सोशल मीडिया से एकांगी और असंतुलित विकास

 google with your name

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आज का युग बहुत प्रगतिशील हैं, किसी विषय पर कुछ भी आपको देखना हो,  समझना हो,  आप गूगल पर सर्च कर लेते  हैं और उससे जुडी ढेर सारी खबरें आपको मिल जाती हैं ! ( google with your name ) उसके बाद आप एक लिंक से दूसरे लिंक पर और दूसरे से तीसरे लिंक पर जाते हैं और इंटरनेट आपकी जिज्ञासा के साथ रूचि को भी समझ लेता हैं ! उसके बाद गूगल तो क्या फेसबुक भी आपको वैसी ही न्यूज़ दिखाने लगता हैं !

आप समझ भी नहीं पाते और गूगल आपका एकांगी विकास आरम्भ कर देता हैं ! धीरे धीरे वह आपलोगो को वैसे ग्रुप्स,  वैसे पेज से परिचय करवाता रहता हैं,  जिसे आप न चाहते हुए भी लाइक करने लगते हैं ! उसके बाद आपके दिमाग को एक दिशा में ले जानेवाली सामग्री मिलती रहती हैं ! फुर्सत में रहने वाले लोग न चाहते हुए भी उसे देखने को मजबूर होते हैं और खास विचारधारा में फँसते चले जाते हैं !

चाहे राजनीतिक विचारधारा हो,  धार्मिक या फिर बौद्धिक - इंटरनेट अपने बिछाए जाल में आपको फांसने की कोशिश करता हैं और लगभग कामयाब होता हैं ! न्यूज़ चैनल्स तो आप बदल भी लेते हैं,  पर इंटरनेट घुमा फिराकर आपको वही दिखायेगा,  जिसकी ओर आपका थोड़ा भी रुझान गया हो ! लगातार follow up  करता हुआ आपके रुझान को कट्टर बना डालता हैं ! 

बच्चों की लिए तो ख़ासकर इंटरनेट इसलिए घातक हैं ! बच्चे ने एक दिन गेम खेल लिया या एक दिन कोई वीडियो देख ली तो इंटरनेट में उसके लिए गेम और वीडियो ही आते रहेंगे,  क्विज नहीं आ सकता ! इसलिए बच्चों पर खास ध्यान रखने की आवश्यकता हैं ! इंटरनेट ज्ञान का खजाना हैं,  सही ढंग से उपयोग किया जाये तो आपके बच्चों के व्यक्तित्व का अच्छा विकास कर सकता हैं ! बस ध्यान दें कि वे क्या सर्च कर रहे हैं?  

बड़े भी  इंटरनेट में एक तरह की बातें सर्च न करें,  यदि अपने व्यक्तित्व को संतुलित बना हो तो हर प्रकार की जानकारी सर्च करे,  फिर आपकी स्पष्ट पता चलेगा कि क्या उचित हो रहा हैं और क्या अनुचित ! कट्टरता उचित नहीं,  अपने को संतुलित बनाये ! गूगल में यह शक्ति आ चुकी है,  कि यदि पुरी दुनिया में एक तरह की विचारधारा बनाना चाहे तो बना सकता हैं ! इस बात को समझते समझते अधिकांश लोग उसकी चाल में फंस चुके होंगे !

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सोशल मीडिया से एकांगी और असंतुलित विकास सोशल मीडिया से एकांगी और असंतुलित विकास Reviewed by संगीता पुरी on August 08, 2020 Rating: 5

2 comments:

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

यह भी एक तरह का माफिया ही है ! जबकि यह ज्ञान नहीं बढ़ाता सिर्फ सूचनाएं ही देता है

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बहुत सही लिखा आपने। हमें इसपर विचार करना चाहिए।

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