एप्प में दैनिक और वार्षिक भविष्यवाणियां

ज्योतिष राशिफल  - प्लेस्टोर में ढूंढने से हज़ारों ज्योतिषीय एप्प के बीच हमारा एप्प सर्वाधिक उच्च रेटिंग के साथ Top-10 नंबर पर चल रहा है। मात्र चार महीने में मिली यह सफलता हमारी पूरी टीम की मेहनत और सारे यूजर के धैर्य को समर्पित है !




मैं बार बार समझाती आ रही हूँ, आज भी समझा रही हूँ। हमारे एप्प में लिखी जानेवाली दैनिक और वार्षिक भविष्यवाणियां ज्योतिष राशिफल नहीं हैं। ये भविष्यवाणियाँ आपके जन्मकालीन सभी ग्रहों और आसमान में इस समय चल रहे ग्रहों के बीच के तालमेल को देखकर खास आपके लिए तैयार की जाती है। अपने एप्प के सभी यूजर से मैं बार बार अनुरोध करती हूँ कि आपलोग हमारे एप्प की भविष्यवाणियों पर ध्यान दें। जिस दिन किन्ही मामले का पॉजिटिव लिखा हो और उस दिन उस मामले का नेगेटिव हो जाये या जिस दिन किसी मामले का नेगेटिव लिखा हो और उस दिन उस मामले का पॉजिटिव हो जाये, तो हमें संपर्क करें। शायद एप्प में कहीं कोई सुधार की जगह हो।


वैसे एप्प में गत्यात्मक गोचर प्रणाली के 10% रिजल्ट को शामिल नहीं किया जा सका है , और 10% को सामान्य लिख दिया गया है, जहाँ एप्प को समझाने में दिक्कत आयी है कि रिजल्ट नेगेटिव आना चाहिए या पॉजिटिव। पर 80% रिजल्ट आपके अनुरूप होंगे। गत्यात्मक ज्योतिष पर भरोसा रखनेवाले तो प्रतिदिन इस रिजल्ट को देखते हैं, आप पुरे साल में पॉजिटिव या नेगेटिव घटना घट जाने के बाद तो देख ही सकते हैं।

अभी सालभर का सब्सक्रिप्शन फ्री है, आपके मोबाइल में 8 से 10 mb जगह लेता है, हमारे एप्प पर विश्वास बनाये रखें . चंद्र-राशि, सूर्य-राशि या लग्न-राशि नहीं, अपने जन्मकालीन सभी ग्रहों पर आधारित सटीक दैनिक और वार्षिक भविष्यफल के लिए ---------

'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर जीवन के लगभग सभी सन्दर्भों की प्रतिदिन, प्रतिवर्ष के सटीक भविष्यफल (ज्योतिष राशिफल)के लिए प्लेस्टोर से हमारे एप्प को इनस्टॉल करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें !

कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।


लग्न कुंडली vs चंद्र कुंडली Lagna Kundli & Chandra Kundli Difference Explained

लग्न कुंडली vs चंद्र कुंडली Lagna Kundli & Chandra Kundli Difference Explained 

भूमिका 

भारत में ज्योतिष का अध्ययन अत्यंत प्राचीन काल से होता आ रहा है। परंपरागत रूप से जब किसी बच्चे की जन्मकुंडली बनाई जाती थी, तो उसमें केवल लग्न कुंडली ही नहीं, बल्कि चंद्र कुंडली भी अवश्य बनाई जाती थी। आज भी ज्योतिष सीखने वाले अधिकांश लोग यह प्रश्न पूछते हैं, लग्न कुंडली और चंद्र कुंडली में वास्तविक अंतर क्या है? और किस कुंडली से क्या देखना चाहिए? इस लेख में इन्हीं प्रश्नों का उत्तर गत्यात्मक ज्योतिष की दृष्टि से विस्तार से दिया गया है।

लग्न कुंडली और चंद्र कुंडली का मूल अंतर❓ ऐसा क्यों?

यदि आप किसी व्यक्ति की:

  • लग्न कुंडली

  • और चंद्र कुंडली

दोनों को साथ रखें, तो आप पाएँगे कि:

  • ग्रह वही रहते हैं

  • राशियाँ वही रहती हैं

  • फर्क केवल कुंडली के भाव (खाने) में होता है

क्योंकि

  • आसमान में चंद्रमा लगभग ढाई दिन तक एक ही राशि में रहता है।

  • जबकि लग्न हर दो घंटे से भी कम समय में बदल जाता है। 

👉 यही कारण है कि

  • ढाई दिनों में जन्मे बच्चों की चंद्र कुंडली एक जैसी हो सकती है। 

  • लेकिन उनकी लग्न कुंडली दो-दो घंटे में बदलती रहती है।

चंद्र कुंडली (Chandra Rashi Kundali) क्यों स्थूल मानी जाती है?

 चूंकि चंद्र कुंडली में भाव धीरे बदलते हैं, इसलिए - 

  • वह स्थूल (Broad) मानी जाती है। 

  • उसमें सूक्ष्म जीवन घटनाएँ कम स्पष्ट होती हैं। 

इसके बावजूद चंद्र कुंडली का महत्व प्राचीन काल से आज तक बना हुआ है। ज्योतिषी आज भी - 

  • लग्न कुंडली

  • चंद्र कुंडली

दोनों को मिलाकर भविष्यवाणी करते हैं।

❓ भ्रम की स्थिति: किस कुंडली से क्या देखें? 

अब तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया कि भविष्यवाणी - 

  • कौन-सी लग्न कुंडली से की जाए

  • और कौन-सी चंद्र कुंडली से

यहीं गत्यात्मक ज्योतिष एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

 गत्यात्मक ज्योतिष का स्पष्ट सिद्धांत 

गत्यात्मक ज्योतिष मानता है कि जातक का मन, मानसिक प्रतिक्रिया, किन परिस्थितियों से मन सबसे अधिक प्रभावित होता है, यह चंद्र कुंडली बताती है यानी मन की अनुभूति (Experience), जबकि जीवन की घटनाएँ (Events) लग्न कुंडली बताती है -  

  • जातक का स्वभाव और चरित्र

  • जीवनभर आने वाली परिस्थितियाँ

  • जीवन के सभी संदर्भों के सुख-दुःख

गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार लग्न कुंडली से भावों का सही विश्लेषण, जातक के सभी संदर्भ केवल लग्न कुंडली से ही देखे जाने चाहिए। उदाहरण - 

स्वास्थ्य → लग्न भाव और उसका स्वामी

धन → द्वितीय भाव और उसका स्वामी

शिक्षा → पंचम भाव

विवाह → सप्तम भाव

कर्म/करियर → दशम भाव

षष्ठ, अष्टम, द्वादश आदि भावों, उनके भावधिपति और उनमें स्थित ग्रहों से ही वास्तविक जीवनफल जाना जाना चाहिए।

फिर चंद्र कुंडली की भूमिका क्या है?

 चंद्र कुंडली -  जीवन की घटनाएँ नहीं, बल्कि उन घटनाओं का मानसिक प्रभाव बताती है।  एक ही घटना - 

  • किसी को सुख दे सकती है

  • किसी को तनाव दे सकती है

यह अंतर चंद्र कुंडली से समझ में आता है।

चंद्रमा की शक्ति कैसे देखी जाती है? 

‘गत्यात्मक ज्योतिष’ के अनुसार - 

  • चंद्रमा जिस भाव का स्वामी हो

  • या जिस भाव में स्थित हो

 वहाँ उसके प्रभाव की तीव्रता चंद्र अवस्था से देखी जाती है। चन्द्रमा की अवस्था के तीन चरण हैं - 

  • पूर्णिमा के आसपास जन्म उन संदर्भों में सुख की प्राप्ति - भावनात्मक सुख। 

  • अमावस्या के आसपास जन्म उन्हीं संदर्भों में कष्ट और उलझन - भावनात्मक अस्थिरता। 

  • अष्टमी के आसपास जन्म उन विषयों के प्रति अत्यधिक महत्वाकांक्षा - भावनात्मक संतुलन। 

चंद्र कुंडली और मन की गहराई हम सभी जानते हैं - 

चंद्रमा मन का प्रतीक ग्रह है। कमजोर चंद्रमा -

  • बचपन से ही मानसिक प्रभाव डालता है। 

  • भावनात्मक असुरक्षा देता है। 

 जन्म समय न हो तो क्या करें? 

जब जन्म समय उपलब्ध नहीं होता

तब बनाई जाने वाली कुंडली वास्तव में चंद्र कुंडली ही होती है। हमारे अनुभव में चंद्र कुंडली के आधार पर भी

सटीक भविष्यवाणी संभव है, क्योंकि मन को जो कष्ट दे रहा है, वही जातक के लिए सबसे बड़ा सत्य होता है।  गत्यात्मक ज्योतिष इन दोनों को जोड़कर  जीवन और मन, दोनों की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है।

निष्कर्ष

यदि - 

  • आप जानना चाहते हैं क्या होगा → लग्न कुंडली देखें

  • आप जानना चाहते हैं मन कैसे महसूस करेगा → चंद्र कुंडली देखें

❓ FAQs - Google People Also Ask 

🔹 लग्न कुंडली क्या बताती है? 

लग्न कुंडली जीवन की घटनाएँ, परिस्थितियाँ और वास्तविक सुख-दुःख बताती है।

🔹 चंद्र कुंडली किसलिए देखी जाती है? 

चंद्र कुंडली मन, भावनात्मक स्थिति और मानसिक प्रतिक्रिया समझने के लिए देखी जाती है।

🔹 क्या केवल चंद्र कुंडली से भविष्यवाणी हो सकती है?

 हाँ, विशेषकर जब जन्म समय उपलब्ध न हो।

🔹 गत्यात्मक ज्योतिष में कौन अधिक महत्वपूर्ण है? 

दोनों, लग्न जीवन बताती है, चंद्र मन।

लिए सिर्फ जन्मतिथि के आधार को लेकर चंद्रकुंडली बनाकर आपके लिए सटीक भविष्यवाणियों के लिए संपर्क करें - 8292466723, gatyatmakjyotishapp@gmail.com
कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

    धर्म के नाम पर उलूल-जुलूल को न स्वीकारें------

    Dharm ke prakar


    गेट पर ठक-ठक की आवाज से मेरी तन्मयता दूर हुई। जिस लेख को लिख रही थी, उसे छोड़कर यह लेख प्रस्तुत है। नजदीकी लोग तो गेट से अंदर आकर दवाजे पर घंटी बजाते हैं, कूरियर वाले तक भी। जरूर कोई बिना जान पहचानवाला है, कुर्सी से उठकर मैंने गेट की और झाँका। अच्छे कपडे और श्रृंगार में बनी-ठनी एक महिला संतोषी माता की पूजा के लिए पैसे मांग रही थी। संतोषी माता गरीबों की देवी है, ऐसा मैं मानती हूँ, क्योंकि उन्हें सिर्फ चने-गुड़ का चढ़ावा चाहिए। माता लक्ष्मी ठाट-बात की पूजा चाहती हैं, इसलिए धनाढ्य के मध्य अधिक लोकप्रिय हैं। माध्यम वर्ग भी अब उनकी देखा-देखी करके अपने सालभर का बजट बिगाड़ लेते हैं। निम्न वर्ग वाले अभी तक दीपावली को साफ़-सफाई और दिए जलाने का ही त्यौहार मानते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है माता लक्ष्मी को खुश करना हमारे वश में ही नहीं।

    Hamara dharm kya hai

    तो आती हूँ, मुख्य मुद्दे पर। मैंने उस महिला को बोला, संतोषी माता की पूजा इतनी महंगी तो नहीं होती, तुम या तुम्हारे पति कोई काम करते ही होंगे। पूजा के लिए भीख मांग रही हो ? उसपर उसने जवाब दिया कि क्या आप नहीं जानती कि हिन्दू धर्म में मन्नत भी मानी जाती है, भिक्षा मांगकर पूजा करूंगी। मैंने बोला, मुझे मालूम है कि ऐसा होता है, हमारे घर में खुद छठ में भिक्षा मांगी जाती है। इसका कारन कुछ भी हो सकता है, धर्म में अमीरों का अंधानुकरण गरीब करते हैं तो शायद गरीबों का अंधानुकरण अमीर भी करने लगे हों या फिर अहम् को त्यागकर पूजा करने की भावना ने इस मन्नत को जन्म दिया हो। लेकिन जब पूजा के लिए साधन की कमी न हो, तो पूजा से पहले मात्र ऐसी प्रक्रिया से गुजरना होता है। आप अपने अड़ोस पड़ोस में मांगकर उसमें अपने पैसे मिलाकर भी पूजा कर सकती हैं।

    sanatan dharma in hindi

    उस महिला ने बोला कि 5 -10 रुपये दे देने से आपका क्या नुक्सान हो जायेगा ? मैंने बोला, यह सच है कि 5-10 रुपये से मेरा भी कुछ नहीं जायेगा और आपका भी कुछ नहीं बनेगा, पर आप दिनभर मांगती रहीं, महीने भर मांगती रहीं तो या ५०००-१०००० भी हो सकता है। उस पैसे का दुरूपयोग तो हो ही सकता है। मैं आपको जानती ही नहीं, इस पैसे का दुरूपयोग हुआ तो आप ही नहीं, मैं भी पाप की भागी बनूंगी। उस महिला के सब्र का बाँध टूट गया, उसने कहा, पैसे देने हो तो दीजिए, इतना भाषण मत दीजिए। मैंने बोला, भाषण कैसे नहीं दूँगी, धर्म की आपकी गलत परिभाषा को मैं नहीं स्वीकार कर सकती। और पैसे तो मैं आपको किसी हालत में दूँगी ही नहीं। महिला जल्दी- जल्दी भागी। वैज्ञानिक दृष्टि वाले लोगों को तो कुछ कहना ही नहीं, धार्मिक दृष्टिकोण वाले लोगों से विनती है, धर्म भयभीत होने के लिए नहीं, हिम्मत बनाये रखने के लिए बनाया गया है। इसलिए धर्म के नाम पर उलूल-जुलूल को न स्वीकारें।

    अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

    कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

      एप्प : खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध की स्थिति

      jyotish app in hindi

      आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा . खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों में इन 17 में से कोई स्थिति आपको लिखी मिल सकती है। लगभग सभी प्रकार की स्थिति और उनके भावार्थ को इस लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों पर पड़नेवाले ग्रह के प्रभाव को समझा जा सके।


      1. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इन मामलों की स्थिति कमजोर होने के कारण मन में थोड़ी निराशा आ सकती है।'

      भावार्थ - जिस दिन भी खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों की ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित किसी मामले की तकलीफ से थोड़ा मनोवैज्ञानिक दवाब बन सकता है।

      2. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इन मामलों की कमजोरी भी मन को निराश करने में सफल नहीं होनी चाहिए।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध की तकलीफ के बावजूद भी मन की मजबूती बनी रहती है।

      3. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इन मामलों की किसी परेशानी से थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कई दिनों से इन मामलों में चल रही किसी कमजोरी से थोड़ी राहत मिल जाती है।

      4. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इनसे सम्बंधित मामलों का बहुत अच्छा वातावरण बना रहना चाहिए । ऐसे मौकों का फायदा उठाया जाना चाहिए।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो, खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध के लिए बहुत ही अच्छा समय चलता रहता है। इस समय इन मामलों के कुछ रुके काम करवाए जा सकते हैं।

      5. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इनसे सम्बंधित मामलों का सुखदायी माहौल दिखाई पड़ना चाहिए ।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं होती है ।

      6. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - ये मामले दुःख या असफलता देनेवाले रह सकते हैं।'

      7. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - ये मामले कष्ट या विफलता प्रदान कर सकते हैं।'

      8. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - ये मामले निराशा या तकलीफ देनेवाले रह सकते हैं।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए उनकी कमजोरी को लेकर सतर्क बने रहें। बाहरी स्थान में जाने और बेवजह के खर्चों से परहेज करें।

      9. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।'

      10. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - ये मामले उम्मीद भरे या जीत देनेवाले बने होने चाहिए।'

      11. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए इस दिन उनके सुखदायक माहौल के बनने की संभावना होती है । इसलिए बहार घूमने फिरने या शॉपिंग का कार्यक्रम बना सकते हैं।

      12.'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

      13. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

      14. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध के मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना एप्प के लिए कुछ मुश्किल हो सकता है।

      15. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इन मामलों की कोई समस्या दिखाई पड़ सकती है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए किसी रंग के वस्त्र धारण करें। किसी की मदद के लिए कुछ दान निकालें।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन आपके खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप के लिए अधिक बुरा होता है, इनसे सम्बंधित हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखें। इस दिन खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर कोई खास कार्यक्रम न बनायें। दिनभर के अपने सामान्य कार्यक्रम को जारी रखें।

      16. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इनसे सम्बंधित मामलों के अच्छे वातावरण में कोई बाधा दिखाई पड़ सकती है।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलो के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन बिलकुल सामान्य तौर पर खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप से सम्बंधित किसी कमजोरी को उपस्थित करनेवाला हो सकता है।

      17. 'खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध - इन मामलों की स्थिति कमजोर दिखाई दे सकती है।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलापकी स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर थोड़े सावधान रहें।

      Jyotish app in Hindi



      एप्प : लाभ, लक्ष्य, मंजिल की स्थिति

      jyotish app in hindi



      आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन लाभ, लक्ष्य, मंजिल की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा . लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों में इन 17 में से कोई स्थिति आपको लिखी मिल सकती है। लगभग सभी प्रकार की स्थिति और उनके भावार्थ को इस लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों पर पड़नेवाले ग्रह के प्रभाव को समझा जा सके।


      1. ' लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इन मामलों की स्थिति कमजोर होने के कारण मन में थोड़ी निराशा आ सकती है।'

      भावार्थ - जिस दिन भी लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों की ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित किसी मामले की तकलीफ से थोड़ा मनोवैज्ञानिक दवाब बन सकता है।

      2. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इन मामलों की कमजोरी भी मन को निराश करने में सफल नहीं होनी चाहिए।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में  ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो इनकी तकलीफ के बावजूद भी  मन की मजबूती बनी रहती है।

      3. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - इन मामलों की किसी परेशानी से थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।

      भावार्थ - जिस दिन भी इन  मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कई दिनों से इन मामलों में चल रही किसी कमजोरी से थोड़ी राहत मिल जाती है।

      4. ' लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इनसे सम्बंधित मामलों का बहुत अच्छा वातावरण बना रहना चाहिए । ऐसे मौकों का फायदा उठाया जाना चाहिए।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो, लाभ, लक्ष्य, मंजिल के लिए बहुत ही अच्छा समय चलता रहता है। इस समय इन मामलों के कुछ रुके काम करवाए जा सकते हैं।

      5. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इनसे सम्बंधित मामलों का सुखदायी माहौल दिखाई पड़ना चाहिए ।'

      भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं होती है ।

      6. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - ये मामले दुःख या असफलता देनेवाले रह सकते हैं।'

      7. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले कष्ट या विफलता प्रदान कर सकते हैं।'

      8. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले निराशा या तकलीफ देनेवाले रह सकते हैं।'

      भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों  के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो लाभ, लक्ष्य, मंजिल की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए उनकी कमजोरी को लेकर सतर्क बने रहें।

      9. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।'

      10. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले उम्मीद भरे या जीत देनेवाले बने होने चाहिए।'

      11. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।

      भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए इस दिन उनके सुखदायक माहौल के बनने की संभावना होती है ।

      12.'लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

      13. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

      14. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग लाभ, लक्ष्य, मंजिल के मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना एप्प के लिए कुछ मुश्किल हो सकता है।

      15. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इन मामलों की कोई समस्या दिखाई पड़ सकती है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए किसी रंग के वस्त्र धारण करें। किसी की मदद के लिए कुछ दान निकालें।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन आपके लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप के लिए अधिक बुरा होता है, इनसे सम्बंधित हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखें। इस दिन लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर कोई खास कार्यक्रम न बनायें। दिनभर के अपने सामान्य कार्यक्रम को जारी रखें। 

      16. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - इनसे सम्बंधित मामलों के अच्छे वातावरण में कोई बाधा दिखाई पड़ सकती है।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलो  के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन सामान्य तौर पर लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप से सम्बंधित किसी कमजोरी को उपस्थित करनेवाला हो सकता है।

      17. ' लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - इन मामलों की स्थिति कमजोर दिखाई दे सकती है।'

      भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलापकी स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर थोड़े सावधान रहें।