गत्यात्मक ज्योतिष : परिचय

 

Jyotish parichay

गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में संपूर्ण ज्योतिष ज्ञान देना आवश्यक है, क्योंकि भारत के बहुत सारे लोगों को शायद इस बात का ज्ञान भी न हो कि विगत कुछ वर्षों में उनके अपने देश में ज्योतिष की एक नई शाखा का विकास हुआ है,जिसके द्वारा वैज्ञानिक ढंग से की जानेवाली सटीक तिथियुक्त भविष्यवाणी जिज्ञासु बुद्धिजीवियों के मध्य चर्चा का विषय बनी हुई है। सबसे पहले दिल्ली से प्रकाशित होनेवाली पत्रिका ‘बाबाजी’ के 1994-1995-1996 के विभिन्न अंकों में तथा ज्योतिष धाम के कई अंकों में गत्यात्मक ज्योतिष के ज्योतिष के बुद्धिजीवी पाठकवर्ग के सम्मुख मेरे द्वारा ही रखा गया था ।

जनसामान्य की जिज्ञासा को देखते हुए 1997 में दिल्ली के एक प्रकाशक ‘अजय बुक सर्विस’ के द्वारा मेरी पुस्तक ‘गत्यात्मक दशा पद्धति: ग्रहों का प्रभाव’ पहले परिचय के रुप में पाठकों को पेश की गयी। इस पुस्तक का प्राक्कथन लिखते हुए रॉची कॉलेज के भूतपूर्व प्राचार्य डॉ विश्वंभर नाथ पांडेयजी ने ‘गत्यात्मक दशा पद्धति’ की प्रशंसा की और असके शीघ्र ही देश-विदेश में चर्चित होने कामना करते हुए हमें जो आशीर्वचन दिया था, वह इस पुस्तक के प्रथम और द्वितीय संस्करण के प्रकाशित होते ही पूर्ण होता दिखाई पड़ा। 

इस पुस्तक की लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि शीघ्र ही 1999 में इस पुस्तक का द्वितीय संस्करण प्रकाशित करवाना पड़ा। पुस्तक के प्रकाशन के पश्चात् हर जगह ‘गत्यात्मक ज्योतिष चर्चा का विषय बना रहा । कादम्बिनी पत्रिका के नवम्बर 1999 के अंक में श्री महेन्द्र महर्षिजी के द्वारा इस सिद्धांत को प्रस्तुत किया गया। जैन टी वी के प्रिया गोल्ड फ्यूचर प्रोग्राम में भी इस पद्धति की चर्चा-परिचर्चा हुई। दिल्ली के बहुत से समाचार-पत्रों में इस पद्धति पर आधारित लेख प्रकाशित होते रहें।

गत्यात्मक ज्योतिष के विकास की चर्चा के आरंभ में ही इसका प्रतिपादन करनेवाले वैज्ञानिक ज्योतिषी श्री विद्यासागर महथा का परिचय आवश्यक होगा ,जिनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही गत्यात्मक ज्योतिष के जन्म का कारण बना। महथाजी का जन्म 15 जुलाई 1939 को झारखंड के बोकारो जिले में स्थित पेटरवार ग्राम में हुआ। एक प्रतिभावान विद्यार्थी कें रुप में मशहूर महथाजी रॉची कॉलेज ,रॉची में बी एससी करते हुए अपने एस्‍ट्रॉनामी पेपर के ग्रह नक्षत्रों में इतने रम गए कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल और उनका पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव को जानने की उत्सुकता ही उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य बन गयी। उनके मन को न कोई नौकरी ही भाई और न ही कोई व्यवसाय। इन्‍होने प्रकृति की गोद में बसे अपने पैतृक गॉव में रहकर ही प्रकृति के रहस्यों को ढूंढने का फैसला किया।


Gatyatmak Jyotish ke Janak

Jyotish com in hindi

ग्रह नक्षत्रों की ओर गई उनकी उत्सुकता ने उन्हें ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन को प्रेरित किया। गणित विषय की कुशाग्रता और साहित्य पर मजबूत पकड़ के कारण तात्कालीन ज्योतिषीय पत्रिकाओं में इनके लेखों ने धूम मचायी। 1975 में उन्हीं लेखों के आधार पर ‘ज्योतिष-मार्तण्ड’ द्वारा अखिल भारतीय ज्योतिष लेख प्रतियोगिता में इन्हें प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। उसके बाद तो ज्योतिष-वाचस्पति ,ज्योतिष-रतन,ज्योतिष-मनीषी जैसी उपाधियों से अलंकृत किए जाने का सिलसिला ही चल पड़ा।1997 में भी नाभा में आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के ज्योतिषियों के मध्य इन्हें स्वर्ण-पदक से अलंकृत किया गया।


विभिन्न ज्योतिषियों की भविष्यवाणी में एकरुपता के अभाव के कारणों को ढूंढ़ने के क्रम में इनके वैज्ञानिक मस्तिष्क को ज्योतिष की कुछ कमजोरियॉ दृष्टिगत हुईं। फलित ज्योतिष की पहली कमजोरी ग्रहों के शक्ति-आकलन की थी।ग्रहों के शक्ति निर्धारण से संबंधित सूत्रों की अधिकता भ्रमोत्पादक थी,जिसके कारण ज्योतिषियों को एक निष्कर्ष में पहुंचने में बाधा उपस्थित होती थी। हजारो कुंडलियों का अध्ययन करने के बाद इन्होने ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति को ढूंढ निकाला। ग्रह-गति छः प्रकार की होती है---- 
अतिशीघ्री , 2.शीघ्री , 3. सामान्य , 4. मंद , 5.वक्र , 6.अतिवक्र ।

Jyotish.com in Hindi

अपने अध्ययन में इन्होनें पाया कि किसी व्यक्ति के जन्म के समय अतिशीघ्री या शीघ्री ग्रह अपने अपने भावों से संबंधित अनायास सफलता जातक को जीवन में प्रदान करते हैं। जन्म के समय के सामान्य और मंद ग्रह अपने-अपने भावों से संबंधित स्तर जातक को देते हैं। इसके विपरीत वक्री या अतिवक्री ग्रह अपने अपने भावों से संबंधित निराशाजनक वातावरण जातक को प्रदान करते हैं। 1981 में सूर्य और पृथ्वी से किसी ग्रह की कोणिक दूरी से उस ग्रह की गत्यात्मक शक्ति को प्रतिशत में निकाल पाने के सूत्र मिल जाने के बाद उन्होने परंपरागत ज्योतिष को एक कमजोरी से छुटकारा दिलाया।

फलित ज्योतिष की दूसरी कमजोरी दशाकाल-निर्धारण से संबंधित थी। दशाकाल-निर्धारण की पारंपरिक पद्धतियॉ त्रुटिपूर्ण थी। अपने अध्ययनक्रम में उन्होने पाया कि ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ग्रहों की अवस्था के अनुसार ही मानव-जीवन पर उसका प्रभाव 12-12 वर्षों तक पड़ता है। जन्म से 12 वर्ष की उम्र तक चंद्रमा ,12 से 24 वर्ष की उम्र तक बुध ,24 से 36 वर्ष क उम्र तक मंगल ,36 से 48 वर्ष की उम्र तक शुक्र ,48 से 60 वर्ष की उम्र तक सूर्य ,60 से 72 वर्ष की उम्र तक बृहस्पति , 72 से 84 वर्ष की उम्र तक शनि,84 से 96 वर्ष की उम्र क यूरेनस ,96 से 108 वर्ष क उम्र तक नेपच्यून तथा 108 से 120 वर्ष की उम्र तक प्लूटो का प्रभाव मनुष्य पड़ता है। विभिन्न ग्रहों की एक खास अवधि में निश्चित भूमिका को देखते हुए ही ‘गत्यात्‍मक दशा पद्धति की नींव रखी गयी। अपने दशाकाल में सभी ग्रह अपने गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के अनुसार ही फल दिया करते हैं। इस तरह इन्होने कुंडली देखने का तरीका निकाला। 

संपूर्ण ज्योतिष ज्ञान

www.jyotish.com in Hindi

उपरोक्त दोनो वैज्ञानिक आधार प्राप्त हो जाने के बाद भविष्यवाणी करना काफी सरल होता चला गया। ‘ गत्यात्मक दशा पद्धति ’ में नए-नए अनुभव जुडत़े चले गए और शीघ्र ही ऐसा समय आया ,जब किसी व्यक्ति की मात्र जन्मतिथि और जन्मसमय की जानकारी से उसके पूरे जीवन के सुख-दुख और स्तर के उतार-चढ़ाव का लेखाचित्र खींच पाना संभव हो गया। धनात्मक और ऋणात्मक समय की जानकारी के लिए ग्रहों की सापेक्षिक शक्ति का आकलण सहयोगी सिद्ध हुआ। भविष्यवाणियॉ सटीक होती चली गयी और जातक में समाहित विभिन्न संदर्भों की उर्जा और उसके प्रतिफलन काल का अंदाजा लगाना संभव दिखाई पड़ने लगा।

गत्यात्मक दशा पद्धति के अनुसार जन्मकुंडली में किसी भाव में किसी ग्रह की उपस्थिति महत्वपूर्ण नहीं होती , महत्वपूर्ण होती है उसकी गत्यात्मक शक्ति , जिसकी जानकारी के बिना भविष्यवाणी करने में संदेह बना रहता है। गोचर फल की गणना में भी ग्रहो की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति की जानकारी आवश्यक है। इस जानकारी पश्चात् तिथियुक्त भविष्यवाणियॉ काफी आत्मविश्वास के साथ कर पाने के लिए ‘गत्यात्मक गोचर प्रणाली’ का विकास किया गया ।

योगकारक ग्रह

 Jyotish guru Astro blog

गत्यात्मक दशा पद्धति एवं गत्यात्मक गोचर प्रणाली के विकास के साथ ही ज्योतिष एक वस्तुपरक विज्ञान बन गया है , जिसके आधार पर सारे प्रश्नों के उत्तर हॉ या नहीं में दिए जा सकते हैं। गत्यात्मक ज्योतिष की जानकारी के पश्चात् समाज में फैली धार्मिक एवं ज्योतिषीय भ्रांतियॉ दूर की जा सकती हैं ,साथ ही लोगों को अपने ग्रहों और समय से ताल-मेल बिठाते हुए उचित निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। यही नहीं, बुरे ग्रहों के प्रभाव को दूर करने के लिए किए जाने वाले उपचार भी बिल्‍कुल वैज्ञानिक और परंपरागत ज्‍योतिष से बिल्‍कुल भिन्‍न है। 

आनेवाले गत्यात्मक युग में निश्चय ही गत्यात्मक ज्योतिष ज्योतिष के महत्व को सिद्ध करने में कारगर होगा ,ऐसा मेरा विश्वास है और कामना भी। लेकिन सरकारी,अर्द्धसरकारी और गैरसरकारी संगठनों के ज्योतिष के प्रति उपेक्षित रवैये तथा उनसे प्राप्त हो सकनेवाली सहयोग की कमी के कारण इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कुछ समय लगेगा , इसमें संदेह नहीं है। ( संपूर्ण ज्योतिष ज्ञान )

'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित धारणा पर संगीता पुरी की ई-पुस्तकों को प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें!

कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के कुछ कोट्स

     अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के कुछ कोट्स  

    women's day in hindi


    • दुनिया साथ दे न दे माँ का प्यार कम नहीं होता। 
    • स्त्री का अपमान माता का और ईश्वर का अपमान है। 
    • नारी की ताकत कलम और तलवार से भी बढ़कर है। 
    • महिला इतनी बड़ी ताकत है कि वह मर्द को जन्म देती है। 
    • माँ को एक बेटा भाग्य से होता है पर एक बेटी सौभाग्य से होती है। 
    • पापा की लाड़ली माँ की जान भाईयों की मुस्कान परिवार की शान। 
    • नारी जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी , आँचल में है दूध और आँखों में पानी !
    • महिला सबको भूल सकती है , अपनी इज्जत करनेवालों को नहीं भूल सकती। 
    • कोख से बच चुकी बच्चियों को चार किताबें तो पढ़ने दो , दहेज़ से भी बच जाएगी। 
    • लोग मंदिर-मस्जिद में जन्नत तलाश करते है, फुर्सत नहीं कि माँ के कदम ही चूम लें। 
    • कुछ लोग कहते हैं कि स्त्रियों  का घर नहीं होता , पर स्त्रियों  के बिना कोई घर नहीं होता। 
    • अपनी माँ , बहन, बेटी की ही नहीं , दूसरों की माँ , बहन , बेटी का सम्मान करना सीखिए। 
    • हरदिन हरपल नारी का सम्मान करो,  बस एक दिन क्यों नारी दिवस नारी के नाम मनाना है ?
    • खुद मौत की गोद में जाकर जिंदगी को जन्म देने वाली स्त्री को पूजनीय तो माना ही जाना चाहिए। 
    • नारी ही शक्ति नर की, नारी ही शोभा घर की , जो उसे उचित सम्मान मिले , घर में खुशियों के फूल खिले। 
    • कर्तव्यों को साथ लेकर निरंतर अपने पथ पर चलती हुई भारीतय नारी के चेहरे पर कभी शिकन भी नहीं आती। 
    • कोई भी देश तरक्की के शिखर पर तबतक नहीं पहुँच सकता, जबतक उस देश की महिलाएँ कंधे से कन्धा मिलाकर साथ नहीं चलती हैं।
    • यदि पुरुष को शिक्षित किया जाये तो एक पुरुष शिक्षित होता है, पर एक महिला को शिक्षित किया जाये तो आनेवाली पीढ़ी  शिक्षित होती है। 

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की अनंत शुभकामनाएं !

    इसे भी पढ़ें !

    भला महिलाएं पुरूषों से अपना अधिकार क्‍यूं मांगे ?

    अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस पर एक जरूरी मांग ... अपनी सरकार से

    दामिनी को सच्‍ची श्रद्धांजलि कैसे मिले ?

    दुनिया का सबसे आसान शब्‍द है मां

    'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित धारणा पर संगीता पुरी की ई-पुस्तकों को प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें!

    कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

      Baby name with Astrology

       

      Baby name with Astrology

      In ancient times, parents were not educated, so they did not remember the birth of children. Even if the entire horoscope is lost, the zodiac and constellation of the child will be remembered, so the pandits used to keep the child's name (The baby name by Astrology ) by Astrology. The name used to start with the letters for the different phases of the constellations of the following zodiac signs: ------

      Baby name with Astrology


      • Rashi letters in Hindi
      • The first letters for the names of the children of Aries were taken from Chu, Che, Cho, La, Li, Lu, Le, Lo, Aa, the lord of this zodiac is Mars.
      • The first letters e, oo, a, o, wa, v, wu, ve, vow were taken for the names of the children of Taurus, the lord of this zodiac is Venus.
      • For the names of the children of Gemini, the first letter, ki, ku, d, ch, k, ko, were taken, the lord of this zodiac is Mercury.
      • The first letters for the names of the children of the Cancer zodiac were taken as hu, hey, ho, da, dee, doo, dey, doe, the lord of this zodiac is the Moon.
      • The first letters for the names of the children of Leo zodiac were taken as Ma, Me, Moo, Me, Mo, Ta, Tee, To, Tee, Sun is the lord of this zodiac.
      • The first letters for the names of the children of the Virgo were taken Dho, Pa, Pi, Pu, Sh, N, Th, Pe, Po, Mercury is the lord of this zodiac.
      • The first letters for the names of the children of the Libra zodiac were taken as Ra, Ri, Ru, Re, Ro, Ta, Ti, Tu, Te, the lord of this zodiac is Venus.
      • The first letters for the names of the children of the Scorpio zodiac were taken as na, ni, nu, ne, no, ya, yi, u, the lord of this zodiac is Mars.
      • The first letters for  the names of the children of the Sagittarius are Ye, Yo, Bha, Bhi, Bhoo, Dha, Fa, Dha, Bhe, Jupiter is the lord of this zodiac.
      • The first letters for the names of the children of Capricorn were bho, ja, ji, khi, khu, khe, kho, ga, gi, Saturn is the lord of this zodiac.
      • The first letters for the names of the children of Aquarius were taken Go, Gay, Go, Sa, Si, Soo, Se, So, Da, the lord of this sign is Saturn.
      • The first letters for the names of the children of Pisces were taken Di, Du, Th, Jh, J, De, Do, Cha, Chi, Jupiter is the lord of this zodiac.

      baby boy names astrology, baby girl names astrology)

      Later, when needed or interested, the pundits would make predictions about them on the basis of the constellation. This means that in ancient times, the sages gave a lot of importance to the birth-constellation, the predictions must have been made according to the moon, Life was also simple in ancient times, so there is no justification for it, but in today's time it is impossible to tell about life by looking at a constellation. 

      जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

      कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

        बच्चों के राशि आधारित नाम

        Astrology in hindi by name

        प्राचीन काल में अभिभावक पढ़े लिखे नहीं होते थे, इसलिए बच्चों का जन्मसमय उन्हें याद नहीं रहता था। पूरी कुंडली खो भी जाये तो बच्चे की राशि और नक्षत्र याद रहे, इसलिए पंडित बच्चों के नक्षत्र आधारित नाम रख दिया करते थे। निम्न राशियों के नक्षत्रों के विभिन्न चरणों के लिए अक्षरों से नाम की शुरुआत होती थी :------

        Astrology in hindi by name


        Rashi letters in Hindi

        मेष राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी मंगल होता है ।

        वृष राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी स्वामी शुक्र होता है।

        मिथुन राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी  बुध होता है।

        कर्क राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी चंद्रमा होता है।

        सिंह राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी सूर्य होता है।

        कन्या राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी बुध होता है।

        तुला राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी शुक्र होता है।

        वृश्चिक राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी मंगल होता है।

        धनु राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी बृहस्पति होता है।

        मकर राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी शनि होता है।

        कुंभ राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी  शनि होता है।

        मीन राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी बृहस्पति होता है।


        Astrology in hindi by name

        Astrology Hindi name wise

        बाद में जरूरत पड़ने पर या रूचि होने पर जन्म की राशि और नक्षत्र के आधार पर ही पंडित उनके बारे में भविष्यवाणी या उपाय करते होंगे। इसका अर्थ है क़ि प्राचीन काल में ऋषियों ने जन्म-नक्षत्र को बहुत महत्व दिया था, चंद्र यानि मन के हिसाब से ही परिस्थिति को बताया जाता रहा होगा।   प्राचीनकाल में जीवन सरल भी था, इसलिए इसका कोई औचित्य हो, पर आज के समय में तो एक नक्षत्र को देखकर जीवन के बारे में बता पाना असंभव है। 



        जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

        कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

          हिंदी में बच्चों के नाम

           

          Baby name in Hindi

          किसी खास तरह की ग्रहस्थिति का प्राचीन ऋषि महर्षियों ने पृथ्‍वी पर कुछ खास प्रभाव देखा , तो उसे सही ढंग से समझने के लिए पूरी ताकत लगा दी और उसका ही परिणाम है कि एक सुव्‍यवस्थित ज्ञान के रूप में ज्‍योतिष शास्‍त्र विकसित हो सका। चंद्रमा के किसी खास नक्षत्र और उनके विभिन्‍न चरणों में जन्‍म लेने वाले जातकों के स्‍वभाव पर पूरा रिसर्च करने के लिए उन्‍होने जातको के नाम खास अक्षर से रखने की परंपरा शुरू की , ताकि जन्‍म विवरण या जन्‍मकुंडली नहीं होने पर भी उनके चरित्र के बारे में कुछ समझा जा सके। प्राचीन काल में हर गांव के पंडितों को इतनी जानकारी होती ही थी कि वे पंचांग से बच्‍चों की जन्‍मकुंडली बना सके और नक्षत्र के आधार पर उनका नामकरण कर सकें। उस नाम से ही जातक के चारित्रिक विशेषताओं को समझने में मदद मिलती थी, इसलिए नाम का महत्‍व माना गया।
          Baby name in hindi


          Baby name for hindi

          भारतीय संस्कृति में 16 संस्कारों में नामकरण संस्कार का कम महत्‍व नहीं होता था। विधि विधान से नामकरण करने की परंपरा का ज्‍योतिषीय आधार हुआ करता था। किसी शुभ मुहूर्त्‍त में नामकरण जन्म के 11 से 27 दिन के अंदर किया जाता था। शिशु के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में संचरण करता है, वह राशि जन्म राशि कहलाती है और इस राशि में आने वाले नामाक्षर पर उसका नाम रखा जाता है। अक्षर विशेष में नाम रखने के लिए कुल 27 नक्षत्रों के चार चार चरण किए गए हैं। इनमें जिस चरण में जन्म होता है, उसी अक्षर विशेष पर नाम रखा जाता है। उदाहरण के लिए बालक का जन्म अश्विनी नक्षत्र के पहले चरण में हुआ है तो बालक का नामाक्षर चू होगा। अश्विनी नक्षत्र में चार अक्षर चू, चे, चो और ला अक्षर होते हैं। नाम कम अक्षरों वालों होना अधिक उचित होता है। पुत्र का नाम सम व पुत्री का नाम विषम संख्या में रखा जाता है।

          Baby girl names in hindi

          जब पंडितो के द्वारा नाम रखे जाने की परंपरा समाप्‍त हुई या जन्‍मकुंडली तक ही सीमित रह गयी , तब भी बहुत दिनों तक नाम दिन, महीने , तिथि , पक्ष, प्रहर या कभी कभी उनकी शारिरीक या पारिवारिक स्थिति के हिसाब से रखा जाता रहा , पर फिर भी लोगों के दिलोदिमाग में नाम का महत्‍व बना रहा और बच्‍चों में चारित्रिक विशेषताओं को बनाए रखने के लिए सुंदर और सार्थक नाम रखने की परंपरा शुरू हुई। आज तो बच्‍चे का सटीक नाम रखने के लिए अभिभावक काफी माथापच्‍ची करते हैं।पुराने बहुत से नामों को तो लोगों ने ओल्ड फैशन बनाकर साइड लाइन कर दिया है, आज हर कोई अपने बच्चे को नाम से एक अलग पहचान देना चाह रहा है। 

          Baby boy names in hindi

          कुछ समय से लडकियों के नाम में अनन्या, नेहा, शगुन, भव्या, आस्था, अदिति, रिया, खुशी, अणिता, अन्या, अनुष्का, परी, दिया, नव्या, काव्या आदि बहुतायत में रखे जा रहे हैं , तो लडकों में प्रतीक, पीयूष, हर्षित, यश, शुभम, आर्यन, कृष्णा, अर्णव, सांई, आरुष, इशान, नील, ओम, विहान, आयुष, अभिनव, वैदांत, विवान, शौर्य आदि अधिक प्रसिद्ध हैं। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से नाम रखने में जातक की जन्‍मकुंडली को ध्‍यान में रखने की आवश्‍यकता नहीं, बच्‍चे का पुकारने का या वास्‍तविक नाम कुछ भी हो सकता है , पर बोलने और लिखने में सरल सार्थक नाम अधिक उचित है। इस ब्लॉग में लड़कों के अच्छे अच्छे नाम की व्यवस्था की गयी है। 

          जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

          'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित धारणा पर संगीता पुरी की ई-पुस्तकों को प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें!

          कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।