वृश्चिक लग्न की विशेषताएँ

 

Vrischika lagna characteristics 

आसमान के 210 डिग्री से 240 डिग्री तक के भाग का नामकरण ...वृश्चिक राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न वृश्चिक माना जाता है। वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र नवम् भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाग्‍य , धर्म आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए वृश्चिक लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ ये ही होते हैं। जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातक बहुत भाग्‍यशाली होते हैं , संयोग से इनका काम होता रहता है।भाग्‍य का भरपूर सुख मिलने से वृश्चिक लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर इनकी कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' चन्द्रमा की शक्ति का निर्णय इसके आकार के आधार पर करता है। अमावस के चन्द्रमा को शुन्य, दोनों अष्टमी के चन्द्रमा को 50 और पूर्णिमा के चन्द्रमा को 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है। 


Vrischika lagna characteristics

Vrishchik lagna me surya

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के पिता , पद प्रतिष्‍ठा और सामाजिक राजनीतिक स्थिति का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए वृश्चिक लग्‍न के जातक अपने पद प्रतिष्‍ठा को मजबूत बनाने पर जोर देते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनका जन्‍म प्रतिष्ठित परिवार में होता है , इन्‍हें पिता का सुख प्राप्‍त होता है ,  पद प्रतिष्‍ठा की मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन सबकी कमी से इनकी कीर्ति घटती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 

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Vrishchik lagna me mangal

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल प्रथम और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , आत्‍मविश्‍वास और रोग , ऋण , शत्रु जैसे झंझटों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के  स्‍वास्‍थ्‍य में झंझट बने होने की संभावना रहती है ।  जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर इनका स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा होता है , जीवन में अधिक झंझट नहीं आते , झंझओं से लडने की शक्ति मौजूद होती है , जिससे प्रभावशाली माने जाते हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर स्‍वास्‍थ्‍य की कमजोरी आत्‍मविश्‍वास को कमजोर बनाती है, झंझटों से लडने की शक्ति कम होती है तथा प्रभाव की कमी महसूस करते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

Vrishchik lagna me Shukra

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के घर गृहस्‍थी , खर्च और बाह्य संदर्भों आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इनके घर गृहस्‍थी के वातावरण में खर्च का बहुत महत्‍व होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर वृश्चिक लग्‍नवालों को खर्चशक्ति की प्रचुरता प्राप्‍त होती है , इस कारण इनकी घर गृहस्‍थी बहुत आरामदायक होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर खर्चशक्ति की कमी के कारण वृश्चिक लग्‍नवालों के घरेलू जीवन में समस्‍याएं देखने को मिलती हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

Vrishchik lagna me budh

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध अष्‍टम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के जीवनशैली और लाभ का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के जीवनशैली को मजबूती देने में लाभ की तथा लाभ को मजबूत बनाने में जीवनशैली  की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों का लाभ मजबूत होता है , जिससे जीवनशैली सुखद बनी होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर वृश्चिक लग्‍नवाले लाभ की कमी के कारण अपनी जीवनशैली को बहुत कमजोर पाते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

Vrishchik lagna me Brihaspati

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति द्वितीय और पंचम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष , परिवार , बुद्धि , ज्ञान और संतान का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए वृश्चिक लग्‍न के जातकों के अपनी या संतान की पढाई लिखाई में धन की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती  है।  जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर तुला लग्‍न के जातकों की धन की स्थिति  मजबूत होती है , जिससे अपना या संतान पक्ष का बौद्धिक विकास सुखद ढंग से हो पाता है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर वृश्चिक लग्‍नवाले जातकों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है , जिसका बुरा प्रभाव उनकी खुद या संतान पक्ष के बौद्धिक विकास पर पउता है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है। 

Vrishchik lagna me shani

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि तृतीय और चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के भ्रातृ पक्ष , मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति , स्‍थायित्‍व मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के भाई , बंधुओं के कारण स्‍थायित्‍व के मजबूत या कमजोर होने की संभावना बनती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को भाई बंधु बांधव से सुख प्राप्‍त होता है, हर प्रकार की संपत्ति की स्थिति मजबूत होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर वृश्चिक लग्‍नवालों के भाई बंधु में संपत्ति को लेकर विवाद बनने की संभावना बनती है। मातृ पक्ष के सुख में भी कमी देखने को मिलती है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है। 

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    धनु लग्न कुंडली विश्लेषण

     

    Dhanu Lagna me

    आसमान के 240 डिग्री से 270 डिग्री तक के भाग का नामकरण धनु राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न धनु माना जाता है। धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रूटीन और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए धनु लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ ये ही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की जीवनशैली सुखद होती है , रूटीन सुव्‍यवस्थित होता है । जबकि विपरीत स्थिति हो तो रूटीन अस्‍तव्‍यस्‍त और जीवनशैली कष्‍टकर होती है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' चन्द्रमा की शक्ति का निर्णय इसके आकार के आधार पर करता है। अमावस के चन्द्रमा को शुन्य, दोनों अष्टमी के चन्द्रमा को 50 और पूर्णिमा के चन्द्रमा को 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है। 

    Dhanu Lagna me shani


    Dhanu lagna me surya 

    धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य नवम् भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाग्‍य और धर्म का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए धनु लग्‍न के जातक भाग्‍य के रूप में प्रकृति के नियमों को समझने और धर्म का प्रचार प्रसार करने में रूचि लेते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से ये भाग्‍य का सहयोग प्राप्‍त करते हैं , धर्म और भाग्‍य से संबंधित बातों में इनका सकारात्‍मक चिंतन बना रहता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने ये भाग्‍य की कमजोरी झेलने को बाध्‍य होते हैं और अंधविश्‍वासी होते चले जाते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 

    'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' पर आधारित प्रतिदिन, प्रतिमाह और प्रतिवर्ष जीवन के हर मामले के भविष्यफल को समझने के लिए इस एप्प को इनस्टॉल करें !

    Dhanu lagna me mangal 

    धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल पंचम और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान , खर्च और बाहरी संदर्भों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के अपनी या संतान पक्ष के बौद्धिक विकास में खर्च और बाहरी स्‍थान का सहसंबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर ये और इनकी संतान बुद्धि के तीक्ष्‍ण होते हैं , खर्च की मजबूती रखते है और देशाटन वगैरह में रूचि भी। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर ये और इनके संतान सामान्‍य दिमाग के होते हैं , खर्च शक्ति की कमी से बौद्धिक विकास में बाधाएं आती हैं और बाहरी संदर्भों को कमजोर पाते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

    ज्योतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

    Dhanu lagna me shukra

    धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र षष्‍ठ और एकादश भाव का स्‍वामी है और यह जातक के लाभ , प्रभाव और रोग , ऋण शत्रु जैसे झंझट आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इनके लाभ के वातावरण में बहुत झंझट होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर धनु लग्‍नवाले प्रभाव की मजबूती से झंझटों को हल करते हुए लाभ प्राप्ति का माहौल बनाते हैं। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर प्रभाव की कमजोरी से झंझटों को न हल कर पाने के कारण धनु लग्‍नवालों के लाभ में कमजोरी आती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

    Dhanu Lagna me budh

    धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के पिता पक्ष , घर गृहस्‍थी के माहौल और पद प्रतिष्‍ठा का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों की घर गृहस्‍थी का प्रतिष्‍ठा से संबंध बना होता है । जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों का प्रतिष्ठित परिवार में जन्‍म होता है , ससुराल पक्ष भी बहुत ही मनोनुकूल होता है और घर गृहस्‍थी के वातावरण भी प्रतिष्‍ठा में वृद्धि करनेवाला होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर धनु लग्‍नवाले पिता से संबंधित मामलों का कष्‍ट प्राप्‍त करते हैं , ससुराल पक्ष का वातावरण इनके मनोनुकूल नहीं होता , घर गृहस्‍थी में भी तनाव आता है और कभी कभी बात कानून तक भी पहुंच जाती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

    Dhanu lagna me brihaspati

    धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति लग्‍न और चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति  और स्‍थायित्‍व का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए धनु लग्‍न के जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने में उनकी स्‍थायित्‍व की मजबूत स्थिति और हर प्रकार की संपत्ति का बउा महत्‍व होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर धनु लग्‍न के जातकों का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहता है , हर प्रकार की संपत्ति का सुख मिलता है , जिससे आत्‍मविश्‍वास की बढोत्‍तरी होती है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर धनु लग्‍नवाले जातकों के स्‍वास्‍थ्‍य में समस्‍याएं आती है , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति कष्‍ट देनेवाली बनती हैं और आत्‍मविश्‍वास में कमी आती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है। 

    Dhanu Lagna me Shani

    धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि द्वितीय और तृतीय भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के धन , कोष , भाई , बहन , बंधु बांधवों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के भाई , बंधुओं के धन कोष की स्थिति से संबंध बने रहने की संभावना होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को भाई बंधु बांधव से संबंध अच्‍छा बना होता है , धन का लाभ भी प्राप्‍त होता है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर धनु लग्‍नवालों के धन कोष की स्थिति कमजोर होती है , भाई बहनों से भी संबंध में खराबी होने से धन की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है। 


    ज्योतिष में सभी लग्न की कुंडलियों के बारे में पढ़ने के लिए  यहाँ क्लिक कर सकते हैं। लेकिन ग्रह कमजोर है या मजबूत, इसका पता आंशिक तौर पर हमारे योगकारक ग्रहों का प्रभाव  लेख से मालूम हो सकता है, पर ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति की जानकारी के लिए हमारे केंद्र से जन्मकुंडली बनवाना आवश्यक है!


    कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

      मकर लग्न कुंडली विश्लेषण

       

      Makar lagna kundali vishleshan

      आसमान के 270 डिग्री से 300 डिग्री तक के भाग का नामकरण मकर राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मकर माना जाता है। मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र सप्‍तम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के घर गृहस्थी का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ घर गृहस्‍थी ही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की घर गृहस्‍थी का माहौल सुखद होता है।जबकि विपरीत स्थिति हो तो घर गृहस्‍थी का माहौल कष्‍टकर बना होता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' चन्द्रमा की शक्ति का निर्णय इसके आकार के आधार पर करता है। अमावस के चन्द्रमा को शुन्य, दोनों अष्टमी के चन्द्रमा को 50 और पूर्णिमा के चन्द्रमा को 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है। 

      Makar lagna kundali vishleshan

      Makar lagna analysis

      मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रूटीन और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मकर लग्‍न के जातक जीवनशैली को मजबूत बनाए रखने में रूचि लेते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनकी जीवनशैली बहुत ही उत्‍तम कोटि की और अनुकरणीय होती है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन्‍हें अपनी जीवनशैली से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडता है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 

      Makar lagna me mangal

      मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल चतुर्थ और एकादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति , स्‍थायित्‍व और लाभ का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के लाभ में मातृ पक्ष , किसी प्रकार की संपत्ति या स्‍थायित्‍व का सहसंबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर माता से इनके संबंध अच्‍छे बने होते हैं , ये हर प्रकार की संपत्ति और स्‍थायित्‍व का सुख प्राप्‍त करते हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर मातृ पक्ष से संबंधित समस्‍याएं बनी होती हैं , हर प्रकार की संपत्ति कष्‍ट का कारण बनती हैं और स्‍थायित्‍व कमजोर बने होने से लाभ में बाधाएं आती हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

      'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' पर आधारित प्रतिदिन, प्रतिमाह और प्रतिवर्ष जीवन के हर मामले के भविष्यफल को समझने के लिए इस एप्प को इनस्टॉल करें !

      makar lagna me shukra

      मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र पंचम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान , पिता और सामाजिक राजनीतिक स्थिति आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍नवालों के प्रतिष्‍ठा पक्ष को मजबूती देने में अपने बुद्धि , ज्ञान या संतान की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर मकर लग्‍नवाले अपने बुद्धि ज्ञान से कैरियर को मजबूती देते हैं । इनके सामाजिक राजनीतिक महत्‍व को बढाने में संतान भी सहयोगी सिद्ध होते हैं , पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र कमजोर हो तो बुद्धि ज्ञान की कमी से अपना कैरियर तो बाधित होता ही है , संतान पक्ष के काम भी मनोनुकूल ढंग से नहीं हो पाते।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

      Makar lagna kundali in hindi

      मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध षष्‍ठ और नवम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाग्‍य और झंझट का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के झंझट को दूर करने में भाग्‍य की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों के झंझटों को हल करने में भाग्‍य बहुत बडी भूमिका निभाता है , किसी संयोग से उनके काम बन जाते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर दुर्भाग्‍य की भूमिका होने से मकर लग्‍नवालों के झंझट में बडी बडी समस्‍याएं आती हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

      Makar lagna kundali

      मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति तृतीय और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव , खर्च और बाहरी संदर्भों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍न के जातकों के खर्च के साथ भाई बहन , बंधु बांधवों का संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर मकर लग्‍न के जातकों की खर्च शक्ति मजबूत होती है , जिसका फायदा इनके भाई , बहन , बंधु बांधव उठाते हैं। इन्‍हें देशाटन का भी बडा शौक होता है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर मकर लग्‍नवाले जातकों की खर्च शक्ति कमजोर होती है , जिसके कारण उन्‍हें भाई , बहन , बंधु बांधवों का सहयोग लेने की आवश्‍यकता होती है। इनका बाहरी संदर्भ भी बहुत कमजोर होता है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है। 

      Makar lagna me shani

      मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि प्रथम और द्वितीय भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , धन , कोष आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने या घटाने में धन की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहता है , धन का अनायास आगम होता रहता है , जिससे आत्‍मविश्‍वास में बढोत्‍तरी होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मकर लग्‍नवालों के स्‍वास्‍थ्‍य में कमजोरी बनी रहती है , धन की कमी होती है , जिससे आत्‍मविश्‍वास कमजोर होता है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है। 

      ज्योतिष में सभी लग्न की कुंडलियों के बारे में पढ़ने के लिए  यहाँ क्लिक कर सकते हैं। लेकिन ग्रह कमजोर है या मजबूत, इसका पता आंशिक तौर पर हमारे योगकारक ग्रहों का प्रभाव  लेख से मालूम हो सकता है, पर ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति की जानकारी के लिए हमारे केंद्र से जन्मकुंडली बनवाना आवश्यक है!

      यदि आप जानना चाहते हों कि आपके सभी ग्रह कितने-कितने गत्यात्मक शक्ति संपन्न हैं, तो अपनी जन्मतिथि, जन्मसमय और जन्मस्थान हमें 8292466723 पर व्हाट्सप्प करें, इसके लिए 250/- सेवा-शुल्क  निर्धारित किया गया है।  



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        Horoscope pisces next week

        Horoscope Pisces next week

        (Click for latest Horoscope Pisces)


        The ascendant of a person is very effective. Hence, all the prediction of 'Gatyatmak Jyotish' is based on the ascendants. On account of the sunrise time planetary position, every day with his own certain ascendants has to get a certain result. A person can plan accordingly if he/she is previously informed about it. It does not matter if your routine is like common days' but if you are going to do something special, then pay attention to the planetary circumstances. Pay attention to the matter written about the sensational part of your life particularly in your daily 'Rashiphal'.

        If you are not aware of your ascendant

        then send your date of birth, time of birth and place of birth on 8292466723 via SMS, you will be given information of your ascendant, but you will not succeed if you try to see that from Rashi. you must take interest in getting information about your day to day planetary effects. I am sure in around 80% matter you will be benefited a lot even without paying anything !!!

        We have started Lagn Rashiphal 

        After a long time again, we have started daily planetary results according to your ascendant through this column. People having been born with Libra and Pisces Lagna and Chandra Rashi- both will feel some weak circumstances on 1st, 2nd, 3rd and 4th June 2020. Starting lines of prediction will be more effective than the last lines. Change of atmosphere is possible after June 4, it will be a pleasure some after 6th. 


        horoscope pisces next week

        For Aries Lagna born 
        What's today's horoscope for Aries

        On 1st, 2nd and 3rd June Your financial position will seem weak, and any efforts to bolster it will be in vain. It will be better for you to not plan any programmes regarding this. The domestic environment will not seem good. Some tension regarding in-laws might arise. Aloofness is likely to take place regarding any love affairs. There should be no need to bring such issues to decisive turns. The educational environment for the children and yourself will be weak. It will be difficult to gain any type of knowledge. The situation regarding some other aspect of children will also be weak. Do not be very serious regarding such problems.

        Fortune, God, religion etc. will be the subject of mediation. You will be busy in some religious activities. You will tend to be spiritual too. There might be major expenses involved. External relationships will be strong and it might be necessary to form a relationship with an outsider or an external place. The importance of the paternal side will be brought out in some programmes. A major responsibility might be given to you in your workplace. There might be some incidents enhancing your dignity. There is a serious chance of some important gains, your efforts will have to focus to achieve it. You will be serious regarding these ventures. 

        For Taurus Lagna born
        What's today's horoscope for Taurus

        On 1st, 2nd and 3rd June Health could be in bad condition. There will be a lack of confidence and your personality can seem weak and unimpressive. Hence, be careful of any activities related to them. Some complications will arise and it will be difficult to solve them due to the weak influential power. Hence, it will be better to go the safe way without trying any shortcuts. There will arise some disturbance concerned with your mother or maternal side. Vehicle or any type of property will prove to be a cause of the trouble. Be careful in any situations regarding this, before it provides you with some disappointment. 

         Your routine will be well-organized due to which all your work will be completed on time. There is a serious chance of some important gains, your efforts will have to focus to achieve it. You will be serious regarding these ventures. Fortune, God, religion etc. will be the subject of mediation. You will be busy with some religious activities. You will tend to be spiritual too. The importance of the paternal side will be brought out in some programmes. A major responsibility might be given to you in your workplace. There might be some incidents enhancing your dignity. 

        For Gemini Lagna born 
        What's today's horoscope for Gemini

        On 1st, 2nd and 3rd June Educational environment for the children and yourself will be weak. It will be difficult to gain any type of knowledge. The situation regarding some other aspect of children will also be weak. Do not be very serious regarding such problems. You will feel bothered by wasteful expenses and it will be better to not make any shopping plans. There might be inconvenience concerned with any outsider or external place. Avoid going on any travelling or sightseeing trips. There will be a lack of harmony with siblings, relatives and friends. There can also be bitterness in your relationship with co-workers. So, avoid creating a scenario where any disputes could arise. 
         The significance of domestic matters will increase. There might be a requirement to harmonize some programmes with those of your in-laws. The importance of the paternal side will be brought out in some programmes. A major responsibility might be given to you in your workplace. There might be some incidents enhancing your dignity. Your routine will be well-organized due to which all your work will be completed on time. Fortune, God, religion etc. will be the subject of mediation. You will be busy in some religious activities. You will tend to be spiritual too. 

        For Cancer Lagna born 
        What's today's horoscope for Cancer

        On 1st, 2nd and 3rd June There will arise some disturbance concerned with your mother or maternal side. Vehicle or any type of property will prove to be a cause of the trouble. Be careful in any situations regarding this, before it provides you with some disappointment. Due to fewer gains, there might be stress in your life. Don't be disappointed. Some disturbances might arise when proceeding towards the goal. Just wait for some time. Your financial position will seem weak, and any efforts to bolster it will be in vain.
        It will be better for you to not plan any programmes regarding this. The relationship with influential people will be strengthened. You will have to utilize your full potential and influence to solve some complications. Fortune, God, religion etc. will be the subject of mediation. You will be busy with some religious activities. You will tend to be spiritual too. The significance of domestic matters will increase. There might be a requirement to harmonize some programmes with those of your in-laws. Your routine will be well-organized due to which all your work will be completed on time. 

         For Leo Lagna born 
        What's today's horoscope for Leo

        On 1st, 2nd and 3rd June There will be a lack of harmony with siblings, relatives and friends. There can also be bitterness in your relationship with co-workers. So, avoid creating a scenario where any disputes could arise. The paternal side will be quite fragile, so don't expect any help from his side. Your performance at work might also be affected. If any complications arise, try to solve it then and there, else might hamper your dignity. Health could be in bad condition. There will be a lack of confidence and your personality can seem weak and unimpressive. Hence, be careful of any activities related to them.
        Matters regarding intellect and knowledge will gain importance. You might take some important decisions regarding kids and progeny. Your routine will be well-organized due to which all your work will be completed on time. The relationship with influential people will be strengthened. You will have to utilize your full potential and influence to solve some complications. The significance of domestic matters will increase. There might be a requirement to harmonize some programmes with those of your in-laws. 

        For Virgo Lagna born 
        What's today's horoscope for Virgo

        On 1st, 2nd and 3rd June Your financial position will seem weak, and any efforts to bolster it will be in vain. It will be better for you to not plan any programmes regarding this. You might face some failure due to bad luck. Don't be bothered. There might be more disappointment, despite religious activities. So, avoid being involved in such programmes. You will feel bothered by wasteful expenses and it will be better to not make any shopping plans. There might be inconvenience concerned with any outsider or external place. Avoid going on any travelling or sightseeing trips.
         The importance of your maternal side might be seen in some programmes. Efforts to achieve some vehicle, some other big or small property will continue. The significance of domestic matters will increase. There might be a requirement to harmonize some programmes with those of your in-laws. Matters regarding intellect and knowledge will gain importance. You might take some important decisions regarding kids and progeny. The relationship with influential people will be strengthened. You will have to utilize your full potential and influence to solve some complications. 

        For Libra Lagna born 
        What's today's horoscope for Libra

        On 1st, 2nd and 3rd June Health could be in bad condition. There will be a lack of confidence and your personality can seem weak and unimpressive. Hence, be careful of any activities related to them. The routine will be quite unorganized. Some event will badly affect your lifestyle. Lead every step of your life safely, as haste might cause waste. Due to fewer gains, there might be stress in your life. Don't be disappointed. Some disturbances might arise when proceeding towards the goal. Just wait for some time.
        Brothers, sisters, colleagues and relatives will be valued more. You might be required to harmonize your programmes with them. The relationship with influential people will be strengthened. You will have to utilize your full potential and influence to solve some complications. The importance of your maternal side might be seen in some programmes. Efforts to achieve some vehicle, some other big or small property will continue. Matters regarding intellect and knowledge will gain importance. You might take some important decisions regarding kids and progeny. 

        For Scorpio Lagna born 
        What's today's horoscope for Scorpio

        On 1st, 2nd and 3rd June Domestic environment will not seem good. Some tension regarding in-laws might arise. Aloofness is likely to take place regarding any love affairs. There should be no need to bring such issues to decisive turns. You will feel bothered by wasteful expenses and it will be better to not make any shopping plans. There might be inconvenience concerned with any outsider or external place. Avoid going on any travelling or sightseeing trips. The paternal side will be quite fragile, so don't expect any help from his side. Your performance at work might also be affected. If any complications arise, try to solve it then and there, else might hamper your dignity.
        Your financial position will be strong and ventures will be pursued to strengthen it further. There will be some consultation with prosperous people. Matters regarding intellect and knowledge will gain importance. You might take some important decisions regarding kids and progeny. Brothers, sisters, colleagues and relatives will be valued more. You might be required to harmonize your programmes with them. The importance of your maternal side might be seen in some programmes. Efforts to achieve some vehicle, some other big or small property will continue. 

        For Sagittarius Lagna born 
        What's today's horoscope for Sagittarius

        On 1st, 2nd and 3rd June Some complications will arise and it will be difficult to solve them due to the weak influential power. Hence, it will be better to go the safe way without trying any shortcuts. Due to fewer gains, there might be stress in your life. Don't be disappointed. Some disturbances might arise when proceeding towards the goal. Just wait for some time. You might face some failure due to bad luck. Don't be bothered. There might be more disappointment, despite religious activities. So, avoid being involved in such programmes.
        Some programmes to strengthen the personal health, personality and personal qualities will be pursued. You will be assisted by smart people. The importance of your maternal side might be seen in some programmes. Efforts to achieve some vehicle, some other big or small property will continue. Your financial position will be strong and ventures will be pursued to strengthen it further. There will be some consultation with prosperous people. Brothers, sisters, colleagues and relatives will be valued more. You might be required to harmonize your programmes with them. 

        For Capricorn Lagna born 
        What's today's horoscope for Capricorn

        On 1st, 2nd and 3rd June Educational environment for the children and yourself will be weak. It will be difficult to gain any type of knowledge. The situation regarding some other aspect of children will also be weak. Do not be very serious regarding such problems. The paternal side will be quite fragile, so don't expect any help from his side. Your performance at work might also be affected. If any complications arise, try to solve it then and there, else might hamper your dignity. The routine will be quite unorganized. Some event will badly affect your lifestyle. Lead every step of your life safely, as haste might cause waste.
        Brothers, sisters, colleagues and relatives will be valued more. You might be required to harmonize your programmes with them. There might be major expenses involved. External relationships will be strong and it might be necessary to form a relationship with an outsider or an external place. Some programmes to strengthen the personal health, personality and personal qualities will be pursued. You will be assisted by smart people. Your financial position will be strong and ventures will be pursued to strengthen it further. There will be some consultation with prosperous people. 

        For Aquarius Lagna born 
        What's today's horoscope for Aquarius

        On 1st, 2nd and 3rd June There will arise some disturbance concerned with your mother or maternal side. Vehicle or any type of property will prove to be a cause of the trouble. Be careful in any situations regarding this, before it provides you with some disappointment. You might face some failure due to bad luck. Don't be bothered. There might be more disappointment, despite religious activities. So, avoid being involved in such programmes. The domestic environment will not seem good. Some tension regarding in-laws might arise. Aloofness is likely to take place regarding any love affairs. There should be no need to bring such issues to decisive turns.
        Your financial position will be strong and ventures will be pursued to strengthen it further. There will be some consultation with prosperous people. There is a serious chance of some important gains, your efforts will have to focus to achieve it. You will be serious regarding these ventures. Some programmes to strengthen the personal health, personality and personal qualities will be pursued. You will be assisted by smart people. There might be major expenses involved. External relationships will be strong and it might be necessary to form a relationship with an outsider or an external place. 

         For Pisces Lagna born 
        What's today's horoscope for Pisces

        On 1st, 2nd and 3rd June There will be a lack of harmony with siblings, relatives and friends. There can also be bitterness in your relationship with co-workers. So, avoid creating a scenario where any disputes could arise. The routine will be quite unorganized. Some event will badly affect your lifestyle. Lead every step of your life safely, as haste might cause waste. Some complications will arise and it will be difficult to solve them due to the weak influential power. Hence, it will be better to go the safe way without trying any shortcuts.

        Some programmes to strengthen the personal health, personality and personal qualities will be pursued. You will be assisted by smart people. The importance of the paternal side will be brought out in some programmes. A major responsibility might be given to you in your workplace. There might be some incidents enhancing your dignity. There might be major expenses involved. External relationships will be strong and it might be necessary to form a relationship with an outsider or an external place. There is a serious chance of some important gains, your efforts will have to focus to achieve it. You will be serious regarding these ventures.

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          योगकारक ग्रहों का विज्ञान

          Grah vigyan kya hai

          स्‍नातक के दौरान विशेष तौर पर 'खगोल शास्‍त्र' का अध्‍ययन करने के पश्‍चात फलित ज्योतिष के प्रति अध्‍ययन में रूचि जाने के बाद मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी  ने ज्‍योतिष के प्राचीन शास्‍त्रों का गहन अध्‍ययन किया। फलित ज्‍योतिष के बहुत सारे सूत्रों को उन्‍होने खगोल शास्‍त्र के नियमों के अनुकूल पाया , पर इसके कुछ नियम इन्‍हें बिल्‍कुल नहीं जंचे। खासकर ग्रहों की शक्ति निर्धारण का सूत्र इन्‍हें बिल्‍कुल अप्रामाणिक महसूस हुआ। प्राचीन कालीन ज्‍योतिष की पुसत्‍कों में ग्रहों की शक्ति के निर्धारण के लिए स्थानबल , दिक्बल , कालबल , नैसर्गिक बल , चेष्टाबल , दृ‍ष्टि‍बल , आत्मकारक , योगकारक , उत्तरायण , दक्षिणायण , अंशबल , पक्षबल आदि की चर्चा की गयी है। इनसे संबंधित हर नियमों और को बारी बारी से हर कुंडलियों में जॉच की , पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला। इसी कारण ग्रहों की वास्‍तविक शक्ति के निर्धारण में इन्‍होने पूरी ताकत लगा दी। ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के बारे में जानकारी के बाद ही इन्हे चैन मिला। 

          गत्यात्मक ज्योतिष के जनक श्री विद्या सागर महथा जी ने 1981 में ग्रहों के गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति के निर्धारण से पूर्व  भी इन्‍होने विभिन्‍न लग्‍नवालों के लिए योगकारक और अयोगकार ग्रहों का उल्‍लेख करते हुए तात्‍कालीन महत्‍वपूर्ण ज्‍योतिषीय पत्रिका 'ज्‍योतिष मार्तण्‍ड' में अपना लेख प्रकाशित किया था , इसमें उन्‍होने किसी भी कुंडली के विभिन्‍न भावों को अलग अलग शक्ति प्रदान की थी , जिसे इस चित्र के द्वारा स्‍पष्‍ट किया जा सकता है .....


          Grah vigyan kya hai

           Grah Vigyan kya hai

          इस तालिका के हिसाब से जो ग्रह प्रथम भाव के स्‍वामी हों , उन्‍हें +5 अंक , द्वितीय भाव के स्‍वामी हों , उन्‍हें +1 अंक , तृतीय भाव के स्‍वामी को -2 अंक , चतुर्थ भाव के स्‍वामी को +2 , पंचम भाव के स्‍वामी को +6 , षष्‍ठ भाव के स्‍वामी को -3 , सप्‍तम भाव के स्‍वामी को +3 , अष्‍टम भाव के स्‍वामी को -1 , नवम भाव के स्‍वामी को +7 , दशम भाव के स्‍वामी को +4 , एकादश भाव के स्‍वामी को -4 तथा द्वादश भाव के स्‍वामी को 0 अंक दिए जाते हैं। विभिन्‍न लग्‍नवालों के लिए योगकारक और अयोगकारक ग्रहों का फलाफल इसके हिसाब से तय किया जाता है। 

          मेष लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +2 अंक मिलते हैं , बुध तीसरे और छठे भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-2-3)= -5 अंक , मंगल प्रथम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+5-1) = +4 , शुक्र द्वितीय और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+1+3) = +4 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को पंचम भाव के स्‍वामी होने के नाते +6 , बृहस्‍पति को नवम और द्वादश भाव का स्‍वामी होने के नाते (+7+0) = +7 , तथा शनि को दशम और एकादश भाव के स्‍वामी होने के नाते (+4-4) = 0 अंक मिलते हैं।

          What is yogkarak grah

          इसी प्रकार वृष लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा तृतीय भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे -2 अंक मिलते हैं , बुध द्वितीय और पंचम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+1+6)= +7 अंक , मंगल द्वादश और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (0+3) = +3 , शुक्र प्रथम और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+5-3) = +2 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को चतुर्थ भाव के स्‍वामी होने के नाते +2 , बृहस्‍पति को अष्‍टम और एकादश भाव का स्‍वामी होने के नाते (-1-4) = -5 , तथा शनि को नवम और दशम भाव के स्‍वामी होने के नाते (+7+4) = +11 अंक मिलते हैं। 

          इसी प्रकार मिथुन लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा द्वितीय भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +1 अंक मिलते हैं , बुध प्रथम और चतुर्थ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+5+2)= +7 अंक , मंगल एकादश और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-3-4) = -7 , शुक्र द्वादश और पंचम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (0+6) = +6 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को तृतीय भाव के स्‍वामी होने के नाते -2 , बृहस्‍पति को सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+3+4) = +7 , तथा शनि को अष्‍टम और नवम भाव के स्‍वामी होने के नाते (-1+7) = +6 अंक मिलते हैं। 

          इसी प्रकार कर्क लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा प्रथम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +5 अंक मिलते हैं , बुध द्वादश और तृतीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (0-2)= -2 अंक , मंगल दशम और पंचम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+6+4) = +10 , शुक्र एकादश और चतुर्थ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2-4) = -2 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को द्वितीय भाव के स्‍वामी होने के नाते +1 , बृहस्‍पति को षष्‍ठ और नवम भाव का स्‍वामी होने के नाते (-3+7) = +4 , तथा शनि को सप्‍तम और अष्‍टम भाव के स्‍वामी होने के नाते (-1+3) = +2 अंक मिलते हैं।

          Yogkarak grah ka fal

          इसी प्रकार सिंह लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा द्वादश भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे 0 अंक मिलते हैं , बुध एकादश और द्वितीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+1-4)= -3 अंक , मंगल नवम और चतुर्थ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2+7) = +9 , शुक्र दशम और तृतीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-2+4) = +2 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को प्रथम भाव के स्‍वामी होने के नाते +5 , बृहस्‍पति को पंचम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+6-1) = +5 , तथा शनि को षष्‍ठ और सप्‍तम भाव के स्‍वामी होने के नाते (-3+3) = 0 अंक मिलते हैं। 

          इसी प्रकार कन्‍या लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा एकादश भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे -4 अंक मिलते हैं , बुध दशम और प्रथम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+5+4)= +9 अंक , मंगल अष्‍टम और तृतीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-1-2) = -3 , शुक्र नवम और द्वितीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+7+1) = +8 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को द्वादश भाव के स्‍वामी होने के नाते 0 , बृहस्‍पति को चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+2+3) = +5 , तथा शनि को पंचम और षष्‍ठ भाव के स्‍वामी होने के नाते (+6-3) = +3 अंक मिलते हैं।

          Yogkarak grah Meaning

          इसी प्रकार तुला लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा दशम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +4 अंक मिलते हैं , बुध नवम और द्वादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+7+0)= +7 अंक , मंगल सप्‍तम और द्वितीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+3+1) = +4 , शुक्र अष्‍टम और प्रथम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-1+5) = +4 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को एकादश भाव के स्‍वामी होने के नाते -4 , बृहस्‍पति को तृतीय और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होने के नाते (-2-3) = -5 , तथा शनि को चतुर्थ और पंचम भाव के स्‍वामी होने के नाते (+2+6) = +8 अंक मिलते हैं। 

          इसी प्रकार वृश्चिक लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा नवम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +7 अंक मिलते हैं , बुध अष्‍टम और एकादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-1-4)= -5 अंक , मंगल षष्‍ठ और प्रथम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-3+5) = +2 , शुक्र सप्‍तम और द्वादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+3+0) = +3 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को दशम भाव के स्‍वामी होने के नाते +4 , बृहस्‍पति को द्वितीय और पंचम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+1+6) = +7 , तथा शनि को तृतीय और चतुर्थ भाव के स्‍वामी होने के नाते (-2+2) = 0 अंक मिलते हैं।

          Yogkarak grah kya hain

          इसी प्रकार धनु लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे -1 अंक मिलते हैं , बुध सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+3+4)= +7 अंक , मंगल पंचम और द्वादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+6+0) = +6 , शुक्र षष्‍ठ और एकादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-3-4) = -7 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को नवम भाव के स्‍वामी होने के नाते +7 , बृहस्‍पति को प्रथम और चतुर्थ भाव का स्‍वामी होने के नाते (+5+2) = +7 , तथा शनि को द्वितीय और तृतीय भाव के स्‍वामी होने के नाते (-2+1) = -1 अंक मिलते हैं। 

          इसी प्रकार मकर लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा सप्‍तम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +3 अंक मिलते हैं , बुध षष्‍ठ और नवम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-3+7)= +4 अंक , मंगल चतुर्थ और एकादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2-4) = -2 , शुक्र पंचम और दशम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+6+4) = +10 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को अष्‍टम भाव के स्‍वामी होने के नाते -1 , बृहस्‍पति को तृतीय और द्वादश भाव का स्‍वामी होने के नाते (-2+0) = -2 , तथा शनि को प्रथम और द्वितीय भाव के स्‍वामी होने के नाते (+5+1) = +6 अंक मिलते हैं।

          What is yogkarak grah

          इसी प्रकार कुंभ लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे -3 अंक मिलते हैं , बुध पंचम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+6-1)= +5 अंक , मंगल तृतीय और दशम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-2+4) = +2 , शुक्र चतुर्थ और नवम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2+7) = +9 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को सप्‍तम भाव के स्‍वामी होने के नाते +3 , बृहस्‍पति को ,द्वितीय और एकादश भाव का स्‍वामी होने के नाते (+1-4) = -3 , तथा शनि को प्रथम और द्वादश भाव के स्‍वामी होने के नाते (+5+0) = +5 अंक मिलते हैं। 

          इसी प्रकार मीन लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा पंचम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +6 अंक मिलते हैं , बुध चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2+3)= +5 अंक , मंगल द्वितीय और नवम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+1+7) = +8 , शुक्र तृतीय और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-2-1) = -3 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को षष्‍ठ भाव के स्‍वामी होने के नाते -3 , बृहस्‍पति को प्रथम और दशम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+5+4) = +9 , तथा शनि को एकादश और द्वादश भाव के स्‍वामी होने के नाते (-4+0) = -4 अंक मिलते हैं।

          उपरोक्‍त चार्ट तो ग्रहों के स्‍वामित्‍व के आधार पर बनाया गया है , इसके अतिरिक्‍त जन्‍मकुंडली में जिस भाव में ग्रह की उपस्थिति हो , इसके अंक को भी जोडा जाना चाहिए। उनका मानना था विभिन्‍न लग्‍नवाले इस प्रकार प्राप्‍त अंक के अनुसार विभिन्‍न ग्रहों का फलाफल प्राप्‍त करते हैं। 'गत्‍यात्‍मक' ढंग से ज्‍योतिष के विकास के बावजूद भी उपरोक्‍त नियम की उपेक्षा नहीं की जा सकती। अच्‍छे ग्रहीय शक्ति वाले ग्रह भी अयोगकारक हुए तो जातक को अच्‍छे फलाफल से युक्‍त नहीं कर पाते हैं , जबकि कम ग्रहीय शक्ति वाले ग्रह भी योगकारक हुए तो जातक को शुभ फलाफल प्रदान करते हैं। ज्योतिष में सभी लग्न की कुंडलियों के बारे में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कर सकते हैं।

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