हस्त रेखा की जानकारी

 हस्त रेखा की जानकारी

Hastrekha ki jankari

हस्तरेखा शास्त्र में रेखाओं और हाथों में बने चिन्हों को देखकर भविष्य या जीवन के बारे में  मूल्यांकन किया जा सकता है, पर अक्सर इन रेखाओं में बदलाव होता रहता है, इसलिए भविष्य को लेकर इसकी सटीकता में कुछ संदेह रह जाता है।  क्योंकि मनुष्य के जीवन में कर्मों का भी प्रभाव है, इसलिए हाथ की रेखाओं के समय-समय पर बदलने को मनुष्य के कर्मों से जोड़ा जाता है ।  चूँकि हर प्रकार की मेहनत  दाहिने हाथ से की जाती है, माना जाता है कि बायाँ  हाथ जन्म का और दाहिना हाथ कर्म का होता है। पुरुष प्रधान सभ्यता में भाग्य को बदलने वाली मेहनत पुरुष ही किया करते थे, इसलिए पुरुषों का ही दाहिना हाथ देखा जाता है।  आज महिलायें हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, फिर भी अधिकांश पंडित आज भी महिलाओं के बाये हाथ की रेखा देखने की ही दलील देते हैं, जो उचित नहीं है। आज के प्रगतिशील युग में महिलाओं के भी दायाँ हाथ देखना चाहिए। 

हस्त रेखा की जानकारी

ऊपर के चित्र में आप देख रहे होंगे कि हाथ की कौन सी रेखाएँ किस बारे में हमें जानकारी देती है, कौन सी अँगुली किस ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है।  रेखाओं के बारे में आप यह समझ सकते हैं की सभी रेखाएं जितनी लम्बी हो, जितनी पुष्ट हों, उतनी अच्छी मानी जाती हैं।  रेखाएं टूटी फूटी हों तो अच्छी नहीं मानी जाती , रेखाओं में क्रॉस लाइन अच्छे नहीं माने जाते।  इसके अलावा हस्तरेखा की जानकारी के लिए हाथो की बनावट, आकृति,अंगुलियां की लम्बाई, अंगूठे की बनावट, अंगुलीयो का झुकाव, अंगुलीयो के बीच मे रंद्र ,हाथो का रंग ---- इन सबको देखा जाता है। जिन व्यक्तियों की हथेली बड़ी होती है वह किसी भी काम को बहुत ही अच्छे ढ़ंग से करते हैं।

कई तरह के निशानों की भी हस्त रेखा में भूमिका है - त्रिशूल का निशान भाग्यशाली लोगों के हाथ में होता है. ऐसे निशान हों तो समझ लेना चाहिए कि भविष्य में मान-सम्मान मिलने वाला है. रथ का निशान होने पर किसी राजा की तरह ही भोग विलास की प्राप्ति होती है. ये निशान बहुत कम लोगों के हाथ में होता है। जिन लोगों की हथेली पर बड़े आकार का त्रिभुज बनता है तो  व्यक्ति मन से बहुत ही कोमल स्वभाव का होता है। अगर किसी व्यक्ति की हथेली मेंगहराई होती है, ऐसे व्यक्तियों को भाग्य का साथ बहुत ही कम मिलता है। हस्तरेखा ज्योतिष शास्त्र में इस तरह की हथेलियों को शुभ नहीं माना जाता।

 इसी प्रकार के कई संकेत हमें हथेलियों से प्राप्त होते हैं , प्रकृति एवं प्रवृत्ति बताई जा सकती है, पर ज्योतिष शाश्त्र की तरह भविष्यवाणियों में समय के साथ सम्बन्ध बताना मुश्किल होता है।  गत्यात्मक ज्योतिष के जनक श्री विद्या सागर महथा जी कहते हैं, ग्रहों और नक्षत्रों के आधार पर भविष्यवाणी करना खुले आसमान की तरह व्यापक है, जबकि हथेली से भविष्यवाणी करना बंद मुट्ठी की तरह ही संकुचित।  इसलिए हमें ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन को बढ़ावा देना चाहिए। 

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संगीता पुरी

Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723

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