भगवान राम के बारे में

 Ram ke bare mein

जब होश भी नहीं संभाली थी, उस वक्त की यानि रट्टूमल वाले जमाने की बात हैं ! तब ऊँची कक्षाओं तक भी किसी भी प्रश्न का जवाब देने के लिखने के लिए अगर पूरा नहीं तो पॉइंट्स तो रटने ही पड़ते थे ! आज की तरह ऑब्जेक्टिव का जमाना तो था नहीं, 8 से लेकर 20 नंबर तक के प्रश्नों के बड़े बड़े जवाब लिखने पड़ते थे ! एक भी पॉइंट छूटा कि नंबर पर कैंची चली ! वैसे में रटनेवाला ही अच्छे नंबर ला सकता था !

आपके प्रिय कवि कौन?

हिंदी में निबंध लिखने के लिए बड़ा कॉमन सा टॉपिक था, आपके प्रिय कवि कौन? आपकी प्रिय पुस्तक कौन? साल की दो परीक्षाओं में से हर वर्ष एक में तो जरूर आता ! जाहिर हैं, उस टॉपिक की तैयारी अच्छी तरह रखनी थी ! वैसे भी ब्रेन के तेज बच्चे आलसी होते हैं, अपनी रूचि की बातों को पढ़ने में जितनी दिलचस्पी रखते हैं, बाकी विषय के नंबर लाने में वैसा ही शार्टकट तलाशते हैं !

मैं 'आपके प्रिय कवि कौन? आपकी प्रिय पुस्तक कौन?' के लिए निबंध की कई पुस्तकों को पढ़ने और समझने की कोशिश की ! पर सफलता मुझे एक जगह आकर मिली, जहाँ लेखक ने 'आपके प्रिय कवि कौन?' में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी का और 'आपकी प्रिय पुस्तक कौन?' में महाकाव्य रामचरित मानस की चर्चा की थी ! उनकी भाषा में दम था या भक्ति में, मैं नहीं बता सकती, पर दोनों निबंध दो चार बार पढ़ते ही कंठाग्र हो गए थे ! मैंने नंबर लाने में ही पूरे विद्यार्थी जीवन उनका भरपूर उपयोग किया ही, अपने चरित्र में भी, अपनी भाषा में भी उन खूबियों का जीवनभर उपयोग करने की कोशिश की, जिसकी चर्चा लेखक ने इन दोनों निबंध को लिखने में की थी !

सबसे प्रेम करने वाले

उस निबंध में लेखक ने लिखा था, रामचरितमानस लेखक को इसलिए प्रिय थी कि एक दूसरे की इच्छा का सम्मान करने के लिए किसी ने खुद की चिंता नहीं की ! सबसे प्रेम करने वाले परोपकारी लोगों को अच्छा तथा अहंकारी और स्वार्थी को बुरा कहा गया था ! रामायण के सभी अच्छे पात्र अपने अपने कर्तव्यों का पालन में लगे थे ! गोस्वामी तुलसी दास लेखक को इसलिए प्रिय थे, क्योंकि उन्होंने बड़े ही सहज़ ढंग से सभी घटनाओं का वर्णन कर दिया था ! इतने सरल ढंग से कवि ने रामायण लिखी कि उनके दोहे, उनकी चौपाइयां जन जन के कंठ में विराजमान हो गयी !

हमारे समय में कक्षा 11 में बोर्ड की परीक्षाएं होती थी ! मुझे तीन महीने फुर्सत में देखकर मेरी दादी ने घोषणा की, इस साल की गर्मियों के दोपहर में मैं रामायण पाठ करूंगी और सभी महिलायें आकर सुनेंगी यानि बोर्ड की परीक्षा के बाद मेरे जिम्मे एक और परीक्षा आयी ! रामायण पाठ कैसे की जाती हैं, पापाजी ने कुछ सिखाया, समझाया, वे कई बार पाठ कर चुके थे ! अल्हड़पन के उम्र में ही दो - तीन महीने रामायण पाठ को दिए, बहुत अच्छा लगा था ! पर रामायण सपूर्ण नहीं हो पाया और मेरा रिजल्ट और एडमिशन का समय नजदीक आ गया, बाकी कांड किसी और ने पूरे किये !

मर्यादा पुरुषोत्तम राम

पर राम के चरित्र को समझने में वह समय महत्वपूर्ण रहा ! समझ में आया कि राम को क्यों मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता हैं ? पर मैं मानती हूँ कि हमारे भक्ति से अधिक हमारे आचरण में राम होने चाहिए ! राम के प्रति भक्ति से भारत में उतना सुधार नहीं हो सकता जितना राम को आचरण में रखने से हो सकता हैं !

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संगीता पुरी

Specialist in Gatyatmak Jyotish, I write blogs on various topics particularly Astrology. My several books published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ organized by the newspaper ‘Prabhat Khabar’. गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723

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