक पर क्लिक करेंगे तो आपको DROPDOWN में पहले नंबर पर स्वास्थ्यव्यक्तित्वआत्मविश्वास आदि से सम्बंधित भविष्यवाणियाँ दिखाई देंगी। निःशुल्क सब्सक्रिप्शन लेने के बाद आप यहाँ आपके स्वास्थ्यव्यक्तित्वआत्मविश्वास आदि मामलों में  कई तरह की बातें पूरे दो साल तक के लिए कई समय-अंतराल देकर लिखी हुई होंगी।Health horoscope in hindi this month



          1. स्वास्थ्य की स्थिति अच्छी रहनी चाहिए। स्वास्थ्य को लेकर निश्चिंती का अहसास होना चाहिए। आत्मविश्वास की प्रचुरता बनी रहनी चाहिए। आत्मविश्वास को बढ़ानेवाली बातें होती रहनी चाहिए।
          2. स्वास्थ्य गड़बड़ रह सकता है। स्वास्थ्य को लेकर निराशा महसूस हो सकती है। आत्मविश्वास को कमजोर करनेवाली घटनाएं हो सकती हैं। आत्मविश्वास काम नहीं कर सकता है।

          ऊपर लिखे गए दोनों तरह  पूर्वानुमान सामान्य से कुछ अच्छी और सामान्य से कुछ बुरी स्थिति की जानकारी देता है इसमें बहुत बड़ी बात नहीं होतीजबतक स्वास्थ्यव्यक्तित्वआत्मविश्वास का प्रतिनिधित्व करनेवाले आपके जन्मकालीन ग्रह कमजोर न हों और आपके ये मामले सेंसिटिव न चल रहे हों। लेकिन जब ऐसे पूर्वानुमान लिखे गए हों ---------

          Saturn Gochar fal 2021

          1. कुछ शुभ-ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से सम्बंधित सफलताख़ुशी या आनंददायक वातावरण मिलना चाहिए। इसे प्राप्त करने के लिए इन मामलों में पूरा ध्यान बना रहना चाहिए। इस दिशा में किया जानेवाला मेहनत भी फलदायी होना चाहिए। अपनी पहचान की इच्छा बननी चाहिए । स्वास्थ्य को मजबूती देने के कार्यक्रम बनने चाहिए। व्यक्तिगत गुणों को बढ़ाने में गंभीरता बननी चाहिए। स्मार्ट लोगों का सुखद साथ मिलना चाहिए।
          2. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से सम्बंधित असफलता कष्ट या दवाबभरा वातावरण उपस्थित हो सकता है जिसको सुधारने के लिए इन मामलों पर पूरा ध्यान बना रह सकता है। यह किनके लिए कितना प्रभावी होगा इसे स्पष्टतः समझने और सटीक निर्णय लेने के लिए कभी-कभी हमारा कंसल्टेशन लेना जरूरी महसूस हो सकता है।  स्वास्थ्य की कमजोर हो रही स्थिति की ओर ध्यान जा सकता है। व्यक्तित्व की किसी कमजोरी को दूर करने के लिए भी विकल्प ढूंढे जा सकते हैं। पर सबको सुधारकर आत्मविश्वास को मजबूती न दे पाने का अफ़सोस बन सकता है।

          Jupiter Gochar fal 2021

          ऐसे दोनों पूर्वानुमान बहुत ही अच्छी और बहुत ही बुरी स्थिति के संकेतक हैं। हम सामान्य बोलचाल में भी इसे किसी का फॉर्म में होना और किसी का फॉर्म में न होना कहते हैं। इसलिए ऐसी भविष्यवाणियों के पहले अतिरिक्त तैयारी की जरूरत है।

          कभी कभी सामान्य पूर्वानुमान में ऐसी बातें लिखी मिलेंगी -----


          1. कुछ क्रियाशील ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से संबंधित जिम्मेदारी बढ़नी चाहिए। इन मामलों में या तो स्वयं बदलाव होना चाहिए या परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बननी चाहिए कि इनमे मजबूती या बदलाव लाए जाएँ।

          Mars Gochar fal 2021

          देखने में यह पूर्वानुमान बिलकुल सामान्य लग रहापर यह समय-अंतराल भी बड़े परिवर्तन देता है। पर यह पॉजिटिव होगा या नेगेटिवइसे बतलाना अभी के समय में एप्प के लिए मुश्किल होता हैइसलिए इसे यूँ ही छोड़ दिया गया है।

          कहीं-कहीं स्वास्थ्यव्यक्तित्वआत्मविश्वास के ऋणात्मक के साथ भी वाक्य जोड़ा गया है जो ऋणात्मकता के तीव्रता को बढ़ाता है ------

          Venus Gochar fal 2021

          1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों में मनोनुकूल माहौल के नहीं बनने से या असफलता प्राप्त होने से कुछ निराशा सी बन सकती हैं। इन मामलों के माहौल को बदलने की कोशिशें भी बेकार हो सकती हैं।

          लेकिन  इस तरह के  वाक्यों के रहने से बाधाएं बहुत मामूली रहेंगी -----

          1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों में सम्बन्ध की गड़बड़ी या इससे सम्बंधित किसी कार्य के आगे न बढ़ने जैसी थोड़ी बाधा आ सकती हैं। पर उसके बाद माहौल अनुकूल होना चाहिए।
          किसी समय में ऐसे वाक्य हों तो -----


          1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों की कुछ कमजोरी बनी रह सकती हैं । ऐसे समय में कोई बड़ा कदम उठाने से झंझट बढ़ सकते हैं।
          इन मामलों में जबतक जरूरी न होकोई काम न शुरू करें।

          Mercury gochar fal 2021


          किसी समय में ऐसे वाक्य हो सकते हैं  -----

          1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से ये सारे मामले कठिनाई या असफलता उपस्थित कर किसी मामले से सम्बंधित वातावरण को ऋणात्मक बना सकते हैं जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव बुरा पड सकता है।

          इसके अतिरिक्त भविष्यवाणियों में किसी समय में ऐसे वाक्य हो सकते हैं  -----


          1. कुछ शुभ-ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों के द्वारा सुख या सफलता मिलने से किसी मामले से सम्बंधित वातावरण सकारात्मक दिखाई देना चाहिए जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव अच्छा पड़ना चाहिए।
          कल के धन-कोष साख परिवार  मामलों में ऐसी ही चर्चा  होगी।

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