बचपन में मैं ऐसी ही कुंडलियां बनाती होऊंगी ......

अपने द्वारा बनायी गयी 27 वर्ष पहले की जन्‍मकुंडली मिलने के बाद मैं ज्‍योतिष के क्षेत्र में अपने अनुभव को लेकर काफी खुश थी और इंतजार कर रही थी कि पापाजी कब दिल्‍ली पहुंचे और मैं उनसे इस संबंध में बात कर सकूं। जैसे ही उनके दिल्‍ली पहुंचने की खबर मिली , मैने झट से फोन लगाया और उन्‍हे सारी बातें बतलायी। उन्‍होने बताया कि मैं तो और पहले से जन्‍मकुंडलियां बनाया करती थी । मैने आश्‍चर्य से पूछा कि आपने तो बचपन से ही आपकी सख्‍त हिदायत थी कि मैं ग्रेज्‍युएशन से पहले ज्‍योतिष की पुस्‍तकें नहीं छूऊंगी , फिर मै पहले कुंडली कैसे बना सकती हूं ??

इसके जबाब में पापाजी के शब्‍द थे ... ' कोई व्‍यक्ति विशेषज्ञ यूं ही नहीं बनता ,  बचपन में जब बच्‍चे कागज और कलम या पेन्सिल का प्रयोग करना शुरू करते हैं और कुछ रेखाचित्र खींचने लगते हैं , उस वक्‍त तुम कागज में कुंडलियां बनाया करती थी। हालांकि उस वक्‍त तुम्‍हें यह भी मालूम नहीं था कि कुंडली में जो खाने होते हैं उसमें 1 से 12 तक के अंक ही भरे जाते हैं या फिर उसमें लिखे जानेवाले अक्षर ग्रहों के छोटे रूप होते हैं। इसलिए तुम खेल खेल में जो कुंडलियां बनाया करती थी , उसमें सारे खानों में कोई भी अंक और कोई भी अक्षर लिखा होता था।' फोन रखने के बाद मैं एक बार फिर से बचपन में खो गयी और आपके लिए कंप्‍यूटर पर ये दोनो कुंडलियां बनायी , आखिर बचपन में मैं ऐसी ही कुंडलियां तो बनाती होऊंगी ......




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10 टिप्‍पणियां:

ललित शर्मा ने कहा…

खेल भी खेला तो कुंडलियाँ बनाने वाला।
इसे कहते हैं होनहार बिरवान के होत के चिकने पात।

शुभकामनाएं

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपके इस जुनून ने ही
आपको इस मुकाम पर पहुँचाया है!
शुभकामनाएँ!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बचपन की यादें भी बहुत सुहानी होती हैं.

sonal ने कहा…

tabhi to aaj aap khaas hui hai

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बचपन से ही इस विद्या में माहिर थीं आप ..

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

हमारा रुझान तो बचपन में ही मिल जाता है...तभी तो आज आप इस मुकाम पर हैं...

idanamum ने कहा…

होनहार विद्वान के होत चिकने पात!!!

बेनामी ने कहा…

खेल खेल में कुंडलियां बनाया करती थी

वाह!

Darshan Lal Baweja ने कहा…

खेल खेल में कुंडलियां बनाया करती थी

वाह!
वाह ...

डॉ.मीनाक्षी स्वामी Meenakshi Swami ने कहा…

क्या पता पूर्व जन्म का कोई संस्कार हो!