क्या ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास? इस ब्लॉग में आप ज्योतिष के आधुनिक सूत्रों से सम्बद्ध नवीन ज्योतिषीय सिद्धांत के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, जो ज्योतिष की सटीकता पर शोध, ज्योतिष में नए शोध और निष्कर्ष के उपरांत विकसित किया गया है, नए ज्योतिष सूत्रों के माध्यम से कुंडली विश्लेषण, इन ज्योतिष के नए नियमों से भविष्यवाणी कैसे करें, 'ज्योतिष सीखने के लिए नए सूत्र और विधियाँ बताई गयी हैं।
अग्नि परीक्षा से भी बड़ी परीक्षा
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Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723
कोरोनिल नाम की दवाई लॉन्च
Corona news in hindi
Coronil patanjali kit price in hindi
कल से ही बाबा रामदेव जी के द्वारा कोरोनिल नाम की दवाई लॉन्च किये जाने और सरकार द्वारा इसके प्रचार पर रोक लगाने के साथ ही दवाई के पक्ष और विपक्ष में विमर्श चल रहा है ! सरकार अपना प्रोसेस करेगी ही, करनी भी चाहिए, पर मैंने आजतक किसी भी वस्तु या सेवा के बाजार में बिकने या उसके मूल्य निर्धारण में सरकार की दखलंदाजी नहीं देखी, किसी को विरोध करते भी नहीं पाया ! पूरा भारतवर्ष विश्वास पर चल रहा है ! जिस शिक्षक के पढ़ाने का ढंग पसंद है, जिस मिस्त्री का काम आपको पसंद है, जिस टेलर का काम आपको पसंद है, जिस ज्योतिषी का काम आपको पसंद है, जिस देशी विदेशी कंपनी का काम आपको पसंद है, जो घर -मकान आपको पसंद है, सामने प्रतिस्पर्धी नहीं हो, तो वह अपने वस्तु या सेवा के लिए मनमाना रेट रख सकता है, इसलिए काफ़ी अजूबा लग रहा है ! दवाई ने एक -दो महीने में दावे के हिसाब से परिणाम नहीं दिया तो खुद बिक्री ख़त्म हो जाएगी, इसमें रोक लगने का कोई उचित कारण नहीं दिख रहा ! पतंजलि ने बताया है कि अगले सोमवार को दवा के ऑनलाइन ऑर्डर के लिए एक मोबाइल ऐप 'ऑर्डर मी' लॉन्च की जाएगी, जिसके जरिए दवा खरीदी जा सकेगी। वहीं, जो लोग इसे ऑफलाइन स्टोर से खरीदना चाहते हैं, वे एक सप्ताह बाद पतंजलि के स्टोर से खरीद सकेंगे। ५४५ रुपये में ३० दिन की दवा होगी !
Coronil patanjali in hindi
Can corona cure corona
Coronil is effective or not
मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----
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ज्योतिष और आध्यात्म
Aadhyatm gyan in Hindi by jyotish
किसी खास युग में हर क्षेत्र में किसी प्रकार की सफलता प्राप्त करने के लिए चाहे जिन गुणों और ज्ञान का महत्व हो , वे किसी एक व्यक्ति को शीर्ष तक क्यूं न पहुंचा देते हो , उनकी देखा देखी वैसे गुणों को आत्मसात कर स्वयं भी ऊंचाई पर पहुंचने के लिए चाहे हमारे जैसे कितने भी लोग प्रयत्नशील क्यूं न हों , सफल होकर हम सांसारिक सफलताओं से लैस ही क्यूं न हो जाएं , पर वह चिरंतन और स्थायी सुख नहीं दे पाते। स्थायी मानसिक सुख प्राप्त करने के लिए कुछ ऐसे नियमों की जानकारी आवश्यक होती है , जिसे हमारे महापुरूषों द्वारा हर धर्म के सिद्धांतों के रूप में जोड दिया गया।
ये सिद्धांत किसी भी व्यक्ति से 'अहं' को दूर करते हैं और इनके पालन से हमारे क्रियाकलाप सर्वजनहिताय होते हैं। सिर्फ अपने बारे में ही नहीं , सारे प्राणियों के साथ साथ दुनिया के एक एक कण से प्यार और उनकी सुरक्षा के लिए चिंतन ही आध्यात्म की ओर जाने की सीढी है । आज के दौर में गलत हाथों में जाकर धर्म का स्वरूप भले ही विकृत हो गया हो , पर दुनिया के प्रत्येक धर्म की खासियत यही थी , इससे इंकार नहीं किया जा सकता।
Adhyatma Vigyan
आज का युग पूरे स्वार्थ का हो गया है , हर व्यक्ति को सिर्फ अपने से मतलब है। अपना शरीर , अपने परिवार , अपने बच्चे , अपना व्यवसाय और अपना ही विकास , इसके लिए हम कोई भी तरीका अपनाने को तैयार हैं। गलत धरातल पर खडे होने के बाद भी हम अपनी उपलब्धियों पर गुमान करते हैं , बच्चों को भी सांसारिक रूप से ही सफल होने के हर गुर सिखाते हैं। एक व्यक्ति नहीं , आज सारे ही आगे बढने के लिए एक दूसरे को धक्का दे रहे हैं। आज ताकतवर की ही चल रही है , अपनी अपनी ताकत का हम सब दुरूपयोग कर रहे हैं , ऐसे में समस्त चर अचर मुसीबत में हैं। जबतक खुद के साथ विपत्ति नहीं आ जाती , दूसरे की समस्या पर हंसना आज हमारा खेल बना होता है। पर जब हमारे ऊपर मुसीबत आती है और हम लाचार होते हैं , तब समझ में आता है कि हमने जीवन में क्या क्या गल्तियां की हैं और हमारी जीवनशैली क्या होनी चाहिए। पर तब पछताने के सिवा कुछ भी नहीं होता।
Jyotish and Aadhyatm
ज्योतिष की सहायता से हम ग्रहों के पृथ्वी के जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव का अध्ययन करते हैं। जिस प्रकार प्रकृति में मौजूद हर जड चेतन की तरह में कुछ न कुछ विशेषताएं होती हैं , इसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य भी भिन्न भिन्न बनावट के होते हैं , प्रत्येक में अलग अलग क्षमता होती है , इसलिए सबके पास सबकुछ नहीं हो सकता। भले ही सभी जड चेतन एक जैसे जीवन चक्र से गुजरते हों , पर चूंकि मनुष्य सबसे अधिक विकसित प्राणी है , और इसके जीवन के बहुत सारे आयाम हैं , इस कारण एक जैसे दिखने के बाद भी मनुष्य की जीवनशैली एक जैसी नहीं। दुनियाभर में समान उम्र के लोग भी भिन्न भिन्न परिस्थितियों से गुजरने को बाध्य होते हैं , प्रकृति के खास नियम के हिसाब से एक का समय अनुकूल होता है तो दूसरे का प्रतिकूल ।
गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में
Aadhyatma sadhana Kendra
ज्योतिष विषय की सहायता से हमें ग्रहों की मदद से अनुकूल और प्रतिकूल परिथितियों को जानने में मदद मिलती है। जब अनुकूल समय होता है , तो हमारा आत्मविश्वास बढाने के लिए हमारे मनोनुकूल वातावरण होता है , जबकि प्रतिकूल समय में हमारे साथ ऐसी ऐसी घटनाएं होती हैं , जिनसे हमारे आत्मविश्वास पर असर पडता है। जब हम अपने मनोनुकूल समय में अपने अधिकार के साथ साथ कर्तब्यों का पालन भी करें , तो प्रतिकूल समय में हमें काफी राहत मिल सकती है।
पर यदि मनोनुकूल समय में अधिकारों का दुरूपयोग करेंगे , तो उसका बुरा फल प्रतिकूल समय में हमें या हमारे संतान को अवश्य झेलने को मजबूर होना होगा। प्रत्येक बुरा कार्य करने से पहले हमारी अंतरात्मा बारंबार झकझोरती है , पर हम उसे अनसुना करते हैं , पर उस गल्ती को करने के बाद एक दिन भी चैन से नहीं रह पाते। जिस सांसारिक सफलता को देखकर हम प्रभावित होते हैं , उसका मनुष्य के सुख और चैन से कोई संबंध नहीं होता। प्रकृति से जुडा व्यक्ति ही सर्वाधिक सुख और चैन से रह सकता है।
Jeevan me Aadhyatm ka mahatwa
इसके अलावे ज्योतिष से हमें इस बात के संकेत मिल जाते हैं कि जातक के आनेवाले समय में किसी खास पक्ष का वातावरण सुखद रहेगा या कष्टप्रद .. इस बात का अहसास होते ही प्रकृति के नियमों के प्रति हमारा विश्वास गहराने लगता है। चूंकि सुख और कष्ट की सीमा को जान पाना मुश्किल है , इसलिए हमलोग किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते , अंत अंत तक जीतने की कोशिश करते है , पर न जीत का घमंड होता है , न हार का गम । हम यह मान लेते हैं कि जो भी परिणाम हमारे सामने है , वो प्रकृति के किसी नियम के अनुसार हैं।
हमने किसी समय कोई गल्ती की , जिसका फल हमें भुगतना पड रहा है। ऐसी स्थिति में हम दूसरों पर व्यर्थ का दोषारोपण नहीं करते , प्रकृति को जिम्मेदार मानकर अपने मन को कलुषित होने से बचा लेते हैं। हमें विश्वास हो जाता है कि यदि जानबूझकर दूसरा हमें कष्ट दे रहा है , तो प्रकृति उसका हिसाब किताब अवश्य रखती है और आनेवाले दिनों में उसका फल उसे स्वयं मिलेगा। इस प्रकार प्रकृति के नियमों के सहारे आध्यात्म का ज्ञान हमें ज्योतिष के माध्यम से मिल जाता है।
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गत्यात्मक ज्योतिष क्या है ?
Gatyatmak Jyotish kya hai ?
फलित ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ग्रहों की अवस्था और उनकी गति के अनुसार ही मनुष्य के जीवन में पड़नेवाले ग्रहों के प्रभाव का बारह बारी वर्षों के विभाजन को गत्यात्मक दशापद्धति कहते हैं। इसमें प्रत्येक ग्रहों के प्रभाव को अलग अलग 12 वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है। जन्म से 12 वर्षों तक चंद्रमा , 12 से 24 वर्षों तक बुध , 24 से 36 वर्षों तक मंगल , 36 से 48 वर्षों तक शुक्र , 48 से 60 वर्षों तक सूर्य , 60 से 72 वर्षों तक बहस्पति , और 72 से 84 वर्ष की उम्र तक शनि का प्रभाव मानव जीवन पर पडता है। प्रत्येक ग्रह अपने दशाकाल में अपना फल अपने सापेक्षिक गत्यात्मक शक्ति के अनुरूप ही अच्छा या बुरा प्रदान करते हैं। इस दशा पद्धति में सभी ग्रहों की एक खास अवधि में निश्चित भूमिका रहती है। विंशोत्तरी दशा पद्धति की तरह एकमात्र चंद्रमा का नक्षत्र ही सभी ग्रहों को संचालित नहीं करता।
इस पद्धति के जन्मदाता श्री विद्यासागर महथा , एम ए , ज्योतिष वाचस्पति , ज्योतिष रत्न , पेटरवार , बोकारो निवासी हैं , जिन्होने इस पद्धति की नींव सन 1975 जुलाई में रखी। इस दशा पद्धति का संपूर्ण गत्यात्मक विकास 1987 जुलाई तक होता रहा। 1987 जुलाई के बाद अब तक हजारो कुंडलियों मे इस सिद्धांत की प्रायोगिक जांच हुई और सभी जगहों पर केवल सफलताएं ही मिली। अभी गत्यात्मक ज्योतिष किसी भी कुंडली को ग्रहों की शक्ति के अनुसार लेखाचित्र में अनायास रूपांतरित कर सकता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन की सफलता , असफलता , सुख , दुख , महत्वाकांक्षा , कार्यक्षमता और स्तर को लेखाचित्र में ईस्वी के साथ अंकित किया जा सकता है। जीवन के किस क्षेत्र में किसकी अभिरूचि अधिक है और जीवन के किस भाग में इसका प्रतिफलन होगा , इसे ग्राफ खींचने के बाद अनायास ही बतलाया जा सकता है। जीवन का कौन सा भाग स्वर्णिम होगा और कौन सा काफी कष्टप्रद , यह ग्राफ देखकर ही बुद्धिजीवी और वैज्ञानिक वर्ग आसानी से समझ सकेंगे। जीवन में अकसमात उत्थान और गंभीर पतन की सूचना भी इस ग्राफ से ज्ञात की जा सकती है।
इस दशापद्धति के विकास के क्रम में ही ग्रहों की शक्ति को मापने के लिए गति से संबंधित कुछ सूत्रों की खोज की गयी है , जो ग्रहों की सम्यक शक्ति का निरूपण करती है। ग्रहों के स्थान बल , दिक बल , काल बल , नैसर्गिक बल दुक बल चेष्टा बल और अष्टकवर्ग से भिन्न एक गत्यात्मक शक्ति को महत्व दिया गया है। यह हर हालत में ग्रहों की सही शक्ति का आकलन करता है। 1975 के ज्योतिष मार्तण्ड के जुलाई अंक में प्रकाशित ‘दशाकाल निरपेक्ष अनुभूत तथ्य’ लेख में पहली बार दर्शाया गया था कि प्रत्येक ग्रहों का 12 वर्ष तक मुख्य रूप से प्रभाव बना रहता है और चंद्र , बुध , मंगल , शुक्र , सूर्य, बुहस्पति , शनि , यूरेनस , नेप्च्यून और प्लूटो बारी बारी से संपूर्ण जीवन का प्रतिनिधित्व कर लेते हैं।
सन 1981 में गत्यात्मक दशा पद्धति के जन्मदाता श्री विद्यासागर महथा जी पहली बार यह अहसास हुआ कि प़ृथ्वी से निकट रहनेवाले प्रत्येक आकाशीय पिंड अपने दशाकाल में जातक को प्रतिकूल परिस्थितियों का बोध कराता है। विलोमत: प़ृथ्वी से अतिदूरस्थ् ग्रह जातक को अनुकूल परिस्थितियों का बोध कराते हैंा यानि इनके पास अधिक दायित्व नहीं होने देते। और इस तरह प़ृथ्वी से अतिदूरस्थ और निकटस्थ् ग्रह अपने दशाकाल में भिन्न भिन्न ही परिणाम प्रस्तुत करते हैं। किसी भी ग्रहों के दशाकाल के मध्यकाल में इस प्रभाव को स्पष्ट देखा जा सकता है। 18वे वर्ष में बुध , 30 वें वर्ष में मंगल , 42 वें वर्ष में शुक्र , 54 वें वर्ष में सूर्य , 66 वें वर्ष में बृहस्पति और 78 वें वर्ष में शनि अपना फल विशेष तौर पर प्रदान करते हैं। वक्र या ऋणात्मक ग्रहों का परिणाम दायित्व संयुक्त होता है , जबकि शीघ्री और सकारात्मक ग्रह उल्लिखित वर्षों में दायित्वहीनता का बोध कराते हैं।
ग्रहों की एक ऐसी भी स्थिति होती है , जब न तो वे पृथ्वी के निकट होते हैं और न ही बहुत अधिक दूरी बनाए होते हैं , बल्कि वे पृथ्वी से औसत दूरी पर होते हैं। बुध और शुक्र पूर्वी या पश्चिमी क्षैतिज पर सर्वोच्च उंचाई पर होते हुए प्रतिदिन 1 डिग्री की गति बनाते हैं । चंद्रमा , मंगल , बुहस्पति , शनि आदि ग्रह सूर्य से 90 डिग्री की औसत दूरी पर होते हैं। ऐसी स्थिति में इनके पास कार्यक्षमता और दायित्वबोध सबसे अधिक होता है। जब चंद्रमा औसत से कम प्रकाशमान हो और शेष ग्रह मार्गी या वक्र होने के आसपास हो , तो जातक को अति महत्वपूर्ण दायित्व और कर्तब्यबोध से अवगत कराता है। यदि सापेक्षिक ग्रह धनात्मक हो , तो कर्तब्यपरायणता के साथ उन्हें जबर्दस्त सफलता मिलती है और सापेक्षिक ऋणात्मक गति में होने से इन्हीं ग्रहों के कारण जातक को कर्तब्यपरायणता के बावजूद असफलता ही हाथ लगती है।
इस गत्यात्मक दशा पद्धति का जो लेखाचित्र तैयार होता है , वह वस्तुत: आकाश में स्थित ग्रहों की स्थिति , सूर्य और पृथ्वी सापेक्ष उनकी दूरियों और गतियों का सम्यक चित्रण है। आकाश में सूर्यतल से नीचे दिखलाई पडनेवाले ग्रह पृथ्वी के कम निकट और कम गतिवाले या वक्र होते हैं । इसके विपरीत आकाश में सूर्यतल से उपर दिखलाई पडनेवाले ग्रह पृथ्वी से अधिक दूर और अधिक गतिवाले होते हैं। एकमात्र चंद्रमा ही हर समय पृथ्वी से समान दूरी पर होने के बावजूद सूर्य के निकट आने पर कम प्रकाशमान और अधिक दूरी पर रहने से अधिक प्रकाशमान होता है। कम प्रकाशमान चंद्रमा को ग्राफ में मध्य में और अधिक प्रकाशमान चंद्रमा को ग्राफ में उपर दिखलाया जाता है। अन्य वक्री ग्रहों को ग्राफ में नीचे , सामान्य ग्रहों को ग्राफ में मध्य में और अतिशीघ्री ग्रहों को ग्राफ में उपर दिखलाया जाता है। यह ग्राफ व्यक्ति की परिस्थ्तियों को दर्शाता है। जातक अपने ग्राफ के अनुसार ही अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थ्ितियां प्राप्त करते हैं। उनका ग्राफ ही उनकी कार्यक्षमता और महत्वाकांक्षा को निर्धारित करता है। वे जीवन के प्रत्येक उत्थान और पतन अपने ग्राफ के अनुसार हीप्राप्त करते हैं। यह दशापद्धति ज्योतिष को विज्ञान साबित करने में पूर्ण सक्षम है। पाठक अपने जन्म वर्ष को छ: वर्ष के अपवर्तांक से जोडते चले जाएं , इसकी वैज्ञानिकता स्वत: प्रमाणित हो जाएगी ।
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