भाई-बहनो से सम्बन्ध

Bhai vs bahan ka pyar

अपनी ही घर गृहस्थी में उलझें लोगों, सिर्फ स्वार्थ के वशीभूत होकर सामाजिक रिश्ता बनाये रखने वालों के अनुभव में इतनी वृद्धि नहीं हो सकती, जितना सामाजिक समस्याओं को हल करने वालों को मिल जाती है ! इसलिए मैं हमेशा इस विचार में रहती हूँ कि लोगों की सिर्फ कुंडली ही नहीं देखूँ, समाज में अभी किस किस प्रकार की समस्याएं चल रही हैं, उसपर भी नजर बनाये रखूं ! यही कारण हैं कि मैं क्लाएंट्स से लम्बा वार्तालाप बनाकर चलती हूँ !

कल दो भाइयों से बात हुई,  दोनों का सातवां भाव कमजोर मिला !  जाहिर हैं,  उन्हें अपनी पत्नियों के व्यवहार से कष्ट हो रहा होगा ! या फिर यह भी हो सकता हैं कि उनके पत्नियों को ससुराल में एडजस्ट करने में दिक्कत आ रही हो,  और उसकी भड़ास वे पतियों पर निकालती हो ! मैंने उन्हें समझाया,  आपलोग अपने जीजाजी के सुख  पर ध्यान न दें, अपनी बहनो से पत्नियों की तुलना न करें ! जीजाजी का अपना भाग्य था,  जो आपकी माताजी की सख्त ट्रेनिंग वाली पत्नी उन्हें मिली और आपका अपना भाग्य हैं कि आपको वैसी संस्कारी पत्नी नहीं मिली !

 खैर जो भी हो,  मैंने उन्हें समझाया कि दोनों भाई एक ही व्यवसाय में नहीं हो,  इसके बाद भी आपकी पत्नियां माताजी के साथ एक ही घर में रहने को तैयार हैं तो आज के युग को देखते हुए इतना भी एडजस्टमेंट कम नहीं हैं ! वरना आज तो अलग रह रहे बेटे-बहू माताजी-पिताजी के घर आने के दिन से गिनती शुरू कर देते हैं और दो से तीन महीने में इतने ऊब जाते हैं कि दूसरे बेटे बहू के पास उन्हें भेजनें का उपक्रम शुरू कर देते हैं ! 

उन्होंने भी यही बोला,  कितना भी एडजस्टमेंट करना पड़े पर साथ रहना तो अच्छा लगता हैं ! पड़ोस में एक बुजुर्ग के दोनों बच्चों की अंडरस्टैंडिंग ठीक नहीं हैं, सचमुच बच्चों के ऐसे स्वभाव से माता - पिता को बहुत कष्ट होता हैं ! 

काश बेटे-बेटियाँ ये समझ पाते तो अपने अपने अहम् में घर को नष्ट नहीं करते ! साथ रहना बहुत जरूरी नहीं हैं,  पर अपने बेटे बेटियों को एक साथ देखकर माता पिता को बहुत खुशी  होती हैं ! इसलिए मैं भी इस बात का बहुत ध्यान रखती हूँ कि मायके या ससुराल - जहाँ भी हो भाई-बहनो से सम्बन्ध बिगाड़कर माता-पिता को कष्ट देने से बचती हूँ ! चाहे मुझे इसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़े !

'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर सटीक भविष्यवाणी, उचित परामर्श और समुचित उपचार के लिए संपर्क करें - 8292466723 , gatyatmakjyotishapp@gmail.com

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    सोशल मीडिया से एकांगी और असंतुलित विकास

     

    Google with your name

    आज का युग बहुत प्रगतिशील हैं, किसी विषय पर कुछ भी आपको देखना हो,  समझना हो,  आप गूगल पर सर्च कर लेते  हैं और उससे जुडी ढेर सारी खबरें आपको मिल जाती हैं ! ( google with your name ) उसके बाद आप एक लिंक से दूसरे लिंक पर और दूसरे से तीसरे लिंक पर जाते हैं और इंटरनेट आपकी जिज्ञासा के साथ रूचि को भी समझ लेता हैं ! उसके बाद गूगल तो क्या फेसबुक भी आपको वैसी ही न्यूज़ दिखाने लगता हैं !

    Change views tendency

    आप समझ भी नहीं पाते और गूगल आपका एकांगी विकास आरम्भ कर देता हैं ! धीरे धीरे वह आपलोगो को वैसे ग्रुप्स,  वैसे पेज से परिचय करवाता रहता हैं,  जिसे आप न चाहते हुए भी लाइक करने लगते हैं ! उसके बाद आपके दिमाग को एक दिशा में ले जानेवाली सामग्री मिलती रहती हैं ! फुर्सत में रहने वाले लोग न चाहते हुए भी उसे देखने को मजबूर होते हैं और खास विचारधारा में फँसते चले जाते हैं !

    चाहे राजनीतिक विचारधारा हो, धार्मिक या फिर बौद्धिक - इंटरनेट अपने बिछाए जाल में आपको फांसने की कोशिश करता हैं और लगभग कामयाब होता हैं ! न्यूज़ चैनल्स तो आप बदल भी लेते हैं, पर इंटरनेट घुमा फिराकर आपको वही दिखायेगा, जिसकी ओर आपका थोड़ा भी रुझान गया हो ! लगातार follow up करता हुआ आपके रुझान को कट्टर बना डालता हैं !

    Internet effect on children

    बच्चों की लिए तो ख़ासकर इंटरनेट इसलिए घातक हैं ! बच्चे ने एक दिन गेम खेल लिया या एक दिन कोई वीडियो देख ली तो इंटरनेट में उसके लिए गेम और वीडियो ही आते रहेंगे,  क्विज नहीं आ सकता ! इसलिए बच्चों पर खास ध्यान रखने की आवश्यकता हैं ! इंटरनेट ज्ञान का खजाना हैं,  सही ढंग से उपयोग किया जाये तो आपके बच्चों के व्यक्तित्व का अच्छा विकास कर सकता हैं ! बस ध्यान दें कि वे क्या सर्च कर रहे हैं?  

    Google search in internet

    बड़े भी  इंटरनेट में एक तरह की बातें सर्च न करें,  यदि अपने व्यक्तित्व को संतुलित बना हो तो हर प्रकार की जानकारी सर्च करे,  फिर आपकी स्पष्ट पता चलेगा कि क्या उचित हो रहा हैं और क्या अनुचित ! कट्टरता उचित नहीं,  अपने को संतुलित बनाये ! गूगल में यह शक्ति आ चुकी है,  कि यदि पुरी दुनिया में एक तरह की विचारधारा बनाना चाहे तो बना सकता हैं ! इस बात को समझते समझते अधिकांश लोग उसकी चाल में फंस चुके होंगे !

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      भगवान राम के बारे में

       Ram ke bare mein

      जब होश भी नहीं संभाली थी, उस वक्त की यानि रट्टूमल वाले जमाने की बात हैं ! तब ऊँची कक्षाओं तक भी किसी भी प्रश्न का जवाब देने के लिखने के लिए अगर पूरा नहीं तो पॉइंट्स तो रटने ही पड़ते थे ! आज की तरह ऑब्जेक्टिव का जमाना तो था नहीं, 8 से लेकर 20 नंबर तक के प्रश्नों के बड़े बड़े जवाब लिखने पड़ते थे ! एक भी पॉइंट छूटा कि नंबर पर कैंची चली ! वैसे में रटनेवाला ही अच्छे नंबर ला सकता था !

      आपके प्रिय कवि कौन?

      हिंदी में निबंध लिखने के लिए बड़ा कॉमन सा टॉपिक था, आपके प्रिय कवि कौन? आपकी प्रिय पुस्तक कौन? साल की दो परीक्षाओं में से हर वर्ष एक में तो जरूर आता ! जाहिर हैं, उस टॉपिक की तैयारी अच्छी तरह रखनी थी ! वैसे भी ब्रेन के तेज बच्चे आलसी होते हैं, अपनी रूचि की बातों को पढ़ने में जितनी दिलचस्पी रखते हैं, बाकी विषय के नंबर लाने में वैसा ही शार्टकट तलाशते हैं !

      मैं 'आपके प्रिय कवि कौन? आपकी प्रिय पुस्तक कौन?' के लिए निबंध की कई पुस्तकों को पढ़ने और समझने की कोशिश की ! पर सफलता मुझे एक जगह आकर मिली, जहाँ लेखक ने 'आपके प्रिय कवि कौन?' में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी का और 'आपकी प्रिय पुस्तक कौन?' में महाकाव्य रामचरित मानस की चर्चा की थी ! उनकी भाषा में दम था या भक्ति में, मैं नहीं बता सकती, पर दोनों निबंध दो चार बार पढ़ते ही कंठाग्र हो गए थे ! मैंने नंबर लाने में ही पूरे विद्यार्थी जीवन उनका भरपूर उपयोग किया ही, अपने चरित्र में भी, अपनी भाषा में भी उन खूबियों का जीवनभर उपयोग करने की कोशिश की, जिसकी चर्चा लेखक ने इन दोनों निबंध को लिखने में की थी !

      सबसे प्रेम करने वाले

      उस निबंध में लेखक ने लिखा था, रामचरितमानस लेखक को इसलिए प्रिय थी कि एक दूसरे की इच्छा का सम्मान करने के लिए किसी ने खुद की चिंता नहीं की ! सबसे प्रेम करने वाले परोपकारी लोगों को अच्छा तथा अहंकारी और स्वार्थी को बुरा कहा गया था ! रामायण के सभी अच्छे पात्र अपने अपने कर्तव्यों का पालन में लगे थे ! गोस्वामी तुलसी दास लेखक को इसलिए प्रिय थे, क्योंकि उन्होंने बड़े ही सहज़ ढंग से सभी घटनाओं का वर्णन कर दिया था ! इतने सरल ढंग से कवि ने रामायण लिखी कि उनके दोहे, उनकी चौपाइयां जन जन के कंठ में विराजमान हो गयी !

      हमारे समय में कक्षा 11 में बोर्ड की परीक्षाएं होती थी ! मुझे तीन महीने फुर्सत में देखकर मेरी दादी ने घोषणा की, इस साल की गर्मियों के दोपहर में मैं रामायण पाठ करूंगी और सभी महिलायें आकर सुनेंगी यानि बोर्ड की परीक्षा के बाद मेरे जिम्मे एक और परीक्षा आयी ! रामायण पाठ कैसे की जाती हैं, पापाजी ने कुछ सिखाया, समझाया, वे कई बार पाठ कर चुके थे ! अल्हड़पन के उम्र में ही दो - तीन महीने रामायण पाठ को दिए, बहुत अच्छा लगा था ! पर रामायण सपूर्ण नहीं हो पाया और मेरा रिजल्ट और एडमिशन का समय नजदीक आ गया, बाकी कांड किसी और ने पूरे किये !

      मर्यादा पुरुषोत्तम राम

      पर राम के चरित्र को समझने में वह समय महत्वपूर्ण रहा ! समझ में आया कि राम को क्यों मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता हैं ? पर मैं मानती हूँ कि हमारे भक्ति से अधिक हमारे आचरण में राम होने चाहिए ! राम के प्रति भक्ति से भारत में उतना सुधार नहीं हो सकता जितना राम को आचरण में रखने से हो सकता हैं !

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        मेरी कोरोना डायरी : कोरोना से कितना डरें ?

        Corona diary


        Corona coronavirus,




        जनवरी और फरवरी में विदेशो में खौफ भरा माहौल पैदा करने के बाद कोरोना वायरस ने अचानक भारतवर्ष में भी दस्तक दे दी ! मार्च में महानगरों में कोरोना के केसेज आने लगे,  उस समय सबके संपर्क विदेशो या विदेशियों से किसी न किसी प्रकार सिद्ध हो गए ! कोरोना की मारक क्षमता तो खास नहीं मानी जा रही, पर इसकी संक्रामक क्षमता इसे महामारी का नाम दे रही !

         अप्रैल में हमारे बच्चों का यूरोप यात्रा का कार्यक्रम था, पर यूरोप के माहौल को देखते हुए टिकटें रद्द कर दी गयी थी,  वीजा कैंसिल कर दिया था ! मार्च में विदेशों से आनेवाले लोगों में से कुछ सावधानी जरूर बरत रहे थे,  पर काफी लोग लापरवाही भी कर रहे थे ! कुछ लोग तो खुलेआम घोषणा कर रहे थे कि कोरोना वायरस साधारण सर्दी-खांसी हैं, लोगों का भयभीत करने की चाल हैं !


        Corona virus in India

        इनकी लापरवाही का नतीजा ऐसा हुआ केस गुणात्मक गति से बढ़ने लगे ! इसी दौरान सरकार ने लॉक डाउन की घोषणा की, सब घर बैठ गए ! अचानक आये इस समस्या से पूरा देश अव्यवस्थित हो गया।  फिर देश में अनलॉक की घोषणा हुई, फिर शुरू हुई लोगों की लापरवाही और उससे  बढ़ने लगा कोरोना संक्रमितों और उससे होने वाली मौत का आंकड़ा !

        इसी समय तैयार हुई मेरी कोरोना डायरी,  जिसके सभी भाग सोशल मीडिया और ब्लॉग पर प्रकाशित होते रहें ! इस पुस्तक में मैंने अपनी डायरी के सभी लेखों को संग्रहित किया हैं ! इसको पूरा पढ़कर भरतीय समाज की मानसिकता, भारतीयों में कोरोना के प्रभाव और कोरोना से सम्बंधि बहुत सारी चर्चा होगी ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं !



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          हर्ड इम्युनिटी और कोरोना

          Herd immunity meaning in Hindi and Corona

          मार्च से ही दिल्ली-मुम्बई जैसे महानगरों में कोरोना का बड़ा फैलाव हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए प्रत्येक गाँव तक पहुँच गया ! हमने कोरोना के बिल्कुल शुरुआती दौर में जिस प्रकार की सावधानी रखने की सलाह दी थी, सभी पालन करते तो ऐसा बिल्कुल नहीं होता ! लॉक डाउन में ही हम कोरोना की चेन तोड़ने में कामयाब हो जाते ! लेकिन लोगों की जागरूकता की कमी ने ऐसा नहीं होने दिया !


          अभी भी देश के विभिन्न भागों में कोरोना की चेन तोडना मुश्किल नहीं हैं, सोशल डिस्टैन्सिंग और मास्क का पालन करके हम आसानी से कोरोना की चेन तोड़ सकते हैं ! पर लोगों को कौन समझाए ? Herd immunity meaning in Hindi धीरे धीरे कोरोना के फैलाव ने देश को हर्ड इम्युनिटी प्राप्त करनेवाले लक्ष्य की दिशा में धकेल दिया हैं ! यह आसान तो नहीं हैं, पर इसे स्वीकार करना अब हमारी मजबूरी बन गयी हैं ! अब अधिकतम यही कर सकते हैं कि संक्रमण की गति धीमी कर दें !


          Is herd immunity effective

          Is herd immunity effective



          दिल्ली, मुम्बई और अन्य महानगरों या देश के अन्य भागों में किये गए टेस्ट की रिपोर्ट बता रही हैं कि विभिन्न जगहों पर कुल आबादी का 12% से लेकर 60% तक के लोगों में कोरोना के विरुद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गयी हैं ! Herd immunity meaning in Hindi )  इसका अर्थ यह हैं कि ये न तो अब कोरोना के कारण बीमाऱ पड़ सकते हैं, और न ही कोरोना के वाहक बन सकते हैं ! इस कारण अब ये संक्रमण की दर को कम करेंगे, कई जगहों पर एक कोरोना पॉजिटिव और एक कोरोना नेगेटिव के मध्य ढाल बनकर उपस्थित हो जाया करेंगे ! तीन महीने में 25% जनसंख्या को प्रभावित करनेवाला कोरोना को 50% तक पहुँचने में छह-सात महीने लग सकते हैं !


          कोरोना जैसी बीमारी के विरुद्ध देश के सभी भागों में हर्ड इम्युनिटी बन जाने के पीछे जहाँ एक ओर स्वास्थ्य से मजबूत लोगों की इम्युनिटी काम करती हैं, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य से कमजोर लोगों की मौत भी होती हैं ! जहाँ जागरूकता हो वहाँ संक्रमण की दर को कम किया जा सकता हैं ! जहाँ बेहतर व्यवस्था हो, वहाँ मौत की दर को कम किया जा सकता हैं !

          Why herd immunity is important

          हम दिल्ली का उदाहरण लेकर चलते हैं ! जहाँ तहाँ किये जा रहे रैंडम टेस्ट के नतीजे बताते हैं कि दिल्ली की दो करोड़ आबादी में से 25% यानि 50 लाख लोग कोरोना के विरुद्ध एंटीबाडी बना चुके हैं ! यह आंकड़ा कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए आंकड़े से बहुत अधिक हैं ! यानि लोग कोरोना से पॉजिटिव भी हुए और नेगेटिव भी, न उन्हें न ही प्रशासन को इसकी जानकारी मिली ! कोरोना को सामान्य सर्दी खांसी समझते हुए दवा लेते रहें, लोगों को संक्रमित करते रहे और ठीक भी हो गए !

          अब यदि दिल्ली के पचास लाख लोगो के पॉजिटिव होने और 13000 मौतों का अनुपात निकाला जाये, तो यह बहुत कम हैं , इसलिए कोरोना से घबराने की बड़ी वजह नहीं दिखती ! लेकिन इतने लोगों का ठीक होना 'हर्ड इम्युनिटी' नहीं उनकी 'अपनी इम्युनिटी' थी !  Herd immunity meaning in Hindi चूँकि समाज को हर्ड इम्युनिटी हासिल करने के लिए 70-75  प्रतिशत जनता का बीमारी से संक्रमित होना आवश्यक होता है, इसके लिए दिल्ली के और एक करोड़ लोगों को कोरोना से इन्फेक्टेड होना पडेगा और मौत का आंकड़ा लगभग 40, 000 पहुंचेगा ! उसके बाद ही दिल्ली में कोरोना से मरनेवालों की मौत रूक सकती हैं !

          इसी प्रकार देशभर में लगभग सौ करोड़ लोगों के संक्रमण और कई करोड़ की मौत के बाद ही देश में हर्ड इम्युनिटी आ सकती हैं ! उसके लिए कोरोना को बहुत समय चाहिए होगा ! मेडिकल को अपनी व्यवस्था अच्छी रखनी होगी ! तबतक हमें सावधानी से जीना सीखना होगा, छोटे छोटे शहरों में और गाँव में अभी भी समय हैं, हम चाहे तो कोरोना के चेन को तोड़ सकते हैं, पर महानगरों को तो हर्ड इम्युनिटी का ही इंतज़ार करना होगा !

          मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----





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