हिंदी की ज्योतिष की पुस्तक

हिंदी की ज्योतिष की पुस्तक

Good astrology books in hindi


ज्योतिष के नए जिज्ञासु हमेशा प्रश्न पूछते रहते हैं कि ज्योतिष को सीखने के लिए उन्हें कौन सी पुस्तकें पढ़नी चाहिए। मैंने कुछ रिसर्च करके ये दो पुस्तकें आपलोगों के लिए संगृहीत की है, जिनका मूल्य अधिक नहीं है।  निश्चित रूप से ये पुस्तकें आपके लिए लाभदायक होंगी। 

2015  में ही  मोतीलाल बनारसीदास प्रकाशक के द्वारा प्रकाशित की गयी , श्री गोपेश कुमार ओझा द्वारा लिखी गयी 338 पन्नो की हिंदी की ज्योतिष की पुस्तक 'सुगम ज्योतिष प्रवेशिका' नमक पुस्तक का १०वन संस्करण प्रकाशित हो चुका है, या बात इस पुस्तक की लोकप्रियता का अंदाजा लगाने के लिए काफी है। आमेज़न  पर 170 /- में यह पुस्तक उपलब्ध है, इस पुस्तक को अच्छे रेटिंग्स भी मिले हैं , इसलिए मैं इस पुस्तक को पढ़ने का अनुमोदन करती हूँ। 

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के एन राव और के विजयलक्ष्मी राव के द्वारा 129 /- में 168 पन्नो की पुस्तक 'हिन्दू ज्योतिष का सरल अध्ययन' ज्योतिष के शुरूआती अध्ययन के लिए उपयुक्त पुस्तक है।  अमेज़ॉन में इसे अच्छी रेटिंग प्राप्त है। 

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सूर्य राशि कैसे जाने ?

 सूर्य राशि कैसे जाने ?

surya rashi kaise jane ?


ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली में तीन राशियां महत्वपूर्ण होती हैं , जन्म के समय जो राशि पूर्वी क्षितिज पर उदित होती हैं, उन्हें लग्नराशि , जिस राशि में चंद्र होता है , उसे चंद्र राशि, जिस राशि में सूर्य होता है उसे सूर्यराशि कहते हैं। पिछले वीडियो में आपने  जन्मकुंडली के चक्र को देखकर अपना लग्न और चंद्र राशि समझना सीखा। इसी तरह आप जन्मकुंडली के चक्र से ही अपनी सूर्य राशि को भी जान सकते हैं। 

आपकी जन्मकुंडली में जिस स्थान पर सूर्य बैठा होता है , वह आपकी सूर्य राशि होती है।  यदि सूर्य  1 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि मेष , यदि सूर्य 2 अंक में बैठा हो तो आपकी राशि सूर्यवृष, यदि सूर्य 3 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि मिथुन , यदि सूर्य 4 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि कर्क, यदि सूर्य 5  अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि सिंह, यदि सूर्य 6 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि कन्या, यदि सूर्य 7 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि तुला, यदि सूर्य 8 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि वृश्चिक , यदि सूर्य 9 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि धनु, यदि सूर्य 10  अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि मकर , यदि सूर्य 11 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि कुम्भ, यदि सूर्य 12 अंक में बैठा हो तो आपकी सूर्यराशि मीन होगी।  

चाहे आपका लग्न कुछ भी हो, आपका जन्म 15 अप्रैल से 15 मई के मध्य हुआ हो तो आपकी आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 1 अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 मई से 15 जून के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 2 अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 जून से 15 जुलाई के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 3  अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 जुलाई से 15 अगस्त के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 4  अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 अगस्त  से 15 सितम्बर के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 5 अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 6 अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 अक्टूबर  से 15 नवंबर के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 7  अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 नवंबर  से 15 दिसंबर के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 8 अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 दिसंबर  से 15 जनवरी के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 9 अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 जनवरी से 15 फरवरी के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 10 अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 फरवरी से 15 मार्च  के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 11 अंक में स्थित होगा, यदि आपका जन्म 15 मार्च  से 15 अप्रैल  के मध्य हुआ हो तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य 12 अंक में स्थित होगा।  इसलिए जन्मकुंडली में सूर्य के 1  से 12 तक के किसी अंक में स्थित होने से आप अपने जन्म के महीने का अनुमान आसानी से लगा सकते हैं। 

जन्मकुंडली किसी भी अंक से क्यों न शुरू हुई हो , उसके किसी खाने में कोई अंक क्यों न लिखा हो , लेकिन उसमे लग्न के खाने को पहला भाव , उसके बाद के खाने को दूसरा भाव, उसके बाद के खाने को तीसरा भाव , उसके बाद के खाने को चौथा भाव, उसके बाद के खाने को पांचवां भाव, उसके बाद के खाने को छठा भाव, उसके बाद के खाने को सातवां भाव, उसके बाद के खाने को आठवां भाव , उसके बाद के खाने को नवां भाव, उसके बाद के भाव को दसवाँ भाव, उसके बाद के खाने को ग्यारहवाँ भाव, उसके बाद के खाने को बारहवाँ भाव कहते हैं। 

जन्मकुंडली में विभिन्न भाव में सूर्य की स्थिति के हिसाब से ही आप अपने जन्म के समय का अनुमान लगा सकते हैं। यदि जन्मकुंडली में पहले भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्योदय के आसपास का होगा , यदि जन्मकुंडली में दूसरे भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्योदय के लगभग दो घंटे पहले  का होगा , यदि जन्मकुंडली में तीसरे भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्योदय के लगभग चार घंटे पहले का होगा , यदि जन्मकुंडली में चौथे भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्योदय के लगभग छह घंटे पहले का होगा , यदि जन्मकुंडली में पाँचवे भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्योदय के लगभग आठ घंटे पहले का होगा , यदि जन्मकुंडली में छठे भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्योदय के लगभग दस घंटे पहले  का होगा , यदि जन्मकुंडली में सातवें  भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्योदय के लगभग  बारह घंटे बाद यानि सूर्यास्त के लगभग का होगा , यदि जन्मकुंडली में आठवें  भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्यास्त  के लगभग दो घंटे पहले का होगा , यदि जन्मकुंडली में नवें भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्यास्त  के लगभग चार घंटे पहले का होगा , यदि जन्मकुंडली में दसवें भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्यास्त के लगभग छह  घंटे पहले का होगा , यदि जन्मकुंडली में ग्यारहवें भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्यास्त  के लगभग आठ  घंटे पहले का होगा , यदि जन्मकुंडली में बारहवें  भाव में सूर्य हो तो आपका जन्म सूर्यास्त  के लगभग दस  घंटे पहले यानि सूर्योदय के दो घंटे बाद का होगा .

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राशियाँ क्या है ?

राशियाँ क्या है  ?

हमने सौरमंडल का अध्‍ययन किया ही है,

पूरे सौरमंडल का केन्‍द्र सूर्य नाम का एक ताराहै, जिसके चारो ओर पृथ्‍वी सहित सारे ग्रह परिक्रमा करते हैं,

सूर्य से सबसे निकट बुध का परिभ्रमण पथ है, उसके बाद शुक्र, उसके बाद पृथ्‍वी, उसके बाद मंगल, पुन: बृहस्‍पति, इसके बाद शनि, फिर यूरेनस, नेप्‍च्‍यून और प्‍लूटों का परिभ्रमण पथ है .. अपने अपने पथ पर सभी ग्रह समान गति से गतिशील होकर सूर्य का चक्‍कर लगातार लगा रहे हैं। 

इसी प्रकार पृथ्‍वी का उपग्रह चंद्रमा पृथ्‍वी का और अन्‍य ग्रहों के उपग्रह भी नियमित तौर पर चक्‍कर लगा रहे हैं। 

आसमान में सौरमंडल में सूर्य मध्‍य और अन्‍य ग्रह उसकी परिक्रमा कर रहे हों , पर खगोल शास्‍त्र में पृथ्‍वी को केन्‍द्र में रखकर इसे 12 भागों में बांटकर सारे ग्रहों , उपग्रहों और तारों की गति और स्थिति का अध्‍ययन किया जाता है। 

चाहे पृथ्‍वी की स्थिति अपने पथ पर कहीं भी हो। 

पृथ्‍वी से ही अनंत तक फैले आसमान के गोल घेरे यानि 360 डिग्री को 12 भागों में बांटकर 30-30 डिग्री की एक राशि ज्‍योतिष शास्‍त्र में निकाली जाती है। 

ये राशियां ही क्रमश: मेष , वृष , मिथुन , कर्क , सिंह , कन्‍या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ और मीन कहलाती है। 

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आओ ज्योतिष सीखे

आओ ज्योतिष सीखे 

aao jyotish sikhe,


क्‍या आप जानते हैं कि हमारे जीवन में सबसे अधिक अनिश्चित क्‍या है ?

सबसे अनिश्चित है हमारा आपका सबका भविष्‍य .. एक क्षण बाद क्‍या होगा ?
किसी को पता नहीं
अमावस्‍या की रात की तरह बिल्‍कुल अंधेरा
सन्‍नाटा और भयावह 
बहुत कुछ अनिश्चित था कल तक
पर आज काफी कुछ साफ साफ सा दिखता है 
क्‍या हमारा भविष्‍य दृश्‍य नहीं हो सकता ?
पूर्णता मनुष्‍य के भाग्‍य में नहीं
पर आप सबों को जानकारी हो न हो .. अब भविष्‍य का काफी कुछ संकेत मिल रहा है .. भविष्‍य को जानने समझने का रहस्‍य आसमान में छुपा है
अब भविष्‍य अमावस्‍या की रात की तरह अंधेरा सन्‍नाटा  भयावह नहीं पूर्णिमा की रात की तरह रोशनी से भरा संकेत देता सुखद है
मनुष्‍य का मस्तिष्‍क ही उसे अन्‍य जीव जंतुओं से अलग करता है
इसी के कारण मनुष्‍य निरंतर चिंतन करते हुए अपनी जीवनशैली में क्रमिक विकास करता जा रहा है। पर कुछ खुद के लिए , कुछ परिवार के लिए , कुछ इससे बढकर समाज और राष्‍ट्र के लिए ही चिंतन कर पाते हैं, विरलों का चितन ही संपूर्ण विश्‍व में मौजूद जड चेतन के लिए होता है , ऐसे मनुष्‍यों के हिस्‍से प्रकृति के कुछ रहस्‍य खुलकर सामने आते हैं , जिनकी जानकारी के बाद पूरे जगत के कल्‍याण के लिए कोई कार्यक्रम बनाया जा सके , योजना बनायी जा सके 
ये हैं श्री विद्या सागर महथा जी
इन्‍होने खगोल शास्‍त्र के सिद्धांतों को समझने के बाद उसपर आधारित ज्‍योतिष शास्‍त्र के क्षेत्र में अपना कदम ऐसे वक्‍त पर रखा , जब सफल लोगों द्वारा इसे पूर्ण तौर पर अवैज्ञानिक समझा जाने लगा था और असफल लोग समाज से छुप छुपकर ज्‍योतिषियों से मिलने लगे थे। प्रकृति के नियमों पर विश्‍वास करना आनेवाली पीढी के लिए आवश्‍यक है , इसलिए ज्‍योतिष को वैज्ञानिक स्‍वरूप में स्‍थापित करने हेतु इन्‍होने जीवनभर ग्रहों के प्रभाव का गंभीर अध्‍ययन किया , इनके सम्‍मुख प्रकृति का जो रहस्‍य खुलकर आया , उससे खगोल शास्‍त्र में एक नया अध्‍याय जोडा जा सकता है
इस नए अध्‍याय में खगोलीय पिंडों की गति और स्थिति का समस्‍त जड चेतन पर पडने वाले प्रभाव को दर्शाया जा सकता है
हमारी पृथ्‍वी सौरमंडल की सदस्‍य है , इसलिए एकमात्र सूर्य और इसकी परिक्रमा करने वाले सभी ग्रहों और अपने उपग्रह चंद्रमा से हम प्रभावित होते हैं
इसे देखकर ही हमारे ऋषि मुनियों ने ज्‍योतिष का विकास किया था , पर वैदिक कालीन ज्‍योतिष के सूत्र इतने जटिल हैं कि ज्‍योतिषी आम जन के समक्ष इसकी वैज्ञानिकता को प्रमाणित नहीं कर पाते हैं, इसे आम जन के लिए उपयोगी और लोकप्रिय नहीं बनाया जा सकता है
आप सबों को बताते हुए खुशी हो रही है कि श्री महथा जी के द्वारा किए गए खोज के बाद आम जीवन पर ग्रहों के प्रभाव को प्रमाणित किया जा सकता है, इसे आम जन के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है .

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आकाश में 'परेड' करते दिखाई देंगे सौरमंडल के 6 ग्रह

आकाश में 'परेड' करते दिखाई देंगे सौरमंडल के 6 ग्रह

Information of planets in Hindi

Information of planets in Hindi


गणित ज्योतिष की दुनिया में एक दुर्लभ खगोलीय घटना दिखाई देने वाली है. सौरमंडल के 9 में से 6 ग्रह एक साथ पृथ्वी के बिलकुल निकट आने वाले हैं. इन सभी ग्रहों को नंगी आंखों और टेलिस्कोप केद्वारा धरती से देखा जा सकता है। सूर्यास्त होने के आधे घंटे बाद इन ग्रहों को देखा जा सकेगा। 

मकर राशि में शनि (SATURN ) और शुक्र (VENUS) , कुम्भ राशि में बृहस्पति (JUPITER)  दिसंबर की शुरुआत से ही हमारे काफी करीब बने हुए हैं. 28 दिसंबर को बुध (Mercury), नेपच्यून (Neptune) और यूरेनस (Uranus) ग्रह भी इनके नजदीक आ जाएंगे. यह बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना होगी, जब सौर मंडल के 9 में से 6 ग्रहों को धरती से साफ-साफ देखा जा सकेगा। 

Information of planets in Hindi

अगर आपको ग्रह खोजने में कोई दिक्कत हो तो आप अपने समार्टफोन स्टार ट्रेकर ऐप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप गूगल स्टोर में जाकर स्काईव्यू लाइट, स्टार ट्रैकर और स्टार वॉक 2 ऐप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इन ऐप के इस्तेमाल से पता चल जाता है कि कौन सा ग्रह कहां है और उसका नाम क्या है। 

'गत्यात्मक ज्योतिष' की दृष्टि से देखा जाये तो अधिकांश ग्रह गत्यात्मक शक्ति से संपन्न है , इसलिए चिंता की अधिक बात नहीं है।  शुक्र की वक्रता यत्र तत्र कुछ समस्याएं पैदा करेंगी , सभी लग्न वलों को शुक्र से सम्बंधित मामले कुछ तनाव देंगे। अधिक परेशानी  मिथुन लग्न , मिथुन चंद्र राशि और मिथुन सूर्य राशिवालों को महसूस होगी, वे थोड़ी सावधानी बरतें।  अन्य लोग अपने ग्राफ के हिसाब से अच्छा बुरा प्रभाव में रहेंगे , उनमे गोचर का अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। 


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