हर दिमाग के बीज को एक विशाल वृक्ष बनाने में हर कोई मदद करे !!

बीज तो हर दिमाग में होते हैं , पर समय पर ही उनकी देखभाल हो पाती है , अंकुरण हो पाता है , विकास के क्रम में उन्‍हें हर प्रकार का वातावरण मिल पाता है और वह छोटा सा बीज एक विशाल वृक्ष बन पाता है। आज के सामाजिक राजनीतिक हालत में अनेको दिमाग के बीज दिमाग में ही सोए पडे रह जाते हैं और अनेको प्रकृति की मार से मौत के मुंह में भी चले जाते हैं। मैं आशा करती हूं कि हर दिमाग के बीज को एक विशाल वृक्ष बनाने में हर कोई मदद करे , ताकि हमारे चारो ओर विशाल ही विशाल वृक्ष नजर आए , सभी अपनी अपनी विशेषताओं की घनी पत्तियों से छांव , सुगंधित पुष्‍पों से वातावरण में सुगंध और मीठे फलों से लोगों को असीम तृप्ति प्रदान करे।

प्रकृति के सहयोग प्राप्‍त होने से बहुत लोग मेहनत और आवश्‍यकता से बहुत अधिक प्राप्‍त कर रहे होते हैं , इन्‍हें अपने सामर्थ्‍य का उपयोग दूसरों की असमर्थता को दूर करने में करना चाहिए , क्‍यूंकि प्रकृति पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता कि आज वो आपका साथ दे रही है और संयोग से आपके काम बनते जा रहे हैं , तो कल भी आपकी यही स्थिति होगी। कभी भी आपको किसी और की आवश्‍यकता पड सकती है। किसी की मदद करते समय इस बात का भी ध्‍यान रखें कि उसे बार बार मदद करने की आवश्‍यकता न पडे , उसे इस प्रकार की मदद करें  कि आनेवाले दिनों में वो इतना मजबूत हो सके कि वो पुन: दो चार लोगों की मद कर उन्‍हें भी इस लायक बना सके कि वो दूसरों की मदद कर सके।

मेरे ख्‍याल से हमारी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिए कि वह आनेवाली पीढी को शारीरिक , आर्थिक , मानसिक , नैतिक और आध्‍यात्मिक दृष्टि से अधिक से अधिक मजबूत बनाती चली जाए। इनमें किसी का भी महत्‍व आनेवाले समय में कम नहीं होता है। इनकी मजबूती हमें हर परिस्थिति में खुशी से जीना सीखा देती है, जो मस्तिष्‍क में किसी प्रकार का तनाव कम करने में सहायक है।

هناك 19 تعليقًا:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक يقول...

हमारी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिए कि वह आनेवाली पीढी को शारीरिक , आर्थिक , मानसिक , नैतिक और आध्‍यात्मिक दृष्टि से अधिक से अधिक मजबूत बनाती चली जाए। इनमें किसी का भी महत्‍व आनेवाले समय में कम नहीं होता है। इनकी मजबूती हमें हर परिस्थिति में खुशी से जीना सीखा देती है, जो मस्तिष्‍क में किसी प्रकार का तनाव कम करने में सहायक है।

इस अभियान में मैं आपके साथ हूँ!
नये ब्लॉग की बहुत-बहुत बधाई!

Dr. Mahesh Sinha يقول...

प्रकृति पर भरोसा नहीं करने वाली बात कुछ जमी नहीं . प्रकृति एक अभिन्न अंग है इस श्रिस्टी का

संगीता पुरी يقول...

डा महेश सिन्‍हा जी ,
टिप्‍पणी के लिए आभार .. प्रकृति पर भरोसा न करें तो हम जाएंगे कहां .. मैने यह बात उनके लिए लिखी है, जिन्‍हे प्रकृति ने जरूरत से अधिक संसाधन दिया है और वे उसका उपयोग दूसरों के लिए नहीं कर रहे हैं !
प्रकृति पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता कि आज वो आपका साथ दे रही है और संयोग से आपके काम बनते जा रहे हैं , तो कल भी आपकी यही स्थिति होगी।

kshama يقول...

Anek shubhkamnayen...naye blog ke liye!

Aapke har shabd se sahmat hun!

shama يقول...

Aameen..aapki ichha zaroor poori hogi! Harek shabd sahee hai...aur sakaratmak!

मनोज कुमार يقول...

अच्छी रचना। बधाई। स्वागत।

manhanvillage يقول...

सुन्दर रचना

JHAROKHA يقول...

Sangeeta ji,
Bahut hee achche shabdon men apane ek preranadayak bat likhee hai.hardik shubhakamnayen.
Poonam

महफूज़ अली يقول...

अच्छी रचना। बधाई। स्वागत।

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi يقول...

निश्‍चय ही ठोस विषय के अलावा अपने विचारों की बेलाग उड़ान के लिए एक अलहदा ब्‍लॉग की आवश्‍यकता हमेशा थी और रहेगी।

नए ब्‍लॉग के साथ आपका फिर से स्‍वागत है।

mukesh يقول...

very good

हमारी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिए कि वह आनेवाली पीढी को शारीरिक , आर्थिक , मानसिक , नैतिक और आध्‍यात्मिक दृष्टि से अधिक से अधिक मजबूत बनाती चली जाए। इनमें किसी का भी महत्‍व आनेवाले समय में कम नहीं होता है। इनकी मजबूती हमें हर परिस्थिति में खुशी से जीना सीखा देती है

वन्दना يقول...

हमारी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिए कि वह आनेवाली पीढी को शारीरिक , आर्थिक , मानसिक , नैतिक और आध्‍यात्मिक दृष्टि से अधिक से अधिक मजबूत बनाती चली जाए। इनमें किसी का भी महत्‍व आनेवाले समय में कम नहीं होता है। इनकी मजबूती हमें हर परिस्थिति में खुशी से जीना सीखा देती है, जो मस्तिष्‍क में किसी प्रकार का तनाव कम करने में सहायक है।

bilkul sahi baat kahi.........hamare karm aise hone chahiye jo auron ke prernastotra ban jayein..........bahut hi sarthak lekh.

अमित प्रजापति يقول...

नमस्‍कार संगीता जी !

आपके लेख से आपकी सुंदर सोच का आभास होता है, आपके विचार प्रेरणा दायक हैं, कोशिश करुँगा पालन कर सकूं ।

सादर नमस्‍कार !

राकेश जैन يقول...

bahut-2 badhai!!!

Bahuupyogi soch ka yeh aagaz safal ho.

Mrs. Asha Joglekar يقول...

किसी की मदद करते समय इस बात का भी ध्‍यान रखें कि उसे बार बार मदद करने की आवश्‍यकता न पडे , उसे इस प्रकार की मदद करें कि आनेवाले दिनों में वो इतना मजबूत हो सके कि वो पुन: दो चार लोगों की मद कर उन्‍हें भी इस लायक बना सके कि वो दूसरों की मदद कर सके।
बहुत सुंदर लेख ।

Rekhaa Prahalad يقول...

इस अभियान में मैं आपके साथ हूँ!

Dr. shyam gupta يقول...

सन्गीता जी ,यदि किसी को प्रक्रिति ने बहुत दिया है तो बह उसके लायक ही होगा,आप्के ज्योतिष, दर्शन, अध्यात्म, धर्म के ही अनुसार प्रक्रिति कभी अन्याय नहीं करती।
वस्तुतः आप कहना चाहतीं हैं कि भाग्य व समय के भरोसे नहीं रहना चाहिये,अतः सभी को सभी की सहायता करते रहना चाहिये यानी परमार्थ; यही ठीक तथ्य है.
आपके विचार सुन्दर व सामयिक हैं इसमें कोई दो राय नहीं हैं। बधाई।

Rajey Sha يقول...

काम की बातें हैं... हर दि‍माग को अमल में लानी चाहि‍ये।

नारदमुनि يقول...

shandar,damdar,jandar.narayan narayan