सामयिक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सामयिक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

२१ अगस्त २०१६ का पूर्ण सूर्य ग्रहण


सूर्य ग्रहण तब होता है, जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है। सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है। जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को अपनी छाया में ले लेता तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं। ऐसी स्थिति में सूर्य की किरणें धरती तक नहीं पहुंच पाती हैं और धरती पर अंधेरा छा जाता है। दूसरा ग्रहण है आंशिक सूर्य ग्रहण। इसमें चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ढक लेता है। इस दौरान धरती के कुछ हिस्सों पर सूर्य नजर नहीं आता। दो सप्ताह पहले रक्षाबंधन के दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण हुआ था। चंद्र ग्रहण के दो सप्ताह बाद सूर्य ग्रहण होता है।

साल 2017 का दूसरा सूर्यग्रहण , जो पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, 21 अगस्त को दिखाई देगा। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण रात में 9.15 मिनट से शुरु होगा और रात में 2.34 मिनट पर खत्म होगा। यह ग्रहण यूरोप, उत्तर/पूर्व एशिया, उत्तर/पश्चिम अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका में पश्चिम, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत, अटलांटिक, आर्कटिक की ज्यादातर हिस्सों में दिखेगा. 99 सालों बाद अमेरिकी महाद्वीप में पूर्ण सूर्यग्रहण होने जा रहा है। अमेरिका में सुबह 10.15 मिनट से सूर्यग्रहण ऑरेगन के तट से दिखने लगेगा और दक्षिण कैरोलीना के तट पर दोपहर 2.50 बजे खत्म होगा. उत्तरी अमेरिका के सभी हिस्से में आंशिक सूर्यग्रहण देखा जा सकेगा।

पूरे विश्व में लाखों लोग सूर्य ग्रहण देखेंगे। जहां सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, वहां लोग घर से बाहर निकलकर देख सकते हैं। जिन क्षेत्रों में सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा, वहां के लोग लाइव टेलिकास्ट के जरिए इसका दीदार करेंगे । इसके लिए कई एजेंसियां लाइव टेलिकास्ट करेंगी। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी इसका लाइव टेलिकास्ट करेगी। नासा 12 जगहों से सूर्य ग्रहण की कवरेज करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक एजेंसी रिसर्च प्लेन, गुब्बारे और सैटेलाइट के जरिए कवरेज करेगी। बताया जा रहा है कि नासा सूर्य ग्रहण का सीधा प्रसारण अमेरिकी समय के मुताबिक दोपहर में 12 बजे शुरू करेगा। जब ग्रहण लगेगा उस वक्त भारत में रात होगी। ऐसे में भारत में लोग सूर्य ग्रहण नहीं देख पाएंगे। भारत के लिए यह अमावस सोमवती होने के कारन और महत्वपूर्ण हो जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण के बाद पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान कर देवता की आराधना करनी चाहिए। स्नान के बाद गरीबों और ब्राह्मणों को दान देने की परंपरा है। हिन्दू मान्यता के अनुसार, सूर्यग्रहण में ग्रहण के दौरान कुछ भी खाने की अनुमति नहीं है, यह मान्यता भी प्रचलित है कि गर्भवती स्त्री को सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण नहीं देखना चाहिए. क्योंकि माना जाता है कि उसके दुष्प्रभाव से शिशु को प्रभावित कर सकता है। सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण के दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत को बिल्कुल मना किया जाता है. मान्यता है कि इस दौरान शुरु किया गया काम अच्छा परिणाम नहीं देता है। पर वैज्ञानिक मान्यता है कि सूर्यग्रहण के दौरान पृथ्वी के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव प्रभावित होते हैं. इसलिए यह अवधि ऋणात्मक मानी जाती है। इसके अलावा सूर्य से अल्ट्रावॉयलेट किरणें निकलती हैं जो एंजाइम सिस्टम को प्रभावित करती हैं, इसलिए सूर्यग्रहण के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। 

ग्रहण के दौरान दो-चार घंटों के लिए पृथ्वी में सौर ऊर्जा के प्रवाह में बाधा  , खासकर जिस क्षेत्र में ग्रहण का प्रभाव अधिक पहुंचे , उस क्षेत्र के लिए कुछ ऋणात्मक प्रभाव डालने वाला हो सकता है , पर इसका ज्योतिषीय प्रभाव भी पड़ता है , 'गत्यात्मक ज्योतिष' इसकी पुष्टि नहीं करता। 

करवा चौथ का चांद रोहिणी नक्षत्र में ....

आसमान में पूर्वी क्षितीज पर सूर्योदय के दो घंटे पहले तथा पश्चिमी क्षितिज पर दो घंटे बाद दिखाई देने वाले शुक्र ग्रह को आप सभी ने अवश्‍य देखा होगा। इसकी चमक एवं शान अन्य ग्रहो से बिल्‍कुल अलग व निराली होती है। ज्योतिष में शुक्र को आकर्षण , प्रेम , विवाह और दाम्‍पत्‍य जीवन का प्रतीक ग्रह माना जाता है। शुक्र ग्रह मजबूत होने से व्यक्ति आकर्षक, सुंदर, मनमोहक, सुखी रहता है। साथ ही प्रेम-संबंध मजबूत और दाम्पत्य-जीवन सुखद होता है। शुक्र की दो राशियां वृष और तुला है।

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को शुक्र ग्रह के दोनो राशियों में से तुला में सूर्य तथा वृष में चंद्रमा होता है, जो क्रमश: आत्‍मा और मन का प्रतीक ग्रह है। वृष राशि में ही चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का वास है। क्‍या संयोग है कि हिंदू धर्म के अनुसार इस तिथि को सुहागिन और अविवाहित स्त्रियों के द्वारा करवा चौथ का लोकप्रिय निर्जला व्रत रखा जाता है। पूजा की विधि देशभर में भिन्‍न भिन्‍न हो सकती है, कथाएं भी अलग अलग हो सकती हैं, पर ग्रहों की स्थिति को देखते हुए माना जा सकता है कि सबका लक्ष्‍य एक है , अपनी मन और आत्‍मा को शुद्ध कर दाम्‍पत्‍य जीवन को अधिक से अधिक मजबूती देने की खुद की तपस्‍या , बुजुर्गों का आशीर्वाद और ईश्‍वर से प्रार्थना, चंद्रोदय के बाद चंद्र को अर्घ्‍य देने के बाद ही पति के हाथो अन्‍न जल ग्रहण कर व्रत तोडा जाता है।

इस वर्ष 18 अक्तूबर को रात 10 बजकर 48 मिनट पर चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो रहा है। यह 19 अक्तूबर को शाम सात बजकर 32 मिनट तक रहेगी। दोनो ही दिन चंद्रोदय चतुर्थी तिथि के अंतर्गत नहीं हो पाएगा, क्‍योंकि 19 अक्तूबर, बुधवार को चंद्रमा का उदय रात 9 बजे के आसपास होगा, समय में स्‍थान के हिसाब से कुछ परिवर्तन होते हैं। पर पूजा के वक्‍त शाम 5:43 से 6:59 तक चतुर्थी तिथि होगी , साथ ही पूजन के वक्‍त वृष लग्‍न का उदय होगा , जिसमें रोहिणी नक्षत्र का चंद्रमा मौजूद होगा , इसलिए यह त्‍यौहार 19 अक्‍तूबर को मनाया जा रहा है। 19 अक्‍तूबर को एक ग्रह मंगल को छोडकर सभी ग्रहों की स्थिति बहुत अच्‍छी है , इसलिए आनंदमय वातावरण में सारे कार्यक्रम संपन्‍न होंगे। 


पर मंगल की कमजोर स्थिति मेष और वृश्चिक लग्‍न वालों के स्‍वास्‍थ्‍य की, तुला और मीन लग्‍न वालों के धन की , कन्‍या और कुभ लग्‍न वालों के भाई-बंधु की , सिंह और मकर लग्‍नवाले के किसी सामान या संपत्ति की , कर्क और धनु लग्‍नवालों के पढाई लिखाई या संतान पक्ष की , मिथुन और वृश्चिक लग्‍नवालों के किसी झंझट की , मेष और कन्‍या लग्‍नवालों के रूटीन की, सिंह और मीन लग्‍नवालों के भाग्‍य की, कर्क और कुंभ लग्‍नवालों की प्रतिष्‍ठा की, मिथुन और मकर लग्‍न वालों के लाभ की , वृश और धनु लग्‍न वालों के खर्च की कुछ समस्‍या उपस्थित कर सकती है। पर मंगल की गडबड स्थिति के कारण प्रेम और दाम्‍पत्‍य के इस त्‍यौहार करवा चौथ में आपसी संबंध या प्रगाढता में थोडी कमी या दूरी महसूस करने वाले पति पत्‍नी वृष और तुला लग्‍न वाले पति-पत्‍नी होंगे।

काश आई पी एस अफसर राहूल शर्मा को भी किसी का सहारा मिला होता !!!!

ज्‍योतिष के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक के अध्‍ययन के बावजूद प्रतिदिन कुछ ग्रहों के आम जनजीवन पर पडनेवाले नए नए रहस्‍यों की जानकारी के मोह ने मुझे अभी तक ज्‍योतिष को प्रोफेशनल ढंग से नहीं लेने दिया , पर यत्र तत्र गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष से संबंधित लेखों के प्रकाशित होते रहने के कारण मुझसे सलाह के लिए मिलने या फोन करने वालों की कमी भी नहीं। एक डॉक्‍टर और एडवोकेट की तरह ही मुझसे संपर्क करनेवाले भी किसी न किसी समस्‍या से जूझ रहे होते हें।  ज्‍योतिष के व्‍यावहारिक स्‍वरूप को मजबूत बनाने के लिए लोगों के समक्ष उपस्थित होने वाली समस्‍याओं को समझना और विभिन्‍न ग्रहों के साथ उनका सहसंबंध स्‍थापित करते हुए शोध को आगे बढाना भी मेरे लिए आवश्‍यक है , इसलिए नई कुंडहलयों के साथ लोगों से मिलना आवश्‍यक भी है। इसलिए ग्रहों के प्रभाव की अभी तक की जानकारी के आधार पर समय निकालकर मैं अधिकांश लोगों को उनकी ग्रहस्थिति के आधार पर ज्‍योतिषीय परामर्श अवश्‍य दिया करती हूं।

वैसे तो हर कोई को जन्‍म लेने के बाद ही एक सा वातावरण नहीं मिलता है , कोई अमीर तो कोई गरीब या भिखारी के घर भी , कोई सुंदर और स्‍वस्‍थ , तो कोई कुरूप और अस्‍वस्‍थ या अपंग भी , कोई तेज दिमाग का , तो कोई कमजोर दिमाग और कोई  तो कोई मानसिक बीमारी के साथ जन्‍म लेता है। पूरे जीवन में भी कोई किसी संदर्भ में बडी तो कोई छोटी सफलता या असफलता से जूझता रहता है , पर इसे लेकर जनसामान्‍य कुछ खास परेशानी महसूस नहीं करता, क्‍यूंकि अपनी अपनी परिस्थिति के हिसाब से ही जीने की उसकी आदत बनी होती है ।  लेकिन बिना किसी प्रकार की गडबडी के अचानक किसी प्रकार की असामान्‍य परिस्थिति उनके जीवन में आ जाती है , तो लोगों को किसी अज्ञात शक्ति के प्रति आकर्षित होना स्‍वाभाविक होता है और इसलिए वे ज्‍योतिषी या किसी अन्‍य जानकार के पास जाते हैं।

हम सभी जानते हैं कि जहां जीवन है , वहां बदलाव है । प्रकृति में दिन है तो रात भी , अंधेरा है तो उजाला भी , वसंत है तो पतझड भी। पर अपने जीवन में सिर्फ सुख ही सुख की कामना करते हैं। कष्‍ट आते ही हमारी बेचैनी बढ जाती है , जबकि सुख का समय हमे जीवन में किताबी ज्ञान के सिवा कुछ नहीं देता , व्‍यवहारिक ज्ञान हम कष्‍ट के समय ही प्राप्‍त करते हैं। अपने पास आनेवाले अधिकांश लोगों को मैं अनुकूल समय का इंतजार करने की ही सलाह देती हूं ,  'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से लोगों के जीवन में आनेवाली समस्‍याएं भी दो प्रकार की होती हैं , पहली उनके जन्‍म कालीन ग्रहों के हिसाब से आने वाली , यह सामान्‍य ढंग होती हैं , इसलिए कुछ दिनों , महीनों या वर्षों का इंतजार करना लोगों के लिए कठिन नहीं होता है। प्रकृति ने उस परिस्थिति के हिसाब से जीने के लिए उसके बॉडी की प्राग्रामिंग कर दी होती है।

पर समय समय पर आसमान में अलग अलग स्थिति और शक्ति के हिसाब से चल रहे ग्रहों के कारण कोई समस्‍या उपस्थित होती है , तो यह विशेष ढंग की होती है , कभी दो चार दिनों , तो कभी दो चार महीनों या कई कई वर्षों तक आनेवाली ये समस्‍या लोगों के व्‍यक्त्त्वि के बिल्‍कुल प्रतिकूल वातावरण तैयार करती है , इसे झेल पाना लोगों के लिए बहुत ही कठिन हो जाता है। इसलिए लोग तुरंत ही उससे छुटकारा प्राप्‍त करना चाहते हैं , पर उनके पास कोई साधन नहीं होता है। इस वक्‍त कितना भी हाथ पांव चलाएं , कोई फायदा नहीं दिखता , आगे भी उन्‍हें अंधेरा ही अंधेरा नजर आने लगता है ,  वैसी हालत में निराश शारीरिक या मानसिक तौर पर कमजोर हो जाते हैं , इसी वक्‍त आत्‍म हत्‍या करने तक की सोंच लेते हैं। 

पूरी दुनिया जानती है कि आज के प्रतियोगिता के दौर में सफल और असफल लोगों के मध्‍य भाग्‍य या संयोग की भूमिका कम नहीं , फिर भी आज समाज की जीवन शैली इतनी बिगड गयी है कि इन्‍हें इस दौरान कहीं से भी ढाढस के दो शब्‍द नहीं मिलते , दुनिया सफल लोगों के गुणगान में लगी होती है , असफल लोगों को जगह मिलना मुश्किल होता है। अपने पास आनेवाले ऐसे परेशान लोगों की नियमित काउंसलिंग करके मैं उन्‍हें गुमराह होने से बचाती हूं , अनेक उदाहरण हैं मेरे पास। इसमें से ही एक की चर्चा कल ललित शर्मा जी ने अपने पोस्‍ट में की थी , जिसमें वे भी शामिल थे। हमने अपने अध्‍ययन में पाया है कि आसमान में चल रहे प्रतिकूल ग्रह की खास स्थिति से दूर होते ही पुन: कोई न कोई उपाय निकलता है और वातावरण पूर्ववत हो जाता है। जो भी समस्‍याएं चल रही होती हैं , उनसे निजात मिल जाती हैं , भले ही इस दौरान उन्‍हें शारीरिक या मानसिक कष्‍ट के दौर से गुजरना पडा हो। इसलिए ऐसे समय में उन्‍हे सहारा देने  की आवश्‍यकता होती है , काश आई पी एस अफसर राहूल शर्मा को भी किसी का सहारा मिला होता !!!!

वेलेण्‍टाइन डे



रूमानित भरा मौसम होता है वसंत का

वसंत के मौसम में रूमानियत तो होती ही है ,भारतीय संस्‍कृति मे भी इस महीने प्‍यार के अनेक रंग बिखेरता होली का त्‍यौहार मनाए जाने की परंपरा रही है। इसलिए इस महीने प्रेम की महिमा से इंकार नहीं किया जा सकता है , यह अलग बात है कि पहले कम उम्र में विवाह होते थे , तो विवाह के बाद इसका नशा चढता था और आज कैरियर को बनाने के चक्‍कर में लगे विवाह में देर करनेवाले युवाओं युवतियों पर इसका नशा पहले ही छाने लगा है। पर प्रेम संबंध और विवाह दोनों को अलग अलग नहीं रखा जा सकता। जब किसी लड़का और लड़की के बीच प्रेम होता है तो वे साथ साथ जीवन बीताने की ख्वाहिश रखते हैं और विवाह करना चाहते हैं। पश्चिमी सभ्‍यता की देखा देखी भारतवर्ष में भी युवा प्रेमी प्रेमिकाएं द्वारा 14 फरवरी को वेलेण्‍टाइन डे मनाने की परंपरा चल पडी है। वेलेण्‍टाइन डे मनाने के लिए जितनी तैयारी ये करते हैं , उससे कम तैयारी इसका विरोध करनेवाले नहीं करते। भारतीय सभ्‍यता और संसकृति की रक्षा करने के नाम पे युवकों युवतियों द्वारा इस परंपरा को मनाए जाने का का प्रतिवर्ष पुरजोर विरोध किया जाता रहा है। इसके बावजूद पार्कों , पिकनिक स्‍थलों और अन्‍य सार्वजनिक स्‍थलों पर इनकी भीड जुटती है। 

मेष लग्‍नवालों के लिए सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण ..

प्रतिवर्ष वेलेण्‍टाइन डे के दिन ग्रहों की स्थिति भिन्‍न भिन्‍न होती है। इस साल वेलेंटाइन डे पर चंद्रमा की स्थिति बहुत ही मजबूत है , चंद्रमा मन को प्रभावित करता है , इसलिए लोगों का उत्‍साह बना रहेगा। चंद्रमा के साथ शनि की ज्‍योतिष के हिसाब से शुक्र , जो प्रेम का ग्रह है , की स्थिति भी आज बहुत ही मजबूत बनी हुई है। इसलिए इस त्‍योहार को मनाने का पूरा जोश बना रहेगा। चंद्रमा की मजबूती के कारण के कारण मकर लग्‍नवाले , और शुक्र की मजबूती के कारण मेष और वृश्चिक लग्‍नवाले अनुकूल माहौल उपस्थित पाएंगे। चंद्रमा के साथ शनि की स्थिति कर्क और सिंह लग्‍नवालों को भी सुखद कार्यक्रमों से जुडाव बनाएंगी। कुल मिलाकर यह दिन मेष लग्‍नवाले प्रे‍मी प्रेमिकाओं के लिए सर्वाधिक तथा कर्क , सिंह , वृश्चिक और मकर लग्‍न के प्रेमी प्रेमिकाओं के लिए खासे महत्‍व का होगा, अन्‍य लग्‍नवालों के लिए औसत हो सकता है। खासकर 11 बजे से 2 बजे दिन और 10 बजे से 1 बजे रात्रि तक का समय खास मनोनुकूल हो सकता है।

16 वर्ष से 19 वर्ष की उम्र के नौजवान सावधान रहें

पर जहां चंद्रमा और शुक्र की स्थिति माहौल को सुखात्‍मक बनाए रखेगी , वहीं चंद्रमा के साथ वक्री शनि की स्थिति कुछ गडबडी उपस्थित कर सकती है। शनि के कारण बहुत सारे लोगों के साथ ही साथ 16 वर्ष से 19 वर्ष की उम्र तक के टीन एजर किशोरों को खासकर बहुत सावधानी बनाए रखने की आवश्‍यकता है। 7 बजे से 11 बजे दिन और 10 बजे से 1 बजे रात्रि तक का समय उनका विशेष गडबड रह सकता है। इस वक्‍त किसी भी प्रकार की विपत्ति में ये फंस सकते हैं। गोचर में मंगल की स्थिति भी बहुत कमजोर चल रही है , जो युवा वर्ग को बाधा उपस्थित करने के लिए काफी है , खासकर 6 बजे से 9 बजे तक का समय उनके लिए ठीक नहीं। वृष और तुला लग्‍नवाले युवकों युवतियों के समक्ष भी बहुत कठिन माहौल बनेगा। हां , यह वेलेण्‍टाइन दिवस विवाहित लोगों के लिए सुखद होगा , सिर्फ मिथुन और कन्‍या लग्‍न वालों के लिए कुछ परेशानी उपस्थित हो सकती है।