मई-जून 2022 में बुध की चाल का जनसामान्य पर प्रभाव

budh ka gochar 2022

 2022 में बुध की चाल का जनसामान्य पर प्रभाव


'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार अन्य ग्रहों की तरह ही बुध भी तबतक जातकों को सुख नहीं देता , जबतक इसकी गत्यात्मक शक्ति अच्छी नहीं हो जाती है।  इसी प्रकार बुध तबतक आपको परेशान नहीं करता , जबतक उसकी गत्‍यात्‍मक शक्ति कम नहीं हो जाती है। गत्‍यात्‍मक शक्ति कम या अधिक हो जाने पर जातक को बुध के कारण उससे सम्बंधित भावों का सुख या कष्ट मिल जाता है। मैं 2022 मई-जून की बुध की चाल का पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव की व्याख्या कर रही हूँ। 28 अप्रैल 2022 को बुध सूर्य के साथ 27 डिग्री की कोणात्मक दूरी बनाएगा इस समय बुध और पृथ्वी की दुरी औसत के आस-पास होगी ऐसे समय में बुध काफी क्रियाशील होता है और जनसामान्य को बुध से सम्बंधित कार्यों में उलझने के लिए बाध्य करता है।

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यूं तो वृष राशि में बुध की स्थिति लोगों के सुख और दुख दोनो का कारण बनी हुई होगी , पर 11 मई तक दिन दिन इसकी स्‍थैतिक शक्ति में हो रही वृद्धि कुछ लोगों की मन:स्थिति को सुखद बनाएगी , तो कुछ तनाव झेलने को भी विवश होंगे 2022 अप्रैल के अंतिम सप्ताह से ही लोग बुध के कारण उत्पन्न होनेवाले कार्य में उलझे होंगे। चूंकि बुध मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है और इसकी स्थिति अभी वृष में होगी , इसलिए वृष , मिथुन और कन्या राशि से संबंधित कार्यों में ही सुख या दुख की अधिक संभावना रहेगी। 12 से 24 वर्ष की उम्र के किशोर , जिनका जन्मकालीन बुध कमजोर है , यानि 1997 में 1 जनवरी  से 10 जनवरी , 20 अप्रैल से 6 मई, 23 अगस्त से 7 सितम्बर, 13 दिसंबर से 24 दिसंबर, 1998 में 2 अप्रैल से 17 अप्रैल, 6 अगस्त से 21 अगस्त, 26 नवंबर से 8 दिसंबर , 1999 में 15 मार्च से 30 मार्च, 18 जुलाई से 3 अगस्त, 10 नवंबर से 22 नवंबर, 2000 में 26 फरवरी से 12 मार्च, 29 जून से 15 जुलाई, 24 अक्टूबर से 5 नवंबर, 2001 में 8 फरवरी से 21 फरवरी तक, 8 जून से 24 जून तक , 6 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक, 2002 में 23 जनवरी से 5 फरवरी तक, 20 मई सेजून तक, 19 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक, 2003 में 7 जनवरी से 19 जनवरी तक, 1 मई से 16 मई तक, 3 सितम्बर से 16 सितम्बर तक, 21 दिसंबर से ३१ दिसंबर तक, 2004  में 11 अप्रैल से 26 अप्रैल, 15 अगस्त से 29  अगस्त, 4  दिसंबर से 16 दिसंबर, 2005 में 25 मार्च से 8 अप्रैल, 28 जुलाई से 12 अगस्त, 19 नवंबर से 30 नवंबर, 2006 मेंमार्च से 21 मार्च, 9 जुलाई से 25 जुलाई, 1 नवंबर से 14 नवंबर , 2007 में 19 फरवरी से 4 मार्च, 20 जून से 6 जुलाई, 17 अक्टूबर से 28 अक्टूबर, 2008 में 2 फरवरी से 15 फरवरी, 1 जून से 15 जून, 29 सितम्बर से 11 अक्टूबर, 2009 में 16 जनवरी से 28 जनवरी, 12 मई से 27 मई, 12 सितम्बर से 24 सितम्बर जन्म लेने वालों को बुध की इस स्थिति से तकलीफ होगी। उल्लिखित समय से दूर जन्म लेने वाले पर बुध का शुभ प्रभाव पड़ेगा।

बुध की इस स्थिति के कारण 23 नवंबर 1963 से 25 जनवरी 1964 , 15 नवंबर 1964 से 20 जनवरी 1965 , 20 नवंबर 1970 से 24 जनवरी 1971 , 13 नवंबर 1971 से 18 जनवरी 1972 , 16  नवंबर 1977 से 21 जनवरी 1978 , 20 नवंबर 1983 से 25 जनवरी 1984 , 14 नवंबर 1984 से 19 जनवरी 1985 , 17 नवंबर 1990 से 17 जनवरी 1991 , 12 नवंबर 1991 से 16 जनवरी 1992 , 21 नवंबर 1996 से 24 जनवरी 1997 , 14 नवंबर 1997 से 15 जनवरी 1998 , 10 नवंबर 1998 से 13 जनवरी 1999 , 19 नवंबर 2003 से 23 जनवरी 2004 , 23 नवंबर 2009 से 25 जनवरी 2010 , 16 नवंबर 2010 से 21 जनवरी 2011 , 19 नवंबर 2016 से 23 जनवरी 2017  जन्‍म लेनेवाले उत्साहित होकर कार्य में जुटे रहेंगे बुध के कारण 28 अप्रैल 2022 से शुरू हुई कार्यक्रमों में बाधा की शुरुआत 11 मई से  होगी। 22 मई तक काम लगभग रुका हुआ सा महसूस होगा। उसके बाद ही काम के शुरू किए जाने के लिए आशा की कोई किरण दिखाई दे सकती है। 3 जून  के बाद  स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और 18 जून 2022 के आसपास अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बुध के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को खुशी होगी। इस तरह 2 महीने तक किसी खास संदर्भ , जिसकी चर्चा लेख के अंतिम अनुच्छेद में की गयी है, की सफलता से इनका उत्‍साह बढा रहेगा।

किन्तु वृष राशि में बुध की इस विशेष स्थिति से 11 सितम्बर से 18 नवंबर 1961 , 16 सितम्बर से 21 नवंबर 1967 , 8  सितम्बर से 15 नवंबर 1968 , 12 सितम्बर से 18 नवंबर 1974 , 7 सितम्बर से 12 नवंबर 1975 , 22  सितम्बर से 21 नवंबर 1980 , 9 सितम्बर से 16 नवंबर 1981 , 13 सितम्बर से 20 नवंबर 1987 , 7 सितम्बर से 13 नवंबर 1988 , 11 सितम्बर से 17 नवंबर 1994 , 14 सितम्बर से 20 नवंबर 2000 , 12 सितम्बर से 19 नवम्बर 2007 , 6 सितम्बर से 11 नवंबर 2008 , 16 सितम्बर से 21 नवंबर 2013 , 22 सितम्बर से 19 नवंवबर 2020 , 7  सितम्बर से 12 नवंबर 2021  के मध्य जन्‍म लेनेवाले लोग निराशाजनक वातावरण में कार्य करने को बाध्य होंगे। 28 अप्रैल 2022 के आसपास कार्य के असफल होने से उन्हें तनाव का सामना करना पड सकता है। 22 मई के आसपास उनके समक्ष किकर्तब्‍यविमूढावस्‍था की स्थिति बनी रहेगी। 3 जून के बाद निराशाजनक वातावरण में ही स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और 18 जून 2022  में अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बुध के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को कष्‍ट पहुंचेगा। इस तरह डेढ़ महीने तक  किसी खास संदर्भ , जिसकी चर्चा वीडियो के अंतिम अनुच्छेद में की गयी है, की परेशानी बनी रह सकती है।

इसके अलावे गोचर के इस बुध के कारण धनु राशि वाले पर शुभ प्रभाव तथा तुला राशि वाले बुरा प्रभाव महसूस करेंगे। काफी हद तक वृष राशि वाले पर भी बुध के इस चाल का अच्‍छा प्रभाव पडेगा। कुछ हद तक दिसंबर-जनवरी माह में जन्‍म लेनेवालों के लिए बुध की यह स्थिति शुभ प्रभाव देने वाली होगी , जबकि अक्टूबर-नवंबर माह में जन्‍म लेनेवाले इसके बुरे प्रभाव से युक्‍त हो सकते हैं। यदि ऊपर मौजूद तिथियों या राशि कोई जातक एक साथ बुध के अच्‍छे और बुरे दोनो प्रभाव में आते हों , तो उनपर बुध का मिश्रित प्रभाव पडेगा , यानि कोई कठिनाई आएगी तो उसके समाधान के रास्‍ते भी दिखेंगे।

बुध के इस खास चाल के कारण ऊपर मौजूद तिथियों या राशि में जन्‍म लेनेवाले विभिन्‍न लग्‍नवाले भिन्‍न भिनन प्रकार के सुख या दुख से खुद को संयुक्‍त पाएंगे। मेष लग्‍नवाले भाई-बहन, सहपाठी-सहकर्मी, रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव के मामले से संबंधित, वृष लग्‍नवाले पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी, धन-कोष , साख , परिवार  के मामले से संबंधित , मिथुन लग्‍नवाले स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, माता , संपत्ति, वाहन, सुख प्रदान करने वाली वस्तु से सम्बंधित मामलों , कर्क लग्‍नवाले भाई-बहन, सहपाठी-सहकर्मी, खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध से संबंधित , सिंह लग्‍नवाले धन-कोष , साख , परिवार, लाभ, लक्ष्य, मंजिल  से सम्बंधित , कन्या लग्‍नवाले कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास से सम्बंधित , तुला लग्‍नवाले कन्या भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप, खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्धआदि मामले , वृश्चिक लग्‍नवाले रूटीन, जीवन-शैली, लाभ, लक्ष्य, मंजिल आदि के मामले , धनु लग्‍नवाले प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी, कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति के मामले , मकर लग्‍नवाले रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव, भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप आदि मामले , माता , संपत्ति, वाहन, सुख प्रदान करने वाली वस्तु, प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी लग्नवाले पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी, रूटीन, जीवन-शैलीके मामले , मीन लग्‍नवाले माता , संपत्ति, वाहन, सुख प्रदान करने वाली वस्तु, प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी  की मजबूती या कमजोरी से खुद को सुखी या दुखी महसूस करेंगे।



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जन्मकालीन समय से गुजरनेवाले ग्रह

जन्मकालीन समय से गुजरनेवाले ग्रह का प्रभाव  

N Chandrashekhar tata

n chandrasekar tata


कल के यूट्यूब के अपने वीडियो में मैंने जानकारी दी थी कि शनि हर 30-30 साल पर जन्मकालीन राशि से गुजरता है। यह जिस जिस भाव का स्वामी होता है , जन्मकालीन स्थान में पहुँचते ही उससे सम्बंधित प्रभाव छोड़ता है और आपके सम्मुख कुछ खास परपरिस्थिति उत्पन्न हो जाती है। यह प्रभाव भी उसकी जन्मकालीन स्थिति के अनुसार ही होता है, जन्मकाल में शनि कमजोर हो तो यह अपने भावों की परेशानी लेकर आता है, जन्मकाल में शनि मजबूत हो तो यह अपने भावों की मजबूती लेकर आता है। शनि की कमजोरी और मजबूती का निर्णय आप सूर्य से उसकी दूरी के आधार पर कर सकते हैं, शनि सूर्य के निकट हो तो यह आरामदायक, सूर्य से दूर हो तो तकलीफदेह और सूर्य से सामान्य दूरी पर हो तो महत्वपूर्ण होता हैं। 30वें या 60वे वर्ष के आसपास ढाई वर्षों तक शनि का धनात्मक या ऋणात्मक प्रभाव देखा जा सकता है।

इसी प्रकार बृहस्पति हर 12-12 साल पर जन्मकालीन राशि से गुजरता है। यह जिस जिस भाव का स्वामी होता है , जन्मकालीन स्थान में पहुँचते ही उससे सम्बंधित प्रभाव छोड़ता है और आपके सम्मुख कुछ खास परपरिस्थिति उत्पन्न हो जाती है। यह प्रभाव भी उसकी जन्मकालीन स्थिति के अनुसार ही होता है, जन्मकाल में बृहस्पति कमजोर हो तो यह अपने भावों की परेशानी लेकर आता है, जन्मकाल में बृहस्पति मजबूत हो तो यह अपने भावों की मजबूती लेकर आता है। बृहस्पति की कमजोरी और मजबूती का निर्णय आप सूर्य से उसकी दूरी के आधार पर कर सकते हैं, बृहस्पति सूर्य के निकट हो तो यह आरामदायक, सूर्य से दूर हो तो तकलीफदेह और सूर्य से सामान्य दूरी पर हो तो महत्वपूर्ण होता हैं। 12वें, 24वें , 36वें , 48वें, 60वे , 72वें , 84 वें , 96वें वर्ष के आसपास एक वर्ष तकबृहस्पति का धनात्मक या ऋणात्मक प्रभाव देखा जा सकता है।

इस तरह दोनों ही ग्रहों बृहस्पति और शनि का प्रभावी वर्ष 60वें वर्ष के आसपास होता है। जन्मकाल में ये दोनों ग्रह मजबूत हों तो आपपर सकारात्मक प्रभाव डालते है, सामान्य हों तो महत्वपूर्ण तथा कमजोर हों तो ऋणात्मक प्रभाव डालते है। 60 वर्ष पूर्व जन्मलेनेवाले , जिनकी जन्मकुंडली में बृहस्पति मीन तथा शनि कुम्भ राशि में हों , एक दो वर्ष तक बृहस्पति और शनि से सम्बंधित फलाफल प्राप्त कर सकते है। यह प्रभाव उस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक जन्म लेने वालों के लिए सुखद रहेगा, जुलाई से अक्टूबर तक जन्म लेने वालों के लिए कष्टप्रद होगा। यह प्रभाव मई-जून, नवंबर-दिसंबर में जन्म लेनेवालों के लिए महत्वपूर्ण होगा। महत्वपूर्ण प्रभाव हर समय सकारात्मक ही नहीं , ऋणात्मक रूप से महत्वपूर्ण भी हो सकते हैं।

इस वीडियो की प्रेरणा इस समाचार से मिली कि टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को अब एयरलाइन कंपनी के चेयरमैन पद के लिए नियुक्त किया गया है। उनका जन्म 2 जून 1963 को हुआ था , जब बृहस्पति मीन और शनि कुम्भ राशि में विराजमान थे। सूर्य निकट होने के कारण इनके जन्मकालीन दोनों गृह मजबूत हैं। करीब डेढ़ माह के भीतर दूसरी बड़ी जिम्मेदारी मिली है। बीते फरवरी माह में ही इनके कार्यकाल को अगले 5 साल के लिए बढ़ाने का ऐलान किया गया था। एन चंद्रशेखर की जन्मकुंडली में शनि और बृहस्पति महत्वपूर्ण होकर क्रमशः कुम्भ और मीन राशि में बैठे हैं। 2022 के आसपास उनकी जन्मकालीन स्थिति चल रही है, जो इन्हे महत्वपूर्ण पदों के लिए चुनाव करवा रही है।



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विभिन्न राशियों में घूमते ग्रह

 Jyotish ke baare mein

विभिन्न राशियों में घूमते ग्रह 


मेरे पुराने लेखों से आप समझ चुके होंगे कि राशि का नामकरण भले ही नक्षत्रमण्डल में बन रहे तारों की आकृति से क्र दिया गया हो , पर राशि नक्षत्रमंडल नहीं हैं, आसमान के 360 डिग्री को 12  भागों  में बांटकर 30-30 डिग्री की एक-एक राशि बनायीं गयी है। चूँकि आसमान में पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की और चक्कर लगाती है, सभी गृह विभिन्न राशियों में पश्चिम से पूर्व की और पृथ्वी का चक्कर लगते प्रतीत होते हैं। पिछले पोस्ट से आप सबों को इतना मालूम हो ही गया है कि सूर्य सभी राशियों में एक एक महीने चलती हुई एक वर्ष में राशिमंडल का पूरा चक्कर लगा लेती है। इस कारण  सूर्य की कुंडली में स्थिति को देखकर हम किसी के जन्म का महीना निकाल सकते हैं। 

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सौरमंडल में सूर्य और पृथ्वी के मध्य मौजूद ग्रह बुध और शुक्र भी सूर्य के साथ साथ ही भ्रमण करते हैं, इसलिए जन्मकुंडली में भी उनकी स्थिति साथ-साथ होती है। बुध सूर्य से अधिकतम 27 डिग्री  तथा शुक्र सूर्य से अधिकतम 47 डिग्री की दूरी तक रह सकता है। चन्द्रमा ढाई-ढाई दिनों तक एक एक राशि में चलता हुआ सभी राशियों चक्कर 28 -29 दिनों में यानी एक महीने में पूरा करता है , पूरा करता है। सूर्य से दूर जाते हुए उसका प्रकाशमान हिस्सा बढ़ता जाता है, सूर्य से निकट आते हुए उसका प्रकाशमान हिस्सा घटता जाता है। 

बृहस्पति ग्रह सभी राशियों में एक-एक वर्ष चलते हुए लगभग 12 वर्ष में राशिमंडल का पूरा चक्कर लगाते हैं।  अभी भचक्र में बृहस्पति की स्थिति कुम्भ राशि में है , तीन चार महीनों में ही ये मीन राशि में जाने वाले हैं। एक साल मीन राशि में रहने के बाद ये मेष में, फिर एक साल बाद वृष में, फिर एक साल बाद मिथुन में --इस तरह इनकी यात्रा चलती रहेगी। अभी कुम्भ लग्न से एक साल पहले ये मकर राशि में थे, उससे एक साल पहले धनु राशि में, उससे एक साल पहले वृश्चिक राशि .. में इनकी यात्रा चल रही थी। इसलिए कुंडली में स्थित बृहस्पति को देखकर आप जन्म के साल का भी अंदाजा लगा सकते हैं।  किसी कुंडली में बृहस्पति मीन राशि में हो तो जातक के  जन्म का साल जानने  के लिए  के लिए 2022  से 12 , 24 , 36  , 48 , 60  , 72 , 84  या  96 वर्ष घटाकर प्राप्त कर सकते हैं।  इसी प्रकार कुंडली में बृहस्पति कुम्भ राशि में हो तो जातक के जन्म का साल जानने  के लिए  के लिए 2021  से 12 , 24 , 36  , 48 , 60  , 72 , 84  या  96 वर्ष घटाकर प्राप्त कर सकते हैं।  इसी प्रकार कुंडली में बृहस्पति मकर राशि में हो तो जातक के जन्म का साल जानने  के लिए  के लिए 2020  से 12 , 24 , 36  , 48 , 60  , 72 , 84  या  96 वर्ष घटाकर प्राप्त कर सकते हैं।  

शनि ग्रह सभी राशियों में ढाई-ढाई वर्ष चलते हुए लगभग 30 वर्ष में राशिमंडल का पूरा चक्कर लगाते हैं।पिछले तीन वर्षों से भचक्र में शनि की स्थिति मकर राशि में है। इस साल कुम्भ में जाकर भी ये वक्र होकर मकर में ही आ रहे हैं। एक साल मकर राशि में रहने के बाद अगले ढाई साल कुम्भ राशि में उसके बाद के ढाई साल मीन राशि में, उसके अगले ढाई साल मेष राशि राशि में रहेंगे। इसलिए कुंडली में स्थित शनि को देखकर आप जातक की उम्र का अंदाजा लगा सकते हैं। अभी शनि की स्थिति मकर में है, इसलिए यदि किसी की कुंडली में मकर राशि हो तो अनुमानतः जातक 30 , 60 या 90 की उम्र के आसपास का होन चाहिए। यदि कुंडली में शनि की स्थिति क्रमशः धनु , वृश्चिक या तुला में हो , तो 30 , 60 या 90 की उम्र के आसपास से ढाई-ढाई वर्ष पीछे चलते जाएँ। इसी प्रकार यदि कुंडली में शनि की स्थिति कुम्भ, मीन या मेष में हो तो 30 , 60 या 90 की उम्र के आसपास से ढाई-ढाई वर्षआगे चलते जाएँ। 

इस तरह शनि और बृहस्पति दोनों की स्थिति को कुंडली में देखकर हम जन्मवर्ष के बहुत नजदीक पहुँच सकते हैं, सूर्य को देखकर जन्म के महीना का भी पता चल जायेगा, तिथि और वार से से हम अंग्रेजी डेट पर और लग्न से हम अंदाजन जन्मसमय तक पहुँच सकते हैं। 



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सुशांत सिंह राजपूत का चन्द्रमा और अंतरिक्ष से प्रेम

 sushant ek soch

 सुशांत सिंह राजपूत का चन्द्रमा और अंतरिक्ष से प्रेम

जब भी हमारे पास जन्मसमय  नहीं होता  है, हमें किसी का ज्योतिषीय आकलन करना होता है तो लग्नकुंडली के अभाव में जन्मतिथि से बनाई गई चंद्र कुंडली और सूर्यकुंडली ही हमारे पास विकल्प होता है, क्योंकि इन दोनों के लिए हमें जन्मसमय की आवश्यकता नहीं होती है। बॉलीवुड के दिवंगत सुपरस्टार सुशांत सिंह राजपूत का जन्मसमय न मिलने पर हमने उनकी कुंडली सूर्य और चंद्र का आधार लेकर बनायीं। 
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वृष राशि होने के कारण इनकी चंद्र कुंडली यह रही। हमने अपने अध्ययन में पाया है कि चंद्रकुंडली में अधिकांश ग्रहों के दूर रहने का अर्थ होता है, उन मुद्दों का मन के लायक न होना, इस कारण किसी न किसी बात से उनके भी मन को तकलीफ होती रही। 

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सूर्यकुंडली में लग्न में जितने अधिक सकारात्मक ग्रह होते है, जातक की व्यक्तित्व उतना ही मजबूत होता है, इनकी कुंडली में हमें 3 सकारात्मक ग्रह देखने को मिले। हमारे जीवन ग्राफ के लिए जन्म समय की आवश्यकता नहीं है, यह सूर्यकुंडली के आधार पर ही खिंचा जा सकता है, यह रहा सुशांत सिंह राजपूत का जीवन ग्राफ। 

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इस जीवन ग्राफ में आप देख रहे होंगे कि 27 की उम्र के बाद से ही ये महत्वपूर्ण स्थिति में लेकिन दवाब में थे। आगे की पोस्ट में यह जानकारी आप सबों को मिलेगी कि 'गत्यात्मक ज्योतिष' अष्टमी का चंद्र को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है और इनका जन्म अष्टमी के बहुत निकट दशमी को हुआ। सुशांत सिंह जी की सूर्य कुंडली में चंद्र की स्थिति पाँचवे भाव में है , जिनके कारण इनके दिल दिमाग भावुक था और चंद्र और अंतरिक्ष से काफी लगाव था। 

Top-end Meade LX-600 टेलिस्कोप के मालिक, सुशांत सिंह राजपूत का चन्द्रमा और अंतरिक्ष से प्रेम किसी से छुपा नहीं है। सोशल मीडिया अकाउंट पर वे स्पेस , चंद्रमा की तस्वीर , अपने अंतरिक्ष प्रेम से सम्बंधित पोस्ट अक्सर शेयर किया करते थे। उन्होंने चांद के Mare Moscoviense की Sea of Muscovy में लगभग 1.85 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति को खरीद रखा था।  अपने इंस्टाग्राम पर अपनी प्रॉपर्टी की तस्वीर भी शेयर की थी .

'चंदा मामा दूर के' फिल्म में लीड रोल निभाने के लिए भी सुशांत को सिलेक्ट किया गया था.  2017 में सुशांत इस फिल्म को लेकर NASA भी गए थे. यह उनके ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक था।   फिल्म के निर्माता संजय पूरन सिंह चौहान ने पिछले साल ही यह बताया था कि इस फिल्म में सुशांत का विकल्प मिलना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने तय किया है कि इस फिल्म को वह जरूर बनाएंगे और सुशांत को श्रद्धांजलि के रूप में अर्पित करेंगे। फिल्म 2024 में रिलीज हो सकती है। 

सुशांत सिंह राजपूत के प्रशंसको के लिए एक और नयी खबर है।  बहुत गर्व की बात है कि सुशांत सिंह राजपूत के चाँद प्रेम को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने जा रहा है। अमेरिका की लूना सोसायटी इंटरनेशनल (Luna Society International) ने उनके जन्मदिन को अब 'सुशांत मून' (Sushant Moon) के नाम से मनाने का निर्णय लिया है।  लूना सोसायटी इंटरनेशनल ने ऑफिशियल साइट पर ये घोषणा की है कि 21 जनवरी 2023 को उनकी 37वीं जयंती को पहली बार 'सुशांत मून' के रूप में मनाया जाएगा। लूना सोसायटी इंटरनेशनल का यह भी विश्वास है कि आगे चलकर 'सुशांत मून' एक ऐतिहासिक और वार्षिक इवेंट बन जाएगा। ”




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