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मेरी कोरोना डायरी : कोरोना से कितना डरें ?

Corona diary


Corona coronavirus,




जनवरी और फरवरी में विदेशो में खौफ भरा माहौल पैदा करने के बाद कोरोना वायरस ने अचानक भारतवर्ष में भी दस्तक दे दी ! मार्च में महानगरों में कोरोना के केसेज आने लगे,  उस समय सबके संपर्क विदेशो या विदेशियों से किसी न किसी प्रकार सिद्ध हो गए ! कोरोना की मारक क्षमता तो खास नहीं मानी जा रही, पर इसकी संक्रामक क्षमता इसे महामारी का नाम दे रही !

 अप्रैल में हमारे बच्चों का यूरोप यात्रा का कार्यक्रम था, पर यूरोप के माहौल को देखते हुए टिकटें रद्द कर दी गयी थी,  वीजा कैंसिल कर दिया था ! मार्च में विदेशों से आनेवाले लोगों में से कुछ सावधानी जरूर बरत रहे थे,  पर काफी लोग लापरवाही भी कर रहे थे ! कुछ लोग तो खुलेआम घोषणा कर रहे थे कि कोरोना वायरस साधारण सर्दी-खांसी हैं, लोगों का भयभीत करने की चाल हैं !


Corona virus in India

इनकी लापरवाही का नतीजा ऐसा हुआ केस गुणात्मक गति से बढ़ने लगे ! इसी दौरान सरकार ने लॉक डाउन की घोषणा की, सब घर बैठ गए ! अचानक आये इस समस्या से पूरा देश अव्यवस्थित हो गया।  फिर देश में अनलॉक की घोषणा हुई, फिर शुरू हुई लोगों की लापरवाही और उससे  बढ़ने लगा कोरोना संक्रमितों और उससे होने वाली मौत का आंकड़ा !

इसी समय तैयार हुई मेरी कोरोना डायरी,  जिसके सभी भाग सोशल मीडिया और ब्लॉग पर प्रकाशित होते रहें ! इस पुस्तक में मैंने अपनी डायरी के सभी लेखों को संग्रहित किया हैं ! इसको पूरा पढ़कर भरतीय समाज की मानसिकता, भारतीयों में कोरोना के प्रभाव और कोरोना से सम्बंधि बहुत सारी चर्चा होगी ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं !



कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

    हर्ड इम्युनिटी और कोरोना

    Herd immunity meaning in Hindi and Corona

    मार्च से ही दिल्ली-मुम्बई जैसे महानगरों में कोरोना का बड़ा फैलाव हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए प्रत्येक गाँव तक पहुँच गया ! हमने कोरोना के बिल्कुल शुरुआती दौर में जिस प्रकार की सावधानी रखने की सलाह दी थी, सभी पालन करते तो ऐसा बिल्कुल नहीं होता ! लॉक डाउन में ही हम कोरोना की चेन तोड़ने में कामयाब हो जाते ! लेकिन लोगों की जागरूकता की कमी ने ऐसा नहीं होने दिया !


    अभी भी देश के विभिन्न भागों में कोरोना की चेन तोडना मुश्किल नहीं हैं, सोशल डिस्टैन्सिंग और मास्क का पालन करके हम आसानी से कोरोना की चेन तोड़ सकते हैं ! पर लोगों को कौन समझाए ? Herd immunity meaning in Hindi धीरे धीरे कोरोना के फैलाव ने देश को हर्ड इम्युनिटी प्राप्त करनेवाले लक्ष्य की दिशा में धकेल दिया हैं ! यह आसान तो नहीं हैं, पर इसे स्वीकार करना अब हमारी मजबूरी बन गयी हैं ! अब अधिकतम यही कर सकते हैं कि संक्रमण की गति धीमी कर दें !


    Is herd immunity effective

    Is herd immunity effective



    दिल्ली, मुम्बई और अन्य महानगरों या देश के अन्य भागों में किये गए टेस्ट की रिपोर्ट बता रही हैं कि विभिन्न जगहों पर कुल आबादी का 12% से लेकर 60% तक के लोगों में कोरोना के विरुद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गयी हैं ! Herd immunity meaning in Hindi )  इसका अर्थ यह हैं कि ये न तो अब कोरोना के कारण बीमाऱ पड़ सकते हैं, और न ही कोरोना के वाहक बन सकते हैं ! इस कारण अब ये संक्रमण की दर को कम करेंगे, कई जगहों पर एक कोरोना पॉजिटिव और एक कोरोना नेगेटिव के मध्य ढाल बनकर उपस्थित हो जाया करेंगे ! तीन महीने में 25% जनसंख्या को प्रभावित करनेवाला कोरोना को 50% तक पहुँचने में छह-सात महीने लग सकते हैं !


    कोरोना जैसी बीमारी के विरुद्ध देश के सभी भागों में हर्ड इम्युनिटी बन जाने के पीछे जहाँ एक ओर स्वास्थ्य से मजबूत लोगों की इम्युनिटी काम करती हैं, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य से कमजोर लोगों की मौत भी होती हैं ! जहाँ जागरूकता हो वहाँ संक्रमण की दर को कम किया जा सकता हैं ! जहाँ बेहतर व्यवस्था हो, वहाँ मौत की दर को कम किया जा सकता हैं !

    Why herd immunity is important

    हम दिल्ली का उदाहरण लेकर चलते हैं ! जहाँ तहाँ किये जा रहे रैंडम टेस्ट के नतीजे बताते हैं कि दिल्ली की दो करोड़ आबादी में से 25% यानि 50 लाख लोग कोरोना के विरुद्ध एंटीबाडी बना चुके हैं ! यह आंकड़ा कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए आंकड़े से बहुत अधिक हैं ! यानि लोग कोरोना से पॉजिटिव भी हुए और नेगेटिव भी, न उन्हें न ही प्रशासन को इसकी जानकारी मिली ! कोरोना को सामान्य सर्दी खांसी समझते हुए दवा लेते रहें, लोगों को संक्रमित करते रहे और ठीक भी हो गए !

    अब यदि दिल्ली के पचास लाख लोगो के पॉजिटिव होने और 13000 मौतों का अनुपात निकाला जाये, तो यह बहुत कम हैं , इसलिए कोरोना से घबराने की बड़ी वजह नहीं दिखती ! लेकिन इतने लोगों का ठीक होना 'हर्ड इम्युनिटी' नहीं उनकी 'अपनी इम्युनिटी' थी !  Herd immunity meaning in Hindi चूँकि समाज को हर्ड इम्युनिटी हासिल करने के लिए 70-75  प्रतिशत जनता का बीमारी से संक्रमित होना आवश्यक होता है, इसके लिए दिल्ली के और एक करोड़ लोगों को कोरोना से इन्फेक्टेड होना पडेगा और मौत का आंकड़ा लगभग 40, 000 पहुंचेगा ! उसके बाद ही दिल्ली में कोरोना से मरनेवालों की मौत रूक सकती हैं !

    इसी प्रकार देशभर में लगभग सौ करोड़ लोगों के संक्रमण और कई करोड़ की मौत के बाद ही देश में हर्ड इम्युनिटी आ सकती हैं ! उसके लिए कोरोना को बहुत समय चाहिए होगा ! मेडिकल को अपनी व्यवस्था अच्छी रखनी होगी ! तबतक हमें सावधानी से जीना सीखना होगा, छोटे छोटे शहरों में और गाँव में अभी भी समय हैं, हम चाहे तो कोरोना के चेन को तोड़ सकते हैं, पर महानगरों को तो हर्ड इम्युनिटी का ही इंतज़ार करना होगा !

    मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----





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      कोरोनावायरस और रोग-प्रतिरोधक क्षमता

      Virus coronavirus in India


      Virus coronavirus in India


      देश-विदेश में फैले कोरोनावायरस के छह-आठ महीने के दौर को देखने के बाद अब लोगों को इतना समझ में आ गया है कि मास्क और सोशल डिस्टैन्सिंग के बाद इससे बचने के लिए सबसे बड़ी बात लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता है ! लॉक डाउन के समय ही सरकार के आयुष मंत्रालय ने यह घोषणा कर दी थी, काढ़ा बनाने का प्रोसेस शेयर किया था ! लगभग सभी भारतीय घरों में लोगों ने कोरोना को भयानक बीमारी मानते हुए उससे लड़ने के लिए काढ़े का उपयोग शुरू कर दिया था !


      सिर्फ मंत्रालय द्वारा सुझाया काढ़ा ही नहीं, काढ़े के अलावा प्रायः घरों में सुबह शाम निम्बू पानी, योगा, कुछ विटामिन्स की गोलिया, ऐलोवेरा, गिलोय के साथ रात्रि में हल्दी-दूध पीने के साथ ही सोते वक्त गरम पानी और नमक का गार्गल भी शुरू किया गया ! डेढ़ महीने के लॉक डाउन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले इतने उपचार ने वास्तव में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया, इसलिए तो अनलॉक के बाद जितने कोरोना रोगी बढ़ते गए, मृत्यु-दर नहीं बढ़ी ! बहुत सारे लोगों को कब कोरोना हुआ और कब ख़त्म भी हुआ पता भी नहीं चला, क्योंकि हर घर में उपचार तो चल ही रहा था ! हालांकि मुझे लगता है कि मास्क और सोशल डिस्टैन्सिंग का पालन किया जाता तो केसेज भी नहीं बढ़ते, नुकसान की संभावना और कम होती !




      वैसे भी भारतवर्ष में अभी भी आधे से अधिक लोगों को रोजी-रोटी के लिए शारीरिक तौर पर मेहनत करने की आवश्यकता पड़ती है ! मेहनत करने वाले लोगो की खुराक भी अच्छी होती है और प्राकृतिक तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी ! अधिकांश समय कुर्सी में बैठकर काम करने वाले लोगो में से अधिकांश पिछले एक दो दशक में थाइरोइड, बीपी, मधुमेह और ह्रदय-रोग जैसी बीमारियों से ग्रस्त हुए ! उनमे से स्वास्थ्य पर ध्यान देनेवाले लोगों ने योग करना और दौड़ना-भागना जारी रखा था ! पर कुछ आलस की वजह से सिर्फ एलोपैथी दवा लेकर निश्चिंत बने रहें ! उनके सामने सबसे बड़ा ख़तरा आया, कोरोना से हुई अधिकाँश मौत में ये ही शामिल हैं ! बहुत सारी मौतें अफरा तफरी भरे माहौल के चलते भी हुई हैं !


      किसी भी विपत्ति को दो तरह से झेला जाता है ! जबतक विपत्ति की प्रकृति नहीं मालूम हो, तबतक सावधान रहते हुए उसे समझने की जरूरत होती है ! जैसे ही हम विपत्ति की प्रकृति को समझने लगते हैं, उससे लड़ने का प्रयास करते हैं ! यदि विपत्ति बड़ी हो तो उसका सर्वनाश उचित समझते हैं ! कोरोना नयी बीमारी है, उस हिसाब से इसे हम समझ जरूर चुके हैं ! ऐलोपैथी की तुलना में कम समय में राजस्थान में आयुर्वेद तथा मुम्बई के धारावी में होम्योपैथी से कोरोना को मात दी जा चुकी है ! इस तरह हम कोरोना का खात्मा भले नहीं कर सकें, पर कुछ सुरक्षात्मक उपायों के साथ आयुर्वेद और होमियोपैथी की सहायता से नुकसान को कम जरूर कर सकते हैं !

      एलोपैथी के डॉक्टर भी अब लोगों को यही सलाह देने लगे हैं ! दरअसल एलोपैथी में लोगों को विभिन्न रोगों से लड़ने के लिए जो एंटीबायोटिक दिए जाते हैं, वे शारीरिक क्षमता को कम करते हैं, जबकि आयुर्वेद प्राकृतिक शास्त्र है ! कोरोना के बहाने पिछले दो दशकों से दिमाग में चल रहा लोगों का भ्रम कि मानसिक विकास ही दुनिया को आगे बढ़ाएगा, अब समाप्त हो जाना चाहिए और हमें शारीरिक मजबूती के प्रयास भी बनाये रखने चाहिए ! बच्चों को खेल-कूद का भरपूर मौका दिया जाना चाहिए, बैठकर जीविका चलानेवालों को योगा और व्यायाम करना चाहिए ! सामान्य तौर पर दादी-नानी के घरेलु नुस्खे, आयुर्वेद पर अधिक और एलोपैथी पर निर्भरता कम होनी चाहिए ! एलोपैथी को इमरजेंसी हेल्थ सर्विस के तौर पर ही लेने की जरूरत है ! एक स्वस्थ तन और मन ही स्वस्थ दिमाग दे सकता है, इस बात को हमें नहीं भूलना चाहिए !

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        कोरोना पॉजिटिव न बनें !

        कोरोना पॉजिटिव न बनें, यदि बने तो 90% स्वस्थ लोगों में ही,  टॉप 10% तक न पहुंचें !

        idea to fight against corona


        कोरोना देश के कोने कोने में फ़ैल गया है, और लम्बे समय तक आप जरूरी आवश्यकताओं के बिना नहीं रहा सकते, इसलिए इससे बचने के तरीके ढूंढने ही होंगे ! ऐसा क्या करें कि आप कोरोना पॉजिटिव न बनें, यदि बने तो 90% स्वस्थ लोगों में ही बने रहें ! टॉप 10% तक न पहुंचें? यदि वहाँ तक पहुँच भी जाएँ तो सुरक्षा से बिल्कुल सामान्य हो जाएँ !



        हर व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव हो सकता है


        सबसे पहले तो आप पौस्टिक खाना, भरपूर नींद के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानेवाली दवाओं, निम्बू-पानी, दूध-हल्दी या काढ़े का भी उपयोग करें ! मेरी आयुर्वेद पर तो अधिक जानकारी नहीं, पर काढ़े बनाने में जिन मसालों का उपयोग किया जाता है, वो थोड़े कम-अधिक मात्रा होने पर स्वास्थ्य में कोई गड़बड़ी नहीं करते ! उसी तरह तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, अश्वगंधा की थोड़ी थोड़ी मात्रा नुकसान नहीं करती ! यदि काढ़े के किसी आइटम से परहेज हो तो उसे हटा दें !


        उसके बाद आप गंभीरता से मान ले कि सामने वाला हर व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव हो सकता है, कोई पड़ोसी, कोई मित्र, कोई रिश्तेदार या कितना ही सुरक्षित जगह क्यों न हो, हर व्यक्ति की साँसों, हाथों और हर वस्तु पर कोरोना वायरस हो सकता है ! इसलिए खुद को हर व्यक्ति और वस्तु से बचाना आवश्यक है !


        idea to fight against corona

        भीड़-भाड़ से दूर रहने की कोशिश करें


        इसके लिए अधिकांश समय घर के अंदर रहें, कुछ जरूरत से बाहर निकले तो अच्छा मास्क लगाएं, भीड़-भाड़ से दूर रहने की कोशिश करें, भीड़भाड़ में तेजी से रास्ते पार कर आगे बढ़ें, घर से बाहर कोई परिचित मास्क लगाए दिखे तो दो मिनट बात कर सकते हैं, कोई वाल्व वाला मास्क लगाए हो तो जरूर टोकें, वह अपनी सुरक्षा तो कर रहा है पर सामनेवाले असुरक्षित हो रहे हैं ! उनसे या कोई परिचित बिना मास्क के दिखे तो बात करने की भी जरूरत नहीं, उसे डांटते हुए निकल जाएँ ! किसी के नाराज होने की चिंता अभी नहीं करनी है !

        बाहर से घर आने पर व्यवस्था रखें कि दरवाजे पर ही बाल्टी में डिटर्जेंट घुला पानी रखा हो ! आप अपने हाथ-पैर धोयें, चप्पल-जूत्ते धोयें, कपडे उतारकर डिटर्जेंट में डालें, सामान को उसी घर के कोने में जगह बनाकर रख दें ! घर में बच्चे हों तो उनकी पहुँच से दूर जगह पर सामान एक दो दिन छोड़ दें ! फल सब्जी हो तो एक घंटे पानी में डाल दें ! अब तो सब्जियों को धोने के लिए डिटर्जेंट भी बाजार में मौजूद है ! बाल्टी के कपडे वाशिंग मशीन में ड़ालकर स्नान कर लें या कपडे बदल लें !

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        घर के बच्चों, वृद्ध और बीमाऱ से कुछ अलग ही रहना चाहिए !


        इतने के बाद भी आपको कोरोना संक्रमण हो ही सकता है, पर यदि संक्रमण हुआ भी तो हल्का होगा, जिसको आप झेल सकते हैं, पर आपके घर कोई बच्चे, वृद्ध या बीमाऱ रह रहे हों तो उनको संक्रमण बढ़ सकता है ! इसलिए बाहर जानेवाले लोगों को घर के बच्चों, वृद्ध और बीमाऱ से कुछ अलग ही रहना चाहिए ! घर में कुछ छूने से परहेज करें, किसी भी कार्य से पहले और कार्य के बाद अच्छे से हाथ धोयें !

        कोरोना का कोई भी लक्षण - सर्दी, खांसी, बुखार या शारीरिक कमजोरी जैसा कुछ भी महसूस हो तो घर पर आराम करें, खुद को क्वैरेन्टाइन रखें, खांसते-छींकते वक्त टिश्यू पेपर का उपयोग करें ! ऑक्सीमीटर से अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें ! 90 तक ऑक्सीजन रहने पर आपको घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं, जो लक्षण हों, उसकी दवाईयां लेते रहे ! पौष्टिक लिक्विड खाना पीना, विटामिन्स, काढ़ा, योगा करते हुए संतुलित जीवन बनाये रखें ! ईश्वर से स्वस्थ होने की प्रार्थना करते रहें ! 10 दिनों में आप स्वस्थ हो जाएंगे !

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        अस्पताल में जल्द एडमिट करने की आवश्यकता है !


        यदि ऑक्सीजन का स्तर 90 से नीचे हो रहा है, तब भी घबराने की नहीं, थोड़ा गंभीर होने की जरूरत है ! डॉक्टर से परामर्श करें, कुछ विशेष एंटीबायोटिक दवाएं लेनी पड सकती है ! ऑक्सीजन का स्तर 85 से 80 जाने लगे तो आपको अस्पताल में एडमिट होने की जरूरत है ! यदि अस्पताल में जगह न हो तो कम से कम ऑक्सीजन देने की जरूरत तो ऐसे मरीजों को पड़ ही जाती है ! डॉक्टर से परामर्श लेते रहें, यदि शरीर के सभी अंग स्वस्थ हों तो चार छह दिनों में घर में भी ऐसे पेशेंट ठीक हो जाते हैं ! लेकिन यदि पहले से उनके शरीर के कई अंग कमजोर हों तो अस्पताल में जल्द एडमिट करने की आवश्यकता है !

        नोट - बाकी तो हरि इच्छा ! यह लेख कई डॉक्टरों के लेख और उनसे बातचीत के आधार पर लिखी गयी है ! अधिकांश मरीज अधिक इन्फेक्टेड होने या देर होने की वजह से नहीं बचाये जा पाते ! सरल भाषा में मैंने लिखी है, इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें !

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          क्या हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं ?

          क्या हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं ?


          कोरोना पर लिखें गए कल के लेख पर एक पाठक के कमेंट से आज के लेख की शुरुआत करती हूँ, जिन्होंने लिखा कि शहरों में भयावहता फैलाने वाले कोरोना का गाँव में कोई प्रभाव नहीं है ! गावों में कुछ केसेज आये भी तो ख़त्म हो गए, प्रसार नहीं हो पाया ! अपने अनुभव से इस बात को अभी मैं भी स्वीकार कर यही हूँ ! वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का भी मानना है कि विकसित देशों, जैसे अमेरिका, कनाडा यूरोपीय देशों की तुलना में भारत के महानगरों में ही कोरोना से लड़ने की क्षमता अधिक दिख रही है, तो गावों में रहे वालों लोगों पर निश्चित तौर पर यह क्षमता उससे अधिक होगी !


          झारखण्ड में भी कोरोना के बिलकुल शुरुआती तीन केस में हिंदपीढ़ी, राँची के बाद के दो तो हमारे 10-12 किमी के रेंज में थे ! बेरमो में बांग्ला देश से आयी महिला के माध्यम से और गोमिया में लॉक डाउन के दौरान वाराणसी से ट्रक में छुपकर आये मजदूर के माध्यम से कोरोना फैला था ! दोनों छोटे गाँव थे, चार छह लोगों में संक्रमण हुआ था ! बेरमो का केस तो सरकार की निगाह में था ही, पर गोमिया वाले केस में तो वृद्ध के मौत के कितने दिन बाद ही मजदूर की चोरी पकड़ी गयी थी ! लेकिन दोनों ही जगह दिल्ली और मुम्बई वाली हालत नहीं हुई !


          Our villages and corona



          अनलॉक किये जाने के बाद हमारा भ्रम टूटा


          इसका पहला कारण यह हो सकता है कि गाँव में शहरों की तरह जीवन तंग नहीं है ! सबके घर खुले खुले होते हैं, सबका खाना प्राकृतिक होता है ! सभी मेहनती होते हैं, पैदल ही लम्बी यात्रा पर निकल पड़ते हैं ! या सब उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ! कोरोना काल में गावों में लोग इसकी चेन तोड़ने को प्रतिबद्ध भी दिखे ! वैसे देखा जाये तो लॉक डाउन के दौरान दिल्ली, मुम्बई में भी केस अधिक नहीं बढ़ रहे थे ! लोग घर पर और प्रशासन रोड पर रहकर कोरोना की चेन तोड़ने को प्रतिबद्ध थे ! और हम इसी भ्रम में थे कि यूरोप अमेरिका की तुलना में हमारे देश में संक्रमण की गति बहुत धीमी है !


          पर अनलॉक किये जाने के बाद हमारा भ्रम टूटा ! समस्याएं बढ़ी हैं, सरकार ने भले ही जरूरी कार्यों के लिए ही अनलॉक किया हो, पर अधिकांश लोग अपने पुराने रूटीन में लौट आये हैं ! कुछ लोग कोरोना की भयावहता को कम आँक रहे हैं ! इसी में अनलॉक -1 में महानगरों का हाल बेहाल करने वाले देश को विश्व के तीसरे पायदान पर खड़े कर देने वाले कोरोना ने अनलॉक - 2 में छोटे शहरों की ओर रूख किया है ! छोटे शहरों में लगातार केसेज बढ़ने से प्रशासन जैसे ही लाचार होगा, छोटे शहर भी महानगरों की हालात में आएंगे ! उसके बाद ही गाँव की बारी आएगी ! इसलिए यह कह देना कि हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं, अभी जल्दबाजी होगी !

          हमें सावधान तो रहना ही चाहिए !


          हम प्रतिदिन ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि कोरोना का प्रसार रुके, इससे हो रही मौत रुके, पर हमें चौकन्ना तो रहना ही होगा ! कोरोना काल बनकर निरंतर अपने मुंह को सुरसा की भांति बढ़ाता जा रहा है ! कोरोना गावों तक नहीं पहुंचा तो यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी ! पर लोगों के रवैये, गंभीरता की कमी को देखते हुए यह मान लेना कठिन है ! हर महामारी का अपना एक समय होता है, महानगरों और शहरों तक ही इसका समय समाप्त हो जाये, हम ऐसी आशा रख सकते है ! इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना कर सकते हैं, पर निश्चिंत तो नहीं रहा सकते ! आगे कोरोना के साथ ही जीवन जीना है, इसलिए हमें सावधान तो रहना ही चाहिए !

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            कोरोना को नियंत्रित किये जाने की कोशिश

            कोरोना को हराने के लिए 

            मैं डॉक्टर भी नहीं, वैज्ञानिक भी नहीं, फिर भी लगभग तीन महीने से मैं कोरोना के प्रति लगातार जागरूकता भरे लेख लिख रही हूँ ! शायद तब भारत में कोरोना के इक्के दुक्के मामले ही होंगे ! अपने पुराने लेखों में मैंने बाहर निकलने पर नियमित मास्क पहनने, हाथो पर अपना नियंत्रण रखने और बाहर से आये सामानो के प्रति जागरूकता बनाये रखने के बारे में लिखा करती थी ! साथ ही बाहर से घर में प्रवेश पर आवश्यक सावधानी और अपने घर में किसी को प्रवेश न देने के नियम का कड़ाई से पालन करना भी था ! कोरोना को हराने के लिए 1-2 महीने इतना कर लेना पर्याप्त था !


            हम सभी जानते हैं कि इन नियमों का पालन होता तो अभी तक कोरोना अपने पैर इतना न पसारता, और हमें अभी तक कोरोना के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए लिखना न पड़ता ! पर अभी भी बाहर 50% लोग मुंह और नाक में नहीं, गले में मास्क लगाए मिलेंगे आपको ! अब दूसरे मुद्दे पर आती हूँ, जिसमे कल एक पाठक ने लिखा कि कोरोना इतनी भी बड़ी बीमारी नही, इसके अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं ! इस बीमारी के प्रति अधिक हौवा फैलाया जाये तो लोग कोरोना मरीजों को लेकर घृणात्मक रवैया अपना रहे हैं, उनकी देखभाल नहीं हो पाती है !


            corona ko niyantrit karne ki koshish

            मारक नहीं पर संक्रामक


            अभी तक के आंकड़े यही बताते हैं कि कोरोना मारक नहीं है, आंकड़े 3% मृत्यु दर बताते है, पर टेस्टिंग की कमी को देखते हुए मैं इसे और कम करती हूँ, मृत्यु दर .3% भी हो सकता है ! यानि कोरोना 1000 लोगों तक पहुंचा तो 3 लोगों की मृत्यु कोरोना से निश्चित है ! भारत में एक मोहल्ले में भी 1000 से कई गुने लोग रहते हैं, आप अपने मोहल्ले में कोरोना फैला तो कोरोना से हुई मौत का अंदाजा लगा सकते हैं !


            क्योंकि कोरोना मारक कम है, पर संक्रामक तो है ही, और यदि कोरोना के प्रति लापरवाही रखी जाये तो यह देश के एक एक व्यक्ति तक पहुंचेगा ! अपनी संक्रामकता के कारण यह पूरे देश की जनसंख्या तक पहुँच जाये तो कितने लोग मौत के मुंह में समायेंगे, इसकी गणना की जा सकती है ! इसलिए कोरोना न फैले इसके इंतजामात तो करने ही होंगे !

            मौत के अधिकांश मामले 


            ये भी बात सही है कि मौत के अधिकांश मामले यानि 90% मामले वैसे हैं, जिन्हे कोई बीमारी थी, ऑपरेशन और उपचार के कारण वे स्वस्थ थे, लेकिन कोरोना के कारण उनकी मृत्यु हो गयी ! जांच की कमी से मैं मान रही हूँ, आज कोरोना 1 करोड़ लोगों तक पहुँच भी गया हो, ये संख्या 18, 000 हो गयी है ! कोरोना को वैसे ही बढ़ते छोड़ दिया जाये तो पूरे देश की जनसंख्या में मरनेवाले लोगों की संख्या 27 लाख हो जाएगी , जिनका इलाज हो सकता था, पर चिकित्सा विज्ञान की सारी उपलब्धियां, इतने दिनों का विकास, सबकुछ फेल हो गया, वे मौत के मुंह में समा गए !

            अब आते हैं, कोरोना से 10% स्वस्थ लोगों की मृत्यु पर, ये किसी के बेटे थे, किसी के पति थे, किसी के भाई थे, किसी की बहन थी ! ये अभी दो हज़ार हैं, पूरे देश तक कोरोना फ़ैल जाये, तो साढ़े पांच लाख स्वस्थ लोग भी कोरोना की चपेट से मरेंगे ! इससे कितने परिवारों तक सदमा पहुँचेगा, आप आसानी से समझ सकते हैं ! कोरोना न फैलता तो ये बच सकते थे, जो इन्हे कभी न भूलनेवाली त्रासदी दे गयी ! महामारी जब शुरुआती दौर में होती है तो, लोग इसे नहीं समझ पाते, पर सत्य यही होता है ! इसलिए इसके प्रसार पर रोक लगाना आवश्यक होता है !

            मरीजों की देखभाल 


            अब आती हूँ कोरोना मरीजों की देखभाल की बात पर, कुछ दिन पहले मैंने एक कहानी पढ़ी थी, जिसमे कोरोना काल में बूढ़े पिताजी को खांसते छींकते देखकर बेटे बहू ने ब्लड टेस्ट को भेजा, रिजल्ट आने तक उन्हें ऊपर छत पर बने घर, जिसमे पंखे, कूलर, बाथरूम तक भी थे, उसमे रहने को कहा, इसी बात पर बूढ़े पिताजी उदास हो gaye, दिनभर खाना नहीं खाये, शाम को पोते पोतियों को उन्हें घर में लाना पड़ा ! यह कहानी मुझे बिलकुल पसंद नहीं आयी, उस बूढ़े ने कभी घर में टीबी, चेचक , प्रसूति या सूतक के नियम नहीं पालन किये थे क्या? कोरोना को भी वैसा ही कुछ मान लेते !

            आप जितने सामाजिक होंगे, आपके अनुभव उतने अधिक होंगे ! मेरे कांटेक्ट का दायरा बड़ा है, मेरी दिनभर 10-20 लोगों से बात होती रहती है ! कुछ महिलाएं कोरोना को लेकर काफी गंभीर हैं, हेल्पर को हर महीने पैसे देने के बावजूद काम खुद कर रही है ! एक बताती है कि उसकी बचपन की दोस्त दरवाजे से ही लौट गयी, क्योंकि इसने उसे चप्पल बाहर उतारने को कहना बुरा लग गया ! एक बताती है कि एक मित्र उसके बीमाऱ पति को देखने आये, मुंह में मास्क लगाकर अंदर आने को कहने पर वे बाहर से ही लौट गए ! एक पड़ोसन के घर दो बच्चे आये, बच्चे बार बार खांस रहे थे, महिला ने उन्हें घर जाने को बोला, तबियत ठीक हो जाये तो आना ! पड़ोसी को बुरा लग गया ! मेरा भी अनुभव ऐसा ही है ! जबकि नियम का पालन करने से सिर्फ मैं नहीं आप भी सुरक्षित रहेंगे !

            व्यक्ति को भावुकता में नहीं, यथार्थवादी होकर कदम उठाने चाहिए ! सावधानी बरतनेवाले लोग, डॉक्टर की बात मानने वाले लोग, कानून का पालन करने वाले लोग वही करेंगे, जो करना चाहिए ! इस लेख के पहले पैराग्राफ में ही लिखा है कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए ! मरीजों को सबसे दूर तो रहना ही है, पर लोग छुप छुपकर बीमारी के प्रसार में भूमिका अदा कर रहे हैं ! थोड़ी सावधानी बरतने वाले लोगों से उन्हें दिक्कत हो रही है ! मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए, पर खुद को संभालते हुए ! पानी में डूबते हुए लोग बगल वाले को पकड़कर उसे भी डुबोने को तैयार रहते हैं, पर आप उससे खुद को बचाते हुए उनके बचाव का इंतजाम करते हो, आपका रवैया वैसा ही होना चाहिए !

            कोरोना मरीज और सस्पेक्ट


            कोरोना मरीजों से बाकी लोगों को बचाने के लिए दूसरे देशों में तो कोरोना मरीज और सस्पेक्ट दोनों की जिम्मेदारी सरकार की है ! भारत में भी शुरूआती दौर में यही होता है, पर संख्या बढ़ जाती है तो सरकार हाथ खड़े कर देती है ! भारतीयों की शारीरिक क्षमता के कारण भी सरकार कुछ निश्चिंत है, गंभीर मरीजों को ही अस्पताल जाना होता है, बाकी घर में रहकर स्वास्थय लाभ कर सकते हैं, क्वैरेन्टाइन में रहा सकते हैं ! लेकिन प्रशासन खुद पहले गली को, आजकल आपके बिल्डिंग को चिन्हित कर देती है, ताकि न आप बाहर जाए, न बाहर से कोई आये ! आपको सामान के लिए पड़ोसियों से मदद लेनी चाहिए, पर दूरी बनाये रखना आवश्यक है ! कोरोना पेशेंट भी मनोवैज्ञानिक तौर पर कमजोर हो जाते हैं, इसलिए बड़ी अपेक्षा कर बैठते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए !

            अभी कोरोना के संक्रमितों की संख्या कम है, गंभीर पीड़ितों की संख्या कम है, इसलिए मौत का प्रतिशत भी कम है, पर आंकड़ा बढेगा, गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ेगी तो इलाज की सुविधा और कम होती जाएगी, इससे मौत के प्रतिशत भी बढ़ेंगे ! मैंने ऊपर जितने आंकड़े बताये, देश में मौत उससे कहीं अधिक होगी ! इसलिए मुझे तो उचित लगता है कि कोरोना के प्रसार रोकने के यत्न करने चाहिए ! आपको क्या लगता है, अवश्य कमेंट करें ! इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि कोरोना काल में जहाँ तहँ हो रहे संबंधों की गड़बड़ी को कम किया जा सके ! कोई किसी की बात का बुरा न माने !

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            मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----




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              कोरोना मरीजों का इलाज

              कोरोना के मामले की सलाह


              कोरोना को लेकर लोगोँ में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से तीन चार महीनों से मैं ज्योतिष की जगह कोरोना से सम्बंधित लेखन अधिक करने लगी हूँ, तो ज्योतिषीय सलाह लेने वाले हमारे क्लाइंट्स ज्योतिष के साथ साथ कोरोना के मामले की सलाह भी लेने लगे हैं ! वैसे अभी तक भारत में लापरवाहों की भीड़ अधिक है, जो कोरोना को फैलने-फैलाने का माध्यम बने हुए हैं !

              एक क्लाइंट ने कोरोना से बचने के लिए तीन महीनों से पूरी सावधानी से जीवन जीया है. पर उसके मोहल्ले के सभी लोग पहले की तरह ही मिलजुल रहे हैं ! संयोग से कोरोना उसके मोहल्ले तक नहीं पहुंचा है, इसलिए पड़ोसी मजाक भी उड़ा रहे हैं ! उसके पड़ोस में शादी है, सबका आना जाना चल रहा है ! मेरी क्लाइंट परेशान है, नहीं जाउंगी तो बुरा लग जायेगा ! मैंने बोला, जाने में कोई बुराई नहीं, पर प्रशासन की गाइडलाइन्स के हिसाब से सेनेटाइजर की व्यवस्था न हो, 50 से अधिक की भीड़ दिखे, सबके मुंह पर मास्क न दिखे, कुर्सियों या खड़े होने की जगह के मध्य छह फ़ीट का दूरी न हो तो कारण बताकर फ़ौरन वापस हो जाएँ !


              save grandparents from corona,

              कोरोना काल में सम्बन्ध

              सम्बन्ध साल, दो साल, चार साल के लिए खराब होता है, ठीक हो जायेगा ! नहीं ठीक होगा तो नए लोगों से सम्बन्ध बन जायेंगे, जीवनभर कोई अकेला नहीं रहेगा ! पर पूरी दुनिया को परास्त करने वाला कोरोना का खात्मा चेन तोड़कर ही होगा ! सिर्फ अपने लिए नहीं डरना है, चेन फैलने से रोकने के लिए डरना है ! जो नहीं समझते नहीं, नहीं समझेंगे, पर हम समझकर भी गलती नहीं करेंगे ! कल एक महिला ने बताया कि चप्पल बाहर उतारने को कहने पर उसकी मित्र दरवाजे से ही वापस चली गयी, कोरोना काल में चप्पल बाहर उतारने कहना इतनी बड़ी गलती है कि तुम बचपन की दोस्ती तोड़ दो ! इसकी क्या गारंटी है कि आपका चप्पल रास्ते में किसी कोरोना पॉजिटिव के थूक पर चढ़कर नहीं आया हो !


              यदि विदेशो से आ रही ख़बरों पर ही हम सावधान हो जाते तो आज दिल्ली और मुम्बई में जो कोहराम मचा है, वो नहीं होता ! इसके बाद भी यदि लोग नहीं समझेंगे, तो इसका अर्थ यही है कि आप एक एक अपार्टमेंट और एक एक गली तक कोरोना को पहुँचाने का इंतज़ार कर रहे हो ! पूरे भारतवर्ष से कई खबरें ऐसी आयी, जहाँ केवल एक व्यक्ति, चाहे वह ऑफिस का कर्मचारी हो, डॉक्टर हो, यहाँ तक कि एक दूल्हे ने भी 50-100 लोगों को संक्रमित किया ! उनमे से कम इम्युनिटी वाले 2-4 की तो मौत हो ही सकती है ! इस तरह एक स्वस्थ व्यक्ति अपनी अच्छी इम्युनिटी के कारण कोरोना से खुद न भी मरे, पर 4 लोगों को मार सकता है ! पूरे भारतवर्ष की लापरवाही को मिलाया जाये तो करोड़ों हो जायेंगे !

              डॉक्टर की कोरोना पॉजिटिव रिजल्ट


              कल बैंगलोर के एक अपार्टमेंट से खबर आयी कि एक यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर की कोरोना पॉजिटिव रिजल्ट है, जिसने दो चार दिन पहले पूजा करवाई थी और पूरे अपार्टमेंट में प्रसाद बांटा था ! उसे भ्रम रहा कि वह कोरोना मरीजों का इलाज नहीं कर रहा है, इसलिए उसे कोरोना नहीं हो सकता ! अरे आपका कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव रह ही सकता है, जिसको चेक करने में आपको कोरोना हो गया हो ! आपने इस समय पूजा में लोगों को बुलाने की या नहीं आने पर घर घर प्रसाद पहुंचाने की भूल क्यों की? 

              पूरी बिल्डिंग सील की गयीं है, सबके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, कितने रिपोर्ट पॉजिटिव आएंगे, कितने कमजोर मौत के मुंह में जाएंगे, वह तो समय बताएगा, पर कोरोना काल में जब एक डॉक्टर के द्वारा ऐसी भूल होती है तो बाकी लोगों को सिखलाने में बहुत समय चाहिए, तबतक कोरोना भारत के गाँव की एक एक गली और एक एक अपार्टमेंट तक पहुँच चुका होगा, कमजोर इम्युनिटी वाले सारे लोग इस दुनिया को विदा कर चुके होंगे, भाग्यशालियों के ही दादा दादी, नाना नानी बच पाएंगे !
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                नाक, मुंह और हाथों पर नियंत्रण


                Ways to control yourself from corona virus


                महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह कोरोना वायरस के कम मरीज, कम मौतें देखने को मिली, प्रतिदिन के आंकड़े को भी देखें तो दिन-ब-दिन मामले कम हो रहे हैं, यहाँ तक कि धारावी में भी केस बहुत कम मिल रहे हैं। अब जो मामले आ भी रहे हैं, उसमे अधिक संख्या उत्तर मुंबई के रोगियों की है, जो प्रशासन के निर्देश के बावजूद कल तक बाजार में भीड़ लगा रहे थे। पुलिस ने मालाड, कांदिवली, बोरीवली और दहिसर के 27 इलाकों में सख्ती बढ़ा दी है. इन इलाकों को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है. मुंबई में कोरोना से ठीक हो रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए भी कहा जा सकता है कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं. कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों की संख्या मुंबई में कोरोना के एक्टिव मामलों की तुलना में ज्यादा है.

                Ways to control yourself from corona virus


                Coronavirus in Delhi and Mumbai


                इन दिनों वायरस संक्रमण के मामले दिल्ली में कोरोना मुंबई से भी ज़्यादा हो गए हैं. दिल्ली में सुबह के आँकड़ों के अनुसार अब कुल कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 70390 हो गई है जबकि मुंबई में संक्रमण के मामले 69528 हैं. दिल्ली में बीते 24 घंटों में संक्रमण के 3788 नए मामले सामने आए हैं. वहीं मुंबई में 24 घंटों में 1118 नए मामले मिले. हालांकि संक्रमण से होने वाली मौतों के मामले में दिल्ली मुंबई से पीछे है और स्थिति बेहतर है. दिल्ली में अब तक संक्रमण से कुल 2365 लोगों की मौत हुई है जबकि मुंबई में 3964 लोग अब तक संक्रमण की वजह से जान गंवा चुके हैं. फिर भी चिंतनीय तो है ही। दिल्ली में निश्चित तौर पर इस हालत के लिए प्रशासनिक लापरवाही के साथ लोगों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को दोष दिया जा सकता है। लॉक डाउन ख़त्म होते ही लोग इतनी तेजी से घूमते फिरते नजर आये, गलती किसी की होती है, भुगतना किसी और को पड़ता है।

                What is control yourself from corona virus

                वास्तव में, कोरोना वायरस का नियंत्रण न होना प्रशासनिक और व्यक्तिगत लापरवाही का ही परिणाम है। झारखण्ड में शुरूआती दौर में संक्रमण के मामले ३ स्थानों पर मिले थे। पहला रांची के हिंदपीढ़ी, जहाँ संक्रमण तेजी से हो रहा था, प्रशासनिक चुस्ती के कारण नियंत्रित किया जा सका। हिंदपीढ़ी का संपर्क पुरे रांची से काट दिया गया था, पर कुछ लोगों की व्यक्तिगत लापरवाही के कारण संक्रमण रांची के कई गाँवों में फैला। झारखण्ड में शुरुआती दिनों के और दो केस बोकारो जिले में ही थे, पर प्रशासनिक और लोगों की व्यक्तिगत चुस्ती से दोनों का परिणाम संतोषजनक रहा। पुरे गाँव को सख्ती से बंद कर दिया गया था, जो बीमारी को नहीं फैलने देने का एकमात्र उपाय है। बोकारो-रांची-जमशेदपुर के युवाओं का विदेशों से, बड़े शहरों से प्रतिदिन आना जाना लगा रहता है, बीमारी के दौरान भी वे बाहर से आये, पर क्वैरेन्टाइन के नियमों का अच्छी तरह पालन होने से बीमारी का फैलाव नहीं हो पाया था। इधर-उधर से आ रहे मजदूरों के कारण अभी भी कोरोना संक्रमितों के छिटपुट मामले निकल ही रहे हैं, इन दिनों इस वायरस से प्रशासनिक और व्यक्तिगत स्तर पर लोग कैसे निबट रहे हैं, इसका पता तो एक महीने बाद यहाँ का माहौल बताएगा।

                Will you control yourself from corona virus

                कोरोना वायरस की कोई दवा नहीं है, यह लोगों तक न पहुंचे, बस इसका उपाय करना आवश्यक है। इसके लिए मुंह और नाक के बचाव के लिए मास्क और अपने हाथों पर नियंत्रण आवश्यक है। अभी के हालत में यह पूरे विश्व में हर स्थान पर किया जाना चाहिए।  पर जबतक एरिया रेड जोन घोषित नहीं हो जाता, प्रशासन के निर्देश के बावजूद लोग जागरूक नहीं होते। और रेड जोन घोषित होने के बाद कोरोना वायरस के प्रसार पर हमारा नियंत्रण नहीं रह जाता। इसलिए आवश्यक है कि अपने एरिया को रेड जोन बनने नहीं दिया जाये। मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े शहर लापरवाही की वजह से ही कोरोना वायरस का भीषण प्रकोप झेल रही है, अब कोरोना वायरस अपना रुख धीरे-धीरे छोटे शहरों की ओर कर रही है, उसके बाद गावों की ओर भी करेगी। लॉक डाउन खुलने के बाद पटना की एक शादी के दौरान गुडगाँव में रहने वाले दूल्हे की कोरोना से मौत और २२ लोगों का संक्रमित हो जाना, रायपुर में एक सैलून वाले के संक्रमण से १००-२०० लोगों का संक्रमण हो जाना, जैसी घटनाएं इसी ओर इशारा कर रही है। पर बड़े शहरों की तुलना में छोटे शहरों में भीड़ कम है, गांव में और भी कम। इसलिए इन जगहों पर इसके नियंत्रण की काफी संभावना होगी। पर प्रशासनिक और व्यक्तिगत चुस्ती हर जगह आवश्यक है, सभी लोगों के सुरक्षित रहने के लिए बेहतर यही है कि हम अपने नाक, मुंह और हाथों पर इतना नियंत्रण रखें कि हमारा जोन रेड जोन नहीं बन पाए

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                गत्यात्मक ज्योतिष  से जुड़े अन्य लिंक्स 



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                    प्राइवेट नौकरी कर रहे युवाओं की चिंता

                    विश्व में कोरोना वायरस प्राकृतिक आपदा बनकर आयी हो या ये मानवकृत आपदा हो, पूरा विश्व इसके विभीषिका से त्रस्त है। उच्च-मध्यम-निम्न वर्ग, धर्म और जाति-पाति नहीं देख रहा यह वायरस। कोई बीमार पड़ रहे हैं तो कोई मृत्यु का वरण भी, धन या पद की कोई मजबूती काम नहीं आ रही है। निम्नस्तरीय लोगों को अभी सरकारी मदद, समाजसेवी संस्थाओं की मदद मिल रही है, माहौल ठीक होने पर उन्हें बड़ा-छोटा काम भी मिल जायेगा। उच्चवर्गीय परिवार कोरोना के बाद के समाज की मांग के अनुरूप पूंजी के अनुरूप अपने रोजगार को बदल देंगे। गांव-शहर में बसे मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों को दो-तीन महीने घर में बैठकर या जरूरी काम करते हुए काटने में भी कोई दिक्कत नहीं, पर उनकी भविष्य की सम्भावनाएँ अनिश्चित लगती हैं।


                    corona side effects


                    सरकारी नौकरी कर रहे लोगों पर करियर और रोजी-रोटी की अनिश्चितता नहीं, पर इतने बड़े देश में आयी चुनौतियों को संभालने के क्रम में सरकारी दवाब का सामना तो करना ही पड़ रहा है। पर प्राइवेट नौकरी कर रहे घर-परिवार से अलग रह रहे युवाओं की चिंता भी कम नहीं, जिन्हे अपने नियोक्ताओं के लाभ की भी चिंता करनी है, कंपनी में बने रहने के लिए ऊपर आनेवाले हर आदेश का पालन कर खुद मेहनत करनी है, घर में सहायिकाओं के अभाव में खाने-पीने, साफ़-सफाई का ध्यान भी रखना है। इसके बाद भी यह तनाव बना ही हुआ है कि किसकी नौकरी बचेगी और किसकी नौकरी जाएगी ?


                    पूरे भारतवर्ष से दो तरह की खबरें रही है -- जहाँ किसी प्रदेश, किसी शहर और किसी गाँव से अच्छी व्यवस्था की, मतलब प्रशासन द्वारा खाने-पीने की व्यवस्था की गयी है. जरूरतभर अनाज बांटे गए हैं, पुलिस चुस्त बनी हुई है, लोगों को जमा होने नहीं दिया जा रहा है, सेनिटाइज़ेशन किया जा रहा है तो वहीं किसी प्रदेश, किसी शहर और किसी गाँव से बुरी व्यवस्था की खबर भी, लोग खाने-खाने को मुंहताज हैं, अनाज किसी को मिला किसी को नहीं, पुलिस आराम कर रही है, लोग जमा हो रहे हैं, सैनिटीजसन की तो कुछ चर्चा नहीं है। 

                    इससे एक निष्कर्ष तो निकलता है, अच्छी व्यवस्था करने वाला पूरा प्रदेश, शहर या गाँव केंद्र द्वारा दी गयी जिम्मेदारियाँ ले रहा है, जनता को भेजी गयी सुविधाओं को देने में पैसे खर्च कर रहा है, बुरी व्यवस्था करनेवाला प्रदेश, शहर या गाँव केंद्र द्वारा दी गयी जिम्मेदारियाँ नहीं ले रहा है, जनता को भेजी गयी सुविधाओं को न बाँटकर पैसे बचा रहा है। बेईमानी के फल को भोगते हुए हमारे पूर्वजों ने देखा था, इसलिए हमेशा बच्चों को ईमानदारी की शिक्षा दिया करते थे। 

                    यह बात अलग है कि बाद में हमारे पाठ्यक्रम से नैतिक शिक्षा का विषय ही गायब कर दिया गया। कोरोना के इस भयंकर दौर में यदि कोई पैसे बचाकर ऊपर से नीचे तक इसे बाँटने जैसा भ्रष्टाचार करके यह सोच रहे हैं कि जनता की आह उन्हें नहीं लगेगी तो गलत सोच रहे, जनता की आह सबसे भारी होती है। इससे निष्कर्ष यही निकलता है कि देश मे स्वार्थियों की कमी नहीं है। नैतिक शिक्षा की बात भूल गए हो। बड़े बुजुर्गों द्वारा दीं गयी शिक्षा भूल गए हो पर आज प्रकृति की ताकत को तो पहचानो। आपत्तिकाल मे दूसरे के हिस्से के पैसे मत रखो नादानो !

                    जिस देश के गरीबों को आनेवाले समय मे खाने पीने, जरूरी व्यवस्था मे ही दिक्कत है, सफाई के लिए साबुन और सेनेटाइजर कहाँ से खरीद पाएंगे ? वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस पर गाय के गोबर, मूत्र और लकड़ी की राख़ का भी प्रयोग टेस्ट करना चाहिए. पिछली कई महामारियों मे, जब सर्फ़ सैनिटाइज़र का बनना शुरू भी नहीं हुआ था, यह रामबाण साबित हुआ था. प्लेग के बारे मे प्रसिद्द है कि जिनके घर मे गायें थी, उस के घर मे प्लेग नहीं फैला था. गावों मे अभी भी गोबर से घर आँगन लीपे और राख़ का उपयोग हाथ धोने और बर्तन मांजने मे किया जाता है. उम्मीद है, सरकार इसपर ध्यान देगी। 


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                      कोविड की बीमारी में उम्र


                      कोरोना के बहुत मारक होने की चर्चा कभी नहीं हुई है, विदेशों से भी जो संकेत आ रहे थे, उसके अनुसार स्वस्थ व्यक्ति को कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं थी, आज हमारे देश के केस को देखते हुए भी यही कहा जा सकता है, पर थॉयरॉइड, BP, न्यूमोनिया, हार्ट, किडनी, शुगर के पेशेंट जिस घर में हों, वहाँ रहनेवाले स्वस्थ व्यक्ति भी सावधानी से रहे, कोरोना से खतरा स्वस्थ लोगों को नहीं, पर पहले से कोई बीमारी रखने वालों को तो है, लापरवाही किया तो आप नहीं भुगतेंगे, आपके घर में रहनेवाले कमजोर भुगतेंगे ! आपका परिवार मजबूत है तो नहीं भुगतेगा पर पड़ोसी के परिवार में लोग कमजोर हुए तो भुगतेंगे !

                      age factor in covid


                      इसलिए न घबराओ, एक और माता आयी हैं ! जबतक टीका नहीं आ जाता, चेचक की तरह इलाज रखो, बच्चों बुजुर्गों की सारी व्यवस्था अलग रखें ! जरूरी कार्यों से बाहर निकलनेवाले अपनी सारी व्यवस्था अलग रखें ! अच्छे मास्क लगाएं, बाहर से आते ही चप्पल बाहर रखें, बहुत सावधानी से बिना किसी चीज को छुए बाथरूम जाएँ ! सबसे पहले हाथ धोयें, कपडे गरम पानी मे डुबोएं और सर से पैर तक अच्छे से सफाई करके नहाये ! बाहर से आनेवाले सामानो को मानकर चलें कि इसमें कोरोना है ! एक सप्ताह बाहर छोड़ दे या साबुन से धो लें ! गरम पानी मे 5 मिनट के लिए डाल दें ! उसके बाद ही उसका उपयोग करें ! चेन टूटेगा, हड़बड़ाहट न रखें ! भारत मे कोरोना का खास असर नहीं देखा जा रहा है ! सावधान रहेंगे तो कोरोना भी आउट और हम भी आउट हो पाएंगे !

                      कोरोना के रिकवरी रेट पर मत जाइये, रिकवरी के पहले पूरे महीने जो झेलना पड़ेगा, उसे समझिए ! नादानी मत कीजिए ! कुछ दिनों जरूरी बातों के लिए ही बाहर निकलें ! घर मे रहेंगे तो एक साल पीछे जायेंगे ! बाहर निकले और कोरोना हुआ तो पूरे परिवार डिस्टर्ब होंगे ! कई साल पीछे जायेंगे ! परिवार मे कोई दुर्घटना हो गयी तो जीवनभर खुद को माफ़ न कर सकेंगे ! दूसरे क्या कर रहे हैं, नक़ल न कीजिए ! आप सही कीजिए, दूसरे नक़ल करेंगे ! कोरोना जहाँ फ़ैल जाता है, संभालना मुश्किल होता है ! जहाँ नहीं फैला है, वहाँ फैलने न दें !  अधिक से अधिक लोग पोस्ट को शेयर कीजिए ! ताकि लोग पढ़कर कुछ समझें, भीड़ न बनायें ! बिलकुल जरूरी काम से ही बाहर निकले लोग ! हर जगह भीड़ हो रही है !

                      कोविड की बीमारी में उम्र मायने नहीं रखती, शरीर की आतंरिक शक्ति मायने रखती है, 95% लोगों के इस बीमारी से जीतने की शक्ति के पीछे स्वास्थ्यवर्धक खान-पान, शारीरिक श्रम करते रहना, कोई बीमारी न होना है, सलमान ख़ान की दबंग सीरीज की तीनों फिल्मों, पार्टनर, तेरे नाम, जय हो जैसी अनेक फिल्मों में उनके संगीतबद्ध हिट गाने देनेवाले मशहूर संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद के वाजिद ख़ान का आज सुबह 42 साल की उम्र में ही मुंबई के चेम्बूर में सुराना अस्पताल में निधन हो गया, उन्हें किडनी की बीमारी थी और उनका Covid-19 टेस्ट पॉजिटिव आया था, कोरोना से पहले भी कम उम्र के कई डॉक्टर्स, व्यवसायी की मौत हमलोग देख चुके हैं, किसी भ्रम में ना रहे, सुरक्षा में कोताही करके कोविड को फैलने का मौका न दें !

                      मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----



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                        कोरोना के केसेज इतने न बढ़ते


                        दो-तीन  महीने के पूरे घटनाक्रम को देखकर मालूम हो गया। ऊपरवाली सरकार जो चाहती है वो करवा लेती है। ऊपर से यमराज ने महामारी के रूप मे यमदूतों को भेज दिया तो बचना मुश्किल है। देश का इतना बड़ा लॉक डाउन का निर्णय कुछ काम न आया। गाँव -गाँव मे कोरोना को फैलने का मौका मिल गया। मजदूरों को समझा-बूझाकर बड़े बड़े अपने शहर मे रखकर तीन महीने के चावल-रोटी का खर्च न तो सरकार कर सकी और न उद्योगपति कर पाए। न क्रिकेट के खिलाडी और न फ़िल्म जगत ही, वोट के लिए घर घर पहुँच जाने वाले पक्ष या विपक्ष किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता भी नहीं।

                        coronavirus increases


                        आज दादाजी की बात बहुत याद आ रही है, 'घर की रोटी आधी भली !' महानगर बड़े लोगों के लिए होता है ! मजदूरों, सामान्य नौकरी पेशा करनेवालों के लिए नहीं होता ! अब चेत जाएँ गाँव के लोग ! आनेवाले दिनों मे देश मे ऐसी व्यवस्था लाने की जरूरत है कि लोग अपने घर से ही पढ़ाई, अपने घर से ही नौकरी कर सकें ! किराये या EMI के खर्चे न हो ! माता-पिता-पत्नी-बच्चों के साथ रह सके ! बहुत उच्च स्तर की पढ़ाई या नौकरी के लिए ही महानगर की आवश्यकता हो ! बाकी की अपने अपने जिले - राज्य के अंदर ही ! दसवीं पास करते ही बच्चों को बाहर भेजो ! ऐसी मजबूरी न बालकों न अभिभावकों के लिए उचित है ! आनेवाले समय मे सरकार के सामने बहुत बड़ी जवाबदेही होगी ! और गांववालों के सामने भी ! जो मजदूर महानगर मे बच जायेंगे, उनके लिए अच्छा ही अच्छा होगा !

                        अनिश्चितता के कारण दूर दूर तक बाजार मे मांग की कमी है। लोग सिर्फ आवश्यक आवश्यता पर ही फोकस कर रहे हैं। हर क्षेत्र के उद्योगपति निराशा मे हैं, मकान मालिकों को इतना आत्मविश्वास कहाँ से आ रहा है कि उन्हें नए किरायेदार मिल जायेंगे। बसे बसाये पुराने किरायेदारों को निकाल भगा रहे हैं। सरकार ने अपने नुकसान की परवाह न करके थोड़े देर से ही सही, पर लॉक डाउन की घोषणा तो की। सरकार ने स्पष्ट बोल था कि ये तीन महीने हमें अपने घर के अंदर रहकर काटने हैं, जो समर्थ हैं अपने खाने पीने की व्यवस्था करें, गरीबों के खाने की व्यवस्था सरकार करेगी। जिनतक सरकार नहीं पहुँच पाए, उनतक समाज के लोग मदद करें। भीषण संकट की घडी है, व्यवसायी अपने एम्प्लाइज के खाने पीने की व्यवस्था करें। मकान मालिक किराया न लें, बैंक EMI न लें। 

                        कोरोना से जंग सभी देशवासियों को मिलकर जीतना था। सरकार तीन महीने के लिए निम्न आय वाले परिवारों को खाने की व्यवस्था कर रही थी। मध्यम आय वाले तीन महीने के खाने की व्यवस्था खुद कर रहे थे। उच्च वर्ग सरकार को दान देकर भारत को इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार कर रहे थे। सरकार के निर्देश के बावजूद बैंकों EMI लिया , मकान मालिकों ने किराया लिया। प्राइवेट स्कूल फीस लेने के लिए बेचैन हैं। कंपनी के मालिक एम्लॉईज के खाने-रहने की व्यवस्था नहीं पाए , उन्हें भी कोरोना के मामले मे देश का साथ नहीं देता हुआ माना जाना चाहिए। 

                        यदि ये सब होता तो कोरोना के केसेज इतने न बढ़ते, गड़बड़ी कहाँ कहाँ आयी, आपलोग ध्यान दें। मैं तो इतना कहूंगी कि जनता ने इस लॉक डाउन को गंभीरता से नहीं लिया। प्रशासन को, पुलिस को, डॉक्टर्स को, नर्सों को काफी दवाब आया। जो बाहर न निकले, वे भी सोसाइटी में पिकनिक मनाते दिखें। घर में किसी एक को सर्दी-बुखार हुआ तो किसी ने खुद से क्वैरेन्टाइन नहीं किया। पूरे घर, सोसाइटी में घूमते मिले। लोगों ने कोरोना की गंभीरता को नहीं समझा। मजदूरों को स्थायित्व का खतरा दिखा। फुर्सत में होम सिकनेस बना, रोज रोज भीड़ इकट्ठी करते रहें। 

                        लॉक डाउन के तीसरे दिन से ही यत्र-तत्र जो भीड़ दिखी, वह इसी ओर इशारा करती है। हर जगह सिर्फ लाचारों की भीड़ नहीं थी, हठी की भी भीड़ थी। तीन महीने तो किसी तरह गुजारने थे, सबलोगों को घर में रहकर जीवन जी लेना था, कुछ भी खाकर। सब्जी, दूध की इतनी मारामारी क्यों, हमारे जनरेशन तक पहुँचने के लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी मेहनत की है हम भूल गए। संकट के समय जानवर भी एकजुटता को महत्व देते आये हैं, लेकिन हमें नहीं देनी थी । 

                        कुल मिलाकर एक बात कही जा सकती है कि एकजुटता की कमी से भारत ने बहुत जगह हार मानी है, लोग माने न माने कोरोना काल का इतिहास भी एकजुटता की कमी का इतिहास बनेगा। उनके द्वारा की जानेवाली लापरवाही भविष्य में सबको कोरोना के चक्र में झोंकेगी, जबतक गलती का अहसास होगा, काफी देर हो चुकी होगी। एक बात यह भी है कि जिस देश मे जागरूकता इतनी कम हो कि हेलमेट और सीट बेल्ट भी फाइन के डर से पहनते हों, वहाँ जनता से कुछ उम्मीद करनी भी बेकार है. हमारे यहाँ अभी कोरोना नहीं आया है, यह बात देशभर मे हर जगह हर महीने फेल हो रही है, फिर भी अभीतक लोग यही बात कर रहे हैं.

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                          अग्नि परीक्षा से भी बड़ी परीक्षा

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                          कल समाचार में पढ़ने को मिला कि कुछ वृद्धों की कोरोना से हुई मौत के बाद उनके बाल-बच्चों ने मोबाइल ऑफ कर दिया है, ताकि अस्पतालों को जवाब न देना पड़े ! खबर मुझे आहत कर गया, पर बुजुर्ग बाल-बच्चों की ये मानसिकता बनायीं किसने? चीन से कोरोना के शुरुआत से लेकर इसकी अमेरिका और यूरोप तक की यात्रा के बाद जब इसने भारत में कदम रखा, तबतक इसके विषय में ऋणात्मक खबरें ही आती रहीं. लगभग सभी देशों में बीमाऱ होने से लेकर दाहकर्म तक की जिम्मेदारी सरकारों की रही. मतलब आपके घर का कोई बीमाऱ है, आप तनाव ही ले सकते हैं, कर कुछ नहीं सकते, ऐसा सभी देशों, सभी डॉक्टरों का मानना था और है ! ऐसी हालत में दिल्ली में कुछ दिन पहले कोरोना से मौत के बाद शवयात्रा और श्मशान में भीड़ देखकर मैं चौंक गयी थी. मौते जब बहुत बढ़ने लगी तो लोगों में स्वाभाविक तौर पर डर का जन्म हुआ !

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                          दूसरे देशों की तुलना में भारतवर्ष इस मामले में कुछ अनोखा रहा, संसाधनों की कमी वाला देश कुछ दिनों के लॉक डाउन में और कमजोर हो गया ! खैर असहायों की रक्षा ईश्वर करते हैं, भारतवासियों द्वारा उपयोग किये जानेवाले कुछ रक्षात्मक दवाईयों ने असर किया या स्वयं की रोग प्रतिरोधक क्षमता ने, यह तो बताना मुश्किल है ! भारत संक्रमण के मामले में अपना आंकड़ा तो आगे बढ़ाता जा रहा है, पर मौत की खबरें अपेक्षाकृत कम हैं. फिर भी 45-50 से अधिक के उम्र वालों को, BP और शुगर के मरीजों को, हमेशा न्यूमोनिया या सांस की बीमारी वालों को कोरोना से बहुत ख़तरा है, कोरोना से डॉक्टरों की लाचारी और ऐसी मौतें आँखों के सामने से हटती नहीं है ! सरकार के आंकड़ों में मौतें 3% दिखाई दे पर जिनके परिवार का गया, वह उनके लिए 100% था !

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                          बस यही सोचकर मैं चार महीने से कोरोना से बचने के लिए अति सावधानी की सलाह देती आ रही हूँ ! स्वाभाविक है, कोरोना मरीजों से दूरी बनाये रहना और भी आवश्यक है ! कोरोना काल में सावधानी से रह रहे एक परिवार के बुजुर्ग अचानक बीमाऱ पड़ जाते है, अस्पताल में पहुँचने के बाद कोरोना से ग्रस्त हो जाते हैं, उनके सपूतों को उन्हें अस्पताल में छोड़कर आना पड़ता है ! सपूत भी क्या करें, आजकर अधिकांश लोग 35-40 की उम्र में bp-शुगर पेशेंट हैं, ख़तरा बड़ा है, घर में भी बच्चे हैं, सबकुछ छोड़कर एक के पीछे कैसे चलें ! ऊपर से सरकार, पुलिस और नियम के विरुद्ध करें तो महामारी एक्ट में फंसना है !

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                          पानी में डूबता हुआ आदमी बहुत बेचैनी में होता है ! उसके आसपास जो भी मिले, अपने बचने के लिए उसे कसकर पकड़ना चाहता है ! गलती से कोई उसकी पकड़ में आ गया तो दोनों का डूबना निश्चित है, इसलिए होश में रहनेवाले व्यक्ति उसका हाथ झटक देते हैं और दूसरे उपाय करते हैं ताकि उसे बचाया जा सके ! बहुत जगहों पर अति प्रेम और भावना में बहकर पूरे परिवार के एक साथ मौत होते देखा है ! कोरोना काल में लोगों से बहुत सारी गलतियाँ होंगी, लेकिन होगा वही जो राम ने रच रखा है ! शायद अभी कोरोना से हो रही मौत वाले वृद्धों का यथोचित संस्कार ईश्वर ने नहीं लिखा हो ! कोरोना कई परिवारों के लिए अग्नि परीक्षा से भी बड़ी परीक्षा लेकर आया है !

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