आस्‍था और प्रेम किस हद तक अतिशयोक्ति को जन्‍म देते हैं ??

Bhakti me atishayokti

1999 तक पूरे मनोयोग से ज्‍योतिष का अध्‍ययन करने के बाद  बोकारो में रहते हुए मैने लोगों को ज्‍योतिषीय सलाह देने का काम शुरू कर दिया था। मैने पहले भी अपने एक आलेख में लिखा है कि 1998 से 2000 के समय में आसमान में शनि की स्थिति किशोरों को बुरी तरह प्रभावित करने वाली थी और उस दौरान अधिकांशत: टीन एजर बहुत ही परेशानी में अपने मम्‍मी पापा के साथ मेरे पास आते रहें। तब वे इतने परेशान थे कि मेरे समझाने बुझाने का भी उनपर कोई खास असर नहीं होता था। सामान्‍य तौर पर होनेवाले बुरे ग्रहों के प्रभाव को भी मैं सर्दी खांसी की तरह ही लेती हूं , जो जीवन की लडाई के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में मदद करता है।

Bhakti me atishayokti


एक दिन एक अभिभावक मेरे पास आए , उनका टीन एजर बेटा घर छोडकर कहीं चला गया था। मैने उसके जन्‍म विवरण के आधार पर उसकी जन्‍मकुंडली बनायी , और आवश्‍यक गणनाएं की और बताया कि अप्रैल के बाद ही उसके घर लौटने की संभावना है। उस समय दिसंबर ही चल रहा था और अप्रैल आने में काफी समय बचे हुए था , मात्र 16 वर्ष का हर सुख सुविधा में पलने वाला बच्‍चा 4 महीने घर , शहर के बाहर कैसे काट सकता है , माता पिता उसकी आस ही छोड चुके थे। पर मैं जानती थी कि दो ढाई वर्षों तक चलनेवाला शनि भी लोगों को वर्ष पांच महीने अधिक परेशान किया करता है।

मई माह में एक दिन अचानक वो सिन्‍हा दंपत्ति हमसे बाजार में मिले , उनकी पत्‍नी बहुत परेशान थी , मुझसे कहा कि आपका कहा समय भी समाप्‍त हो गया , बेटा तो नहीं आया। मैने कहा कि नहीं , मेरा दिया समय समाप्‍त नहीं हुआ है , मैने अप्रैल के बाद कहा है , जून तक आने की उम्‍मीद है , जून में न लौटे तब कुछ गडबड माना जा सकता है। उसके दो चार दिनों बाद ही उ प्र से सूचना मिली कि उनका बेटा सुरक्षित किसी चीनी के मिल में काम कर रहा है। अभी उसकी तबियत खराब है , मिल के मालिक ने पहले उन्‍हें फोन किया और फिर अपने एक कर्मचारी के साथ उसे बोकारो वापस भेज दिया।

उस समय से उक्‍त दंपत्ति हर समस्‍या में नियमित तौर पर मेरी सलाह लेने लगे। धीरे धीरे मुझपर उनका विश्‍वास जमता चला गया। कभी‍ कभी उनके रेफरेंस से भी मेरे पास किसी और तरह की समस्‍या से जूझते लोग आते रहें। उसमें से कुछ लोग मेरे संपर्क में अभी भी हैं , कुछ नहीं भी , पर सिन्‍हा दंपत्ति का मुझपर अतिशय आस्‍था और प्रेम हैं , जिसका परिणाम अभी दो चार दिन पूर्व उनकी अतिशयोक्ति में देखने को मिला।  मेरे पास एक दंपत्ति आए , उनका बेटा खो गया है। उन्‍होने बताया "सिन्‍हा दंपत्ति ने हमें भेजा है , क्‍यूंकि उनके बेटे के खोने पर आपने उन्‍हें बता दिया था कि उनका बेटा ईख पेर रहा है। अब हमें भी बताइए कि मेरा बेटा कहां क्‍या कर रहा है ??"

मैं तो चौंक पडी , इस तरह की बातें मैं न तो बताती हूं और न ही बताने का दावा करती हूं। किसी प्रकार के तंत्र मंत्र की सिद्धि करने वाले , जो भविष्‍य को नहीं , सिर्फ भूत को स्‍पष्‍ट देखा करते हैं , उनके लिए शायद यहां पर जबाब देना आसान हो , जैसा वे दावा करते हैं , पर ज्‍योतिष जो मूलत: समय की जानकारी देने वाला विषय है , भूत और वर्तमान को भी संकेत में देखा करता है और भविष्‍य को भी , अपनी विद्या के आधार पर इसका स्‍पष्‍ट जबाब मेरे पास न था । प्राचीन ऋषि महर्षियों की तरह दिव्‍य ज्ञान भी मेरे पास नहीं , इसलिए मैं लोगों में ग्रहों के प्रभाव का वैज्ञानिक सोच भरना चाहती हूं ,पर ऐसा नहीं हो पाता है । उस वक्‍त मैं सिर्फ यही सोंच रही थी कि आस्‍था और प्रेम किस हद तक अतिशयोक्ति को जन्‍म देते हैं ?

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    सभी मनुष्‍यों का समय बहुत ही तेज गति से बदलता है !!

    Samay balwan hota hai

    सभी मनुष्‍यों का समय बहुत ही तेज गति से बदलता है !!


    एक सज्‍जन कई वर्षों से हमारे संपर्क में थे , बहुत बुरा दिन चल रहा था उनका। कभी करोडों में खेलने का मौका जरूर मिला था उन्‍हें , पर बाद में एक एक पैसे के लिए मुहंताज चल रहे थे। महीनेभर का खर्च , बेटे बेटियों की पढाई , हर बात के लिए कर्ज लेने को मजबूर थे। कोई परेशानी आती , तो हमें भी फोन पर परेशान कर देते थे। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' यह मानता है कि ज्‍योतिष में ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए अभी तक बहुत सटीक उपाय नहीं हुए हैं, कुछ उपायों से बुरे समय को कम बुरा और अच्‍छे समय को अधिक अच्‍छा ही किया जा सकता है। इसलिए कुछ पाने के लिए समय का धैर्यपूर्वक इंतजार करना ही पडेगा। हम उन्‍हें भी उनके आगे के समय के सकारात्‍मक होने की चर्चा करते हुए उनके आत्‍म विश्‍वास को बढाने की कोशिश करते थे। उनकी पत्‍नी हमेशा कहा करती कि मेरे दिलासा देने के कारण ही वे इतना धैर्य रख पा रही हैं , नहीं तो इतनी बेचैनी में कब पूरा परिवार पुडिया खाकर सो गया होता।

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    उन्‍होने जहां तहां से पूंजी जुटाकर कुछ व्‍यवसाय करने की भी कोशिश की , पर खास फायदा न होने से वह कर्ज भी माथे पर आ गया। अब उनके समय को सुधरने में दो वर्ष बचे हैं। कल उनका फोन आया , वे आत्‍मविश्‍वास से भरे थे , दो वर्ष में उनकी सारी समस्‍याएं हल हो जाएंगी , उन्‍हें अब दिख रहा था। मेरे पूछने पर उन्‍होने बताया कि उनके पिताजी के नाम से कुछ जमीन पडी थी , तीनो भाइयों में सहमति न बन पाने से उसकी बिक्री नहीं हो सकी थी। एक बिल्‍डर ने उस जमीन में अपार्टमेंट बनाने का निश्‍चय किया है , जिसमें से पांच पांच फ्ल्‍ैट वह तीनो भाइयों को दे देगा। एक फ्ल्‍ैट में वो रहेंगे , बाकि किराए पर लगा देंगे , तबतक बेटे बेटियां भी पढकर निकल जाएंगे। धीरे धीरे वो कर्ज चुका ही देंगे , यदि खुद नहीं भी चुका सकें , तो मात्र एक फ्ल्‍ैट को बेचकर बाजार का कर्ज चुकाया जा सकता है। चलिए वृद्धावस्‍था सुख से कटेगा , यह कम बडी बात नहीं है।

    एक ऐसा ही किस्‍सा पिछले वर्ष भी हमारे सामने आया था , एक अच्‍छे खासे व्‍यवसायी अपनी लापरवाही के कारण अपने स्‍टाफों के द्वारा हिसाब किताब में किए गए घोटालों के कारण ऐसी स्थिति में पहुंच गए कि उन्‍हें अपना सबकुछ गंवाना पड गया। उनके बेटे भी बडे हो गए थे , हर काम में पैसों की आवश्‍यकता थी , तीन चार वर्षों तक काफी परेशान थे। ऐसी हालत को सुधारने के लिए कई ज्‍योतिषियों ने भी उन्‍हें लंबी चौडी आर्थिक चपत लगा दी थी। काफी दिनों बाद ही वे मेरे पास पहुंचे , मैने उन्‍हें कुछ दिनों का इंतजार करने को कहा , पर उनके सामने घना अंधेरा छाया था , मेरी बातों पर वे विश्‍वास ही नहीं कर पा रहे थे कि उनका समय भी अब आ सकता है। पर एक जमीन ने ही उनकी भी मदद की ,कुछ मित्रों के सुझाव पर जब उन्‍होने वहां पर मारकेट कांप्‍लेक्‍स बनाने का प्‍लान किया , दुकान की बुकिंग के लिए एडवांस मिलने शुरू हो गए। पैसे जुटते ही फटाफट काम शुरू हुआ , फिर तो बैंक से लोन भी पास हो गया  और दो वर्ष के अंदर उनकी समस्‍याएं हल हो गयीं।

    उपरोक्‍त दोनो उदाहरण में देखने को मिला कि उनकी समस्‍या को सुलझाने में संपत्ति ने ही मदद की , पर यदि उनके पास संपत्ति नहीं होती , तो भी समय आने पर समस्‍याएं सुलझ ही जाती। कोई न कोई ऐसा बहाना निकल आता , जिसके कारण समस्‍याएं हल हो जाती। दाने दाने के लिए मुहंताज एक परिवार को मैने दस वर्षों के अंदर काफी तरक्‍की करते पाया है। पिछले वर्ष तक ए‍क युवति मेरे पास आकर रोया करती थी , न तो उसका विवाह हो पा रहा था और न ही कैरियर के कोई आसार दिख रहे थे। पर अचानक इसी वर्ष उसका ववाह भी हुआ और एक बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर के रूप मे बहाली भी हुई। मेरे सामने कई ऐसे उदाहरण है , जिन्‍होने सतत् संघर्ष के बाद विजय पायी है। आज जो सफल हैं , उन्‍होने ही जीवन में मेहनत की , ऐसा नहीं है। आज जो मेहनत कर रहे हें , वे कल भी सफल हो सकते हैं। संयोग और दुर्योग किसी को आगे ले जाने में और पीछे खींचने में महत्‍वपूर्ण रोल अदा करता है। सभी मनुष्‍यों का समय बहुत ही तेज गति से बदलता है , ऐसे में धैर्य बहुत आवश्‍यक है। !

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    'ज्‍योतिषीय योग' की पुस्‍तकों में स्थित 'पंच महापुरूष योग'

    Panch mahapurush yog in Hindi
    'ज्‍योतिषीय योग' की पुस्‍तकों में स्थित 'पंच महापुरूष योग'


    ज्‍योतिष शास्‍त्र की 'ज्‍योतिषीय योग' की पुस्‍तकों में 'पंच महापुरूष योग' का वर्णन है , जिनके नाम रूचक , भद्र , हंस , मालब्‍य और शश हैं। इन पांचों में कोई एक योग होने पर भी जातक महापुरूष होता है एवं देश विदेश में कीर्ति लाभ कर पाता है। मंगल अपनी राशि का होकर मूल त्रिकोण में अथवा उच्‍च राशि का होकर केन्‍द्र में स्थित हों , तो रूचक योग , बुध अपनी राशि का होकर मूल त्रिकोण में  अथवा उच्‍च राशि का होकर केन्‍द्र में स्थित हो तो भद्र योग , बृहस्‍पति अपनी राशि का होकर मूल त्रिकोण में अथवा उच्‍च राशि का होकर केन्‍द्र में स्थित हो , तो हंस योग , शुक्र अपनी राशि का होकर मूल त्रिकोण में अथवा उच्‍च राशि का होकर केन्‍द्र में स्थित हो , तो मालब्‍य योग तथा शनि अपनी राशि का होकर मूल त्रिकोण या उच्‍च राशि का होकर केन्‍द्र में स्थित हो , तो जन्‍मकुंडली में शश योग बनता है।
    panch mahapurush yoga



    'ज्‍योतिषीय योग' की पुस्‍तकों में लिखा होता है कि रूचक योग में जन्‍म लेनेवाला व्‍यक्ति स्‍वयं राजा या सेना या मिलिटरी में उच्‍चाधिकारी , आर्थिक दृष्टि से पूर्ण संपन्‍न अपने देश की सभ्‍यता और संस्‍कृति के प्रति पूर्ण जागरूक उसके विकास के लिए काम करता है। भद्र योग में जन्‍म लेनेवाला मनुष्‍य सिंह के समान पराक्रमी , प्रभावोत्‍पादक , विलक्षण बुद्धि वाला होता है , यह जीवन में धीरे धीरे प्रगति करते हुए सर्वोच्‍च स्‍थान प्राप्‍त करता है। हंस योग में जन्‍म लेनेवाला व्‍यक्ति सुंदर व्‍यक्तित्‍व वाला मधुरभाषी होता है। यह सफल वकील या जज बनकर निष्‍पक्ष न्‍याय करता है। मालब्‍य योग वाला व्‍यक्ति मजबूत दिमाग रखनेवाला , सफल कवि , चित्रकार , कलाकार या नृत्‍यकार होते हैं और देश विदेश में ख्‍याति प्राप्‍त करते हैं। शश योग वाले व्‍यक्ति साधारण कुल में जन्‍म लेकर भी राजनीति विशारद होते हैं , वे गांव का मुखिया , नगरपालिकाध्‍यक्ष , या प्रसिद्ध नेता होते हैं। 

    अब चूंकि पूरी दुनिया में कुछ खास अंतरालों में जन्‍म न लेकर हर वक्‍त बच्‍चे जन्‍म लेते ही रहते हैं  , इसलिए उनकी जन्‍मकुंडलियों में विभिन योगों का बनना सामान्‍य ढंग से होगा। यदि गणित के संभावनावाद के नियम के हिसाब से जन्‍मकुंडली में इन योगों की संभाब्‍यता पर ध्‍यान दें , तो हमें कुछ भी खास नहीं प्राप्‍त हो पाएगा, क्‍यूंकि ये पांचो ग्रह 12 में से दो राशियों में स्‍वक्षेत्री होंगे , इस कारण इनके अपने राशि में होने की संभावना  2/12 यानि 1/6 तथा उसके मूल त्रिकोण में होने की संभावना 3/12 यानि 1/4 । इसी प्रकार इनके उच्‍च राशि में होने की संभावना 1/12 तथा केन्‍द्र में स्थित होने की संभावना 4/12 यानि 1/3 होती है। इस तरह जन्‍मकुंडली में इन पांचों में से किसी भी एक योग के उपस्थित होने की संभावना (1/6*1/4)+(1/12*1/3) = (1/24+1/36)यानि 5/72 होगी। यानि 72 लोगों में से किसी एक कुंडली में इनमें से कोई योग देखा जा सकता है। पर इन पांचों में से किसी एक योग के होने की संभावना 5/72 * 5 यानि 25 /72 होगी। इसका अर्थ है कि 72 व्‍यक्तियों में से 25 व्‍यक्ति की जन्‍मकुंडली में इन पांचों में से कोई एक योग हो सकता है।

    जब पांचों में से किसी एक योग के होने की संभावना इतनी सामान्‍य हो , वहां इस योग के फल से जातक के महापुरूष बनने की संभावना के बारे में सोचना भी गलत होगी। हालांकि पुस्‍तकों में यह भी लिखा है हक संबंधित ग्रह निर्मल , अवेध , अवक्री और 10 से 25 डिग्री के मध्‍य में होना चाहिए , पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' ग्रहों के मात्र स्‍वक्षेत्री होने , उच्‍च स्‍थान पर स्थित होने , केन्‍द्रगत होने या तिक्रोण में होने से इतने बडे फल प्राप्ति पर विश्‍वास नहीं रखता , जबतक कि ग्रह गत्‍यात्‍मक या स्‍थैतिक दृष्टि से काफी मजबूत न हों । इसलिए किसी प्रकार के ज्‍योतिषीय योग के अध्‍ययन से पहले यह ग्रहों की गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति की जानकारी आवश्‍यक समझता है। सिर्फ रटे रटाए विधि से की गयी भविष्‍यवाणी सटीक नहीं हो पाती , जबकि समय समय पर प्रायोगिक जांच से भविष्‍यवाणियों की सटीकता बढती है।

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      असफल व्‍यक्ति अधिक अनुभवी होते हैं !!

      Ek kadam safalta ki or

      Safalta quotes in Hindi

      कल एक सुप्रभात मेसेज मिला, लिखा था कि सफलता ऐसा शिक्षक है, जो हमारे अंदर एक भ्रम पैदा करता है कि हम असफल हो ही नहीं सकते।  मुझे इस वाक्य ने प्रभावित किया। जिन्होंने पूरे जीवन संघर्ष के साथ निरंतर सफलता हासिल की है, उसके लिए तो यह बात नहीं कही जा सकती , पर एक बार की सफलता से जीवनभर शानोशौकत और प्रभाव प्राप्त करने वाले भ्रम क्या, झूठे अभिमान में जीया करते हैं। 

      Ek kadam safalta ki or


      प्रकृति के अधिकांश नियम निश्चित ही होते हैं , हां यदा कदा कुछ अपवाद अवश्‍य उपस्थित होते रहते है। ऐसा नहीं है कि अपवाद यूं ही उपस्थित हो जाते हैं , दरअसल अपवादों का भी एक अलग नियम होता है। जब हम कई बार लगातार एक तरह की घटना के कार्य करण संबंध को देखते हुए कोई नियम बनाते हैं , तो उस समय तक हमें अपवाद की जानकारी नहीं होती है , पर जब जब नियमों को काम करते नहीं देखते हैं , विश्‍लेषण करने पर हमें वो अपवाद दिखाई पडते हैं। सैकडों हजारो प्रयोंगो में से एक दो बार वैसे अपवाद दिखाई पडते हैं , पर उसे इग्‍नोर करते हुए अधिकांश जगहों पर हम नियम के अनुसार ही काम करते हैं।

      Safalta pane ka mantra

      मेहनत करने से सफलता मिलती ही है , जो जैसा करेगा वो वैसा ही भरेगा इस यथार्थ भरे वाक्‍य में भी हमें बहुत अपवाद देखने को मिलते हैं। हमारे नजर के सामने हर सुख सुविधा से संपन्‍न आलसी और कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे पुरूषार्थी देखने को मिलेंगे। कोई भी मनुष्‍य पूर्ण नहीं हो सकता है , कर्तब्‍य पथ पर चलते हुए कोई न कोई गल्‍ती कर ही बैठता है , पर प्रकृति से मिलने वाले सहयोग के कारण उस गल्‍ती का कोई दुष्‍परिणाम सफल लोगों के जीवन में देखने को नहीं मिलता। इसलिए जीवन में अनायास सफलता प्राप्‍त करनेवाले व्‍यक्ति भले ही सफल लोगों की श्रेणी में आ जाते हों , पर वास्‍तव में वे अनुभवी नहीं होते। असफल होते हुए भी अनुभवी तो वे होते हैं , जिनकी छोटी छोटी चूक से बडा बडा नुकसान होता आया है। इसलिए वे हर काम में हुए अपनी या व्‍यवस्‍था की खामियों को उजागर कर सकते हैं , उससे बचने के लिए पहले ही तैयार रहने के लिए लोगों को सलाह दे सकते हैं।

      इतने लंबे जीवन में कहीं भी कोई मोड आ सकता है , जिससे आगे बढने पर या तो फूलों से भरी या कांटों से भरी सडक हमारा इंतजार कर रही होती है । सभी स्‍वीकार करते हैं कि सुख भरे दिन में कुछ सीखने का मौका नहीं मिलता। लेकिन जब भी हम कठिनाइयों के दौर से गुजरते हैं , दिन ब दिन कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। बडों की बाते छोड दें , विपत्ति झेल रहे लोगों के बच्‍चे बालपन में ही समझदारी भरी बात किया करते हैं। इस तरह उबड खाबड रास्‍तों पर चलकर , विपत्ति को झेलकर देर से ही सही , पुरूषार्थी को मंजिल मिलती है। इसलिए जरूरत है असफल पुरूषार्थियों से कुछ सीख लेने की , न कि अनायास सफलता पानेवालों से , क्‍यूंकि मेरा मानना है कि अपने निर्णयों के सही होने से वे सफलता के झंडे तो गाड सकते हैं , पर जीवन में किसी प्रकार की अनहोनी नहीं आने से वे अनुभवी नहीं बन सकते , इसलिए दूसरों को सलाह देने में असफल व्‍यक्ति ही अधिक सक्षम होते हैं।

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        Adhyatmik meaning in Hindi

        आध्‍यात्मिक सुख की ओर बढने का पहला कदम

        Adhyatmik meaning in Hindi

        adhyatmik story in hindi


        मित्रता जैसा पवित्र शब्‍द कुछ नहीं। सच्‍चे मित्र एक दूसरे के लिए जान देने को तैयार होते हैं। पर मित्रता को इस स्‍तर तक ले जाने के लिए वर्षों तक एक दूसरे के प्रति विश्‍वास की आवश्‍यकता होती है। जहां एक के मन दूसरे के प्रति विश्‍वास डगमग हुआ कि दोनो के मन में क्रमश: अविश्‍वास हावी होता चला जाएगा और मित्र की भावना को सही सही समझना मुश्किल होगा। वैसे तो बहुत से स्‍थान में ऐसी मित्रता कुछ दिनों बाद शत्रुता में भी बदल जाती है , पर यदि ऐसा न भी हो , तब भी अविश्‍वास के स्‍तर तक पहुंचने के बाद मित्र का भला क्‍या मतलब ??

        इसी प्रकार एक डॉक्‍टर के प्रति मरीज का विश्‍वास दवा के प्रभाव में बढोत्‍तरी लाता है। अपने पसंदीदा डॉक्‍टर के पास जाकर छोटे मोटे मरीजों के बिना दवा के भी ठीक हो जाने की खबर बहुतों ने सुनी होगी , पर कभी कभी गंभीर बीमारियों के मरीजों का भी उल्‍लेखनीय प्रगति डॉक्‍टरों को आश्चिर्यत करने पर मजबूर कर देती है। वास्‍तव में अपने जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण और खुद पर भरोसा भी हमारी बीमारी को ठीक करने में बहुत मदद करता है। 

        यहां तक कि जहां समाज में शेयर बाजार के चक्‍कर में अपना घर बार पूंजी समाप्‍त कर देने की कितनी घटनाएं देखने को मिलती हैं , वहीं शेयर बाजार में लाभ कमाते हुए आनंद प्राप्‍त करनेवालों की भी दनिया में कमी नहीं। आखिर विश्‍वासियों के बल पर ही तो दुनिया में एक एक चीज का अस्तित्‍व है। गुरू के प्रति विश्‍वास न हो तो क्‍या उसके द्वारा दिए जा रहे ज्ञान को हम ग्रहण करने की योग्‍यता रख सकते हैं ??

        ठीक इसी प्रकार की बात पति पत्‍नी के मध्‍य उपस्थित होती है। एक दूसरे के लिए अपने जीवन का तन , मन और धन को समर्पित कर अपनी आने वाली पीढी के शारिरीक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए बनाए गए कार्यक्रमों को अंजाम देने में चाहे कितने भी क्‍यूं न थक जाएं , पर इसके बाद भी उनका जीवन स्‍वर्ग बना होता है। पर जहां दोनो के विचारों में टकराव हुआ या उनके मध्‍य संदेह का जन्‍म हुआ , तो फिर उनके जीवन के नरक बनते भी देर नहीं लगती। हम की जगी मैं और तुम के हावी होने से ऐसा होने से वैवाहिक जीवन का अर्थ ही बदल जाता है। इस प्रकार पारिवारिक जीवन के सुख को प्राप्‍त करने में भी विश्‍वास एक बडी शक्ति होती है। क्‍या अहं के हावी होने के बाद पति पत्‍नी का रिश्‍ता सुदृढ हो सकता है ??

        चाहे ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडने वाले प्रभाव की वास्‍तविकता की चर्चा की जाए या खुद को ईश्‍वर में आत्‍मसात करने की , संदेह बडा हानिकारक होता है। आध्‍यात्मिक तौर पर मजबूती प्राप्‍त करने के लिए प्रकृति के नियमों और ईश्‍वर पर भरोसा करना बहुत आवश्‍यक है। इतने बडे ब्रह्मांड में जहां इतने विशालकाय पिंड एक निश्चित नियम के हिसाब से गति कर रहे हो , किसी व्‍यक्ति द्वारा अपने कर्म और अपनी सफलता पर खुद का गुमान करना अच्‍छी बात नहीं। किसी व्‍यक्ति ने अपनी जिन विशेषताओं के बल पर उपलब्धि हासिल की , वह प्रकृति की ओर से उसे वरदानस्‍वरूप प्राप्‍त थी ,  इसे स्‍वीकार किया जाना चाहिए।  

        यदि प्रकृति का सहयोग न मिले, तो सारा कार्यक्रम निबटने के बाद अंतिम क्षण में परिणाम के वक्‍त भी गडबडी आ सकती है,बस इन दोनो बातों को स्‍वीकारना ही आध्‍यात्‍म की ओर जाने का पहला कदम है। हम अपने अहं का त्‍याग किए बिना प्रकृति का निर्माण करने वाले पर शक करते रहे , तो क्‍या हमें आध्‍यात्मिक सुख मिल सकता है ??  

        अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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